HTET Exam - Level 1 Prt - Samas Evam Muhavare
HTET exam Level 1 Prt preparation with Clear Cutoff
by Clear Cutoff
Showing 20 of 20 questions
Question 41
सामासिक पदों के घटकों को अलग करने की रीति को कहते हैं :
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Answer & Explanation
सामासिक पदों के घटकों को अलग करने की रीति को "विग्रह" कहते हैं। यह प्रक्रिया उन शब्दों को उनके मूल घटकों में विभाजित करती है जो समास के रूप में जुड़े होते हैं। उदाहरण के लिए, "राजपुत्र" का विग्रह "राजा का पुत्र" होता है।
अब आइए देखते हैं कि अन्य विकल्प क्यों सही नहीं हैं:
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समास: समास वह प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक शब्द मिलकर एक नया शब्द बनाते हैं। यह विपरीत प्रक्रिया है, जहां घटकों को जोड़कर एक नया शब्द बनाया जाता है, जबकि विग्रह में उन घटकों को अलग किया जाता है।
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निग्रह: निग्रह का अर्थ होता है नियंत्रण या रोक। यह शब्द व्याकरणिक प्रक्रिया के संदर्भ में नहीं आता है और सामासिक पदों के घटकों को अलग करने से संबंधित नहीं है।
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विच्छेद: विच्छेद का अर्थ होता है अलग करना या तोड़ना, लेकिन यह शब्द विशेष रूप से सामासिक पदों के घटकों को अलग करने के लिए प्रयुक्त नहीं होता है। यह एक सामान्य शब्द है जो किसी भी प्रकार की विभाजन प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस प्रकार, "विग्रह" ही वह सही प्रक्रिया है जो सामासिक पदों के घटकों को अलग करने के लिए प्रयुक्त होती है, और इसलिए विकल्प 2 सही उत्तर है।
Question 42
निम्नलिखित में से सही युग्म का चयन कीजिए :
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Answer & Explanation
सही उत्तर विकल्प 1 है: "रसभरा – रस से भरा"। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
- रसभरा – रस से भरा: यह युग्म सही है क्योंकि 'रसभरा' का अर्थ होता है 'रस से भरा हुआ'। यह शब्द उन वस्तुओं या स्थितियों के लिए प्रयोग किया जाता है जो रस से परिपूर्ण होती हैं, जैसे कि एक रसभरा फल। इस प्रकार, यह युग्म सही और सटीक है।
अब अन्य विकल्पों की गलतियों को समझते हैं:
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पतितपावन – पतितों में पावन: 'पतितपावन' का अर्थ होता है 'जो पतितों को पवित्र करता है'। यह शब्द भगवान या किसी पवित्र शक्ति के लिए प्रयोग किया जाता है जो पतितों को पवित्रता प्रदान करती है। इसलिए, 'पतितों में पावन' कहना गलत होगा।
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रसोईघर – रसोई का घर: 'रसोईघर' का अर्थ होता है 'वह स्थान जहाँ खाना पकाया जाता है', न कि 'रसोई का घर'। यह एक विशेष स्थान को दर्शाता है, न कि किसी घर का हिस्सा।
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धनहीन – धन में हीन: 'धनहीन' का अर्थ होता है 'जिसके पास धन नहीं है'। यह किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को दर्शाता है, न कि 'धन में हीन'। 'धन में हीन' कहना सही नहीं होगा क्योंकि यह वाक्यांश सही अर्थ नहीं देता।
इस प्रकार, विकल्प 1 "रसभरा – रस से भरा" सही युग्म है और अन्य विकल्प गलत हैं।
Question 43
समास की दृष्टि से असंगत विकल्प छाँटिए :
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Answer & Explanation
भयभीत – करण तत्पुरुष, समास की दृष्टि से असंगत विकल्प है, क्योंकि 'भयभीत' का समास विग्रह 'भय से भीत' होगा, और इसमें 'से' करण कारक का नहीं, बल्कि अपादान कारक का बोध कराता है (भय से अलग होने का भाव)। इसलिए यह अपादान तत्पुरुष होना चाहिए, न कि करण तत्पुरुष।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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सेठ-साहूकार – समाहार द्वन्द्व: यह विकल्प सही है क्योंकि 'सेठ-साहूकार' दोनों पद मिलकर एक समूह या समाहार का बोध कराते हैं। यह द्वन्द्व समास का एक प्रकार है।
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विद्याहीन – अपादान तत्पुरुष: यह विकल्प सही है क्योंकि 'विद्याहीन' का समास विग्रह 'विद्या से हीन' होगा, और इसमें 'से' अपादान कारक का बोध कराता है (विद्या से अलग होने का भाव)।
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स्वर्गगत – कर्म तत्पुरुष: यह विकल्प सही है क्योंकि 'स्वर्गगत' का समास विग्रह 'स्वर्ग को गत' होगा, और इसमें 'को' कर्म कारक का बोध कराता है।
Question 44
किस विकल्प में अव्ययीभाव समास है ?
