HTET परीक्षा Level 2 TGT
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 2 TGT की तैयारी
सत्यापित उत्तर और व्याख्याएँ
Clear Cutoff द्वारा
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प्रश्न 221
मानकीकृत देवनागरी लिपि के संदर्भ में असंगत विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
मानकीकृत देवनागरी लिपि के संदर्भ में दिए गए विकल्पों में से असंगत विकल्प चुनने के लिए हमें प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण करना होगा। सही उत्तर विकल्प 2 है, और हम इसे सही ठहराने के लिए निम्नलिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करेंगे:
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विकल्प 1: हिंदी के शब्दों में उचित ढंग से चन्द्रबिन्दु का प्रयोग आवश्यक है।
- यह विकल्प सही है क्योंकि हिंदी में चन्द्रबिन्दु का प्रयोग अनुनासिक ध्वनियों को दर्शाने के लिए किया जाता है। यह मानकीकृत देवनागरी लिपि का एक आवश्यक हिस्सा है और इसका सही प्रयोग भाषा की शुद्धता और स्पष्टता के लिए आवश्यक है।
-
विकल्प 2: अनुनासिक स्वरों का ध्वनिगुण है एवं इनका उच्चारण स्थल केवल नासिका है।
- यह विकल्प असंगत है क्योंकि अनुनासिक स्वरों का उच्चारण केवल नासिका से नहीं होता। अनुनासिक ध्वनियों में मुख और नासिका दोनों का योगदान होता है। इसलिए, यह कथन गलत है और यही कारण है कि इसे असंगत विकल्प के रूप में चुना गया है।
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विकल्प 3: संस्कृतमूलक तत्सम शब्दों की वर्तनी को ज्यों का त्यों ग्रहण किया जाए।
- यह विकल्प सही है क्योंकि मानकीकृत देवनागरी लिपि में संस्कृतमूलक तत्सम शब्दों की वर्तनी को ज्यों का त्यों अपनाया जाता है। यह भाषा की शुद्धता और परंपरा को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
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विकल्प 4: पूर्ण विराम को छोड़कर शेष विरामादि चिह्न अँगरेज़ी के ही प्रचलित होंगे।
- यह विकल्प सही है क्योंकि आधुनिक हिंदी लेखन में पूर्ण विराम को छोड़कर अन्य विराम चिह्न जैसे कि अल्पविराम, प्रश्नवाचक चिह्न आदि अंग्रेजी के समान ही उपयोग किए जाते हैं। यह लेखन को सरल और सार्वभौमिक बनाने के लिए किया जाता है।
इस प्रकार, विकल्प 2 को असंगत विकल्प के रूप में सही ठहराया गया है क्योंकि यह अनुनासिक स्वरों के उच्चारण के बारे में गलत जानकारी प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 222
किस शब्द में 'अन्' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: किस शब्द में 'अन्' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है?
सही उत्तर: विकल्प 4 (अनुगमन)
व्याख्या:
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अनुत्तर: इस शब्द में 'अन्' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। 'उत्तर' का अर्थ होता है जवाब, और 'अनुत्तर' का अर्थ होता है जिसका उत्तर न दिया जा सके या जो उत्तरहीन हो। यहाँ 'अन्' उपसर्ग का प्रयोग उत्तर के विपरीत अर्थ देने के लिए किया गया है।
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अनुपम: इस शब्द में भी 'अन्' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। 'उपम' का अर्थ होता है तुलना, और 'अनुपम' का अर्थ होता है जिसकी कोई तुलना न हो सके, अर्थात अद्वितीय। यहाँ 'अन्' उपसर्ग का प्रयोग उपम के विपरीत अर्थ देने के लिए किया गया है।
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अनुद्धार: इस शब्द में 'अन्' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। 'उद्धार' का अर्थ होता है बचाव या मुक्ति, और 'अनुद्धार' का अर्थ होता है जिसका उद्धार न हो सके। यहाँ 'अन्' उपसर्ग का प्रयोग उद्धार के विपरीत अर्थ देने के लिए किया गया है।
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अनुगमन: इस शब्द में 'अन्' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है। 'अनुगमन' का अर्थ होता है अनुसरण करना या पीछे-पीछे चलना। यहाँ 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है, जो किसी के पीछे चलने या अनुसरण करने के अर्थ में प्रयुक्त होता है। इसलिए, 'अनुगमन' में 'अन्' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है।
इस प्रकार, विकल्प 4 'अनुगमन' सही उत्तर है क्योंकि इसमें 'अन्' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है।
प्रश्न 223
निम्न शब्दों में से किसमें 'सु' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: निम्न शब्दों में से किसमें 'सु' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है?
