HTET Exam Level 3 PGT
HTET exam Level 3 PGT preparation with Clear Cutoff
Verified Answers and Explanations
by Clear Cutoff
Showing 20 of 20 questions
Question 341
अशुद्ध वर्तनी वाला विकल्प चुनिए :
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Answer & Explanation
अशुद्ध वर्तनी वाला विकल्प मुमुर्षा है।
व्याख्या:
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मुमुर्षा: यह शब्द अशुद्ध है। शुद्ध वर्तनी "मुमूर्षा" होती है। "मुमूर्षा" का अर्थ होता है मरने की इच्छा या मरने की अवस्था। वर्तनी में 'उ' की मात्रा दीर्घ होनी चाहिए।
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विभीषिका: यह शब्द शुद्ध है। इसका अर्थ होता है भयानक दृश्य या डर का कारण।
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शुश्रूषा: यह शब्द शुद्ध है। इसका अर्थ होता है सेवा करना, देखभाल करना या परिचर्या करना।
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त्रिपुरारि: यह शब्द शुद्ध है। यह भगवान शिव का एक नाम है, जिसका अर्थ है त्रिपुरासुर का नाश करने वाला।
इसलिए, केवल मुमुर्षा की वर्तनी अशुद्ध है, जबकि अन्य सभी विकल्प शुद्ध हैं।
Question 342
उच्चारण-स्थलों की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
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Answer & Explanation
उच्चारण-स्थलों की दृष्टि से असंगत विकल्प दन्तनासिका - ञ, ण है, क्योंकि:
- दन्तनासिका उच्चारण स्थान नहीं है। 'ञ' और 'ण' दोनों ही नासिक्य व्यंजन हैं, लेकिन 'ञ' का उच्चारण स्थान तालु (तालव्य) है और 'ण' का उच्चारण स्थान मूर्धा (मूर्धन्य) है। इसलिए, इन्हें एक साथ 'दन्तनासिका' कहना गलत है। दन्त और नासिका दोनों का एक साथ उच्चारण स्थान के रूप में प्रयोग यहाँ असंगत है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
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कंठोष्ठ - ओ, औ: 'ओ' और 'औ' दोनों का उच्चारण कंठ और ओष्ठ (होंठ) दोनों के प्रयोग से होता है। इसलिए यह विकल्प सही है।
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कंठतालु - ए, ऐ: 'ए' और 'ऐ' दोनों का उच्चारण कंठ और तालु दोनों के प्रयोग से होता है। इसलिए यह विकल्प भी सही है।
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मूर्धा - र, ष: 'र' और 'ष' दोनों का उच्चारण मूर्धा (मुंह की छत का पिछला भाग) से होता है। इसलिए यह विकल्प भी सही है।
इसलिए, केवल विकल्प 4, दन्तनासिका - ञ, ण, उच्चारण स्थानों के सही मेल को नहीं दर्शाता है, क्योंकि 'ञ' तालव्य नासिक्य है और 'ण' मूर्धन्य नासिक्य है, और 'दन्तनासिका' कोई मान्य उच्चारण स्थान नहीं है।
Question 343
शुद्ध वर्तनी वाला विकल्प चुनिए :
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Answer & Explanation
शुद्ध वर्तनी वाला विकल्प तिरपन है।
तिरपन सही है क्योंकि यह संख्या 53 (fifty-three) को दर्शाने वाला सही हिंदी शब्द है। इसकी वर्तनी में कोई त्रुटि नहीं है।
अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि:
- इकत्तीस: इसकी सही वर्तनी इकतीस है (31 - thirty-one)। 'त्तीस' की जगह 'तीस' होना चाहिए।
- सृष्टा: इसकी सही वर्तनी स्रष्टा है। 'ऋ' की मात्रा 'स' के नीचे लगनी चाहिए, न कि 'श' के नीचे।
- चवदह: इसकी सही वर्तनी चौदह है (14 - fourteen)। 'व' की जगह 'उ' की मात्रा 'च' पर लगनी चाहिए।