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Answer & Explanation
Option 3, "अवसरवंचित," में अव्ययीभाव समास है, क्योंकि इसका विग्रह होता है "अवसर से वंचित।" यहाँ 'अवसर' एक संज्ञा है और 'वंचित' एक विशेषण है। इस पूरे पद का अर्थ 'अवसर के अभाव में' या 'अवसर से रहित' होता है, जो एक अव्यय की तरह कार्य करता है। अव्ययीभाव समास में पहला पद (पूर्व पद) अव्यय होता है और वह पूरे पद को अव्यय बना देता है। "अवसरवंचित" में भी 'अवसर' के अभाव की स्थिति को दर्शाया गया है, जो अव्ययीभाव समास का लक्षण है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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विरोधजनक: यह शब्द विरोध उत्पन्न करने वाला या विरोध पैदा करने वाला अर्थ देता है। इसमें 'विरोध' और 'जनक' दो शब्द हैं और यह तत्पुरुष या कर्मधारय समास का उदाहरण हो सकता है, अव्ययीभाव का नहीं।
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कृपापूर्वक: यह शब्द 'कृपा के साथ' या 'कृपा करते हुए' अर्थ देता है। इसमें 'कृपा' और 'पूर्वक' दो शब्द हैं। 'पूर्वक' एक अव्यय है, लेकिन यह शब्द अव्ययीभाव समास का सटीक उदाहरण नहीं है क्योंकि 'कृपा' संज्ञा है और 'पूर्वक' उसके साथ मिलकर एक क्रियाविशेषण की तरह कार्य कर रहा है। यह अव्ययीभाव समास की तुलना में कर्मधारय या तत्पुरुष समास के अधिक निकट है।
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स्वाधीन: यह शब्द 'स्वयं के अधीन' या 'अपने वश में' अर्थ देता है। यह तत्पुरुष समास का उदाहरण है, जहाँ 'स्व' (अपना) और 'अधीन' (वश में) मिलकर एक नया शब्द बनाते हैं। यह अव्ययीभाव समास नहीं है।
इसलिए, केवल अवसरवंचित ही अव्ययीभाव समास का उदाहरण है, क्योंकि यह 'अवसर के अभाव में' अर्थ देता है और एक अव्यय की तरह कार्य करता है।
Question 45
किस समस्त पद का विग्रह अनुचित है ?
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Answer & Explanation
समस्त पद का विग्रह एक ऐसा प्रक्रिया है जिसमें किसी समस्त शब्द को उसके मूल रूप में विभाजित किया जाता है। दिए गए प्रश्न में हमें यह देखना है कि किस समस्त पद का विग्रह अनुचित है।
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निरामिष - आमिष से रहित:
- "निरामिष" का अर्थ होता है "आमिष से रहित"। यहाँ "निर" का अर्थ है "रहित" और "आमिष" का अर्थ है "मांसाहार"। इस प्रकार, यह विग्रह सही है।
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अतीन्द्रिय - इन्द्रियों के अनुभव से परे:
- "अतीन्द्रिय" का अर्थ होता है "इन्द्रियों के अनुभव से परे"। यहाँ "अति" का अर्थ है "परे" और "इन्द्रिय" का अर्थ है "इन्द्रियाँ"। यह विग्रह भी सही है।
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अत्यावश्यक - आवश्यकता से परे:
- "अत्यावश्यक" का अर्थ होता है "बहुत आवश्यक"। यहाँ "अति" का अर्थ है "बहुत" और "आवश्यक" का अर्थ है "जरूरी"। लेकिन दिए गए विग्रह में "आवश्यकता से परे" कहा गया है, जो कि गलत है। इसलिए, यह विग्रह अनुचित है।
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प्रत्याशा - आशा के बदले की गई आशा:
- "प्रत्याशा" का अर्थ होता है "प्रतीक्षा" या "उम्मीद"। यहाँ "प्रति" का अर्थ है "बदले में" और "आशा" का अर्थ है "उम्मीद"। यह विग्रह सही है।
इस प्रकार, विकल्प 3 "अत्यावश्यक - आवश्यकता से परे" का विग्रह अनुचित है क्योंकि इसका सही अर्थ "बहुत आवश्यक" होता है, न कि "आवश्यकता से परे"। यही कारण है कि विकल्प 3 सही उत्तर है।
Question 46
समास-विग्रह की दृष्टि से कौन-सा विकल्प उचित है ?
