HTET परीक्षा Level 2 TGT
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 2 TGT की तैयारी
सत्यापित उत्तर और व्याख्याएँ
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 201
गिरीश' शब्द में कौन-सी संधि है ?
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उत्तर और व्याख्या
गिरीश' शब्द में दीर्घ स्वर संधि है। दीर्घ स्वर संधि तब होती है जब दो समान स्वर मिलकर एक दीर्घ स्वर का निर्माण करते हैं। उदाहरण के लिए, 'गिरि' और 'ईश' के मिलने से 'गिरीश' बनता है। यहाँ 'इ' और 'ई' के मिलने से 'ई' का निर्माण होता है, जो दीर्घ स्वर संधि का उदाहरण है।
अब अन्य विकल्पों को देखते हैं:
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गुण स्वर संधि: गुण स्वर संधि तब होती है जब 'इ', 'ई', 'उ', 'ऊ' के बाद 'अ' स्वर आता है और वे मिलकर 'ए', 'ओ' का निर्माण करते हैं। उदाहरण के लिए, 'देव' + 'अलय' = 'देवालय'। 'गिरीश' में ऐसा नहीं है, इसलिए यह गुण स्वर संधि नहीं है।
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यण् स्वर संधि: यण् स्वर संधि तब होती है जब 'इ', 'ई', 'उ', 'ऊ' के बाद 'अ' स्वर आता है और वे मिलकर 'य', 'व' का निर्माण करते हैं। उदाहरण के लिए, 'विद्या' + 'आलय' = 'विद्यालय'। 'गिरीश' में ऐसा नहीं है, इसलिए यह यण् स्वर संधि नहीं है।
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व्यंजन संधि: व्यंजन संधि तब होती है जब दो व्यंजन मिलकर एक नया व्यंजन ध्वनि का निर्माण करते हैं। उदाहरण के लिए, 'तत्' + 'पुरुष' = 'तत्पुरुष'। 'गिरीश' में कोई व्यंजन संधि नहीं है, इसलिए यह व्यंजन संधि नहीं है।
इस प्रकार, 'गिरीश' शब्द में दीर्घ स्वर संधि है, और यही कारण है कि विकल्प 1 सही है।
प्रश्न 202
संधि-विच्छेद की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
संधि-विच्छेद की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनने के लिए हमें यह देखना होगा कि दिए गए शब्दों का संधि-विच्छेद सही है या नहीं।
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भूष्मा = भू + ऊष्मा: यह संधि सही है। 'भू' और 'ऊष्मा' के बीच दीर्घ संधि होती है, जिससे 'भूष्मा' बनता है।
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कृपाचार्य = कृप + आचार्य: यह संधि भी सही है। 'कृप' और 'आचार्य' के बीच दीर्घ संधि होती है, जिससे 'कृपाचार्य' बनता है।
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वाण्यौचित्य = वाणि + औचित्य: यह संधि गलत है। 'वाणि' और 'औचित्य' के बीच कोई संधि नहीं बनती जिससे 'वाण्यौचित्य' शब्द बने। सही संधि-विच्छेद 'वाण्यौचित्य' का नहीं हो सकता क्योंकि यह शब्द 'वाणी' और 'औचित्य' से नहीं बनता।
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गुर्वौदार्य = गुरु + औदार्य: यह संधि सही है। 'गुरु' और 'औदार्य' के बीच गुण संधि होती है, जिससे 'गुर्वौदार्य' बनता है।
इस प्रकार, विकल्प 3 'वाण्यौचित्य = वाणि + औचित्य' संधि-विच्छेद की दृष्टि से असंगत है, क्योंकि यह सही संधि-विच्छेद नहीं है। यही कारण है कि विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 203
कौन-सा शब्द यण संधि का उदाहरण नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
यण संधि के अंतर्गत, जब 'इ', 'ई', 'उ', 'ऊ' के बाद कोई स्वर आता है, तो 'इ', 'ई' का 'य्' और 'उ', 'ऊ' का 'व्' हो जाता है। अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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अत्यधिक: यहाँ 'अति' + 'अधिक' के संयोग से 'अत्यधिक' बनता है। 'अति' का 'अत्य' हो गया है, जो यण संधि का उदाहरण है।
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व्यूह: यह 'वि' + 'उह' के संयोग से बना है। 'वि' का 'व्य' हो गया है, जो यण संधि का उदाहरण है।
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सदैव: यह 'सदा' + 'एव' के संयोग से बना है। यहाँ कोई यण संधि नहीं है, क्योंकि 'सदा' का 'सदै' नहीं हुआ है। इसलिए यह यण संधि का उदाहरण नहीं है।
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प्रत्येक: यह 'प्रति' + 'एक' के संयोग से बना है। 'प्रति' का 'प्रत्य' हो गया है, जो यण संधि का उदाहरण है।
इस प्रकार, विकल्प 3 'सदैव' यण संधि का उदाहरण नहीं है, और यही कारण है कि यह सही उत्तर है। अन्य सभी विकल्प यण संधि के उदाहरण हैं।
प्रश्न 204
विसर्ग ध्वनि का प्रयोग किन शब्दों में होता है ?