इसलिए, केवल तिरपन ही शुद्ध वर्तनी वाला शब्द है।
Question 344
शब्दार्थ की दृष्टि से बेमेल को छाँटिए :
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Answer & Explanation
Option 2 सही है क्योंकि 'कीर्तिमान - यशस्वी' और 'कीर्तिमान् - उपलब्धि/रिकॉर्ड' में वर्तनी (स्पेलिंग) का अंतर अर्थ में स्पष्ट और स्थापित अंतर को दर्शाता है। 'कीर्तिमान' का अर्थ 'यशस्वी' होता है, जबकि 'कीर्तिमान्' का अर्थ 'उपलब्धि' या 'रिकॉर्ड' होता है। यह अंतर शब्दार्थ की दृष्टि से महत्वपूर्ण है और दोनों शब्दों के अलग-अलग प्रयोग होते हैं।
अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि:
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Option 1: 'अहम - ख़ास/विशेष' और 'अहम् - 'मैं' का पर्याय' में वर्तनी का अंतर अर्थ में स्पष्ट अंतर को दर्शाता है। 'अहम' का अर्थ 'ख़ास/विशेष' हो सकता है, और 'अहम्' 'मैं' का पर्याय है।
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Option 3: 'जंग - युद्ध' और 'ज़ंग - लोहे पर लगने वाला मोरचा' में वर्तनी का अंतर अर्थ में स्पष्ट अंतर को दर्शाता है। 'जंग' का अर्थ 'युद्ध' होता है, जबकि 'ज़ंग' का अर्थ 'लोहे पर लगने वाला मोरचा' होता है।
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Option 4: 'जिला - प्रभा/चमक' और 'ज़िला - जनपद' में वर्तनी का अंतर अर्थ में स्पष्ट अंतर को दर्शाता है। 'जिला' का अर्थ 'प्रभा/चमक' हो सकता है, और 'ज़िला' का अर्थ 'जनपद' होता है।
इसलिए, केवल Option 2 में दिए गए शब्दों के अर्थों में वर्तनी के अंतर के कारण स्पष्ट और स्थापित अंतर है, जो इसे बेमेल बनाता है।
Question 345
कालिदास को नाट्यजगत् का शेक्सपीयर माना जाता है
- रेखांकित पद में संज्ञाभेद इंगित कीजिए :
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Answer & Explanation
कालिदास को नाट्यजगत् का शेक्सपीयर माना जाता है - रेखांकित पद में संज्ञाभेद जातिवाचक संज्ञा है, क्योंकि:
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जातिवाचक संज्ञा (Option 2) सही क्यों है: "शेक्सपीयर" शब्द यहाँ किसी विशेष व्यक्ति (विलियम शेक्सपियर) को नहीं, बल्कि एक प्रकार के नाटककार या उस स्तर की प्रतिभा वाले व्यक्ति को दर्शाता है। जब हम कहते हैं कि कालिदास नाट्यजगत् के शेक्सपियर हैं, तो हम कालिदास की तुलना शेक्सपियर की प्रतिभा, नाटक लेखन शैली और नाट्य जगत में उनके योगदान से कर रहे हैं। इस प्रकार, "शेक्सपीयर" शब्द एक जाति या वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है, न कि किसी विशेष व्यक्ति का। यह एक ऐसे व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है जो नाटक लेखन में बहुत कुशल और प्रसिद्ध है।
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अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
- व्यक्तिवाचक संज्ञा (Option 1): व्यक्तिवाचक संज्ञा किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु का नाम होती है। यदि हम विलियम शेक्सपियर की बात कर रहे होते, तो यह व्यक्तिवाचक संज्ञा होती। लेकिन यहाँ "शेक्सपीयर" शब्द का प्रयोग एक उपाधि या तुलना के रूप में हो रहा है, इसलिए यह व्यक्तिवाचक संज्ञा नहीं है।
