HTET परीक्षा - Level 1 PRT - वाक्य रचना
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 1 PRT की तैयारी
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 61
निम्नलिखित में से सही वर्तनी वाला शब्द है
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
The correct option is 1:
अनिर्णीत
यह प्रश्न हिंदी व्याकरण के वर्तनी (Spelling) खंड से संबंधित है, जिसमें हमें चार विकल्पों में से शुद्ध वर्तनी वाले शब्द की पहचान करनी है। 'अनिर्णीत' शब्द का अर्थ होता है 'जिसका निर्णय न हुआ हो' या 'Undecided'। इसकी व्युत्पत्ति 'अन्' (उपसर्ग, जिसका अर्थ नहीं है) + 'निर्णय' (मूल शब्द) + 'इत' (प्रत्यय) से होती है। शुद्ध वर्तनी 'अनिर्णीत' है, जिसमें 'न' के बाद 'इ' की मात्रा और फिर 'र' वर्ण का रेफ (र्) 'ण' पर आता है, और अंत में 'ई' की मात्रा के साथ 'त' आता है। यह शब्द नियमबद्ध रूप से बना है और वर्तनी की दृष्टि से पूर्णतः शुद्ध है।
The incorrect option is 2:
आशिर्वाद
'आशिर्वाद' की वर्तनी त्रुटिपूर्ण है। शुद्ध शब्द 'आशीर्वाद' होता है। इसमें 'र्' का रेफ 'व' पर नहीं, बल्कि 'वा' के बाद आने वाले 'द' पर लगता है, क्योंकि रेफ उस व्यंजन पर लगता है जिसके बाद उसका उच्चारण होता है।
The incorrect option is 3:
षष्ठम्
'षष्ठम्' की वर्तनी भी गलत है। शुद्ध वर्तनी 'षष्ठ' होती है, जिसका अर्थ छठा (Sixth) होता है। 'षष्ठ' स्वयं में पूर्ण शब्द है, जिसमें अंत में 'म' जोड़ना अनावश्यक और अशुद्ध है, या यदि संस्कृत के विभक्ति रूप में देखा जाए, तो भी यह प्रयोग हिंदी के सामान्य संदर्भ में गलत है।
The incorrect option is 4:
शहंशाह
'शहंशाह' की वर्तनी अशुद्ध है। फारसी मूल का यह शब्द हिंदी में प्रायः 'शहंशाह' या 'शहनशाह' के रूप में लिखा जाता है, जिसमें मध्य में 'न' ध्वनि आती है। विकल्प में 'ह' के बाद 'न' का लोप है, जिससे वर्तनी अशुद्ध हो जाती है।
प्रश्न 62
निम्न में शुद्ध रूप से लिखा वाक्य है
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उत्तर और व्याख्या
The correct option is 4:
विकल्प 4, 'यह सुन्दरतम साड़ी है', व्याकरण की दृष्टि से पूर्णतः शुद्ध है। इसमें 'सुन्दरतम' विशेषण की उत्तमावस्था (Superlative Degree) का प्रयोग हुआ है, जिसका अर्थ है 'सबसे सुंदर'। वाक्य की संरचना, लिंग, वचन और कारक सभी सही हैं, और यह साड़ी के सबसे सुंदर होने के भाव को स्पष्ट रूप से व्यक्त करता है। 'सुन्दरतम' शब्द स्वयं में पूर्ण है और किसी अतिरिक्त सहायक शब्द की आवश्यकता नहीं रखता।
The incorrect option is 1:
विकल्प 1, 'अनजाने में कर दिया', एक अपूर्ण वाक्य है। क्रिया ('कर दिया') और सहायक शब्द ('अनजाने में') तो मौजूद हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि 'क्या' कर दिया गया। किसी क्रिया के साथ कर्ता (Subject) और कर्म (Object) का उल्लेख या तो स्पष्ट रूप से होना चाहिए या संदर्भ से स्पष्ट होना चाहिए। चूंकि यहां न तो कर्ता और न ही कर्म स्पष्ट है, इसलिए यह वाक्य प्रयोग के दृष्टिकोण से अस्पष्ट और अधूरा है। यदि इसे शुद्ध करना होता, तो 'यह काम अनजाने में कर दिया' जैसा कुछ लिखना पड़ता।
The incorrect option is 2:
