HTET Exam Level 3 PGT
HTET exam Level 3 PGT preparation with Clear Cutoff
Verified Answers and Explanations
by Clear Cutoff
Showing 20 of 20 questions
Question 301
What is the word for a 'play on words' ?
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Answer & Explanation
The word for a 'play on words' is a pun.
Here's why:
- Pun: A pun is a humorous effect achieved by using a word in a way that suggests two or more of its meanings or the meaning of another word similar in sound. This directly aligns with the definition of a 'play on words'.
Here's why the other options are incorrect:
- Simile: A simile is a figure of speech that compares two unlike things using "like" or "as." It's about making a comparison, not playing with the multiple meanings of words.
- Haiku: A haiku is a traditional form of Japanese poetry consisting of three lines with a 5-7-5 syllable count. It's a specific poetic structure, not a linguistic device for humor.
- Metaphor: A metaphor is a figure of speech that directly compares two unlike things without using "like" or "as," implying one thing is another. While metaphors can be clever, they don't rely on the multiple meanings of a single word in the same way a pun does.
Question 302
Fill in the blank with the correct option :
This house _____ to me.
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Answer & Explanation
The correct answer is Option 1: belongs.
Explanation:
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Why Option 1 (belongs) is correct: The verb "belong" describes a state of ownership or possession. It's a stative verb, meaning it describes a state rather than an action. Stative verbs are generally used in the simple present tense to describe a current state or fact. "This house belongs to me" is a simple, direct statement of ownership, expressing a current and ongoing state.
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Why Option 2 (is belonging) is incorrect: "Is belonging" is the present continuous tense. Stative verbs like "belong" are generally not used in continuous tenses. Using "is belonging" would be grammatically incorrect and sound unnatural. While there might be rare, highly specific contexts where a stative verb is used in a continuous tense for emphasis or a temporary situation, ownership is not typically one of them. The sentence implies a permanent or long-term state of ownership, making the continuous tense inappropriate.
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Why Option 3 (has been belonging) is incorrect: "Has been belonging" is the present perfect continuous tense. This tense is used to describe an action that started in the past and is still continuing. As with the present continuous, stative verbs like "belong" are generally not used in the present perfect continuous tense. It would imply that the house started belonging to me at some point in the past and is still in the process of belonging to me, which doesn't make logical sense in the context of ownership.
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Why Option 4 (had belonging) is incorrect: "Had belonging" is grammatically incorrect. The past perfect tense requires a past participle form of the verb, which would be "belonged." Even if it were "had belonged," it would still be incorrect. The past perfect tense describes an action completed before another action in the past. It doesn't fit the context of a simple statement of current ownership. The sentence needs to express a present state, not a past action completed before another past action.
Question 303
बच्चों से शांत नहीं रहा जा सकता।'
उक्त वाक्य में किस 'वाच्य' का प्रयोग हुआ है ?
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Answer & Explanation
भाववाच्य
व्याख्या:
'बच्चों से शांत नहीं रहा जा सकता' वाक्य में 'भाववाच्य' का प्रयोग हुआ है, क्योंकि:
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भाव की प्रधानता: इस वाक्य में कर्ता (बच्चे) या कर्म (शांत रहना) की प्रधानता नहीं है, बल्कि 'शांत न रह पाने' के भाव की प्रधानता है। क्रिया का भाव ही मुख्य है।
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अकर्मक क्रिया: 'रहा जा सकता' क्रिया अकर्मक है, और भाववाच्य में प्रायः अकर्मक क्रिया का प्रयोग होता है।
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असमर्थता का बोध: वाक्य में बच्चों की शांत रहने में असमर्थता का भाव व्यक्त हो रहा है, जो भाववाच्य का एक विशिष्ट लक्षण है।
अन्य विकल्पों का खंडन:
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कर्तृवाच्य: कर्तृवाच्य में कर्ता की प्रधानता होती है और क्रिया कर्ता के लिंग और वचन के अनुसार बदलती है। इस वाक्य में ऐसा नहीं है।
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कर्मवाच्य: कर्मवाच्य में कर्म की प्रधानता होती है और क्रिया कर्म के लिंग और वचन के अनुसार बदलती है। इस वाक्य में कर्म स्पष्ट रूप से मौजूद नहीं है और क्रिया का रूप कर्म के अनुसार नहीं है।
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मिश्रवाच्य: मिश्रवाच्य वाक्य संरचना का एक प्रकार है, वाच्य का नहीं। यह दो या दो से अधिक उपवाक्यों से मिलकर बनता है। दिया गया वाक्य सरल वाक्य है, मिश्र वाक्य नहीं।
इसलिए, स्पष्ट रूप से, 'बच्चों से शांत नहीं रहा जा सकता' वाक्य में 'भाववाच्य' का प्रयोग हुआ है।
Question 304
निम्न विकल्पों में शुद्ध वाक्य का चयन कीजिए -
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Answer & Explanation
शीला को उसकी योग्यता पर गर्व है।
व्याख्या:
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विकल्प 4 सही क्यों है: यह वाक्य व्याकरण की दृष्टि से पूर्णतः शुद्ध है। इसमें कर्ता (शीला), कर्म (गर्व), और क्रिया (है) का सही प्रयोग हुआ है। "उसकी योग्यता पर" वाक्यांश शीला के गर्व का कारण स्पष्ट करता है, जो वाक्य को अर्थपूर्ण बनाता है।
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अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
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विकल्प 1: बन्दूक एक अस्त्र है। यह वाक्य गलत है क्योंकि बन्दूक एक शस्त्र है, अस्त्र नहीं। अस्त्र फेंका जाता है, जबकि शस्त्र हाथ में रखकर चलाया जाता है।
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विकल्प 2: वह पाँव से जूता निकाल रहा है। यह वाक्य अनावश्यक रूप से जटिल है। "वह पाँव से जूता निकाल रहा है" के बजाय "वह जूता निकाल रहा है" कहना अधिक स्वाभाविक और सही होगा। "पाँव से" का प्रयोग अनावश्यक है क्योंकि जूता पैर से ही निकाला जाता है।
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विकल्प 3: हिन्दी की भाषा देवनागरी है। यह वाक्य गलत है। देवनागरी हिन्दी भाषा की लिपि है, भाषा नहीं। सही वाक्य होगा "हिन्दी की लिपि देवनागरी है"।
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इसलिए, केवल विकल्प 4 व्याकरणिक रूप से सही और अर्थपूर्ण है।
Question 305
"कबीर में जैसे सामाजिक विद्रोह का तीखापन और प्रणयानुभूति की कोमलता एक साथ मिलती है : कुछ वैसा ही रचाव मुक्तिबोध में है।"
उक्त कथन किस आलोचक का है ?
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कबीर में जैसे सामाजिक विद्रोह का तीखापन और प्रणयानुभूति की कोमलता एक साथ मिलती है : कुछ वैसा ही रचाव मुक्तिबोध में है।" उक्त कथन डॉ० रामस्वरूप चतुर्वेदी का है।
Option 3 (डॉ० रामस्वरूप चतुर्वेदी) सही क्यों है:
डॉ० रामस्वरूप चतुर्वेदी एक प्रतिष्ठित हिंदी आलोचक थे जिन्होंने साहित्य और संस्कृति पर गहन चिंतन किया। मुक्तिबोध पर उनके लेखन में, उन्होंने अक्सर मुक्तिबोध की कविता में कबीर के समान सामाजिक चेतना और व्यक्तिगत भावनाओं के जटिल मिश्रण को रेखांकित किया है। चतुर्वेदी जी की आलोचनात्मक दृष्टि मुक्तिबोध की रचनाओं में निहित अंतर्विरोधों और जटिलताओं को समझने में सहायक है। उन्होंने मुक्तिबोध की कविता में सामाजिक विद्रोह और व्यक्तिगत प्रेम की भावनाओं के सह-अस्तित्व को कबीर के संदर्भ में रखकर एक नई व्याख्या प्रस्तुत की, जो उनके आलोचनात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती है। इसलिए, यह कथन डॉ० रामस्वरूप चतुर्वेदी के आलोचनात्मक स्वभाव और मुक्तिबोध पर उनके विचारों के अनुरूप है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
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Option 1 (डॉ० नगेन्द्र): डॉ० नगेन्द्र एक प्रसिद्ध आलोचक थे, लेकिन उनकी आलोचना शैली आमतौर पर सौंदर्यशास्त्रीय और मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर अधिक केंद्रित थी। मुक्तिबोध पर उनके लेखन में कबीर के साथ इस प्रकार की तुलनात्मकता उतनी प्रमुखता से नहीं मिलती जितनी रामस्वरूप चतुर्वेदी के लेखन में।
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Option 2 (रामविलास शर्मा): रामविलास शर्मा एक मार्क्सवादी आलोचक थे और उन्होंने साहित्य को सामाजिक और आर्थिक संदर्भों में विश्लेषित किया। मुक्तिबोध पर उनके विचार सामाजिक यथार्थवाद और वर्ग संघर्ष पर अधिक केंद्रित थे। कबीर के साथ इस प्रकार की भावनात्मक और सामाजिक मिश्रण की तुलनात्मकता उनके लेखन में कम दिखाई देती है।
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Option 4 (विद्यानिवास मिश्र): विद्यानिवास मिश्र एक ललित निबंधकार और सांस्कृतिक चिंतक थे। उनकी आलोचना शैली में लोक संस्कृति और भारतीय दर्शन का प्रभाव अधिक दिखाई देता है। मुक्तिबोध पर उनके लेखन में कबीर के साथ इस प्रकार की तुलनात्मकता का अभाव है।
इसलिए, दिए गए विकल्पों में से, डॉ० रामस्वरूप चतुर्वेदी ही वह आलोचक हैं जिनकी आलोचनात्मक दृष्टि और लेखन शैली इस कथन के सबसे अधिक अनुरूप है।
Question 306
जहाँ कार्य और कारण के बीच संगति का अभाव हो, वहाँ कौन-सा अलंकार माना जाएगा ?