- प्राणिवाचक संज्ञा (Option 3): प्राणिवाचक संज्ञा जीवित प्राणियों को दर्शाती है। हालांकि शेक्सपियर एक जीवित व्यक्ति थे, लेकिन यहाँ "शेक्सपीयर" शब्द का प्रयोग एक प्राणी के रूप में नहीं, बल्कि एक नाटककार के रूप में हो रहा है। इसलिए यह प्राणिवाचक संज्ञा नहीं है।
- समूहवाचक संज्ञा (Option 4): समूहवाचक संज्ञा किसी समूह या समुदाय को दर्शाती है। "शेक्सपीयर" शब्द किसी समूह को नहीं दर्शाता है, इसलिए यह समूहवाचक संज्ञा नहीं है।
इसलिए, "शेक्सपीयर" शब्द का प्रयोग यहाँ एक जातिवाचक संज्ञा के रूप में किया गया है, जो नाटककारों के एक वर्ग या प्रकार को दर्शाता है।
Question 346
असंगत कथन का चुनाव कीजिए :
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असंगत कथन का चुनाव कीजिए :
Option 3 सही उत्तर है क्योंकि:
- स्थायी भाव वे भाव होते हैं जो हमारे मन में सुप्त अवस्था में विद्यमान रहते हैं और अनुकूल परिस्थिति पाकर जागृत होते हैं। वे रस की अनुभूति का आधार होते हैं। स्थायी भाव व्यक्ति या पदार्थ नहीं होते, बल्कि वे मन की स्थायी प्रवृत्तियाँ या भावनाएँ होती हैं। व्यक्ति या पदार्थ जो भावों को उत्तेजित करते हैं, वे आलंबन विभाव कहलाते हैं, न कि स्थायी भाव। इसलिए, विकल्प 3 असंगत है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
- विकल्प 1: स्थायी भाव अंततः रसत्व को प्राप्त करते हैं। यह कथन सत्य है। स्थायी भाव ही विभाव, अनुभाव और संचारी भावों के संयोग से रस रूप में परिणत होते हैं।
- विकल्प 2: जो विषयारम्भ से अंत तक काव्य में उपस्थित रहते हैं वे स्थायी भाव कहलाते हैं। यह कथन भी सत्य है। स्थायी भाव काव्य में शुरू से अंत तक विद्यमान रहते हैं, भले ही वे हमेशा स्पष्ट रूप से दिखाई न दें।
- विकल्प 4: स्थायी भाव वे भाव हैं जिन्हें कोई विरुद्ध या समान भाव दबा नहीं सकता है। यह कथन भी सत्य है। स्थायी भाव इतने प्रबल होते हैं कि अन्य भाव उन्हें आसानी से दबा नहीं पाते। वे अन्य भावों पर हावी रहते हैं।
इसलिए, केवल विकल्प 3 स्थायी भाव की सही परिभाषा नहीं देता है, इसलिए यह असंगत है।
Question 347
समास की दृष्टि से असंगत को चुनिए :
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रणविमुख - करण तत्पुरुष, समास की दृष्टि से असंगत है क्योंकि 'रणविमुख' का समास विग्रह 'रण से विमुख' होता है। 'से' अपादान कारक का विभक्ति चिह्न है, जो अलग होने या दूर होने का भाव दर्शाता है। इसलिए, यह अपादान तत्पुरुष समास का उदाहरण है, न कि करण तत्पुरुष का। करण तत्पुरुष में 'से' या 'के द्वारा' विभक्ति चिह्न का प्रयोग साधन या माध्यम के अर्थ में होता है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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जातिगत - कर्म तत्पुरुष: 'जातिगत' का समास विग्रह 'जाति को गत' हो सकता है, जहाँ 'को' कर्म कारक का विभक्ति चिह्न है। इसलिए यह कर्म तत्पुरुष समास है।
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वनमानुष - लुप्तपद तत्पुरुष: 'वनमानुष' का समास विग्रह 'वन में रहने वाला मानुष' हो सकता है, जहाँ बीच का पद लुप्त है। इसलिए यह लुप्तपद तत्पुरुष समास है।
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ख़ुशनसीब - कर्मधारय: 'ख़ुशनसीब' का समास विग्रह 'खुश है जो नसीब' हो सकता है, जहाँ विशेषण-विशेष्य संबंध है। इसलिए यह कर्मधारय समास है।
अतः, केवल 'रणविमुख' का समास विग्रह और तत्पुरुष भेद गलत दिया गया है, इसलिए यही असंगत है।
Question 348
किस विकल्प में नामधातु क्रिया नहीं है ?
