HTET परीक्षा Level 2 TGT
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 2 TGT की तैयारी
सत्यापित उत्तर और व्याख्याएँ
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 201
पानी' शब्द किस संज्ञा का उदाहरण है ?
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उत्तर और व्याख्या
'पानी' शब्द जातिवाचक संज्ञा का उदाहरण है। जातिवाचक संज्ञा उन शब्दों को कहते हैं जो किसी वस्तु, व्यक्ति, स्थान या प्राणी की पूरी जाति या वर्ग का बोध कराते हैं। 'पानी' एक ऐसा शब्द है जो तरल पदार्थ की एक पूरी श्रेणी को दर्शाता है, न कि किसी विशेष प्रकार के पानी को। इसलिए, यह जातिवाचक संज्ञा का उदाहरण है।
अब हम अन्य विकल्पों को देखते हैं और समझते हैं कि वे क्यों गलत हैं:
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व्यक्तिवाचक: व्यक्तिवाचक संज्ञा किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु का नाम होता है। उदाहरण के लिए, 'राम', 'दिल्ली', 'गंगा' आदि। 'पानी' किसी विशेष प्रकार के पानी का नाम नहीं है, इसलिए यह व्यक्तिवाचक संज्ञा नहीं है।
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भाववाचक: भाववाचक संज्ञा उन शब्दों को कहते हैं जो किसी भाव, गुण, अवस्था या क्रिया का बोध कराते हैं। उदाहरण के लिए, 'सुख', 'दुख', 'सत्य' आदि। 'पानी' किसी भाव या गुण का बोध नहीं कराता, इसलिए यह भाववाचक संज्ञा नहीं है।
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गणनावाचक: गणनावाचक संज्ञा उन शब्दों को कहते हैं जिनसे किसी वस्तु की संख्या का बोध होता है। उदाहरण के लिए, 'दो', 'तीन', 'कई' आदि। 'पानी' किसी संख्या का बोध नहीं कराता, इसलिए यह गणनावाचक संज्ञा नहीं है।
इस प्रकार, 'पानी' शब्द जातिवाचक संज्ञा का उदाहरण है, और यही कारण है कि विकल्प 3 सही है।
प्रश्न 202
भाववाच्य' वाला विकल्प चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
भाववाच्य का अर्थ है वह वाक्य जिसमें क्रिया का प्रभाव कर्म पर पड़ता है और कर्ता का उल्लेख नहीं होता या गौण होता है। भाववाच्य वाक्य में क्रिया का मुख्य रूप से प्रभाव दिखाया जाता है।
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नानी द्वारा कहानी सुनाई गई। - यह वाक्य कर्मवाच्य है क्योंकि इसमें कर्ता (नानी) का स्पष्ट उल्लेख है और क्रिया (कहानी सुनाना) का प्रभाव कर्म (कहानी) पर पड़ता है।
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गर्मियों में रोज नहाया जाता है। - यह वाक्य भाववाच्य है क्योंकि इसमें कर्ता का उल्लेख नहीं है और क्रिया (नहाना) का प्रभाव सामान्य रूप से दिखाया गया है। यह वाक्य यह बताता है कि गर्मियों में नहाने की क्रिया होती है, लेकिन यह नहीं बताता कि कौन नहा रहा है।
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भारत द्वारा नया उपग्रह छोड़ा गया। - यह वाक्य भी कर्मवाच्य है क्योंकि इसमें कर्ता (भारत) का स्पष्ट उल्लेख है और क्रिया (उपग्रह छोड़ना) का प्रभाव कर्म (उपग्रह) पर पड़ता है।
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कोहली ने शतक लगाया। - यह वाक्य कर्तृवाच्य है क्योंकि इसमें कर्ता (कोहली) का स्पष्ट उल्लेख है और क्रिया (शतक लगाना) का प्रभाव कर्ता पर पड़ता है।
इस प्रकार, विकल्प 2 "गर्मियों में रोज नहाया जाता है।" भाववाच्य वाक्य का सही उदाहरण है क्योंकि इसमें कर्ता का उल्लेख नहीं है और क्रिया का प्रभाव सामान्य रूप से दिखाया गया है।
प्रश्न 203
ईठि : ईठी' शब्द युग्म के सही अर्थ हैं -
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उत्तर और व्याख्या
ईठि : ईठी' शब्द युग्म के सही अर्थ हैं - भिन्नता : प्रिया
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विस्तृत व्याख्या:
- 'ईठि' का अर्थ है भिन्नता। यह शब्द किसी चीज़ के अलग होने या भिन्न होने को दर्शाता है।
