HTET परीक्षा Level 2 TGT
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 2 TGT की तैयारी
सत्यापित उत्तर और व्याख्याएँ
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 221
वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध शब्द चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध शब्द चुनने के लिए हमें यह देखना होता है कि शब्द का सही उच्चारण और वर्तनी क्या है। दिए गए विकल्पों में से:
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तिरपन: यह शब्द 'तिरपन' के रूप में सही है। यह संख्या '53' को दर्शाता है और इसका वर्तनी सही है।
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अजमाइश: यह शब्द वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध है। सही शब्द 'आज़माइश' है, जिसका अर्थ होता है 'परीक्षण' या 'कोशिश'। हिंदी में 'आज़माइश' शब्द का सही उच्चारण और वर्तनी 'आज़माइश' है, न कि 'अजमाइश'।
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अन्त्याक्षरी: यह शब्द सही है। 'अन्त्याक्षरी' एक खेल है जिसमें लोग गानों की पंक्तियों को गाते हैं और अगला व्यक्ति उस पंक्ति के अंतिम अक्षर से नया गाना शुरू करता है। इसका वर्तनी सही है।
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छिपकली: यह शब्द भी सही है। 'छिपकली' एक प्रकार का सरीसृप है और इसका वर्तनी सही है।
इस प्रकार, वार्तनिक दृष्टि से अशुद्ध शब्द 'अजमाइश' है क्योंकि इसका सही रूप 'आज़माइश' होना चाहिए। यही कारण है कि विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 222
निम्नलिखित में से सही शब्द-रूप है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सही शब्द-रूप "परिणति" है, जो विकल्प 1 में दिया गया है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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परिणति (विकल्प 1): "परिणति" शब्द संस्कृत से लिया गया है और इसका अर्थ होता है किसी कार्य या प्रक्रिया का अंतिम परिणाम या निष्कर्ष। यह शब्द सही रूप में लिखा गया है और इसका प्रयोग हिंदी भाषा में व्यापक रूप से होता है। यह शब्द सही व्याकरणिक संरचना और उच्चारण के साथ प्रस्तुत किया गया है।
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परिणती (विकल्प 2): यह शब्द गलत है क्योंकि इसमें 'ति' के स्थान पर 'ती' का प्रयोग किया गया है, जो कि व्याकरणिक दृष्टि से सही नहीं है। संस्कृत और हिंदी में इस शब्द का सही रूप "परिणति" ही है।
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परीणति (विकल्प 3): इस विकल्प में 'र' के स्थान पर 'री' का प्रयोग किया गया है, जो कि गलत है। यह शब्द का गलत उच्चारण और रूप है। सही शब्द "परिणति" है, जिसमें 'र' का सही प्रयोग होता है।
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परणिति (विकल्प 4): इस विकल्प में 'र' और 'ण' के स्थान पर 'न' का प्रयोग किया गया है, जो कि गलत है। यह शब्द का गलत रूप है। सही शब्द "परिणति" है, जिसमें 'र' और 'ण' का सही प्रयोग होता है।
इस प्रकार, सही शब्द-रूप "परिणति" है, जो विकल्प 1 में दिया गया है। अन्य सभी विकल्प व्याकरणिक और उच्चारण की दृष्टि से गलत हैं।
प्रश्न 223
निम्नलिखित में से शुद्ध वाक्य-रूप नहीं है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 4: "उनके उच्चारण ठीक नहीं है।" को शुद्ध वाक्य-रूप नहीं माना गया है। इसका कारण यह है कि इस वाक्य में "उच्चारण" शब्द का प्रयोग किया गया है, जो कि एक संज्ञा है और इसे विशेषण के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता। सही वाक्य होना चाहिए "उनका उच्चारण ठीक नहीं है।" यहां "उनका" का प्रयोग होना चाहिए क्योंकि यह "उच्चारण" के लिए विशेषण के रूप में सही है।
अब अन्य विकल्पों की चर्चा करते हैं:
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"दो टोकरी कचरा फेंक दिया।" - यह वाक्य शुद्ध है क्योंकि इसमें संख्यावाचक विशेषण "दो" का सही प्रयोग किया गया है और वाक्य का अर्थ स्पष्ट है।
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"कूड़ा-करकट रह जाता है।" - यह वाक्य भी शुद्ध है क्योंकि इसमें "कूड़ा-करकट" का सही प्रयोग किया गया है और वाक्य का अर्थ भी स्पष्ट है।
