HTET परीक्षा Level 2 TGT
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 2 TGT की तैयारी
सत्यापित उत्तर और व्याख्याएँ
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 221
किस विकल्प में ‘आ’ उपसर्ग का प्रयोग हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: किस विकल्प में ‘आ’ उपसर्ग का प्रयोग हुआ है ?
सही उत्तर: विकल्प 3
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 3: आखण्डल
- 'आ' उपसर्ग का प्रयोग: 'आ' उपसर्ग का अर्थ होता है 'पूर्णता' या 'सम्पूर्णता'। 'आखण्डल' शब्द में 'आ' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है, जो 'खण्डल' के साथ मिलकर 'सम्पूर्ण खण्डल' या 'अखंड' का भाव प्रकट करता है। इस प्रकार, यह शब्द 'आ' उपसर्ग के प्रयोग का सही उदाहरण है।
-
विकल्प 1: आदित्य
- 'आ' उपसर्ग का प्रयोग नहीं: 'आदित्य' शब्द में 'आ' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है। यह शब्द 'अदिति' से उत्पन्न हुआ है, जो सूर्य के लिए एक विशेषण है। इसमें 'आ' उपसर्ग का कोई योगदान नहीं है।
-
विकल्प 2: आक्षपटिक
- 'आ' उपसर्ग का प्रयोग नहीं: 'आक्षपटिक' शब्द में 'आ' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है। यह शब्द 'क्षपट' से बना है, जिसमें 'आ' उपसर्ग का कोई विशेष योगदान नहीं है।
-
विकल्प 4: आभिजात्य
- 'आ' उपसर्ग का प्रयोग नहीं: 'आभिजात्य' शब्द में 'आ' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है। यह शब्द 'भिजात्य' से बना है, जिसमें 'आ' उपसर्ग का कोई विशेष योगदान नहीं है।
इस प्रकार, 'आ' उपसर्ग का सही प्रयोग विकल्प 3 'आखण्डल' में ही हुआ है, जो इसे सही उत्तर बनाता है।
प्रश्न 222
प्रति' उपसर्ग युक्त पद चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: प्रति' उपसर्ग युक्त पद चुनिए :
सही उत्तर: विकल्प 2 (प्रत्युष)
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 2: प्रत्युष
'प्रत्युष' शब्द में 'प्रति' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। 'प्रति' का अर्थ होता है 'सामना करना' या 'विपरीत दिशा में'। 'प्रत्युष' का अर्थ होता है 'प्रातःकाल' या 'सुबह का समय', जो कि रात के विपरीत होता है। इस प्रकार, 'प्रत्युष' में 'प्रति' उपसर्ग का सही प्रयोग हुआ है। -
विकल्प 1: प्रोक्ति
'प्रोक्ति' शब्द में 'प्र' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है, न कि 'प्रति'। 'प्रोक्ति' का अर्थ होता है 'कहना' या 'उक्ति', जो 'प्र' उपसर्ग से बना है। इसलिए, यह विकल्प सही नहीं है। -
विकल्प 3: प्रोत्साहन
'प्रोत्साहन' शब्द में भी 'प्र' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। इसका अर्थ होता है 'उत्साह बढ़ाना'। यहाँ 'प्रति' उपसर्ग का प्रयोग नहीं है, इसलिए यह विकल्प सही नहीं है। -
विकल्प 4: प्राप्त्याशा
'प्राप्त्याशा' शब्द में 'प्रा' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। इसका अर्थ होता है 'प्राप्त करने की आशा'। यहाँ भी 'प्रति' उपसर्ग का प्रयोग नहीं है, इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
इस प्रकार, 'प्रत्युष' ही एकमात्र ऐसा शब्द है जिसमें 'प्रति' उपसर्ग का सही प्रयोग हुआ है, और इसलिए यह सही उत्तर है।
प्रश्न 223
किस विकल्प में 'अ' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 4 'अप्रत्याशित' में 'अ' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है।
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अप्रत्याशित: इस शब्द में 'अ' उपसर्ग का प्रयोग 'प्रत्याशित' शब्द के पहले हुआ है। 'प्रत्याशित' का अर्थ होता है 'उम्मीद की गई' या 'अपेक्षित'। जब 'अ' उपसर्ग का प्रयोग होता है, तो यह शब्द का अर्थ विपरीत कर देता है, जिससे 'अप्रत्याशित' का अर्थ होता है 'जो उम्मीद नहीं की गई हो' या 'अनपेक्षित'। इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि 'अ' उपसर्ग का प्रयोग इस शब्द में हुआ है।
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अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- अत्यय: इस शब्द में 'अ' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है। 'अत्यय' का अर्थ होता है 'अंत' या 'समाप्ति', और यह एक स्वतंत्र शब्द है जिसमें उपसर्ग का प्रयोग नहीं है।
- अत्युक्ति: इस शब्द में 'अ' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है। 'अत्युक्ति' का अर्थ होता है 'अधिक कहना' या 'अतिशयोक्ति', और यह भी एक स्वतंत्र शब्द है जिसमें उपसर्ग का प्रयोग नहीं है।
- अतीव: इस शब्द में 'अ' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है। 'अतीव' का अर्थ होता है 'बहुत अधिक' या 'अत्यधिक', और यह भी एक स्वतंत्र शब्द है जिसमें उपसर्ग का प्रयोग नहीं है।
इस प्रकार, केवल 'अप्रत्याशित' में ही 'अ' उपसर्ग का सही प्रयोग हुआ है, जो इसे सही उत्तर बनाता है।
प्रश्न 224
जयशंकर प्रसाद का आरम्भिक उपनाम क्या था ?