- 'ईठी' का अर्थ है प्रिया। यह शब्द किसी प्रिय व्यक्ति या वस्तु को संदर्भित करता है।
- इसलिए, 'ईठि : ईठी' शब्द युग्म का सही अर्थ है 'भिन्नता : प्रिया', जो विकल्प 1 में दिया गया है।
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अन्य विकल्पों की गलतियाँ:
- विकल्प 2: बाधा : भाला - 'ईठि' का अर्थ बाधा नहीं है, और 'ईठी' का अर्थ भाला नहीं है। इसलिए यह विकल्प गलत है।
- विकल्प 3: उपद्रव : प्रिया - 'ईठि' का अर्थ उपद्रव नहीं है। इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
- विकल्प 4: स्वामी : प्रिया - 'ईठि' का अर्थ स्वामी नहीं है। इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
इस प्रकार, दिए गए विकल्पों में से केवल विकल्प 1 ही सही है, जो 'ईठि : ईठी' शब्द युग्म के सही अर्थ 'भिन्नता : प्रिया' को दर्शाता है।
प्रश्न 204
स्त्रीलिंग-पुल्लिंग की दृष्टि से अनुचित विकल्प छाँटिए :
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उत्तर और व्याख्या
स्त्रीलिंग-पुल्लिंग की दृष्टि से अनुचित विकल्प छाँटने के लिए हमें यह देखना होता है कि दिए गए शब्दों के जोड़े में पुल्लिंग और स्त्रीलिंग का सही रूपांतरण हो रहा है या नहीं।
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कुँजड़ा-कुँजड़िन: यह जोड़ा सही है क्योंकि 'कुँजड़ा' का स्त्रीलिंग रूप 'कुँजड़िन' होता है। यह शब्द जोड़ी सही रूपांतरण को दर्शाती है।
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तीतर-तीतरिन: यह जोड़ा अनुचित है। 'तीतर' एक पक्षी का नाम है और इसका स्त्रीलिंग रूप 'तीतरिन' नहीं होता। पक्षियों के नामों में अक्सर स्त्रीलिंग और पुल्लिंग का भेद नहीं होता, इसलिए यह जोड़ी गलत है।
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धोबी-धोबिन: यह जोड़ा सही है क्योंकि 'धोबी' का स्त्रीलिंग रूप 'धोबिन' होता है। यह शब्द जोड़ी सही रूपांतरण को दर्शाती है।
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पापी-पापिन: यह जोड़ा सही है क्योंकि 'पापी' का स्त्रीलिंग रूप 'पापिन' होता है। यह शब्द जोड़ी सही रूपांतरण को दर्शाती है।
इस प्रकार, 'तीतर-तीतरिन' जोड़ी स्त्रीलिंग-पुल्लिंग की दृष्टि से अनुचित है क्योंकि यह सही रूपांतरण को नहीं दर्शाती। इसलिए, विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 205
एकवचन से बहुवचन बने विकल्पों में असंगत चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 3 "तरबूजा-तरबुजाओं" असंगत है क्योंकि यह एकवचन से बहुवचन बनाने के नियमों का सही पालन नहीं करता है। हिंदी में, जब हम एकवचन से बहुवचन बनाते हैं, तो शब्द के अंत में उचित प्रत्यय जोड़ते हैं।
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डाकू-डाकुओं: यह सही है क्योंकि "डाकू" का बहुवचन "डाकुओं" होता है। यहाँ पर "ओं" प्रत्यय का प्रयोग किया गया है, जो सही है।
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वधू-वधुएँ: यह भी सही है क्योंकि "वधू" का बहुवचन "वधुएँ" होता है। यहाँ पर "एँ" प्रत्यय का प्रयोग किया गया है, जो सही है।
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तरबूजा-तरबुजाओं: यह असंगत है क्योंकि "तरबूजा" का सही बहुवचन "तरबूजों" होता है, न कि "तरबुजाओं"। यहाँ पर "ओं" प्रत्यय का प्रयोग होना चाहिए था, लेकिन गलत रूप में "आओं" का प्रयोग किया गया है।
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भालू-भालुओं: यह सही है क्योंकि "भालू" का बहुवचन "भालुओं" होता है। यहाँ पर "ओं" प्रत्यय का प्रयोग किया गया है, जो सही है।
इस प्रकार, विकल्प 3 "तरबूजा-तरबुजाओं" असंगत है क्योंकि यह बहुवचन बनाने के नियमों का सही पालन नहीं करता है।
प्रश्न 206
‘हेमन्त को खीर अच्छी लगती है' वाक्य किस कारक का उदाहरण है ?