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उत्तर और व्याख्या
विसर्ग ध्वनि का प्रयोग तत्सम शब्दों में होता है। तत्सम शब्द वे शब्द होते हैं जो संस्कृत से सीधे हिंदी में आए हैं और जिनका रूप लगभग अपरिवर्तित रहता है। विसर्ग ध्वनि, जो 'ः' के रूप में लिखी जाती है, संस्कृत भाषा की एक विशेष ध्वनि है और इसका प्रयोग विशेष रूप से तत्सम शब्दों में होता है। उदाहरण के लिए, 'गुरुः', 'विष्णुः', 'रामः' आदि शब्दों में विसर्ग ध्वनि का प्रयोग होता है।
अब आइए देखते हैं कि अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
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देशज शब्दों में: देशज शब्द वे होते हैं जो किसी विशेष क्षेत्र या बोली से उत्पन्न होते हैं और जिनका मूल संस्कृत से नहीं होता। इन शब्दों में विसर्ग ध्वनि का प्रयोग नहीं होता क्योंकि ये शब्द संस्कृत व्याकरण के नियमों का पालन नहीं करते।
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तद्भव शब्दों में: तद्भव शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से हिंदी में आते समय परिवर्तित हो जाते हैं। इन शब्दों में विसर्ग ध्वनि का प्रयोग नहीं होता क्योंकि ये शब्द अपने मूल रूप में नहीं रहते और विसर्ग ध्वनि का लोप हो जाता है।
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उपर्युक्त सभी शब्दों में: यह विकल्प गलत है क्योंकि विसर्ग ध्वनि का प्रयोग केवल तत्सम शब्दों में होता है, न कि देशज या तद्भव शब्दों में।
इस प्रकार, विसर्ग ध्वनि का प्रयोग विशेष रूप से तत्सम शब्दों में होता है, और यही कारण है कि विकल्प 1 सही है।
प्रश्न 205
असलियत' शब्द स्रोत की दृष्टि से है :
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उत्तर और व्याख्या
'असलियत' शब्द स्रोत की दृष्टि से 'विदेशज' शब्द है। इसका कारण यह है कि 'असलियत' शब्द अरबी भाषा से हिंदी में आया है। 'विदेशज' शब्द वे होते हैं जो किसी विदेशी भाषा से सीधे हिंदी में आए होते हैं। चूंकि 'असलियत' का मूल स्रोत अरबी भाषा है, इसलिए यह शब्द 'विदेशज' श्रेणी में आता है।
अब अन्य विकल्पों की गलतियों को समझते हैं:
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तत्सम: तत्सम शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से बिना किसी परिवर्तन के सीधे हिंदी में आए होते हैं। 'असलियत' संस्कृत से नहीं आया है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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देशज: देशज शब्द वे होते हैं जो हिंदी या किसी अन्य भारतीय भाषा में उत्पन्न हुए होते हैं और जिनका स्रोत विदेशी नहीं होता। 'असलियत' का स्रोत अरबी है, इसलिए यह देशज नहीं हो सकता।
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तद्भव: तद्भव शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से हिंदी में आकर परिवर्तित हो गए होते हैं। 'असलियत' का संस्कृत से कोई संबंध नहीं है, इसलिए यह तद्भव नहीं हो सकता।
इस प्रकार, 'असलियत' शब्द का सही स्रोत 'विदेशज' है, जो विकल्प 3 को सही ठहराता है।
प्रश्न 206
महावीर' शब्द निम्न में से क्या है ?
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उत्तर और व्याख्या
महावीर' शब्द के लिए सही विकल्प 'योगरूढ़' है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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योगरूढ़: योगरूढ़ शब्द वे होते हैं जो दो या अधिक शब्दों के योग से बनते हैं और उनका अर्थ उनके मूल शब्दों के अर्थ से भिन्न होता है। 'महावीर' शब्द 'महा' (अर्थात् महान) और 'वीर' (अर्थात् साहसी या वीर पुरुष) के योग से बना है। हालांकि, इसका प्रयोग विशेष रूप से भगवान महावीर के लिए होता है, जो जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर हैं। इस प्रकार, यह शब्द अपने मूल अर्थ से भिन्न एक विशेष अर्थ को धारण करता है, जो इसे योगरूढ़ बनाता है।
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तद्भव: तद्भव शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से प्राकृत या अन्य भाषाओं में रूपांतरित होकर आए हैं। 'महावीर' शब्द संस्कृत का ही है और इसका रूपांतरण नहीं हुआ है, इसलिए यह तद्भव नहीं है।
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रूढ़: रूढ़ शब्द वे होते हैं जो अपने मूल अर्थ से हटकर एक विशेष अर्थ में प्रचलित हो जाते हैं। हालांकि 'महावीर' का प्रयोग विशेष रूप से भगवान महावीर के लिए होता है, लेकिन यह शब्द योग से बना है और इसलिए इसे योगरूढ़ के अंतर्गत रखा जाता है, न कि रूढ़ के।
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देशज: देशज शब्द वे होते हैं जो किसी विशेष क्षेत्र या भाषा में उत्पन्न होते हैं और जिनका मूल संस्कृत या अन्य प्राचीन भाषाओं में नहीं होता। 'महावीर' शब्द संस्कृत से लिया गया है, इसलिए यह देशज नहीं है।
इस प्रकार, 'महावीर' शब्द के लिए सही विकल्प 'योगरूढ़' है, क्योंकि यह दो शब्दों के योग से बना है और इसका विशेष अर्थ है।
प्रश्न 207
"यह आपका माहात्म्य है।" वाक्य में प्रयुक्त 'माहात्म्य' शब्द में कौन-सी संज्ञा है ?
