HTET परीक्षा - Level 1 PRT - शब्द परिचय
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 1 PRT की तैयारी
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20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 61
किस विकल्प के सभी शब्द व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ हैं ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: किस विकल्प के सभी शब्द व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ हैं?
सही उत्तर: विकल्प 3
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 3: राधेश्याम, पन्नालाल, हिमालय
- इस विकल्प में दिए गए सभी शब्द व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ हैं।
- राधेश्याम और पन्नालाल दोनों ही व्यक्तियों के नाम हैं, जो कि व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ होती हैं क्योंकि वे किसी विशेष व्यक्ति का नाम दर्शाते हैं।
- हिमालय एक विशेष पर्वत श्रृंखला का नाम है, जो इसे एक विशिष्ट स्थान बनाता है और इसलिए यह भी व्यक्तिवाचक संज्ञा है।
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विकल्प 1: आम, साधना, ऊँचाई
- आम एक फल का नाम है, जो जातिवाचक संज्ञा है।
- साधना एक क्रिया या प्रक्रिया का नाम हो सकता है, जो जातिवाचक संज्ञा है।
- ऊँचाई एक विशेषता का नाम है, जो जातिवाचक संज्ञा है।
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विकल्प 2: गाय, मूर्खता, चालाकी
- गाय एक जानवर का नाम है, जो जातिवाचक संज्ञा है।
- मूर्खता और चालाकी दोनों ही गुणों के नाम हैं, जो जातिवाचक संज्ञाएँ हैं।
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विकल्प 4: ममता, बैल, लम्बाई
- ममता एक भावना का नाम है, जो जातिवाचक संज्ञा है।
- बैल एक जानवर का नाम है, जो जातिवाचक संज्ञा है।
- लम्बाई एक माप का नाम है, जो जातिवाचक संज्ञा है।
इस प्रकार, केवल विकल्प 3 में दिए गए सभी शब्द व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ हैं, इसलिए यह सही उत्तर है।
प्रश्न 62
किस भाववाचक संज्ञा का निर्माण व्यक्तिवाचक संज्ञा से हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
भाववाचक संज्ञा का निर्माण व्यक्तिवाचक संज्ञा से तब होता है जब किसी व्यक्ति के नाम या विशेषता से संबंधित भाव को व्यक्त करने के लिए एक नया शब्द बनाया जाता है।
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ऐश्वर्य (Option 3): ऐश्वर्य का निर्माण 'ईश्वर' से हुआ है। 'ईश्वर' एक व्यक्तिवाचक संज्ञा है जो किसी विशेष व्यक्ति या शक्ति को दर्शाता है। 'ऐश्वर्य' का अर्थ है समृद्धि, वैभव या शक्ति, जो ईश्वर से संबंधित भाव को व्यक्त करता है। इसलिए, ऐश्वर्य एक भाववाचक संज्ञा है जो व्यक्तिवाचक संज्ञा 'ईश्वर' से उत्पन्न हुई है।
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बचपन (Option 1): बचपन का निर्माण 'बच्चा' से होता है, जो एक सामान्य संज्ञा है न कि व्यक्तिवाचक संज्ञा। यह किसी विशेष व्यक्ति का नाम नहीं है, बल्कि एक अवस्था को दर्शाता है।
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कैशोर्य (Option 2): कैशोर्य का निर्माण 'किशोर' से होता है, जो एक अवस्था को दर्शाता है और यह भी एक सामान्य संज्ञा है, न कि व्यक्तिवाचक संज्ञा।
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मातृत्व (Option 4): मातृत्व का निर्माण 'माता' से होता है, जो एक सामान्य संज्ञा है और किसी विशेष व्यक्ति का नाम नहीं है। यह मातृत्व के भाव को दर्शाता है।
इस प्रकार, ऐश्वर्य ही एकमात्र ऐसा शब्द है जो व्यक्तिवाचक संज्ञा 'ईश्वर' से भाववाचक संज्ञा के रूप में निर्मित हुआ है। यही कारण है कि विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 63
निम्न में से असंगत विकल्प पहचानिए :
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उत्तर और व्याख्या
Option 4 सही है क्योंकि "शक्तिशाली" एक विशेषण है, और इससे भाववाचक संज्ञा "शक्ति" बनती है, न कि "शक्तिशाली" से कोई भाववाचक संज्ञा बनती है। इसलिए, यह कथन कि "शक्तिशाली – विशेषण से निर्मित भाववाचक संज्ञा" असंगत है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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सातत्य – अव्यय से निर्मित भाववाचक संज्ञा: "सातत्य" शब्द "सतत" अव्यय से बना है और यह एक भाववाचक संज्ञा है। इसलिए यह विकल्प सही है।
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निजता – सर्वनाम से निर्मित भाववाचक संज्ञा: "निजता" शब्द "निज" सर्वनाम से बना है और यह एक भाववाचक संज्ञा है। इसलिए यह विकल्प भी सही है।
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रोगिणी – भाववाचक संज्ञा से निर्मित विशेषण: "रोगिणी" शब्द "रोग" (जो कि एक भाववाचक संज्ञा है) से बना है और यह एक विशेषण है (स्त्रीलिंग)। इसलिए यह विकल्प भी सही है।
इसलिए, केवल Option 4 ही असंगत है क्योंकि यह गलत तरीके से बताता है कि "शक्तिशाली" से भाववाचक संज्ञा बनी है, जबकि वास्तविकता में "शक्तिशाली" एक विशेषण है और इससे भाववाचक संज्ञा "शक्ति" बनती है।
प्रश्न 64
"यह आपका माहात्म्य है।" वाक्य में प्रयुक्त 'माहात्म्य' शब्द में कौन-सी संज्ञा है ?