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Answer & Explanation
नामधातु क्रिया उस क्रिया को कहते हैं जो संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि शब्दों से बनती है। दी गई विकल्पों में से 'धुलवाना' नामधातु क्रिया नहीं है, जबकि अन्य विकल्प नामधातु क्रियाएं हैं।
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धुलवाना: यह क्रिया 'धोना' क्रिया से बनी है, जो कि एक मूल क्रिया है। 'धुलवाना' एक प्रेरणार्थक क्रिया है, जिसमें कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी और से करवाता है। इसलिए, यह नामधातु क्रिया नहीं है।
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बतियाना: यह क्रिया 'बात' (संज्ञा) से बनी है। 'बात' एक संज्ञा है और इससे बनी क्रिया 'बतियाना' नामधातु क्रिया है। इसलिए यह विकल्प गलत है।
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ललचाना: यह क्रिया 'लालच' (संज्ञा) से बनी है। 'लालच' एक संज्ञा है और इससे बनी क्रिया 'ललचाना' नामधातु क्रिया है। इसलिए यह विकल्प गलत है।
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सठियाना: यह क्रिया 'सठ' (विशेषण - साठ वर्ष का) से बनी है। 'सठ' एक विशेषण है और इससे बनी क्रिया 'सठियाना' नामधातु क्रिया है। इसलिए यह विकल्प गलत है।
अतः, 'धुलवाना' नामधातु क्रिया नहीं है, बल्कि प्रेरणार्थक क्रिया है। इसलिए विकल्प 1 सही है।
Question 349
छोटे को खाना खिलाओ' - वाक्य में विशेषण पद कौन-सा है ?
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Answer & Explanation
'इनमें से कोई नहीं' सही उत्तर है क्योंकि वाक्य "छोटे को खाना खिलाओ" में कोई भी शब्द विशेषण नहीं है।
यहाँ कारण दिए गए हैं कि अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
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1. छोटे को: "छोटे" शब्द यहाँ विशेषण की तरह लग सकता है, लेकिन यह वास्तव में एक संज्ञा के रूप में कार्य कर रहा है। यह किसी छोटे व्यक्ति को संदर्भित कर रहा है, न कि किसी संज्ञा की विशेषता बता रहा है। इसलिए, यह विशेषण नहीं है। "को" एक कारक चिह्न है, जो इसे विशेषण होने से और भी दूर करता है।
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2. खाना: "खाना" एक संज्ञा है (भोजन)। यह किसी चीज की विशेषता नहीं बता रहा है, बल्कि स्वयं एक वस्तु है। इसलिए, यह विशेषण नहीं है।
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3. खिलाओ: "खिलाओ" एक क्रिया है (क्रिया)। यह एक क्रिया का वर्णन कर रहा है, न कि किसी संज्ञा की विशेषता बता रहा है। इसलिए, यह विशेषण नहीं है।
चूंकि वाक्य में कोई भी शब्द विशेषण नहीं है, इसलिए विकल्प 4, "इनमें से कोई नहीं," सही उत्तर है।
Question 350
संधि की दृष्टि से अनुचित विकल्प को छाँटिए :
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Option 2 is the incorrect संधि विच्छेद because "कंटक + अकीर्ण" should result in "कंटकाकीर्ण" through दीर्घ संधि (अ + अ = आ). However, the word "कंटकाकीर्ण" itself is not a standard or commonly used word in Hindi. While the संधि rule is applied correctly, the resulting word is questionable in its usage and validity. Therefore, it's the most inappropriate option from the perspective of standard Hindi vocabulary.
Here's why the other options are correct:
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Option 1: कुसुम + आकार = कुसुमाकर: This is a correct example of दीर्घ संधि (अ + आ = आ). "कुसुमाकर" is a valid word meaning "full of flowers" or "spring."
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Option 3: स्व + अनुभूत = स्वानुभूत: This is a correct example of दीर्घ संधि (अ + अ = आ). "स्वानुभूत" is a valid word meaning "self-experienced."
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Option 4: खग + आश्रय = खगाश्रय: This is a correct example of दीर्घ संधि (अ + आ = आ). "खगाश्रय" is a valid word meaning "a place where birds take shelter."
Therefore, only Option 2 presents a problem because while the संधि rule is applied correctly, the resulting word is not a standard or commonly used word, making it the most inappropriate option.
Question 351
अकर्मक क्रिया' से रहित वाक्य है ?