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उत्तर और व्याख्या
जयशंकर प्रसाद का आरम्भिक उपनाम "कलाधर" था, जो कि विकल्प 3 है। यह उपनाम उनके साहित्यिक जीवन के आरम्भिक चरण में उनके द्वारा अपनाया गया था। जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के प्रमुख स्तंभों में से एक थे और उन्होंने अपनी रचनाओं में भारतीय संस्कृति और परंपराओं का गहन चित्रण किया है। "कलाधर" उपनाम उनके साहित्यिक कौशल और कला के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।
अब हम अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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मधुप: यह उपनाम जयशंकर प्रसाद से संबंधित नहीं है। यह संभवतः किसी अन्य साहित्यकार या कवि का उपनाम हो सकता है, लेकिन जयशंकर प्रसाद का नहीं।
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रसिक: यह भी जयशंकर प्रसाद का उपनाम नहीं था। "रसिक" शब्द का अर्थ होता है जो रस का आनंद लेने वाला हो, लेकिन यह उनके आरम्भिक उपनाम के रूप में मान्य नहीं है।
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रंजन: यह उपनाम भी जयशंकर प्रसाद से संबंधित नहीं है। "रंजन" का अर्थ होता है आनंद देने वाला, लेकिन यह उनके साहित्यिक उपनाम के रूप में नहीं जाना जाता।
इस प्रकार, "कलाधर" (विकल्प 3) ही जयशंकर प्रसाद का सही आरम्भिक उपनाम है, और अन्य विकल्प उनके उपनाम के रूप में सही नहीं हैं।
प्रश्न 225
किस विकल्प में 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: किस विकल्प में 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है?
सही उत्तर: विकल्प 4
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 4: अन्वर्थ
- 'अन्वर्थ' शब्द में 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। 'अनु' का अर्थ होता है 'के अनुसार' या 'पीछे'। 'अन्वर्थ' का अर्थ होता है 'अर्थ के अनुसार'। इस शब्द में 'अनु' उपसर्ग का सही प्रयोग हुआ है, जो इसे सही उत्तर बनाता है।
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विकल्प 1: अनुज्झित
- 'अनुज्झित' शब्द में 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है। यह शब्द 'अ' उपसर्ग से बना है, जिसका अर्थ होता है 'न' या 'बिना'। इसलिए यह विकल्प गलत है।
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विकल्प 2: अनुदार
- 'अनुदार' शब्द में 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है। यह शब्द 'अ' उपसर्ग से बना है, जिसका अर्थ होता है 'न' या 'बिना'। इसलिए यह विकल्प गलत है।
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विकल्प 3: अनुर्वर
- 'अनुर्वर' शब्द में भी 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है। यह शब्द 'अ' उपसर्ग से बना है, जिसका अर्थ होता है 'न' या 'बिना'। इसलिए यह विकल्प गलत है।
इस प्रकार, 'अन्वर्थ' ही एकमात्र ऐसा शब्द है जिसमें 'अनु' उपसर्ग का सही प्रयोग हुआ है, और इसलिए विकल्प 4 सही उत्तर है।
प्रश्न 226
किस शब्द में दो से अधिक उपसर्गों का प्रयोग किया गया है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: किस शब्द में दो से अधिक उपसर्गों का प्रयोग किया गया है?