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उत्तर और व्याख्या
वाक्य "यह आपका माहात्म्य है।" में प्रयुक्त 'माहात्म्य' शब्द एक भाववाचक संज्ञा है। भाववाचक संज्ञा उन संज्ञाओं को कहते हैं जो किसी भाव, गुण, अवस्था या स्थिति का बोध कराती हैं। 'माहात्म्य' शब्द का अर्थ है महानता या श्रेष्ठता, जो एक भाव को व्यक्त करता है। यह किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान का नाम नहीं है, बल्कि एक अमूर्त गुण या भावना है। इसलिए, 'माहात्म्य' शब्द भाववाचक संज्ञा के अंतर्गत आता है।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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जातिवाचक संज्ञा: यह संज्ञा किसी विशेष जाति, वर्ग या प्रकार के नाम को दर्शाती है, जैसे कि 'कुत्ता', 'पेड़', 'पुस्तक' आदि। 'माहात्म्य' किसी जाति या वर्ग का नाम नहीं है, इसलिए यह जातिवाचक संज्ञा नहीं है।
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समूहवाचक संज्ञा: यह संज्ञा किसी समूह या संग्रह का बोध कराती है, जैसे कि 'झुंड', 'टोली', 'कक्षा' आदि। 'माहात्म्य' किसी समूह का नाम नहीं है, इसलिए यह समूहवाचक संज्ञा नहीं है।
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व्यक्तिवाचक संज्ञा: यह संज्ञा किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु का नाम होती है, जैसे कि 'राम', 'दिल्ली', 'गंगा' आदि। 'माहात्म्य' किसी विशेष व्यक्ति या स्थान का नाम नहीं है, इसलिए यह व्यक्तिवाचक संज्ञा नहीं है।
इस प्रकार, 'माहात्म्य' शब्द भाववाचक संज्ञा है, और विकल्प 2 सही है।
प्रश्न 65
उसने मुझे सदैव धोखा दिया। वाक्य में प्रयुक्त 'धोखा' शब्द कौन-सी संज्ञा का उदाहरण होगा ?
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उत्तर और व्याख्या
'धोखा' शब्द भाववाचक संज्ञा का उदाहरण है क्योंकि:
- भाववाचक संज्ञा की परिभाषा: भाववाचक संज्ञा उन शब्दों को कहते हैं जो किसी भाव, गुण, अवस्था या क्रिया के भाव को दर्शाते हैं। ये शब्द अमूर्त होते हैं, यानी इन्हें छुआ या देखा नहीं जा सकता, केवल महसूस किया जा सकता है। 'धोखा' एक ऐसा ही भाव है जिसे महसूस किया जा सकता है, देखा या छुआ नहीं जा सकता। यह एक अनुभव है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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समुदायवाचक संज्ञा: समुदायवाचक संज्ञा किसी समूह या समुदाय को दर्शाती है, जैसे 'सेना', 'कक्षा', 'परिवार'। 'धोखा' किसी समूह को नहीं दर्शाता, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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जातिवाचक संज्ञा: जातिवाचक संज्ञा किसी पूरी जाति या वर्ग को दर्शाती है, जैसे 'नदी', 'पहाड़', 'मनुष्य'। 'धोखा' किसी जाति या वर्ग को नहीं दर्शाता, बल्कि एक भाव है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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व्यक्तिवाचक संज्ञा: व्यक्तिवाचक संज्ञा किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु का नाम होती है, जैसे 'राम', 'दिल्ली', 'गंगा'। 'धोखा' किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु का नाम नहीं है, बल्कि एक भाव है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
इसलिए, 'धोखा' एक भाव है जिसे महसूस किया जा सकता है, और यह भाववाचक संज्ञा का सटीक उदाहरण है।
प्रश्न 66
किस विकल्प का शब्द व्यक्तिवाचक संज्ञा का उदाहरण नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 1 "नगर" व्यक्तिवाचक संज्ञा का उदाहरण नहीं है। व्यक्तिवाचक संज्ञा वे संज्ञाएँ होती हैं जो किसी विशेष व्यक्ति, स्थान, वस्तु या घटना का नाम बताती हैं। आइए अब प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण करते हैं:
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नगर: यह एक सामान्य संज्ञा है क्योंकि यह किसी विशेष शहर या स्थान का नाम नहीं बताता। "नगर" का अर्थ होता है शहर, जो किसी भी शहर के लिए सामान्य रूप से प्रयोग किया जा सकता है। इसलिए, यह व्यक्तिवाचक संज्ञा का उदाहरण नहीं है।