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"मेरे पास इतना कम समय है।" - यह वाक्य शुद्ध है क्योंकि इसमें "इतना कम" का सही प्रयोग किया गया है और वाक्य का अर्थ भी स्पष्ट है।
इस प्रकार, विकल्प 4 को शुद्ध वाक्य-रूप नहीं माना गया है क्योंकि इसमें व्याकरणिक त्रुटि है।
प्रश्न 224
किस विकल्प में 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विकल्प 3 'अनुदार' सही उत्तर है क्योंकि इसमें 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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अनुस्वार: इस शब्द में 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। 'अनु' का अर्थ होता है 'पीछे' या 'अनुसरण करना', और 'स्वार' का अर्थ होता है 'स्वर'। इस प्रकार, 'अनुस्वार' का अर्थ होता है 'स्वर के पीछे आने वाला'।
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अनुषंग: इस शब्द में भी 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। 'अनु' का अर्थ 'पीछे' या 'साथ' होता है, और 'शंग' का अर्थ होता है 'संबंध'। 'अनुषंग' का अर्थ होता है 'संबंधित' या 'साथ में जुड़ा हुआ'।
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अनुदार: इस शब्द में 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है। 'अनुदार' का अर्थ होता है 'जो उदार नहीं है'। यहाँ 'अनु' उपसर्ग का कोई योगदान नहीं है, बल्कि यह 'अनु' के बजाय 'अन' उपसर्ग का प्रयोग है, जो नकारात्मकता दर्शाता है।
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अनुशास्ति: इस शब्द में 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। 'अनु' का अर्थ 'पीछे' या 'अनुसरण करना' होता है, और 'शास्ति' का अर्थ होता है 'शिक्षा' या 'अनुशासन'। इस प्रकार, 'अनुशास्ति' का अर्थ होता है 'अनुशासन का पालन करना'।
इस प्रकार, विकल्प 3 'अनुदार' में 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है, और यही कारण है कि यह सही उत्तर है।
प्रश्न 225
सु' उपसर्ग-रहित पद चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 2, "स्वस्थ," is the correct answer for the question asking for the "सु' उपसर्ग-रहित पद" (word without the prefix 'सु'). Here's a detailed explanation:
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Explanation for Option 2 (स्वस्थ):
- The word "स्वस्थ" is derived from the Sanskrit root "स्व" (swa) meaning "self" and "स्थ" (stha) meaning "standing" or "being." It refers to a state of being healthy or well. Importantly, it does not contain the prefix "सु" (su), which means "good" or "well." Therefore, "स्वस्थ" is a word without the prefix "सु," making it the correct answer.
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Explanation for why other options are incorrect:
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Option 1 (सुषुप्ति):
- The word "सुषुप्ति" is derived from "सु" (su) + "शुप्ति" (shupti). Here, "सु" is a prefix meaning "good" or "well," and "शुप्ति" refers to sleep. Thus, "सुषुप्ति" means "deep sleep" or "sound sleep," and it clearly contains the prefix "सु."
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Option 3 (स्वल्प):
- The word "स्वल्प" is derived from "सु" (su) + "अल्प" (alpa). Here, "सु" is a prefix meaning "good" or "well," and "अल्प" means "little" or "small." Therefore, "स्वल्प" means "very little" or "very small," and it includes the prefix "सु."
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Option 4 (सौष्ठव):
- The word "सौष्ठव" is derived from "सु" (su) + "स्थव" (stha). Here, "सु" is a prefix meaning "good" or "well," and "स्थव" relates to "standing" or "posture." Thus, "सौष्ठव" refers to "grace" or "elegance," and it contains the prefix "सु."
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In conclusion, Option 2 "स्वस्थ" is the only word among the given options that does not have the prefix "सु," making it the correct choice for the question.
प्रश्न 226