सही उत्तर: विकल्प 4 (दुर्व्यवहार)
व्याख्या:
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दुर्व्यवहार: इस शब्द में दो उपसर्गों का प्रयोग किया गया है - "दुर्" और "व्य". "दुर्" का अर्थ होता है बुरा या गलत, और "व्य" का अर्थ होता है विशेष रूप से या व्यापक रूप से. इस प्रकार, "दुर्व्यवहार" का अर्थ होता है बुरा या अनुचित व्यवहार. इस शब्द में दो से अधिक उपसर्गों का प्रयोग किया गया है, जो इसे सही उत्तर बनाता है.
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प्राध्यापक: इस शब्द में केवल एक उपसर्ग "प्रा" का प्रयोग किया गया है, जिसका अर्थ होता है प्रमुख या मुख्य. "अध्यापक" का अर्थ होता है शिक्षक, और "प्राध्यापक" का अर्थ होता है प्रमुख शिक्षक. इसमें दो से अधिक उपसर्ग नहीं हैं.
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प्रावधान: इस शब्द में भी केवल एक उपसर्ग "प्रा" का प्रयोग किया गया है, जिसका अर्थ होता है पहले से या अग्रिम. "विधान" का अर्थ होता है व्यवस्था या नियम, और "प्रावधान" का अर्थ होता है अग्रिम व्यवस्था. इसमें भी दो से अधिक उपसर्ग नहीं हैं.
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पुनरावेदन: इस शब्द में एक उपसर्ग "पुनर" का प्रयोग किया गया है, जिसका अर्थ होता है फिर से या दोबारा. "आवेदन" का अर्थ होता है निवेदन या अपील, और "पुनरावेदन" का अर्थ होता है पुनः अपील. इसमें भी दो से अधिक उपसर्ग नहीं हैं.
इस प्रकार, "दुर्व्यवहार" ही एकमात्र ऐसा शब्द है जिसमें दो से अधिक उपसर्गों का प्रयोग किया गया है, और इसलिए यह सही उत्तर है.
प्रश्न 227
ल' प्रत्यय का प्रयोग किस शब्द में सही रूप से हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
ल' प्रत्यय का प्रयोग हिंदी भाषा में विशेष रूप से उन शब्दों के अंत में होता है जो कोमलता, मृदुता या सौम्यता को दर्शाते हैं। इस संदर्भ में, आइए प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण करें:
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आँचल: यह शब्द 'आँच' से बना है और इसका अर्थ है साड़ी का वह हिस्सा जो कंधे पर रखा जाता है। इसमें 'ल' प्रत्यय का प्रयोग नहीं होता है। यह शब्द कोमलता या मृदुता को नहीं दर्शाता है, बल्कि यह एक वस्तु का नाम है।
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मृदुल: यह शब्द 'मृदु' से बना है, जिसका अर्थ होता है कोमल या नरम। 'ल' प्रत्यय का प्रयोग यहाँ सही रूप से हुआ है क्योंकि यह शब्द कोमलता को दर्शाता है। इस प्रकार, 'मृदुल' में 'ल' प्रत्यय का प्रयोग सही है।
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विमल: यह शब्द 'विम' से बना है, जिसका अर्थ होता है स्वच्छ या निर्मल। हालांकि इसमें 'ल' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है, लेकिन यह कोमलता या मृदुता को नहीं दर्शाता है, बल्कि यह स्वच्छता को दर्शाता है।
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वितल: यह शब्द सामान्य रूप से हिंदी में प्रयोग नहीं होता है और इसका कोई स्पष्ट अर्थ नहीं है। इसलिए इसमें 'ल' प्रत्यय का प्रयोग सही नहीं माना जा सकता।
इस प्रकार, 'मृदुल' शब्द में 'ल' प्रत्यय का प्रयोग सही रूप से हुआ है क्योंकि यह कोमलता को दर्शाता है। यही कारण है कि विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 228
कर्तृवाचक कृत् प्रत्यय' वाला विकल्प नहीं है :
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उत्तर और व्याख्या
कर्तृवाचक कृत् प्रत्यय का अर्थ होता है वह प्रत्यय जो किसी कार्य को करने वाले व्यक्ति या वस्तु का बोध कराता है। अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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प्रेरिका: यह शब्द 'प्रेरित करने वाली' के अर्थ में आता है। यहाँ 'प्रेरिका' में 'का' प्रत्यय जुड़ा है, जो कर्तृवाचक है क्योंकि यह प्रेरणा देने वाले व्यक्ति का बोध कराता है।
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उपभोक्त्री: यह शब्द 'उपभोग करने वाली' के अर्थ में आता है। 'उपभोक्त्री' में 'त्री' प्रत्यय जुड़ा है, जो कर्तृवाचक है क्योंकि यह उपभोग करने वाले व्यक्ति का बोध कराता है।
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बुद्धिमान्: यह शब्द 'बुद्धि वाला' के अर्थ में आता है। यहाँ 'मान्' प्रत्यय जुड़ा है, जो कर्तृवाचक नहीं है। यह व्यक्ति की विशेषता या गुण का बोध कराता है, न कि किसी कार्य को करने वाले का।