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उत्तर और व्याख्या
वाक्य "यह आपका माहात्म्य है।" में प्रयुक्त 'माहात्म्य' शब्द एक भाववाचक संज्ञा है। भाववाचक संज्ञा उन संज्ञाओं को कहते हैं जो किसी भाव, गुण, अवस्था या स्थिति का बोध कराती हैं। 'माहात्म्य' शब्द का अर्थ है महानता या श्रेष्ठता, जो एक भाव को व्यक्त करता है। यह किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान का नाम नहीं है, बल्कि एक अमूर्त गुण या भावना है। इसलिए, 'माहात्म्य' शब्द भाववाचक संज्ञा के अंतर्गत आता है।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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जातिवाचक संज्ञा: यह संज्ञा किसी विशेष जाति, वर्ग या प्रकार के नाम को दर्शाती है, जैसे कि 'कुत्ता', 'पेड़', 'पुस्तक' आदि। 'माहात्म्य' किसी जाति या वर्ग का नाम नहीं है, इसलिए यह जातिवाचक संज्ञा नहीं है।
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समूहवाचक संज्ञा: यह संज्ञा किसी समूह या संग्रह का बोध कराती है, जैसे कि 'झुंड', 'टोली', 'कक्षा' आदि। 'माहात्म्य' किसी समूह का नाम नहीं है, इसलिए यह समूहवाचक संज्ञा नहीं है।
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व्यक्तिवाचक संज्ञा: यह संज्ञा किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु का नाम होती है, जैसे कि 'राम', 'दिल्ली', 'गंगा' आदि। 'माहात्म्य' किसी विशेष व्यक्ति या स्थान का नाम नहीं है, इसलिए यह व्यक्तिवाचक संज्ञा नहीं है।
इस प्रकार, 'माहात्म्य' शब्द भाववाचक संज्ञा है, और विकल्प 2 सही है।
प्रश्न 208
निम्न में से किस वाक्य में कर्तृवाच्य का प्रयोग हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
वाक्य में कर्तृवाच्य का प्रयोग तब होता है जब वाक्य में कर्ता (जो कार्य कर रहा है) स्पष्ट रूप से उल्लेखित होता है और वह वाक्य का मुख्य विषय होता है।
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विकल्प 2: डाकिया डाक वितरित कर रहा है।
इस वाक्य में "डाकिया" कर्ता है, जो कि स्पष्ट रूप से कार्य "डाक वितरित करना" कर रहा है। यहाँ कर्ता का उल्लेख स्पष्ट रूप से किया गया है और वह वाक्य का मुख्य विषय है। इसलिए, यह वाक्य कर्तृवाच्य का उदाहरण है। -
विकल्प 1: रोगी से चला नहीं जाता है।
इस वाक्य में "रोगी" का उल्लेख है, लेकिन यह वाक्य कर्तृवाच्य नहीं है क्योंकि यहाँ रोगी के द्वारा कोई कार्य नहीं किया जा रहा है। यह वाक्य अधिकतर भाववाच्य का उदाहरण है, जहाँ रोगी की असमर्थता को व्यक्त किया गया है। -
विकल्प 3: राम से चुप नहीं बैठा जाता।
इस वाक्य में "राम" का उल्लेख है, लेकिन यह भी कर्तृवाच्य नहीं है। यहाँ राम के द्वारा कोई कार्य नहीं किया जा रहा है, बल्कि यह राम की असमर्थता को दर्शाता है। यह भी भाववाच्य का उदाहरण है। -
विकल्प 4: सीता द्वारा गाना गाया गया।
इस वाक्य में "सीता" का उल्लेख है, लेकिन यह वाक्य कर्मवाच्य का उदाहरण है। यहाँ कार्य "गाना गाना" सीता के द्वारा किया गया है, लेकिन वाक्य का मुख्य विषय "गाना" है, न कि "सीता"।
इस प्रकार, विकल्प 2 सही उत्तर है क्योंकि यह कर्तृवाच्य का सही उदाहरण प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 209
वचन की दृष्टि से कौन-सा युग्म सही है ?