सही उत्तर: विकल्प 3 (स्वस्थ)
व्याख्या:
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विकल्प 3: स्वस्थ
'स्वस्थ' शब्द में 'सु' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है। 'स्वस्थ' का अर्थ होता है 'स्वास्थ्यपूर्ण' या 'अच्छी स्थिति में होना'। यह शब्द 'स्व' (अर्थात स्वयं) और 'स्थ' (अर्थात स्थित) से मिलकर बना है। इसमें 'सु' उपसर्ग का कोई योगदान नहीं है, इसलिए यह सही उत्तर है। -
विकल्प 1: स्वच्छ
'स्वच्छ' शब्द में 'सु' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। 'स्वच्छ' का अर्थ होता है 'साफ' या 'निर्मल'। यहाँ 'सु' उपसर्ग का अर्थ है 'अच्छा' या 'शुद्ध', जो 'च्छ' (अर्थात साफ) के साथ मिलकर 'स्वच्छ' बनता है। -
विकल्प 2: स्वस्ति
'स्वस्ति' शब्द में भी 'सु' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। 'स्वस्ति' का अर्थ होता है 'कल्याण' या 'शुभ'। यहाँ 'सु' उपसर्ग का अर्थ है 'अच्छा' या 'शुभ', जो 'अस्ति' (अर्थात होना) के साथ मिलकर 'स्वस्ति' बनता है। -
विकल्प 4: स्वल्प
'स्वल्प' शब्द में 'सु' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। 'स्वल्प' का अर्थ होता है 'थोड़ा' या 'कम'। यहाँ 'सु' उपसर्ग का अर्थ है 'अच्छा' या 'थोड़ा', जो 'अल्प' (अर्थात कम) के साथ मिलकर 'स्वल्प' बनता है।
इस प्रकार, 'स्वस्थ' वह शब्द है जिसमें 'सु' उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है, और यही कारण है कि विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 224
किस विकल्प में भाववाचक तद्धित प्रत्यय का प्रयोग हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
भाववाचक तद्धित प्रत्यय का प्रयोग उस स्थिति में होता है जब किसी शब्द में भाव या गुण को व्यक्त करने के लिए तद्धित प्रत्यय जोड़ा जाता है। आइए दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करें:
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बुलावा: यह शब्द 'बुलाना' क्रिया से बना है और इसमें 'आवा' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। यह किसी को बुलाने की क्रिया को दर्शाता है, न कि किसी भाव को।
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चचेरा: यह शब्द 'चाचा' से बना है और इसमें 'एरा' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। यह रिश्ते को दर्शाता है, न कि किसी भाव को।
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सौजन्य: यह शब्द 'सौ' और 'जन' से बना है और इसमें 'य' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। यह शब्द 'सौजन्य' का अर्थ है 'शिष्टाचार' या 'विनम्रता', जो कि एक भाव को व्यक्त करता है। इसलिए, यह भाववाचक तद्धित प्रत्यय का सही उदाहरण है।
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लखेरा: यह शब्द 'लख' से बना है और इसमें 'एरा' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। यह किसी विशेषता या गुण को नहीं दर्शाता है।
इस प्रकार, विकल्प 3 'सौजन्य' में भाववाचक तद्धित प्रत्यय का प्रयोग हुआ है क्योंकि यह एक भाव या गुण को व्यक्त करता है, जो कि शिष्टाचार या विनम्रता है। यही कारण है कि विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 225
किस शब्द में 'ई' प्रत्यय नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: किस शब्द में 'ई' प्रत्यय नहीं है ?