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रखवैया: यह शब्द 'रखवाली करने वाला' के अर्थ में आता है। 'रखवैया' में 'इया' प्रत्यय जुड़ा है, जो कर्तृवाचक है क्योंकि यह रखवाली करने वाले व्यक्ति का बोध कराता है।
इस प्रकार, 'बुद्धिमान्' शब्द में कर्तृवाचक कृत् प्रत्यय नहीं है, जबकि अन्य विकल्पों में कर्तृवाचक कृत् प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। इसलिए, सही उत्तर विकल्प 3 'बुद्धिमान्' है।
प्रश्न 229
प्रत्यय की दृष्टि से कौन-सा विकल्प सुमेलित नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: प्रत्यय की दृष्टि से कौन-सा विकल्प सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: विकल्प 1
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 1: दाँत + एल = दंतैल
यह विकल्प सुमेलित नहीं है क्योंकि 'दाँत' शब्द में 'एल' प्रत्यय जोड़ने से 'दंतैल' शब्द नहीं बनता है। 'दंतैल' शब्द का निर्माण 'दंत' से होता है, जो 'दाँत' का संस्कृत रूप है, और इसमें 'एल' प्रत्यय का कोई योगदान नहीं है। इसलिए, यह विकल्प प्रत्यय की दृष्टि से सुमेलित नहीं है। -
विकल्प 2: पानी + ईला = पनीला
यह विकल्प सुमेलित है क्योंकि 'पानी' शब्द में 'ईला' प्रत्यय जोड़ने से 'पनीला' शब्द बनता है, जो सही है। 'पनीला' का अर्थ होता है पानी जैसा या पानी से भरा हुआ। -
विकल्प 3: कुशा + ल = कुशल
यह विकल्प सुमेलित है क्योंकि 'कुशा' शब्द में 'ल' प्रत्यय जोड़ने से 'कुशल' शब्द बनता है, जो सही है। 'कुशल' का अर्थ होता है दक्ष या निपुण। -
विकल्प 4: नानी + आल = ननिहाल
यह विकल्प सुमेलित है क्योंकि 'नानी' शब्द में 'आल' प्रत्यय जोड़ने से 'ननिहाल' शब्द बनता है, जो सही है। 'ननिहाल' का अर्थ होता है नानी का घर या नानी का स्थान।
इस प्रकार, प्रत्यय की दृष्टि से विकल्प 1 सुमेलित नहीं है, और यही कारण है कि यह सही उत्तर है।
प्रश्न 230
किस विकल्प में 'तर' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 1 'शिक्षणेतर' में 'तर' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है। इसका कारण यह है कि 'शिक्षणेतर' शब्द में 'तर' प्रत्यय का अर्थ 'अधिक' या 'बड़ा' नहीं है, बल्कि यह 'शिक्षण' से अलग या भिन्न का बोध कराता है। यहाँ 'तर' का प्रयोग 'इतर' के रूप में हुआ है, जो भिन्नता दर्शाता है।
अब अन्य विकल्पों की चर्चा करते हैं:
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वृहत्तर: इस शब्द में 'तर' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। 'वृहत्त' का अर्थ है बड़ा, और 'वृहत्तर' का अर्थ है उससे भी बड़ा। यहाँ 'तर' प्रत्यय का प्रयोग तुलना के लिए किया गया है।
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महत्तर: इस शब्द में भी 'तर' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। 'महत्त' का अर्थ है महान, और 'महत्तर' का अर्थ है उससे भी महान। यहाँ 'तर' प्रत्यय का प्रयोग तुलना के लिए किया गया है।
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उच्चतर: इस शब्द में 'तर' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। 'उच्च' का अर्थ है ऊँचा, और 'उच्चतर' का अर्थ है उससे भी ऊँचा। यहाँ 'तर' प्रत्यय का प्रयोग तुलना के लिए किया गया है।
इस प्रकार, 'शिक्षणेतर' में 'तर' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है, जबकि अन्य सभी विकल्पों में 'तर' प्रत्यय का प्रयोग तुलना के लिए किया गया है। इसलिए विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 231
झुकाव, भुलावा और उड़ान शब्दों का प्रत्यय भेद इंगित कीजिए :
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: झुकाव, भुलावा और उड़ान शब्दों का प्रत्यय भेद इंगित कीजिए :
सही उत्तर: विकल्प 1 (भाववाचक कृत् प्रत्यय)
व्याख्या:
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भाववाचक कृत् प्रत्यय (विकल्प 1):
- झुकाव, भुलावा और उड़ान शब्दों में 'आव', 'आवा' और 'आन' प्रत्यय जुड़े हुए हैं। ये प्रत्यय क्रिया से भाववाचक संज्ञा बनाते हैं। उदाहरण के लिए, 'झुक' से 'झुकाव', 'भुल' से 'भुलावा', और 'उड़' से 'उड़ान' बनते हैं। ये सभी शब्द किसी क्रिया के भाव या अवस्था को व्यक्त करते हैं, जो कि भाववाचक कृत् प्रत्यय का कार्य है। इसलिए, विकल्प 1 सही है।
