HTET परीक्षा Level 2 TGT
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 2 TGT की तैयारी
सत्यापित उत्तर और व्याख्याएँ
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 201
तत्सम तद्भव की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
तत्सम और तद्भव शब्दों की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनने के लिए हमें यह समझना होगा कि तत्सम शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से सीधे लिए गए होते हैं और तद्भव शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से विकसित होकर प्राकृत, अपभ्रंश आदि के माध्यम से हिंदी में आए हैं।
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वार्ताक – बैंगन: 'वार्ताक' संस्कृत का शब्द है और 'बैंगन' इसका तद्भव रूप है। यह जोड़ी तत्सम-तद्भव की दृष्टि से संगत है।
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लोहमशा – लोमड़ी: 'लोहमशा' संस्कृत का शब्द है, लेकिन 'लोमड़ी' का इससे कोई तद्भव संबंध नहीं है। 'लोमड़ी' का मूल संस्कृत शब्द 'लोपामुद्रा' से माना जाता है, जो कि 'लोहमशा' से भिन्न है। इसलिए यह जोड़ी असंगत है।
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मस्तक – माथा: 'मस्तक' संस्कृत का शब्द है और 'माथा' इसका तद्भव रूप है। यह जोड़ी तत्सम-तद्भव की दृष्टि से संगत है।
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शण्ठिका – सोंठ: 'शण्ठिका' संस्कृत का शब्द है और 'सोंठ' इसका तद्भव रूप है। यह जोड़ी भी तत्सम-तद्भव की दृष्टि से संगत है।
इस प्रकार, विकल्प 2 'लोहमशा – लोमड़ी' असंगत है क्योंकि यह तत्सम-तद्भव की जोड़ी नहीं बनाता है।
प्रश्न 202
कौन-सा युग्म असंगत है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: कौन-सा युग्म असंगत है ?
सही उत्तर: विकल्प 2
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 2: रहीम – सुदामाचरित
रहीम, जिन्हें अब्दुल रहीम खान-ए-खाना के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रसिद्ध हिंदी कवि थे, जिन्होंने मुख्यतः दोहे लिखे। उनका साहित्यिक योगदान मुख्यतः नीति और भक्ति पर आधारित है। "सुदामाचरित" उनके द्वारा रचित नहीं है। यह युग्म इसलिए असंगत है क्योंकि रहीम का "सुदामाचरित" से कोई संबंध नहीं है। -
विकल्प 1: वृंद – श्रृंगार शिक्षा
वृंद एक प्रसिद्ध कवि थे जिन्होंने "श्रृंगार शिक्षा" की रचना की थी। यह युग्म संगत है क्योंकि वृंद और "श्रृंगार शिक्षा" का संबंध सही है। -
विकल्प 3: द्विजदेव – शृंगारबत्तीसी
द्विजदेव ने "शृंगारबत्तीसी" की रचना की थी। यह युग्म भी संगत है क्योंकि द्विजदेव और "शृंगारबत्तीसी" का संबंध सही है। -
विकल्प 4: रसलीन – रसप्रबोध
रसलीन ने "रसप्रबोध" की रचना की थी। यह युग्म भी संगत है क्योंकि रसलीन और "रसप्रबोध" का संबंध सही है।
इस प्रकार, विकल्प 2 "रहीम – सुदामाचरित" असंगत है क्योंकि रहीम का "सुदामाचरित" से कोई संबंध नहीं है, जबकि अन्य सभी युग्म सही और संगत हैं।
प्रश्न 203
कौन-सा युग्म असंगत है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: कौन-सा युग्म असंगत है ?