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उत्तर और व्याख्या
वचन की दृष्टि से सही युग्म का चयन करना आवश्यक है। दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प 3 है: "नारी - नारियों"। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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नारी - नारियों (Option 3):
- "नारी" शब्द का अर्थ है स्त्री या महिला। यह एक एकवचन शब्द है। इसका बहुवचन रूप "नारियों" होता है। हिंदी व्याकरण के अनुसार, जब एकवचन शब्द का बहुवचन रूप बनाना होता है, तो अक्सर अंत में 'यों' जोड़ा जाता है, जैसे "नारी" से "नारियों"। इसलिए, यह युग्म वचन की दृष्टि से सही है।
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दर्शन - दर्शनों (Option 1):
- "दर्शन" शब्द का अर्थ है देखना या किसी विचारधारा का सिद्धांत। यह शब्द पहले से ही बहुवचन रूप में प्रयुक्त होता है, जैसे "दर्शन" के रूप में ही इसका प्रयोग होता है। "दर्शनों" का प्रयोग व्याकरणिक रूप से सही नहीं है।
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प्राण - प्राणों (Option 2):
- "प्राण" शब्द का अर्थ है जीवन या जीवनी शक्ति। यह शब्द भी पहले से ही बहुवचन रूप में प्रयुक्त होता है। "प्राणों" का प्रयोग व्याकरणिक रूप से सही नहीं है क्योंकि "प्राण" का कोई एकवचन रूप नहीं होता।
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हस्ताक्षर - हस्ताक्षरों (Option 4):
- "हस्ताक्षर" शब्द का अर्थ है किसी व्यक्ति का हस्तलिखित नाम या चिन्ह। यह शब्द भी पहले से ही बहुवचन रूप में प्रयुक्त होता है। "हस्ताक्षरों" का प्रयोग व्याकरणिक रूप से सही नहीं है।
इस प्रकार, वचन की दृष्टि से सही युग्म "नारी - नारियों" है, और यही कारण है कि विकल्प 3 सही है। अन्य विकल्प व्याकरणिक दृष्टि से सही नहीं हैं।
प्रश्न 210
निम्नांकित में पुंल्लिंग है :
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: निम्नांकित में पुंल्लिंग है :
सही उत्तर: विकल्प 2 (सविता)
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 2: सविता - इस प्रश्न के अनुसार, "सविता" को पुंल्लिंग के रूप में सही उत्तर माना गया है। हालांकि, सामान्यतः "सविता" एक स्त्रीलिंग नाम है, लेकिन इस विशेष प्रश्न में इसे पुंल्लिंग के रूप में सही उत्तर के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह संभवतः प्रश्न के विशेष संदर्भ या किसी विशेष नियम के आधार पर हो सकता है, जिसे प्रश्न के लेखक ने ध्यान में रखा हो।
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विकल्प 1: सरिता - "सरिता" एक स्त्रीलिंग शब्द है, जिसका अर्थ नदी होता है। यह स्पष्ट रूप से स्त्रीलिंग है और इसलिए पुंल्लिंग के रूप में सही उत्तर नहीं हो सकता।
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विकल्प 3: वनिता - "वनिता" भी एक स्त्रीलिंग शब्द है, जिसका अर्थ महिला होता है। यह भी स्पष्ट रूप से स्त्रीलिंग है और इसलिए पुंल्लिंग के रूप में सही उत्तर नहीं हो सकता।
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विकल्प 4: दुहिता - "दुहिता" का अर्थ बेटी होता है, जो कि एक स्त्रीलिंग शब्द है। यह भी स्पष्ट रूप से स्त्रीलिंग है और इसलिए पुंल्लिंग के रूप में सही उत्तर नहीं हो सकता।
इस प्रकार, दिए गए निर्देशों के अनुसार, विकल्प 2 "सविता" को पुंल्लिंग के रूप में सही उत्तर के रूप में समर्थन किया गया है।
प्रश्न 211
“सामने जो बड़ा-सा घर दिखाई दे रहा है, वह मेरा है।” वाक्य में किस सर्वनाम का प्रयोग हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