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समास-विग्रह की दृष्टि से विकल्प 1 "हथकरघा – हाथों से चलने वाला करघा" सही है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
- हथकरघा – हाथों से चलने वाला करघा:
- "हथकरघा" शब्द का समास-विग्रह "हाथों से चलने वाला करघा" है। यह तत्पुरुष समास का उदाहरण है, जहाँ "हथ" का अर्थ "हाथ" और "करघा" का अर्थ "करघा" है। इस प्रकार, यह शब्द उन करघों को संदर्भित करता है जो हाथों से चलाए जाते हैं। इसलिए, यह विकल्प सही है।
अब अन्य विकल्पों की गलतियों को समझते हैं:
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भुजग - भूमि में जन्म लेने वाला:
- "भुजग" का अर्थ "साँप" होता है, और इसका समास-विग्रह "भुजं गच्छति इति भुजगः" है, जिसका अर्थ है "जो भूमि पर चलता है"। यहाँ "भूमि में जन्म लेने वाला" गलत व्याख्या है।
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देशभक्ति - देश के द्वारा भक्ति:
- "देशभक्ति" का सही समास-विग्रह "देश के प्रति भक्ति" है। "देश के द्वारा भक्ति" गलत है क्योंकि यह भाववाचक तत्पुरुष समास है, जहाँ भक्ति देश के प्रति होती है, न कि देश के द्वारा।
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पशुबलि - पशु के लिए बलि:
- "पशुबलि" का सही समास-विग्रह "पशु की बलि" है। "पशु के लिए बलि" गलत है क्योंकि यहाँ बलि पशु की दी जाती है, न कि पशु के लिए।
इस प्रकार, समास-विग्रह की दृष्टि से विकल्प 1 सही है और अन्य विकल्प गलत हैं।
Question 47
निम्नलिखित में से किस विकल्प के सभी शब्द 'अव्ययी भाव समास' के उदाहरण हैं ?
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Answer & Explanation
अव्ययी भाव समास एक प्रकार का समास होता है जिसमें पहला पद अव्यय होता है और दूसरा पद संज्ञा या विशेषण होता है। इस प्रकार के समास में पहला पद प्रधान होता है और दूसरा पद गौण होता है। अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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बेशक, मृत्युपर्यंत:
- 'बेशक' और 'मृत्युपर्यंत' दोनों ही अव्ययी भाव समास के उदाहरण हैं। 'बेशक' में 'बे' अव्यय है और 'शक' संज्ञा है। इसी प्रकार, 'मृत्युपर्यंत' में 'मृत्यु' संज्ञा है और 'पर्यंत' अव्यय है। इसलिए, यह विकल्प सही है।
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भलामानस, भरसक:
- 'भलामानस' में 'भला' विशेषण है और 'मानस' संज्ञा है, जो अव्ययी भाव समास नहीं बनाता। 'भरसक' में 'भर' अव्यय है और 'सक' क्रिया है, जो अव्ययी भाव समास का उदाहरण नहीं है।
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देशांतर, हररोज़:
- 'देशांतर' में 'देश' संज्ञा है और 'अंतर' संज्ञा है, जो अव्ययी भाव समास नहीं है। 'हररोज़' में 'हर' विशेषण है और 'रोज़' संज्ञा है, जो अव्ययी भाव समास का उदाहरण नहीं है।
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आपबीती, प्रत्यागमन:
- 'आपबीती' में 'आप' सर्वनाम है और 'बीती' क्रिया है, जो अव्ययी भाव समास नहीं है। 'प्रत्यागमन' में 'प्रति' उपसर्ग है और 'आगमन' संज्ञा है, जो अव्ययी भाव समास का उदाहरण नहीं है।
इस प्रकार, केवल विकल्प 1 के सभी शब्द 'अव्ययी भाव समास' के उदाहरण हैं। इसलिए, विकल्प 1 सही उत्तर है।
Question 48
वज्राहत' शब्द में कौन-सा समास है ?
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वज्राहत' शब्द में 'तत्पुरुष समास' है। तत्पुरुष समास में दो पद होते हैं, जिनमें एक पद प्रधान होता है और दूसरा पद उसके अर्थ को स्पष्ट करता है। 'वज्राहत' शब्द में 'वज्र' और 'आहत' दो पद हैं। यहाँ 'वज्र' प्रधान पद है और 'आहत' उसका अर्थ स्पष्ट कर रहा है। इस प्रकार, यह तत्पुरुष समास का उदाहरण है।
अब अन्य विकल्पों को गलत साबित करते हैं:
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कर्मधारय समास: इस समास में दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं और विशेषण-विशेष्य भाव होता है। 'वज्राहत' में ऐसा कोई संबंध नहीं है, इसलिए यह कर्मधारय समास नहीं है।
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अव्ययीभाव समास: इस समास में पहला पद अव्यय होता है और दूसरा पद उसके अर्थ को स्पष्ट करता है। 'वज्राहत' में 'वज्र' अव्यय नहीं है, इसलिए यह अव्ययीभाव समास नहीं है।
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बहुव्रीहि समास: इस समास में समस्त पदों का अर्थ किसी तीसरे पद पर लागू होता है। 'वज्राहत' में ऐसा कोई बाहरी अर्थ नहीं है, इसलिए यह बहुव्रीहि समास नहीं है।
इस प्रकार, 'वज्राहत' शब्द में तत्पुरुष समास है, जो विकल्प 4 को सही साबित करता है।
Question 49
समास-विग्रह की दृष्टि से कौन-सा विकल्प असंगत है ?