सही उत्तर: विकल्प 1 (असाइत – चित्रावली)
विस्तृत व्याख्या:
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असाइत – चित्रावली: यह युग्म असंगत है क्योंकि असाइत का नाम किसी प्रसिद्ध साहित्यिक कृति या चित्रावली से नहीं जुड़ा है। असाइत एक सामान्य नाम हो सकता है, लेकिन इसे किसी विशेष साहित्यिक रचना के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है। इस कारण से, यह युग्म असंगत है।
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मुल्ला दाऊद – चंदायन: यह युग्म संगत है क्योंकि मुल्ला दाऊद एक प्रसिद्ध कवि थे जिन्होंने 'चंदायन' नामक काव्य रचना की थी। यह एक प्रेम कथा है जो हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
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ईश्वरदास – सत्यवती कथा: यह युग्म भी संगत है। ईश्वरदास ने 'सत्यवती कथा' की रचना की थी, जो उनके साहित्यिक योगदान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह कथा उनके नाम से जुड़ी हुई है और हिंदी साहित्य में जानी जाती है।
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कुतुबन – मृगावती: यह युग्म संगत है क्योंकि कुतुबन ने 'मृगावती' नामक काव्य रचना की थी। यह एक प्रसिद्ध प्रेम कथा है और कुतुबन का नाम इस रचना के साथ सही रूप से जुड़ा हुआ है।
इस प्रकार, विकल्प 1 (असाइत – चित्रावली) असंगत है क्योंकि यह युग्म किसी प्रसिद्ध साहित्यिक संबंध को नहीं दर्शाता है, जबकि अन्य सभी युग्म सही साहित्यिक संबंधों को दर्शाते हैं।
प्रश्न 204
गरीबों की प्रार्थनाएँ व्यर्थ नहीं जाती हैं' - वाक्य में रेखांकित पद में संज्ञाभेद इंगित कीजिए :
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उत्तर और व्याख्या
वाक्य 'गरीबों की प्रार्थनाएँ व्यर्थ नहीं जाती हैं' में रेखांकित पद 'प्रार्थनाएँ' है। इस पद का संज्ञाभेद 'जातिवाचक' है, जो विकल्प 2 के रूप में सही उत्तर है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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जातिवाचक संज्ञा: जातिवाचक संज्ञा वह होती है जो किसी विशेष प्रकार या वर्ग के नाम को दर्शाती है। 'प्रार्थनाएँ' शब्द यहाँ एक विशेष प्रकार की क्रिया या भावना को दर्शाता है, जो कि प्रार्थना करने की क्रिया या भावना का एक सामान्य नाम है। यह किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु का नाम नहीं है, बल्कि एक प्रकार की क्रिया का नाम है, जो इसे जातिवाचक संज्ञा बनाता है।
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अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- भाववाचक संज्ञा: भाववाचक संज्ञा वह होती है जो किसी भावना, गुण, या अवस्था का नाम हो। 'प्रार्थनाएँ' शब्द यहाँ किसी भावना या गुण का नाम नहीं है, बल्कि एक क्रिया का नाम है, इसलिए यह भाववाचक संज्ञा नहीं है।
- समूहवाचक संज्ञा: समूहवाचक संज्ञा वह होती है जो किसी समूह या झुंड का नाम हो। 'प्रार्थनाएँ' किसी समूह का नाम नहीं है, बल्कि यह एक क्रिया का नाम है, इसलिए यह समूहवाचक संज्ञा नहीं है।
- व्यक्तिवाचक संज्ञा: व्यक्तिवाचक संज्ञा वह होती है जो किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु का नाम हो। 'प्रार्थनाएँ' किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु का नाम नहीं है, इसलिए यह व्यक्तिवाचक संज्ञा नहीं है।
इस प्रकार, 'प्रार्थनाएँ' शब्द का संज्ञाभेद 'जातिवाचक' है, और विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 205
निम्न में से किस विकल्प में मूल या अयौगिक भाववाचक संज्ञा नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 2, "ममत्व", को सही उत्तर के रूप में चुना गया है क्योंकि यह मूल या अयौगिक भाववाचक संज्ञा नहीं है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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ममत्व (Option 2): ममत्व का अर्थ है 'ममता' या 'माँ का प्रेम'। यह एक भावनात्मक स्थिति है जो किसी विशेष व्यक्ति या वस्तु के प्रति गहरे प्रेम और स्नेह को दर्शाती है। यह एक अमूर्त भावना है और इसे किसी विशेष वस्तु या व्यक्ति से नहीं जोड़ा जा सकता। इसलिए, यह मूल या अयौगिक भाववाचक संज्ञा नहीं है।
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रोग (Option 1): रोग एक ऐसी स्थिति है जो शरीर या मन की अस्वस्थता को दर्शाती है। यह एक विशेष स्थिति या अवस्था को दर्शाता है और इसे एक संज्ञा के रूप में माना जाता है। यह एक अयौगिक भाववाचक संज्ञा है क्योंकि यह एक विशेष अवस्था को दर्शाता है।
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क्षमा (Option 3): क्षमा का अर्थ है 'माफ करना' या 'दया दिखाना'। यह एक विशेष भावना या गुण को दर्शाता है जो किसी के प्रति दया या सहानुभूति को दर्शाता है। यह भी एक अयौगिक भाववाचक संज्ञा है क्योंकि यह एक विशेष गुण को दर्शाता है।
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सत्य (Option 4): सत्य का अर्थ है 'सच्चाई' या 'वास्तविकता'। यह एक विशेष गुण या अवस्था को दर्शाता है जो किसी वस्तु या घटना की वास्तविकता को दर्शाता है। यह भी एक अयौगिक भाववाचक संज्ञा है।
इस प्रकार, "ममत्व" को सही उत्तर के रूप में चुना गया है क्योंकि यह अन्य विकल्पों की तरह एक विशेष अवस्था या गुण को नहीं दर्शाता है, बल्कि यह एक अमूर्त भावना है।
प्रश्न 206
लाख की चूड़ियाँ' में लेखक 'बदलू' को क्या कहकर पुकारता है ?