विकल्प 2, 'वे बड़े अच्छे खिलाड़ी हैं', अशुद्ध है क्योंकि इसमें पदक्रम (word order) की त्रुटि है। विशेषणों का प्रयोग सामान्यतः विशेष्य (जिसकी विशेषता बताई जा रही है) से पहले होना चाहिए। इस वाक्य में 'बड़े' (बहुत/very) और 'अच्छे' दोनों विशेषण हैं। सही प्रयोग 'वे बहुत अच्छे खिलाड़ी हैं' या 'वे बड़े (महान) खिलाड़ी हैं' हो सकता है। यदि 'बड़े' का अर्थ 'महान' है, तो यह सही हो सकता है, लेकिन अगर इसका अर्थ 'बहुत' है, तो 'बहुत' का प्रयोग अधिक सटीक होता। हालांकि, सामान्य बोलचाल में 'बड़े अच्छे' का प्रयोग होता है, व्याकरणिक दृष्टि से यह कमज़ोर माना जाता है।
The incorrect option is 3:
विकल्प 3, 'पुस्तकों में यह बहुत श्रेष्ठ है', पुनरुक्ति दोष (redundancy error) के कारण अशुद्ध है। 'श्रेष्ठ' शब्द स्वयं में ही विशेषण की उत्तमावस्था (सबसे अच्छा) को दर्शाता है। इसलिए 'श्रेष्ठ' के साथ 'बहुत' या 'सबसे' जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाता। यदि हम कहते हैं कि कोई चीज़ 'श्रेष्ठ' है, तो इसका अर्थ है कि वह पहले से ही सर्वोच्च श्रेणी में है, इसलिए 'बहुत श्रेष्ठ' कहना व्याकरणिक रूप से गलत है। वाक्य का शुद्ध रूप 'पुस्तकों में यह श्रेष्ठ है' होना चाहिए।
प्रश्न 63
निम्न में से सही विकल्प का चयन कीजिए
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न 64
अशुद्ध शब्द को चुनिए
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
अशुद्ध शब्द को चुनने के लिए हमें यह देखना होता है कि कौन सा शब्द व्याकरण या वर्तनी के नियमों के अनुसार सही नहीं है। दिए गए विकल्पों में से:
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पूज्यनीय: यह शब्द अशुद्ध है। सही शब्द "पूजनीय" होता है। हिंदी में "नीय" प्रत्यय का प्रयोग होता है, जैसे "पूजनीय", "वंदनीय" आदि। "पूज्यनीय" में "नीय" का गलत प्रयोग हुआ है।
-
चहारदीवारी: यह शब्द शुद्ध है। इसका अर्थ है चार दीवारों से घिरा हुआ स्थान या बाड़ा। यह शब्द हिंदी में सही रूप से प्रयोग होता है।
-
उच्छिष्ट: यह शब्द भी शुद्ध है। इसका अर्थ होता है बचा हुआ भोजन या अवशिष्ट। यह शब्द हिंदी में सही रूप से प्रयोग होता है।
-
पारिवारिक: यह शब्द भी शुद्ध है। इसका अर्थ होता है परिवार से संबंधित। यह शब्द हिंदी में सही रूप से प्रयोग होता है।
इस प्रकार, "पूज्यनीय" शब्द अशुद्ध है और सही उत्तर विकल्प 1 है।
प्रश्न 65
अपन ठीक रास्ते पर हैं।' वाक्य में अशुद्धि है
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उत्तर और व्याख्या
वाक्य "अपन ठीक रास्ते पर हैं।" में अशुद्धि सर्वनाम संबंधी है, जो विकल्प 3 को सही उत्तर बनाता है। यहाँ पर "अपन" का प्रयोग सर्वनाम के रूप में किया गया है, जो कि गलत है। सही सर्वनाम "अपने" होना चाहिए। इस वाक्य में "अपने" का प्रयोग होना चाहिए क्योंकि यह वाक्य किसी व्यक्ति या समूह के बारे में बात कर रहा है जो स्वयं के लिए सही रास्ते पर हैं।
अब अन्य विकल्पों की गलतियों को समझते हैं:
-
वर्तनी संबंधी (विकल्प 1): वर्तनी संबंधी अशुद्धि तब होती है जब शब्दों की सही वर्तनी का प्रयोग नहीं किया जाता। इस वाक्य में "अपन" और "ठीक" की वर्तनी सही है, इसलिए यह वर्तनी संबंधी अशुद्धि नहीं है।
-
