निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्न के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए । इस संसार में सब कुछ अस्थायी है । पाप और पुण्य दोनों इस संसार से संबंधित हैं, इसलिए पाप और पुण्य भी अस्थायी हैं । पुण्य सुख देकर और पाप दुःख देकर अंत को प्राप्त होता है । लेकिन पाप और पुण्य में थोड़ा अंतर यह है कि पुण्य का फल यदि हम नहीं चाहते तो उस फल को अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र हैं । पाप लोहे की जंजीर है तो पुण्य सोने की । बंधन दोनों में है । लोहे की जंजीर से छूटने का आदमी का मन भी करता है लेकिन सोने की जंजीर से जो बंधा हुआ हो उसको वह बंधन प्यारा लगने लगता है । उसमें उसको धन नज़र आता है उससे छूटने का मन नहीं करता । 'स्वतंत्र' का विलोम है :
'स्वतंत्र' का विलोम शब्द 'परतंत्र' है। 1. Explanation for Option 2 (परतंत्र): - 'स्वतंत्र' का अर्थ है स्वतंत्रता या आजादी, अर्थात् किसी भी प्रकार के बंधन या नियंत्रण से मुक्त होना। इसका विलोम 'परतंत्र' है, जिसका अर्थ है किसी के अधीन या नियंत्रण में होना। 'परतंत्र' का सीधा अर्थ है पराधीनता या गुलामी, जो स्वतंत्रता के विपरीत स्थिति को दर्शाता है। इसलिए, 'स्वतंत्र' का सही विलोम 'परतंत्र' है। 2. **Explanation…Read More
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