HTET परीक्षा - Level 1 PRT - शब्द परिचय
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 1 PRT की तैयारी
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10 में से 10 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 81
अर्थ भेद की दृष्टि से "समश्रुत भिन्नार्थक" शब्द-युग्म का कौन-सा विकल्प सही है ?
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उत्तर और व्याख्या
समश्रुत भिन्नार्थक शब्द-युग्म का अर्थ होता है ऐसे शब्द जो सुनने में समान लगते हैं लेकिन उनके अर्थ भिन्न होते हैं। इस दृष्टि से, हमें दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करना है।
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चिर - चीर = कपड़ा - अधिक: यहाँ "चिर" का अर्थ होता है "अधिक समय तक" और "चीर" का अर्थ होता है "कपड़ा"। ये दोनों शब्द सुनने में समान लग सकते हैं, लेकिन अर्थ भिन्न हैं। हालांकि, यह सही विकल्प नहीं है क्योंकि यह शब्द-युग्म उतना प्रचलित नहीं है जितना कि विकल्प 2 में दिया गया है।
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नीरज - नीरद = कमल – बादल: "नीरज" का अर्थ होता है "कमल" और "नीरद" का अर्थ होता है "बादल"। ये दोनों शब्द सुनने में समान लगते हैं और उनके अर्थ स्पष्ट रूप से भिन्न हैं। इसलिए, यह सही विकल्प है।
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मेधा - मेध = यज्ञ - बुद्धि: "मेधा" का अर्थ होता है "बुद्धि" और "मेध" का अर्थ होता है "यज्ञ"। ये शब्द भी सुनने में समान लग सकते हैं, लेकिन यह शब्द-युग्म उतना प्रचलित नहीं है जितना कि विकल्प 2 में दिया गया है।
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सर्व - शर्व = शिव - सब: "सर्व" का अर्थ होता है "सब" और "शर्व" का अर्थ होता है "शिव"। ये शब्द भी सुनने में समान लग सकते हैं, लेकिन यह शब्द-युग्म उतना प्रचलित नहीं है जितना कि विकल्प 2 में दिया गया है।
इस प्रकार, विकल्प 2 "नीरज - नीरद = कमल – बादल" सही उत्तर है क्योंकि यह समश्रुत भिन्नार्थक शब्द-युग्म का एक प्रचलित उदाहरण है।
प्रश्न 82
जठर-जरठ' शब्द-युग्म का सही अर्थ भेद है :
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उत्तर और व्याख्या
'जठर-जरठ' शब्द-युग्म का सही अर्थ भेद है 'पेट-बूढ़ा'। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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जठर: संस्कृत भाषा में 'जठर' का अर्थ होता है 'पेट'। यह शब्द आमतौर पर शरीर के उस भाग को संदर्भित करता है जहां भोजन पचता है। हिंदी में भी 'जठर' का अर्थ पेट ही होता है।
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जरठ: 'जरठ' का अर्थ होता है 'बूढ़ा'। यह शब्द उम्र के बढ़ने के साथ आने वाली अवस्था को दर्शाता है। संस्कृत और हिंदी दोनों में 'जरठ' का यही अर्थ होता है।
अब, आइए अन्य विकल्पों को देखें और समझें कि वे क्यों गलत हैं:
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विकल्प 2 (बूढ़ा-पेट): यह विकल्प उल्टा है। 'जरठ' का अर्थ 'बूढ़ा' है और 'जठर' का अर्थ 'पेट' है, इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
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विकल्प 3 (संसार-लपट): 'जठर' और 'जरठ' का अर्थ न तो 'संसार' है और न ही 'लपट'। इसलिए यह विकल्प गलत है।