अव्यय संबंधी (विकल्प 2): अव्यय संबंधी अशुद्धि तब होती है जब अव्यय शब्दों का गलत प्रयोग होता है। इस वाक्य में "पर" एक अव्यय है और इसका प्रयोग सही है, इसलिए यह अव्यय संबंधी अशुद्धि नहीं है।
-
लिंग संबंधी (विकल्प 4): लिंग संबंधी अशुद्धि तब होती है जब वाक्य में लिंग का गलत प्रयोग होता है। इस वाक्य में लिंग संबंधी कोई समस्या नहीं है क्योंकि "रास्ते" और "ठीक" का लिंग सही है।
इस प्रकार, वाक्य में अशुद्धि सर्वनाम संबंधी है, और सही उत्तर विकल्प 3 है।
प्रश्न 66
किस बिकल्प में वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध शब्द है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 1 "दवाईयाँ" वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध शब्द है। इसका सही रूप "दवाइयाँ" होना चाहिए। हिंदी में जब बहुवचन बनाने के लिए 'याँ' का प्रयोग होता है, तो 'ई' की मात्रा के बाद 'याँ' का प्रयोग होता है, जैसे 'किताबें' से 'किताबें' और 'दवाइयाँ' से 'दवाइयाँ'। इसलिए, 'दवाईयाँ' में 'ई' की मात्रा का अभाव है, जो इसे अशुद्ध बनाता है।
अब अन्य विकल्पों की शुद्धता की पुष्टि करते हैं:
-
पौलस्त्य: यह शब्द सही है और इसका प्रयोग महाभारत और रामायण में एक ऋषि के नाम के रूप में होता है। इसमें कोई वर्तनी की त्रुटि नहीं है।
-
आभिजात्य: यह शब्द भी सही है। इसका अर्थ होता है 'उच्च वर्गीय' या 'श्रेष्ठता'। इसमें वर्तनी की कोई गलती नहीं है।
-
आपराधिक: यह शब्द भी सही है और इसका अर्थ 'अपराध से संबंधित' होता है। इसमें भी वर्तनी की दृष्टि से कोई त्रुटि नहीं है।
इस प्रकार, विकल्प 1 "दवाईयाँ" वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध है और यही सही उत्तर है।
प्रश्न 67
वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध विकल्प चुनिए :
सही उत्तर: विकल्प 1 (दुरावस्था)
विस्तृत व्याख्या:
-
दुरावस्था: यह शब्द वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध है। 'दुरावस्था' शब्द का अर्थ होता है 'खराब स्थिति'। यहाँ 'दुर' उपसर्ग का प्रयोग 'अवस्था' के साथ किया गया है, जो कि सही नहीं है। सही शब्द 'दुर्व्यवस्था' या 'दुर्दशा' हो सकता है, जो कि 'खराब स्थिति' के लिए अधिक उपयुक्त है। इसलिए, इस शब्द का प्रयोग अशुद्ध माना गया है।
-
मातृभक्त: यह शब्द वार्तनिक दृष्टि से शुद्ध है। 'मातृ' का अर्थ 'माँ' और 'भक्त' का अर्थ 'श्रद्धालु' होता है। इस प्रकार, 'मातृभक्त' का अर्थ 'माँ का भक्त' होता है, जो कि सही है और इसमें कोई अशुद्धता नहीं है।
-
मनःकामना: यह शब्द भी वार्तनिक दृष्टि से शुद्ध है। 'मनः' का अर्थ 'मन' और 'कामना' का अर्थ 'इच्छा' होता है। 'मनःकामना' का अर्थ 'मन की इच्छा' होता है, जो कि सही है और इसमें कोई अशुद्धता नहीं है।
-
अन्तर्धान: यह शब्द भी वार्तनिक दृष्टि से शुद्ध है। 'अन्तर' का अर्थ 'भीतर' और 'धान' का अर्थ 'छिपना' होता है। 'अन्तर्धान' का अर्थ 'अंदर छिप जाना' होता है, जो कि सही है और इसमें कोई अशुद्धता नहीं है।
इस प्रकार, वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध विकल्प 'दुरावस्था' है, और यही कारण है कि इसे सही उत्तर के रूप में चुना गया है।
प्रश्न 68
वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध विकल्प चुनने के लिए हमें शब्दों के सही रूप और उनके प्रयोग को समझना आवश्यक है। दिए गए विकल्पों में से:
-
विद्वता: यह शब्द अशुद्ध है। सही शब्द "विद्वत्ता" है। "विद्वता" का प्रयोग गलत है क्योंकि संस्कृत में 'विद्वान' से 'विद्वत्ता' बनता है, जिसका अर्थ है विद्वान होने की अवस्था या गुण।
-
गीतांजली: यह शब्द शुद्ध है। "गीतांजली" रवींद्रनाथ ठाकुर की प्रसिद्ध काव्य रचना का नाम है और इसका प्रयोग सही है।
-
पक्षिगण: यह शब्द शुद्ध है। "पक्षिगण" का अर्थ है पक्षियों का समूह, और यह शब्द सही रूप में है।
-
स्वामिभक्त: यह शब्द शुद्ध है। "स्वामिभक्त" का अर्थ है स्वामी के प्रति भक्ति रखने वाला, और यह सही रूप में है।
इस प्रकार, वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध विकल्प "विद्वता" है, क्योंकि इसका सही रूप "विद्वत्ता" होना चाहिए।
प्रश्न 69
अशुद्ध वाक्य चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
अशुद्ध वाक्य चुनिए :
Option 1: "आपसे मिलकर मुझे आनन्द का आभास हुआ।" इस वाक्य में "आनन्द का आभास" शब्दों का प्रयोग अशुद्ध है। "आभास" का अर्थ होता है "अनुमान" या "छवि", जो कि "आनन्द" के संदर्भ में सही नहीं है। सही वाक्य होगा "आपसे मिलकर मुझे आनन्द की अनुभूति हुई।" यहाँ "अनुभूति" शब्द का प्रयोग अधिक उपयुक्त है क्योंकि यह अनुभव या महसूस करने का भाव व्यक्त करता है।
Option 2: "मेरठ में कई दर्शनीय स्थल हैं।" यह वाक्य शुद्ध है क्योंकि इसमें कोई व्याकरणिक या शब्दावली संबंधी त्रुटि नहीं है। यह वाक्य सही तरीके से यह जानकारी देता है कि मेरठ में कई देखने योग्य स्थान हैं।
Option 3: "यह छात्रवृत्ति केवल छात्राओं के लिए है।" यह वाक्य भी शुद्ध है। इसमें स्पष्ट रूप से बताया गया है कि छात्रवृत्ति केवल छात्राओं के लिए उपलब्ध है, और इसमें कोई व्याकरणिक त्रुटि नहीं है।
Option 4: "मैं अपना मत स्पष्ट करना चाहता हूँ।" यह वाक्य भी शुद्ध है। इसमें वक्ता अपनी राय को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने की इच्छा जाहिर कर रहा है, और इसमें कोई अशुद्धि नहीं है।
इस प्रकार, Option 1 में "आनन्द का आभास" का प्रयोग अशुद्ध है, इसलिए यह वाक्य अशुद्ध है।
प्रश्न 70
अशुद्ध संधि वाला विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
अशुद्ध संधि वाला विकल्प चुनिए :
Option 3: तत् + उपरान्त = तदोपरान्त
विस्तृत व्याख्या:
-
तत् + उपरान्त = तदोपरान्त: इस संधि में त्रुटि है। यहां 'तत्' और 'उपरान्त' के बीच विसर्ग संधि होनी चाहिए, जिससे सही रूप 'तत्परान्त' बनता है। 'तदोपरान्त' में विसर्ग का लोप हो गया है, जो कि अशुद्ध है।
-
मद + उन्मत्त = मदोन्मत्त: यह संधि सही है। यहां पर 'मद' और 'उन्मत्त' के बीच गुण संधि का प्रयोग हुआ है, जिससे 'मद' का 'अ' और 'उन्मत्त' का 'उ' मिलकर 'ओ' बनता है, जो कि सही है।
-
विद्वत् + मुख = विद्वन्मुख: यह संधि भी सही है। यहां पर 'विद्वत्' और 'मुख' के बीच अनुस्वार संधि का प्रयोग हुआ है, जिससे 'विद्वत्' का 'त्' और 'मुख' का 'म' मिलकर 'न्' बनता है, जो कि सही है।
-
षट् + आयतन = षडायतन: यह संधि भी सही है। यहां पर 'षट्' और 'आयतन' के बीच अनुस्वार संधि का प्रयोग हुआ है, जिससे 'षट्' का 'ट्' और 'आयतन' का 'आ' मिलकर 'ड' बनता है, जो कि सही है।