निम्नलिखित में से 'स' उपसर्ग से निर्मित शब्द नहीं है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विकल्प 2, 'सदाचार', सही उत्तर है क्योंकि यह 'स' उपसर्ग से निर्मित शब्द नहीं है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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सदाचार: यह शब्द 'स' उपसर्ग से नहीं बना है। 'सदाचार' का अर्थ है अच्छा आचरण या नैतिक व्यवहार। इसमें 'सद' का अर्थ है अच्छा या श्रेष्ठ, और 'आचार' का अर्थ है व्यवहार। यह शब्द संस्कृत से लिया गया है और इसमें 'स' उपसर्ग का प्रयोग नहीं होता है।
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सपरिवार: यह शब्द 'स' उपसर्ग से बना है। 'स' का अर्थ है 'साथ में' या 'सहित', और 'परिवार' का अर्थ है परिवार। इसलिए 'सपरिवार' का अर्थ है परिवार के साथ।
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सजीव: यह भी 'स' उपसर्ग से निर्मित शब्द है। 'स' का अर्थ है 'साथ में' या 'सहित', और 'जीव' का अर्थ है जीवन। इसलिए 'सजीव' का अर्थ है जीवित या जीवन के साथ।
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सजातीय: यह शब्द भी 'स' उपसर्ग से बना है। 'स' का अर्थ है 'समान' या 'सहित', और 'जातीय' का अर्थ है जाति या प्रकार। इसलिए 'सजातीय' का अर्थ है समान जाति या प्रकार का।
इस प्रकार, 'सदाचार' को छोड़कर अन्य सभी विकल्प 'स' उपसर्ग से निर्मित हैं। यही कारण है कि विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 227
निम्नलिखित में से किस विकल्प में उपसर्ग मूल शब्द के साथ जुड़कर विपरीत अर्थ प्रदान कर रहा है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विकल्प 3 "अपयश" सही उत्तर है क्योंकि यह उपसर्ग "अ" के साथ मूल शब्द "यश" को जोड़कर विपरीत अर्थ प्रदान करता है। यहाँ "यश" का अर्थ है प्रसिद्धि या सम्मान, जबकि "अपयश" का अर्थ है बदनामी या अपमान। इस प्रकार, उपसर्ग "अ" का प्रयोग करके मूल शब्द के अर्थ को विपरीत दिशा में बदल दिया गया है।
अब अन्य विकल्पों की चर्चा करते हैं:
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प्रबल: इस शब्द में "प्र" उपसर्ग का प्रयोग किया गया है, जो मूल शब्द "बल" के अर्थ को बढ़ाता है। "प्रबल" का अर्थ है अत्यधिक बलवान या शक्तिशाली। यह उपसर्ग मूल शब्द के अर्थ को विपरीत नहीं करता, बल्कि उसे और अधिक बलवान बनाता है।
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अनुकरण: इस शब्द में "अनु" उपसर्ग का प्रयोग किया गया है, जो मूल शब्द "करण" के साथ मिलकर "अनुकरण" बनाता है। इसका अर्थ है किसी का अनुसरण करना या नकल करना। यहाँ उपसर्ग मूल शब्द के अर्थ को विपरीत नहीं करता।
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अधिवास: इस शब्द में "अधि" उपसर्ग का प्रयोग किया गया है, जो मूल शब्द "वास" के साथ मिलकर "अधिवास" बनाता है। इसका अर्थ है निवास स्थान या रहने का स्थान। यहाँ भी उपसर्ग मूल शब्द के अर्थ को विपरीत नहीं करता।
इस प्रकार, केवल "अपयश" ही ऐसा शब्द है जिसमें उपसर्ग मूल शब्द के अर्थ को विपरीत दिशा में बदलता है, इसलिए विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 228
अक' प्रत्यय युक्त पद नहीं है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
अक' प्रत्यय युक्त पद नहीं है : लड़ाक
विस्तृत व्याख्या:
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लड़ाक: यह शब्द 'अक' प्रत्यय युक्त नहीं है। 'लड़ाक' शब्द में 'अक' प्रत्यय का प्रयोग नहीं होता है। यह शब्द 'लड़' धातु से बना है और इसमें 'अक' प्रत्यय का कोई योगदान नहीं है। इसलिए, यह सही उत्तर है।
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विधायक: इस शब्द में 'अक' प्रत्यय का प्रयोग होता है। 'विधि' से 'विधायक' बनता है, जिसमें 'अक' प्रत्यय का उपयोग होता है। यह शब्द किसी विधान को बनाने या लागू करने वाले व्यक्ति को संदर्भित करता है।
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प्रेरक: इस शब्द में भी 'अक' प्रत्यय का प्रयोग होता है। 'प्रेरणा' से 'प्रेरक' बनता है, जिसमें 'अक' प्रत्यय का उपयोग होता है। यह शब्द किसी को प्रेरित करने वाले व्यक्ति या वस्तु को संदर्भित करता है।
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निंदक: इस शब्द में 'अक' प्रत्यय का प्रयोग होता है। 'निंदा' से 'निंदक' बनता है, जिसमें 'अक' प्रत्यय का उपयोग होता है। यह शब्द किसी की आलोचना करने वाले व्यक्ति को संदर्भित करता है।
