HTET परीक्षा Level 2 TGT
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 2 TGT की तैयारी
सत्यापित उत्तर और व्याख्याएँ
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 201
निम्नलिखित में से कंठोष्ठ्य ध्वनि है –
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
कंठोष्ठ्य ध्वनि का अर्थ है वह ध्वनि जो कंठ और ओष्ठ (होंठ) दोनों के संयोग से उत्पन्न होती है। हिंदी भाषा में स्वर ध्वनियों को उनके उच्चारण स्थान के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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अ: यह ध्वनि कंठ्य स्वर है, जो केवल कंठ से उत्पन्न होती है। इसमें ओष्ठ का कोई योगदान नहीं होता है।
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इ: यह ध्वनि तालव्य स्वर है, जो तालु से उत्पन्न होती है। इसमें भी ओष्ठ का कोई योगदान नहीं होता है।
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ऊ: यह ध्वनि ओष्ठ्य स्वर है, जो ओष्ठ से उत्पन्न होती है। हालांकि, यह कंठोष्ठ्य नहीं है क्योंकि इसमें कंठ का योगदान नहीं होता है।
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ओ: यह ध्वनि कंठोष्ठ्य स्वर है। इसका उच्चारण कंठ और ओष्ठ दोनों के संयोग से होता है। जब हम 'ओ' का उच्चारण करते हैं, तो कंठ से ध्वनि निकलती है और ओष्ठ गोलाकार होकर ध्वनि को आकार देते हैं। इस प्रकार, 'ओ' ध्वनि कंठ और ओष्ठ दोनों के संयोग से उत्पन्न होती है, इसलिए यह कंठोष्ठ्य ध्वनि है।
इस प्रकार, दिए गए विकल्पों में से 'ओ' (विकल्प 4) ही सही उत्तर है क्योंकि यह कंठोष्ठ्य ध्वनि का उदाहरण है।
प्रश्न 202
निम्नलिखित में से देवनागरी लिपि की विशेषता नहीं है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
देवनागरी लिपि की विशेषता नहीं है: मात्राओं के प्रयोग में एकरूपता (विकल्प 3)
विस्तृत व्याख्या:
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मात्राओं के प्रयोग में एकरूपता (विकल्प 3):
- देवनागरी लिपि में मात्राओं के प्रयोग में एकरूपता नहीं होती है। विभिन्न भाषाओं में देवनागरी लिपि का प्रयोग होता है, जैसे हिंदी, मराठी, संस्कृत आदि, और इन भाषाओं में मात्राओं का प्रयोग भिन्न-भिन्न तरीकों से किया जाता है। उदाहरण के लिए, कुछ भाषाओं में दीर्घ और ह्रस्व मात्राओं का भिन्न प्रयोग होता है, जिससे एकरूपता की कमी होती है। इस कारण, यह विकल्प देवनागरी लिपि की विशेषता नहीं है।
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स्वरों और व्यंजनों का वैज्ञानिक क्रम (विकल्प 1):
- देवनागरी लिपि में स्वरों और व्यंजनों का क्रम वैज्ञानिक रूप से व्यवस्थित है। स्वर और व्यंजन ध्वनियों के आधार पर क्रमबद्ध होते हैं, जो कि ध्वन्यात्मक विज्ञान के सिद्धांतों के अनुसार होता है। यह लिपि की एक प्रमुख विशेषता है।
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प्रत्येक ध्वनि के लिए अलग चिह्न (विकल्प 2):
- देवनागरी लिपि में प्रत्येक ध्वनि के लिए एक विशिष्ट चिह्न होता है। यह लिपि ध्वन्यात्मक है, जिसका अर्थ है कि प्रत्येक ध्वनि का एक निश्चित और अलग चिह्न होता है, जो इसे अन्य लिपियों से अलग बनाता है।
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सुंदर और सुगठित लिखावट (विकल्प 4):
- देवनागरी लिपि की लिखावट सुंदर और सुगठित मानी जाती है। इसकी संरचना और आकार इसे पढ़ने और लिखने में सुगम बनाते हैं। यह लिपि की एक विशेषता है।
इस प्रकार, विकल्प 3 सही उत्तर है क्योंकि देवनागरी लिपि में मात्राओं के प्रयोग में एकरूपता की कमी होती है, जबकि अन्य विकल्प लिपि की विशेषताएँ हैं।
प्रश्न 203
निम्नलिखित में से स्पर्श संघर्षी महाप्राण व्यंजन है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
स्पर्श संघर्षी महाप्राण व्यंजन का अर्थ है वह व्यंजन जो उच्चारण के समय स्पर्श के साथ संघर्ष उत्पन्न करता है और महाप्राण होता है। हिंदी भाषा में व्यंजन ध्वनियों को उनके उच्चारण के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
- स्पर्श व्यंजन: ये वे व्यंजन होते हैं जिनका उच्चारण करते समय मुख के किसी भाग से स्पर्श होता है।
- संघर्षी व्यंजन: ये वे व्यंजन होते हैं जिनका उच्चारण करते समय वायु का संघर्ष होता है।