इस प्रकार, विकल्प 3 'तत् + उपरान्त = तदोपरान्त' में संधि अशुद्ध है, इसलिए यह सही उत्तर है।
प्रश्न 71
अशुद्ध वर्तनी वाला विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विकल्प 1 "प्रस्तुतिकरण" को अशुद्ध वर्तनी वाला विकल्प माना गया है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
-
प्रस्तुतिकरण: यह शब्द "प्रस्तुति" से बना है, जिसका अर्थ होता है किसी चीज़ को प्रस्तुत करना या दिखाना। सही वर्तनी "प्रस्तुतीकरण" होनी चाहिए। "प्रस्तुतिकरण" में "ति" की जगह "ति" का प्रयोग होना चाहिए, इसलिए यह अशुद्ध है।
-
विचारार्ह: यह शब्द सही है और इसका अर्थ होता है "विचार करने योग्य"। इसमें कोई वर्तनी की अशुद्धि नहीं है।
-
वर्तनियाँ: यह शब्द भी सही है और इसका अर्थ होता है "वर्तनी" का बहुवचन रूप। इसमें भी कोई वर्तनी की अशुद्धि नहीं है।
-
छिपकली: यह शब्द भी सही है और इसका अर्थ होता है एक प्रकार का सरीसृप। इसमें भी कोई वर्तनी की अशुद्धि नहीं है।
इस प्रकार, विकल्प 1 "प्रस्तुतिकरण" की वर्तनी अशुद्ध है, और यही कारण है कि इसे सही उत्तर के रूप में चुना गया है।
प्रश्न 72
वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध शब्द छाँटिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वार्तनिक दृष्टि से 'सम्पर्कित' अशुद्ध शब्द है क्योंकि इसका शुद्ध रूप 'संपृक्त' होता है। 'सम्पर्कित' शब्द का प्रयोग सामान्यतः नहीं किया जाता है और यह वर्तनी की दृष्टि से गलत है।
अन्य विकल्प इस प्रकार सही हैं:
-
प्राणिमात्र: यह शब्द 'प्राणी' और 'मात्र' के मेल से बना है और वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध है। इसका अर्थ है 'सभी प्राणी'।
-
आभिजात्य: यह शब्द 'अभिजात' से बना है और इसका अर्थ है 'उच्च कुल' या 'श्रेष्ठता'। वर्तनी की दृष्टि से यह शब्द सही है।
-
कार्रवाई: यह शब्द 'कार्य' और 'वाही' के मेल से बना है और इसका अर्थ है 'कार्य का निष्पादन' या 'कार्यवाही'। वर्तनी की दृष्टि से यह शब्द भी शुद्ध है।
इसलिए, केवल 'सम्पर्कित' ही वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध है, जिसका शुद्ध रूप 'संपृक्त' है।
प्रश्न 73
शब्दकोश' में शब्दानुक्रम की दृष्टि से निम्न में से सही (आरोही) क्रम वाला विकल्प है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 3, "क्रम, क्लांति, क्लिष्ट, क्षण," शब्दकोश में शब्दानुक्रम की दृष्टि से सही आरोही क्रम वाला विकल्प है क्योंकि:
- क्रम: 'क' वर्ण के बाद 'र' वर्ण आता है।
- क्लांति: 'क' वर्ण के बाद 'ल' वर्ण आता है, और 'क्रम' के बाद 'क्लांति' आता है।
- क्लिष्ट: 'क' वर्ण के बाद 'ल' वर्ण आता है, लेकिन 'क्लांति' के बाद 'क्लिष्ट' आता है क्योंकि 'क्लांति' में 'आ' की मात्रा है जो 'इ' की मात्रा से पहले आती है।
- क्षण: 'क्ष' वर्ण 'क' के बाद आता है, इसलिए यह अंत में आएगा।
अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि:
- Option 1: क्लिष्ट, क्रम, क्लांति, क्षण: 'क्रम' 'क्लिष्ट' से पहले आना चाहिए।
- Option 2: क्षण, क्रम, क्लांति, क्लिष्ट: 'क्षण' सबसे अंत में आना चाहिए, और 'क्रम' सबसे पहले।
- Option 4: क्लांति, क्रम, क्लिष्ट, क्षण: 'क्रम' 'क्लांति' से पहले आना चाहिए।
