Question
Easy
आचार्य विश्वनाथ प्रदत्त 'काव्यदोष' की याथातथ्य परिभाषा है :
1
महान् निर्दोषिता गुणाः।
2
रसापकर्षका दोषाः।
3
विपर्यस्तागुणाः काव्येषु कीर्तिता।
4
गुण विपर्यथात्मनो दोषाः।
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: HTET
Level/Paper: Level 3
Chapter: काव्यशास्त्र
Topic: काव्य के तत्व
Correct Answer
Option B
Explanation
आचार्य विश्वनाथ द्वारा प्रदत्त 'काव्यदोष' की याथातथ्य परिभाषा "रसापकर्षका दोषाः" है, क्योंकि: * "रसापकर्षका दोषाः" का अर्थ है "दोष जो रस को कम करते हैं"। आचार्य विश्वनाथ ने अपने ग्रंथ 'साहित्य दर्पण' में काव्यदोषों को इसी प्रकार परिभाषित किया है। उनके अनुसार, काव्यदोष वे तत्व हैं जो रस की अनुभूति में बाधा डालते हैं या उसे कम करते हैं। इसलिए, यह परिभाषा सीधे तौर पर आचार्य विश्वनाथ के काव्यदोषों के…Read More
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