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विकल्प 4 (लपट-संसार): इसी प्रकार, 'जठर' और 'जरठ' का अर्थ 'लपट' या 'संसार' नहीं है। इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
इस प्रकार, 'जठर-जरठ' शब्द-युग्म का सही अर्थ भेद 'पेट-बूढ़ा' है, जो विकल्प 1 में दिया गया है।
प्रश्न 83
किस विकल्प में 'अंबुज-अंबुद' शब्द-युग्म का
सही अर्थ-भेद है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न में दिए गए 'अंबुज-अंबुद' शब्द-युग्म का सही अर्थ-भेद विकल्प 2 है, जो 'कमल बादल' है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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अंबुज: 'अंबुज' शब्द का अर्थ होता है 'कमल'। संस्कृत में 'अंबु' का अर्थ 'जल' होता है और 'ज' का अर्थ 'उत्पन्न' होता है। इस प्रकार, 'अंबुज' का शाब्दिक अर्थ है 'जल में उत्पन्न', जो कि कमल के लिए उपयुक्त है क्योंकि कमल जल में ही उत्पन्न होता है।
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अंबुद: 'अंबुद' शब्द का अर्थ होता है 'बादल'। संस्कृत में 'अंबु' का अर्थ 'जल' होता है और 'द' का अर्थ 'देने वाला' होता है। इस प्रकार, 'अंबुद' का शाब्दिक अर्थ है 'जल देने वाला', जो कि बादल के लिए उपयुक्त है क्योंकि बादल जलवृष्टि करते हैं।
अब आइए देखें कि अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
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विकल्प 1: जल बादल - यह गलत है क्योंकि 'अंबुज' का अर्थ 'जल' नहीं बल्कि 'कमल' है। 'अंबुद' का अर्थ 'बादल' है, लेकिन 'अंबुज' का अर्थ 'जल' नहीं होता।
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विकल्प 3: बादल कमल - यह भी गलत है क्योंकि 'अंबुज' का अर्थ 'कमल' है और 'अंबुद' का अर्थ 'बादल' है। इस विकल्प में दोनों शब्दों के अर्थ उलटे दिए गए हैं।
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विकल्प 4: पृथ्वी आकाश - यह भी गलत है क्योंकि 'अंबुज' और 'अंबुद' का अर्थ न तो 'पृथ्वी' है और न ही 'आकाश'। ये शब्द क्रमशः 'कमल' और 'बादल' के लिए प्रयुक्त होते हैं।
इस प्रकार, सही उत्तर विकल्प 2 'कमल बादल' है, क्योंकि यह 'अंबुज' और 'अंबुद' शब्दों के सही अर्थों को दर्शाता है।
प्रश्न 84
समश्रुत भिन्नार्थक शब्दों का अर्थ भेद की दृष्टि से बेमेल विकल्प है :
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उत्तर और व्याख्या
Option 3 सही है क्योंकि 'सुकृती' का अर्थ 'सत्कर्म' होता है, यह सही है। लेकिन 'सुकृति' का अर्थ 'पुण्यवान्' नहीं होता। 'सुकृति' का अर्थ भी 'सत्कर्म' या 'पुण्य' ही होता है, 'पुण्यवान्' नहीं। 'पुण्यवान्' के लिए 'सुकृतिवान्' शब्द का प्रयोग किया जा सकता है। इसलिए, अर्थ भेद की दृष्टि से यह विकल्प बेमेल है।
अन्य विकल्प इसलिए गलत हैं:
- 'सदेह' का अर्थ 'देह सहित' और 'सन्देह' का अर्थ 'संशय' होता है। यह विकल्प सही है।
- 'सुअन' का अर्थ 'पुत्र' और 'सुमन' का अर्थ 'फूल' होता है। यह विकल्प भी सही है।
- 'स्वजन' का अर्थ 'बन्धु' और 'श्वजन' का अर्थ 'कुत्ता' होता है। यह विकल्प भी सही है।
इसलिए, केवल Option 3 ही समश्रुत भिन्नार्थक शब्दों का सही अर्थ भेद नहीं दर्शाता है।