इस प्रकार, 'लड़ाक' शब्द में 'अक' प्रत्यय का प्रयोग नहीं होता है, जबकि अन्य सभी विकल्पों में 'अक' प्रत्यय का प्रयोग होता है। इसलिए, सही उत्तर विकल्प 4 'लड़ाक' है।
प्रश्न 229
प्रत्यय की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: प्रत्यय की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
सही उत्तर: विकल्प 1
विस्तृत व्याख्या:
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हथ + औड़ी = हथौड़ी: इस विकल्प में 'हथ' और 'औड़ी' का संयोजन किया गया है। यहाँ पर 'औड़ी' प्रत्यय का प्रयोग नहीं है। 'हथौड़ी' शब्द में 'हथ' का अर्थ हाथ से संबंधित है, लेकिन 'औड़ी' कोई प्रत्यय नहीं है जो 'हथ' के साथ मिलकर एक नया अर्थ प्रदान करता हो। इसलिए, यह संयोजन प्रत्यय की दृष्टि से असंगत है।
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अणु + इक = आणविक: इस विकल्प में 'इक' प्रत्यय का प्रयोग किया गया है। 'अणु' का अर्थ है सूक्ष्म कण और 'इक' प्रत्यय जोड़ने से 'आणविक' शब्द बनता है, जिसका अर्थ है अणु से संबंधित। यह प्रत्यय का सही प्रयोग है और इसलिए यह विकल्प संगत है।
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साँप + ओला = सँपोला: इस विकल्प में 'ओला' प्रत्यय का प्रयोग किया गया है। 'साँप' का अर्थ है सर्प और 'ओला' प्रत्यय जोड़ने से 'सँपोला' शब्द बनता है, जिसका अर्थ है साँप का बच्चा। यह प्रत्यय का सही प्रयोग है और इसलिए यह विकल्प संगत है।
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भाँग + एड़ी = भँगेड़ी: इस विकल्प में 'एड़ी' प्रत्यय का प्रयोग किया गया है। 'भाँग' का अर्थ है एक प्रकार का पौधा और 'एड़ी' प्रत्यय जोड़ने से 'भँगेड़ी' शब्द बनता है, जिसका अर्थ है भाँग से संबंधित। यह प्रत्यय का सही प्रयोग है और इसलिए यह विकल्प संगत है।
इस प्रकार, प्रत्यय की दृष्टि से असंगत विकल्प 'हथ + औड़ी = हथौड़ी' है, क्योंकि इसमें प्रत्यय का सही प्रयोग नहीं किया गया है।
प्रश्न 230
इक' प्रत्यय से निर्मित शब्द नहीं है :
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: इक' प्रत्यय से निर्मित शब्द नहीं है :
सही उत्तर: विकल्प 2 (अधिकाधिक)
व्याख्या:
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विकल्प 2: अधिकाधिक
"अधिकाधिक" शब्द में 'इक' प्रत्यय का प्रयोग नहीं होता है। यह शब्द 'अधिक' से बना है और इसका अर्थ है 'और अधिक' या 'बढ़ते हुए'। इसमें 'इक' प्रत्यय का कोई योगदान नहीं है, इसलिए यह सही उत्तर है। -
विकल्प 1: दैनिक
"दैनिक" शब्द में 'इक' प्रत्यय का प्रयोग होता है। 'दिन' शब्द में 'इक' प्रत्यय जोड़ने से 'दैनिक' बनता है, जिसका अर्थ है 'प्रतिदिन' या 'रोजाना'। -
विकल्प 3: सामाजिक
"सामाजिक" शब्द में भी 'इक' प्रत्यय का प्रयोग होता है। 'समाज' शब्द में 'इक' प्रत्यय जोड़ने से 'सामाजिक' बनता है, जिसका अर्थ है 'समाज से संबंधित'। -
विकल्प 4: धार्मिक
"धार्मिक" शब्द में 'इक' प्रत्यय का प्रयोग होता है। 'धर्म' शब्द में 'इक' प्रत्यय जोड़ने से 'धार्मिक' बनता है, जिसका अर्थ है 'धर्म से संबंधित'।
इस प्रकार, 'अधिकाधिक' शब्द में 'इक' प्रत्यय का प्रयोग नहीं होता है, इसलिए यह सही उत्तर है।
प्रश्न 231
बिछौना' में मूल शब्द एवं प्रत्यय है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'बिछौना' शब्द में 'बिछाना' और 'औना' का मेल है। यहाँ पर 'बिछाना' मूल शब्द है और 'औना' प्रत्यय है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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मूल शब्द 'बिछाना': 'बिछाना' का अर्थ है किसी चीज़ को फैलाना या बिछाना। यह क्रिया का रूप है जो किसी वस्तु को व्यवस्थित रूप से फैलाने की क्रिया को दर्शाता है।
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प्रत्यय 'औना': 'औना' एक प्रत्यय है जो मूल शब्द के साथ जुड़कर नए शब्द का निर्माण करता है। यह प्रत्यय मूल शब्द के अर्थ में थोड़ा परिवर्तन या विस्तार करता है।
अब, आइए देखें कि अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
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विकल्प 1: बिछाना + ओना - यहाँ 'ओना' प्रत्यय का प्रयोग किया गया है, जो सही नहीं है क्योंकि 'बिछौना' में 'औना' प्रत्यय का प्रयोग होता है।
