HTET Exam - Level 1 Prt - Rachna Kashal
HTET exam Level 1 Prt preparation with Clear Cutoff
by Clear Cutoff
Showing 9 of 9 questions
Question 41
निर्देश : प्रश्न संख्या के उत्तर दिए गए गद्यांश के आधार पर दीजिए :
भारत के नैतिक और बौद्धिक विकास के कार्य में अँगरेज़ी को आवश्यकता से अधिक महत्त्व देना व्यर्थ है। उसका ज़रूरत से ज़्यादा भरोसा करना भी अनावश्यक है। भारतीयों की शिक्षा के क्रम में अँगरेज़ी केवल विषय और विचार की संवाहिका मात्र हो सकती है, वह हमारी सांस्कृतिक शिक्षा का समुचित माध्यम नहीं बन सकती है। जिस भाषा के माध्यम से जनता को शिक्षित किया जा सकता है, वह भाषा जनता की मातृभाषा ही हो सकती है। अँगरेज़ी नहीं। संस्कृत को मैं उस महान् भांडार के रूप में देखता हूँ, जिससे आधुनिक भाषाएँ शक्ति और सौंदर्य ग्रहण कर पुष्पित-पल्लवित हो रही हैं।
किस भाषा से आधुनिक भाषाएँ शक्ति एवं सौंदर्य को ग्रहण करती हैं ?
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Question 42
निर्देश : प्रश्न संख्या के उत्तर दिए गए गद्यांश के आधार पर दीजिए :
भारत के नैतिक और बौद्धिक विकास के कार्य में अँगरेज़ी को आवश्यकता से अधिक महत्त्व देना व्यर्थ है। उसका ज़रूरत से ज़्यादा भरोसा करना भी अनावश्यक है। भारतीयों की शिक्षा के क्रम में अँगरेज़ी केवल विषय और विचार की संवाहिका मात्र हो सकती है, वह हमारी सांस्कृतिक शिक्षा का समुचित माध्यम नहीं बन सकती है। जिस भाषा के माध्यम से जनता को शिक्षित किया जा सकता है, वह भाषा जनता की मातृभाषा ही हो सकती है। अँगरेज़ी नहीं। संस्कृत को मैं उस महान् भांडार के रूप में देखता हूँ, जिससे आधुनिक भाषाएँ शक्ति और सौंदर्य ग्रहण कर पुष्पित-पल्लवित हो रही हैं।
गद्यांश में प्रयुक्त शब्दों की व्याकरणिक विवेचना के संदर्भ में असंगत कथन चुनिए :
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Question 43
हमें इस बात को समझना होगा कि युद्ध की अनुपस्थिति ही शांति की परिभाषा नहीं है। बुद्ध ने जिस शांतिपूर्ण समाज की परिकल्पना की थी, उसमें समानता का वह संदेश भी शामिल था, जो हमें इस बात का अहसास कराता है कि मनुष्य को मनुष्य से पृथक् दिखाने का हर प्रयास मनुष्यता का शत्रु है। ऐसे प्रत्येक प्रयास को विफल बनाना मनुष्योचित तो है, एक शर्त भी है मनुष्य के रूप में जीने की। हमारी चिंता यह होनी चाहिए कि हमें स्वयं को मनुष्य कैसे बनाएँ एवं कैसे मनुष्य बनाए रखें। मनुष्य बनने का अर्थ है - अपने भीतर दूसरे की पीड़ा को समझने का अहसास जगाना, अपने भीतर करुणा का वह भाव जगाना, जो हमें दूसरे से जोड़ता है। छोटे-छोटे पुल बनाने होंगे हमें दूसरे से जुड़ने के लिए - करुणा का पुल, मैत्री का पुल, समानता का पुल, विषमता मिटाने वाला पुल ......। ऐसा समझकर ही हम मानवोचित आचरण का मंत्र अपना सकते हैं, प्रबुद्ध बन सकते हैं।
लेखक के अनुसार शांति की परिभाषा नहीं है :
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Question 44
छिप-छिप अश्रु बहाने वालों ! मोती व्यर्थ बहाने वालों !
कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।'
कविता के कवि बताएँ :
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Question 45
कवि बच्चन ने 'अग्नि-पथ' शब्द का प्रयोग किसके प्रतीक स्वरूप किया है ?
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Question 46
"कैसे कहूँ कि मनुष्यता एकदम समाप्त हो गई ! कैसे कहूँ कि लोगों में दया-माया रह ही नहीं गई। जीवन में जाने कितनी ऐसी घटनाएँ हुई हैं जिन्हें मैं भूल नहीं सकता।"
उक्त कथन किस रचनाकार का है ?
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Question 47
“पहले तुम्हें प्रकृति के अक्षर पढ़ने पड़ेंगे, तभी तुम उसकी कहानी उसके पत्थरों और चट्टानों की किताब से पढ़ सकोगी।” प्रस्तुत पंक्तियों के लेखक हैं :
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Question 48
वैष्णव जन तो तेने कहिए, जे पीर पराई जाणी रे' गांधी जी का यह प्रिय भजन किसके द्वारा रचित है ?
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Question 49
हमें इस बात को समझना होगा कि युद्ध की अनुपस्थिति ही शांति की परिभाषा नहीं है। बुद्ध ने जिस शांतिपूर्ण समाज की परिकल्पना की थी, उसमें समानता का वह संदेश भी शामिल था, जो हमें इस बात का अहसास कराता है कि मनुष्य को मनुष्य से पृथक् दिखाने का हर प्रयास मनुष्यता का शत्रु है। ऐसे प्रत्येक प्रयास को विफल बनाना मनुष्योचित तो है, एक शर्त भी है मनुष्य के रूप में जीने की। हमारी चिंता यह होनी चाहिए कि हमें स्वयं को मनुष्य कैसे बनाएँ एवं कैसे मनुष्य बनाए रखें। मनुष्य बनने का अर्थ है - अपने भीतर दूसरे की पीड़ा को समझने का अहसास जगाना, अपने भीतर करुणा का वह भाव जगाना, जो हमें दूसरे से जोड़ता है। छोटे-छोटे पुल बनाने होंगे हमें दूसरे से जुड़ने के लिए - करुणा का पुल, मैत्री का पुल, समानता का पुल, विषमता मिटाने वाला पुल ......। ऐसा समझकर ही हम मानवोचित आचरण का मंत्र अपना सकते हैं, प्रबुद्ध बन सकते हैं।
लेखक के अनुसार मनुष्य बनने का क्या अर्थ है ?
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