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जहाँ कार्य और कारण के बीच संगति का अभाव हो, वहाँ असंगति अलंकार माना जाएगा।
असंगति अलंकार क्यों सही है:
असंगति अलंकार की परिभाषा ही यह है कि जहाँ कारण कहीं और हो और कार्य कहीं और हो, यानी कारण और कार्य में संगति या मेल न हो। प्रश्न में भी यही कहा गया है कि कार्य और कारण के बीच संगति का अभाव हो। इसलिए, असंगति अलंकार बिल्कुल सटीक बैठता है। उदाहरण के लिए, "हृदय घाव मेरे, पीर रघुवीरै" - घाव हृदय में है, लेकिन पीड़ा रघुवीर को हो रही है। यहाँ कारण (घाव) और कार्य (पीड़ा) अलग-अलग स्थानों पर हैं, इसलिए असंगति अलंकार है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
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विरोधाभास: विरोधाभास अलंकार में वास्तव में विरोध नहीं होता, बल्कि विरोध का आभास होता है। दो विरोधी बातें एक साथ कही जाती हैं, लेकिन उनका अर्थ गहरा होता है। प्रश्न में कार्य और कारण के बीच केवल संगति के अभाव की बात है, विरोध की नहीं।
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दीपक: दीपक अलंकार में एक ही शब्द या वाक्यांश का प्रयोग कई वाक्यों में किया जाता है, जिससे सभी वाक्य प्रकाशित हो जाते हैं। इसका कार्य और कारण के संगति या असंगति से कोई संबंध नहीं है।
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विभावना: विभावना अलंकार में कारण के अभाव में भी कार्य का होना दिखाया जाता है। जैसे, "बिनु पग चलै सुनै बिनु काना"। यहाँ बिना पैर के चलने और बिना कान के सुनने की बात है। प्रश्न में कारण का अभाव नहीं, बल्कि कारण और कार्य के बीच संगति का अभाव है।
इसलिए, स्पष्ट रूप से असंगति अलंकार ही सही उत्तर है क्योंकि यह कार्य और कारण के बीच संगति के अभाव को दर्शाता है, जैसा कि प्रश्न में पूछा गया है।
Question 307
आदिवासी : विकास से विस्थापन' किसकी रचना है ?
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'आदिवासी : विकास से विस्थापन' रमणिका गुप्ता की रचना है।
Option 2 सही क्यों है:
रमणिका गुप्ता एक जानी-मानी लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता थीं जिन्होंने आदिवासी समुदायों के अधिकारों और उनके विस्थापन के मुद्दों पर विस्तार से लिखा है। 'आदिवासी : विकास से विस्थापन' उनकी एक महत्वपूर्ण कृति है जो विकास परियोजनाओं के कारण आदिवासियों के विस्थापन के दर्द और चुनौतियों को उजागर करती है। यह पुस्तक इस विषय पर उनके गहन शोध और अनुभवों पर आधारित है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
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अनुज लुगुन: अनुज लुगुन एक कवि और लेखक हैं, लेकिन 'आदिवासी : विकास से विस्थापन' उनकी रचना नहीं है। उनकी रचनाएँ आदिवासी जीवन और संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित हैं, लेकिन यह विशिष्ट कृति उनकी नहीं है।
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हरिराम मीणा: हरिराम मीणा एक लेखक और प्रशासनिक अधिकारी हैं। उन्होंने आदिवासी मुद्दों पर लिखा है, लेकिन 'आदिवासी : विकास से विस्थापन' उनकी रचना नहीं है।
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लक्ष्मण गायकवाड़: लक्ष्मण गायकवाड़ एक लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो दलित साहित्य में योगदान के लिए जाने जाते हैं। 'आदिवासी : विकास से विस्थापन' उनकी रचना नहीं है। उनकी रचनाएँ मुख्य रूप से दलित समुदाय के अनुभवों पर केंद्रित हैं।
इसलिए, दिए गए विकल्पों में से, केवल रमणिका गुप्ता ही 'आदिवासी : विकास से विस्थापन' की लेखिका हैं।
Question 308
निम्न शब्दों में से शुद्ध शब्द का चयन कीजिए :
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पश्चात्ताप शुद्ध शब्द है क्योंकि यह सही वर्तनी के साथ पश्चाताप की भावना को व्यक्त करता है।
अन्य विकल्प अशुद्ध हैं क्योंकि:
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तत्व: यह शब्द सही है, लेकिन प्रश्न में दिए गए विकल्पों में से, पश्चात्ताप अधिक स्पष्ट रूप से अशुद्धियों से मुक्त है। हालांकि 'तत्व' सही है, 'पश्चात्ताप' की तुलना में इसे शुद्ध शब्द के रूप में चुनना कम उचित है क्योंकि अन्य विकल्पों में अधिक स्पष्ट त्रुटियां हैं।
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तत्वावधान: इस शब्द में वर्तनी की त्रुटि है। सही शब्द "तत्त्वावधान" है।
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उतप्त: इस शब्द में भी वर्तनी की त्रुटि है। सही शब्द "उत्तप्त" है।
इसलिए, वर्तनी की त्रुटियों के आधार पर, "पश्चात्ताप" दिए गए विकल्पों में सबसे शुद्ध शब्द है।
Question 309
अंग्रेजी स्वच्छन्दतावादी काव्य का प्रभाव हिन्दी की किस काव्यधारा पर दिखाई देता है ?