इसलिए, केवल Option 3 शब्दकोश के अनुसार सही क्रम दर्शाता है।
प्रश्न 74
वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध विकल्प चुनने के लिए हमें यह देखना होता है कि दिए गए शब्दों में से कौन सा शब्द व्याकरण या शब्द निर्माण के नियमों के अनुसार सही नहीं है।
-
धोबिन: यह शब्द 'धोबी' का स्त्रीलिंग रूप है। हिंदी में 'धोबी' का स्त्रीलिंग 'धोबिन' होता है, जो व्याकरण के अनुसार सही है।
-
पक्षीगण: यह शब्द 'पक्षी' और 'गण' के संयोजन से बना है। 'गण' का अर्थ समूह होता है, और इसे प्राणियों के समूह के लिए प्रयोग किया जाता है। लेकिन 'पक्षीगण' का प्रयोग सामान्यतः नहीं होता है। पक्षियों के समूह के लिए 'पक्षियों का झुंड' या 'पक्षियों का समूह' जैसे शब्द अधिक प्रचलित हैं। इसलिए यह शब्द वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध माना जा सकता है।
-
स्वामिभक्त: यह शब्द 'स्वामी' और 'भक्त' के संयोजन से बना है, जिसका अर्थ होता है 'स्वामी के प्रति भक्त'। यह शब्द व्याकरण और अर्थ दोनों दृष्टियों से सही है।
-
अगुणी: यह शब्द 'गुण' के साथ 'अ' उपसर्ग जोड़कर बना है, जिसका अर्थ होता है 'गुण रहित'। यह शब्द भी व्याकरण और अर्थ के अनुसार सही है।
इस प्रकार, दिए गए विकल्पों में से 'पक्षीगण' (विकल्प 2) वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध है, क्योंकि यह शब्द सामान्य प्रयोग में नहीं आता और इसके स्थान पर अन्य शब्दों का प्रयोग अधिक उपयुक्त होता है।
प्रश्न 75
वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वाक्यांश "वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध विकल्प चुनिए" का अर्थ है कि हमें उन विकल्पों में से एक विकल्प चुनना है जो वर्तनी की दृष्टि से गलत है। दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर विकल्प 3 "वृत्यानुप्रास" है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
-
विकल्प 1: दवाइयाँ
यह शब्द "दवा" का बहुवचन रूप है और इसकी वर्तनी सही है। हिंदी में "दवाइयाँ" का प्रयोग औषधियों के लिए किया जाता है, और यह शब्द वार्तनिक दृष्टि से शुद्ध है। -
विकल्प 2: प्राणिविज्ञान
यह शब्द "प्राणी" और "विज्ञान" के संयोजन से बना है, जिसका अर्थ है जीव विज्ञान। इस शब्द की वर्तनी भी सही है और यह वार्तनिक दृष्टि से शुद्ध है। -
विकल्प 3: वृत्यानुप्रास
यह शब्द वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध है। सही शब्द "वृत्यानुप्रास" नहीं बल्कि "वृत्यानुप्रास" होना चाहिए। यह शब्द अलंकार के प्रकारों में से एक है, जिसमें एक ही ध्वनि का बार-बार प्रयोग होता है। इस प्रकार, यह विकल्प वर्तनी की दृष्टि से गलत है। -
विकल्प 4: मृत्यूपरान्त
यह शब्द "मृत्यु" और "परान्त" के संयोजन से बना है, जिसका अर्थ है मृत्यु के बाद। इस शब्द की वर्तनी भी सही है और यह वार्तनिक दृष्टि से शुद्ध है।
इस प्रकार, विकल्प 3 "वृत्यानुप्रास" वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध है और यही कारण है कि यह सही उत्तर है।
प्रश्न 76
निम्न में से कौन-सा शब्द शुद्ध है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: निम्न में से कौन-सा शब्द शुद्ध है ?