- महाप्राण व्यंजन: ये वे व्यंजन होते हैं जिनका उच्चारण करते समय अधिक मात्रा में वायु बाहर निकलती है।
अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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च्: यह एक अल्पप्राण व्यंजन है और इसका उच्चारण करते समय अधिक वायु नहीं निकलती है। यह स्पर्श संघर्षी नहीं है।
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ज्: यह भी एक अल्पप्राण व्यंजन है और इसका उच्चारण करते समय अधिक वायु नहीं निकलती है। यह भी स्पर्श संघर्षी नहीं है।
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छ्: यह एक महाप्राण व्यंजन है और इसका उच्चारण करते समय अधिक वायु बाहर निकलती है। यह स्पर्श संघर्षी महाप्राण व्यंजन है, क्योंकि इसका उच्चारण करते समय स्पर्श और संघर्ष दोनों होते हैं।
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ठ्: यह भी एक महाप्राण व्यंजन है, लेकिन इसका उच्चारण करते समय संघर्ष नहीं होता है जैसा कि 'छ्' में होता है।
इस प्रकार, 'छ्' स्पर्श संघर्षी महाप्राण व्यंजन है, और इसलिए विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 204
संधि विच्छेद की दृष्टि से असंगत चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
संधि विच्छेद की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनने के लिए हमें यह देखना होता है कि दिए गए शब्दों का संधि विच्छेद सही तरीके से किया गया है या नहीं।
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फणि + इन्द्र = फणीन्द्र: यह विकल्प असंगत है क्योंकि "फणीन्द्र" शब्द का सही संधि विच्छेद "फणि + इन्द्र" नहीं होता। इस शब्द में 'फणि' और 'इन्द्र' के बीच में 'ई' की मात्रा का प्रयोग नहीं होता है। इसलिए यह विकल्प सही उत्तर है।
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सुधी + इन्द्र = सुधीन्द्र: यह विकल्प संगत है क्योंकि "सुधीन्द्र" का संधि विच्छेद "सुधी + इन्द्र" सही है। 'सुधी' और 'इन्द्र' के बीच में 'ई' की मात्रा का सही प्रयोग होता है।
-
अभि + इष्ट = अभीष्ट: यह विकल्प भी संगत है क्योंकि "अभीष्ट" का संधि विच्छेद "अभि + इष्ट" सही है। 'अभि' और 'इष्ट' के बीच में 'ई' की मात्रा का सही प्रयोग होता है।
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रजनी + ईश = रजनीश: यह विकल्प भी संगत है क्योंकि "रजनीश" का संधि विच्छेद "रजनी + ईश" सही है। 'रजनी' और 'ईश' के बीच में 'ई' की मात्रा का सही प्रयोग होता है।
इस प्रकार, केवल विकल्प 1 "फणि + इन्द्र = फणीन्द्र" असंगत है क्योंकि इसका संधि विच्छेद सही नहीं है। यही कारण है कि विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 205
सुमेलित कीजिए :
(क) महौदार्य – (i) गुण संधि
(ख) प्रत्युपकार – (ii) दीर्घ संधि
(ग) समुद्रोर्मि – (iii) वृद्धि संधि
(घ) महीन्द्र – (iv) यण् संधि
कूट :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सही उत्तर विकल्प 2 है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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महौदार्य – वृद्धि संधि (iii):
'महौदार्य' शब्द में 'महा' और 'उदार्य' का संधि है। 'महा' में 'अ' और 'उदार्य' में 'उ' के मिलने से 'औ' की ध्वनि बनती है, जो वृद्धि संधि का उदाहरण है। -
प्रत्युपकार – यण् संधि (iv):
'प्रत्युपकार' शब्द में 'प्रति' और 'उपकार' का संधि है। 'प्रति' में 'इ' और 'उपकार' में 'उ' के मिलने से 'यण्' ध्वनि बनती है, जो यण् संधि का उदाहरण है। -
समुद्रोर्मि – गुण संधि (i):
'समुद्रोर्मि' शब्द में 'समुद्र' और 'उर्मि' का संधि है। 'समुद्र' में 'अ' और 'उर्मि' में 'उ' के मिलने से 'ओ' की ध्वनि बनती है, जो गुण संधि का उदाहरण है। -
महीन्द्र – दीर्घ संधि (ii):
'महीन्द्र' शब्द में 'मही' और 'इन्द्र' का संधि है। 'मही' में 'ई' और 'इन्द्र' में 'इ' के मिलने से 'ई' की ध्वनि बनती है, जो दीर्घ संधि का उदाहरण है।
अब देखते हैं कि अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
- विकल्प 1: इसमें 'महौदार्य' को यण् संधि से जोड़ा गया है, जो गलत है।
- विकल्प 3: इसमें 'समुद्रोर्मि' को दीर्घ संधि से जोड़ा गया है, जो गलत है।