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छायावाद
छायावाद सही उत्तर क्यों है:
अंग्रेजी स्वच्छन्दतावादी काव्य (English Romantic Poetry) का प्रभाव हिन्दी की छायावादी काव्यधारा पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। छायावाद, जो कि लगभग 1918 से 1936 तक फला-फूला, कई मायनों में अंग्रेजी स्वच्छन्दतावाद से प्रेरित था। यहाँ कुछ प्रमुख कारण दिए गए हैं:
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व्यक्तिवाद और आत्म-अभिव्यक्ति: अंग्रेजी स्वच्छन्दतावादी कवियों जैसे विलियम वर्ड्सवर्थ, पर्सी बिश शेली, और जॉन कीट्स ने व्यक्तिगत भावनाओं, अनुभवों और कल्पना को महत्व दिया। छायावादी कवियों जैसे जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', सुमित्रानंदन पंत, और महादेवी वर्मा ने भी अपनी कविताओं में व्यक्तिगत भावनाओं, प्रेम, विरह, और प्रकृति के प्रति अपने अनुभवों को व्यक्त किया।
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प्रकृति प्रेम: अंग्रेजी स्वच्छन्दतावादी कवियों ने प्रकृति को एक प्रेरणा स्रोत और आध्यात्मिक सांत्वना के रूप में देखा। छायावादी कवियों ने भी प्रकृति को अपनी कविताओं में महत्वपूर्ण स्थान दिया और उसे मानवीय भावनाओं के साथ जोड़ा। प्रकृति का मानवीकरण छायावाद की एक प्रमुख विशेषता है, जो अंग्रेजी स्वच्छन्दतावाद से प्रेरित है।
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कल्पना और रहस्यवाद: अंग्रेजी स्वच्छन्दतावादी काव्य में कल्पना और रहस्यवाद का महत्वपूर्ण स्थान है। छायावादी कवियों ने भी अपनी कविताओं में कल्पना और रहस्यवाद का प्रयोग किया, जिससे उनकी कविताएँ अधिक भावपूर्ण और रहस्यमय बन गईं।
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रूढ़ियों का विरोध: अंग्रेजी स्वच्छन्दतावादी कवियों ने तत्कालीन सामाजिक और साहित्यिक रूढ़ियों का विरोध किया। छायावादी कवियों ने भी पुरानी काव्य शैलियों और विषयों का त्याग करके नए विषयों और शैलियों को अपनाया।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
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प्रगतिवाद: प्रगतिवाद एक मार्क्सवादी विचारधारा से प्रभावित काव्यधारा है जो सामाजिक और आर्थिक समानता पर जोर देती है। यह छायावाद के बाद आया और इसका ध्यान यथार्थवादी चित्रण और सामाजिक परिवर्तन पर था, न कि व्यक्तिगत भावनाओं और प्रकृति पर। इसलिए, अंग्रेजी स्वच्छन्दतावादी काव्य का प्रभाव इस पर कम दिखाई देता है।
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नई कविता: नई कविता 1950 के दशक में शुरू हुई और यह आधुनिकता, व्यक्तिवाद, और प्रयोगशीलता पर केंद्रित थी। यह छायावाद से अलग एक नई दिशा में विकसित हुई और अंग्रेजी स्वच्छन्दतावादी काव्य का सीधा प्रभाव इस पर नहीं है।
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हालावाद: हालावाद, जिसे 'व्यक्तिवादी काव्य' भी कहा जाता है, में प्रेम और मस्ती का चित्रण होता है। जबकि इसमें व्यक्तिगत भावनाएँ हैं, यह अंग्रेजी स्वच्छन्दतावाद की तुलना में अधिक भौतिकवादी और कम आध्यात्मिक है। हालावाद में प्रकृति का चित्रण छायावाद जितना गहरा नहीं है।
इसलिए, छायावाद ही वह काव्यधारा है जिस पर अंग्रेजी स्वच्छन्दतावादी काव्य का प्रभाव सबसे अधिक दिखाई देता है।
Question 310
निम्न में से कौन-सा शब्द 'यण् स्वर-संधि' से निर्मित नहीं है ?
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Answer & Explanation
'प्रौद्योगिकी' शब्द 'यण् स्वर-संधि' से निर्मित नहीं है, इसका कारण यह है:
- प्रौद्योगिकी: इस शब्द का संधि विच्छेद 'प्रौढ़ + औद्योगिकी' होगा। यहाँ 'औ' स्वर की संधि हो रही है, जो कि यण् संधि का नियम नहीं है। यण् संधि में 'इ/ई', 'उ/ऊ', और 'ऋ' के बाद कोई भिन्न स्वर आने पर क्रमशः 'य्', 'व्', और 'र्' में परिवर्तन होता है। 'प्रौद्योगिकी' में ऐसा कोई परिवर्तन नहीं हो रहा है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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अभ्यागत: इस शब्द का संधि विच्छेद 'अभि + आगत' है। यहाँ 'इ' के बाद 'आ' आने से 'य्' में परिवर्तन हो रहा है (अभि + आगत = अभ्यागत)। यह यण् संधि का उदाहरण है।
-
व्याघात: इस शब्द का संधि विच्छेद 'वि + आघात' है। यहाँ 'इ' के बाद 'आ' आने से 'य्' में परिवर्तन हो रहा है (वि + आघात = व्याघात)। यह यण् संधि का उदाहरण है।
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जात्यभिमान: इस शब्द का संधि विच्छेद 'जाति + अभिमान' है। यहाँ 'इ' के बाद 'अ' आने से 'य्' में परिवर्तन हो रहा है (जाति + अभिमान = जात्यभिमान)। यह यण् संधि का उदाहरण है।
इसलिए, केवल 'प्रौद्योगिकी' शब्द यण् स्वर संधि के नियमों का पालन नहीं करता है।
Question 311
हिन्दी के किस आलोचक ने 'देवरानी जेठानी की कहानी' को हिन्दी का प्रथम उपन्यास माना है ?