-
भाववाचक तद्धित प्रत्यय (विकल्प 2):
- तद्धित प्रत्यय का प्रयोग किसी मूल शब्द से नया शब्द बनाने के लिए होता है, जो उस मूल शब्द के अर्थ में परिवर्तन लाता है। यहाँ पर झुकाव, भुलावा और उड़ान में तद्धित प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है, बल्कि कृत् प्रत्यय का प्रयोग हुआ है जो क्रिया से भाववाचक संज्ञा बनाता है।
-
करणवाचक कृत् प्रत्यय (विकल्प 3):
- करणवाचक कृत् प्रत्यय का प्रयोग उस साधन या उपकरण को व्यक्त करने के लिए होता है जिससे कोई कार्य किया जाता है। उदाहरण के लिए, 'लेखन' (लिखने का साधन) में 'न' करणवाचक कृत् प्रत्यय है। झुकाव, भुलावा और उड़ान में ऐसा कोई अर्थ नहीं है जो किसी साधन को व्यक्त करता हो।
-
कर्मवाचक कृत् प्रत्यय (विकल्प 4):
- कर्मवाचक कृत् प्रत्यय का प्रयोग उस कार्य को व्यक्त करने के लिए होता है जो किसी क्रिया के द्वारा किया जाता है। उदाहरण के लिए, 'पठन' (पढ़ने का कार्य) में 'न' कर्मवाचक कृत् प्रत्यय है। झुकाव, भुलावा और उड़ान में ऐसा कोई अर्थ नहीं है जो किसी कार्य को व्यक्त करता हो।
इस प्रकार, झुकाव, भुलावा और उड़ान शब्दों में भाववाचक कृत् प्रत्यय का प्रयोग हुआ है, जो विकल्प 1 को सही ठहराता है।
प्रश्न 232
किस विकल्प में 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: किस विकल्प में 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है ?
सही उत्तर: विकल्प 4
विस्तृत व्याख्या:
-
विकल्प 4: पाणिनीय
'पाणिनीय' शब्द में 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है। यह शब्द 'पाणिनि' से बना है, जो एक प्रसिद्ध संस्कृत व्याकरणाचार्य थे। 'पाणिनीय' का अर्थ है 'पाणिनि से संबंधित' या 'पाणिनि के द्वारा रचित'। इसमें 'अनीय' प्रत्यय का कोई योगदान नहीं है, बल्कि यह 'ईय' प्रत्यय से बना है जो संबंध सूचक है। -
विकल्प 1: शयनीय
'शयनीय' शब्द में 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। यह 'शयन' से बना है और इसका अर्थ है 'सोने योग्य'। यहाँ 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग किसी क्रिया या अवस्था की योग्यता को दर्शाने के लिए किया गया है। -
विकल्प 2: सम्माननीय
'सम्माननीय' शब्द में भी 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। यह 'सम्मान' से बना है और इसका अर्थ है 'सम्मान के योग्य'। यहाँ 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग योग्यता या उपयुक्तता को दर्शाने के लिए किया गया है। -
विकल्प 3: आदरणीय
'आदरणीय' शब्द में 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। यह 'आदर' से बना है और इसका अर्थ है 'आदर के योग्य'। यहाँ भी 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग योग्यता को दर्शाने के लिए किया गया है।
इस प्रकार, 'पाणिनीय' शब्द में 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है, जबकि अन्य सभी विकल्पों में 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। इसलिए, सही उत्तर विकल्प 4 है।
प्रश्न 233
निम्न में से किस विकल्प में 'गरुड़' का पर्याय नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 3, 'हेरम्ब', सही उत्तर है क्योंकि यह 'गरुड़' का पर्याय नहीं है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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अहिभोजी: 'अहिभोजी' गरुड़ का पर्यायवाची शब्द है। 'अहिभोजी' का अर्थ है 'सर्पों को खाने वाला', और गरुड़ को सर्पों का भक्षक माना जाता है। इसलिए, यह गरुड़ का पर्याय है।
-
वैनतेय: 'वैनतेय' भी गरुड़ का पर्यायवाची शब्द है। 'वैनतेय' का अर्थ है 'विनता का पुत्र', और गरुड़ को विनता का पुत्र माना जाता है। इसलिए, यह भी गरुड़ का पर्याय है।
-
हेरम्ब: 'हेरम्ब' गरुड़ का पर्याय नहीं है। 'हेरम्ब' वास्तव में भगवान गणेश का एक नाम है। यह नाम गणेश जी के विभिन्न रूपों में से एक को दर्शाता है और इसका गरुड़ से कोई संबंध नहीं है।
-
खगनाथ: 'खगनाथ' का अर्थ है 'पक्षियों का स्वामी', और गरुड़ को पक्षियों का राजा माना जाता है। इसलिए, यह भी गरुड़ का पर्याय है।
इस प्रकार, 'हेरम्ब' गरुड़ का पर्याय नहीं है और यही कारण है कि विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 234
किस विकल्प में 'मछली' का पर्यायवाची नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: किस विकल्प में 'मछली' का पर्यायवाची नहीं है ?