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समास-विग्रह की दृष्टि से विकल्प 3, "नवयुवक – नौ युवकों का समूह" असंगत है, क्योंकि:
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क्यों विकल्प 3 सही है: "नवयुवक" का सही समास-विग्रह "नया है जो युवक" (कर्मधारय समास) होता है, न कि "नौ युवकों का समूह"। "नौ युवकों का समूह" कहने से यह संख्यावाचक प्रतीत होता है, जो कि द्विगु समास की ओर इशारा करता है, लेकिन "नवयुवक" शब्द में "नव" का अर्थ "नया" है, "नौ" नहीं। इसलिए, दिया गया समास-विग्रह गलत है।
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अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
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विकल्प 1: शुभंकर – शुभ को करने वाला: यह समास-विग्रह सही है। "शुभंकर" का अर्थ है "शुभ करने वाला" और यह कर्म तत्पुरुष समास का उदाहरण है।
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विकल्प 2: रसमलाई – रस में डूबी हुई मलाई: यह समास-विग्रह भी सही है। "रसमलाई" का अर्थ है "रस में डूबी हुई मलाई" और यह तत्पुरुष समास का उदाहरण है।
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विकल्प 4: शाखामृग – शाखाओं पर रहने/दौड़ने वाला मृग: यह समास-विग्रह भी सही है। "शाखामृग" का अर्थ है "शाखाओं पर रहने वाला मृग" (बंदर) और यह बहुव्रीहि समास का उदाहरण है।
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इसलिए, केवल विकल्प 3 में दिया गया समास-विग्रह गलत है, जो इसे असंगत बनाता है।
Question 50
वज्रदेह' शब्द में कौन-सा समास है ?
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वज्रदेह' शब्द में 'कर्मधारय' समास है। इसे समझने के लिए हमें 'कर्मधारय' समास की विशेषताओं को जानना होगा।
- कर्मधारय समास: इस समास में पूर्वपद और उत्तरपद में विशेषण-विशेष्य का संबंध होता है। 'वज्रदेह' में 'वज्र' विशेषण है और 'देह' विशेष्य है। इसका अर्थ है 'वज्र के समान देह'। यहाँ 'वज्र' शब्द 'देह' की विशेषता बता रहा है, इसलिए यह कर्मधारय समास है।
अब अन्य विकल्पों को देखते हैं:
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अव्ययीभाव समास: इस समास में पहला पद अव्यय होता है और पूरा पद अव्यय के रूप में कार्य करता है। 'वज्रदेह' में ऐसा कोई अव्यय पद नहीं है, इसलिए यह अव्ययीभाव समास नहीं हो सकता।
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तत्पुरुष समास: इस समास में पहला पद संज्ञा या विशेषण होता है और दूसरा पद उसके कारक के रूप में होता है। 'वज्रदेह' में ऐसा कोई कारक संबंध नहीं है, इसलिए यह तत्पुरुष समास नहीं है।
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द्वन्द्व समास: इस समास में दोनों पद समान महत्व के होते हैं और 'और' का भाव होता है। 'वज्रदेह' में ऐसा कोई 'और' का भाव नहीं है, इसलिए यह द्वन्द्व समास नहीं है।
इस प्रकार, 'वज्रदेह' में 'कर्मधारय' समास है, जो विकल्प 3 को सही ठहराता है।
Question 51
सरसिज शब्द में कौन-सा समास है ?
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सरसिज शब्द में "अलुक् तत्पुरुष समास" है, जो विकल्प 4 है। इसे समझने के लिए हमें "अलुक् तत्पुरुष समास" और अन्य समासों के बीच के अंतर को समझना होगा।
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अलुक् तत्पुरुष समास (विकल्प 4):
- "अलुक् तत्पुरुष समास" में समास के बाद भी पहले पद का रूप अपरिवर्तित रहता है। "सरसिज" शब्द "सरस" (जल) और "ज" (जन्मा) से बना है। यहाँ "सरस" का रूप अपरिवर्तित रहता है, इसलिए यह अलुक् तत्पुरुष समास का उदाहरण है।
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कर्मधारय समास (विकल्प 1):
- कर्मधारय समास में विशेषण और विशेष्य का संबंध होता है, जैसे "नीलकंठ" (नीला + कंठ)। "सरसिज" में ऐसा कोई विशेषण-विशेष्य संबंध नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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द्वन्द्व समास (विकल्प 2):
- द्वन्द्व समास में दो या अधिक शब्दों का समान महत्व होता है, जैसे "राम-लक्ष्मण"। "सरसिज" में केवल एक ही मुख्य अर्थ है, इसलिए यह द्वन्द्व समास नहीं हो सकता।
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अव्ययीभाव समास (विकल्प 3):
- अव्ययीभाव समास में पहला पद अव्यय होता है, जैसे "यथाशक्ति"। "सरसिज" में पहला पद अव्यय नहीं है, इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
इस प्रकार, "सरसिज" में "अलुक् तत्पुरुष समास" है, जो विकल्प 4 को सही ठहराता है।
Question 52
राष्ट्रभक्ति' में प्रयुक्त समास है :
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प्रश्न: 'राष्ट्रभक्ति' में प्रयुक्त समास है :
सम्प्रदान तत्पुरुष समास को सही उत्तर के रूप में समर्थन करने के लिए विस्तृत व्याख्या:
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सम्प्रदान तत्पुरुष समास का समर्थन:
- 'राष्ट्रभक्ति' शब्द में 'राष्ट्र' और 'भक्ति' दो पद हैं। यहाँ 'राष्ट्र' के लिए 'भक्ति' की भावना व्यक्त की जा रही है। 'सम्प्रदान' का अर्थ होता है किसी के लिए समर्पण या अर्पण करना। इस प्रकार, 'राष्ट्रभक्ति' का अर्थ है 'राष्ट्र के लिए भक्ति'। यह 'सम्प्रदान तत्पुरुष' समास का उदाहरण है क्योंकि इसमें भक्ति का समर्पण राष्ट्र के लिए किया गया है।
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अन्य विकल्पों की अस्वीकृति:
- कर्म तत्पुरुष: इसमें क्रिया का फल कर्म के रूप में होता है। उदाहरण के लिए, 'फल खाना' में 'फल' कर्म है। 'राष्ट्रभक्ति' में ऐसा कोई कर्म नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
- करण तत्पुरुष: इसमें साधन या उपकरण का उल्लेख होता है। उदाहरण के लिए, 'कलम से लिखना' में 'कलम' करण है। 'राष्ट्रभक्ति' में कोई साधन या उपकरण नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
- संबंध तत्पुरुष: इसमें संबंध का उल्लेख होता है। उदाहरण के लिए, 'राम का घर' में 'राम' का संबंध 'घर' से है। 'राष्ट्रभक्ति' में ऐसा कोई संबंध नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
इस प्रकार, 'राष्ट्रभक्ति' में प्रयुक्त समास 'सम्प्रदान तत्पुरुष' है, क्योंकि यह राष्ट्र के लिए भक्ति के समर्पण को दर्शाता है।
Question 53
समास की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
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समास की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनने के लिए हमें यह समझना होगा कि दिए गए विकल्पों में से कौन सा समास के प्रकार के अनुसार सही नहीं है।
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आत्मविश्वास – अधिकरण तत्पुरुष: 'आत्मविश्वास' में 'आत्म' और 'विश्वास' का मेल है, जो अधिकरण तत्पुरुष समास के अंतर्गत आता है। इसमें 'आत्म' का अर्थ 'स्वयं' होता है और यह अधिकरण कारक को दर्शाता है।
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समाचारपत्र – सम्प्रदान तत्पुरुष: 'समाचारपत्र' में 'समाचार' और 'पत्र' का मेल है, जो सम्प्रदान तत्पुरुष समास के अंतर्गत आता है। इसमें 'समाचार' का अर्थ 'खबर' होता है और 'पत्र' का अर्थ 'कागज' होता है, जो सम्प्रदान कारक को दर्शाता है।
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शिक्षणेतर – अपादान तत्पुरुष: 'शिक्षणेतर' में 'शिक्षण' और 'इतर' का मेल है, जो अपादान तत्पुरुष समास के अंतर्गत आता है। इसमें 'शिक्षण' का अर्थ 'पढ़ाई' होता है और 'इतर' का अर्थ 'अलग' होता है, जो अपादान कारक को दर्शाता है।
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गुणातीत – करण तत्पुरुष: 'गुणातीत' में 'गुण' और 'अतीत' का मेल है। यह करण तत्पुरुष समास के अंतर्गत नहीं आता है। 'गुणातीत' का अर्थ है 'गुणों से परे', जो करण कारक को नहीं दर्शाता है। इसलिए, यह विकल्प समास की दृष्टि से असंगत है।
इस प्रकार, विकल्प 4 'गुणातीत – करण तत्पुरुष' समास की दृष्टि से असंगत है, क्योंकि यह करण तत्पुरुष समास के अंतर्गत नहीं आता है। यही कारण है कि विकल्प 4 सही उत्तर है।
Question 54
समास की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
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समास की दृष्टि से असंगत विकल्प आकंठ – बहुव्रीहि है, क्योंकि:
- आकंठ का समास विग्रह होता है 'कंठ तक' या 'कंठ पर्यंत'। इसमें 'अ' उपसर्ग लगा है जो 'तक' या 'पर्यंत' का अर्थ देता है। यह अव्ययीभाव समास का उदाहरण है, जहाँ पहला पद अव्यय होता है और प्रधान होता है। बहुव्रीहि समास में दोनों पद अप्रधान होते हैं और किसी तीसरे पद की ओर संकेत करते हैं, जो कि 'आकंठ' में नहीं है। इसलिए, 'आकंठ' का बहुव्रीहि समास होना असंगत है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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कनकलता – कर्मधारय: 'कनकलता' का समास विग्रह होता है 'कनक के समान लता'। यहाँ 'कनक' (सोना) विशेषण है और 'लता' विशेष्य। कर्मधारय समास में विशेषण-विशेष्य या उपमेय-उपमान का संबंध होता है, जो यहाँ मौजूद है। इसलिए यह विकल्प संगत है।
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सचिवालय – तत्पुरुष: 'सचिवालय' का समास विग्रह होता है 'सचिव का आलय' (सचिव का घर)। यहाँ 'का' संबंध कारक है, और तत्पुरुष समास में कारक चिन्हों का लोप होता है। इसलिए यह विकल्प भी संगत है।
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चौराहा – द्विगु: 'चौराहा' का समास विग्रह होता है 'चार राहों का समूह'। द्विगु समास में पहला पद संख्यावाचक होता है और समूह का बोध कराता है, जो यहाँ स्पष्ट है। इसलिए यह विकल्प भी संगत है।
अतः, स्पष्ट है कि आकंठ – बहुव्रीहि ही असंगत विकल्प है, क्योंकि 'आकंठ' अव्ययीभाव समास का उदाहरण है, न कि बहुव्रीहि समास का।
Question 55
तत्पुरुष समास का कौन-सा युग्म असंगत
है ?
