निम्लिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनिए : विविध प्रांत है अपनी-अपनी भाषा के आभिमानी हम, पर इन सबसे पहले दुनियावालो हिन्दुस्तानी हम। रहन-सहन में, खान-पान में, भिन्न भले ही हों कितने, इस मिट्टी को देते आए, मिल-जुलकर कुर्बानी हम। सदियों से कुचले लाखों तूफान हमने पद तल से, आज झुके कुछ टकराकर तो कल लगते फिर जागे से। अंडमन से कश्मीर भले ही दूर दिखाई दे कितना, पर हर प्रांत जुड़ा है अपना अगणित कोमल धागों से। जिस ओर बढ़ाए पग हमने, हो गई उधर भू नव मंगल। आज़ाद वतन के बाशिंदे, हर चरण हमारा है बादल।। समास की दृष्टि से शेष से भिन्न पद है -
समास की दृष्टि से शेष से भिन्न पद "अपनी-अपनी" है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं: 1. अपनी-अपनी: यह पद द्वंद्व समास का उदाहरण है। द्वंद्व समास में दोनों पद समान रूप से महत्वपूर्ण होते हैं और उनका अर्थ 'और' के माध्यम से जोड़ा जाता है। यहाँ 'अपनी-अपनी' का अर्थ है 'अपनी और अपनी', जो द्वंद्व समास को दर्शाता है। 2. रहन-सहन: यह पद द्वंद्व समास का उदाहरण है। इसमें…Read More
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