विकल्प:
- झष
- कामध्वज
- मकरध्वज
- शलकी
सही उत्तर: विकल्प 3
व्याख्या:
-
विकल्प 3: मकरध्वज - यह सही उत्तर है क्योंकि 'मकरध्वज' का अर्थ मछली नहीं है। 'मकरध्वज' का संबंध 'मकर' से है, जो एक पौराणिक जलचर प्राणी है, और 'ध्वज' का अर्थ ध्वज या प्रतीक होता है। 'मकरध्वज' का उपयोग अक्सर भगवान कामदेव के ध्वज के रूप में किया जाता है, जो मछली से संबंधित नहीं है।
-
विकल्प 1: झष - 'झष' मछली का पर्यायवाची शब्द है। यह संस्कृत भाषा में मछली के लिए प्रयुक्त होता है और इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
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विकल्प 2: कामध्वज - 'कामध्वज' का अर्थ भी मछली से संबंधित नहीं है। हालांकि यह विकल्प सही उत्तर नहीं है, लेकिन यह मछली का पर्यायवाची नहीं है। 'कामध्वज' का संबंध कामदेव से है, जिनका ध्वज मछली का प्रतीक होता है।
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विकल्प 4: शलकी - 'शलकी' भी मछली का पर्यायवाची शब्द है। यह शब्द मछली के लिए प्रयुक्त होता है और इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
इस प्रकार, 'मकरध्वज' मछली का पर्यायवाची नहीं है, इसलिए विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 235
अशुद्ध विलोम युग्म को छाँटिए :
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उत्तर और व्याख्या
अशुद्ध विलोम युग्म को छाँटने के लिए हमें यह देखना होता है कि दिए गए शब्दों के जोड़े सही विलोम (विपरीतार्थक) शब्द हैं या नहीं।
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अवलंब – निरवलंब: 'अवलंब' का अर्थ होता है सहारा या समर्थन, जबकि 'निरवलंब' का अर्थ होता है बिना सहारे के। ये दोनों शब्द सही विलोम युग्म हैं क्योंकि एक का अर्थ सहारा है और दूसरे का बिना सहारे के।
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सह्य – असह्य: 'सह्य' का अर्थ होता है सहन करने योग्य, जबकि 'असह्य' का अर्थ होता है असहनीय या जिसे सहन न किया जा सके। ये भी सही विलोम युग्म हैं क्योंकि दोनों शब्द एक-दूसरे के विपरीतार्थक हैं।
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ऋजु – वक्र: 'ऋजु' का अर्थ होता है सीधा या सरल, जबकि 'वक्र' का अर्थ होता है टेढ़ा या घुमावदार। ये भी सही विलोम युग्म हैं क्योंकि दोनों शब्द एक-दूसरे के विपरीतार्थक हैं।
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गाँव – गँवारू: 'गाँव' का अर्थ होता है ग्रामीण क्षेत्र या बस्ती, जबकि 'गँवारू' का अर्थ होता है अशिक्षित या ग्रामीण जीवन शैली से संबंधित व्यक्ति। ये शब्द विलोम नहीं हैं क्योंकि 'गाँव' एक स्थान को दर्शाता है जबकि 'गँवारू' एक व्यक्ति के गुण को। इसलिए, यह युग्म अशुद्ध है।
इस प्रकार, विकल्प 4 'गाँव – गँवारू' अशुद्ध विलोम युग्म है और यही सही उत्तर है।
प्रश्न 236
असंगत कथन छाँटिए :
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उत्तर और व्याख्या
असंगत कथन छाँटने के लिए हमें दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करना होगा और यह देखना होगा कि कौन सा कथन अन्य विकल्पों के साथ मेल नहीं खाता है।
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नापाक इरादे से की जाने वाली मंत्रणा – दित्सा: यह कथन असंगत है क्योंकि 'दित्सा' का अर्थ नापाक इरादे से की जाने वाली मंत्रणा नहीं होता है। 'दित्सा' का अर्थ होता है 'दान' या 'उपहार'। इसलिए, यह कथन अन्य विकल्पों के साथ मेल नहीं खाता है और असंगत है।
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दोपहर से पहले का समय – पूर्वाह्न: यह कथन संगत है क्योंकि 'पूर्वाह्न' का अर्थ होता है 'दोपहर से पहले का समय'। यह सही और सटीक परिभाषा है।