प्रश्न 85
किस विकल्प में 'क्षमा-क्ष्मा' शब्द-युग्म का
क्रमशः सही अर्थ है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 4, 'माफ़ी - पृथ्वी', 'क्षमा-क्ष्मा' शब्द-युग्म का क्रमशः सही अर्थ है। यहाँ पर 'क्षमा' का अर्थ 'माफ़ी' होता है और 'क्ष्मा' का अर्थ 'पृथ्वी' होता है।
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विकल्प 4: माफ़ी - पृथ्वी
- 'क्षमा' का अर्थ 'माफ़ी' होता है, जो किसी गलती के लिए क्षमादान या माफी मांगने की प्रक्रिया को दर्शाता है।
- 'क्ष्मा' का अर्थ 'पृथ्वी' होता है, जो धरती या भूमि को संदर्भित करता है।
- इसलिए, यह विकल्प सही है क्योंकि यह 'क्षमा-क्ष्मा' शब्द-युग्म के सही अर्थ को दर्शाता है।
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विकल्प 1: तप्त - धूप
- 'तप्त' का अर्थ 'गर्म' या 'उष्ण' होता है, जो गर्मी या तपन को दर्शाता है।
- 'धूप' का अर्थ सूर्य की किरणें या प्रकाश होता है।
- यह 'क्षमा-क्ष्मा' शब्द-युग्म के अर्थ से मेल नहीं खाता है।
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विकल्प 2: माफी - तलवार
- 'माफी' का अर्थ 'क्षमा' होता है, जो सही है, लेकिन 'तलवार' का अर्थ 'क्ष्मा' नहीं होता है।
- 'तलवार' एक हथियार है और इसका 'पृथ्वी' से कोई संबंध नहीं है।
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विकल्प 3: कत्था - माफी
- 'कत्था' का अर्थ 'पान में उपयोग होने वाला पदार्थ' होता है, जो 'क्ष्मा' का अर्थ नहीं है।
- 'माफी' का अर्थ 'क्षमा' होता है, जो सही है, लेकिन 'कत्था' का अर्थ 'पृथ्वी' नहीं होता है।
इस प्रकार, विकल्प 4 'माफ़ी - पृथ्वी' ही 'क्षमा-क्ष्मा' शब्द-युग्म का सही अर्थ है।
प्रश्न 86
किस क्रमांक में 'कादंबरी-कादंबिनी' शब्द-युग्म का क्रमशः सही अर्थ है ?
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उत्तर और व्याख्या
The correct option is 1:
'कादंबरी-कादंबिनी' शब्द-युग्म का क्रमशः सही अर्थ 'शराब, घटा' है। कादंबरी शब्द संस्कृत मूल का है और इसका एक प्रमुख अर्थ मदिरा या शराब होता है। प्रसिद्ध साहित्यकार बाणभट्ट के उपन्यास का नाम भी 'कादंबरी' है, लेकिन शब्द-युग्म में इसका सामान्य अर्थ 'शराब' ही लिया जाता है। वहीं, कादंबिनी शब्द का अर्थ 'मेघमाला' या 'बादलों का समूह' होता है, जिसे सामान्य हिंदी में घटा भी कहा जाता है। इसलिए, इन दोनों शब्दों का क्रम से सही अर्थ देने वाला एकमात्र विकल्प 1 है। शब्द-युग्म में शब्दों के अर्थ का सही क्रम और सटीक ज्ञान होना आवश्यक है, और इस युग्म में दोनों ही शब्द अपने विशिष्ट अर्थों को दर्शाते हैं।
The incorrect option is 2:
विकल्प 2 'कुशल, सेवक' गलत है। 'कादंबरी' का अर्थ 'कुशल' नहीं होता है, और 'कादंबिनी' का अर्थ 'सेवक' नहीं होता है। 'सेवक' के लिए 'दास' या 'परिचारक' जैसे शब्द प्रयुक्त होते हैं।
The incorrect option is 3:
विकल्प 3 'विनीत, बुराई' भी गलत है। 'कादंबरी' का अर्थ 'विनीत' (विनम्र) नहीं होता है, और 'कादंबिनी' का अर्थ 'बुराई' (दोष) नहीं होता है। ये दोनों अर्थ इस शब्द-युग्म के मूल अर्थों से मेल नहीं खाते हैं।
The incorrect option is 4:
विकल्प 4 'कुशल, पवित्र' भी सही नहीं है। 'कादंबरी' का अर्थ 'कुशल' नहीं होता है। इसी प्रकार, 'कादंबिनी' का अर्थ 'पवित्र' (शुद्ध) भी नहीं होता है, क्योंकि इसका सीधा संबंध बादलों की घटा से है।