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उत्तर और व्याख्या
लेखक 'लाख की चूड़ियाँ' में 'बदलू' को 'बदलू काका' कहकर पुकारता है। यह सही उत्तर है क्योंकि कहानी में लेखक और बदलू के बीच के संबंध को दर्शाने के लिए 'काका' शब्द का प्रयोग किया गया है। 'काका' शब्द का उपयोग आमतौर पर भारतीय समाज में किसी बुजुर्ग व्यक्ति या परिवार के बड़े सदस्य के लिए किया जाता है, जो लेखक के दृष्टिकोण से बदलू के साथ उनके संबंध को सही रूप में प्रस्तुत करता है।
अब हम अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं और समझते हैं कि वे क्यों गलत हैं:
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बदलू मामा: 'मामा' शब्द का उपयोग आमतौर पर माँ के भाई के लिए किया जाता है। कहानी में ऐसा कोई संदर्भ नहीं है जो यह दर्शाए कि बदलू लेखक के मामा हैं। इसलिए, यह विकल्प सही नहीं है।
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बदलू बाबा: 'बाबा' शब्द का उपयोग अक्सर दादा या किसी वृद्ध व्यक्ति के लिए किया जाता है। हालांकि बदलू वृद्ध हो सकते हैं, लेकिन कहानी में उन्हें 'बाबा' के रूप में संबोधित नहीं किया गया है। इसलिए, यह विकल्प भी सही नहीं है।
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बदलू चाचा: 'चाचा' शब्द का उपयोग पिता के छोटे भाई के लिए किया जाता है। कहानी में बदलू को 'चाचा' के रूप में संबोधित नहीं किया गया है, इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
इस प्रकार, 'बदलू काका' ही सही उत्तर है क्योंकि यह कहानी में लेखक और बदलू के संबंध को सही रूप में प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 207
निम्न में से भाववाच्य चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
Option 1: "गर्मियों में रोज़ नहाया जाता है।" भाववाच्य वाक्य है। भाववाच्य वाक्य वह होता है जिसमें क्रिया का प्रभाव कर्ता पर न होकर कर्म पर होता है और कर्ता का उल्लेख नहीं होता। इस वाक्य में "नहाया जाता है" क्रिया का प्रभाव कर्म पर है और कर्ता का उल्लेख नहीं है, इसलिए यह भाववाच्य है।
Option 2: "नानी द्वारा कहानी सुनाई गई।" यह वाक्य कर्मवाच्य है। इसमें "नानी द्वारा" कर्ता का स्पष्ट उल्लेख है और क्रिया "सुनाई गई" का प्रभाव कहानी पर है, जो कि कर्म है।
Option 3: "कुत्ता सारी रात भौंकता है।" यह वाक्य कर्तृवाच्य है। इसमें "कुत्ता" कर्ता है और क्रिया "भौंकता है" का प्रभाव सीधे कर्ता पर है।
Option 4: "किसानों द्वारा फसल काट ली गई है।" यह भी कर्मवाच्य वाक्य है। इसमें "किसानों द्वारा" कर्ता का उल्लेख है और क्रिया "काट ली गई है" का प्रभाव फसल पर है, जो कि कर्म है।
इस प्रकार, केवल Option 1 "गर्मियों में रोज़ नहाया जाता है।" भाववाच्य वाक्य है, क्योंकि इसमें कर्ता का उल्लेख नहीं है और क्रिया का प्रभाव कर्म पर है।
प्रश्न 208
झक' और 'झख' शब्दों के क्रमशः अर्थ हैं :
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उत्तर और व्याख्या
'झक' और 'झख' शब्दों के क्रमशः अर्थ हैं 'सनक' और 'मछली'। इस आधार पर, विकल्प 3 सही है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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विकल्प 3: सनक : मछली
- 'झक' का अर्थ 'सनक' होता है। 'सनक' का मतलब होता है किसी विशेष विचार या कार्य के प्रति अत्यधिक उत्साह या जुनून।
- 'झख' का अर्थ 'मछली' होता है। 'मछली' एक जलचर जीव है जो पानी में रहती है।
- इसलिए, 'झक' और 'झख' के अर्थ क्रमशः 'सनक' और 'मछली' हैं, जो विकल्प 3 को सही बनाता है।
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अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
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विकल्प 1: धुन : सनक
