HTET परीक्षा - Level 1 PRT - वाक्य रचना
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 1 PRT की तैयारी
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 81
वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध शब्द चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध शब्द चुनने के लिए हमें यह देखना होता है कि शब्द का सही उच्चारण और वर्तनी क्या है। दिए गए विकल्पों में से:
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तिरपन: यह शब्द 'तिरपन' के रूप में सही है। यह संख्या '53' को दर्शाता है और इसका वर्तनी सही है।
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अजमाइश: यह शब्द वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध है। सही शब्द 'आज़माइश' है, जिसका अर्थ होता है 'परीक्षण' या 'कोशिश'। हिंदी में 'आज़माइश' शब्द का सही उच्चारण और वर्तनी 'आज़माइश' है, न कि 'अजमाइश'।
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अन्त्याक्षरी: यह शब्द सही है। 'अन्त्याक्षरी' एक खेल है जिसमें लोग गानों की पंक्तियों को गाते हैं और अगला व्यक्ति उस पंक्ति के अंतिम अक्षर से नया गाना शुरू करता है। इसका वर्तनी सही है।
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छिपकली: यह शब्द भी सही है। 'छिपकली' एक प्रकार का सरीसृप है और इसका वर्तनी सही है।
इस प्रकार, वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध शब्द 'अजमाइश' है क्योंकि इसका सही रूप 'आज़माइश' होना चाहिए। यही कारण है कि विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 82
निम्नलिखित में से सही शब्द-रूप है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सही शब्द-रूप "परिणति" है, जो विकल्प 1 में दिया गया है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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परिणति (विकल्प 1): "परिणति" शब्द संस्कृत से लिया गया है और इसका अर्थ होता है किसी कार्य या प्रक्रिया का अंतिम परिणाम या निष्कर्ष। यह शब्द सही रूप में लिखा गया है और इसका प्रयोग हिंदी भाषा में व्यापक रूप से होता है। यह शब्द सही व्याकरणिक संरचना और उच्चारण के साथ प्रस्तुत किया गया है।
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परिणती (विकल्प 2): यह शब्द गलत है क्योंकि इसमें 'ति' के स्थान पर 'ती' का प्रयोग किया गया है, जो कि व्याकरणिक दृष्टि से सही नहीं है। संस्कृत और हिंदी में इस शब्द का सही रूप "परिणति" ही है।
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परीणति (विकल्प 3): इस विकल्प में 'र' के स्थान पर 'री' का प्रयोग किया गया है, जो कि गलत है। यह शब्द का गलत उच्चारण और रूप है। सही शब्द "परिणति" है, जिसमें 'र' का सही प्रयोग होता है।
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परणिति (विकल्प 4): इस विकल्प में 'र' और 'ण' के स्थान पर 'न' का प्रयोग किया गया है, जो कि गलत है। यह शब्द का गलत रूप है। सही शब्द "परिणति" है, जिसमें 'र' और 'ण' का सही प्रयोग होता है।
इस प्रकार, सही शब्द-रूप "परिणति" है, जो विकल्प 1 में दिया गया है। अन्य सभी विकल्प व्याकरणिक और उच्चारण की दृष्टि से गलत हैं।
प्रश्न 83
निम्नलिखित में से शुद्ध वाक्य-रूप नहीं है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 4: "उनके उच्चारण ठीक नहीं है।" को शुद्ध वाक्य-रूप नहीं माना गया है। इसका कारण यह है कि इस वाक्य में "उच्चारण" शब्द का प्रयोग किया गया है, जो कि एक संज्ञा है और इसे विशेषण के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता। सही वाक्य होना चाहिए "उनका उच्चारण ठीक नहीं है।" यहां "उनका" का प्रयोग होना चाहिए क्योंकि यह "उच्चारण" के लिए विशेषण के रूप में सही है।
अब अन्य विकल्पों की चर्चा करते हैं:
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"दो टोकरी कचरा फेंक दिया।" - यह वाक्य शुद्ध है क्योंकि इसमें संख्यावाचक विशेषण "दो" का सही प्रयोग किया गया है और वाक्य का अर्थ स्पष्ट है।