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रामायण: यह एक व्यक्तिवाचक संज्ञा है क्योंकि यह एक विशेष महाकाव्य का नाम है। "रामायण" विशेष रूप से वाल्मीकि द्वारा रचित महाकाव्य को संदर्भित करता है, जो भगवान राम की कथा को प्रस्तुत करता है।
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आगरा: यह भी एक व्यक्तिवाचक संज्ञा है क्योंकि यह एक विशेष शहर का नाम है। "आगरा" भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित एक प्रसिद्ध शहर है, जो ताजमहल के लिए जाना जाता है।
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ताजमहल: यह व्यक्तिवाचक संज्ञा का उदाहरण है क्योंकि यह एक विशेष ऐतिहासिक स्मारक का नाम है। "ताजमहल" एक विशिष्ट इमारत है जो आगरा में स्थित है और इसे मुगल सम्राट शाहजहाँ ने बनवाया था।
इस प्रकार, "नगर" एक सामान्य संज्ञा है और व्यक्तिवाचक संज्ञा का उदाहरण नहीं है, जबकि अन्य विकल्प विशेष नामों को दर्शाते हैं और व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ हैं। इसलिए, विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 67
संज्ञा के संबंध में कौन-सा कथन संगत नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
सही उत्तर विकल्प 2 है: "देश, त्योहार, नदी उक्त व्यक्तिवाचक संज्ञा के उदाहरण हैं।"
विस्तार से व्याख्या:
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विकल्प 2 का सही होना:
- व्यक्तिवाचक संज्ञा विशेष नामों को दर्शाती है, जैसे कि किसी व्यक्ति, स्थान, या वस्तु का विशेष नाम। उदाहरण के लिए, 'राम', 'दिल्ली', 'गंगा' आदि।
- विकल्प 2 में दिए गए 'देश', 'त्योहार', 'नदी' व्यक्तिवाचक संज्ञा नहीं हैं, बल्कि ये जातिवाचक संज्ञा के उदाहरण हैं। 'देश' का विशेष नाम 'भारत', 'त्योहार' का विशेष नाम 'दीवाली', और 'नदी' का विशेष नाम 'गंगा' होगा। इसलिए, यह कथन संगत नहीं है।
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अन्य विकल्पों का गलत होना:
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विकल्प 1: "व्यक्तिवाचक संज्ञाओं का प्रयोग सदैव (आदरार्थक के अतिरिक्त) एकवचन में होता है।"
- यह कथन सही है क्योंकि व्यक्तिवाचक संज्ञाएं विशेष नामों को दर्शाती हैं और आमतौर पर एकवचन में ही प्रयुक्त होती हैं। उदाहरण के लिए, 'राम', 'सीता' आदि।
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विकल्प 3: "द्रव्यवाचक' तथा 'समूहवाचक', जातिवाचक संज्ञा के ही भेद माने जाते हैं।"
- यह कथन सही है क्योंकि द्रव्यवाचक और समूहवाचक संज्ञाएं जातिवाचक संज्ञा के अंतर्गत आती हैं। द्रव्यवाचक संज्ञा जैसे 'सोना', 'पानी' और समूहवाचक संज्ञा जैसे 'झुंड', 'टोली' जातिवाचक संज्ञा के भेद हैं।
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विकल्प 4: "विद्वत्ता', 'पांडित्य' उक्त यौगिक भाववाचक संज्ञा के उदाहरण हैं।"
- यह कथन सही है क्योंकि 'विद्वत्ता' और 'पांडित्य' भाववाचक संज्ञाएं हैं जो किसी गुण या अवस्था को दर्शाती हैं।
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इस प्रकार, विकल्प 2 का कथन संगत नहीं है और यही सही उत्तर है।
प्रश्न 68
\underline{\text{महात्मा गांधी}} ने \underline{\text{भारत}} को आज़ाद कराया।' उक्त वाक्य में रेखांकित शब्द क्रमशः हैं :
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न 69
संज्ञाओं का सही सुमेलन किस विकल्प में नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
The correct option is 4:
अयौगिक भाववाचक संज्ञाएँ वे होती हैं जो किसी अन्य शब्द (जैसे जातिवाचक संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया या अव्यय) में प्रत्यय लगाए बिना मूल रूप से भाव को व्यक्त करती हैं (जैसे प्रेम, क्रोध, सुख, दुःख)। इसके विपरीत, यौगिक भाववाचक संज्ञाएँ प्रत्यय जोड़कर बनाई जाती हैं। विकल्प 4 में दिए गए शब्द 'ऐश्वर्य', 'कौमार्य' और 'उपयोगिता' तीनों ही यौगिक भाववाचक संज्ञाएँ हैं, न कि अयौगिक। 'ऐश्वर्य' विशेषण 'ईश्वर' में 'य' प्रत्यय, 'कौमार्य' जातिवाचक संज्ञा 'कुमार' में 'य' प्रत्यय, और 'उपयोगिता' विशेषण 'उपयोगी' में 'ता' प्रत्यय जोड़कर बने हैं। चूँकि ये सभी यौगिक (प्रत्यय द्वारा निर्मित) हैं, इसलिए इन्हें अयौगिक भाववाचक संज्ञाएँ कहना गलत है। प्रश्न पूछ रहा है कि कौन सा सुमेलन सही नहीं है, इसलिए यह विकल्प (4) सही उत्तर है।