- 'धुन' का अर्थ संगीत की लय या ध्वनि होता है, जो 'झक' के अर्थ 'सनक' से मेल नहीं खाता।
- 'सनक' का अर्थ सही है, लेकिन 'धुन' का अर्थ 'झक' नहीं होता।
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विकल्प 2: झाग : फेन
- 'झाग' और 'फेन' दोनों का अर्थ एक ही होता है, जो कि पानी या किसी तरल पदार्थ में बनने वाले बुलबुले होते हैं।
- यह 'झक' और 'झख' के अर्थ से मेल नहीं खाता।
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विकल्प 4: शीघ्र : सनक
- 'शीघ्र' का अर्थ जल्दी या तुरंत होता है, जो 'झक' के अर्थ 'सनक' से मेल नहीं खाता।
- 'सनक' का अर्थ सही है, लेकिन 'शीघ्र' का अर्थ 'झक' नहीं होता।
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इस प्रकार, विकल्प 3 'सनक : मछली' सही उत्तर है क्योंकि यह 'झक' और 'झख' के सही अर्थों को दर्शाता है।
प्रश्न 209
किस वाक्य में सर्वनाम पदबंध का प्रयोग हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
सर्वनाम पदबंध का प्रयोग उस स्थिति में होता है जब वाक्य में किसी संज्ञा के स्थान पर सर्वनाम का प्रयोग किया जाता है।
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मेरे रिश्तेदारों में से कोई समय पर नहीं पहुँचा।
इस वाक्य में "कोई" शब्द का प्रयोग सर्वनाम के रूप में किया गया है। "कोई" यहाँ पर "रिश्तेदारों" के लिए प्रयुक्त हुआ है, जो कि एक संज्ञा है। इस प्रकार, यह वाक्य सर्वनाम पदबंध का सही उदाहरण है। -
रिश्तों में स्वार्थ देखने वाले युवा सान्निध्य की ऊष्मा पहचानें।
इस वाक्य में कोई सर्वनाम पदबंध नहीं है। यहाँ पर "रिश्तों" और "युवा" जैसे शब्द संज्ञा के रूप में प्रयुक्त हुए हैं, और कोई सर्वनाम का प्रयोग नहीं किया गया है। -
राम ने लंका के अत्याचारी, राक्षस-राज रावण को मार डाला।
इस वाक्य में भी कोई सर्वनाम पदबंध नहीं है। यहाँ पर "राम", "लंका", "राक्षस-राज रावण" जैसे शब्द संज्ञा के रूप में प्रयुक्त हुए हैं। -
पाँचवीं मंजिल से गिरा, मरेगा नहीं तो क्या जिंदा रहेगा।
इस वाक्य में भी कोई सर्वनाम पदबंध नहीं है। यहाँ पर "पाँचवीं मंजिल" और "मरेगा", "जिंदा रहेगा" जैसे शब्द संज्ञा और क्रिया के रूप में प्रयुक्त हुए हैं।
इस प्रकार, केवल विकल्प 1 में ही सर्वनाम पदबंध का प्रयोग हुआ है, इसलिए यह सही उत्तर है।
प्रश्न 210
सामने जो बड़ा-सा मकान दिखाई दे रहा है, वह मेरा है – रेखांकित पद का सर्वनाम भेद इंगित कीजिए :
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उत्तर और व्याख्या
रेखांकित पद "वह" का सर्वनाम भेद संबंधवाचक है, और इसे सही विकल्प के रूप में इंगित किया गया है। आइए इसे विस्तार से समझें:
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संबंधवाचक सर्वनाम: संबंधवाचक सर्वनाम वह होता है जो किसी विशेष संज्ञा या सर्वनाम के साथ संबंध स्थापित करता है। वाक्य में "वह" शब्द उस मकान की ओर इशारा कर रहा है जो पहले से ही संदर्भित है। यह मकान और वक्ता के बीच संबंध को दर्शाता है, इसलिए यह संबंधवाचक सर्वनाम है।
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अन्य विकल्पों की गलतियाँ:
- प्रश्नवाचक सर्वनाम: प्रश्नवाचक सर्वनाम वह होता है जो प्रश्न पूछने के लिए प्रयोग किया जाता है, जैसे "कौन", "क्या" आदि। चूंकि "वह" किसी प्रश्न को नहीं दर्शा रहा है, इसलिए यह प्रश्नवाचक नहीं है।
- निजवाचक सर्वनाम: निजवाचक सर्वनाम वह होता है जो व्यक्ति विशेष के लिए प्रयोग होता है, जैसे "मैं", "तुम" आदि। "वह" किसी व्यक्ति विशेष को नहीं दर्शा रहा है, इसलिए यह निजवाचक नहीं है।
- अनिश्चयवाचक सर्वनाम: अनिश्चयवाचक सर्वनाम वह होता है जो किसी अनिश्चित वस्तु या व्यक्ति को दर्शाता है, जैसे "कोई", "कुछ" आदि। "वह" एक निश्चित मकान की ओर इशारा कर रहा है, इसलिए यह अनिश्चयवाचक नहीं है।