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"कूड़ा-करकट रह जाता है।" - यह वाक्य भी शुद्ध है क्योंकि इसमें "कूड़ा-करकट" का सही प्रयोग किया गया है और वाक्य का अर्थ भी स्पष्ट है।
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"मेरे पास इतना कम समय है।" - यह वाक्य शुद्ध है क्योंकि इसमें "इतना कम" का सही प्रयोग किया गया है और वाक्य का अर्थ भी स्पष्ट है।
इस प्रकार, विकल्प 4 को शुद्ध वाक्य-रूप नहीं माना गया है क्योंकि इसमें व्याकरणिक त्रुटि है।
प्रश्न 84
वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध विकल्प मृत्योपरान्त है, क्योंकि इसका शुद्ध रूप मृत्युपरांत होता है। 'मृत्यु' और 'उपरांत' शब्दों के बीच संधि होने पर 'उ' का लोप हो जाता है और 'मृत्युपरांत' बनता है।
अन्य विकल्प इस प्रकार सही हैं:
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योगिराज: यह शब्द वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध है। 'योगी' और 'राज' मिलकर 'योगिराज' बनाते हैं, जिसका अर्थ है योगियों का राजा।
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प्रोज्ज्वल: यह शब्द भी वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध है। 'प्र' उपसर्ग और 'उज्ज्वल' शब्द मिलकर 'प्रोज्ज्वल' बनाते हैं, जिसका अर्थ है अत्यधिक उज्ज्वल।
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प्रज्वलित: यह शब्द भी वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध है। 'प्र' उपसर्ग और 'ज्वलित' शब्द मिलकर 'प्रज्वलित' बनाते हैं, जिसका अर्थ है जलता हुआ या प्रकाशित।
इसलिए, केवल मृत्योपरान्त ही वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध है।
प्रश्न 85
शुद्ध वाक्य का चयन कीजिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
शुद्ध वाक्य है: हम सभी में मानवीय दुर्बलताएँ हैं।
व्याख्या:
यह वाक्य व्याकरण की दृष्टि से पूर्णतः शुद्ध है। इसमें कर्ता ("हम सभी"), क्रिया ("हैं"), और कर्म ("मानवीय दुर्बलताएँ") का सही प्रयोग हुआ है। वाक्य का अर्थ भी स्पष्ट है कि हर इंसान में कुछ कमजोरियां होती हैं।
अन्य विकल्पों की अशुद्धता का कारण:
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यह काम कोई वकील से ही हो सकता है।: इस वाक्य में "वकील से" की जगह "वकील द्वारा" या "वकील से ही" होना चाहिए था। "से" का प्रयोग यहाँ सही नहीं है। सही वाक्य होगा: "यह काम कोई वकील द्वारा ही हो सकता है।"
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मैंने उनका धन्यवाद किया।: यह वाक्य व्याकरण की दृष्टि से सही है, लेकिन "उनका" की जगह "उन्हें" का प्रयोग अधिक उपयुक्त होता। सही वाक्य होगा: "मैंने उन्हें धन्यवाद दिया।" हालांकि, यह वाक्य उतना अशुद्ध नहीं है जितना कि अन्य विकल्प।
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कृपया दरवाजा बंद करने की कृपा करें।: इस वाक्य में "कृपया" और "कृपा करें" दोनों का एक साथ प्रयोग अनावश्यक है। दोनों का अर्थ लगभग समान है। सही वाक्य होगा: "कृपया दरवाजा बंद करें" या "दरवाजा बंद करने की कृपा करें।"
इसलिए, दिए गए विकल्पों में से हम सभी में मानवीय दुर्बलताएँ हैं सबसे शुद्ध वाक्य है।
प्रश्न 86
निम्नलिखित में से अशुद्ध वाक्य है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विकल्प 2: "उसने इन बात पर आपत्ति प्रकट की।" यह वाक्य अशुद्ध है क्योंकि इसमें "इन बात" का प्रयोग गलत है। सही प्रयोग "इन बातों पर" होना चाहिए। हिंदी व्याकरण के अनुसार, जब एक से अधिक बातों की चर्चा होती है, तो बहुवचन का प्रयोग किया जाता है। इसलिए, "बात" के स्थान पर "बातों" का प्रयोग होना चाहिए।
अब अन्य विकल्पों की शुद्धता की पुष्टि करते हैं:
विकल्प 1: "वह राम का नाम लेकर चल पड़ा।" यह वाक्य शुद्ध है। इसमें कोई व्याकरणिक त्रुटि नहीं है। वाक्य का अर्थ है कि वह व्यक्ति राम का नाम लेते हुए आगे बढ़ा।
विकल्प 3: "सुबह-शाम व्यायाम करना चाहिए।" यह वाक्य भी शुद्ध है। इसमें सुबह और शाम दोनों समय व्यायाम करने की सलाह दी गई है, जो व्याकरण और अर्थ दोनों दृष्टियों से सही है।
विकल्प 4: "वह बीस दिन तक अपने घर में ही कैद रहा।" यह वाक्य भी शुद्ध है। इसमें बताया गया है कि वह व्यक्ति बीस दिनों तक अपने घर में बंद रहा, और इसमें कोई व्याकरणिक त्रुटि नहीं है।