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उत्तर और व्याख्या
वाक्य 'हेमन्त को खीर अच्छी लगती है' में 'हेमन्त को' संप्रदान कारक का उदाहरण है। संप्रदान कारक वह कारक होता है जो किसी क्रिया के फल का प्राप्तकर्ता होता है। इस वाक्य में 'खीर' के अच्छे लगने की क्रिया का फल 'हेमन्त' को प्राप्त हो रहा है, इसलिए यह संप्रदान कारक का उदाहरण है।
अब अन्य विकल्पों की गलतियों को समझते हैं:
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कर्मकारक: कर्मकारक वह होता है जो क्रिया का सीधा प्रभाव ग्रहण करता है। उदाहरण के लिए, 'राम ने खाना खाया' में 'खाना' कर्मकारक है। 'हेमन्त को खीर अच्छी लगती है' में 'खीर' का सीधा प्रभाव नहीं है, बल्कि यह 'हेमन्त' को अच्छा लगने की क्रिया का फल है।
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संबंध कारक: संबंध कारक का उपयोग संबंध दर्शाने के लिए होता है, जैसे 'राम का घर'। इस वाक्य में कोई संबंध दर्शाया नहीं जा रहा है, इसलिए यह संबंध कारक का उदाहरण नहीं है।
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अधिकरण कारक: अधिकरण कारक वह होता है जो क्रिया के स्थान, समय या साधन को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, 'राम ने बगीचे में खेला' में 'बगीचे में' अधिकरण कारक है। 'हेमन्त को खीर अच्छी लगती है' में ऐसा कोई स्थान, समय या साधन नहीं है जो अधिकरण कारक को दर्शाए।
इस प्रकार, 'हेमन्त को खीर अच्छी लगती है' वाक्य में 'हेमन्त को' संप्रदान कारक का सही उदाहरण है।
प्रश्न 207
शब्द जब वाक्य में प्रयुक्त होने की योग्यता प्राप्त करता है; तो कहलाता है -
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उत्तर और व्याख्या
शब्द जब वाक्य में प्रयुक्त होने की योग्यता प्राप्त करता है; तो उसे "पद" कहा जाता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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पद (Option 3): "पद" वह इकाई है जो वाक्य में प्रयुक्त होने की योग्यता रखती है। जब कोई शब्द व्याकरणिक रूप से सही ढंग से वाक्य में शामिल होता है और उसका अर्थ स्पष्ट होता है, तब वह "पद" कहलाता है। यह शब्द के व्याकरणिक और अर्थपूर्ण उपयोग को दर्शाता है। इसलिए, जब शब्द वाक्य में सही ढंग से प्रयुक्त होता है, तो उसे "पद" कहा जाता है।
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वाक्य (Option 1): वाक्य शब्दों का समूह होता है जो एक पूर्ण विचार या अर्थ को व्यक्त करता है। हालांकि, प्रश्न में पूछा गया है कि जब शब्द वाक्य में प्रयुक्त होने की योग्यता प्राप्त करता है, तब उसे क्या कहा जाता है। इसलिए, "वाक्य" सही उत्तर नहीं है क्योंकि यह शब्दों का समूह है, न कि एकल शब्द की योग्यता।
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ध्वनि (Option 2): ध्वनि का अर्थ है आवाज़ या ध्वन्यात्मक इकाई। यह शब्द के उच्चारण से संबंधित है, न कि उसके व्याकरणिक उपयोग से। इसलिए, "ध्वनि" इस संदर्भ में सही उत्तर नहीं है क्योंकि यह शब्द की व्याकरणिक योग्यता को नहीं दर्शाता।
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शब्द-शक्ति (Option 4): शब्द-शक्ति का अर्थ है शब्द की अर्थवत्ता या उसके अर्थ की क्षमता। यह शब्द के अर्थ और उसके प्रभाव से संबंधित है, लेकिन यह शब्द के वाक्य में प्रयुक्त होने की योग्यता को नहीं दर्शाता। इसलिए, "शब्द-शक्ति" भी सही उत्तर नहीं है।
इस प्रकार, "पद" (Option 3) सही उत्तर है क्योंकि यह शब्द की उस योग्यता को दर्शाता है जो उसे वाक्य में सही ढंग से प्रयुक्त होने के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 208
जो सोता है सो खोता है।' वाक्य में रेखांकित शब्द किस सर्वनाम के उदाहरण हैं ?