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विकल्प 2: बिछ + ऊना - यहाँ 'बिछ' को मूल शब्द माना गया है, जो गलत है क्योंकि 'बिछ' अपने आप में पूर्ण अर्थ नहीं देता। साथ ही, 'ऊना' प्रत्यय का प्रयोग भी गलत है।
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विकल्प 4: बिछा + ओना - यहाँ 'बिछा' को मूल शब्द माना गया है, जो सही नहीं है क्योंकि 'बिछा' अधूरा शब्द है और 'ओना' प्रत्यय का प्रयोग भी गलत है।
इस प्रकार, 'बिछौना' में 'बिछाना' और 'औना' का सही मेल है, जो विकल्प 3 को सही उत्तर बनाता है।
प्रश्न 232
निम्नलिखित में से 'चंद्रमा' का पर्यायवाची नहीं है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: निम्नलिखित में से 'चंद्रमा' का पर्यायवाची नहीं है :
उत्तर: विकल्प 3
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 3: शीत - 'शीत' का अर्थ ठंडक या ठंड से संबंधित होता है। यह शब्द चंद्रमा का पर्यायवाची नहीं है। चंद्रमा के लिए पर्यायवाची शब्द वे होते हैं जो चंद्रमा के विभिन्न गुणों या विशेषताओं को दर्शाते हैं, जैसे उसकी चमक, सुंदरता, या उसके अन्य नाम। 'शीत' चंद्रमा के लिए उपयुक्त पर्यायवाची नहीं है क्योंकि यह चंद्रमा की विशेषताओं का वर्णन नहीं करता है।
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विकल्प 1: शशि - 'शशि' चंद्रमा का एक प्रसिद्ध पर्यायवाची है। यह शब्द चंद्रमा के लिए प्राचीन ग्रंथों और साहित्य में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। इसलिए, यह विकल्प चंद्रमा का पर्यायवाची है।
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विकल्प 2: राका - 'राका' पूर्णिमा की रात को दर्शाने वाला शब्द है, जब चंद्रमा पूर्ण रूप से दिखाई देता है। यह चंद्रमा की एक विशेष अवस्था को दर्शाता है और इस प्रकार चंद्रमा का पर्यायवाची माना जाता है।
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विकल्प 4: इंदु - 'इंदु' भी चंद्रमा का एक पर्यायवाची शब्द है। यह शब्द संस्कृत और हिंदी साहित्य में चंद्रमा के लिए प्रयुक्त होता है।
इस प्रकार, 'शीत' चंद्रमा का पर्यायवाची नहीं है, जबकि अन्य विकल्प चंद्रमा के पर्यायवाची शब्द हैं। इसलिए, विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 233
निस्पृह' शब्द का सही अर्थ है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'निस्पृह' शब्द का सही अर्थ है 'कामना रहित'।
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विस्तृत व्याख्या:
'निस्पृह' शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है 'कामना रहित'। यह शब्द उस अवस्था या व्यक्ति का वर्णन करता है जो किसी प्रकार की इच्छा, लालसा या आकांक्षा से मुक्त होता है। यह एक मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति बाहरी वस्तुओं या सुखों के प्रति निर्लिप्त रहता है और आत्मिक शांति की ओर अग्रसर होता है। -
अन्य विकल्पों का खंडन:
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भय रहित (Option 2): 'भय रहित' का अर्थ है 'डर से मुक्त'। यह शब्द 'निस्पृह' के अर्थ से मेल नहीं खाता क्योंकि 'निस्पृह' का संबंध इच्छाओं से है, न कि भय से।
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घर रहित (Option 3): 'घर रहित' का अर्थ है 'जिसका कोई घर नहीं है'। यह शब्द भौतिक स्थिति का वर्णन करता है, जबकि 'निस्पृह' मानसिक स्थिति का वर्णन करता है। इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
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आश्रय रहित (Option 4): 'आश्रय रहित' का अर्थ है 'जिसके पास कोई आश्रय नहीं है'। यह भी भौतिक स्थिति को दर्शाता है और 'निस्पृह' के अर्थ से संबंधित नहीं है, जो इच्छाओं की अनुपस्थिति को दर्शाता है।
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इस प्रकार, 'निस्पृह' का सही अर्थ 'कामना रहित' है, और यही कारण है कि विकल्प 1 सही है।
प्रश्न 234
जो समझने योग्य न हो' वाक्यांश के लिए एक शब्द है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वाक्यांश 'जो समझने योग्य न हो' के लिए सही शब्द 'अबूझ' है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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अबूझ: यह शब्द उन चीजों के लिए प्रयोग किया जाता है जिन्हें समझना या जानना कठिन होता है। 'अबूझ' का अर्थ होता है 'जिसे समझा न जा सके' या 'जो रहस्यमय हो'। इसलिए, 'जो समझने योग्य न हो' के लिए 'अबूझ' एकदम सही शब्द है।