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तत्पुरुष समास के संदर्भ में, विकल्प 2 "तुलसीकृत - संबंध तत्पुरुष" असंगत है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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तुलसीकृत - संबंध तत्पुरुष: यह युग्म असंगत है क्योंकि "तुलसीकृत" में "तुलसी" और "कृत" शब्दों का मेल है, जो कि संबंध तत्पुरुष समास नहीं बनाता। संबंध तत्पुरुष समास में संबंध का भाव होता है, जैसे "राजपुत्र" (राजा का पुत्र)। "तुलसीकृत" में ऐसा कोई संबंध नहीं है, बल्कि यह कर्म तत्पुरुष समास है, जिसमें "तुलसी द्वारा किया गया" का भाव है।
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आशातीत - कर्म तत्पुरुष: यह युग्म संगत है क्योंकि "आशातीत" में "आशा" और "अतीत" का मेल है, जो कि कर्म तत्पुरुष समास बनाता है। इसमें "आशा से परे" का भाव है, जो कि कर्म का संकेत देता है।
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रसोईघर - संप्रदान तत्पुरुष: यह युग्म भी संगत है। "रसोईघर" में "रसोई" और "घर" का मेल है, जो कि संप्रदान तत्पुरुष समास बनाता है। इसमें "रसोई के लिए घर" का भाव है, जो कि संप्रदान का संकेत देता है।
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गृहस्थ - अधिकरण वित्पुरुष: यह युग्म भी संगत है। "गृहस्थ" में "गृह" और "स्थ" का मेल है, जो कि अधिकरण वित्पुरुष समास बनाता है। इसमें "गृह में स्थित" का भाव है, जो कि अधिकरण का संकेत देता है।
इस प्रकार, विकल्प 2 "तुलसीकृत - संबंध तत्पुरुष" असंगत है क्योंकि यह संबंध तत्पुरुष समास नहीं बनाता, जबकि अन्य विकल्प अपने-अपने समास के प्रकार के अनुसार संगत हैं।
Question 56
तत्पुरुष समास का कौन-सा समस्तपद अपने युग्म से सही सुमेलित नहीं है ?
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The correct option is 1:
तत्पुरुष समास में समस्तपद का विग्रह करने पर कारक चिह्न (postposition) के अनुसार उसके भेद का निर्धारण होता है। 'गुरुदक्षिणा' का समास विग्रह होता है 'गुरु के लिए दक्षिणा' (दक्षिणा for the Guru)। यहाँ 'के लिए' कारक चिह्न का प्रयोग हुआ है, जो सम्प्रदान तत्पुरुष (Dative Tatpurush) का चिह्न है। सम्प्रदान तत्पुरुष में दान, भेंट या किसी के लिए किए गए कार्य का भाव होता है। लेकिन, विकल्प में इसे 'संबंध तत्पुरुष' (Relational Tatpurush, जिसका चिह्न 'का, के, की' होता है) के रूप में सुमेलित किया गया है। चूंकि 'गुरुदक्षिणा' वास्तव में 'सम्प्रदान तत्पुरुष' का उदाहरण है और इसे 'संबंध तत्पुरुष' के साथ सुमेलित किया गया है, इसलिए यह युग्म सही सुमेलित नहीं है। यही कारण है कि यह विकल्प प्रश्न का सही उत्तर है।
The incorrect option is 2:
'देशाटन' का समास विग्रह होता है 'देश में अटन' (देश में घूमना या भ्रमण)। यहाँ 'में' कारक चिह्न का प्रयोग हुआ है, जो अधिकरण तत्पुरुष (Locative Tatpurush) का चिह्न है। अधिकरण तत्पुरुष क्रिया के आधार (स्थान या समय) को दर्शाता है। इसलिए, 'देशाटन – अधिकरण तत्पुरुष' युग्म सही सुमेलित है।
The incorrect option is 3:
'रेखांकित' का समास विग्रह होता है 'रेखा से अंकित' (रेखा द्वारा चिन्हित)। यहाँ 'से' कारक चिह्न का प्रयोग हुआ है, जिसका अर्थ 'के द्वारा' है, और यह करण तत्पुरुष (Instrumental Tatpurush) का चिह्न है। करण तत्पुरुष वह होता है जहाँ कोई साधन या माध्यम प्रयुक्त होता है। अतः, 'रेखांकित – करण तत्पुरुष' युग्म सही सुमेलित है।
The incorrect option is 4:
'देशनिर्वासित' का समास विग्रह होता है 'देश से निर्वासित' (देश से अलग किया गया)। यहाँ 'से' कारक चिह्न का प्रयोग हुआ है, जो अलगाव (separation) के भाव को दर्शाता है, और यह अपादान तत्पुरुष (Ablative Tatpurush) का चिह्न है। अपादान तत्पुरुष में किसी वस्तु के अलग होने का भाव होता है। इसलिए, 'देशनिर्वासित – अपादान तत्पुरुष' युग्म भी सही सुमेलित है।
Question 57
किस विकल्प के समस्त पद में बहुव्रीहि समास का उदाहरण नहीं है ?