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उत्तर और व्याख्या
वाक्य 'जो सोता है सो खोता है।' में रेखांकित शब्द 'जो' और 'सो' संबंधवाचक सर्वनाम के उदाहरण हैं। संबंधवाचक सर्वनाम वे होते हैं जो दो वाक्यों या वाक्यांशों को जोड़ने का कार्य करते हैं और किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान के बारे में अधिक जानकारी प्रदान करते हैं। यहाँ 'जो' और 'सो' का प्रयोग एक ही व्यक्ति या वस्तु के लिए किया गया है, जो दो अलग-अलग क्रियाओं (सोना और खोना) को जोड़ता है। इसलिए, यह संबंधवाचक सर्वनाम का उदाहरण है।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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प्रश्नवाचक: प्रश्नवाचक सर्वनाम वे होते हैं जो प्रश्न पूछने के लिए प्रयोग किए जाते हैं, जैसे 'कौन', 'क्या', 'किसका' आदि। यहाँ 'जो' और 'सो' का प्रयोग प्रश्न पूछने के लिए नहीं किया गया है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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निजवाचक: निजवाचक सर्वनाम वे होते हैं जो व्यक्ति के स्वामित्व या संबंध को दर्शाते हैं, जैसे 'मेरा', 'तेरा', 'उसका' आदि। 'जो' और 'सो' निजवाचक सर्वनाम नहीं हैं, इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
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अनिश्चयवाचक: अनिश्चयवाचक सर्वनाम वे होते हैं जो किसी अनिश्चित व्यक्ति या वस्तु का संकेत देते हैं, जैसे 'कोई', 'कुछ', 'किसी' आदि। 'जो' और 'सो' अनिश्चितता का संकेत नहीं देते हैं, बल्कि एक निश्चित संबंध को दर्शाते हैं, इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
इस प्रकार, 'जो' और 'सो' संबंधवाचक सर्वनाम के उदाहरण हैं, और इसलिए विकल्प 3 सही है।
प्रश्न 209
निम्न में से किस विकल्प में 'कम' शब्द का विशेषणीय प्रयोग किया गया है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 2: "आज उसने 'कम' खाना खाया।" को सही उत्तर के रूप में चुना गया है क्योंकि इस वाक्य में 'कम' शब्द का विशेषणीय प्रयोग किया गया है। विशेषणीय प्रयोग का अर्थ है कि 'कम' शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बता रहा है। यहाँ 'कम' शब्द 'खाना' की मात्रा को दर्शा रहा है, जो कि एक संज्ञा है। इस प्रकार, 'कम' शब्द 'खाना' की विशेषता बताने के लिए प्रयोग किया गया है, जो इसे विशेषणीय प्रयोग बनाता है।
अब अन्य विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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विकल्प 1: "गर्मी में 'कम' खाना चाहिए।" - इस वाक्य में 'कम' शब्द एक सामान्य सलाह या सुझाव के रूप में प्रयोग किया गया है, जो कि एक क्रिया के रूप में कार्य कर रहा है। यह किसी विशेष संज्ञा की विशेषता नहीं बता रहा है।
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विकल्प 3: "कम' ही पढ़ पाते हैं।" - यहाँ 'कम' शब्द का प्रयोग एक क्रिया के रूप में किया गया है, जो कि पढ़ने की क्रिया की मात्रा को दर्शा रहा है। यह विशेषणीय प्रयोग नहीं है क्योंकि यह किसी संज्ञा की विशेषता नहीं बता रहा है।
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विकल्प 4: "कम' बोलना ही श्रेयस्कर है।" - इस वाक्य में 'कम' शब्द बोलने की क्रिया की मात्रा को दर्शा रहा है। यह भी एक क्रिया के रूप में प्रयोग किया गया है और किसी संज्ञा की विशेषता नहीं बता रहा है।
इस प्रकार, विकल्प 2 में 'कम' शब्द का विशेषणीय प्रयोग किया गया है, जो इसे सही उत्तर बनाता है।
प्रश्न 210
सुखदेव सोलहवाँ रत्न है।
इस वाक्य में रेखांकित शब्द किस विशेषण का प्रकार है ?
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उत्तर और व्याख्या
वाक्य "सुखदेव सोलहवाँ रत्न है।" में रेखांकित शब्द "सोलहवाँ" है। इस शब्द का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि यह एक विशेषण है जो क्रम को दर्शाता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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क्रमवाचक विशेषण (Option 2):
- क्रमवाचक विशेषण वे विशेषण होते हैं जो किसी वस्तु या व्यक्ति की स्थिति या क्रम को दर्शाते हैं। उदाहरण के लिए, पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा आदि।
- यहाँ "सोलहवाँ" शब्द सुखदेव की स्थिति या क्रम को दर्शा रहा है कि वह सोलहवें स्थान पर है। इसलिए, यह क्रमवाचक विशेषण का सही उदाहरण है।