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उद्दाम: इस शब्द का अर्थ होता है 'अत्यधिक उत्साही' या 'उत्तेजित'। यह शब्द किसी व्यक्ति या स्थिति की अत्यधिक ऊर्जा या उत्साह को दर्शाता है, न कि किसी चीज़ के समझ में न आने को। इसलिए, यह विकल्प गलत है।
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हेय: इसका अर्थ होता है 'निंदनीय' या 'अवमाननीय'। यह शब्द उन चीजों के लिए प्रयोग किया जाता है जिन्हें तुच्छ या निम्न समझा जाता है। यह 'जो समझने योग्य न हो' के अर्थ में फिट नहीं बैठता, इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
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लोच: इस शब्द का अर्थ होता है 'लचीलापन' या 'समायोजन की क्षमता'। यह किसी वस्तु या व्यक्ति की लचीलेपन की क्षमता को दर्शाता है। यह भी 'जो समझने योग्य न हो' के अर्थ में सही नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
इस प्रकार, 'जो समझने योग्य न हो' के लिए सही शब्द 'अबूझ' है, और यही कारण है कि विकल्प 2 सही है।
प्रश्न 235
निम्नलिखित में से 'काकु वक्रोक्ति' का उदाहरण नहीं है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'काकु वक्रोक्ति' का अर्थ है वाणी की वह शैली जिसमें शब्दों के अर्थ को बदलकर या छिपाकर कुछ और ही अर्थ प्रकट किया जाता है। यह एक प्रकार की अलंकारिक शैली है जिसमें वक्ता अपने भावों को अप्रत्यक्ष रूप से व्यक्त करता है।
अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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विकल्प 1: "बल्लभ' विचारि कै सुनु री सयानी अली। ऐसे समय नाथ परदेस तें न आएँगे।।" - इस पंक्ति में वक्ता अपने प्रिय के आने की संभावना को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत कर रहा है। यह एक प्रकार की वक्रोक्ति हो सकती है, क्योंकि यहाँ वक्ता अपने भावों को अप्रत्यक्ष रूप से व्यक्त कर रहा है।
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विकल्प 2: "भरतभूप सियराम लखन बन सुनि सानन्द सहौंगो। पुर परिजन अवलोकि मातु सब सुख सन्तोष लहौंगो।।" - इस पंक्ति में वक्ता अपने भावों को सीधे और स्पष्ट रूप से व्यक्त कर रहा है। यहाँ कोई वक्रोक्ति नहीं है, क्योंकि भाव सीधे और स्पष्ट रूप से व्यक्त किए गए हैं।
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विकल्प 3: "हैं री लाल तेरे ? सखी ऐसी निधि पाई कहाँ ? हैं री खगयान ? कह्यो हौं तो नहीं पाले हौं ?" - इस पंक्ति में वक्ता अपने भावों को प्रश्न के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जो कि एक सामान्य संवाद शैली है। यहाँ कोई वक्रोक्ति नहीं है, क्योंकि भाव सीधे और स्पष्ट रूप से व्यक्त किए गए हैं। इसलिए, यह 'काकु वक्रोक्ति' का उदाहरण नहीं है।
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विकल्प 4: "मैं सुकुमारी नाथ बन जोगू। तुमहिं उचित तप मों कहँ भोगू।।" - इस पंक्ति में वक्ता अपने भावों को अप्रत्यक्ष रूप से व्यक्त कर रहा है, जो कि वक्रोक्ति का एक उदाहरण हो सकता है।
इस प्रकार, विकल्प 3 सही उत्तर है क्योंकि यह 'काकु वक्रोक्ति' का उदाहरण नहीं है। अन्य विकल्पों में वक्रोक्ति के तत्व मौजूद हैं, जबकि विकल्प 3 में भाव सीधे और स्पष्ट रूप से व्यक्त किए गए हैं।
प्रश्न 236
सुमेलित कीजिए :
(क) कृपादृष्टि हो जाए तो बन जाएँ सब कामा। — (i) दुष्क्रमत्व दोष
(ख) लपटी पुष्प पराग रज, सनी स्वेद मकरंद। — (ii) अक्रमत्व दोष
(ग) विश्व में मिलते नहीं हैं, वीर भीम समान क। — (iii) अधिकपदत्व दोष
(घ) नृप मो को हय दीजिये, अथवा मत्त गजेन्द्र। — (iv) न्यूनपदत्व दोष
कूट :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सही उत्तर विकल्प 2 है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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(क) कृपादृष्टि हो जाए तो बन जाएँ सब कामा। — (iv) न्यूनपदत्व दोष
इस पंक्ति में न्यूनपदत्व दोष है क्योंकि इसमें शब्दों की कमी है जो वाक्य को पूर्ण रूप से स्पष्ट नहीं करता। -
(ख) लपटी पुष्प पराग रज, सनी स्वेद मकरंद। — (iii) अधिकपदत्व दोष
इस पंक्ति में अधिकपदत्व दोष है क्योंकि इसमें अनावश्यक शब्दों का प्रयोग किया गया है जो वाक्य को जटिल बनाता है। -