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जिसे देखकर रोंगटे खड़े हो जाएँ – लोमहर्षक: यह कथन भी संगत है क्योंकि 'लोमहर्षक' का अर्थ होता है 'जिसे देखकर रोंगटे खड़े हो जाएँ'। यह सही और सटीक परिभाषा है।
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बालुका युक्त तट/भूमि – सिकता: यह कथन भी संगत है क्योंकि 'सिकता' का अर्थ होता है 'बालुका युक्त तट या भूमि'। यह सही और सटीक परिभाषा है।
इस प्रकार, विकल्प 1 'नापाक इरादे से की जाने वाली मंत्रणा – दित्सा' असंगत है क्योंकि इसका अर्थ गलत दिया गया है। अन्य सभी विकल्प सही और संगत हैं। इसलिए, विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 237
हस्बमामूल' शब्द का अर्थ है :
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उत्तर और व्याख्या
'हस्बमामूल' शब्द का अर्थ है 'यथावत', जो विकल्प 2 है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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विकल्प 2: यथावत - 'हस्बमामूल' एक फारसी शब्द है जिसका अर्थ होता है 'जैसा है वैसा ही' या 'यथावत'। यह शब्द किसी स्थिति या वस्तु के अपरिवर्तित रहने का संकेत देता है। इसलिए, विकल्प 2 सही है क्योंकि यह शब्द के सही अर्थ को दर्शाता है।
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विकल्प 1: विद्यालय - 'विद्यालय' का अर्थ होता है स्कूल या शिक्षा का स्थान। यह 'हस्बमामूल' के अर्थ से मेल नहीं खाता है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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विकल्प 3: अचानक - 'अचानक' का अर्थ होता है बिना किसी पूर्व सूचना के या अप्रत्याशित रूप से। यह 'हस्बमामूल' के अर्थ से बिल्कुल अलग है, इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
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विकल्प 4: अभिप्राय - 'अभिप्राय' का अर्थ होता है किसी बात का उद्देश्य या मतलब। यह भी 'हस्बमामूल' के अर्थ से संबंधित नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
इस प्रकार, 'हस्बमामूल' का सही अर्थ 'यथावत' है, जो विकल्प 2 को सही ठहराता है।
प्रश्न 238
जो मापा न जा सके' उसे कहेंगे :
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: 'जो मापा न जा सके' उसे कहेंगे :
सही उत्तर: विकल्प 2 - अपरिमेय
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 2: अपरिमेय
'अपरिमेय' का अर्थ होता है 'जो मापा न जा सके' या 'जिसे सीमाओं में नहीं बांधा जा सके'। यह शब्द उन चीजों के लिए प्रयोग होता है जो असीमित या अनंत होती हैं, जैसे कि ब्रह्मांड की विशालता या किसी की असीमित क्षमता। इस प्रकार, 'जो मापा न जा सके' के लिए 'अपरिमेय' शब्द का प्रयोग सही है। -
विकल्प 1: अप्रमेय
'अप्रमेय' का अर्थ होता है 'जिसे समझा न जा सके' या 'जिसे मापा न जा सके', लेकिन यह शब्द आमतौर पर 'अपरिमेय' के समानार्थी के रूप में नहीं प्रयोग होता। यह शब्द अधिकतर बौद्धिक या दार्शनिक संदर्भों में प्रयोग होता है, जबकि 'अपरिमेय' भौतिक या गणितीय संदर्भों में अधिक उपयुक्त है। -
विकल्प 3: अग्रगण्य
'अग्रगण्य' का अर्थ होता है 'प्रमुख' या 'अग्रणी'। यह शब्द उन व्यक्तियों या वस्तुओं के लिए प्रयोग होता है जो किसी क्षेत्र में सबसे आगे या प्रमुख स्थान पर होते हैं। यह शब्द 'जो मापा न जा सके' के संदर्भ में उपयुक्त नहीं है। -
विकल्प 4: अनवगत
'अनवगत' का अर्थ होता है 'जो अवगत न हो' या 'जिसे जानकारी न हो'। यह शब्द जानकारी या ज्ञान की कमी को दर्शाता है और 'जो मापा न जा सके' के संदर्भ में सही नहीं है।
इस प्रकार, 'जो मापा न जा सके' के लिए सही शब्द 'अपरिमेय' है, जो विकल्प 2 में दिया गया है।
प्रश्न 239
दश' शब्द किस शब्द-समूह के लिए सटीक नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: 'दश' शब्द किस शब्द-समूह के लिए सटीक नहीं है?