सही उत्तर: विकल्प 2 (चाँदनी)
व्याख्या:
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चाँदनी (विकल्प 2): 'चाँदनी' शब्द में 'ई' प्रत्यय नहीं है। 'चाँदनी' शब्द का मूल रूप 'चाँद' है, और इसमें 'नी' प्रत्यय जुड़ा हुआ है। यहाँ 'ई' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है, इसलिए यह सही उत्तर है।
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जानकी (विकल्प 1): 'जानकी' शब्द में 'ई' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। 'जानक' शब्द में 'ई' प्रत्यय जोड़कर 'जानकी' बना है, जो कि 'जनक' की पुत्री के लिए प्रयुक्त होता है।
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गांधारी (विकल्प 3): 'गांधारी' शब्द में भी 'ई' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। 'गांधार' शब्द में 'ई' प्रत्यय जोड़कर 'गांधारी' बना है, जो कि गांधार देश की राजकुमारी के लिए प्रयुक्त होता है।
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पार्वती (विकल्प 4): 'पार्वती' शब्द में भी 'ई' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। 'पर्वत' शब्द में 'ई' प्रत्यय जोड़कर 'पार्वती' बना है, जो कि पर्वत की पुत्री के लिए प्रयुक्त होता है।
इस प्रकार, 'चाँदनी' एकमात्र ऐसा शब्द है जिसमें 'ई' प्रत्यय नहीं है, और इसलिए यह सही उत्तर है।
प्रश्न 226
प्रत्यय की दृष्टि से संगत विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: प्रत्यय की दृष्टि से संगत विकल्प चुनिए :
सही उत्तर: विकल्प 1
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 1: अनुष्ठाता, अधिष्ठाता, उपभोक्ता में 'तृच्' प्रत्यययुक्त शब्द हैं।
- 'तृच्' प्रत्यय का प्रयोग क्रिया के कर्ता या करने वाले के अर्थ में होता है। उदाहरण के लिए:
- 'अनुष्ठाता' का अर्थ है अनुष्ठान करने वाला।
- 'अधिष्ठाता' का अर्थ है अधिष्ठान करने वाला।
- 'उपभोक्ता' का अर्थ है उपभोग करने वाला।
- इन सभी शब्दों में 'तृच्' प्रत्यय का सही प्रयोग हुआ है, इसलिए यह विकल्प सही है।
- 'तृच्' प्रत्यय का प्रयोग क्रिया के कर्ता या करने वाले के अर्थ में होता है। उदाहरण के लिए:
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विकल्प 2: वैनतेय, रांगेय, पौरुषेय में 'य' प्रत्यय है।
- 'य' प्रत्यय का प्रयोग विशेषण बनाने के लिए होता है, जो किसी विशेष गुण या संबंध को दर्शाता है। हालांकि, दिए गए शब्दों में 'य' प्रत्यय का सही प्रयोग नहीं है। उदाहरण के लिए:
- 'वैनतेय' का अर्थ गरुड़ से संबंधित है, लेकिन यह 'य' प्रत्यय का उदाहरण नहीं है।
- 'रांगेय' और 'पौरुषेय' में भी 'य' प्रत्यय का सही प्रयोग नहीं है।
- 'य' प्रत्यय का प्रयोग विशेषण बनाने के लिए होता है, जो किसी विशेष गुण या संबंध को दर्शाता है। हालांकि, दिए गए शब्दों में 'य' प्रत्यय का सही प्रयोग नहीं है। उदाहरण के लिए:
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विकल्प 3: कात्यायन, सांस्कृत्यायन, बादरायण में 'अन' प्रत्यय है।
- 'अन' प्रत्यय का प्रयोग सामान्यतः संज्ञा बनाने के लिए होता है। हालांकि, दिए गए शब्दों में 'अन' प्रत्यय का सही प्रयोग नहीं है। ये शब्द विशेष नाम हैं और इनमें 'अन' प्रत्यय का प्रयोग नहीं होता।
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विकल्प 4: दिखाई, पिटाई, जुताई में 'ई' प्रत्यय है।
- 'ई' प्रत्यय का प्रयोग क्रिया के परिणामस्वरूप होने वाली क्रिया या प्रक्रिया को दर्शाने के लिए होता है। हालांकि, यह प्रत्यय इन शब्दों में सही रूप से नहीं दर्शाया गया है। ये शब्द क्रिया के परिणामस्वरूप होने वाली प्रक्रिया को दर्शाते हैं, लेकिन 'ई' प्रत्यय का सही उदाहरण नहीं हैं।
इस प्रकार, केवल विकल्प 1 में 'तृच्' प्रत्यय का सही और सटीक प्रयोग हुआ है, इसलिए यह सही उत्तर है।
प्रश्न 227
जाह्नवी' शब्द का पर्याय है :
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उत्तर और व्याख्या