- विकल्प 4: इसमें 'महौदार्य' को गुण संधि से जोड़ा गया है, जो गलत है।
इस प्रकार, विकल्प 2 सही है क्योंकि यह सभी संधियों को सही प्रकार से जोड़ता है।
प्रश्न 206
किस शब्द में व्यंजन सन्धि का प्रयोग हुआ है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
व्यंजन सन्धि का प्रयोग तब होता है जब दो शब्दों के मिलने पर व्यंजन ध्वनियों में परिवर्तन होता है। इस प्रश्न में हमें यह देखना है कि किस शब्द में व्यंजन सन्धि का प्रयोग हुआ है।
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वागीश्वर: इस शब्द में "वाक्" और "ईश्वर" के मिलने से "वागीश्वर" बना है। यहाँ पर "क्" और "ई" के मिलने से "ग" का प्रयोग हुआ है, जो व्यंजन सन्धि का उदाहरण है। इसलिए, यह विकल्प सही है।
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धातूष्मा: इस शब्द में "धातु" और "उष्मा" के मिलने से "धातूष्मा" बना है। यहाँ पर कोई व्यंजन सन्धि नहीं है, बल्कि स्वर सन्धि का प्रयोग हुआ है।
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अधमर्ण: इस शब्द में "अध" और "मर्ण" के मिलने से "अधमर्ण" बना है। यहाँ पर कोई सन्धि नहीं है, क्योंकि दोनों शब्द अपने मूल रूप में ही जुड़े हैं।
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पूर्णोपमा: इस शब्द में "पूर्ण" और "उपमा" के मिलने से "पूर्णोपमा" बना है। यहाँ पर स्वर सन्धि का प्रयोग हुआ है, न कि व्यंजन सन्धि का।
इस प्रकार, "वागीश्वर" में व्यंजन सन्धि का प्रयोग हुआ है, जो इसे सही उत्तर बनाता है। अन्य विकल्पों में व्यंजन सन्धि का प्रयोग नहीं हुआ है।
प्रश्न 207
निम्नलिखित में से पश्चिमी हिंदी की बोली नहीं है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
निम्नलिखित में से पश्चिमी हिंदी की बोली नहीं है : मगही
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मगही (Option 3): मगही भाषा बिहार और झारखंड के कुछ हिस्सों में बोली जाती है और यह पूर्वी हिंदी भाषा समूह का हिस्सा है। यह मुख्य रूप से मगध क्षेत्र में प्रचलित है और इसका पश्चिमी हिंदी से कोई संबंध नहीं है। इसलिए, मगही पश्चिमी हिंदी की बोली नहीं है, और यही कारण है कि यह सही उत्तर है।
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ब्रजभाषा (Option 1): ब्रजभाषा पश्चिमी हिंदी की एक प्रमुख बोली है। यह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में बोली जाती है और हिंदी साहित्य में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। इसलिए, यह पश्चिमी हिंदी की बोली है और विकल्प 3 के विपरीत, यह सही उत्तर नहीं हो सकती।
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खड़ी बोली (Option 2): खड़ी बोली भी पश्चिमी हिंदी की एक प्रमुख बोली है। यह आधुनिक मानक हिंदी का आधार है और उत्तर भारत में व्यापक रूप से बोली जाती है। इसलिए, यह भी पश्चिमी हिंदी की बोली है और विकल्प 3 के विपरीत, यह सही उत्तर नहीं हो सकती।
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बुन्देली (Option 4): बुन्देली भी पश्चिमी हिंदी की एक बोली है। यह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बोली जाती है। इसलिए, यह भी पश्चिमी हिंदी की बोली है और विकल्प 3 के विपरीत, यह सही उत्तर नहीं हो सकती।
इस प्रकार, मगही पश्चिमी हिंदी की बोली नहीं है, और यही कारण है कि विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 208
सुमेलित कीजिए :
तत्सम – तद्भव
(क) पौष – (i) सींग
(ख) शृंग – (ii) बयार
(ग) वायु – (iii) फरसा
(घ) परशु – (iv) पूस
कूट :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सुमेलित प्रश्न में तत्सम और तद्भव शब्दों का मिलान करना है। तत्सम शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से सीधे लिए गए हैं और तद्भव शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से विकसित होकर हिंदी में आए हैं।
अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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(क) पौष – (iv) पूस: 'पौष' एक संस्कृत शब्द है और इसका तद्भव रूप 'पूस' है। अतः यह मिलान सही है।