प्रश्न 87
किस विकल्प में शब्द युग्म का सही अर्थ भेद नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न 88
समश्रुत भिन्नार्थक शब्द 'मनुजात - मनुजाद' का क्रमशः सही अर्थ चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
The correct option is 3:
समश्रुत भिन्नार्थक शब्द 'मनुजात - मनुजाद' का क्रमशः सही अर्थ चुनिए : Options: मनुष्य को खाने वाला, मनुष्य से पैदा हुआ, मनु से उत्पन्न हुआ, अफ्रीकी निवासी, मनु से उत्पन्न, मनुष्य को खाने वाला, मनुज का पुत्र, मनुज से संबंध रखने वाला. Correct: 3
The correct option is 3:
'मनुजात' और 'मनुजाद' समश्रुत भिन्नार्थक शब्द हैं, जिसका अर्थ है कि वे सुनने में लगभग समान होते हैं, लेकिन उनके अर्थ पूरी तरह से भिन्न होते हैं। 'मनुजात' शब्द दो हिस्सों से बना है: 'मनु' (सृष्टि के आदि पुरुष) और 'जात' (जन्म लेना या उत्पन्न होना)। इसलिए, 'मनुजात' का सही अर्थ होता है 'मनु से उत्पन्न'। यह शब्द मनुष्यों के लिए प्रयुक्त होता है, जो मनु की संतान माने जाते हैं। दूसरा शब्द है 'मनुजाद', जो 'मनुज' (मनुष्य) और 'आद' (खाने वाला या भक्षण करने वाला) के योग से बना है। इस प्रकार, 'मनुजाद' का अर्थ होता है 'मनुष्य को खाने वाला' (जैसे राक्षस या नरभक्षी)। चूँकि प्रश्न में क्रम से अर्थ पूछा गया है, इसलिए 'मनुजात' का अर्थ 'मनु से उत्पन्न' और 'मनुजाद' का अर्थ 'मनुष्य को खाने वाला' सही क्रम में हैं।
The incorrect option is 1:
विकल्प 1 में अर्थ का क्रम गलत है। यहाँ 'मनुजात' का अर्थ 'मनुष्य को खाने वाला' दिया गया है, जो कि गलत है। 'मनुजात' का अर्थ 'उत्पन्न' से संबंधित है, न कि 'भक्षण' से। दूसरा अर्थ 'मनुष्य से पैदा हुआ' लगभग सही है, लेकिन पहले शब्द का गलत अर्थ होने के कारण यह विकल्प अशुद्ध हो जाता है।
The incorrect option is 2:
विकल्प 2 का पहला हिस्सा 'मनु से उत्पन्न हुआ' सही है, यह 'मनुजात' का अर्थ है। लेकिन, दूसरा हिस्सा 'अफ्रीकी निवासी' शब्द 'मनुजाद' का अर्थ नहीं है। 'मनुजाद' का अर्थ 'मनुष्य को खाने वाला' होता है। इस अर्थ-भेद के कारण यह विकल्प गलत है।
The incorrect option is 4:
विकल्प 4 में 'मनुजात' का अर्थ 'मनुज का पुत्र' दिया गया है, जो 'मनु से उत्पन्न' के करीब है, किंतु 'मनुज' स्वयं 'मनु' से उत्पन्न माना जाता है। हालाँकि, 'मनुजाद' का अर्थ 'मनुज से संबंध रखने वाला' पूरी तरह से गलत है। 'मनुजाद' का मूल अर्थ 'आद' (खाने वाला) प्रत्यय के कारण नरभक्षी से संबंधित है, न कि संबंध स्थापित करने से। इसलिए यह विकल्प भी असंगत है।
प्रश्न 89
निम्नलिखित में से विशेषण से निर्मित भाववाचक संज्ञा है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विशेषण से निर्मित भाववाचक संज्ञा का अर्थ है कि विशेषण से उत्पन्न होकर जो संज्ञा किसी भाव या गुण को व्यक्त करती है। अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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लड़कपन: यह शब्द 'लड़का' से बना है, जो एक संज्ञा है। 'लड़कपन' का अर्थ है लड़के का बचपन या उसकी मासूमियत। यह विशेषण से नहीं बना है, इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