इस प्रकार, "वह" का सही सर्वनाम भेद संबंधवाचक है, और विकल्प 2 सही है।
प्रश्न 211
‘श्री पुनीत जी शर्मा भारत के सुप्रसिद्ध शिक्षाविद् हैं। आप इतिहास पढ़ाते हैं।' वाक्य में प्रयुक्त सर्वनाम है :
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उत्तर और व्याख्या
वाक्य में प्रयुक्त सर्वनाम "आप" है। यह सर्वनाम "पुरुषवाचक सर्वनाम" के अंतर्गत आता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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पुरुषवाचक सर्वनाम: यह सर्वनाम उन शब्दों को कहते हैं जो किसी व्यक्ति या वस्तु का सीधा उल्लेख करते हैं। वाक्य में "आप" शब्द का प्रयोग श्री पुनीत जी शर्मा के लिए किया गया है, जो एक व्यक्ति का सीधा उल्लेख है। इसलिए, यह पुरुषवाचक सर्वनाम है।
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अन्य विकल्पों की व्याख्या:
- निजवाचक सर्वनाम: यह सर्वनाम उन शब्दों को कहते हैं जो किसी व्यक्ति के अपने संबंध को व्यक्त करते हैं, जैसे "स्वयं", "अपना" आदि। वाक्य में ऐसा कोई शब्द नहीं है।
- निश्चयवाचक सर्वनाम: यह सर्वनाम उन शब्दों को कहते हैं जो किसी निश्चितता को व्यक्त करते हैं, जैसे "यह", "वह" आदि। वाक्य में ऐसा कोई शब्द नहीं है।
- प्रसिद्धिवाचक सर्वनाम: यह एक काल्पनिक विकल्प है और हिंदी व्याकरण में ऐसा कोई सर्वनाम नहीं होता।
इस प्रकार, दिए गए वाक्य में "आप" शब्द का प्रयोग पुरुषवाचक सर्वनाम के रूप में किया गया है, जो विकल्प 2 को सही ठहराता है।
प्रश्न 212
किस वाक्य में सार्वनामिक विशेषण का प्रयोग हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
सार्वनामिक विशेषण वह विशेषण होता है जो संज्ञा या सर्वनाम के पहले आकर उसके बारे में विशेष जानकारी देता है। यह विशेषण संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता को दर्शाता है और अक्सर प्रश्नवाचक, संकेतवाचक, या अन्य प्रकार के सर्वनामों के रूप में होता है।
अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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तुम सब आ गए; अच्छे कहाँ रह गए।
इस वाक्य में "तुम सब" और "अच्छे" शब्दों का प्रयोग हुआ है, लेकिन इनमें सार्वनामिक विशेषण का प्रयोग नहीं है। यहाँ "तुम सब" एक सामान्य सर्वनाम है और "अच्छे" एक विशेषण है, लेकिन यह सार्वनामिक विशेषण नहीं है। -
जो बाहर खड़ा है उसे अन्दर बुलाओ।
इस वाक्य में "जो" एक संबंधवाचक सर्वनाम है, लेकिन यह सार्वनामिक विशेषण के रूप में प्रयोग नहीं हुआ है। यह वाक्य किसी विशेष संज्ञा की विशेषता नहीं बता रहा है। -
तुम छात्रों के लिए कुछ किताबें ले आओ।
इस वाक्य में "कुछ" शब्द का प्रयोग सार्वनामिक विशेषण के रूप में हुआ है। "कुछ" यहाँ "किताबें" संज्ञा की विशेषता बता रहा है कि कितनी किताबें लाई जानी हैं। इसलिए यह वाक्य सार्वनामिक विशेषण का सही उदाहरण है। -
कुछ तुम करो; कुछ मैं करूँगा।
इस वाक्य में "कुछ" शब्द का प्रयोग हुआ है, लेकिन यह सार्वनामिक विशेषण के रूप में नहीं है। यहाँ "कुछ" एक अनिश्चित सर्वनाम के रूप में प्रयोग हुआ है, जो कार्य की मात्रा को दर्शा रहा है, न कि किसी संज्ञा की विशेषता को।
इस प्रकार, विकल्प 3 सही उत्तर है क्योंकि इसमें "कुछ" शब्द का प्रयोग सार्वनामिक विशेषण के रूप में हुआ है, जो "किताबें" संज्ञा की विशेषता को दर्शा रहा है।
प्रश्न 213
‘वह दिनभर लिखता रहा।' वाक्य में प्रयुक्त क्रिया विशेषण का भेद इंगित कीजिए :
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उत्तर और व्याख्या
वाक्य 'वह दिनभर लिखता रहा।' में प्रयुक्त क्रिया विशेषण का भेद कालवाचक क्रिया विशेषण है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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कालवाचक क्रिया विशेषण (Option 1):