The incorrect option is 1:
विकल्प 1 - 'ऋग्वेद', 'कावेरी' और 'पृथ्वी' - सभी व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ हैं और इनका सुमेलन सही है। व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ वे होती हैं जो किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराती हैं। 'ऋग्वेद' एक विशेष ग्रंथ का नाम है, 'कावेरी' एक विशिष्ट नदी का नाम है, और 'पृथ्वी' एक विशिष्ट ग्रह का नाम है। व्याकरणिक रूप से, जब भी कोई शब्द केवल एक ही इकाई का बोध कराए, वह व्यक्तिवाचक संज्ञा कहलाता है। इस प्रकार, यह सुमेलन पूरी तरह से सही है।
The incorrect option is 2:
विकल्प 2 - 'भूकंप', 'हथेली' और 'कृषक' - सभी जातिवाचक संज्ञाएँ हैं और इनका सुमेलन सही है। जातिवाचक संज्ञाएँ वे होती हैं जो किसी संपूर्ण जाति या वर्ग का बोध कराती हैं। 'भूकंप' किसी भी प्रकार के भूकंप के वर्ग को, 'हथेली' सभी हथेलियों के वर्ग को, और 'कृषक' सभी किसानों के वर्ग को दर्शाता है। ये शब्द किसी एक विशिष्ट इकाई का बोध न कराकर, अपनी पूरी जाति का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसीलिए इन्हें जातिवाचक संज्ञा कहा जाता है। यह सुमेलन भी सही है।
The incorrect option is 3:
विकल्प 3 - 'क्रोध', 'सत्य' और 'रोग' - स्वतंत्र (अयौगिक) भाववाचक संज्ञाएँ हैं और इनका सुमेलन सही है। स्वतंत्र भाववाचक संज्ञाएँ वे होती हैं जो अपने मूल रूप में होती हैं और किसी अन्य शब्द से प्रत्यय द्वारा नहीं बनतीं। 'क्रोध' (गुस्से का भाव), 'सत्य' (सच्चाई का भाव), और 'रोग' (बीमारी की अवस्था) ऐसे भाव या अवस्थाएँ हैं जो मूलतः भाववाचक हैं। यद्यपि कुछ व्याकरणिक विद्वान 'रोग' को जातिवाचक मान सकते हैं, पर यहाँ इसे एक अमूर्त दशा (इलनेस) के रूप में स्वतंत्र भाववाचक संज्ञा माना गया है, और व्याकरण की दृष्टि से यह युग्म भी सही है।
प्रश्न 70
निम्न में से भाववाच्य चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 1: "गर्मियों में रोज़ नहाया जाता है।" भाववाच्य वाक्य है। भाववाच्य वाक्य वह होता है जिसमें क्रिया का प्रभाव कर्ता पर न होकर कर्म पर होता है और कर्ता का उल्लेख नहीं होता। इस वाक्य में "नहाया जाता है" क्रिया का प्रभाव कर्म पर है और कर्ता का उल्लेख नहीं है, इसलिए यह भाववाच्य है।
Option 2: "नानी द्वारा कहानी सुनाई गई।" यह वाक्य कर्मवाच्य है। इसमें "नानी द्वारा" कर्ता का स्पष्ट उल्लेख है और क्रिया "सुनाई गई" का प्रभाव कहानी पर है, जो कि कर्म है।
Option 3: "कुत्ता सारी रात भौंकता है।" यह वाक्य कर्तृवाच्य है। इसमें "कुत्ता" कर्ता है और क्रिया "भौंकता है" का प्रभाव सीधे कर्ता पर है।
Option 4: "किसानों द्वारा फसल काट ली गई है।" यह भी कर्मवाच्य वाक्य है। इसमें "किसानों द्वारा" कर्ता का उल्लेख है और क्रिया "काट ली गई है" का प्रभाव फसल पर है, जो कि कर्म है।
इस प्रकार, केवल Option 1 "गर्मियों में रोज़ नहाया जाता है।" भाववाच्य वाक्य है, क्योंकि इसमें कर्ता का उल्लेख नहीं है और क्रिया का प्रभाव कर्म पर है।
प्रश्न 71
भाववाच्य' वाला विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
भाववाच्य का अर्थ है वह वाक्य जिसमें क्रिया का प्रभाव कर्म पर पड़ता है और कर्ता का उल्लेख नहीं होता या गौण होता है। भाववाच्य वाक्य में क्रिया का मुख्य रूप से प्रभाव दिखाया जाता है।
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नानी द्वारा कहानी सुनाई गई। - यह वाक्य कर्मवाच्य है क्योंकि इसमें कर्ता (नानी) का स्पष्ट उल्लेख है और क्रिया (कहानी सुनाना) का प्रभाव कर्म (कहानी) पर पड़ता है।
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गर्मियों में रोज नहाया जाता है। - यह वाक्य भाववाच्य है क्योंकि इसमें कर्ता का उल्लेख नहीं है और क्रिया (नहाना) का प्रभाव सामान्य रूप से दिखाया गया है। यह वाक्य यह बताता है कि गर्मियों में नहाने की क्रिया होती है, लेकिन यह नहीं बताता कि कौन नहा रहा है।