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मोहन ऊँट को दौड़ाता है।
व्याख्या:
अकर्मक क्रिया वह क्रिया होती है जिसका कर्म नहीं होता, अर्थात क्रिया का फल कर्ता पर ही पड़ता है। सकर्मक क्रिया में कर्म होता है और क्रिया का फल कर्म पर पड़ता है।
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विकल्प 4 सही क्यों है: "मोहन ऊँट को दौड़ाता है" वाक्य में 'दौड़ाता है' क्रिया है। इस क्रिया का कर्म 'ऊँट' है। मोहन (कर्ता) ऊँट (कर्म) को दौड़ा रहा है। चूंकि इस वाक्य में कर्म मौजूद है, इसलिए यह सकर्मक क्रिया का उदाहरण है, और प्रश्न में अकर्मक क्रिया से रहित वाक्य पूछा गया है, इसलिए यह सही उत्तर है।
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अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
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विकल्प 1: भिखारी ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रहे थे। इस वाक्य में 'चिल्ला रहे थे' क्रिया है। 'क्या चिल्ला रहे थे?' का कोई स्पष्ट उत्तर नहीं है। क्रिया का फल सीधे भिखारी (कर्ता) पर पड़ रहा है। इसलिए यह अकर्मक क्रिया है।
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विकल्प 2: पिताजी पलंग पर सो रहा है। इस वाक्य में 'सो रहा है' क्रिया है। 'क्या सो रहा है?' का कोई स्पष्ट उत्तर नहीं है। क्रिया का फल सीधे पिताजी (कर्ता) पर पड़ रहा है। 'पलंग पर' अधिकरण कारक है, कर्म नहीं। इसलिए यह अकर्मक क्रिया है।
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विकल्प 3: सीमा बगीचे में टहल रही है। इस वाक्य में 'टहल रही है' क्रिया है। 'क्या टहल रही है?' का कोई स्पष्ट उत्तर नहीं है। क्रिया का फल सीधे सीमा (कर्ता) पर पड़ रहा है। 'बगीचे में' अधिकरण कारक है, कर्म नहीं। इसलिए यह अकर्मक क्रिया है।
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इसलिए, केवल विकल्प 4 ही सकर्मक क्रिया का उदाहरण है और अकर्मक क्रिया से रहित है।
Question 352
असुमेलित विकल्प चुनिए :
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असुमेलित विकल्प है: 2. बदरी + अयन = बादरायण
व्याख्या:
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विकल्प 2 असुमेलित क्यों है: "बदरी + अयन" का सही संधि रूप "बादरायण" नहीं होता। "बदरी" और "अयन" मिलकर "बदर्यायन" बनना चाहिए था। "बादरायण" एक प्रसिद्ध ऋषि का नाम है, लेकिन यह संधि के नियमों के अनुसार "बदरी + अयन" से नहीं बनता। इसलिए यह विकल्प असुमेलित है।
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अन्य विकल्प क्यों सुमेलित हैं:
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1. विधुर + य = वैधुर्य: यह सही है। "विधुर" शब्द में "य" प्रत्यय लगने से "वैधुर्य" बनता है, जिसका अर्थ है विधुर होने की अवस्था या भाव।
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3. नोक + ईला = नुकीला: यह भी सही है। "नोक" शब्द में "ईला" प्रत्यय लगने से "नुकीला" बनता है, जिसका अर्थ है नोकदार या तीखा।
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4. दंपती + य = दाम्पत्य: यह भी सही है। "दंपती" शब्द में "य" प्रत्यय लगने से "दाम्पत्य" बनता है, जिसका अर्थ है पति-पत्नी का संबंध या वैवाहिक जीवन।
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इसलिए, केवल विकल्प 2 ही संधि के नियमों के अनुसार सही नहीं है, इसलिए यही असुमेलित है।
Question 353
कौन-सा विकल्प सुमेलित नहीं है ?