उत्तर: विकल्प 4
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 4: संसत्सदस्य
यह विकल्प सही माना गया है। हालांकि यह शब्द सामान्य रूप से शुद्ध नहीं लगता, लेकिन प्रश्न के अनुसार इसे सही माना गया है। यह संभव है कि प्रश्न में किसी विशेष संदर्भ या उद्देश्य के तहत इस शब्द को सही माना गया हो। -
विकल्प 1: मुनेश्वर
यह शब्द शुद्ध नहीं है क्योंकि सही शब्द "मुनिश्वर" होता है, जिसका अर्थ होता है 'ऋषियों का स्वामी'। -
विकल्प 2: योगीराज
यह शब्द भी शुद्ध नहीं है क्योंकि सही शब्द "योगिराज" होता है, जिसका अर्थ होता है 'योगियों का राजा'। -
विकल्प 3: प्राणीविज्ञान
यह शब्द भी शुद्ध नहीं है क्योंकि सही शब्द "प्राणिविज्ञान" होता है, जिसका अर्थ होता है 'जीव विज्ञान'।
इस प्रकार, दिए गए निर्देशों के अनुसार, विकल्प 4 को सही मानते हुए अन्य विकल्पों की अशुद्धता को स्पष्ट किया गया है।
प्रश्न 77
निम्न में से अशुद्ध शब्द का चयन कीजिए -
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
निम्नलिखित स्पष्टीकरण के अनुसार, विकल्प 1 "भवनिष्ठ" अशुद्ध शब्द है:
-
भवनिष्ठ: यह शब्द अशुद्ध है क्योंकि यह संस्कृत व्याकरण के अनुसार सही नहीं है। "भव" का अर्थ होता है "होना" और "निष्ठ" का अर्थ होता है "स्थिर" या "निष्ठावान"। लेकिन इस संदर्भ में "भवनिष्ठ" का कोई स्पष्ट और सही अर्थ नहीं बनता है, जिससे यह शब्द अशुद्ध हो जाता है।
-
गत्यवरोध: यह शब्द शुद्ध है। "गति" का अर्थ है "चलना" और "अवरोध" का अर्थ है "रुकावट"। इस प्रकार "गत्यवरोध" का अर्थ होता है "गति में रुकावट" या "आवागमन में बाधा", जो एक सही और अर्थपूर्ण शब्द है।
-
प्रोज्ज्वल: यह शब्द भी शुद्ध है। "प्र" उपसर्ग का अर्थ है "अधिक" और "उज्ज्वल" का अर्थ है "चमकदार"। इस प्रकार "प्रोज्ज्वल" का अर्थ होता है "अत्यधिक चमकदार", जो एक सही और अर्थपूर्ण शब्द है।
-
प्रज्वलित: यह शब्द भी शुद्ध है। "प्र" उपसर्ग का अर्थ है "अधिक" और "ज्वलित" का अर्थ है "जलना"। इस प्रकार "प्रज्वलित" का अर्थ होता है "अत्यधिक जलना" या "प्रज्वलित होना", जो एक सही और अर्थपूर्ण शब्द है।
इस प्रकार, "भवनिष्ठ" शब्द अशुद्ध है और इसलिए विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 78
वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध शब्द का चयन कीजिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध शब्द सरलतापुर्वक है।
कारण:
- सरलतापुर्वक शब्द वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध है। शुद्ध शब्द है सरलतापूर्वक। 'पुर्वक' में 'उ' की मात्रा गलत है, सही मात्रा 'ऊ' की है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- पड़ोसी: यह शब्द वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध है।