इस प्रकार, विकल्प 2 में व्याकरणिक त्रुटि है, इसलिए यह अशुद्ध वाक्य है।
प्रश्न 87
वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध शब्द है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध शब्द "सौहार्द" है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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सौहार्द (Option 1): यह शब्द संस्कृत से लिया गया है और इसका अर्थ है मित्रता या सद्भावना। इस शब्द की वर्तनी शुद्ध है और यह सही रूप में लिखा गया है। इसलिए, यह विकल्प सही है।
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विभिषिका (Option 2): इस शब्द की वर्तनी में त्रुटि है। सही शब्द "विभीषिका" है, जिसका अर्थ है भयावह स्थिति या आपदा। इसलिए, यह विकल्प गलत है।
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सुश्रुशा (Option 3): इस शब्द की वर्तनी भी गलत है। सही शब्द "सश्रुषा" है, जिसका अर्थ है सेवा या देखभाल। इसलिए, यह विकल्प भी गलत है।
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शिष्ठ (Option 4): इस शब्द की वर्तनी में भी त्रुटि है। सही शब्द "शिष्ट" है, जिसका अर्थ है सभ्य या विनम्र। इसलिए, यह विकल्प भी गलत है।
इस प्रकार, वर्तनी की दृष्टि से सही शब्द "सौहार्द" है, और यही कारण है कि विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 88
वार्तनिक दृष्टि से सही शब्द चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: वार्तनिक दृष्टि से सही शब्द चुनिए :
सही उत्तर: विकल्प 4 (आजीविका)
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 4: आजीविका
"आजीविका" का अर्थ है जीवनयापन के लिए आवश्यक साधन या रोजगार। वार्तनिक दृष्टि से, यह शब्द सही है क्योंकि यह जीवन के लिए आवश्यक आर्थिक गतिविधियों या कार्यों को संदर्भित करता है। वार्तालाप में, जब हम किसी व्यक्ति के जीवनयापन के साधनों की बात करते हैं, तो "आजीविका" शब्द का प्रयोग किया जाता है। यह शब्द वार्तालाप में प्रासंगिक और सही है क्योंकि यह सीधे तौर पर जीवन के आर्थिक पहलुओं से जुड़ा हुआ है। -
विकल्प 1: सौहाद्र
"सौहाद्र" का अर्थ है मित्रता या सद्भावना। हालांकि यह एक सकारात्मक शब्द है, लेकिन वार्तनिक दृष्टि से यह शब्द सही नहीं है क्योंकि यह जीवनयापन या आर्थिक गतिविधियों से संबंधित नहीं है। यह शब्द सामाजिक संबंधों को दर्शाता है, जो कि इस संदर्भ में उपयुक्त नहीं है। -
विकल्प 2: अतिश्योक्ति
"अतिश्योक्ति" का अर्थ है किसी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना। यह शब्द वार्तालाप में किसी विषय को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करने के लिए प्रयोग होता है। यह शब्द वार्तनिक दृष्टि से सही नहीं है क्योंकि यह जीवनयापन या आर्थिक गतिविधियों से संबंधित नहीं है। -
विकल्प 3: तदोपरांत
"तदोपरांत" का अर्थ है उसके बाद या उसके पश्चात। यह शब्द समय के संदर्भ में प्रयोग होता है और वार्तालाप में घटनाओं के क्रम को दर्शाने के लिए उपयोगी है। हालांकि, यह शब्द वार्तनिक दृष्टि से सही नहीं है क्योंकि यह जीवनयापन या आर्थिक गतिविधियों से संबंधित नहीं है।
इस प्रकार, "आजीविका" शब्द वार्तनिक दृष्टि से सही है क्योंकि यह जीवनयापन के साधनों और आर्थिक गतिविधियों से सीधे संबंधित है।
प्रश्न 89
निम्न में से शुद्ध वाक्य कौन-सा है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 4: "तुम, सीता और मैं आज खेलेंगे।" यह वाक्य शुद्ध है क्योंकि इसमें व्याकरण और वाक्य संरचना सही है। इस वाक्य में तीन व्यक्तियों का उल्लेख है - "तुम," "सीता," और "मैं," और यह स्पष्ट रूप से बताता है कि ये तीनों आज खेलेंगे। वाक्य में क्रिया "खेलेंगे" का प्रयोग सही है क्योंकि यह बहुवचन के लिए उपयुक्त है और भविष्य काल को दर्शाता है।
अब अन्य विकल्पों की अशुद्धियाँ देखते हैं:
Option 1: "असत्य बोलना उसकी आदत था।"
यह वाक्य अशुद्ध है क्योंकि इसमें "था" का प्रयोग किया गया है, जो कि एकवचन के लिए है, जबकि "आदत" स्त्रीलिंग शब्द है और इसके लिए "थी" का प्रयोग होना चाहिए। सही वाक्य होगा: "असत्य बोलना उसकी आदत थी।"