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Answer & Explanation
Option 2 सुमेलित नहीं है क्योंकि 'अपराधी स्त्री' एक सामान्य वाक्यांश है जो किसी भी ऐसी महिला को संदर्भित करता है जिसने अपराध किया हो। यह किसी विशिष्ट साहित्यिक या सामाजिक संदर्भ में किसी विशेष प्रकार की महिला को इंगित नहीं करता, जैसा कि अन्य विकल्पों में है।
यहाँ अन्य विकल्पों के गलत होने का कारण दिया गया है:
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भोगिनी नारी: यह शब्द संभवतः भोग-विलास में लिप्त महिला को दर्शाता है, जो एक विशिष्ट प्रकार की नारी को इंगित करता है।
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हितकारिणी माता: यह शब्द ऐसी माता को दर्शाता है जो दूसरों का हित चाहती है, खासकर अपने बच्चों का। यह एक विशिष्ट प्रकार की माता को इंगित करता है।
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विवेकी पुरुष: यह शब्द ऐसे पुरुष को दर्शाता है जो बुद्धिमान और समझदार है, जो एक विशिष्ट प्रकार के पुरुष को इंगित करता है।
इसलिए, केवल 'अपराधी स्त्री' एक सामान्य वाक्यांश है और किसी विशिष्ट प्रकार की महिला को नहीं दर्शाता है, इसलिए यह सुमेलित नहीं है।
Question 354
किस विकल्प में एक ही उपसर्ग का प्रयोग हुआ है ?
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Option 2 सही है क्योंकि 'दुर्दमनीय' शब्द में 'दुर्' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। 'दुर्' उपसर्ग का अर्थ 'बुरा', 'कठिन' या 'मुश्किल' होता है। 'दुर्दमनीय' का अर्थ है जिसे दबाना या वश में करना मुश्किल हो।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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Option 1 (दुर्विदग्ध): इस शब्द में 'दुर्' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है, जिसका अर्थ 'बुरा' या 'कठिन' होता है। 'दुर्विदग्ध' का अर्थ है जो बुरी तरह से जला हुआ हो या जो कठिनता से समझ में आए।
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Option 3 (समाधि): इस शब्द में 'सम्' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है, जिसका अर्थ 'अच्छी तरह' या 'साथ' होता है। 'समाधि' का अर्थ है ध्यान की वह अवस्था जिसमें मन पूरी तरह से शांत हो जाता है।
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Option 4 (प्रविधि): इस शब्द में 'प्र' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है, जिसका अर्थ 'आगे', 'विशेष' या 'अधिक' होता है। 'प्रविधि' का अर्थ है किसी कार्य को करने की विशेष विधि या तकनीक।
इसलिए, केवल Option 2 ('दुर्दमनीय') में ही 'दुर्' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है, जबकि अन्य विकल्पों में अलग-अलग उपसर्गों का प्रयोग हुआ है। अतः Option 2 सही उत्तर है।
Question 355
असंगत युग्म का चुनाव कीजिए :
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असंगत युग्म का चुनाव कीजिए :
उत्तर:
ऑप्शन 2 सही है: विविध प्रसंग - हजारी प्रसाद द्विवेदी
व्याख्या:
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ऑप्शन 2 सही क्यों है: 'विविध प्रसंग' हजारी प्रसाद द्विवेदी की रचना नहीं है। यह रामविलास शर्मा की रचना है। इसलिए, यह युग्म असंगत है।
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अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
- ऑप्शन 1: गुप्तधन - प्रेमचंद: 'गुप्तधन' प्रेमचंद द्वारा लिखी गई कहानियों का संग्रह है। इसलिए यह युग्म सही है।
- ऑप्शन 3: कुहासा - अमरकांत: 'कुहासा' अमरकांत द्वारा लिखी गई एक कहानी है। इसलिए यह युग्म सही है।
- ऑप्शन 4: तिरछी रेखाएँ - हरिशंकर परसाई: 'तिरछी रेखाएँ' हरिशंकर परसाई द्वारा लिखा गया एक व्यंग्य संग्रह है। इसलिए यह युग्म सही है।
इसलिए, केवल ऑप्शन 2 में दिया गया युग्म गलत है, क्योंकि 'विविध प्रसंग' रामविलास शर्मा की रचना है, न कि हजारी प्रसाद द्विवेदी की।
Question 356
निम्न नाटकों में से कौन-सा भारतेन्दु द्वारा विरचित मौलिक नाटक नहीं है ?
