Question
Easy

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :

"खुशी बांटने से बढ़ती है और दुख कहने से कम हो जाता है। दैनंदिन कार्यकलापों में सुख या दुःख की जो अनुभूति होती है, वह अनायास ही व्यक्त हो जाती है। बीमारी के समय हमारे मुँह से 'हे राम' की ध्वनि या दुख की अवस्था में कई बार 'ओ! माँ' निकल पड़ता है। इसी तरह के अनेक ध्वनि संकेतों की सहायता से हम अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए भाषा का सहारा लेते हैं। यह तो हुई मौखिक अभिव्यक्ति की बात। अब लिखित अभिव्यक्ति के लिए हमें चाहिए कि विचारों को क्रमबद्धता देकर भावों के अनुकूल भाषा का प्रयोग करें। शुद्ध स्वाभाविक और स्पष्ट लिखने का प्रयास करें। कई बार ऐसा होता है कि हम सोचते तो बहुत हैं मगर ठीक से लिख नहीं पाते। इसके लिए सबसे पहले किसी भी विषय पर हमें एकाग्रभाव से चिंतन-मनन की ज़रूरत होती है। फिर वही चिंतन जब हमारे दिमाग़ में परिपक्व हो जाता है, तब विचारों के अनुकूल शब्दों का चुनाव किया जाता है और भाषा के सहारे लिखा जाता है।"

रेखांकित 'दैनंदिनी' शब्द रूप है –

1
अव्यय
2
सर्वनाम
3
पुल्लिंग
4
विशेषण
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: REET
Level/Paper: Paper 2
Chapter:
Topic:
Correct Answer
Option D
Explanation

रेखांकित 'दैनंदिनी' शब्द का सही रूप विशेषण है, जो विकल्प 4 है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं: 1. विशेषण के रूप में 'दैनंदिनी': - 'दैनंदिनी' शब्द का अर्थ है 'दैनिक' या 'प्रतिदिन से संबंधित'। यह शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने के लिए प्रयोग होता है। उदाहरण के लिए, 'दैनंदिनी कार्यकलाप' में 'दैनंदिनी' शब्द 'कार्यकलाप' की विशेषता बता रहा है कि ये कार्यकलाप प्रतिदिन के हैं। इस…Read More

- REET Paper 2 | Clear Cutoff