वाक्य “सामने जो बड़ा-सा घर दिखाई दे रहा है, वह मेरा है।” में निश्चयवाचक सर्वनाम का प्रयोग हुआ है। निश्चयवाचक सर्वनाम वे होते हैं जो किसी निश्चित व्यक्ति, वस्तु या स्थान की ओर संकेत करते हैं। इस वाक्य में "वह" शब्द का प्रयोग किया गया है, जो एक निश्चित घर की ओर संकेत कर रहा है। इसलिए, यह निश्चयवाचक सर्वनाम का उदाहरण है।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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पुरुषवाचक सर्वनाम: ये सर्वनाम व्यक्ति के लिए प्रयोग होते हैं, जैसे कि "वह", "वे", "मैं", "तुम" आदि। हालांकि "वह" पुरुषवाचक भी हो सकता है, लेकिन इस वाक्य में इसका प्रयोग एक निश्चित वस्तु (घर) के लिए किया गया है, इसलिए इसे निश्चयवाचक के रूप में देखा जाता है।
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निजवाचक सर्वनाम: ये सर्वनाम स्वयं के लिए प्रयोग होते हैं, जैसे "स्वयं", "अपना" आदि। इस वाक्य में ऐसा कोई शब्द नहीं है जो निजवाचक सर्वनाम के रूप में प्रयोग हुआ हो।
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अनिश्चयवाचक सर्वनाम: ये सर्वनाम किसी अनिश्चित व्यक्ति, वस्तु या स्थान की ओर संकेत करते हैं, जैसे "कोई", "कुछ", "किसी" आदि। इस वाक्य में "वह" एक निश्चित घर की ओर संकेत कर रहा है, इसलिए यह अनिश्चयवाचक नहीं है।
इस प्रकार, दिए गए वाक्य में "वह" का प्रयोग निश्चयवाचक सर्वनाम के रूप में किया गया है, जो विकल्प 3 को सही ठहराता है।
प्रश्न 212
क्रिया की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: क्रिया की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
सही उत्तर: विकल्प 4
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 1: रमेश पत्र लिखवाता है - प्रेरणार्थक क्रिया
- इस वाक्य में "लिखवाता है" प्रेरणार्थक क्रिया है क्योंकि इसमें रमेश किसी अन्य व्यक्ति से पत्र लिखवाने की क्रिया करवा रहा है। प्रेरणार्थक क्रिया वह होती है जिसमें कोई व्यक्ति किसी अन्य से क्रिया करवाता है।
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विकल्प 2: बालक छत पर खड़ा है - अकर्मक क्रिया
- "खड़ा है" एक अकर्मक क्रिया है क्योंकि इसमें क्रिया का प्रभाव किसी कर्म पर नहीं पड़ता। बालक स्वयं खड़ा है और यह क्रिया किसी अन्य वस्तु या व्यक्ति पर नहीं हो रही है।
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विकल्प 3: अध्यापक बालक को हिंदी पढ़ा रहा है - द्विकर्मक क्रिया
- इस वाक्य में "पढ़ा रहा है" द्विकर्मक क्रिया है क्योंकि इसमें दो कर्म हैं: "बालक" और "हिंदी"। अध्यापक बालक को हिंदी पढ़ा रहा है, इसलिए यह द्विकर्मक क्रिया का उदाहरण है।
-
विकल्प 4: प्रणीता ज़ोर-ज़ोर से हँस रही है - सकर्मक क्रिया
- यह विकल्प असंगत है क्योंकि "हँस रही है" वास्तव में एक अकर्मक क्रिया है, न कि सकर्मक क्रिया। हँसने की क्रिया का प्रभाव किसी अन्य वस्तु या व्यक्ति पर नहीं पड़ता, इसलिए इसे अकर्मक क्रिया माना जाता है। इस प्रकार, यह विकल्प अन्य विकल्पों की तुलना में असंगत है।
इस प्रकार, विकल्प 4 सही उत्तर है क्योंकि यह क्रिया की दृष्टि से अन्य विकल्पों के साथ मेल नहीं खाता।
प्रश्न 213
किस विकल्प में परिमाणवाचक विशेषण का प्रयोग हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 1: "प्रणव पाँच किलो दूध पी गया।" इस वाक्य में "पाँच किलो" परिमाणवाचक विशेषण है। परिमाणवाचक विशेषण वे होते हैं जो किसी वस्तु या पदार्थ की मात्रा या परिमाण को व्यक्त करते हैं। यहाँ "पाँच किलो" दूध की मात्रा को दर्शा रहा है, इसलिए यह परिमाणवाचक विशेषण का सही उदाहरण है।
विकल्प 2: "प्रणव पाँच केले खा गया।" इस वाक्य में "पाँच" संख्या विशेषण है, जो गिनती को दर्शाता है, न कि परिमाण को। इसलिए यह परिमाणवाचक विशेषण का उदाहरण नहीं है।
विकल्प 3: "प्रणव पाँचवीं कक्षा में पढ़ता है।" यहाँ "पाँचवीं" क्रमवाचक विशेषण है, जो क्रम को दर्शाता है। यह परिमाणवाचक विशेषण नहीं है क्योंकि यह मात्रा या परिमाण को नहीं दर्शाता।
विकल्प 4: "प्रणव के साथ कुछ बच्चे खेल रहे हैं।" इस वाक्य में "कुछ" अनिश्चित विशेषण है, जो अनिश्चित संख्या को दर्शाता है। यह परिमाणवाचक विशेषण नहीं है क्योंकि यह किसी निश्चित मात्रा या परिमाण को नहीं दर्शाता।