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भारत द्वारा नया उपग्रह छोड़ा गया। - यह वाक्य भी कर्मवाच्य है क्योंकि इसमें कर्ता (भारत) का स्पष्ट उल्लेख है और क्रिया (उपग्रह छोड़ना) का प्रभाव कर्म (उपग्रह) पर पड़ता है।
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कोहली ने शतक लगाया। - यह वाक्य कर्तृवाच्य है क्योंकि इसमें कर्ता (कोहली) का स्पष्ट उल्लेख है और क्रिया (शतक लगाना) का प्रभाव कर्ता पर पड़ता है।
इस प्रकार, विकल्प 2 "गर्मियों में रोज नहाया जाता है।" भाववाच्य वाक्य का सही उदाहरण है क्योंकि इसमें कर्ता का उल्लेख नहीं है और क्रिया का प्रभाव सामान्य रूप से दिखाया गया है।
प्रश्न 72
मैं चुप नहीं बैठ सकती।' उक्त वाक्य भाववाच्य में होगा :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वाक्य "मैं चुप नहीं बैठ सकती।" का भाववाच्य रूपांतरण करने के लिए हमें यह समझना होगा कि भाववाच्य में क्रिया का केंद्र बिंदु क्रिया का कर्ता नहीं होता, बल्कि क्रिया का प्रभाव होता है।
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सही विकल्प (विकल्प 3: मुझसे चुप नहीं बैठा जाता।)
- इस वाक्य में "मुझसे" का प्रयोग किया गया है, जो यह दर्शाता है कि क्रिया का प्रभाव व्यक्ति पर पड़ रहा है। भाववाच्य में यह आवश्यक है कि क्रिया का प्रभाव ही मुख्य हो। "चुप नहीं बैठा जाता" यह दर्शाता है कि चुप बैठने की क्रिया संभव नहीं है और इसका प्रभाव व्यक्ति पर है। इसलिए, यह वाक्य भाववाच्य के नियमों के अनुसार सही है।
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अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
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विकल्प 1: मेरे द्वारा चुप नहीं बैठा जाता।
- इस वाक्य में "मेरे द्वारा" का प्रयोग किया गया है, जो कर्ता को प्रमुखता देता है। भाववाच्य में कर्ता को प्रमुखता नहीं दी जाती, बल्कि क्रिया के प्रभाव को प्रमुखता दी जाती है। इसलिए यह विकल्प गलत है।
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विकल्प 2: मैं चुप नहीं बैठ सकूँगी।
- यह वाक्य भविष्य काल में है और कर्ता को प्रमुखता देता है। यह वाक्य भाववाच्य नहीं है क्योंकि इसमें क्रिया का प्रभाव नहीं, बल्कि कर्ता की क्षमता को दर्शाया गया है। इसलिए यह विकल्प गलत है।
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विकल्प 4: मैं चुप रह सकती थी।
- यह वाक्य भूतकाल में है और कर्ता की क्षमता को दर्शाता है। यह भी भाववाच्य नहीं है क्योंकि इसमें क्रिया का प्रभाव नहीं दिखाया गया है। इसलिए यह विकल्प गलत है।
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इस प्रकार, विकल्प 3 "मुझसे चुप नहीं बैठा जाता।" भाववाच्य के नियमों के अनुसार सही है क्योंकि यह क्रिया के प्रभाव को दर्शाता है।
प्रश्न 73
सचिन क्रिकेट खेलता है।' उक्त वाक्य को कर्मवाच्य में बदलिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 4, "सचिन के द्वारा क्रिकेट खेला जाता है," कर्मवाच्य में सही रूपांतरण है क्योंकि यह वाक्य क्रिया के कर्म (cricket) पर केंद्रित है। कर्मवाच्य में कर्ता (सचिन) गौण हो जाता है और कर्म की प्रधानता होती है। इस वाक्य में, "क्रिकेट खेला जाता है" क्रिया का मुख्य भाग है और "सचिन के द्वारा" कर्ता को दर्शाने वाला गौण भाग है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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"सचिन क्रिकेट खेलेगा।" यह वाक्य भविष्य काल में है और कर्तृवाच्य (active voice) में है, क्योंकि इसमें कर्ता (सचिन) क्रिया (खेलेगा) का सीधा निष्पादक है।
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"सचिन क्रिकेट नहीं खेलता है।" यह वाक्य नकारात्मक है और कर्तृवाच्य में है। इसमें कर्ता (सचिन) क्रिया (खेलता) का निषेध कर रहा है।
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"सचिन से क्रिकेट खेला जाता था।" यह वाक्य कर्मवाच्य तो है, लेकिन भूतकाल में है। मूल वाक्य वर्तमान काल में है, इसलिए यह सही रूपांतरण नहीं है।
इसलिए, केवल Option 4 ही दिए गए वाक्य का सही कर्मवाच्य रूपांतरण है।
प्रश्न 74