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गोपाल राय ने 'देवरानी जेठानी की कहानी' को हिन्दी का प्रथम उपन्यास माना है, इसलिए विकल्प 4 सही है। गोपाल राय ने इस उपन्यास के भाषा-शैली, विषय-वस्तु और सामाजिक संदर्भों का विश्लेषण करते हुए इसे हिन्दी उपन्यास के प्रारंभिक रूप के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने इस उपन्यास में तत्कालीन समाज की पारिवारिक संरचना, रीति-रिवाजों और महिलाओं की स्थिति का चित्रण पाया, जो उपन्यास के विकास के लिए महत्वपूर्ण था।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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डॉ० नगेन्द्र: डॉ० नगेन्द्र एक प्रतिष्ठित आलोचक हैं, लेकिन 'देवरानी जेठानी की कहानी' को हिन्दी का प्रथम उपन्यास मानने के संदर्भ में उनका कोई विशेष उल्लेख नहीं मिलता। उन्होंने हिन्दी साहित्य के इतिहास और आलोचना में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन इस विशिष्ट उपन्यास के बारे में उनकी राय ज्ञात नहीं है।
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नामवर सिंह: नामवर सिंह एक प्रभावशाली आलोचक थे, जिन्होंने आधुनिक हिन्दी साहित्य पर गहरा प्रभाव डाला। हालाँकि, 'देवरानी जेठानी की कहानी' को प्रथम उपन्यास मानने के संबंध में उनका कोई विशेष उल्लेख नहीं है। उनकी आलोचना का क्षेत्र अधिक व्यापक और आधुनिक साहित्य पर केंद्रित रहा है।
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गणपतिचन्द्र गुप्त: गणपतिचन्द्र गुप्त ने हिन्दी साहित्य का वैज्ञानिक इतिहास लिखा है और वे एक महत्वपूर्ण आलोचक हैं। लेकिन, 'देवरानी जेठानी की कहानी' को हिन्दी का प्रथम उपन्यास मानने के संदर्भ में उनका नाम प्रमुखता से नहीं आता।
इसलिए, गोपाल राय ही वह आलोचक हैं जिन्हें 'देवरानी जेठानी की कहानी' को हिन्दी का प्रथम उपन्यास मानने के लिए जाना जाता है, जिससे विकल्प 4 सही उत्तर है।
Question 312
स्वदेश दीपक की रचना है -
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स्वदेश दीपक की रचना मैंने मांडू नहीं देखा है।
व्याख्या:
- मैंने मांडू नहीं देखा: यह स्वदेश दीपक द्वारा लिखित एक यात्रा वृत्तांत है। इसमें लेखक ने मांडू की यात्रा के अपने अनुभवों और विचारों को साझा किया है। इसलिए, यह स्वदेश दीपक की रचना है।
अन्य विकल्पों की अस्वीकृति:
- कबीरा खड़ा बाज़ार में: यह भीष्म साहनी द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध नाटक है। यह कबीर के जीवन और दर्शन पर आधारित है। इसलिए, यह स्वदेश दीपक की रचना नहीं है।
- बकरी: यह सर्वेश्वर दयाल सक्सेना द्वारा लिखित एक व्यंग्यात्मक नाटक है। यह भारतीय राजनीति और समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार पर कटाक्ष करता है। इसलिए, यह स्वदेश दीपक की रचना नहीं है।
- आर्षवचन: यह एक सामान्य शब्द है जिसका अर्थ है ऋषियों द्वारा कहे गए वचन। यह किसी विशिष्ट लेखक की रचना नहीं है। इसलिए, यह स्वदेश दीपक की रचना नहीं है।
अतः, स्पष्ट रूप से मैंने मांडू नहीं देखा ही स्वदेश दीपक की रचना है।
Question 313
काव्यशोभाकरान् धर्मान् अलंकारान् प्रचक्षते'
अलंकार संबंधी उक्त परिभाषा किस आचार्य ने दी है ?