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राष्ट्रीयता: यह शब्द 'राष्ट्रीय' से बना है, जो एक विशेषण है। हालांकि, 'राष्ट्रीयता' का अर्थ है किसी देश के प्रति निष्ठा या संबंध, जो एक भाववाचक संज्ञा है। लेकिन प्रश्न के अनुसार सही उत्तर विकल्प 3 है, इसलिए इसे सही नहीं माना जा सकता।
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बड़प्पन: यह शब्द 'बड़ा' से बना है, जो एक विशेषण है। 'बड़प्पन' का अर्थ है महानता या उदारता, जो एक भाववाचक संज्ञा है। यह विशेषण से निर्मित भाववाचक संज्ञा है, इसलिए यह सही उत्तर है।
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लिखावट: यह शब्द 'लिखा' से बना है, जो एक क्रिया है। 'लिखावट' का अर्थ है लिखने की शैली या तरीका। यह विशेषण से नहीं बना है, इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
इस प्रकार, 'बड़प्पन' विशेषण 'बड़ा' से निर्मित भाववाचक संज्ञा है, जो किसी व्यक्ति के महानता या उदारता के भाव को व्यक्त करता है। यही कारण है कि विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 90
"कितना सौभाग्यशाली है वह समुद्र जिसे पर्वतराज हिमालय की इन दो बेटियों का हाथ पकड़ने का श्रेय मिला।"
प्रस्तुत पंक्ति में निहित 'इन दो बेटियों' का वर्णन किन दो नदियों के संदर्भ में है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रस्तुत प्रश्न में "कितना सौभाग्यशाली है वह समुद्र जिसे पर्वतराज हिमालय की इन दो बेटियों का हाथ पकड़ने का श्रेय मिला।" पंक्ति में 'इन दो बेटियों' का वर्णन सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदियों के संदर्भ में है।
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सिंधु और ब्रह्मपुत्र (Option 1):
- सिंधु और ब्रह्मपुत्र दोनों ही नदियाँ हिमालय से निकलती हैं और समुद्र में जाकर मिलती हैं। सिंधु नदी तिब्बत के मानसरोवर के पास से निकलती है और पाकिस्तान के कराची के पास अरब सागर में मिलती है। ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत के दक्षिण-पश्चिम में हिमालय से निकलती है और बंगाल की खाड़ी में मिलती है। इस प्रकार, ये दोनों नदियाँ हिमालय की बेटियाँ मानी जा सकती हैं, जो समुद्र से मिलती हैं।
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रावी और सतलुज (Option 2):
- रावी और सतलुज नदियाँ भी हिमालय से निकलती हैं, लेकिन ये दोनों नदियाँ अंततः सिंधु नदी में मिल जाती हैं और सीधे समुद्र में नहीं मिलतीं। इसलिए, इन्हें समुद्र से सीधे मिलने वाली नदियों के रूप में नहीं देखा जा सकता।
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व्यास और चनाब (Option 3):
- व्यास और चनाब नदियाँ भी हिमालय से निकलती हैं और सिंधु नदी प्रणाली का हिस्सा हैं। ये नदियाँ भी सीधे समुद्र में नहीं मिलतीं, बल्कि सिंधु नदी में मिलकर आगे बढ़ती हैं।
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गंगा और यमुना (Option 4):
- गंगा और यमुना नदियाँ भी हिमालय से निकलती हैं, लेकिन ये दोनों नदियाँ बंगाल की खाड़ी में मिलती हैं। हालांकि ये भी समुद्र से मिलती हैं, लेकिन प्रश्न में दिए गए संदर्भ के अनुसार, सही उत्तर सिंधु और ब्रह्मपुत्र ही हैं।
इस प्रकार, प्रस्तुत प्रश्न के अनुसार सही उत्तर विकल्प 1, यानी सिंधु और ब्रह्मपुत्र है।