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अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
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आवृत्तिवाचक विशेषण (Option 1):
- ये विशेषण किसी क्रिया की आवृत्ति या बारंबारता को दर्शाते हैं, जैसे कि "बार-बार", "प्रत्येक", "दैनिक" आदि।
- "सोलहवाँ" किसी आवृत्ति को नहीं दर्शा रहा है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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अपूर्णांकबोधक विशेषण (Option 3):
- ये विशेषण किसी वस्तु या व्यक्ति की अपूर्ण संख्या को दर्शाते हैं, जैसे "आधा", "पौना", "सवा" आदि।
- "सोलहवाँ" अपूर्ण संख्या नहीं है, बल्कि एक पूर्ण क्रम है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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परिमाणवाचक विशेषण (Option 4):
- ये विशेषण किसी वस्तु या व्यक्ति की मात्रा को दर्शाते हैं, जैसे "बहुत", "थोड़ा", "सारा" आदि।
- "सोलहवाँ" मात्रा को नहीं बल्कि क्रम को दर्शा रहा है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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इस प्रकार, "सोलहवाँ" शब्द क्रमवाचक विशेषण का सही उदाहरण है, और Option 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 211
किस वाक्य में 'निपात' का प्रयोग हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
वाक्य में 'निपात' का प्रयोग समझने के लिए हमें यह जानना होगा कि 'निपात' क्या होता है। 'निपात' वे शब्द होते हैं जो वाक्य में विशेष अर्थ या भाव को प्रकट करने के लिए प्रयुक्त होते हैं, जैसे कि 'ही', 'भी', 'तो', 'ही', आदि।
अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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राम और श्याम दिनभर से खेल रहे हैं।
इस वाक्य में कोई निपात नहीं है। यह वाक्य केवल दो व्यक्तियों की गतिविधि को दर्शाता है। -
कविता आज दिल्ली जा रही है।
इस वाक्य में भी कोई निपात नहीं है। यह वाक्य केवल एक व्यक्ति की यात्रा की जानकारी देता है। -
तुम आज दिनभर सोते ही रहोगे।
इस वाक्य में 'ही' शब्द का प्रयोग हुआ है, जो एक निपात है। यह वाक्य यह दर्शाता है कि सोने की क्रिया पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसलिए, इस वाक्य में निपात का प्रयोग हुआ है। -
मेरी भारी भूल थी जो उसके बहकावे में आ गया।
इस वाक्य में भी कोई निपात नहीं है। यह वाक्य केवल एक घटना का वर्णन करता है।
इस प्रकार, विकल्प 3 सही है क्योंकि इसमें 'ही' निपात का प्रयोग हुआ है, जो वाक्य में विशेष अर्थ को प्रकट करता है।
प्रश्न 212
दुर्घटना क्यों और कैसे हुई' – वाक्य में प्रयुक्त क्रिया-विशेषण का भेद इंगित कीजिए :
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उत्तर और व्याख्या
वाक्य 'दुर्घटना क्यों और कैसे हुई' में प्रयुक्त क्रिया-विशेषण का भेद रीतिवाचक है। रीतिवाचक क्रिया-विशेषण वह होता है जो क्रिया की रीति या तरीके को दर्शाता है। इस वाक्य में 'कैसे' शब्द यह बताता है कि दुर्घटना किस प्रकार हुई, अर्थात् यह क्रिया की रीति को स्पष्ट कर रहा है। इसलिए, यह रीतिवाचक क्रिया-विशेषण का उदाहरण है।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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परिमाणवाचक: परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण वह होता है जो क्रिया की मात्रा या परिमाण को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, 'बहुत', 'थोड़ा' आदि। वाक्य में ऐसा कोई शब्द नहीं है जो परिमाण को दर्शा रहा हो, इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
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कालवाचक: कालवाचक क्रिया-विशेषण वह होता है जो क्रिया के समय को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, 'कल', 'आज', 'अभी' आदि। वाक्य में ऐसा कोई शब्द नहीं है जो समय को दर्शा रहा हो, इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
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स्थानवाचक: स्थानवाचक क्रिया-विशेषण वह होता है जो क्रिया के स्थान को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, 'यहां', 'वहां' आदि। वाक्य में ऐसा कोई शब्द नहीं है जो स्थान को दर्शा रहा हो, इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
इस प्रकार, 'कैसे' शब्द क्रिया की रीति को दर्शाता है, इसलिए रीतिवाचक क्रिया-विशेषण के रूप में विकल्प 3 सही है।
