निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :
"खुशी बांटने से बढ़ती है और दुख कहने से कम हो जाता है। दैनंदिन कार्यकलापों में सुख या दुःख की जो अनुभूति होती है, वह अनायास ही व्यक्त हो जाती है। बीमारी के समय हमारे मुँह से 'हे राम' की ध्वनि या दुख की अवस्था में कई बार 'ओ! माँ' निकल पड़ता है। इसी तरह के अनेक ध्वनि संकेतों की सहायता से हम अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए भाषा का सहारा लेते हैं। यह तो हुई मौखिक अभिव्यक्ति की बात। अब लिखित अभिव्यक्ति के लिए हमें चाहिए कि विचारों को क्रमबद्धता देकर भावों के अनुकूल भाषा का प्रयोग करें। शुद्ध स्वाभाविक और स्पष्ट लिखने का प्रयास करें। कई बार ऐसा होता है कि हम सोचते तो बहुत हैं मगर ठीक से लिख नहीं पाते। इसके लिए सबसे पहले किसी भी विषय पर हमें एकाग्रभाव से चिंतन-मनन की ज़रूरत होती है। फिर वही चिंतन जब हमारे दिमाग़ में परिपक्व हो जाता है, तब विचारों के अनुकूल शब्दों का चुनाव किया जाता है और भाषा के सहारे लिखा जाता है।"
'चिन्तन' शब्द का सही संधि-विच्छेद है -
'चिन्तन' शब्द का सही संधि-विच्छेद 'चित् + तन' है, जो विकल्प 1 में दिया गया है। इसे समझने के लिए हमें संस्कृत व्याकरण के संधि नियमों को देखना होगा। 1. चित् + तन: 'चित्' का अर्थ है 'सोचना' या 'ध्यान', और 'तन' का अर्थ है 'फैलाना' या 'विस्तार करना'। जब इन दोनों शब्दों का संधि किया जाता है, तो 'चित्' का अंतिम स्वर 'त्' और 'तन' का प्रारंभिक स्वर 'त'…Read More
Source :
Source :
Source :
Source :