- कालवाचक क्रिया विशेषण वह होता है जो क्रिया के समय को दर्शाता है। इस वाक्य में 'दिनभर' शब्द यह बताता है कि क्रिया (लिखना) कितने समय तक चली। 'दिनभर' से यह स्पष्ट होता है कि लिखने की क्रिया पूरे दिन चली, जो समय की अवधि को दर्शाता है। इसलिए, यह कालवाचक क्रिया विशेषण है।
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रीतिवाचक क्रिया विशेषण (Option 2):
- रीतिवाचक क्रिया विशेषण वह होता है जो क्रिया के करने के तरीके या रीति को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, 'तेजी से', 'धीरे-धीरे' आदि। वाक्य में ऐसा कोई शब्द नहीं है जो लिखने की रीति को दर्शाए, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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स्थानवाचक क्रिया विशेषण (Option 3):
- स्थानवाचक क्रिया विशेषण वह होता है जो क्रिया के स्थान को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, 'यहां', 'वहां' आदि। वाक्य में ऐसा कोई शब्द नहीं है जो लिखने के स्थान को दर्शाए, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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परिमाणवाचक क्रिया विशेषण (Option 4):
- परिमाणवाचक क्रिया विशेषण वह होता है जो क्रिया की मात्रा या परिमाण को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, 'बहुत', 'थोड़ा' आदि। वाक्य में ऐसा कोई शब्द नहीं है जो लिखने की मात्रा को दर्शाए, इसलिए यह विकल्प गलत है।
इस प्रकार, 'वह दिनभर लिखता रहा।' वाक्य में 'दिनभर' शब्द क्रिया के समय को दर्शाता है, इसलिए यह कालवाचक क्रिया विशेषण है और Option 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 214
किस वाक्य में 'इच्छार्थ वृत्ति' का प्रयोग हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
वाक्य में 'इच्छार्थ वृत्ति' का प्रयोग तब होता है जब किसी कार्य के लिए इच्छा या कामना व्यक्त की जाती है। अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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ईश्वर तुम्हारा भला करे। - इस वाक्य में 'इच्छार्थ वृत्ति' का स्पष्ट प्रयोग हुआ है क्योंकि यह एक कामना या इच्छा व्यक्त करता है कि ईश्वर किसी का भला करे। यहाँ पर 'भला करे' एक इच्छा या कामना को दर्शाता है, जो 'इच्छार्थ वृत्ति' का उदाहरण है।
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कृपया यह प्रकरण जाँच दीजिए। - इस वाक्य में 'कृपया' शब्द विनम्रता को दर्शाता है और यह एक अनुरोध है, न कि इच्छा या कामना। इसलिए यह 'इच्छार्थ वृत्ति' का उदाहरण नहीं है।
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लगता है इस वर्ष खूब वर्षा होगी। - इस वाक्य में एक अनुमान या संभावना व्यक्त की गई है, न कि कोई इच्छा या कामना। इसलिए यह 'इच्छार्थ वृत्ति' का उदाहरण नहीं है।
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यदि वह पढ़ता तो आज सफल हो जाता। - यह वाक्य एक शर्तीय स्थिति को दर्शाता है और इसमें कोई इच्छा या कामना व्यक्त नहीं की गई है। इसलिए यह 'इच्छार्थ वृत्ति' का उदाहरण नहीं है।
इस प्रकार, 'ईश्वर तुम्हारा भला करे।' वाक्य में 'इच्छार्थ वृत्ति' का सही प्रयोग हुआ है, और यही कारण है कि विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 215
वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध विकल्प चुनने के लिए हमें शब्दों के सही रूप और उनके प्रयोग को समझना आवश्यक है। दिए गए विकल्पों में से:
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विद्वता: यह शब्द अशुद्ध है। सही शब्द "विद्वत्ता" है। "विद्वता" का प्रयोग गलत है क्योंकि संस्कृत में 'विद्वान' से 'विद्वत्ता' बनता है, जिसका अर्थ है विद्वान होने की अवस्था या गुण।