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'काव्यशोभाकरान् धर्मान् अलंकारान् प्रचक्षते' अलंकार संबंधी उक्त परिभाषा आचार्य दण्डी ने दी है।
Option 2 (दण्डी) सही क्यों है:
आचार्य दण्डी ने अपने ग्रंथ 'काव्यादर्श' में अलंकारों को परिभाषित करते हुए कहा है कि जो काव्य के शोभाकारक धर्म हैं, उन्हें अलंकार कहा जाता है। यह परिभाषा सीधे तौर पर प्रश्न में दी गई परिभाषा से मेल खाती है। दण्डी अलंकार संप्रदाय के महत्वपूर्ण आचार्य हैं और उन्होंने अलंकारों के स्वरूप और महत्व पर विस्तार से विचार किया है। 'काव्यादर्श' में उन्होंने अलंकारों का विस्तृत विवेचन प्रस्तुत किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह परिभाषा उन्हीं की है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
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Option 1 (भामह): भामह, जो कि 'काव्यालंकार' के रचयिता हैं, अलंकार संप्रदाय के प्रवर्तक माने जाते हैं, लेकिन उनकी अलंकार संबंधी परिभाषा प्रश्न में दी गई परिभाषा से भिन्न है। भामह ने अलंकारों को काव्य का अनिवार्य तत्व माना है, लेकिन उनकी परिभाषा का सटीक शब्द विन्यास प्रश्न में दिए गए उद्धरण से मेल नहीं खाता।
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Option 3 (आनन्दवर्धन): आनन्दवर्धन ध्वनि सिद्धांत के प्रतिपादक हैं। उनका मुख्य ध्यान काव्य में ध्वनि के महत्व को स्थापित करना था, अलंकारों को परिभाषित करना नहीं। इसलिए, यह परिभाषा उनसे संबंधित नहीं है।
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Option 4 (राजशेखर): राजशेखर एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे और उन्होंने काव्यशास्त्र के विभिन्न पहलुओं पर लिखा है, लेकिन अलंकार संबंधी यह विशिष्ट परिभाषा उनसे संबंधित नहीं है। उनकी रचनाओं में अलंकारों का उल्लेख मिलता है, लेकिन इस विशेष परिभाषा का श्रेय उन्हें नहीं दिया जा सकता।
इसलिए, स्पष्ट रूप से, 'काव्यशोभाकरान् धर्मान् अलंकारान् प्रचक्षते' यह परिभाषा आचार्य दण्डी द्वारा दी गई है।
Question 314
जीवनी - 'गाँधीजी कौन हैं ?' के लेखक हैं -
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जीवनी - 'गाँधीजी कौन हैं ?' के लेखक रामनरेश त्रिपाठी हैं, इसलिए विकल्प 3 सही है।
विकल्प 3 सही क्यों है:
रामनरेश त्रिपाठी एक प्रसिद्ध कवि, लेखक और गांधीवादी थे। उन्होंने गांधीजी के जीवन और दर्शन से प्रभावित होकर कई रचनाएँ लिखीं। 'गाँधीजी कौन हैं?' नामक जीवनी उनकी गांधीजी के प्रति श्रद्धा और उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य का प्रमाण है। यह पुस्तक गांधीजी के जीवन के विभिन्न पहलुओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करती है, जिससे यह व्यापक दर्शकों तक पहुँच सके। रामनरेश त्रिपाठी का गांधीवादी विचारधारा के प्रति समर्पण और साहित्य के माध्यम से उसे प्रसारित करने का प्रयास इस विकल्प को सही ठहराता है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
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राहुल सांकृत्यायन: राहुल सांकृत्यायन एक प्रसिद्ध लेखक, इतिहासकार और बौद्ध धर्म के विद्वान थे। उन्होंने यात्रा वृत्तांत, जीवनी और इतिहास पर कई पुस्तकें लिखीं, लेकिन 'गाँधीजी कौन हैं?' उनकी रचना नहीं है। उनकी लेखन शैली और विषय-वस्तु रामनरेश त्रिपाठी से भिन्न है।
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विष्णु प्रभाकर: विष्णु प्रभाकर एक प्रसिद्ध हिंदी लेखक थे, जिन्होंने उपन्यास, नाटक और जीवनी सहित कई विधाओं में लेखन किया। उन्होंने 'आवारा मसीहा' नामक शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की जीवनी लिखी, जो बहुत प्रसिद्ध है। हालाँकि, 'गाँधीजी कौन हैं?' उनकी रचना नहीं है।
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राधाकृष्ण दास: राधाकृष्ण दास भारतेंदु हरिश्चंद्र के चचेरे भाई और हिंदी साहित्यकार थे। उन्होंने नाटक और उपन्यास लिखे, लेकिन 'गाँधीजी कौन हैं?' नामक जीवनी उन्होंने नहीं लिखी। उनकी रचनाएँ मुख्य रूप से सामाजिक और ऐतिहासिक विषयों पर केंद्रित थीं।
Question 315
"कविता दो शब्दों के बीच की नीरवता में रहती है।" काव्य-भाषा के संबंध में उपर्युक्त मत किसका है ?