जाह्नवी' शब्द का पर्याय 'मंदाकिनी' है। इसका कारण यह है कि 'जाह्नवी' और 'मंदाकिनी' दोनों ही गंगा नदी के पर्यायवाची शब्द हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, गंगा नदी को 'जाह्नवी' इसलिए कहा जाता है क्योंकि ऋषि 'जाह्नु' ने गंगा को अपने कमंडल में समाहित कर लिया था और बाद में उसे पुनः प्रवाहित किया। इसी प्रकार, 'मंदाकिनी' भी गंगा का एक अन्य नाम है, जो उसकी शीतल और शांत धारा को दर्शाता है।
अब अन्य विकल्पों की बात करें:
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कुमुदनी: 'कुमुदनी' का अर्थ है 'कमलिनी' या 'कमल का फूल'। यह गंगा का पर्याय नहीं है, बल्कि एक प्रकार के फूल का नाम है।
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पथगामिनी: 'पथगामिनी' का अर्थ है 'पथ पर चलने वाली'। यह एक सामान्य विशेषण है और किसी विशेष नदी का नाम नहीं है।
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नलनी: 'नलनी' का अर्थ भी 'कमलिनी' या 'कमल का फूल' होता है। यह भी गंगा का पर्याय नहीं है।
इस प्रकार, 'जाह्नवी' का सही पर्यायवाची 'मंदाकिनी' ही है, जो गंगा नदी के लिए प्रयुक्त होता है।
प्रश्न 228
विलोम की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विलोम शब्दों का अर्थ होता है विपरीत अर्थ वाले शब्द। दिए गए विकल्पों में से हमें असंगत विलोम शब्दों का युग्म चुनना है।
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ग्रस्त - मुक्त: 'ग्रस्त' का अर्थ होता है किसी चीज़ से प्रभावित या पकड़ा हुआ, जबकि 'मुक्त' का अर्थ होता है स्वतंत्र या आज़ाद। ये दोनों शब्द एक-दूसरे के विलोम हैं।
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व्यष्टि - समष्टि: 'व्यष्टि' का अर्थ होता है व्यक्तिगत या एकल इकाई, जबकि 'समष्टि' का अर्थ होता है सामूहिक या समूह। ये दोनों शब्द भी एक-दूसरे के विलोम हैं।
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आविर्भाव – तिरोभूत: 'आविर्भाव' का अर्थ होता है प्रकट होना या सामने आना, जबकि 'तिरोभूत' का अर्थ होता है गायब होना या अदृश्य होना। ये दोनों शब्द एक-दूसरे के विलोम नहीं हैं, क्योंकि 'तिरोभूत' का सही विलोम 'प्रकट' होता है। इसलिए यह युग्म असंगत है।
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अर्वाचीन - प्राचीन: 'अर्वाचीन' का अर्थ होता है नया या आधुनिक, जबकि 'प्राचीन' का अर्थ होता है पुराना या प्राचीनकाल का। ये दोनों शब्द एक-दूसरे के विलोम हैं।
इस प्रकार, विकल्प 3 'आविर्भाव – तिरोभूत' असंगत विलोम शब्दों का युग्म है, क्योंकि ये शब्द सही विलोम नहीं बनाते। यही कारण है कि विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 229
जिज्ञासा' का सटीक समानार्थी है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'जिज्ञासा' का सटीक समानार्थी 'ज्ञानेप्सा' है। इसका कारण यह है कि 'जिज्ञासा' का अर्थ होता है किसी विषय के प्रति जानने की तीव्र इच्छा या उत्सुकता। इसी प्रकार, 'ज्ञानेप्सा' का अर्थ भी ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा या लालसा होता है। दोनों शब्दों में ज्ञान के प्रति आकर्षण और उसे प्राप्त करने की तीव्र इच्छा का भाव निहित है, इसलिए 'ज्ञानेप्सा' 'जिज्ञासा' का सटीक समानार्थी है।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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उत्कंठा: यह शब्द किसी चीज़ के प्रति तीव्र इच्छा या उत्सुकता को दर्शाता है, लेकिन यह विशेष रूप से ज्ञान के प्रति नहीं होता। उत्कंठा का प्रयोग सामान्यतः किसी भी प्रकार की तीव्र इच्छा के लिए किया जा सकता है, जो कि 'जिज्ञासा' के विशेष अर्थ से मेल नहीं खाता।
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वांछा: वांछा का अर्थ होता है किसी चीज़ की इच्छा या चाहत। यह शब्द भी सामान्य इच्छा को दर्शाता है और यह विशेष रूप से ज्ञान के प्रति नहीं होता, इसलिए यह 'जिज्ञासा' का सटीक समानार्थी नहीं है।