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गीतांजली: यह शब्द शुद्ध है। "गीतांजली" रवींद्रनाथ ठाकुर की प्रसिद्ध काव्य रचना का नाम है और इसका प्रयोग सही है।
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पक्षिगण: यह शब्द शुद्ध है। "पक्षिगण" का अर्थ है पक्षियों का समूह, और यह शब्द सही रूप में है।
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स्वामिभक्त: यह शब्द शुद्ध है। "स्वामिभक्त" का अर्थ है स्वामी के प्रति भक्ति रखने वाला, और यह सही रूप में है।
इस प्रकार, वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध विकल्प "विद्वता" है, क्योंकि इसका सही रूप "विद्वत्ता" होना चाहिए।
प्रश्न 216
अशुद्ध वाक्य चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
अशुद्ध वाक्य चुनिए :
Option 1: "आपसे मिलकर मुझे आनन्द का आभास हुआ।" इस वाक्य में "आनन्द का आभास" शब्दों का प्रयोग अशुद्ध है। "आभास" का अर्थ होता है "अनुमान" या "छवि", जो कि "आनन्द" के संदर्भ में सही नहीं है। सही वाक्य होगा "आपसे मिलकर मुझे आनन्द की अनुभूति हुई।" यहाँ "अनुभूति" शब्द का प्रयोग अधिक उपयुक्त है क्योंकि यह अनुभव या महसूस करने का भाव व्यक्त करता है।
Option 2: "मेरठ में कई दर्शनीय स्थल हैं।" यह वाक्य शुद्ध है क्योंकि इसमें कोई व्याकरणिक या शब्दावली संबंधी त्रुटि नहीं है। यह वाक्य सही तरीके से यह जानकारी देता है कि मेरठ में कई देखने योग्य स्थान हैं।
Option 3: "यह छात्रवृत्ति केवल छात्राओं के लिए है।" यह वाक्य भी शुद्ध है। इसमें स्पष्ट रूप से बताया गया है कि छात्रवृत्ति केवल छात्राओं के लिए उपलब्ध है, और इसमें कोई व्याकरणिक त्रुटि नहीं है।
Option 4: "मैं अपना मत स्पष्ट करना चाहता हूँ।" यह वाक्य भी शुद्ध है। इसमें वक्ता अपनी राय को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने की इच्छा जाहिर कर रहा है, और इसमें कोई अशुद्धि नहीं है।
इस प्रकार, Option 1 में "आनन्द का आभास" का प्रयोग अशुद्ध है, इसलिए यह वाक्य अशुद्ध है।
प्रश्न 217
अशुद्ध संधि वाला विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
अशुद्ध संधि वाला विकल्प चुनिए :
Option 3: तत् + उपरान्त = तदोपरान्त
विस्तृत व्याख्या:
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तत् + उपरान्त = तदोपरान्त: इस संधि में त्रुटि है। यहां 'तत्' और 'उपरान्त' के बीच विसर्ग संधि होनी चाहिए, जिससे सही रूप 'तत्परान्त' बनता है। 'तदोपरान्त' में विसर्ग का लोप हो गया है, जो कि अशुद्ध है।
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मद + उन्मत्त = मदोन्मत्त: यह संधि सही है। यहां पर 'मद' और 'उन्मत्त' के बीच गुण संधि का प्रयोग हुआ है, जिससे 'मद' का 'अ' और 'उन्मत्त' का 'उ' मिलकर 'ओ' बनता है, जो कि सही है।
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विद्वत् + मुख = विद्वन्मुख: यह संधि भी सही है। यहां पर 'विद्वत्' और 'मुख' के बीच अनुस्वार संधि का प्रयोग हुआ है, जिससे 'विद्वत्' का 'त्' और 'मुख' का 'म' मिलकर 'न्' बनता है, जो कि सही है।
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षट् + आयतन = षडायतन: यह संधि भी सही है। यहां पर 'षट्' और 'आयतन' के बीच अनुस्वार संधि का प्रयोग हुआ है, जिससे 'षट्' का 'ट्' और 'आयतन' का 'आ' मिलकर 'ड' बनता है, जो कि सही है।
इस प्रकार, विकल्प 3 'तत् + उपरान्त = तदोपरान्त' में संधि अशुद्ध है, इसलिए यह सही उत्तर है।
प्रश्न 218
निम्न में से कौन-सा कथन असंगत है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 3 सही उत्तर है क्योंकि देवनागरी लिपि में प्रत्येक ध्वनि के लिए एक ही चिह्न होता है। यह लिपि ध्वन्यात्मक है, जिसका अर्थ है कि प्रत्येक वर्ण का एक निश्चित ध्वनि होता है और एक ही ध्वनि के लिए अलग-अलग चिह्न नहीं होते। इसलिए, यह कथन असंगत है कि "देवनागरी में एक ही ध्वनि के लिए कई चिह्न हैं।"
