Question
Easy

“किं वक्ष्यतीति हृदयं परिशङ्कितं मे ; कन्या मयाप्यहृता न च रक्षिता सा। भाग्यैश्चलैर्महदवाप्तगुणोपघातः ; पुत्रः पितुर्जनितरोष इवास्मि भीतः।। स्वप्नवासवदत्ते कस्य कथनमिदम् -

1
वासवदत्तायाः
2
पद्मावत्याः
3
उदयनस्य
4
यौगन्धरायणस्य
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: HTET
Level/Paper: Level 2
Chapter: महाकवयः
Topic: कालिदासः
Correct Answer
Option C
Explanation

यह संस्कृत श्लोक महाकवि भास द्वारा रचित प्रसिद्ध नाटक 'स्वप्नवासवदत्तम्' से उद्धृत है। प्रश्न का अर्थ: प्रस्तुत प्रश्न में एक श्लोक दिया गया है और पूछा गया है कि यह कथन 'स्वप्नवासवदत्तम्' नाटक में किसका है। श्लोक का अर्थ इस प्रकार है: "मेरा हृदय इस बात से अत्यधिक आशंकित है कि वे (वासवदत्ता के माता-पिता) क्या कहेंगे; मैंने कन्या (वासवदत्ता) का हरण तो किया, किंतु उसकी रक्षा नहीं कर पाया।…Read More

- HTET Level 2 | Clear Cutoff