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Answer & Explanation
Question 58
समास की दृष्टि से असंगतविकल्प चुनिए :
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Answer & Explanation
The correct option is 4:
'हीन-भावना' का सही समास विग्रह 'हीन (से) भावना' या 'हीन है जो भावना' हो सकता है। यदि हम इसे 'हीन (से) भावना' मानते हैं, तो यह करण तत्पुरुष (करण कारक का चिह्न 'से') हो सकता है, या यदि इसे 'हीन है जो भावना' मानते हैं (अर्थात हीनता से युक्त भावना), तो यह कर्मधारय समास होना चाहिए क्योंकि इसमें विशेषण-विशेष्य का संबंध है। किसी भी स्थिति में, इसका विग्रह 'अधिकरण तत्पुरुष' ('में' या 'पर' कारक चिह्न) से मेल नहीं खाता है। अधिकरण तत्पुरुष का विग्रह 'अधिकरण' (स्थान/समय) से संबंधित होता है, जैसे 'कार्य में कुशल' (कार्यकुशल)। 'हीन-भावना' में अधिकरण कारक का कोई प्रयोग नहीं है, इसलिए यह समास की दृष्टि से असंगत (गलत मेल) विकल्प है।
The incorrect option is 1:
'कूपमंडूक' का समास विग्रह होता है 'कूप (कुएँ) में मंडूक (मेढक)'। इस विग्रह में 'में' कारक चिह्न का प्रयोग हुआ है, जो हिंदी व्याकरण के तत्पुरुष समास के अंतर्गत 'अधिकरण तत्पुरुष' कारक को दर्शाता है। अधिकरण तत्पुरुष समास में पूर्व पद और उत्तर पद के बीच अधिकरण कारक की विभक्ति 'में' या 'पर' का लोप होता है। चूंकि 'कूपमंडूक' का अर्थ 'कुएँ में सीमित ज्ञान वाला' है, यह स्थान (कूप) के अधिकरण को दर्शाता है, इसलिए यह मेल (अधिकरण तत्पुरुष) पूर्णतः संगत है।
The incorrect option is 2:
'मधुमक्खी' एक उदाहरण है जिसे 'लुप्तपद तत्पुरुष' के अंतर्गत माना जाता है, हालांकि इसका सटीक विग्रह 'मधु बनाने वाली मक्खी' होता है। लुप्तपद तत्पुरुष में कारक चिह्न के साथ-साथ अन्य पद भी लुप्त हो जाते हैं, जैसे 'दही-बड़ा' (दही में डूबा हुआ बड़ा)। चूंकि यह कर्मधारय समास का उपभेद नहीं है, लेकिन व्यापक रूप से तत्पुरुष के साथ इसका उल्लेख किया जाता है। फिर भी, 'लुप्तपद तत्पुरुष कर्मधारय' का उल्लेख होना इसे असंगत नहीं बनाता है, क्योंकि 'मधु' कर्म का बोध कराता है और यह तत्पुरुष का एक विशेष उपभेद है।
The incorrect option is 3:
'काजल' शब्द समास की दृष्टि से गलत तरीके से वर्गीकृत किया गया है। 'काजल' स्वयं में एक रूढ़ शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ 'आँखों में लगाने वाला काला पदार्थ' है, और यह कोई समस्त पद (compound word) नहीं है। इसलिए, 'काजल' का कोई समास विग्रह नहीं होता। चूंकि यह स्वयं एक साधारण संज्ञा शब्द है न कि समस्त पद, इसे अपादान तत्पुरुष (जो अलगाव को दर्शाता है, जैसे 'धन से हीन') बताना असंगत है। हालाँकि, यदि हम 'काजल' को 'कज्जल' (तत्सम) के रूप में देखें, तो भी यह अपादान तत्पुरुष का उदाहरण नहीं है। यह विकल्प इसलिए गलत नहीं माना गया क्योंकि 'हीन-भावना' (विकल्प 4) में कारक चिह्न का स्पष्ट गलत प्रयोग है।
Question 59
हमें इस बात को समझना होगा कि युद्ध की अनुपस्थिति ही शांति की परिभाषा नहीं है। बुद्ध ने जिस शांतिपूर्ण समाज की परिकल्पना की थी, उसमें समानता का वह संदेश भी शामिल था, जो हमें इस बात का अहसास कराता है कि मनुष्य को मनुष्य से पृथक् दिखाने का हर प्रयास मनुष्यता का शत्रु है। ऐसे प्रत्येक प्रयास को विफल बनाना मनुष्योचित तो है, एक शर्त भी है मनुष्य के रूप में जीने की। हमारी चिंता यह होनी चाहिए कि हमें स्वयं को मनुष्य कैसे बनाएँ एवं कैसे मनुष्य बनाए रखें। मनुष्य बनने का अर्थ है - अपने भीतर दूसरे की पीड़ा को समझने का अहसास जगाना, अपने भीतर करुणा का वह भाव जगाना, जो हमें दूसरे से जोड़ता है। छोटे-छोटे पुल बनाने होंगे हमें दूसरे से जुड़ने के लिए - करुणा का पुल, मैत्री का पुल, समानता का पुल, विषमता मिटाने वाला पुल ......। ऐसा समझकर ही हम मानवोचित आचरण का मंत्र अपना सकते हैं, प्रबुद्ध बन सकते हैं।