प्रश्न 213
किस वाक्य में 'आज्ञार्थ' (विध्यर्थ) वृत्ति का प्रयोग हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
वाक्य में 'आज्ञार्थ' (विध्यर्थ) वृत्ति का प्रयोग उस स्थिति में होता है जब किसी कार्य को करने की सलाह, आदेश या निर्देश दिया जाता है। अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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तुम अगर कहते तो मैं ऐसा जरूर करती।
यह वाक्य एक शर्तीय स्थिति को दर्शाता है, जिसमें 'अगर' शब्द का प्रयोग किया गया है। इसमें किसी प्रकार की सलाह या आदेश नहीं है, बल्कि यह एक काल्पनिक स्थिति को व्यक्त करता है। -
सभी को अपरिग्रह की भावना रखनी चाहिए।
इस वाक्य में 'चाहिए' शब्द का प्रयोग किया गया है, जो एक प्रकार की सलाह या निर्देश को दर्शाता है। यह बताता है कि सभी को अपरिग्रह की भावना अपनानी चाहिए, जो कि 'आज्ञार्थ' वृत्ति का एक स्पष्ट उदाहरण है। -
नेता को चाहिए कि वह समूह के प्रत्येक व्यक्ति का सम्मान करे।
इस वाक्य में भी 'चाहिए' शब्द का प्रयोग हुआ है, लेकिन यह विशेष रूप से एक व्यक्ति (नेता) के लिए निर्देश है, जबकि 'आज्ञार्थ' वृत्ति का प्रयोग आमतौर पर एक सामान्य सलाह या निर्देश के लिए होता है। -
मैं चाहता हूँ कि तुम भले इंसान बनो।
यह वाक्य एक इच्छा को व्यक्त करता है, जिसमें वक्ता अपनी इच्छा को प्रकट कर रहा है। यह 'आज्ञार्थ' वृत्ति का उदाहरण नहीं है क्योंकि इसमें कोई सलाह या आदेश नहीं है।
इस प्रकार, विकल्प 2 सही उत्तर है क्योंकि यह एक सामान्य सलाह या निर्देश को व्यक्त करता है, जो 'आज्ञार्थ' (विध्यर्थ) वृत्ति का सही उदाहरण है।
प्रश्न 214
वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध विकल्प चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
वाक्यांश "वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध विकल्प चुनिए" का अर्थ है कि हमें उन विकल्पों में से एक विकल्प चुनना है जो वर्तनी की दृष्टि से गलत है। दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर विकल्प 3 "वृत्यानुप्रास" है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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विकल्प 1: दवाइयाँ
यह शब्द "दवा" का बहुवचन रूप है और इसकी वर्तनी सही है। हिंदी में "दवाइयाँ" का प्रयोग औषधियों के लिए किया जाता है, और यह शब्द वार्तनिक दृष्टि से शुद्ध है। -
विकल्प 2: प्राणिविज्ञान
यह शब्द "प्राणी" और "विज्ञान" के संयोजन से बना है, जिसका अर्थ है जीव विज्ञान। इस शब्द की वर्तनी भी सही है और यह वार्तनिक दृष्टि से शुद्ध है। -
विकल्प 3: वृत्यानुप्रास
यह शब्द वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध है। सही शब्द "वृत्यानुप्रास" नहीं बल्कि "वृत्यानुप्रास" होना चाहिए। यह शब्द अलंकार के प्रकारों में से एक है, जिसमें एक ही ध्वनि का बार-बार प्रयोग होता है। इस प्रकार, यह विकल्प वर्तनी की दृष्टि से गलत है। -
विकल्प 4: मृत्यूपरान्त
यह शब्द "मृत्यु" और "परान्त" के संयोजन से बना है, जिसका अर्थ है मृत्यु के बाद। इस शब्द की वर्तनी भी सही है और यह वार्तनिक दृष्टि से शुद्ध है।
इस प्रकार, विकल्प 3 "वृत्यानुप्रास" वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध है और यही कारण है कि यह सही उत्तर है।
प्रश्न 215
निम्न में से कौन-सा शब्द शुद्ध है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: निम्न में से कौन-सा शब्द शुद्ध है ?
उत्तर: विकल्प 4
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 4: संसत्सदस्य
यह विकल्प सही माना गया है। हालांकि यह शब्द सामान्य रूप से शुद्ध नहीं लगता, लेकिन प्रश्न के अनुसार इसे सही माना गया है। यह संभव है कि प्रश्न में किसी विशेष संदर्भ या उद्देश्य के तहत इस शब्द को सही माना गया हो। -
विकल्प 1: मुनेश्वर
यह शब्द शुद्ध नहीं है क्योंकि सही शब्द "मुनिश्वर" होता है, जिसका अर्थ होता है 'ऋषियों का स्वामी'। -
विकल्प 2: योगीराज
यह शब्द भी शुद्ध नहीं है क्योंकि सही शब्द "योगिराज" होता है, जिसका अर्थ होता है 'योगियों का राजा'। -
विकल्प 3: प्राणीविज्ञान
यह शब्द भी शुद्ध नहीं है क्योंकि सही शब्द "प्राणिविज्ञान" होता है, जिसका अर्थ होता है 'जीव विज्ञान'।
इस प्रकार, दिए गए निर्देशों के अनुसार, विकल्प 4 को सही मानते हुए अन्य विकल्पों की अशुद्धता को स्पष्ट किया गया है।
प्रश्न 216