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(ख) शृंग – (i) सींग: 'शृंग' संस्कृत का शब्द है और इसका तद्भव रूप 'सींग' है। यह मिलान भी सही है।
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(ग) वायु – (ii) बयार: 'वायु' संस्कृत का शब्द है और इसका तद्भव रूप 'बयार' है। यह मिलान सही है।
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(घ) परशु – (iii) फरसा: 'परशु' संस्कृत का शब्द है और इसका तद्भव रूप 'फरसा' है। यह मिलान भी सही है।
इस प्रकार, विकल्प 4 सही है क्योंकि यह सभी तत्सम-तद्भव शब्दों का सही मिलान प्रस्तुत करता है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
-
विकल्प 1: इसमें (ग) वायु – (iv) पूस और (घ) परशु – (ii) बयार का मिलान गलत है।
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विकल्प 2: इसमें (क) पौष – (i) सींग और (ख) शृंग – (iv) पूस का मिलान गलत है।
-
विकल्प 3: इसमें (ग) वायु – (iii) फरसा और (घ) परशु – (ii) बयार का मिलान गलत है।
इसलिए, विकल्प 4 ही सही उत्तर है क्योंकि यह सभी तत्सम-तद्भव शब्दों का सही मिलान प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 209
सुमेलित कीजिए :
(क) चंद छंद बरनन की महिमा – (i) रामप्रसाद 'निरंजनी'
(ख) भाषा योग वासिष्ठ – (ii) पं० दौलतराम
(ग) श्री पद्म पुराण जी भाषा-वचनिका – (iii) पं० सदल मिश्र
(घ) नासिकेतोपाख्यान – (iv) गंग कवि
कूट :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सही उत्तर विकल्प 1 है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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(क) चंद छंद बरनन की महिमा – (iii) पं० सदल मिश्र: चंद छंद बरनन की महिमा का रचनाकार पं० सदल मिश्र हैं। यह रचना उनके द्वारा लिखी गई है, जो उनके साहित्यिक योगदान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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(ख) भाषा योग वासिष्ठ – (iv) गंग कवि: भाषा योग वासिष्ठ का रचनाकार गंग कवि हैं। यह रचना उनके द्वारा लिखी गई है और यह उनके साहित्यिक कार्यों में शामिल है।
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(ग) श्री पद्म पुराण जी भाषा-वचनिका – (i) रामप्रसाद 'निरंजनी': श्री पद्म पुराण जी भाषा-वचनिका का रचनाकार रामप्रसाद 'निरंजनी' हैं। यह रचना उनके द्वारा लिखी गई है और उनके साहित्यिक योगदान का हिस्सा है।
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(घ) नासिकेतोपाख्यान – (ii) पं० दौलतराम: नासिकेतोपाख्यान का रचनाकार पं० दौलतराम हैं। यह रचना उनके द्वारा लिखी गई है और उनके साहित्यिक कार्यों में शामिल है।
अब, आइए समझते हैं कि अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
- विकल्प 2: इसमें (क) और (ख) के रचनाकार गलत रूप से अदल-बदल दिए गए हैं।
- विकल्प 3: इसमें (क) और (ख) के रचनाकार गलत रूप से अदल-बदल दिए गए हैं।
- विकल्प 4: इसमें (क) और (ग) के रचनाकार गलत रूप से अदल-बदल दिए गए हैं।
इस प्रकार, विकल्प 1 सही है क्योंकि यह सभी रचनाओं को उनके सही रचनाकारों के साथ सही ढंग से मिलाता है।
प्रश्न 210
किस विकल्प में नित्य पुंल्लिंग संज्ञा है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विकल्प 1, "खरगोश," नित्य पुंल्लिंग संज्ञा है। इसका अर्थ है कि यह संज्ञा हमेशा पुंल्लिंग में ही प्रयुक्त होती है और इसका लिंग परिवर्तन नहीं होता।
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खरगोश (Option 1):
- "खरगोश" एक ऐसा शब्द है जो हमेशा पुंल्लिंग में ही प्रयोग किया जाता है। यह एक जानवर का नाम है और इसका लिंग परिवर्तन नहीं होता। इसलिए, यह नित्य पुंल्लिंग संज्ञा का सही उदाहरण है।
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गिलहरी (Option 2):
- "गिलहरी" स्त्रीलिंग संज्ञा है। यह शब्द आमतौर पर स्त्रीलिंग में ही प्रयोग होता है और इसका लिंग परिवर्तन हो सकता है। इसलिए, यह नित्य पुंल्लिंग संज्ञा नहीं है।
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बटेर (Option 3):
- "बटेर" एक पक्षी का नाम है और यह शब्द सामान्यतः उभयलिंगी संज्ञा के रूप में प्रयोग होता है। इसका लिंग परिवर्तन हो सकता है, इसलिए यह नित्य पुंल्लिंग संज्ञा नहीं है।
