निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नो में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। दिन भर हमारा प्राण गहरे से बहना चाहिए। यदि पेट के नीचे कंद स्थान से प्राण का बहना सुनिश्चित कर लिया जाए तो यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है। लेकिन अधिकतर हमारा प्राण छाती से शुरू करके छोटी सी यात्रा करके रह जाता है। उसका गहरे से बहना नहीं हो पाता। यदि हम दिन में जब भी याद आए, तभी अपने प्राण को धीमा और गहरा भरना शुरू कर दें तो खुद को ऊर्जावान, प्राणवान, शक्तिवान और शांत स्वभाव का अनुभव करने लगेंगे। हमारे भीतर धैर्य और रचनात्मकता बढ़ने लगेगी। मन का तनाव समाप्त हो जाएगा। भय, घबराहट से मुक्ति मिल जाएगी। साथ ही यह अभ्यास ध्यान की गहराइयों में ले जाने में भी सहायक होगा। प्राण _ से बहना चाहिए ।
प्रश्न के अनुसार, गद्यांश में प्राण के बहने के तरीके पर चर्चा की गई है। सही उत्तर विकल्प 4 "मंद-मंद रूप" है। आइए इसे विस्तार से समझें: 1. विकल्प 4: मंद-मंद रूप - गद्यांश में कहा गया है कि प्राण का गहरे से बहना हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। "मंद-मंद रूप" का अर्थ है धीरे-धीरे और स्थिरता से बहना, जो गहरे और नियंत्रित श्वास को दर्शाता है। यह…Read More
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