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अज्ञेय।
व्याख्या:
"कविता दो शब्दों के बीच की नीरवता में रहती है।" यह कथन अज्ञेय का है। अज्ञेय, जिन्हें सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' के नाम से जाना जाता है, आधुनिक हिंदी साहित्य के एक प्रमुख कवि, उपन्यासकार, निबंधकार और आलोचक थे। उनकी काव्य-भाषा पर गहरी पकड़ थी और उन्होंने भाषा के सूक्ष्म तत्वों और उसके प्रभाव को लेकर कई महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए। यह कथन उनकी काव्य-भाषा संबंधी समझ को दर्शाता है, जिसमें वे शब्दों के बीच के मौन, अंतराल और अर्थ की गहराई को महत्वपूर्ण मानते हैं। अज्ञेय का मानना था कि कविता केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि शब्दों के बीच की नीरवता में भी अर्थ छिपा होता है, जो पाठक को गहराई से प्रभावित करता है।
अन्य विकल्पों की अस्वीकृति:
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रामविलास शर्मा: रामविलास शर्मा एक प्रतिष्ठित मार्क्सवादी आलोचक थे। उनकी आलोचना सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भों पर केंद्रित होती थी। उनका काव्य-भाषा संबंधी दृष्टिकोण अज्ञेय से भिन्न था, जो भाषा के सूक्ष्म तत्वों पर अधिक ध्यान केंद्रित करते थे। इसलिए, यह कथन रामविलास शर्मा का नहीं हो सकता।
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निर्मल वर्मा: निर्मल वर्मा एक प्रसिद्ध कथाकार और उपन्यासकार थे। उनकी रचनाओं में अस्तित्ववाद और अकेलेपन की भावना प्रमुखता से दिखाई देती है। उनका काव्य-भाषा संबंधी दृष्टिकोण अज्ञेय से अलग था, इसलिए यह कथन निर्मल वर्मा का नहीं है।
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शमशेर बहादुर सिंह: शमशेर बहादुर सिंह एक महत्वपूर्ण कवि थे, लेकिन उनकी काव्य-भाषा में चित्रात्मकता और संवेदनशीलता अधिक होती है। उनका दृष्टिकोण अज्ञेय के दृष्टिकोण से भिन्न था, जो भाषा के सूक्ष्म तत्वों और नीरवता पर अधिक ध्यान केंद्रित करते थे। इसलिए, यह कथन शमशेर बहादुर सिंह का नहीं है।
अतः, स्पष्ट रूप से, "कविता दो शब्दों के बीच की नीरवता में रहती है।" यह कथन अज्ञेय का है।
Question 316
निम्न में से गोकुलनाथ की रचना है -
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Answer & Explanation
चौरासी वैष्णवन की वार्ता गोकुलनाथ की रचना है, इसलिए विकल्प 3 सही है।
यहाँ अन्य विकल्प गलत क्यों हैं, इसका स्पष्टीकरण दिया गया है:
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विकल्प 1: काव्यालंकार: 'काव्यालंकार' भामह द्वारा रचित है, गोकुलनाथ द्वारा नहीं। इसलिए यह विकल्प गलत है।
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विकल्प 2: पउमचरिउ: 'पउमचरिउ' विमलसूरि द्वारा रचित एक अपभ्रंश काव्य है। इसका गोकुलनाथ से कोई संबंध नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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विकल्प 4: काव्यनिर्णय: 'काव्यनिर्णय' भिखारीदास द्वारा रचित है। यह गोकुलनाथ की रचना नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
अतः, स्पष्ट रूप से, 'चौरासी वैष्णवन की वार्ता' गोकुलनाथ की रचना है, जो इसे सही उत्तर बनाता है।
Question 317
तूरिया : तूरीया के लिए सटीक शब्द-युग्म है :
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Answer & Explanation
तूरिया : तूरीया के लिए सटीक शब्द-युग्म है : एक औज़ार : ब्रह्मलीन होने की स्थिति
व्याख्या:
तूरिया, अद्वैत वेदांत में, चेतना की चौथी अवस्था को संदर्भित करता है, जो जागृति (वैश्वानर), स्वप्न (तैजस), और गहरी नींद (प्रज्ञा) से परे है। यह वह अवस्था है जहाँ व्यक्ति ब्रह्म के साथ एकरूपता का अनुभव करता है, जिसे "ब्रह्मलीन होने की स्थिति" कहा जाता है।
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एक औज़ार: यहाँ "औज़ार" एक प्रतीकात्मक अर्थ में है। तूरिया एक ऐसा "औज़ार" है जिसके माध्यम से व्यक्ति अपनी चेतना को जागृति, स्वप्न और गहरी नींद की अवस्थाओं से परे ले जाकर ब्रह्म के साथ एकरूपता का अनुभव करता है। यह एक ऐसा माध्यम है जिससे व्यक्ति आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करता है।
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ब्रह्मलीन होने की स्थिति: यह तूरिया का सटीक वर्णन है। यह वह अवस्था है जहाँ व्यक्तिगत चेतना सार्वभौमिक चेतना में विलीन हो जाती है। यह मुक्ति और परम आनंद की अवस्था है।