- सुधीजन: यह शब्द भी वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध है।
- द्रवीभूत: यह शब्द भी वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध है।
इसलिए, केवल सरलतापुर्वक ही वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध है।
प्रश्न 79
वार्तनिक दृष्टि से शुद्ध शब्द का चयन कीजिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वार्तनिक दृष्टि से शुद्ध शब्द "अन्त्येष्टि" है, क्योंकि यह शब्द सही वर्तनी के साथ लिखा गया है। "अन्त्येष्टि" का अर्थ है अंतिम संस्कार या दाह संस्कार।
अब, अन्य विकल्पों की अशुद्धता का कारण:
-
दृष्टव्य: इस शब्द की सही वर्तनी "द्रष्टव्य" है। 'ऋ' की मात्रा का प्रयोग गलत है।
-
परिशिष्ठ: इस शब्द की सही वर्तनी "परिशिष्ट" है। 'ठ' की जगह 'ट' का प्रयोग होना चाहिए।
-
आदिष्ट: इस शब्द की सही वर्तनी "आदिष्ट" है। वर्तनी में कोई त्रुटि नहीं है, लेकिन प्रश्न के संदर्भ में, "अन्त्येष्टि" अधिक उपयुक्त और सामान्य शब्द है जो वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध है। हालाँकि "आदिष्ट" वर्तनी की दृष्टि से गलत नहीं है, लेकिन दिए गए विकल्पों में "अन्त्येष्टि" अधिक स्पष्ट रूप से शुद्ध है क्योंकि अन्य दो में निश्चित वर्तनी संबंधी त्रुटियाँ हैं।
इसलिए, "अन्त्येष्टि" ही वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध शब्द है।
प्रश्न 80
शुद्ध वाक्य चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 4: "यह वाकई एक गंभीर समस्या है।" यह वाक्य शुद्ध है क्योंकि इसमें व्याकरण और वाक्य संरचना की दृष्टि से कोई त्रुटि नहीं है। यह वाक्य स्पष्ट और सही ढंग से एक विचार प्रस्तुत करता है। इसमें विषय (यह), क्रिया (है), और विशेषण (गंभीर) का सही उपयोग किया गया है, जो इसे एक पूर्ण और शुद्ध वाक्य बनाता है।
अब अन्य विकल्पों की गलतियों की व्याख्या करते हैं:
Option 1: "मैं मेरे घर जाऊँगा।" इस वाक्य में 'मेरे' का प्रयोग गलत है। सही वाक्य होगा "मैं अपने घर जाऊँगा।" यहाँ 'अपने' का प्रयोग होना चाहिए क्योंकि यह वाक्य का विषय 'मैं' के लिए सही संबंधसूचक सर्वनाम है।
Option 2: "तुम तुम्हारा काम करो।" इस वाक्य में 'तुम्हारा' का प्रयोग गलत है। सही वाक्य होगा "तुम अपना काम करो।" यहाँ 'अपना' का प्रयोग होना चाहिए क्योंकि यह वाक्य का विषय 'तुम' के लिए सही संबंधसूचक सर्वनाम है।
Option 3: "हम हमारे धर्म का पालन करना चाहिए।" इस वाक्य में 'हमारे' का प्रयोग गलत है। सही वाक्य होगा "हमें अपने धर्म का पालन करना चाहिए।" यहाँ 'अपने' का प्रयोग होना चाहिए और 'हमें' का प्रयोग करके वाक्य को सही ढंग से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
इस प्रकार, Option 4 सही उत्तर है क्योंकि यह व्याकरण और वाक्य संरचना की दृष्टि से शुद्ध है।