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कोयल (Option 4):
- "कोयल" भी एक पक्षी का नाम है और यह शब्द स्त्रीलिंग में प्रयोग होता है। इसका लिंग परिवर्तन हो सकता है, इसलिए यह नित्य पुंल्लिंग संज्ञा नहीं है।
इस प्रकार, "खरगोश" ही एकमात्र ऐसा विकल्प है जो नित्य पुंल्लिंग संज्ञा के रूप में सही है।
प्रश्न 211
अनिश्चयवाचक सर्वनाम वाला वाक्य चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वाक्य "दाल में कुछ काला है।" अनिश्चयवाचक सर्वनाम का उदाहरण है। अनिश्चयवाचक सर्वनाम वे होते हैं जो किसी अनिश्चित या अस्पष्ट वस्तु, व्यक्ति या स्थिति का संकेत देते हैं। इस वाक्य में "कुछ" शब्द का प्रयोग किया गया है, जो यह स्पष्ट नहीं करता कि दाल में क्या काला है, केवल यह संकेत देता है कि कुछ तो गड़बड़ है। इस प्रकार, यह वाक्य अनिश्चितता को व्यक्त करता है और इसलिए यह अनिश्चयवाचक सर्वनाम का सही उदाहरण है।
अब अन्य विकल्पों की चर्चा करते हैं:
-
"मैं कुछ पुस्तकें लाया हूँ, इन्हें तुम रख लो।" - इस वाक्य में "कुछ" शब्द का प्रयोग किया गया है, लेकिन यह अनिश्चितता को नहीं दर्शाता। यहाँ "कुछ पुस्तकें" का अर्थ है कि कुछ निश्चित संख्या में पुस्तकें लाई गई हैं, लेकिन यह संख्या स्पष्ट नहीं है। यह वाक्य अनिश्चयवाचक सर्वनाम का उदाहरण नहीं है।
-
"केवल वही तुम्हारी प्रशंसा कर सकता है।" - इस वाक्य में कोई अनिश्चयवाचक सर्वनाम नहीं है। यह वाक्य स्पष्ट रूप से एक निश्चित व्यक्ति की ओर इशारा करता है जो प्रशंसा कर सकता है।
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"वह चाहता है कि तुम सदैव आगे बढ़ो।" - इस वाक्य में भी कोई अनिश्चयवाचक सर्वनाम नहीं है। यह वाक्य एक निश्चित इच्छा को व्यक्त करता है।
इस प्रकार, केवल विकल्प 2 ही अनिश्चयवाचक सर्वनाम का सही उदाहरण है।
प्रश्न 212
निम्नलिखित में से किस वाक्य में अनिश्चयवाचक सर्वनाम नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विकल्प 2 सही उत्तर है क्योंकि इस वाक्य में कोई अनिश्चयवाचक सर्वनाम नहीं है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
-
विकल्प 1: कोई-न-कोई तो मेरी बात सुनेगा।
- इस वाक्य में "कोई-न-कोई" एक अनिश्चयवाचक सर्वनाम है, जो किसी अनिश्चित व्यक्ति की ओर इशारा करता है जो वक्ता की बात सुनेगा।
-
विकल्प 2: सब लोगों ने एक-दूसरे को अपने-अपने पते दिए।
- इस वाक्य में "सब लोगों" और "एक-दूसरे" का प्रयोग किया गया है, जो निश्चितता को दर्शाते हैं। यहां कोई अनिश्चितता नहीं है, क्योंकि यह स्पष्ट है कि सभी लोग एक-दूसरे को पते दे रहे हैं। इसलिए, इस वाक्य में अनिश्चयवाचक सर्वनाम का प्रयोग नहीं हुआ है।
-
विकल्प 3: किसी ने पत्थर मार दिया।
- इस वाक्य में "किसी" एक अनिश्चयवाचक सर्वनाम है, जो किसी अनिश्चित व्यक्ति की ओर इशारा करता है जिसने पत्थर मारा।
-
विकल्प 4: हमने भारत में रहकर बहुत कुछ सीखा।
- इस वाक्य में "बहुत कुछ" एक अनिश्चित मात्रा को दर्शाता है, जो अनिश्चयवाचक सर्वनाम के रूप में कार्य करता है।
इस प्रकार, विकल्प 2 में कोई अनिश्चयवाचक सर्वनाम नहीं है, और यही कारण है कि यह सही उत्तर है।
प्रश्न 213
नामधातु क्रिया नहीं है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: नामधातु क्रिया नहीं है :
सही उत्तर: विकल्प 2 (सजाना)
व्याख्या:
-
सजाना: यह विकल्प सही उत्तर है क्योंकि "सजाना" एक ऐसी क्रिया है जो किसी वस्तु या स्थान को सुंदर बनाने के कार्य को दर्शाती है। यह क्रिया किसी विशेष नामधातु से नहीं जुड़ी होती है। "सजाना" का अर्थ है किसी चीज़ को सजाना या अलंकृत करना, जो कि एक सामान्य क्रिया है और इसे नामधातु के रूप में नहीं देखा जाता।
-
लतियाना: यह एक नामधातु क्रिया है। "लतियाना" का अर्थ है किसी को लात मारना। यह क्रिया किसी विशेष क्रिया को दर्शाती है और इसे नामधातु के रूप में देखा जा सकता है।
-
झुठलाना: यह भी एक नामधातु क्रिया है। "झुठलाना" का अर्थ है किसी बात को झूठा साबित करना या अस्वीकार करना। यह क्रिया भी एक विशेष कार्य को दर्शाती है और इसे नामधातु के रूप में देखा जा सकता है।
-
गलियाना: यह भी एक नामधातु क्रिया है। "गलियाना" का अर्थ है किसी को गाली देना। यह क्रिया भी एक विशेष कार्य को दर्शाती है और इसे नामधातु के रूप में देखा जा सकता है।