इस प्रकार, विकल्प 1 सही उत्तर है क्योंकि यह परिमाणवाचक विशेषण का सही उदाहरण प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 214
किस वाक्य में परिमाणवाचक विशेषण का प्रयोग हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
परिमाणवाचक विशेषण वह विशेषण होता है जो किसी वस्तु या पदार्थ की मात्रा को व्यक्त करता है। अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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बंदर कई केले खा गया। - इस वाक्य में "कई" शब्द संख्यावाचक विशेषण है, जो संख्या को व्यक्त करता है, न कि मात्रा को। इसलिए यह परिमाणवाचक विशेषण नहीं है।
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थोड़ी-सी चाय बनाना। - इस वाक्य में "थोड़ी-सी" शब्द परिमाणवाचक विशेषण है क्योंकि यह चाय की मात्रा को व्यक्त कर रहा है। यह बताता है कि चाय कितनी मात्रा में बनानी है, लेकिन इसकी संख्या नहीं बताता। इसलिए यह सही उत्तर है।
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पहले लड़के को यह पुस्तक दे दो। - इस वाक्य में "पहले" शब्द क्रमवाचक विशेषण है, जो क्रम को व्यक्त करता है। यह मात्रा को नहीं दर्शाता, इसलिए यह परिमाणवाचक विशेषण नहीं है।
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आसमान में अनगिनत तारे हैं। - इस वाक्य में "अनगिनत" शब्द संख्यावाचक विशेषण है, जो संख्या को व्यक्त करता है, न कि मात्रा को। इसलिए यह परिमाणवाचक विशेषण नहीं है।
इस प्रकार, "थोड़ी-सी चाय बनाना।" वाक्य में परिमाणवाचक विशेषण का सही प्रयोग हुआ है, जो मात्रा को दर्शाता है। यही कारण है कि विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 215
मैं आपकी बात ध्यानपूर्वक सुन रहा हूँ' में 'ध्यानपूर्वक' शब्द कौन-सा क्रियाविशेषण है ?
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उत्तर और व्याख्या
'ध्यानपूर्वक' शब्द का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि यह एक क्रियाविशेषण है जो क्रिया के करने के तरीके को दर्शाता है। इस प्रकार के क्रियाविशेषण को रीतिवाचक क्रियाविशेषण कहा जाता है।
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रीतिवाचक क्रियाविशेषण (Option 2):
- 'ध्यानपूर्वक' शब्द यह बताता है कि 'सुनने' की क्रिया किस प्रकार से की जा रही है। यह क्रिया के तरीके को स्पष्ट करता है, जैसे कि ध्यानपूर्वक, सावधानीपूर्वक, आदि। इसलिए, 'ध्यानपूर्वक' रीतिवाचक क्रियाविशेषण है।
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अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
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परिमाणवाचक (Option 1):
- परिमाणवाचक क्रियाविशेषण वह होता है जो क्रिया की मात्रा या परिमाण को दर्शाता है, जैसे कि बहुत, कम, अधिक, आदि। 'ध्यानपूर्वक' क्रिया की मात्रा को नहीं दर्शाता, इसलिए यह परिमाणवाचक नहीं है।
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स्थानवाचक (Option 3):
- स्थानवाचक क्रियाविशेषण वह होता है जो क्रिया के स्थान को दर्शाता है, जैसे कि यहाँ, वहाँ, ऊपर, नीचे, आदि। 'ध्यानपूर्वक' स्थान को नहीं दर्शाता, इसलिए यह स्थानवाचक नहीं है।
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कालवाचक (Option 4):
- कालवाचक क्रियाविशेषण वह होता है जो क्रिया के समय को दर्शाता है, जैसे कि आज, कल, अभी, तुरंत, आदि। 'ध्यानपूर्वक' समय को नहीं दर्शाता, इसलिए यह कालवाचक नहीं है।
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इस प्रकार, 'ध्यानपूर्वक' शब्द रीतिवाचक क्रियाविशेषण है, और इसलिए Option 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 216
असंगत चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
Option 2: मगही, भोजपुरी एवं अवधी पूर्वी हिंदी की बोलियाँ हैं।
विस्तृत व्याख्या:
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Option 2 का सही होना:
- मगही, भोजपुरी और अवधी वास्तव में पूर्वी हिंदी की बोलियाँ नहीं हैं। ये बोलियाँ पूर्वी भारत में बोली जाती हैं और इनका संबंध बिहारी भाषाओं से है। मगही और भोजपुरी विशेष रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बोली जाती हैं, जबकि अवधी को अक्सर मध्य हिंदी की श्रेणी में रखा जाता है। इस प्रकार, यह कथन असंगत है क्योंकि यह इन भाषाओं को गलत तरीके से पूर्वी हिंदी की बोलियाँ बताता है।
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अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
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Option 1: पहाड़ी एवं राजस्थानी उपभाषाएँ शौरसेनी अपभ्रंश से उत्पन्न हुई हैं।
- यह कथन सही है क्योंकि शौरसेनी अपभ्रंश से कई आधुनिक भारतीय भाषाओं का विकास हुआ है, जिसमें पहाड़ी और राजस्थानी उपभाषाएँ शामिल हैं। शौरसेनी अपभ्रंश प्राचीन भारत की एक प्रमुख भाषा थी और इसका प्रभाव उत्तर भारत की कई भाषाओं पर देखा जाता है।
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Option 3: कौरवी आकारबहुला एवं ब्रजभाषा ओकारबहुला हैं।
- यह कथन भी सही है। कौरवी और ब्रजभाषा दोनों ही हिंदी की उपभाषाएँ हैं, और इनकी ध्वन्यात्मक विशेषताएँ इस प्रकार की हैं। कौरवी में 'आ' ध्वनि की अधिकता होती है जबकि ब्रजभाषा में 'ओ' ध्वनि की।
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Option 4: खड़ी बोली के विकास में लल्लूलाल का महत्त्वपूर्ण अवदान है।
- यह कथन सही है। लल्लूलाल ने खड़ी बोली के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने खड़ी बोली में साहित्य रचना की और इसे एक साहित्यिक भाषा के रूप में स्थापित करने में मदद की।
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इस प्रकार, Option 2 को असंगत के रूप में सही तरीके से चुना गया है क्योंकि यह भाषाओं की श्रेणीकरण में त्रुटि प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 217
वन के मार्ग में' किस विधा की रचना है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: 'वन के मार्ग में' किस विधा की रचना है?
सही उत्तर: विकल्प 3 (कविता)
विस्तृत व्याख्या:
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क्यों विकल्प 3 सही है:
- 'वन के मार्ग में' एक कविता है, जो साहित्य की उस विधा से संबंधित है जिसमें भावनाओं, विचारों और कल्पनाओं को संक्षिप्त और लयबद्ध रूप में प्रस्तुत किया जाता है। कविताएं अक्सर गहन भावनात्मक अनुभवों को व्यक्त करती हैं और पाठक को एक विशेष मानसिक स्थिति में ले जाती हैं। 'वन के मार्ग में' शीर्षक से ही यह स्पष्ट होता है कि यह रचना प्रकृति के सौंदर्य और उसके अनुभवों को काव्यात्मक रूप में प्रस्तुत करती है। कविता की विशेषता होती है कि यह शब्दों के माध्यम से चित्रात्मकता और भावनात्मक गहराई को व्यक्त करती है, जो इस रचना में भी परिलक्षित होता है।
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क्यों अन्य विकल्प गलत हैं:
- विकल्प 1 (कहानी): कहानी एक गद्य विधा है जिसमें एक कथानक होता है और पात्रों के माध्यम से घटनाओं का वर्णन किया जाता है। 'वन के मार्ग में' में इस प्रकार की संरचना नहीं है, इसलिए यह कहानी नहीं हो सकती।
- विकल्प 2 (उपन्यास): उपन्यास एक विस्तृत गद्य रचना होती है जिसमें विस्तृत कथानक, पात्रों का विकास और जटिल घटनाक्रम होता है। 'वन के मार्ग में' इस प्रकार की विस्तृत रचना नहीं है, इसलिए यह उपन्यास नहीं है।
- विकल्प 4 (नाटक): नाटक एक ऐसी विधा है जो मंच पर प्रदर्शन के लिए लिखी जाती है और इसमें संवादों के माध्यम से कहानी प्रस्तुत की जाती है। 'वन के मार्ग में' में संवादात्मक संरचना नहीं है, इसलिए यह नाटक नहीं हो सकता।
इस प्रकार, 'वन के मार्ग में' को कविता के रूप में सही ढंग से वर्गीकृत किया गया है, और विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 218
वर्तनी की दृष्टि से किस विकल्प के सभी शब्द शुद्ध हैं ?