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इच्छा: यह शब्द भी सामान्य रूप से किसी भी प्रकार की चाहत या आकांक्षा को व्यक्त करता है। यह शब्द भी ज्ञान के प्रति विशेष रूप से नहीं होता, इसलिए यह 'जिज्ञासा' का सटीक समानार्थी नहीं है।
इस प्रकार, 'ज्ञानेप्सा' ही 'जिज्ञासा' का सटीक समानार्थी है क्योंकि यह विशेष रूप से ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा को दर्शाता है।
प्रश्न 230
विजन' का अर्थ बताएँ :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विजन' का अर्थ 'सुनसान स्थान' होता है, जो विकल्प 3 के रूप में सही उत्तर है। यहाँ पर हम इस उत्तर को सही ठहराने के लिए विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत करेंगे:
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विकल्प 3: सुनसान स्थान - 'विजन' का अर्थ 'सुनसान स्थान' होता है। यह शब्द अक्सर उन स्थानों के लिए उपयोग किया जाता है जो निर्जन या खाली होते हैं, जहाँ कोई व्यक्ति या गतिविधि नहीं होती। इस प्रकार, 'विजन' का सही अर्थ 'सुनसान स्थान' है, जो विकल्प 3 को सही ठहराता है।
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विकल्प 1: दृष्टि - 'दृष्टि' का अर्थ देखने की क्षमता या नजर होता है। यह 'विजन' के अर्थ से मेल नहीं खाता क्योंकि 'विजन' का अर्थ 'सुनसान स्थान' है, न कि देखने की क्षमता।
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विकल्प 2: खाद्य पदार्थ - 'खाद्य पदार्थ' का अर्थ खाने योग्य वस्तुएँ होता है। यह भी 'विजन' के अर्थ से संबंधित नहीं है क्योंकि 'विजन' का अर्थ 'सुनसान स्थान' है, न कि खाने की वस्तुएँ।
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विकल्प 4: ऊसर - 'ऊसर' का अर्थ बंजर या अनुपजाऊ भूमि होता है। हालांकि यह 'सुनसान स्थान' के करीब हो सकता है, लेकिन 'विजन' का विशेष अर्थ 'सुनसान स्थान' है, जो विकल्प 3 को सही ठहराता है।
इस प्रकार, 'विजन' का सही अर्थ 'सुनसान स्थान' है, और विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 231
मतंग' किस शब्द का पर्याय है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'मतंग' शब्द का पर्यायवाची 'हाथी' है, जो विकल्प 2 के रूप में दिया गया है। यहाँ पर हम इस उत्तर को सही ठहराने के लिए विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत करेंगे:
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मतंग का अर्थ और उपयोग:
- 'मतंग' शब्द का संस्कृत में अर्थ होता है 'हाथी'। यह शब्द प्राचीन ग्रंथों और साहित्य में हाथी के लिए प्रयुक्त होता रहा है। हाथी को उसकी विशालता और शक्ति के कारण 'मतंग' कहा जाता है।
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अन्य विकल्पों की असंगति:
- विकल्प 1: सूर्य - 'सूर्य' के लिए संस्कृत में 'सूर्य', 'आदित्य', 'रवि' आदि शब्दों का प्रयोग होता है। 'मतंग' का सूर्य से कोई संबंध नहीं है।
- विकल्प 3: हिरण - 'हिरण' के लिए संस्कृत में 'मृग', 'हरिण' आदि शब्द होते हैं। 'मतंग' का अर्थ हिरण नहीं होता।
- विकल्प 4: राक्षस - 'राक्षस' के लिए संस्कृत में 'असुर', 'दानव' आदि शब्द होते हैं। 'मतंग' का राक्षस से कोई संबंध नहीं है।
इस प्रकार, 'मतंग' का सही पर्यायवाची 'हाथी' है, जो विकल्प 2 के रूप में सही उत्तर है।
प्रश्न 232
विलोम शब्द-युग्म नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विलोम शब्द-युग्म का अर्थ होता है ऐसे शब्दों का जोड़े जो एक-दूसरे के विपरीत अर्थ रखते हैं। दिए गए विकल्पों में से हमें यह पहचानना है कि कौन सा जोड़ा विलोम शब्द-युग्म नहीं है।
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संस्कृति – विकृति:
- "संस्कृति" का अर्थ होता है सभ्यता, परंपरा, और विकास। इसके विपरीत, "विकृति" का अर्थ होता है विकार या बिगाड़। ये दोनों शब्द एक-दूसरे के विपरीत अर्थ रखते हैं, इसलिए यह एक सही विलोम शब्द-युग्म है।
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निराशा – आशावान:
- "निराशा" का अर्थ होता है हताशा या उम्मीद का न होना। जबकि "आशावान" का अर्थ होता है उम्मीद से भरा हुआ या आशा रखने वाला। हालांकि ये शब्द विपरीत भाव रखते हैं, लेकिन सही विलोम शब्द-युग्म "निराशा – आशा" होता। "आशावान" एक विशेषण है और "निराशा" एक संज्ञा है, इसलिए यह सही विलोम शब्द-युग्म नहीं है।
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नैसर्गिक – कृत्रिम:
- "नैसर्गिक" का अर्थ होता है प्राकृतिक या स्वाभाविक। इसके विपरीत, "कृत्रिम" का अर्थ होता है बनावटी या मानव निर्मित। ये दोनों शब्द एक-दूसरे के विपरीत अर्थ रखते हैं, इसलिए यह एक सही विलोम शब्द-युग्म है।
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विहित – निषिद्ध:
- "विहित" का अर्थ होता है निर्धारित या स्वीकृत। इसके विपरीत, "निषिद्ध" का अर्थ होता है प्रतिबंधित या मना किया हुआ। ये दोनों शब्द एक-दूसरे के विपरीत अर्थ रखते हैं, इसलिए यह एक सही विलोम शब्द-युग्म है।
इस प्रकार, विकल्प 2 "निराशा – आशावान" विलोम शब्द-युग्म नहीं है क्योंकि यह सही विलोम शब्द-युग्म नहीं बनाता है।
प्रश्न 233
‘युद्ध करने की इच्छा रखने वाले’ को कहा जाता है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
‘युद्ध करने की इच्छा रखने वाले’ को ‘युयुत्सु’ कहा जाता है। यह शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है, जिसमें 'यु' का अर्थ होता है 'युद्ध' और 'उत्सु' का अर्थ होता है 'इच्छा रखने वाला'। इसलिए, 'युयुत्सु' का अर्थ होता है 'युद्ध करने की इच्छा रखने वाला'।
अब हम अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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विजीगिषु: यह शब्द 'विजय' से संबंधित है, जिसका अर्थ होता है 'विजय प्राप्त करने की इच्छा रखने वाला'। यह युद्ध करने की इच्छा से अलग है क्योंकि यह विशेष रूप से विजय प्राप्त करने की इच्छा को दर्शाता है।
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युयुत्सा: यह शब्द 'युयुत्सु' का एक रूपांतर हो सकता है, लेकिन यह सही शब्द नहीं है। सही शब्द 'युयुत्सु' है, जो विशेष रूप से युद्ध करने की इच्छा को दर्शाता है।
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मुमूर्षु: यह शब्द 'मृत्यु' से संबंधित है, जिसका अर्थ होता है 'मृत्यु की इच्छा रखने वाला'। यह युद्ध से संबंधित नहीं है और इसलिए इस संदर्भ में गलत है।
इस प्रकार, 'युयुत्सु' (विकल्प 3) सही उत्तर है क्योंकि यह विशेष रूप से युद्ध करने की इच्छा को दर्शाता है।
प्रश्न 234
निम्न में से कौन-सी रचना मतिराम की है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
मतिराम एक प्रसिद्ध हिंदी कवि थे, जिनकी रचनाएँ ब्रज भाषा में लिखी गई हैं। उनके साहित्यिक योगदान में "ललितललाम" एक महत्वपूर्ण कृति है। इस रचना में मतिराम ने अपने समय की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों का वर्णन किया है। "ललितललाम" में भाषा की सरलता और भावों की गहराई देखने को मिलती है, जो मतिराम की लेखनी की विशेषता है। इसलिए, विकल्प 3 "ललितललाम" को मतिराम की रचना के रूप में सही माना गया है।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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सुजानचरित: यह रचना कवि सुजान के जीवन और कार्यों पर आधारित है, लेकिन यह मतिराम की रचना नहीं है। यह किसी अन्य कवि द्वारा लिखी गई हो सकती है।
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कविप्रिया: यह रचना केशवदास की है, जो एक अन्य प्रसिद्ध हिंदी कवि थे। केशवदास की "कविप्रिया" में रस, अलंकार और काव्यशास्त्र का विस्तृत वर्णन है, लेकिन यह मतिराम की रचना नहीं है।
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जगत विनोद: यह भी मतिराम की रचना नहीं है। यह किसी अन्य कवि की रचना हो सकती है, जो उस समय के साहित्यिक परिदृश्य का हिस्सा थी।