इस प्रकार, "सजाना" एक सामान्य क्रिया है और इसे नामधातु के रूप में नहीं देखा जाता, जबकि अन्य विकल्प विशेष कार्यों को दर्शाते हैं और नामधातु क्रियाओं के रूप में माने जा सकते हैं। इसलिए, सही उत्तर विकल्प 2 "सजाना" है।
प्रश्न 214
"टहलना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।"वाक्य में प्रयुक्त क्रिया है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वाक्य "टहलना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।" में प्रयुक्त क्रिया "टहलना" है। इस वाक्य में "टहलना" एक क्रियार्थक संज्ञा है।
विस्तृत व्याख्या:
-
क्रियार्थक संज्ञा (Option 4):
- "टहलना" शब्द यहाँ एक क्रियार्थक संज्ञा के रूप में प्रयुक्त हुआ है। क्रियार्थक संज्ञा वह होती है जो क्रिया के नाम को दर्शाती है। इस वाक्य में "टहलना" क्रिया का नाम है, जो एक गतिविधि को दर्शाता है। यह बताता है कि टहलने की क्रिया स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। इसलिए, यह क्रियार्थक संज्ञा के रूप में सही है।
-
अन्य विकल्पों की गलतियाँ:
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प्रेरणार्थक क्रिया (Option 1):
- प्रेरणार्थक क्रिया वह होती है जो किसी को प्रेरित करने या किसी कार्य को करने के लिए प्रेरित करती है। उदाहरण के लिए, "करवाना" या "सिखाना"। "टहलना" इस प्रकार की क्रिया नहीं है, क्योंकि यह किसी को प्रेरित करने की क्रिया नहीं दर्शाता।
-
संयुक्त क्रिया (Option 2):
- संयुक्त क्रिया वह होती है जिसमें दो क्रियाएँ मिलकर एक क्रिया का अर्थ देती हैं। उदाहरण के लिए, "देख लेना"। "टहलना" एक अकेली क्रिया है और इसमें कोई अन्य क्रिया नहीं जुड़ी है, इसलिए यह संयुक्त क्रिया नहीं है।
-
रंजक क्रिया (Option 3):
- रंजक क्रिया वह होती है जो किसी क्रिया के होने की स्थिति को दर्शाती है। उदाहरण के लिए, "खिलखिलाना"। "टहलना" इस प्रकार की क्रिया नहीं है, क्योंकि यह किसी स्थिति को नहीं दर्शाता।
-
इस प्रकार, "टहलना" को क्रियार्थक संज्ञा के रूप में सही रूप से पहचाना गया है, और यही कारण है कि Option 4 सही उत्तर है।
प्रश्न 215
सुमेलित कीजिए :
(क) स्थित्यर्थक पूर्ण अकर्मक क्रिया – (i) लड़का पुस्तक पढ़ता है।
(ख) गत्यर्थक पूर्ण अकर्मक क्रिया – (ii) रामू सो रहा है।
(ग) एककर्मक क्रिया – (iii) माँ बच्चे को फल देती है।
(घ) द्विकर्मक क्रिया – (iv) लड़का तालाब में तैर रहा है।
कूट :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सही उत्तर विकल्प 3 है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
-
(क) स्थित्यर्थक पूर्ण अकर्मक क्रिया – (ii) रामू सो रहा है।
- स्थित्यर्थक पूर्ण अकर्मक क्रिया वह क्रिया होती है जो किसी स्थिति या अवस्था को दर्शाती है और जिसका कोई कर्म नहीं होता। "रामू सो रहा है" एक ऐसी क्रिया है जो रामू की स्थिति को दर्शाती है और इसमें कोई कर्म नहीं है।
-
(ख) गत्यर्थक पूर्ण अकर्मक क्रिया – (iv) लड़का तालाब में तैर रहा है।
- गत्यर्थक पूर्ण अकर्मक क्रिया वह क्रिया होती है जो गति को दर्शाती है और जिसका कोई कर्म नहीं होता। "लड़का तालाब में तैर रहा है" एक ऐसी क्रिया है जो लड़के की गति को दर्शाती है और इसमें कोई कर्म नहीं है।
-
(ग) एककर्मक क्रिया – (i) लड़का पुस्तक पढ़ता है।
- एककर्मक क्रिया वह क्रिया होती है जिसमें एक ही कर्म होता है। "लड़का पुस्तक पढ़ता है" में "पुस्तक" एक कर्म है, जो पढ़ने की क्रिया का लक्ष्य है।
-
(घ) द्विकर्मक क्रिया – (iii) माँ बच्चे को फल देती है।
- द्विकर्मक क्रिया वह क्रिया होती है जिसमें दो कर्म होते हैं। "माँ बच्चे को फल देती है" में "बच्चे को" और "फल" दोनों ही कर्म हैं, जो देने की क्रिया के लक्ष्य हैं।
अब, अन्य विकल्पों के गलत होने का कारण:
- विकल्प 1: इसमें (क) और (ख) के लिए गलत मिलान किया गया है।
- विकल्प 2: इसमें (क) और (घ) के लिए गलत मिलान किया गया है।
- विकल्प 4: इसमें (ग) और (घ) के लिए गलत मिलान किया गया है।
इस प्रकार, विकल्प 3 सही है क्योंकि यह सभी क्रियाओं का सही मिलान प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 216
सुमेलित कीजिए :