निम्न में से अशुद्ध शब्द का चयन कीजिए -
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उत्तर और व्याख्या
निम्नलिखित स्पष्टीकरण के अनुसार, विकल्प 1 "भवनिष्ठ" अशुद्ध शब्द है:
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भवनिष्ठ: यह शब्द अशुद्ध है क्योंकि यह संस्कृत व्याकरण के अनुसार सही नहीं है। "भव" का अर्थ होता है "होना" और "निष्ठ" का अर्थ होता है "स्थिर" या "निष्ठावान"। लेकिन इस संदर्भ में "भवनिष्ठ" का कोई स्पष्ट और सही अर्थ नहीं बनता है, जिससे यह शब्द अशुद्ध हो जाता है।
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गत्यवरोध: यह शब्द शुद्ध है। "गति" का अर्थ है "चलना" और "अवरोध" का अर्थ है "रुकावट"। इस प्रकार "गत्यवरोध" का अर्थ होता है "गति में रुकावट" या "आवागमन में बाधा", जो एक सही और अर्थपूर्ण शब्द है।
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प्रोज्ज्वल: यह शब्द भी शुद्ध है। "प्र" उपसर्ग का अर्थ है "अधिक" और "उज्ज्वल" का अर्थ है "चमकदार"। इस प्रकार "प्रोज्ज्वल" का अर्थ होता है "अत्यधिक चमकदार", जो एक सही और अर्थपूर्ण शब्द है।
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प्रज्वलित: यह शब्द भी शुद्ध है। "प्र" उपसर्ग का अर्थ है "अधिक" और "ज्वलित" का अर्थ है "जलना"। इस प्रकार "प्रज्वलित" का अर्थ होता है "अत्यधिक जलना" या "प्रज्वलित होना", जो एक सही और अर्थपूर्ण शब्द है।
इस प्रकार, "भवनिष्ठ" शब्द अशुद्ध है और इसलिए विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 217
किस विकल्प में 'आ' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 3 'आख्यायिका' में 'आ' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। 'आ' उपसर्ग का प्रयोग संस्कृत में किसी शब्द के आरंभ में होता है और यह शब्द के अर्थ में विशेषता या विस्तार जोड़ता है। 'आख्यायिका' शब्द में 'आ' उपसर्ग 'ख्यायिका' के पहले जुड़कर इसे एक विशेष अर्थ प्रदान करता है, जो कि एक प्रकार की कथा या कहानी को दर्शाता है।
अब अन्य विकल्पों की चर्चा करते हैं:
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आत्यन्तिक: इस शब्द में 'आ' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है। यह शब्द 'अत्यन्त' से बना है, जिसमें 'अति' उपसर्ग का प्रयोग होता है, जो 'अत्यधिक' या 'बहुत अधिक' के अर्थ में आता है।
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आतिथ्य: इस शब्द में 'आ' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है। 'आतिथ्य' शब्द 'अतिथि' से बना है, जो 'अतिथि' के स्वागत और सत्कार को दर्शाता है। इसमें 'आ' उपसर्ग का कोई योगदान नहीं है।
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आधिपत्य: इस शब्द में भी 'आ' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है। 'आधिपत्य' शब्द 'अधिपति' से बना है, जिसमें 'अधि' उपसर्ग का प्रयोग होता है, जो 'ऊपर' या 'सर्वोच्च' के अर्थ में आता है।
इस प्रकार, केवल 'आख्यायिका' शब्द में ही 'आ' उपसर्ग का सही प्रयोग हुआ है, जो इसे सही उत्तर बनाता है।
प्रश्न 218
प्रत्यय की दृष्टि से असंगत विकल्प बताइए :
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उत्तर और व्याख्या
प्रत्यय की दृष्टि से असंगत विकल्प को पहचानने के लिए हमें यह समझना होगा कि प्रत्यय का सही प्रयोग कैसे होता है। दिए गए विकल्पों में प्रत्यय का प्रयोग किया गया है, और हमें यह देखना है कि किस विकल्प में प्रत्यय का प्रयोग असंगत है।
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विचारण + ईय = विचारणीय: यहाँ पर 'ईय' प्रत्यय का प्रयोग किया गया है। 'विचारण' शब्द में 'ईय' प्रत्यय जोड़ने पर 'विचारणीय' बनता है, जो कि सही शब्द है। लेकिन यहाँ पर प्रत्यय का प्रयोग असंगत है क्योंकि 'विचारणीय' का अर्थ होता है 'विचार करने योग्य', जबकि 'विचारण' का अर्थ होता है 'विचार करने की क्रिया'। इस प्रकार, प्रत्यय का प्रयोग यहाँ सही नहीं बैठता।
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दृश् + तव्य = द्रष्टव्य: यहाँ पर 'तव्य' प्रत्यय का प्रयोग किया गया है। 'दृश्' में 'तव्य' जोड़ने पर 'द्रष्टव्य' बनता है, जिसका अर्थ होता है 'देखने योग्य'। यह प्रत्यय का सही प्रयोग है और शब्द का अर्थ भी सही है।
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वृष्णि + एय = वार्ष्णेय: यहाँ पर 'एय' प्रत्यय का प्रयोग किया गया है। 'वृष्णि' में 'एय' जोड़ने पर 'वार्ष्णेय' बनता है, जो कि वृष्णि वंश से संबंधित है। यह प्रत्यय का सही प्रयोग है।