इस प्रकार, "ललितललाम" को मतिराम की रचना के रूप में सही विकल्प माना गया है, और अन्य विकल्प उनके द्वारा रचित नहीं हैं।
प्रश्न 235
असंगत विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
असंगत विकल्प चुनिए :
Options:
- उपमा अलंकार को राजशेखर अलंकारों का 'शिरोरत्न' कहते हैं।
- उपमेय के अन्तर्गत अप्रस्तुत वस्तु वर्णन किया जाता है।
- “जनम सिंधु पुनि बंधु विष दिन मलीन सकलंक।
सिय मुख समता पाव किमि चंद बापुरो रंक।।”
में व्यतिरेक अलंकार है। - “कोटि जतन कोउ करै, परै न प्रकृतिहिं बीच।
नलबलजल ऊँचो चढ़े, अंत नीच को नीच।।”
में अर्थान्तरन्यास अलंकार है।
Correct Answer: Option 2
Explanation:
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Option 1: "उपमा अलंकार को राजशेखर अलंकारों का 'शिरोरत्न' कहते हैं।" - यह कथन सही है क्योंकि उपमा अलंकार को साहित्य में विशेष महत्व दिया गया है और इसे अलंकारों का 'शिरोरत्न' कहा जाता है। यह उपमेय और उपमान के बीच समानता स्थापित करता है।
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Option 2: "उपमेय के अन्तर्गत अप्रस्तुत वस्तु वर्णन किया जाता है।" - यह कथन असंगत है क्योंकि उपमेय वह वस्तु होती है जिसकी तुलना की जाती है, जबकि अप्रस्तुत वस्तु वर्णन का संबंध अन्य अलंकारों से होता है, जैसे कि रूपक या अन्य। उपमेय में अप्रस्तुत वस्तु का वर्णन नहीं किया जाता है, बल्कि यह उपमान के साथ तुलना के लिए प्रयुक्त होता है।
-
Option 3: "“जनम सिंधु पुनि बंधु विष दिन मलीन सकलंक। सिय मुख समता पाव किमि चंद बापुरो रंक।।” में व्यतिरेक अलंकार है।" - यह कथन सही है क्योंकि इस पंक्ति में व्यतिरेक अलंकार का प्रयोग हुआ है, जहाँ चंद्रमा की तुलना सीता के मुख से की गई है और चंद्रमा को रंक कहा गया है।
-
Option 4: "“कोटि जतन कोउ करै, परै न प्रकृतिहिं बीच। नलबलजल ऊँचो चढ़े, अंत नीच को नीच।।” में अर्थान्तरन्यास अलंकार है।" - यह कथन सही है क्योंकि इस पंक्ति में अर्थान्तरन्यास अलंकार का प्रयोग हुआ है, जहाँ एक विचार को स्पष्ट करने के लिए दूसरा विचार प्रस्तुत किया गया है।
इस प्रकार, Option 2 असंगत है क्योंकि यह उपमेय की परिभाषा के विपरीत है।
प्रश्न 236
निम्न कथनों पर विचार करते हुए असंगत कथन छाँटिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विकल्प 3 को सही उत्तर के रूप में समर्थन करने के लिए निम्नलिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया गया है:
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विकल्प 1: "विभावना विरोधमूलक अलंकार है।"
- विभावना अलंकार का संबंध किसी वस्तु या व्यक्ति के गुणों को विशेष रूप से उभारने से होता है। यह विरोधमूलक नहीं होता, बल्कि यह किसी वस्तु के गुणों को विशेष रूप से दर्शाने के लिए प्रयुक्त होता है। अतः यह कथन सही है और असंगत नहीं है।
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विकल्प 2: "‘राम नाम सुंदर करतारी, संशय बिहग उड़ावनहारी’ पंक्ति में परंपरित रूपक अलंकार है।"
- इस पंक्ति में 'राम नाम' को 'सुंदर करतारी' और 'संशय बिहग उड़ावनहारी' के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो रूपक अलंकार का एक उदाहरण है। रूपक अलंकार में उपमेय और उपमान के बीच सीधा संबंध होता है। अतः यह कथन सही है और असंगत नहीं है।
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विकल्प 3: "‘मनो कठिन आँगन चली, ताते राते पाँव।’ पंक्ति में वस्तूत्प्रेक्षा अलंकार है।"
- इस पंक्ति में वस्तूत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग नहीं है। वस्तूत्प्रेक्षा अलंकार में किसी वस्तु की कल्पना की जाती है जो वास्तव में संभव नहीं होती। यहाँ पर 'मनो कठिन आँगन चली' का अर्थ है कि मन कठिन आँगन में चल रहा है, जो एक प्रकार की अतिशयोक्ति है और वस्तूत्प्रेक्षा नहीं है। इसलिए यह कथन असंगत है।
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विकल्प 4: "उपमान की अपेक्षा उपमेय के गुणोत्कर्ष वर्णन को व्यतिरेक अलंकार कहा जाता है।"