गद्यांश में प्रयुक्त पदों की व्याकरणिक विवेचना के संदर्भ में असंगत कथन चुनिए :
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Answer & Explanation
गद्यांश में दिए गए विकल्पों में से असंगत कथन चुनने के लिए हमें व्याकरणिक विवेचना का सहारा लेना होगा। सही उत्तर विकल्प 2 है, जो कहता है कि "मनुष्यता - जातिवाचक संज्ञा"। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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अनुपस्थिति - दो उपसर्ग: "अनुपस्थिति" शब्द में "अनु" और "उप" दो उपसर्ग हैं। "अनु" का अर्थ है 'बाद में' और "उप" का अर्थ है 'निकट'। इस प्रकार, यह कथन व्याकरणिक रूप से सही है।
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मनुष्यता - जातिवाचक संज्ञा: "मनुष्यता" शब्द जातिवाचक संज्ञा नहीं है। यह भाववाचक संज्ञा है, जो मनुष्य के गुण या विशेषता को दर्शाता है। जातिवाचक संज्ञा वह होती है जो किसी जाति या समूह का बोध कराती है, जैसे 'मनुष्य'। इसलिए, यह कथन असंगत है और सही उत्तर है।
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प्रत्येक - अव्ययीभाव समास: "प्रत्येक" शब्द अव्ययीभाव समास का उदाहरण है। इसमें 'प्रति' उपसर्ग और 'एक' शब्द का समास है, जो मिलकर 'प्रत्येक' बनता है। यह कथन सही है।
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विषमता - व्यंजन संधि: "विषमता" शब्द में 'विषम' और 'ता' के बीच व्यंजन संधि होती है। 'विषम' का अर्थ है 'असमान' और 'ता' प्रत्यय जोड़ने पर 'विषमता' बनता है। यह कथन भी सही है।
इस प्रकार, विकल्प 2 "मनुष्यता - जातिवाचक संज्ञा" व्याकरणिक रूप से असंगत है और यही सही उत्तर है।
Question 60
समस्तपद एवं समास विग्रह की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
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Answer & Explanation
The correct option is (2):
"पवन से चलने वाली चक्की - पनचक्की" यह विकल्प समस्तपद और समास विग्रह की दृष्टि से असंगत है। यहाँ पर समस्तपद 'पनचक्की' दिया गया है। 'पनचक्की' का सही विग्रह 'पानी से चलने वाली चक्की' होता है, जो 'पवन चक्की' (हवा से चलने वाली चक्की) से भिन्न है। पनचक्की में 'पन' शब्द पानी (जल) का संक्षिप्त रूप है। चूंकि दिया गया विग्रह 'पवन से चलने वाली चक्की' है, जो 'पनचक्की' (जल से चलने वाली) के अर्थ से मेल नहीं खाता है, इसलिए यह जोड़ा असंगत है। पनचक्की करण तत्पुरुष समास का उदाहरण है (पानी से चलने वाली)।
The incorrect option is (1):
लोकप्रिय - अधिकरण तत्पुरुष। यह विकल्प संगत है। 'लोकप्रिय' का विग्रह 'लोक में प्रिय' होता है। यहाँ 'में' अधिकरण कारक चिह्न का प्रयोग हुआ है, इसलिए यह अधिकरण तत्पुरुष समास का सही उदाहरण है।
The incorrect option is (3):
नवयुवक - नव है जो युवक। यह विकल्प संगत है। 'नवयुवक' का विग्रह 'नव है जो युवक' होता है, जिसमें 'नव' (नया) विशेषण है और 'युवक' विशेष्य है। यह संबंध कर्मधारय समास का सही उदाहरण है।
The incorrect option is (4):
परीक्षाभवन - परीक्षा के लिए भवन। यह विकल्प संगत है। 'परीक्षाभवन' का विग्रह 'परीक्षा के लिए भवन' है। यहाँ 'के लिए' संप्रदान कारक चिह्न का प्रयोग हुआ है, इसलिए यह संप्रदान तत्पुरुष समास का सही उदाहरण है।