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वल्मीक + इ = वाल्मीकि: यहाँ पर 'इ' प्रत्यय का प्रयोग किया गया है। 'वल्मीक' में 'इ' जोड़ने पर 'वाल्मीकि' बनता है, जो कि सही शब्द है और इसका अर्थ भी सही है।
इस प्रकार, प्रत्यय की दृष्टि से असंगत विकल्प 'विचारण + ईय = विचारणीय' है, क्योंकि यहाँ प्रत्यय का प्रयोग सही अर्थ नहीं देता। इसलिए, सही उत्तर विकल्प 1 है।
प्रश्न 219
धातु को छोड़कर अन्य पदों यथा - संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, अव्यय में प्रत्यय जोड़कर, जो क्रियारूप बनाए जाते हैं; उन्हें कहते हैं -
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उत्तर और व्याख्या
धातु को छोड़कर अन्य पदों यथा - संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, अव्यय में प्रत्यय जोड़कर, जो क्रियारूप बनाए जाते हैं; उन्हें "नामधातु क्रिया" कहते हैं।
विस्तृत व्याख्या:
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नामधातु क्रिया (Option 4):
- नामधातु क्रिया वह क्रिया होती है जो संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, या अव्यय में प्रत्यय जोड़कर बनाई जाती है। यह प्रक्रिया भाषा में नए क्रियारूपों के निर्माण के लिए होती है। उदाहरण के लिए, 'खेल' (संज्ञा) से 'खेलना' (क्रिया) बनाना। इस प्रकार के क्रियारूपों का निर्माण भाषा में अधिक अभिव्यक्ति और विविधता लाने के लिए किया जाता है।
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अन्य विकल्पों की अस्वीकृति:
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प्रेरणार्थक क्रिया (Option 1):
- प्रेरणार्थक क्रिया वह होती है जो किसी अन्य व्यक्ति को क्रिया करने के लिए प्रेरित करती है। यह मुख्यतः क्रिया के प्रकार को दर्शाती है, न कि संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, या अव्यय से क्रियारूप बनाने की प्रक्रिया को।
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सहायक क्रिया (Option 2):
- सहायक क्रिया मुख्य क्रिया के साथ मिलकर वाक्य में समय, काल, या अन्य व्याकरणिक विशेषताओं को दर्शाती है। यह मुख्य क्रिया के साथ जुड़कर उसके अर्थ को स्पष्ट करती है, लेकिन यह नामधातु क्रिया के निर्माण से संबंधित नहीं है।
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संयोजी क्रिया (Option 3):
- संयोजी क्रिया का प्रयोग वाक्य में दो या अधिक क्रियाओं को जोड़ने के लिए किया जाता है। यह भी नामधातु क्रिया के निर्माण से संबंधित नहीं है, क्योंकि यह क्रिया के संयोजन से संबंधित है, न कि संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, या अव्यय से क्रियारूप बनाने से।
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इस प्रकार, दिए गए प्रश्न के संदर्भ में, "नामधातु क्रिया" (Option 4) सही उत्तर है क्योंकि यह संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, या अव्यय में प्रत्यय जोड़कर क्रियारूप बनाने की प्रक्रिया को सही रूप से परिभाषित करता है।
प्रश्न 220
विलोम की दृष्टि से बेमेल को छाँटिए :
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उत्तर और व्याख्या
विलोम शब्दों का अर्थ होता है विपरीत अर्थ वाले शब्द। दिए गए विकल्पों में से हमें उस जोड़ी को छाँटना है जो विलोम की दृष्टि से बेमेल है।
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आर्य-अनार्य: 'आर्य' का अर्थ होता है सभ्य या श्रेष्ठ, जबकि 'अनार्य' का अर्थ होता है असभ्य या निम्न। ये दोनों शब्द विलोम शब्द हैं।
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उर्वर-अनुर्वर: 'उर्वर' का अर्थ होता है उपजाऊ, जबकि 'अनुर्वर' का अर्थ होता है अनुपजाऊ। ये दोनों शब्द भी विलोम शब्द हैं।
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ऐच्छिक-अनिवार्य: 'ऐच्छिक' का अर्थ होता है जो इच्छा पर निर्भर हो, जबकि 'अनिवार्य' का अर्थ होता है जो आवश्यक हो। ये दोनों भी विलोम शब्द हैं।
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खल-दुर्जन: 'खल' और 'दुर्जन' दोनों का अर्थ होता है बुरा या दुष्ट व्यक्ति। ये दोनों शब्द समानार्थी हैं, न कि विलोम। इसलिए, यह जोड़ी विलोम की दृष्टि से बेमेल है।
इस प्रकार, विकल्प 4 'खल-दुर्जन' विलोम की दृष्टि से बेमेल है, क्योंकि ये समानार्थी शब्द हैं, जबकि अन्य विकल्पों में दिए गए शब्द विलोम शब्द हैं।