(ग) विश्व में मिलते नहीं हैं, वीर भीम समान क। — (iii) अधिकपदत्व दोष
इस पंक्ति में भी अधिकपदत्व दोष है क्योंकि इसमें भी अनावश्यक शब्दों का प्रयोग किया गया है। -
(घ) नृप मो को हय दीजिये, अथवा मत्त गजेन्द्र। — (i) दुष्क्रमत्व दोष
इस पंक्ति में दुष्क्रमत्व दोष है क्योंकि इसमें शब्दों का क्रम सही नहीं है, जिससे वाक्य का अर्थ स्पष्ट नहीं होता।
अब, आइए समझते हैं कि अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
- विकल्प 1: इसमें (क) के लिए अधिकपदत्व दोष दिया गया है, जो गलत है क्योंकि (क) में न्यूनपदत्व दोष है।
- विकल्प 3: इसमें (ग) के लिए दुष्क्रमत्व दोष दिया गया है, जो गलत है क्योंकि (ग) में अधिकपदत्व दोष है।
- विकल्प 4: इसमें सभी दोषों का क्रम गलत है, जो सही उत्तर नहीं हो सकता।
इस प्रकार, विकल्प 2 सही उत्तर है क्योंकि यह सभी दोषों को सही तरीके से मिलाता है।
प्रश्न 237
सुमेलित कीजिए :
(क) जो घनीभूत पीड़ा थी
मस्तक में स्मृति-सी छायी
दुर्दिन में आँसू बनकर
वह आज बरसने आयी। — (i) रूपक
(ख) विरह विकल बिनुही लिखी
पाती दई पठाय।
आँक विहीनीयौ सुचित,
सूने बाँधत जाय। — (ii) श्लोक
(ग) अरुन सरोरुह कर चरण
दृग खंजन मुखचन्द।
समै आय सुन्दरि सरद
काहि न करति आनंद। — (iii) असंगति
(घ) मेरे जीवन की उलझन
बिखरी थी उनकी अलकें
पी ली मधु मदिरा किसने
थी बंद हमारी पलकें। — (iv) विभावना
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सही उत्तर विकल्प 1 है: (क)(ii); (ख)(iv); (ग)(i); (घ)(iii)
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(क) जो घनीभूत पीड़ा थी... — (ii) श्लोक:
इस पंक्ति में एक गहरी पीड़ा और स्मृति का वर्णन है, जो आँसू के रूप में व्यक्त हो रही है। यह शैली श्लोक के रूप में है, जहाँ भावनाओं का गहन वर्णन किया गया है। -
(ख) विरह विकल बिनुही लिखी... — (iv) विभावना:
यहाँ विरह की स्थिति का वर्णन है, जहाँ बिना लिखी पाती भेजी जा रही है। यह विभावना का उदाहरण है, जहाँ भावनाओं को बिना शब्दों के व्यक्त किया जा रहा है। -
(ग) अरुन सरोरुह कर चरण... — (i) रूपक:
इस पंक्ति में रूपक का प्रयोग किया गया है, जहाँ प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किया गया है। यहाँ पर 'अरुन सरोरुह' और 'दृग खंजन' जैसे रूपकों का प्रयोग किया गया है। -
(घ) मेरे जीवन की उलझन... — (iii) असंगति:
इस पंक्ति में जीवन की उलझन और अलकें का वर्णन है, जो असंगति का उदाहरण है। यहाँ पर उलझन और अलकें के बीच एक असंगति दिखाई गई है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
- विकल्प 2: इसमें (क) को (ii) के बजाय (i) से जोड़ा गया है, जो गलत है क्योंकि (क) श्लोक का उदाहरण है, न कि रूपक का।
- विकल्प 3: इसमें (क) को (iii) से जोड़ा गया है, जो गलत है क्योंकि (क) श्लोक का उदाहरण है, न कि असंगति का।
- विकल्प 4: इसमें (ख) को (ii) से जोड़ा गया है, जो गलत है क्योंकि (ख) विभावना का उदाहरण है, न कि श्लोक का।
इस प्रकार, विकल्प 1 सही है क्योंकि यह सभी पंक्तियों को उनके सही साहित्यिक उपकरणों के साथ सही ढंग से जोड़ता है।
प्रश्न 238
आकाश का साफा बाँधकर, सूरज की चिलम खींचता' कौन बैठा है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
आकाश का साफा बाँधकर, सूरज की चिलम खींचता' पहाड़ बैठा है। यह एक रूपक है जो पहाड़ की ऊँचाई और उसके स्थायित्व को दर्शाता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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Option 1: पहाड़ (Correct Answer)
- पहाड़ की ऊँचाई और उसकी विशालता को आकाश के साफे से तुलना की गई है। पहाड़ अक्सर बादलों के ऊपर होते हैं, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि वे आकाश को अपने सिर पर बाँध रहे हैं।
- सूरज की चिलम खींचने का अर्थ है कि पहाड़ सूरज की किरणों को अपने ऊपर से गुजरने देता है, जैसे कोई चिलम खींच रहा हो। यह दृश्य तब बनता है जब सूरज की किरणें पहाड़ की चोटियों पर पड़ती हैं और एक अद्भुत दृश्य उत्पन्न करती हैं।
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Option 2: नदी (Incorrect)
- नदी का आकाश के साफे से कोई संबंध नहीं है। नदी बहती है और उसका स्वरूप तरल होता है, जो स्थिरता और ऊँचाई का प्रतीक नहीं है।
- सूरज की चिलम खींचने का रूपक नदी पर लागू नहीं होता क्योंकि नदी सूरज की किरणों को अपने ऊपर से गुजरने नहीं देती, बल्कि वह पानी के प्रवाह में होती है।