Option 2: "मैंने तो गलत काम करना ही नहीं है।"
यह वाक्य अशुद्ध है क्योंकि इसमें "मैंने" और "करना" के बीच में काल का मेल नहीं है। सही वाक्य होगा: "मैं तो गलत काम करता ही नहीं हूँ।" या "मैंने तो गलत काम किया ही नहीं है।"
Option 3: "बच्चे को काटकर फल खिलाओ।"
यह वाक्य अशुद्ध है क्योंकि इसका अर्थ अस्पष्ट और भ्रमित करने वाला है। ऐसा लगता है जैसे बच्चे को काटने की बात हो रही है, जबकि सही अर्थ फल को काटकर बच्चे को खिलाने का होना चाहिए। सही वाक्य होगा: "फल को काटकर बच्चे को खिलाओ।"
इस प्रकार, Option 4 सही और शुद्ध वाक्य है।
प्रश्न 90
वर्तनी की दृष्टि से किस विकल्प के सभी शब्द शुद्ध हैं ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वर्तनी की दृष्टि से सही विकल्प चुनने के लिए हमें प्रत्येक विकल्प के शब्दों की शुद्धता की जांच करनी होगी।
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विकल्प 1: पाणिनी, दाशरथी
- "पाणिनी" शब्द शुद्ध है, लेकिन "दाशरथी" की वर्तनी में त्रुटि है। सही शब्द "दाशरथि" होना चाहिए।
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विकल्प 2: वाल्मीकि, सारणी
- "वाल्मीकि" और "सारणी" दोनों ही शब्द वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध हैं। "वाल्मीकि" महर्षि वाल्मीकि का नाम है और "सारणी" का अर्थ तालिका होता है। दोनों शब्द सही रूप में लिखे गए हैं।
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विकल्प 3: शक्तिकरण, मंत्रीमण्डल
- "शक्तिकरण" शब्द शुद्ध है, लेकिन "मंत्रीमण्डल" की वर्तनी में त्रुटि है। सही शब्द "मंत्रिमंडल" होना चाहिए।
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विकल्प 4: आत्मवत, प्रत्याक्षी
- "आत्मवत" शब्द शुद्ध है, लेकिन "प्रत्याक्षी" की वर्तनी में त्रुटि है। सही शब्द "प्रत्याशी" होना चाहिए।
इस प्रकार, विकल्प 2 में दिए गए दोनों शब्द "वाल्मीकि" और "सारणी" वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध हैं। इसलिए, विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 91
शुद्ध शब्द का चयन कीजिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
शुद्ध शब्द का चयन करने के लिए हमें यह देखना होता है कि दिए गए विकल्पों में से कौन सा शब्द व्याकरण और अर्थ की दृष्टि से सही है। इस प्रश्न में सही उत्तर विकल्प 2 "आगामी" है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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आगामी (विकल्प 2): "आगामी" शब्द का अर्थ होता है "आने वाला" या "भविष्य में होने वाला"। यह शब्द हिंदी भाषा में शुद्ध और सही रूप में प्रयोग किया जाता है। यह शब्द व्याकरणिक रूप से भी सही है और इसका प्रयोग सामान्यतः भविष्य की घटनाओं या समय के संदर्भ में किया जाता है।
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प्रमाणिक (विकल्प 1): यह शब्द "प्रमाणिक" के स्थान पर "प्रामाणिक" होना चाहिए। "प्रामाणिक" का अर्थ होता है "सत्यापित" या "विश्वसनीय"। इसलिए, "प्रमाणिक" शब्द शुद्ध नहीं है।
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अभिजात्य (विकल्प 3): "अभिजात्य" शब्द का अर्थ होता है "उच्च वर्गीय" या "श्रेष्ठता से संबंधित"। हालांकि यह शब्द भी सही है, लेकिन प्रश्न के अनुसार सही उत्तर "आगामी" है, इसलिए इसे सही नहीं माना जा सकता।
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दुरावस्था (विकल्प 4): "दुरावस्था" का अर्थ होता है "खराब स्थिति" या "कठिन परिस्थिति"। यह शब्द भी सही है, लेकिन प्रश्न के अनुसार सही उत्तर "आगामी" है, इसलिए इसे सही नहीं माना जा सकता।
इस प्रकार, दिए गए विकल्पों में से "आगामी" शब्द व्याकरण और अर्थ की दृष्टि से शुद्ध और सही है। यही कारण है कि विकल्प 2 "आगामी" को सही उत्तर के रूप में चुना गया है।
प्रश्न 92
किस शब्द में पंचम वर्ण के स्थान पर 'अनुस्वार' का भी प्रयोग कर सकते हैं ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: किस शब्द में पंचम वर्ण के स्थान पर 'अनुस्वार' का भी प्रयोग कर सकते हैं?
