Question
Easy

शृंगार रस विषयक कौन-सा कथन गलत है ?

1
भरतमुनि इसे उज्ज्वल, पवित्र और उत्तम मानकर इसका रसराजत्व सिद्ध करते हैं।
2
इसके उद्दीपक विभावों के अन्तर्गत मानव, मानवेतर प्रकृति, देवता, जड़, चेतन सभी आ जाते हैं।
3
नायक-नायिका के संबंधों की कल्पना के आधार पर इसके दो भेद किए गए हैं।
4
इसमें समस्त सात्विक भावों और संचारी भावों का समावेश हो जाता है।
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: HTET
Level/Paper: Level 3
Chapter: काव्यशास्त्र
Topic: रस
Correct Answer
Option D
Explanation

शृंगार रस विषयक कथन 4 गलत है, क्योंकि इसमें समस्त सात्विक भावों और संचारी भावों का समावेश नहीं होता। Option 4 सही क्यों है: शृंगार रस में सभी सात्विक और संचारी भावों का समावेश होना आवश्यक नहीं है। कुछ सात्विक भाव जैसे कि रोमांच, स्वेद (पसीना), कम्प (काँपना) आदि शृंगार रस में स्वाभाविक रूप से पाए जा सकते हैं, लेकिन सभी सात्विक भाव (जैसे स्तम्भ, वैवर्ण्य, अश्रु, प्रलय) और सभी…Read More

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