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Option 3: वन (Incorrect)
- वन का आकाश के साफे से कोई संबंध नहीं है। वन पेड़ों का समूह होता है और उसकी ऊँचाई पहाड़ जैसी नहीं होती।
- सूरज की चिलम खींचने का रूपक वन पर लागू नहीं होता क्योंकि वन सूरज की किरणों को अपने ऊपर से गुजरने नहीं देता, बल्कि पेड़ों की छाया में रहता है।
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Option 4: सागर (Incorrect)
- सागर का आकाश के साफे से कोई संबंध नहीं है। सागर का स्वरूप तरल होता है और उसकी ऊँचाई पहाड़ जैसी नहीं होती।
- सूरज की चिलम खींचने का रूपक सागर पर लागू नहीं होता क्योंकि सागर सूरज की किरणों को अपने ऊपर से गुजरने नहीं देता, बल्कि वह पानी के विशाल विस्तार में होता है।
इस प्रकार, 'आकाश का साफा बाँधकर, सूरज की चिलम खींचता' का सबसे उपयुक्त और सही रूपक पहाड़ के लिए ही है।
प्रश्न 239
हाथ-पैर का काँपना, स्तंभ, रोमांच, मुखवैवर्ण्य, स्वर-परिवर्तन' इत्यादि किस रस के अनुभाव हैं ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
हाथ-पैर का काँपना, स्तंभ, रोमांच, मुखवैवर्ण्य, स्वर-परिवर्तन' इत्यादि भयानक रस के अनुभाव हैं। भयानक रस का संबंध भय और आतंक से होता है। जब व्यक्ति किसी भयानक स्थिति का सामना करता है, तो उसके शरीर में कुछ विशेष प्रतिक्रियाएँ होती हैं, जैसे कि हाथ-पैर का काँपना, शरीर का स्तंभित हो जाना, रोमांच का अनुभव, चेहरे का रंग बदल जाना (मुखवैवर्ण्य), और आवाज में परिवर्तन आना। ये सभी लक्षण भय की स्थिति में स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होते हैं और इसलिए इन्हें भयानक रस के अनुभाव माना जाता है।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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वीर रस: वीर रस का संबंध साहस और शौर्य से होता है। इसमें व्यक्ति के मन में उत्साह और ऊर्जा का संचार होता है, न कि भय या आतंक का। इसलिए वीर रस के अनुभाव भयानक रस से भिन्न होते हैं।
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हास्य रस: हास्य रस का संबंध हँसी और मजाक से होता है। इसमें व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान और हँसी होती है, न कि भय के कारण काँपना या मुखवैवर्ण्य। इसलिए हास्य रस के अनुभाव भी भयानक रस से अलग होते हैं।
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करुण रस: करुण रस का संबंध दुख और करुणा से होता है। इसमें व्यक्ति के मन में संवेदना और दुख का भाव होता है, जो भयानक रस के भय और आतंक से भिन्न है। करुण रस के अनुभाव भी भयानक रस के अनुभावों से मेल नहीं खाते।
इस प्रकार, दिए गए लक्षण भयानक रस के अनुभाव हैं और इसलिए विकल्प 1 सही है।
प्रश्न 240
समास विग्रह की दृष्टि से अनुचित विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
समास विग्रह की दृष्टि से अनुचित विकल्प चुनने के लिए हमें यह समझना होगा कि प्रत्येक विकल्प में दिए गए शब्दों का सही विग्रह क्या है।
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मातृभक्ति = माता के लिए भक्ति: यह समास सही है क्योंकि 'मातृभक्ति' का अर्थ है 'माता के प्रति भक्ति'। यहाँ 'माता' और 'भक्ति' के बीच का संबंध स्पष्ट है।
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वाग्वीर = वाक् (वाणी) में वीर: यह समास भी सही है। 'वाग्वीर' का अर्थ है 'वाणी में वीर'। यहाँ 'वाक्' और 'वीर' के बीच का संबंध सही तरीके से व्यक्त किया गया है।
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इन्द्रियजय = इन्द्रियों के लिए जय: यह समास विग्रह अनुचित है। 'इन्द्रियजय' का सही अर्थ है 'इन्द्रियों पर विजय'। यहाँ 'इन्द्रियों के लिए जय' कहना गलत है क्योंकि यह अर्थ नहीं बनता कि इन्द्रियों के लिए किसी प्रकार की विजय हो।
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जीवदया = जीवों पर दया: यह समास सही है। 'जीवदया' का अर्थ है 'जीवों पर दया करना'। यहाँ 'जीव' और 'दया' के बीच का संबंध सही तरीके से व्यक्त किया गया है।
इस प्रकार, विकल्प 3 'इन्द्रियजय = इन्द्रियों के लिए जय' का विग्रह अनुचित है क्योंकि इसका सही अर्थ 'इन्द्रियों पर विजय' होना चाहिए। यही कारण है कि विकल्प 3 सही उत्तर है।