सही उत्तर: विकल्प 2 (अत्यन्त)
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 2: अत्यन्त
- शब्द "अत्यन्त" में 'त' के पहले 'न' आता है, जो कि पंचम वर्ण है। हिंदी भाषा में पंचम वर्ण के स्थान पर 'अनुस्वार' का प्रयोग किया जा सकता है। इसलिए, "अत्यन्त" को "अत्यंत" भी लिखा जा सकता है। यह व्याकरणिक रूप से सही है और हिंदी भाषा के नियमों के अनुसार स्वीकार्य है।
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विकल्प 1: सम्मान
- "सम्मान" में 'म' का प्रयोग हुआ है, जो कि पंचम वर्ण है। हालांकि, 'म' के स्थान पर 'अनुस्वार' का प्रयोग नहीं किया जाता है क्योंकि यह शब्द की ध्वनि और अर्थ को बदल सकता है। इसलिए, "सम्मान" को "संमान" नहीं लिखा जा सकता।
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विकल्प 3: अन्याय
- "अन्याय" में 'न' का प्रयोग हुआ है, जो कि पंचम वर्ण है। लेकिन इस शब्द में 'अनुस्वार' का प्रयोग नहीं किया जा सकता क्योंकि यह शब्द की ध्वनि और अर्थ को बदल देगा। इसलिए, "अन्याय" को "अंयाय" नहीं लिखा जा सकता।
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विकल्प 4: अक्षुण्ण
- "अक्षुण्ण" में 'ण' का प्रयोग हुआ है, जो कि पंचम वर्ण नहीं है। इसलिए, इसमें 'अनुस्वार' का प्रयोग करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। "अक्षुण्ण" को "अक्षुंण" नहीं लिखा जा सकता।
इस प्रकार, केवल "अत्यन्त" ऐसा शब्द है जिसमें पंचम वर्ण के स्थान पर 'अनुस्वार' का प्रयोग किया जा सकता है, और यही कारण है कि विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 93
मानकीकृत देवनागरी लिपि के संदर्भ में असंगत विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
मानकीकृत देवनागरी लिपि के संदर्भ में दिए गए विकल्पों में से असंगत विकल्प चुनने के लिए हमें प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण करना होगा। सही उत्तर विकल्प 2 है, और हम इसे सही ठहराने के लिए निम्नलिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करेंगे:
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विकल्प 1: हिंदी के शब्दों में उचित ढंग से चन्द्रबिन्दु का प्रयोग आवश्यक है।
- यह विकल्प सही है क्योंकि हिंदी में चन्द्रबिन्दु का प्रयोग अनुनासिक ध्वनियों को दर्शाने के लिए किया जाता है। यह मानकीकृत देवनागरी लिपि का एक आवश्यक हिस्सा है और इसका सही प्रयोग भाषा की शुद्धता और स्पष्टता के लिए आवश्यक है।
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विकल्प 2: अनुनासिक स्वरों का ध्वनिगुण है एवं इनका उच्चारण स्थल केवल नासिका है।
- यह विकल्प असंगत है क्योंकि अनुनासिक स्वरों का उच्चारण केवल नासिका से नहीं होता। अनुनासिक ध्वनियों में मुख और नासिका दोनों का योगदान होता है। इसलिए, यह कथन गलत है और यही कारण है कि इसे असंगत विकल्प के रूप में चुना गया है।
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विकल्प 3: संस्कृतमूलक तत्सम शब्दों की वर्तनी को ज्यों का त्यों ग्रहण किया जाए।
- यह विकल्प सही है क्योंकि मानकीकृत देवनागरी लिपि में संस्कृतमूलक तत्सम शब्दों की वर्तनी को ज्यों का त्यों अपनाया जाता है। यह भाषा की शुद्धता और परंपरा को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
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विकल्प 4: पूर्ण विराम को छोड़कर शेष विरामादि चिह्न अँगरेज़ी के ही प्रचलित होंगे।