निम्न में से किस वाक्य में कर्तृवाच्य का प्रयोग हुआ है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वाक्य में कर्तृवाच्य का प्रयोग तब होता है जब वाक्य में कर्ता (जो कार्य कर रहा है) स्पष्ट रूप से उल्लेखित होता है और वह वाक्य का मुख्य विषय होता है।
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विकल्प 2: डाकिया डाक वितरित कर रहा है।
इस वाक्य में "डाकिया" कर्ता है, जो कि स्पष्ट रूप से कार्य "डाक वितरित करना" कर रहा है। यहाँ कर्ता का उल्लेख स्पष्ट रूप से किया गया है और वह वाक्य का मुख्य विषय है। इसलिए, यह वाक्य कर्तृवाच्य का उदाहरण है। -
विकल्प 1: रोगी से चला नहीं जाता है।
इस वाक्य में "रोगी" का उल्लेख है, लेकिन यह वाक्य कर्तृवाच्य नहीं है क्योंकि यहाँ रोगी के द्वारा कोई कार्य नहीं किया जा रहा है। यह वाक्य अधिकतर भाववाच्य का उदाहरण है, जहाँ रोगी की असमर्थता को व्यक्त किया गया है। -
विकल्प 3: राम से चुप नहीं बैठा जाता।
इस वाक्य में "राम" का उल्लेख है, लेकिन यह भी कर्तृवाच्य नहीं है। यहाँ राम के द्वारा कोई कार्य नहीं किया जा रहा है, बल्कि यह राम की असमर्थता को दर्शाता है। यह भी भाववाच्य का उदाहरण है। -
विकल्प 4: सीता द्वारा गाना गाया गया।
इस वाक्य में "सीता" का उल्लेख है, लेकिन यह वाक्य कर्मवाच्य का उदाहरण है। यहाँ कार्य "गाना गाना" सीता के द्वारा किया गया है, लेकिन वाक्य का मुख्य विषय "गाना" है, न कि "सीता"।
इस प्रकार, विकल्प 2 सही उत्तर है क्योंकि यह कर्तृवाच्य का सही उदाहरण प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 75
पथ - पथ्य ग्राम का अर्थ है
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
The correct option is 1:
पथ - पथ्य ग्राम का अर्थ है Options: रास्ता रोगी का भोजन, रोगी का भोजन रास्ता, मत भोजन, कोई नहीं. Correct: 1
सही विकल्प है 1: रास्ता रोगी का भोजन
'पथ - पथ्य' शब्द युग्म श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्दों का उदाहरण है, जिसका अर्थ उच्चारण में समान या मिलते-जुलते होने पर भी भिन्न होता है। इस युग्म में, 'पथ' और 'पथ्य' दो अलग-अलग शब्द हैं जिनके विशिष्ट अर्थ हैं। हिंदी व्याकरण के अनुसार, 'पथ' शब्द का सामान्य अर्थ होता है मार्ग, राह या रास्ता। इसका उपयोग किसी गंतव्य तक पहुँचने के लिए उपयोग किए जाने वाले भौतिक या वैचारिक मार्ग को इंगित करने के लिए किया जाता है। दूसरी ओर, 'पथ्य' शब्द विशेष रूप से चिकित्सा विज्ञान और स्वास्थ्य के संदर्भ में उपयोग होता है, जिसका अर्थ होता है वह भोजन जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो, या विशेष रूप से रोगी का भोजन। अतः, 'पथ - पथ्य' का सही क्रमवार अर्थ 'रास्ता रोगी का भोजन' है।
गलत विकल्प है 2: रोगी का भोजन रास्ता
यह विकल्प 'पथ' और 'पथ्य' के अर्थों को उल्टे क्रम में प्रस्तुत करता है। 'रोगी का भोजन' का अर्थ 'पथ्य' होता है, जबकि 'रास्ता' का अर्थ 'पथ' होता है। चूंकि प्रश्न में शब्द युग्म 'पथ' (पहले) और 'पथ्य' (बाद में) दिया गया है, इसलिए अर्थ भी उसी क्रम में होना चाहिए: पहले 'रास्ता' और फिर 'रोगी का भोजन'। इसलिए, अर्थों का यह क्रम (रोगी का भोजन रास्ता) गलत है।
गलत विकल्प है 3: मत भोजन
यह विकल्प शब्द युग्म के अर्थ को पूरी तरह से विकृत कर देता है। 'मत' का अर्थ होता है राय, विचार या निषेध (नहीं)। इस शब्द का 'पथ' या 'पथ्य' दोनों में से किसी के भी अर्थ से कोई संबंध नहीं है। 'पथ्य' का अर्थ होता है उचित भोजन, न कि कोई नकारात्मक अर्थ वाला भोजन जैसे 'मत भोजन'। यह एक पूरी तरह से अप्रासंगिक और भ्रमित करने वाला विकल्प है।
गलत विकल्प है 4: कोई नहीं
यह विकल्प इसलिए गलत है क्योंकि पहला विकल्प ('रास्ता रोगी का भोजन') शब्द युग्म 'पथ - पथ्य' के सही और सटीक अर्थ को क्रमबद्ध रूप में व्यक्त करता है। चूँकि एक सही विकल्प (विकल्प 1) मौजूद है, इसलिए यह उत्तर कि 'कोई नहीं' सही है, अमान्य हो जाता है। श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्दों में सही अर्थ की पहचान करना आवश्यक होता है।
प्रश्न 76
‘सुरभि-सुरभी’ युग्म का सही अर्थ युग्म है
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सही विकल्प 4 है:
'सुरभि-सुरभी' युग्म श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्दों का उदाहरण है, जिसका अर्थ है कि ये उच्चारण में लगभग समान सुनाई देते हैं, किंतु इनके अर्थ पूरी तरह भिन्न होते हैं। हिंदी व्याकरण में, ऐसे शब्द युग्मों का ज्ञान भाषा की शुद्धता और अर्थ की स्पष्टता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस युग्म में, पहले शब्द 'सुरभि' (र पर छोटी इ की मात्रा) का अर्थ होता है 'सुगन्ध' या 'खुशबू'। यह अक्सर मीठी महक या अच्छी गंध के लिए प्रयोग किया जाता है। वहीं, दूसरा शब्द 'सुरभी' (र पर बड़ी ई की मात्रा) का अर्थ होता है 'गाय'। यह शब्द कामधेनु जैसी पवित्र गायों के लिए भी प्रयुक्त होता है और संस्कृत मूल का है। इसलिए, 'सुरभि-सुरभी' का सही अर्थ युग्म 'सुगन्ध-गाय' है, जो विकल्प 4 में दिया गया है। छात्रों को ध्यान देना चाहिए कि मात्राओं का अंतर कैसे पूरे शब्द का अर्थ बदल देता है।
गलत विकल्प 1 है:
विकल्प 1 'गाय-कमल' देता है, जिसका अर्थ है कि 'सुरभि' का अर्थ गाय है और 'सुरभी' का अर्थ कमल है। यह गलत है क्योंकि 'सुरभि' (छोटी इ) का अर्थ सुगन्ध होता है, न कि गाय। जबकि 'सुरभी' (बड़ी ई) का अर्थ गाय होता है, लेकिन यहां क्रम गलत है और 'कमल' का अर्थ पूरी तरह से असंगत है। इसलिए, यह विकल्प पूरी तरह से अशुद्ध है।
गलत विकल्प 2 है:
विकल्प 2 'सुगन्ध-गंगा' अर्थ देता है। यहाँ 'सुरभि' (छोटी इ) का अर्थ 'सुगन्ध' तो सही दिया गया है, लेकिन 'सुरभी' (बड़ी ई) का अर्थ 'गाय' के बजाय 'गंगा' दिया गया है। 'गंगा' शब्द 'सुरभी' का अर्थ नहीं होता है। अतः इस युग्म का दूसरा भाग गलत होने के कारण यह विकल्प सही उत्तर नहीं हो सकता।
गलत विकल्प 3 है:
विकल्प 3 'सुगन्धित-दूध' अर्थ देता है। यह विकल्प भी भ्रामक है। 'सुरभि' का अर्थ 'सुगन्ध' या 'सुगन्धित' हो सकता है, लेकिन 'दूध' शब्द 'सुरभी' का सही अर्थ नहीं है। 'सुरभी' का विशिष्ट अर्थ 'गाय' होता है। चूंकि यह शब्द युग्म के दोनों शब्दों का सही अर्थ नहीं बताता है, इसलिए यह विकल्प भी अमान्य है।
प्रश्न 77
कलश कुलिश' शब्द युग्म का उपयुक्त अर्थ है
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उत्तर और व्याख्या
'कलश कुलिश' शब्द युग्म का उपयुक्त अर्थ है 'घड़ा-वज्र'। यहाँ पर 'कलश' का अर्थ होता है 'घड़ा' और 'कुलिश' का अर्थ होता है 'वज्र'।
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विकल्प 2: घड़ा-वज्र - यह सही उत्तर है क्योंकि 'कलश' का शाब्दिक अर्थ 'घड़ा' होता है, जो एक प्रकार का बर्तन होता है जिसमें पानी या अन्य तरल पदार्थ रखे जाते हैं। 'कुलिश' का अर्थ 'वज्र' होता है, जो इंद्र का अस्त्र माना जाता है और इसे बिजली के समान शक्तिशाली माना जाता है। इस प्रकार, 'कलश कुलिश' का सही अर्थ 'घड़ा-वज्र' है।
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विकल्प 1: गागर-पत्थर - यह विकल्प गलत है क्योंकि 'गागर' का अर्थ 'घड़ा' से मिलता-जुलता है, लेकिन 'पत्थर' का अर्थ 'कुलिश' से नहीं मिलता। 'कुलिश' का अर्थ 'वज्र' होता है, न कि 'पत्थर'।
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विकल्प 3: घट-चट्टान - यह विकल्प भी गलत है क्योंकि 'घट' का अर्थ 'घड़ा' से मिलता है, लेकिन 'चट्टान' का अर्थ 'कुलिश' से नहीं मिलता। 'कुलिश' का अर्थ 'वज्र' होता है, न कि 'चट्टान'।
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विकल्प 4: घड़ा-बिजली - यह विकल्प आंशिक रूप से सही लग सकता है क्योंकि 'वज्र' को कभी-कभी 'बिजली' के रूप में भी संदर्भित किया जाता है, लेकिन 'कुलिश' का शाब्दिक अर्थ 'वज्र' होता है, जो इंद्र का अस्त्र है। इसलिए, 'वज्र' अधिक सटीक और सही अर्थ है।
इस प्रकार, 'कलश कुलिश' का सही अर्थ 'घड़ा-वज्र' है, और यही कारण है कि विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 78
झक' और 'झख' शब्दों के क्रमशः अर्थ हैं :
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उत्तर और व्याख्या
'झक' और 'झख' शब्दों के क्रमशः अर्थ हैं 'सनक' और 'मछली'। इस आधार पर, विकल्प 3 सही है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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विकल्प 3: सनक : मछली