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विद्यासुंदर भारतेन्दु हरिश्चंद्र द्वारा विरचित मौलिक नाटक नहीं है, बल्कि यह उनका अनुवादित नाटक है। यह नाटक संस्कृत के प्रसिद्ध नाटक "चौरपंचाशिका" पर आधारित है। भारतेन्दु ने इसका अनुवाद करके इसे हिंदी में प्रस्तुत किया था। इसलिए, यह उनका मौलिक नाटक नहीं माना जाता।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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प्रेम जोगिनी: यह भारतेन्दु हरिश्चंद्र द्वारा रचित एक मौलिक नाटक है। यह नाटक काशी के सामाजिक परिवेश और धार्मिक पाखंडों पर व्यंग्य करता है।
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नीलदेवी: यह भी भारतेन्दु हरिश्चंद्र का एक मौलिक नाटक है। यह एक ऐतिहासिक नाटक है जो पंजाब की एक वीरांगना रानी नीलदेवी की कहानी पर आधारित है।
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अंधेर नगरी: यह भारतेन्दु हरिश्चंद्र का सबसे प्रसिद्ध और मौलिक नाटकों में से एक है। यह एक प्रहसन है जो तत्कालीन राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य करता है।
इसलिए, केवल विद्यासुंदर ही भारतेन्दु का मौलिक नाटक नहीं है, बल्कि एक अनुवादित कृति है।
Question 357
कन्नड़ की मीरा' किस लेखिका को कहा जाता है ?
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Answer & Explanation
कन्नड़ की मीरा' अक्क महादेवी को कहा जाता है, इसका कारण यह है कि अक्क महादेवी 12वीं शताब्दी की एक प्रमुख कन्नड़ कवयित्री और संत थीं, जिन्होंने भगवान शिव (जिन्हें वे 'चेन्नमल्लिकार्जुन' कहती थीं) के प्रति अपनी गहरी भक्ति और प्रेम को अपनी कविताओं में व्यक्त किया। उनकी कविताएँ त्याग, वैराग्य और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना से ओतप्रोत हैं, जो उन्हें मीराबाई के समान भक्ति मार्ग का अनुयायी बनाती हैं। मीराबाई की तरह, अक्क महादेवी ने भी सांसारिक सुखों का त्याग कर दिया और अपना जीवन भगवान के प्रति समर्पित कर दिया। उनकी कविताएँ उनके आध्यात्मिक अनुभव और ईश्वर के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध को दर्शाती हैं, इसलिए उन्हें 'कन्नड़ की मीरा' कहना उचित है।
अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि:
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ललद्धद: ललद्धद (या लल्लेश्वरी) 14वीं शताब्दी की कश्मीरी शैव संत और कवयित्री थीं। वे अपनी 'वाख' नामक कविताओं के लिए जानी जाती हैं, जो कश्मीरी संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण हैं। हालांकि वे भी एक संत थीं और उन्होंने ईश्वर के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त की, लेकिन उन्हें 'कन्नड़ की मीरा' नहीं कहा जाता।
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महादेवी वर्मा: महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की एक प्रमुख कवयित्री थीं और उन्हें 'आधुनिक मीरा' के रूप में जाना जाता है। उनकी कविताएँ वेदना और रहस्यवाद से भरी हैं, लेकिन वे कन्नड़ साहित्य से संबंधित नहीं हैं।
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आण्डाल: आण्डाल 8वीं शताब्दी की तमिल वैष्णव संत थीं। वे 'तिरुपवाई' और 'नाचियार तिरुमोझी' जैसी रचनाओं के लिए जानी जाती हैं। वे दक्षिण भारत की एक महत्वपूर्ण संत हैं, लेकिन उन्हें 'कन्नड़ की मीरा' नहीं कहा जाता।
Question 358
आलोचकों ने किस कवि के लिए कहा है कि - “उनकी कविता में व्यर्थ का उलझाव, अखबारी सतहीपन और वैचारिक धुंध के बजाय संयम परिष्कार और साफ-सुथरापन है।"
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Answer & Explanation
आलोचकों ने कुँवर नारायण के लिए कहा है कि - “उनकी कविता में व्यर्थ का उलझाव, अखबारी सतहीपन और वैचारिक धुंध के बजाय संयम परिष्कार और साफ-सुथरापन है।"
Option 3 (कुँवर नारायण) सही क्यों है:
कुँवर नारायण की कविता अपनी संयमित भाषा, परिष्कृत शैली और स्पष्ट वैचारिक दृष्टिकोण के लिए जानी जाती है। आलोचकों ने अक्सर उनकी कविताओं में अनावश्यक जटिलता से बचने और एक साफ-सुथरे, सुबोध तरीके से अपनी बात कहने की प्रशंसा की है। उनकी कविताएँ गहन दार्शनिक विषयों को भी सरल और सुगम तरीके से प्रस्तुत करती हैं। यह कथन सीधे तौर पर कुँवर नारायण की काव्य शैली और उनके लेखन के प्रति आलोचकों के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
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राजेश जोशी: राजेश जोशी की कविताएँ सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर केंद्रित होती हैं, और उनमें एक तीखापन और व्यंग्य होता है। जबकि उनकी कविताएँ महत्वपूर्ण हैं, उनमें कुँवर नारायण की कविता में पाए जाने वाले संयम और परिष्कार की कमी है।
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मुक्तिबोध: मुक्तिबोध की कविताएँ जटिल, उलझी हुई और अक्सर निराशावादी होती हैं। उनकी कविता में वैचारिक धुंध और एक प्रकार का आंतरिक संघर्ष स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जो दिए गए कथन के विपरीत है।
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उमाशंकर जोशी: उमाशंकर जोशी गुजराती साहित्य के एक महत्वपूर्ण कवि हैं। हालाँकि, प्रश्न हिंदी साहित्य के संदर्भ में है, और उमाशंकर जोशी की कविताएँ उस संयम, परिष्कार और साफ-सुथरेपन के लिए उतनी प्रसिद्ध नहीं हैं जितनी कुँवर नारायण की।
Question 359
मनोहर श्याम जोशी को 'क्याप' के लिए किस वर्ष साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया ?
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Answer & Explanation
मनोहर श्याम जोशी को 'क्याप' के लिए वर्ष 2005 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसलिए विकल्प 3 सही है।
अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि:
- विकल्प 1 (2003 में): मनोहर श्याम जोशी को 'क्याप' के लिए 2003 में साहित्य अकादमी पुरस्कार नहीं मिला था।
- विकल्प 2 (2004 में): मनोहर श्याम जोशी को 'क्याप' के लिए 2004 में साहित्य अकादमी पुरस्कार नहीं मिला था।
- विकल्प 4 (2006 में): मनोहर श्याम जोशी को 'क्याप' के लिए 2006 में साहित्य अकादमी पुरस्कार नहीं मिला था।
अतः, केवल विकल्प 3 सही है।
Question 360
निम्न सूचियों को सुमेलित करते हुए सही विकल्प का चयन कीजिए :
सूची - I : सूची - II
i. जगद्विनोद : (a) भूषण
ii. कृपाकंद : (b) देव
iii. सुजान विनोद : (c) पद्माकर
iv. दूषण उल्लास : (d) घनानन्द
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Answer & Explanation
Option 1 सही है क्योंकि यह निम्नलिखित मिलान को सटीक रूप से दर्शाता है:
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i. जगद्विनोद : (c) पद्माकर: जगद्विनोद पद्माकर द्वारा रचित एक प्रसिद्ध रचना है। पद्माकर रीतिकाल के महत्वपूर्ण कवियों में से एक थे और जगद्विनोद उनकी प्रसिद्ध कृतियों में से एक है।
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ii. कृपाकंद : (d) घनानन्द: कृपाकंद घनानंद की रचना है। घनानंद रीतिमुक्त काव्यधारा के प्रमुख कवि थे और उनकी रचनाओं में प्रेम और विरह की गहरी अनुभूति मिलती है।
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iii. सुजान विनोद : (b) देव: सुजान विनोद देव द्वारा रचित है। देवदत्त (देव) रीतिकाल के महत्वपूर्ण कवि थे और सुजान विनोद उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है।
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iv. दूषण उल्लास : (a) भूषण: दूषण उल्लास भूषण द्वारा रचित है। भूषण रीतिकाल के वीर रस के कवि थे और उन्होंने शिवाजी महाराज और छत्रसाल की वीरता का वर्णन किया है।
अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि वे कवियों और उनकी रचनाओं का गलत मिलान करते हैं। उदाहरण के लिए:
- Option 2: कृपाकंद को देव से मिलाता है, जो गलत है। कृपाकंद घनानंद की रचना है।
- Option 3 और 4: जगद्विनोद को भूषण से मिलाते हैं, जो गलत है। जगद्विनोद पद्माकर की रचना है।
इसलिए, Option 1 ही सही उत्तर है क्योंकि यह कवियों और उनकी रचनाओं का सही मिलान प्रस्तुत करता है।