Question
Easy
निम्नलिखितम् अपठितं श्लोकमाधारीकृत्य प्रश्ना: समाधेया: –
अत्रैव कोकिलविनिन्दितमनोज्ञकण्डी, श्री कुम्भकर्णनृपतेस्तनया रमापि । उत्सन्नतामुपगताम् स्वपितु: प्रवृत्ताम् सङ्गीतशास्त्रसरणिम् पुनरुद्दधार ॥
“अत्रैव कोकिलविनिन्दितमनोज्ञकण्ठी” अस्मिन् श्लोकांशे कोऽलङ्कारः ?
1
उपमालङ्कारः
2
विभावनालंकारः
3
श्लेषालङ्कारः
4
व्यतिरेकालङ्कारः
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: REET
Level/Paper: Paper 2
Chapter:
Topic:
Correct Answer
Option D
Explanation
श्लोकांश "अत्रैव कोकिलविनिन्दितमनोज्ञकण्ठी" में "व्यतिरेकालङ्कारः" का प्रयोग हुआ है। व्यतिरेकालङ्कार वह अलंकार है जिसमें किसी वस्तु की विशेषता को दूसरी वस्तु की विशेषता से भिन्न या श्रेष्ठ बताकर प्रस्तुत किया जाता है। यहाँ पर "कोकिलविनिन्दित" का अर्थ है कि जिसकोयल की मधुरता को भी लज्जित कर दे, अर्थात् यहाँ पर किसी की आवाज़ की मधुरता को कोयल की आवाज़ से श्रेष्ठ बताया गया है। इस प्रकार, यह व्यतिरेकालङ्कार का स्पष्ट…Read More
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Question 1
Easy
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निम्नलिखितम् अपठितं श्लोकमाधारीकृत्य प्रश्ना: समाधेया: –
अत्रैव कोकिलविनिन्दितमनोज्ञकण्डी,
श्री कुम्भकर्णनृपतेस्तनया रमापि ।
उत्सन्नतामुपगताम् स्वपितु: प्रवृत्ताम्
सङ्गीतशास्त्रसरणिम् पुनरुद्दधार ॥
"सङ्गीतशास्त्रसरणिम्" इत्यत्र समासः वर्तते
Question 2
Easy
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निम्नलिखितम् अपठितं श्लोकमाधारीकृत्य प्रश्ना: समाधेया: –
अत्रैव कोकिलविनिन्दितमनोज्ञकण्डी,
श्री कुम्भकर्णनृपतेस्तनया रमापि ।
उत्सन्नतामुपगताम् स्वपितु: प्रवृत्ताम्
सङ्गीतशास्त्रसरणिम् पुनरुद्दधार ॥
“उपगताम्” इत्यत्र कः प्रत्ययः ?
Question 3
Easy
Source :
REET 2022
निम्नलिखितम् अपठितं श्लोकमाधारीकृत्य प्रश्ना: समाधेया: –
अत्रैव कोकिलविनिन्दितमनोज्ञकण्डी,
श्री कुम्भकर्णनृपतेस्तनया रमापि ।
उत्सन्नतामुपगताम् स्वपितु: प्रवृत्ताम्
सङ्गीतशास्त्रसरणिम् पुनरुद्दधार ॥
उपर्युक्ते श्लोके किं छन्दः ?
Question 4
Easy
Source :
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The arrangement of presenting the data in columns and rows in a sequential form is called