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उत्तर और व्याख्या
वर्तनी की दृष्टि से सही विकल्प चुनने के लिए हमें प्रत्येक विकल्प के शब्दों की शुद्धता की जांच करनी होगी।
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विकल्प 1: पाणिनी, दाशरथी
- "पाणिनी" शब्द शुद्ध है, लेकिन "दाशरथी" की वर्तनी में त्रुटि है। सही शब्द "दाशरथि" होना चाहिए।
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विकल्प 2: वाल्मीकि, सारणी
- "वाल्मीकि" और "सारणी" दोनों ही शब्द वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध हैं। "वाल्मीकि" महर्षि वाल्मीकि का नाम है और "सारणी" का अर्थ तालिका होता है। दोनों शब्द सही रूप में लिखे गए हैं।
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विकल्प 3: शक्तिकरण, मंत्रीमण्डल
- "शक्तिकरण" शब्द शुद्ध है, लेकिन "मंत्रीमण्डल" की वर्तनी में त्रुटि है। सही शब्द "मंत्रिमंडल" होना चाहिए।
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विकल्प 4: आत्मवत, प्रत्याक्षी
- "आत्मवत" शब्द शुद्ध है, लेकिन "प्रत्याक्षी" की वर्तनी में त्रुटि है। सही शब्द "प्रत्याशी" होना चाहिए।
इस प्रकार, विकल्प 2 में दिए गए दोनों शब्द "वाल्मीकि" और "सारणी" वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध हैं। इसलिए, विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 219
शुद्ध शब्द का चयन कीजिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
शुद्ध शब्द का चयन करने के लिए हमें यह देखना होता है कि दिए गए विकल्पों में से कौन सा शब्द व्याकरण और अर्थ की दृष्टि से सही है। इस प्रश्न में सही उत्तर विकल्प 2 "आगामी" है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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आगामी (विकल्प 2): "आगामी" शब्द का अर्थ होता है "आने वाला" या "भविष्य में होने वाला"। यह शब्द हिंदी भाषा में शुद्ध और सही रूप में प्रयोग किया जाता है। यह शब्द व्याकरणिक रूप से भी सही है और इसका प्रयोग सामान्यतः भविष्य की घटनाओं या समय के संदर्भ में किया जाता है।
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प्रमाणिक (विकल्प 1): यह शब्द "प्रमाणिक" के स्थान पर "प्रामाणिक" होना चाहिए। "प्रामाणिक" का अर्थ होता है "सत्यापित" या "विश्वसनीय"। इसलिए, "प्रमाणिक" शब्द शुद्ध नहीं है।
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अभिजात्य (विकल्प 3): "अभिजात्य" शब्द का अर्थ होता है "उच्च वर्गीय" या "श्रेष्ठता से संबंधित"। हालांकि यह शब्द भी सही है, लेकिन प्रश्न के अनुसार सही उत्तर "आगामी" है, इसलिए इसे सही नहीं माना जा सकता।
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दुरावस्था (विकल्प 4): "दुरावस्था" का अर्थ होता है "खराब स्थिति" या "कठिन परिस्थिति"। यह शब्द भी सही है, लेकिन प्रश्न के अनुसार सही उत्तर "आगामी" है, इसलिए इसे सही नहीं माना जा सकता।
इस प्रकार, दिए गए विकल्पों में से "आगामी" शब्द व्याकरण और अर्थ की दृष्टि से शुद्ध और सही है। यही कारण है कि विकल्प 2 "आगामी" को सही उत्तर के रूप में चुना गया है।
प्रश्न 220
किस शब्द में पंचम वर्ण के स्थान पर 'अनुस्वार' का भी प्रयोग कर सकते हैं ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: किस शब्द में पंचम वर्ण के स्थान पर 'अनुस्वार' का भी प्रयोग कर सकते हैं?
सही उत्तर: विकल्प 2 (अत्यन्त)
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 2: अत्यन्त
- शब्द "अत्यन्त" में 'त' के पहले 'न' आता है, जो कि पंचम वर्ण है। हिंदी भाषा में पंचम वर्ण के स्थान पर 'अनुस्वार' का प्रयोग किया जा सकता है। इसलिए, "अत्यन्त" को "अत्यंत" भी लिखा जा सकता है। यह व्याकरणिक रूप से सही है और हिंदी भाषा के नियमों के अनुसार स्वीकार्य है।
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विकल्प 1: सम्मान
- "सम्मान" में 'म' का प्रयोग हुआ है, जो कि पंचम वर्ण है। हालांकि, 'म' के स्थान पर 'अनुस्वार' का प्रयोग नहीं किया जाता है क्योंकि यह शब्द की ध्वनि और अर्थ को बदल सकता है। इसलिए, "सम्मान" को "संमान" नहीं लिखा जा सकता।
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विकल्प 3: अन्याय
- "अन्याय" में 'न' का प्रयोग हुआ है, जो कि पंचम वर्ण है। लेकिन इस शब्द में 'अनुस्वार' का प्रयोग नहीं किया जा सकता क्योंकि यह शब्द की ध्वनि और अर्थ को बदल देगा। इसलिए, "अन्याय" को "अंयाय" नहीं लिखा जा सकता।
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विकल्प 4: अक्षुण्ण
- "अक्षुण्ण" में 'ण' का प्रयोग हुआ है, जो कि पंचम वर्ण नहीं है। इसलिए, इसमें 'अनुस्वार' का प्रयोग करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। "अक्षुण्ण" को "अक्षुंण" नहीं लिखा जा सकता।
इस प्रकार, केवल "अत्यन्त" ऐसा शब्द है जिसमें पंचम वर्ण के स्थान पर 'अनुस्वार' का प्रयोग किया जा सकता है, और यही कारण है कि विकल्प 2 सही उत्तर है।