अब अन्य विकल्पों की चर्चा करते हैं:
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विकल्प 1: "देवनागरी लिपि को ‘लोकनागरी' भी कहा जाता है।" - यह कथन सही है। देवनागरी लिपि का उपयोग कई भारतीय भाषाओं में होता है और इसे कभी-कभी 'लोकनागरी' भी कहा जाता है।
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विकल्प 2: "यह लिपि वर्णात्मक है।" - यह कथन भी सही है। देवनागरी लिपि वर्णात्मक है क्योंकि यह ध्वनियों को वर्णों के माध्यम से स्पष्ट रूप से व्यक्त करती है।
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विकल्प 4: "देवनागरी में प्रत्येक वर्ण का स्पष्टतः उच्चारण होता है।" - यह कथन भी सही है। देवनागरी लिपि में प्रत्येक वर्ण का स्पष्ट उच्चारण होता है, जो इसे ध्वन्यात्मक लिपि बनाता है।
इस प्रकार, विकल्प 3 ही असंगत है क्योंकि यह देवनागरी लिपि की ध्वन्यात्मक प्रकृति के विपरीत है।
प्रश्न 219
अशुद्ध वर्तनी वाला विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विकल्प 1 "प्रस्तुतिकरण" को अशुद्ध वर्तनी वाला विकल्प माना गया है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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प्रस्तुतिकरण: यह शब्द "प्रस्तुति" से बना है, जिसका अर्थ होता है किसी चीज़ को प्रस्तुत करना या दिखाना। सही वर्तनी "प्रस्तुतीकरण" होनी चाहिए। "प्रस्तुतिकरण" में "ति" की जगह "ति" का प्रयोग होना चाहिए, इसलिए यह अशुद्ध है।
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विचारार्ह: यह शब्द सही है और इसका अर्थ होता है "विचार करने योग्य"। इसमें कोई वर्तनी की अशुद्धि नहीं है।
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वर्तनियाँ: यह शब्द भी सही है और इसका अर्थ होता है "वर्तनी" का बहुवचन रूप। इसमें भी कोई वर्तनी की अशुद्धि नहीं है।
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छिपकली: यह शब्द भी सही है और इसका अर्थ होता है एक प्रकार का सरीसृप। इसमें भी कोई वर्तनी की अशुद्धि नहीं है।
इस प्रकार, विकल्प 1 "प्रस्तुतिकरण" की वर्तनी अशुद्ध है, और यही कारण है कि इसे सही उत्तर के रूप में चुना गया है।
प्रश्न 220
किस विकल्प में दो उपसर्गों का प्रयोग नहीं हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 2, "सहगामिनी," सही उत्तर है क्योंकि इसमें दो उपसर्गों का प्रयोग नहीं हुआ है। आइए इसे विस्तार से समझें:
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सारोपा: इस शब्द में "सा" और "रोप" दो उपसर्ग हैं। "सा" का अर्थ है 'साथ' और "रोप" का अर्थ है 'लगाना'। इस प्रकार, यह शब्द दो उपसर्गों के प्रयोग से बना है।
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सहगामिनी: इस शब्द में केवल एक उपसर्ग "सह" का प्रयोग हुआ है, जिसका अर्थ है 'साथ'। "गामिनी" एक मूल शब्द है जिसका अर्थ है 'चलने वाली'। इसलिए, इसमें केवल एक उपसर्ग है और यह विकल्प सही है।
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पुनरुद्धार: इस शब्द में "पुनर" और "उद्धार" दो उपसर्ग हैं। "पुनर" का अर्थ है 'फिर से' और "उद्धार" का अर्थ है 'उठाना'। इस प्रकार, यह शब्द भी दो उपसर्गों के प्रयोग से बना है।
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समाधि: इस शब्द में "सम" और "आधि" दो उपसर्ग हैं। "सम" का अर्थ है 'समान' और "आधि" का अर्थ है 'स्थिति'। इस प्रकार, यह शब्द भी दो उपसर्गों के प्रयोग से बना है।
इस प्रकार, "सहगामिनी" एकमात्र ऐसा विकल्प है जिसमें केवल एक उपसर्ग का प्रयोग हुआ है, और इसलिए यह सही उत्तर है।