- 'झक' का अर्थ 'सनक' होता है। 'सनक' का मतलब होता है किसी विशेष विचार या कार्य के प्रति अत्यधिक उत्साह या जुनून।
- 'झख' का अर्थ 'मछली' होता है। 'मछली' एक जलचर जीव है जो पानी में रहती है।
- इसलिए, 'झक' और 'झख' के अर्थ क्रमशः 'सनक' और 'मछली' हैं, जो विकल्प 3 को सही बनाता है।
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अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
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विकल्प 1: धुन : सनक
- 'धुन' का अर्थ संगीत की लय या ध्वनि होता है, जो 'झक' के अर्थ 'सनक' से मेल नहीं खाता।
- 'सनक' का अर्थ सही है, लेकिन 'धुन' का अर्थ 'झक' नहीं होता।
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विकल्प 2: झाग : फेन
- 'झाग' और 'फेन' दोनों का अर्थ एक ही होता है, जो कि पानी या किसी तरल पदार्थ में बनने वाले बुलबुले होते हैं।
- यह 'झक' और 'झख' के अर्थ से मेल नहीं खाता।
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विकल्प 4: शीघ्र : सनक
- 'शीघ्र' का अर्थ जल्दी या तुरंत होता है, जो 'झक' के अर्थ 'सनक' से मेल नहीं खाता।
- 'सनक' का अर्थ सही है, लेकिन 'शीघ्र' का अर्थ 'झक' नहीं होता।
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इस प्रकार, विकल्प 3 'सनक : मछली' सही उत्तर है क्योंकि यह 'झक' और 'झख' के सही अर्थों को दर्शाता है।
प्रश्न 79
निम्न शब्द-युग्मों में गलत अर्थ वाले विकल्प का चयन कीजिए :
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न में दिए गए शब्द-युग्मों में से गलत अर्थ वाले विकल्प का चयन करना है। सही उत्तर विकल्प 2 है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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विकल्प 2: अगद-अंगद – रोगी, बालिपुत्र
इस विकल्प में दिए गए शब्द-युग्म का अर्थ गलत है। 'अगद' का अर्थ है 'रोग रहित' या 'औषधि', जबकि 'अंगद' का अर्थ है 'बालिपुत्र' या 'रामायण के पात्र अंगद'। यहाँ 'अगद' का अर्थ 'रोगी' दिया गया है, जो गलत है। इसलिए यह विकल्प सही उत्तर है क्योंकि इसमें अर्थ गलत दिया गया है। -
विकल्प 1: अविरोध-अवरोध - विरोध रहित, रुकावट
इस विकल्प में 'अविरोध' का अर्थ 'विरोध रहित' और 'अवरोध' का अर्थ 'रुकावट' सही है। दोनों शब्दों के अर्थ सही हैं, इसलिए यह विकल्प गलत अर्थ वाला नहीं है। -
विकल्प 3: अनंग-अनग – अशरीर, बिना नग का
'अनंग' का अर्थ 'अशरीर' होता है, जो कामदेव का एक नाम भी है, और 'अनग' का अर्थ 'बिना नग का' होता है। दोनों शब्दों के अर्थ सही हैं, इसलिए यह विकल्प गलत अर्थ वाला नहीं है। -
विकल्प 4: उभय-अभय – दोनों, निर्भीक
'उभय' का अर्थ 'दोनों' होता है और 'अभय' का अर्थ 'निर्भीक' होता है। दोनों शब्दों के अर्थ सही हैं, इसलिए यह विकल्प गलत अर्थ वाला नहीं है।
इस प्रकार, विकल्प 2 में दिए गए शब्द-युग्म का अर्थ गलत है, इसलिए यह सही उत्तर है।
प्रश्न 80
ईठि : ईठी' शब्द युग्म के सही अर्थ हैं -
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उत्तर और व्याख्या
ईठि : ईठी' शब्द युग्म के सही अर्थ हैं - भिन्नता : प्रिया
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विस्तृत व्याख्या:
- 'ईठि' का अर्थ है भिन्नता। यह शब्द किसी चीज़ के अलग होने या भिन्न होने को दर्शाता है।
- 'ईठी' का अर्थ है प्रिया। यह शब्द किसी प्रिय व्यक्ति या वस्तु को संदर्भित करता है।
- इसलिए, 'ईठि : ईठी' शब्द युग्म का सही अर्थ है 'भिन्नता : प्रिया', जो विकल्प 1 में दिया गया है।
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अन्य विकल्पों की गलतियाँ:
- विकल्प 2: बाधा : भाला - 'ईठि' का अर्थ बाधा नहीं है, और 'ईठी' का अर्थ भाला नहीं है। इसलिए यह विकल्प गलत है।
- विकल्प 3: उपद्रव : प्रिया - 'ईठि' का अर्थ उपद्रव नहीं है। इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
- विकल्प 4: स्वामी : प्रिया - 'ईठि' का अर्थ स्वामी नहीं है। इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
इस प्रकार, दिए गए विकल्पों में से केवल विकल्प 1 ही सही है, जो 'ईठि : ईठी' शब्द युग्म के सही अर्थ 'भिन्नता : प्रिया' को दर्शाता है।