- यह विकल्प सही है क्योंकि आधुनिक हिंदी लेखन में पूर्ण विराम को छोड़कर अन्य विराम चिह्न जैसे कि अल्पविराम, प्रश्नवाचक चिह्न आदि अंग्रेजी के समान ही उपयोग किए जाते हैं। यह लेखन को सरल और सार्वभौमिक बनाने के लिए किया जाता है।
इस प्रकार, विकल्प 2 को असंगत विकल्प के रूप में सही ठहराया गया है क्योंकि यह अनुनासिक स्वरों के उच्चारण के बारे में गलत जानकारी प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 94
इनमें से कौन-सा वाक्य अशुद्ध है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 2 सही है क्योंकि वाक्य "हम सभी में मनुष्यी दुर्बलताएँ हैं" में व्याकरण संबंधी अशुद्धि है। सही वाक्य "हम सभी में मानवीय दुर्बलताएँ हैं" होना चाहिए। "मनुष्यी" शब्द का प्रयोग गलत है; सही शब्द "मानवीय" है, जो मनुष्य से संबंधित दुर्बलताओं को दर्शाता है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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तुम्हारा व्यवहार सर्वश्रेष्ठ है। यह वाक्य व्याकरण की दृष्टि से सही है। "सर्वश्रेष्ठ" शब्द का प्रयोग उचित है और वाक्य का अर्थ स्पष्ट है।
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वह पाँव से जूता उतार रहा है। यह वाक्य भी व्याकरण की दृष्टि से सही है। "पाँव से" का प्रयोग यहाँ उचित है, क्योंकि यह क्रिया को स्पष्ट करता है कि जूता पैर से उतारा जा रहा है।
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शीला को अपनी योग्यता पर गर्व है। यह वाक्य भी व्याकरण की दृष्टि से सही है। "योग्यता पर गर्व" एक सामान्य और सही अभिव्यक्ति है।
इसलिए, केवल Option 2 में अशुद्धि है, जो उसे सही उत्तर बनाती है।
प्रश्न 95
शब्दकोश में वर्णानुक्रम की दृष्टि से 'श्रद्धा' शब्द इनमें से किस शब्द के पहले आएगा ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'श्रद्धा' शब्द शब्दकोश में 'श्रमिक' शब्द से पहले आएगा, इसका कारण वर्णानुक्रम (alphabetical order) है।
- श्रमिक (Shramik): 'श्र' के बाद 'मि' आता है।
- श्रद्धा (Shraddha): 'श्र' के बाद 'द्धा' आता है।
वर्णमाला के क्रम में 'मि' अक्षर 'द्धा' अक्षर से पहले आता है। इसलिए 'श्रमिक' शब्द 'श्रद्धा' शब्द के बाद आएगा, जिसका अर्थ है कि 'श्रद्धा' शब्द 'श्रमिक' से पहले आएगा।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
- शौर्य (Shaurya): 'शौ' अक्षर 'श्र' अक्षर के बाद आता है। इसलिए 'शौर्य' शब्द 'श्रद्धा' के बाद आएगा।
- श्याम (Shyam): 'श्या' अक्षर 'श्र' अक्षर के बाद आता है। इसलिए 'श्याम' शब्द 'श्रद्धा' के बाद आएगा।
- शृंगार (Shringar): 'शृं' अक्षर 'श्र' अक्षर के बाद आता है। इसलिए 'शृंगार' शब्द 'श्रद्धा' के बाद आएगा।
अतः, केवल 'श्रमिक' ही ऐसा शब्द है जो 'श्रद्धा' के बाद आता है, इसलिए 'श्रद्धा' शब्द 'श्रमिक' से पहले आएगा।
प्रश्न 96
किस विकल्प के शब्दों में वार्तनिक अशुद्धि नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
The correct option is 1:
विकल्प 1 'सुधीजन, शताब्दी' में दिए गए दोनों शब्द वार्तनिक दृष्टि से शुद्ध हैं। 'सुधीजन' का अर्थ होता है 'विद्वान लोग' या 'बुद्धिमान व्यक्ति', और इसकी वर्तनी पूरी तरह सही है। 'शताब्दी' का अर्थ होता है 'सौ वर्षों का समय', और इसकी वर्तनी भी हिंदी व्याकरण के अनुसार शुद्ध है। इन दोनों शब्दों में कोई मात्रा या वर्ण संबंधी त्रुटि नहीं है, इसलिए यह विकल्प पूरी तरह से अशुद्धि रहित है।
The incorrect option is 2:
विकल्प 2 'साधूवाद, सुरसरी' अशुद्ध है। 'साधूवाद' की सही वर्तनी 'साधुवाद' (छोटे ऊ की मात्रा के साथ) होती है, जिसका अर्थ है प्रशंसा या धन्यवाद। इसी प्रकार, 'सुरसरी' की सही वर्तनी 'सुरसरि' (छोटी इ की मात्रा के साथ) होती है, जिसका अर्थ गंगा नदी है।
The incorrect option is 3:
विकल्प 3 'शूभेषी, भार्यापति' भी अशुद्ध है। 'शूभेषी' का सही शब्द 'शुभेच्छु' या 'शुभेच्छी' होता है, जिसका अर्थ है शुभ चाहने वाला। 'भार्यापति' वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध है, सही शब्द 'भार्या' (पत्नी) और 'पति' होता है, और इन्हें एक साथ लिखने पर 'भार्यापति' जैसा कोई मानक शब्द नहीं है।
The incorrect option is 4:
विकल्प 4 'चन्द्रमोलि, पुत्रेषणा' में भी अशुद्धि है। 'चन्द्रमोलि' की सही वर्तनी 'चन्द्रमौली' (बड़े औ की मात्रा के साथ) होती है, जिसका अर्थ है शिव। 'पुत्रेषणा' की वर्तनी शुद्ध नहीं है, इसका सही रूप 'पुत्रैषणा' होना चाहिए, जो 'पुत्र की इच्छा' का द्योतक है।
प्रश्न 97
वार्तनिक दृष्टि से किस विकल्प के सभी शब्द शुद्ध हैं ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न 98
सभी अशुद्ध शब्द समूह वाला विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
The correct option is 1:
विकल्प 1 - 'मंत्रीमण्डल, लब्धप्रतिष्ठित, स्पष्टिकरण' - में दिए गए तीनों शब्द वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध हैं। हिंदी व्याकरण के नियमानुसार:1. मंत्रीमण्डल: यह शब्द गलत है। इसका शुद्ध रूप 'मंत्रिमंडल' होता है, क्योंकि 'मंत्रिन्' (मूल शब्द) में 'मंडल' जुड़ने पर प्रथम शब्द की दीर्घ 'ई' (ी) ह्रस्व 'इ' (ि) में बदल जाती है।
2. लब्धप्रतिष्ठित: यह भी गलत है। शुद्ध शब्द 'लब्धप्रतिष्ठ' होता है। 'लब्ध' (प्राप्त) और 'प्रतिष्ठा' (सम्मान) को मिलाकर 'लब्धप्रतिष्ठ' बनता है, जिसका अर्थ होता है 'जिसे प्रतिष्ठा प्राप्त हो चुकी हो'। 'प्रतिष्ठित' शब्द स्वयं में पूर्ण है, इसलिए 'लब्धप्रतिष्ठित' में अनावश्यक प्रत्यय का प्रयोग है।
3. स्पष्टीकरण: यह शब्द भी अशुद्ध है। शुद्ध वर्तनी 'स्पष्टीकरण' के बजाय 'स्पष्टीकरण' होनी चाहिए, क्योंकि 'स्पष्ट' मूल शब्द में 'ईकरण' प्रत्यय लगने से 'अ' का परिवर्तन 'आ' में नहीं होता।चूँकि इस समूह के तीनों शब्द अशुद्ध हैं, यह 'सभी अशुद्ध शब्द समूह वाला विकल्प' है।
The incorrect option is 2:
विकल्प 2 में 'औदार्य' और 'ओपन्यासिक' दोनों शब्द शुद्ध हैं, जबकि 'फैंकना' अशुद्ध है। 'औदार्य' (शुद्ध) का अर्थ है उदारता, और 'ओपन्यासिक' (शुद्ध) का अर्थ उपन्यास से संबंधित है। 'फैंकना' के स्थान पर शुद्ध शब्द 'फेंकना' होता है। समूह में दो शुद्ध शब्द होने के कारण यह विकल्प गलत है।
The incorrect option is 3:
विकल्प 3 में 'जडमति' (शुद्ध रूप 'जड़मति') और 'गरुड' (शुद्ध रूप 'गरुड़' या 'गरुड़') अशुद्ध हैं, लेकिन 'उत्पीडित' शब्द अशुद्ध है। इसका शुद्ध रूप 'उत्पीड़ित' या 'उत्पीड़ित' होता है। इस समूह में कम से कम एक शब्द अशुद्ध है, लेकिन तीनों शब्द शुद्ध नहीं हैं।
The incorrect option is 4:
विकल्प 4 में 'सहस्र' (हज़ार) और 'प्रत्याशी' (उम्मीदवार) दोनों ही शुद्ध शब्द हैं। 'प्रेरणास्पद्' शब्द शुद्ध नहीं है, इसका शुद्ध रूप 'प्रेरणास्पद' होता है। चूंकि इस समूह में दो शुद्ध शब्द हैं, इसलिए यह विकल्प भी सही उत्तर नहीं हो सकता।
प्रश्न 99
किस शब्द में 'तद्भव' उपसर्ग जुड़ा हुआ है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: किस शब्द में 'तद्भव' उपसर्ग जुड़ा हुआ है?