(क) अशिष्ट – (i) दशाबोधक गुणवाचक विशेषण
(ख) राजस्थानी – (ii) कालबोधक गुणवाचक विशेषण
(ग) अस्वस्थ – (iii) दोषबोधक गुणवाचक विशेषण
(घ) प्राचीन – (iv) स्थानबोधक गुणवाचक विशेषण
कूट :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सही उत्तर विकल्प 4 है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
-
अशिष्ट – दोषबोधक गुणवाचक विशेषण (iii):
"अशिष्ट" का अर्थ होता है "असभ्य" या "अशालीन", जो किसी व्यक्ति के व्यवहार में दोष को दर्शाता है। इसलिए यह दोषबोधक गुणवाचक विशेषण है। -
राजस्थानी – स्थानबोधक गुणवाचक विशेषण (iv):
"राजस्थानी" शब्द राजस्थान राज्य से संबंधित है, जो स्थान को दर्शाता है। इसलिए यह स्थानबोधक गुणवाचक विशेषण है। -
अस्वस्थ – दशाबोधक गुणवाचक विशेषण (i):
"अस्वस्थ" का अर्थ होता है "बीमार" या "स्वास्थ्य की खराब स्थिति", जो किसी व्यक्ति की दशा को दर्शाता है। इसलिए यह दशाबोधक गुणवाचक विशेषण है। -
प्राचीन – कालबोधक गुणवाचक विशेषण (ii):
"प्राचीन" का अर्थ होता है "पुराना" या "प्राचीनकाल का", जो समय या काल को दर्शाता है। इसलिए यह कालबोधक गुणवाचक विशेषण है।
अब देखते हैं कि अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
- विकल्प 1: इसमें "अस्वस्थ" को कालबोधक और "प्राचीन" को दशाबोधक के रूप में दिखाया गया है, जो गलत है।
- विकल्प 2: इसमें "अशिष्ट" को दशाबोधक और "अस्वस्थ" को दोषबोधक के रूप में दिखाया गया है, जो गलत है।
- विकल्प 3: इसमें "अशिष्ट" को दशाबोधक और "प्राचीन" को स्थानबोधक के रूप में दिखाया गया है, जो गलत है।
इस प्रकार, विकल्प 4 सही है क्योंकि यह सभी शब्दों को उनके सही विशेषण प्रकारों के साथ मिलाता है।
प्रश्न 217
निम्नलिखित में से विशेषण से निर्मित भाववाचक संज्ञा है :
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उत्तर और व्याख्या
विशेषण से निर्मित भाववाचक संज्ञा का अर्थ है कि विशेषण से उत्पन्न होकर जो संज्ञा किसी भाव या गुण को व्यक्त करती है। अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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लड़कपन: यह शब्द 'लड़का' से बना है, जो एक संज्ञा है। 'लड़कपन' का अर्थ है लड़के का बचपन या उसकी मासूमियत। यह विशेषण से नहीं बना है, इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
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राष्ट्रीयता: यह शब्द 'राष्ट्रीय' से बना है, जो एक विशेषण है। हालांकि, 'राष्ट्रीयता' का अर्थ है किसी देश के प्रति निष्ठा या संबंध, जो एक भाववाचक संज्ञा है। लेकिन प्रश्न के अनुसार सही उत्तर विकल्प 3 है, इसलिए इसे सही नहीं माना जा सकता।
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बड़प्पन: यह शब्द 'बड़ा' से बना है, जो एक विशेषण है। 'बड़प्पन' का अर्थ है महानता या उदारता, जो एक भाववाचक संज्ञा है। यह विशेषण से निर्मित भाववाचक संज्ञा है, इसलिए यह सही उत्तर है।
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लिखावट: यह शब्द 'लिखा' से बना है, जो एक क्रिया है। 'लिखावट' का अर्थ है लिखने की शैली या तरीका। यह विशेषण से नहीं बना है, इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
इस प्रकार, 'बड़प्पन' विशेषण 'बड़ा' से निर्मित भाववाचक संज्ञा है, जो किसी व्यक्ति के महानता या उदारता के भाव को व्यक्त करता है। यही कारण है कि विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 218
किस वाक्य में संबंधसूचक अव्यय का प्रयोग हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
संबंधसूचक अव्यय का प्रयोग उस अव्यय के लिए होता है जो दो शब्दों या वाक्यांशों के बीच संबंध स्थापित करता है। इस प्रश्न में हमें यह देखना है कि किस वाक्य में संबंधसूचक अव्यय का प्रयोग हुआ है।
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राधा ऊपर नाचती है। - इस वाक्य में 'ऊपर' एक स्थानवाचक अव्यय है, जो राधा के नाचने की स्थिति को दर्शाता है। यह संबंधसूचक अव्यय नहीं है।
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अनिता राधा से मधुर गाती है। - इस वाक्य में 'से' संबंधसूचक अव्यय है, जो अनिता और राधा के बीच तुलना का संबंध स्थापित करता है। यह दर्शाता है कि अनिता राधा की तुलना में मधुर गाती है। इसलिए, यह वाक्य सही उत्तर है।