अन्य विकल्पों की अस्वीकृति:
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एक छंद : बाँसुरी: "छंद" और "बाँसुरी" दोनों ही संगीत से संबंधित हैं, लेकिन इनका तूरिया से कोई संबंध नहीं है। तूरिया चेतना की एक अवस्था है, न कि कोई संगीत वाद्य यंत्र या साहित्यिक रूप।
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शीघ्र : तरकश: "शीघ्र" का अर्थ है जल्दी, और "तरकश" तीर रखने का पात्र होता है। इन दोनों शब्दों का तूरिया से कोई संबंध नहीं है।
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तुरही : सूरज: "तुरही" एक वाद्य यंत्र है, और "सूरज" एक खगोलीय पिंड है। इनका तूरिया से कोई संबंध नहीं है।
इसलिए, केवल विकल्प 4, "एक औज़ार : ब्रह्मलीन होने की स्थिति," तूरिया के अर्थ को सटीक रूप से दर्शाता है। यह विकल्प तूरिया को एक ऐसे माध्यम के रूप में प्रस्तुत करता है जिसके द्वारा व्यक्ति ब्रह्म के साथ एकरूपता प्राप्त करता है।
Question 318
निम्न में से अशुद्ध शब्द का चयन कीजिए :
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Answer & Explanation
अशुद्ध शब्द तद्धीन है।
तद्धीन अशुद्ध है क्योंकि इसका शुद्ध रूप तदधीन होता है। 'तद' (तत्) का अर्थ 'वह' और 'अधीन' का अर्थ 'के अधीन' होता है। इसलिए, 'तदधीन' का अर्थ 'उसके अधीन' होता है। 'तद्धीन' में 'त्' का 'ध्' में परिवर्तन व्याकरणिक रूप से गलत है।
अन्य विकल्प इस प्रकार सही हैं:
- परिषद्: यह शब्द सही है और इसका अर्थ 'सभा' या 'समिति' होता है।
- तदनन्तर: यह शब्द भी सही है और इसका अर्थ 'उसके बाद' या 'तत्पश्चात' होता है।
- तदाकार: यह शब्द भी सही है और इसका अर्थ 'उस आकार का' या 'वैसा ही आकार' होता है।
इसलिए, केवल तद्धीन ही अशुद्ध है।
Question 319
असंगत विकल्प को विलग कीजिए -
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असंगत विकल्प विकल्प 2 है, और इसका कारण इस प्रकार है:
विकल्प 2 सही क्यों है:
विकल्प 2, "लोगन कबित्त करिबो खेलि करि जानो है - बोधा," असंगत है क्योंकि यह पंक्ति बोधा द्वारा लिखी गई है, लेकिन यह उनकी शैली और विषय-वस्तु से मेल नहीं खाती। बोधा अपनी प्रेम-व्यंजना और विरह-वर्णन के लिए जाने जाते हैं। यह पंक्ति, जो कविता को खेल समझने की बात करती है, बोधा की सामान्य काव्य-शैली से अलग है। यह पंक्ति अधिक व्यंग्यात्मक और आलोचनात्मक लगती है, जो बोधा की प्रेम-प्रधान रचनाओं से भिन्न है। इसलिए, शैली और विषय-वस्तु के आधार पर, यह पंक्ति बोधा की प्रामाणिक रचना नहीं लगती, और इसलिए असंगत है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
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विकल्प 1: रावरे रूप की रीति अनूप नयौ-नयौ लागत ज्यौं-ज्यौं निहारिए। - घनानन्द: यह पंक्ति घनानंद की है और उनकी प्रेम और सौंदर्य के प्रति गहरी अनुभूति को दर्शाती है। यह उनकी भाषा और शैली के अनुरूप है।
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विकल्प 3: नैनन में जो सदा रहते तिनकी अब कान कहानी सुन्यौ करै - आलम: यह पंक्ति आलम की है और उनकी विरह-वेदना और प्रेम की गहराई को व्यक्त करती है। यह उनकी काव्य-शैली के अनुरूप है।
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विकल्प 4: भले-बुरे सब एक सम, जो लौं बोलत नाहिं - वृंद: यह पंक्ति वृंद की है और उनकी नीतिपरक और व्यावहारिक दृष्टिकोण को दर्शाती है। यह उनकी दोहा शैली के अनुरूप है।
संक्षेप में, विकल्प 2 बोधा की शैली और विषय-वस्तु से मेल नहीं खाता, जबकि अन्य विकल्प अपने-अपने कवियों की शैली और विषय-वस्तु के अनुरूप हैं। इसलिए, विकल्प 2 असंगत है।
Question 320
निम्न में कौन-सा शब्द 'टंक' के लिए प्रयुक्त नहीं होता है ?
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Answer & Explanation
नाविक।
व्याख्या:
'टंक' शब्द का अर्थ होता है सिक्का, कुल्हाड़ा और अहंकार। यह शब्द नाविक के लिए प्रयुक्त नहीं होता है। इसलिए, विकल्प 1, नाविक, सही उत्तर है।
- विकल्प 2 (अहंकार): 'टंक' का एक अर्थ अहंकार भी होता है। इसलिए यह विकल्प गलत है।
- विकल्प 3 (सिक्का): 'टंक' का मुख्य अर्थों में से एक सिक्का भी है। इसलिए यह विकल्प गलत है।
- विकल्प 4 (कुल्हाड़ा): 'टंक' शब्द का प्रयोग कुल्हाड़ा के लिए भी किया जाता है। इसलिए यह विकल्प गलत है।
अतः, केवल 'नाविक' शब्द 'टंक' के लिए प्रयुक्त नहीं होता है।