सही उत्तर: विकल्प 2 (अनधिकार)
व्याख्या:
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विकल्प 2: अनधिकार
'अनधिकार' शब्द में 'अन-' उपसर्ग जुड़ा हुआ है। 'अन-' एक तद्भव उपसर्ग है, जो संस्कृत के 'अन्' उपसर्ग से उत्पन्न हुआ है। यह उपसर्ग हिंदी में नकारात्मकता या अभाव को दर्शाने के लिए प्रयोग किया जाता है। 'अनधिकार' का अर्थ है 'जिसका अधिकार नहीं है'। इस प्रकार, यह शब्द तद्भव उपसर्ग 'अन-' के प्रयोग का सही उदाहरण है। -
विकल्प 1: अपशकुन
'अपशकुन' शब्द में 'अप-' उपसर्ग जुड़ा हुआ है। 'अप-' एक तत्सम उपसर्ग है, जो सीधे संस्कृत से लिया गया है। यह उपसर्ग नकारात्मकता या विपरीतता को दर्शाता है। चूंकि यह तत्सम उपसर्ग है, इसलिए यह विकल्प सही नहीं है। -
विकल्प 3: अनमोल
'अनमोल' शब्द में भी 'अन-' उपसर्ग जुड़ा हुआ है। हालांकि, इस संदर्भ में 'अन-' का प्रयोग मूल्य की अनुपस्थिति को दर्शाने के लिए किया गया है, लेकिन यह शब्द तद्भव उपसर्ग के रूप में नहीं माना जाता है। 'अनमोल' का अर्थ है 'जिसका मूल्य नहीं लगाया जा सकता', लेकिन यह शब्द तद्भव उपसर्ग के सही उदाहरण के रूप में नहीं लिया जाता। -
विकल्प 4: अनंग
'अनंग' शब्द में 'अन-' उपसर्ग जुड़ा हुआ है, जो संस्कृत से लिया गया है और यह तत्सम उपसर्ग है। 'अनंग' का अर्थ है 'जिसका कोई अंग नहीं है'। चूंकि यह तत्सम उपसर्ग है, इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
इस प्रकार, 'अनधिकार' शब्द में 'अन-' तद्भव उपसर्ग का सही प्रयोग है, और यही कारण है कि विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 100
किस शब्द में 'प्रति' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न में पूछा गया है कि किस शब्द में 'प्रति' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है। सही उत्तर विकल्प 4 'प्रस्थान' है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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प्रत्यक्ष: इस शब्द में 'प्रति' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। 'प्रति' का अर्थ होता है 'सामने' या 'साक्षात', और 'अक्ष' का अर्थ होता है 'आंख'। इस प्रकार, 'प्रत्यक्ष' का अर्थ होता है 'जो आंखों के सामने हो' या 'साक्षात'।
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प्रत्याहार: इस शब्द में भी 'प्रति' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। 'प्रति' का अर्थ होता है 'वापस' और 'आहार' का अर्थ होता है 'लेना'। इस प्रकार, 'प्रत्याहार' का अर्थ होता है 'वापस लेना' या 'संयम'।
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प्रत्यंग: इस शब्द में 'प्रति' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। 'प्रति' का अर्थ होता है 'प्रत्येक' और 'अंग' का अर्थ होता है 'भाग'। इस प्रकार, 'प्रत्यंग' का अर्थ होता है 'प्रत्येक अंग' या 'प्रत्येक भाग'।
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प्रस्थान: इस शब्द में 'प्रति' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है। 'प्र' उपसर्ग का अर्थ होता है 'सामने' या 'आगे' और 'स्थान' का अर्थ होता है 'जगह'। इस प्रकार, 'प्रस्थान' का अर्थ होता है 'जगह से आगे बढ़ना' या 'यात्रा करना'।
इस प्रकार, 'प्रस्थान' शब्द में 'प्रति' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है, इसलिए यह सही उत्तर है। अन्य सभी विकल्पों में 'प्रति' उपसर्ग का प्रयोग स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।