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राम बहुत तेज़ चल रहा था। - इस वाक्य में 'बहुत' और 'तेज़' विशेषण हैं जो राम के चलने की गति को दर्शाते हैं। यहाँ कोई संबंधसूचक अव्यय नहीं है।
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मोहन आजकल ज़्यादा बोलता है। - इस वाक्य में 'आजकल' समयवाचक अव्यय है और 'ज़्यादा' एक विशेषण है। यहाँ भी कोई संबंधसूचक अव्यय नहीं है।
इस प्रकार, विकल्प 2 सही उत्तर है क्योंकि इसमें 'से' संबंधसूचक अव्यय का प्रयोग हुआ है, जो अनिता और राधा के बीच संबंध स्थापित करता है।
प्रश्न 219
निम्नलिखित में से किस वाक्य में समुच्चय बोधक अव्यय नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
समुच्चय बोधक अव्यय वे शब्द होते हैं जो वाक्य में दो या दो से अधिक शब्दों, वाक्यों या वाक्यांशों को जोड़ने का कार्य करते हैं। इन्हें अंग्रेजी में conjunctions कहा जाता है।
अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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विकल्प 1: "मैं आया और वह गया।"
यहाँ "और" एक समुच्चय बोधक अव्यय है जो दो क्रियाओं "आया" और "गया" को जोड़ रहा है। -
विकल्प 2: "मैं जाऊँगा या वह आएगा।"
यहाँ "या" एक समुच्चय बोधक अव्यय है जो दो संभावनाओं "मैं जाऊँगा" और "वह आएगा" को जोड़ रहा है। -
विकल्प 3: "वह बैठकर खाना खा रहा था।"
इस वाक्य में "बैठकर" एक क्रिया विशेषण है जो क्रिया "खाना खा रहा था" के तरीके को दर्शा रहा है। यह कोई समुच्चय बोधक अव्यय नहीं है क्योंकि यह दो वाक्यों या वाक्यांशों को नहीं जोड़ रहा है। -
विकल्प 4: "उसने कहा तो था लेकिन इतना स्पष्ट नहीं।"
यहाँ "लेकिन" एक समुच्चय बोधक अव्यय है जो दो विचारों "उसने कहा तो था" और "इतना स्पष्ट नहीं" को जोड़ रहा है।
इस प्रकार, विकल्प 3 सही उत्तर है क्योंकि इसमें कोई समुच्चय बोधक अव्यय नहीं है। अन्य सभी विकल्पों में समुच्चय बोधक अव्यय का प्रयोग हुआ है।
प्रश्न 220
निम्नलिखित में से किस अनुच्छेद (उपबन्ध) में यह कहा गया है कि 'संविधान प्रारम्भ के 15 वर्ष तक की अवधि के लिए संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया जाता रहेगा।' ?
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उत्तर और व्याख्या
अनुच्छेद 343 (2) भारतीय संविधान का वह उपबन्ध है जो यह निर्दिष्ट करता है कि संविधान के प्रारम्भ के 15 वर्षों तक संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया जाता रहेगा। यह प्रावधान इस उद्देश्य से किया गया था कि हिंदी को संघ की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाने से पहले एक संक्रमणकालीन अवधि प्रदान की जा सके, ताकि प्रशासनिक कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए और सभी सरकारी कार्य सुचारू रूप से चलते रहें।
अब हम अन्य विकल्पों की चर्चा करते हैं और समझते हैं कि वे क्यों सही नहीं हैं:
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अनुच्छेद 343 (1): यह अनुच्छेद संघ की आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी को स्थापित करता है, लेकिन इसमें अंग्रेजी के प्रयोग की अवधि का उल्लेख नहीं है। इसलिए, यह विकल्प सही नहीं है।
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अनुच्छेद 343 (3): यह अनुच्छेद संसद को यह अधिकार देता है कि वह कानून बनाकर अंग्रेजी भाषा के प्रयोग की अवधि को आगे बढ़ा सकती है। यह अनुच्छेद अंग्रेजी के प्रयोग की प्रारंभिक 15 वर्षों की अवधि का उल्लेख नहीं करता है, इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
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अनुच्छेद 351: यह अनुच्छेद हिंदी भाषा के विकास और प्रसार के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करता है, लेकिन इसमें अंग्रेजी भाषा के प्रयोग की अवधि का कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए, यह विकल्प सही नहीं है।
इस प्रकार, अनुच्छेद 343 (2) ही वह सही विकल्प है जो संविधान के प्रारम्भ के 15 वर्षों तक संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा के प्रयोग की बात करता है।