सही उत्तर: विकल्प 1 (नक्षत्र)
व्याख्या:
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विकल्प 1: नक्षत्र
'दश' शब्द का अर्थ होता है 'दस', जो संख्या को दर्शाता है। नक्षत्रों की संख्या 27 होती है, जो 'दश' से मेल नहीं खाती। इसलिए, 'दश' शब्द नक्षत्रों के समूह के लिए सटीक नहीं है। इस कारण से, विकल्प 1 सही उत्तर है। -
विकल्प 2: दिशा
'दश' शब्द का उपयोग दिशाओं के संदर्भ में किया जा सकता है, जैसे कि दस दिशाएँ (आठ मुख्य दिशाएँ और दो उपदिशाएँ)। इसलिए, 'दश' शब्द दिशाओं के समूह के लिए उपयुक्त है। -
विकल्प 3: अवतार
'दश' शब्द का उपयोग 'दशावतार' के संदर्भ में किया जाता है, जो भगवान विष्णु के दस अवतारों को दर्शाता है। इसलिए, 'दश' शब्द अवतारों के समूह के लिए उपयुक्त है। -
विकल्प 4: दिक्पाल
'दश' शब्द का उपयोग दिक्पालों के संदर्भ में भी किया जा सकता है, जो दस दिशाओं के रक्षक होते हैं। इसलिए, 'दश' शब्द दिक्पालों के समूह के लिए उपयुक्त है।
इस प्रकार, 'दश' शब्द नक्षत्रों के समूह के लिए सटीक नहीं है, जबकि अन्य विकल्पों के लिए यह उपयुक्त है। यही कारण है कि विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 240
मीरां ने कृष्ण को ‘गउवन के रखवारे' कहा है। इसके लिए एक शब्द है :
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उत्तर और व्याख्या
मीरां ने कृष्ण को 'गउवन के रखवारे' कहा है, और इसके लिए सही शब्द 'गोपाला' है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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गोपाला (Option 4): 'गोपाला' शब्द का अर्थ है 'गायों का रक्षक'। 'गो' का अर्थ गाय होता है और 'पाल' का अर्थ पालन करने वाला या रक्षक होता है। भगवान कृष्ण को अक्सर 'गोपाला' कहा जाता है क्योंकि वे ग्वालों के साथ गायों की देखभाल करते थे और उन्हें चराने ले जाते थे। इस प्रकार, 'गउवन के रखवारे' के लिए 'गोपाला' सबसे उपयुक्त शब्द है।
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वंशीधर (Option 1): 'वंशीधर' का अर्थ है 'बांसुरी धारण करने वाला'। यह नाम कृष्ण के लिए उपयुक्त है क्योंकि वे बांसुरी बजाने के लिए प्रसिद्ध थे, लेकिन यह विशेष रूप से 'गउवन के रखवारे' के संदर्भ में नहीं आता है।
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श्याम (Option 2): 'श्याम' कृष्ण का एक और नाम है, जो उनके सांवले रंग को दर्शाता है। हालांकि यह नाम कृष्ण के व्यक्तित्व का एक पहलू है, यह 'गउवन के रखवारे' के विशेष अर्थ को नहीं दर्शाता।
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नंदलाल (Option 3): 'नंदलाल' का अर्थ है 'नंद के पुत्र'। यह नाम कृष्ण के पारिवारिक संबंध को दर्शाता है, क्योंकि वे नंद बाबा के पुत्र थे। हालांकि, यह नाम 'गउवन के रखवारे' के अर्थ को स्पष्ट रूप से नहीं दर्शाता।
इस प्रकार, 'गउवन के रखवारे' के लिए 'गोपाला' (Option 4) सबसे उपयुक्त और सही शब्द है।