- व्यतिरेक अलंकार में उपमेय के गुणों की तुलना उपमान से की जाती है और उपमेय को श्रेष्ठ दिखाया जाता है। यह कथन सही है और व्यतिरेक अलंकार की परिभाषा के अनुरूप है। अतः यह कथन असंगत नहीं है।
इस प्रकार, विकल्प 3 असंगत है क्योंकि इसमें वस्तूत्प्रेक्षा अलंकार का गलत संदर्भ दिया गया है।
प्रश्न 237
रस के संदर्भ में असंगत कथन चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: रस के संदर्भ में असंगत कथन चुनिए :
सही उत्तर: विकल्प 2
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 2: अन्य ज्ञान से शून्य या रहित होना ही 'लोकोत्तर चमत्कार' है।
- यह कथन असंगत है क्योंकि 'लोकोत्तर चमत्कार' का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति अन्य ज्ञान से शून्य या रहित हो जाता है। 'लोकोत्तर चमत्कार' का अर्थ है कि रस का अनुभव सामान्य लौकिक अनुभवों से परे होता है और यह एक विशेष प्रकार की आनंदानुभूति है जो कला और साहित्य के माध्यम से प्राप्त होती है। यह व्यक्ति के ज्ञान को शून्य नहीं करता, बल्कि उसे एक उच्चतर स्तर पर ले जाता है।
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विकल्प 1: रस का आस्वाद्य लौकिक है, जबकि रस अलौकिक है।
- यह कथन सही है क्योंकि रस का अनुभव व्यक्ति के लौकिक अनुभवों के माध्यम से होता है, लेकिन रस स्वयं एक अलौकिक आनंद की अनुभूति प्रदान करता है। यह लौकिक और अलौकिक के बीच का संबंध स्पष्ट करता है।
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विकल्प 3: ‘विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्ररसनिष्पत्तिः’ आचार्य भरतमुनि प्रदत्त रस-निष्पत्ति सूत्र है।
- यह कथन सही है क्योंकि यह आचार्य भरतमुनि द्वारा दिया गया प्रसिद्ध सूत्र है जो रस की उत्पत्ति को समझाता है। यह सूत्र विभाव, अनुभाव और व्यभिचारी भावों के संयोग से रस की निष्पत्ति को दर्शाता है।
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विकल्प 4: नाटक में शोक एवं दुःख की घटनाओं के वर्णन से आनंदानुभूति होती है।
- यह कथन सही है क्योंकि नाटक में शोक और दुःख की घटनाओं के माध्यम से दर्शक करुण रस का अनुभव करते हैं, जो अंततः एक प्रकार की आनंदानुभूति प्रदान करता है। यह रस सिद्धांत का एक महत्वपूर्ण पहलू है कि कैसे नकारात्मक भावनाएं भी सकारात्मक आनंद की ओर ले जाती हैं।
इस प्रकार, विकल्प 2 असंगत है क्योंकि यह 'लोकोत्तर चमत्कार' की अवधारणा को गलत तरीके से प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 238
भारतीय काव्यशास्त्र में ध्वनि सिद्धान्त के अंतर्गत 'ध्वनि' शब्द का प्रयोग मुख्यतः किस अर्थ में हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
भारतीय काव्यशास्त्र में ध्वनि सिद्धान्त के अंतर्गत 'ध्वनि' शब्द का प्रयोग मुख्यतः 'प्रतीयमानार्थ' के अर्थ में हुआ है। यह सिद्धान्त आचार्य आनंदवर्धन द्वारा प्रतिपादित किया गया था और इसे काव्य की आत्मा माना जाता है। ध्वनि सिद्धान्त के अनुसार, कविता या साहित्य में जो अर्थ सीधे-सीधे शब्दों से नहीं प्रकट होता, बल्कि जो अर्थ पाठक या श्रोता के मन में उत्पन्न होता है, उसे 'प्रतीयमानार्थ' कहा जाता है। यह अर्थ गूढ़ और सूक्ष्म होता है, जो पाठक की संवेदनशीलता और समझ पर निर्भर करता है। इस प्रकार, 'ध्वनि' का मुख्य उद्देश्य पाठक के मन में एक गहरे और अप्रकट अर्थ को जागृत करना है।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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स्फोट: स्फोट का सिद्धान्त भाषाशास्त्र से संबंधित है और यह ध्वनि सिद्धान्त से भिन्न है। स्फोट का अर्थ है वह आंतरिक ध्वनि या अर्थ जो शब्दों के उच्चारण से उत्पन्न होता है। यह ध्वनि सिद्धान्त के 'प्रतीयमानार्थ' से अलग है।
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लक्ष्यार्थ: लक्ष्यार्थ का अर्थ है वह अर्थ जो शब्दों के सामान्य अर्थ से परे होता है, लेकिन यह ध्वनि सिद्धान्त के 'प्रतीयमानार्थ' से भिन्न है क्योंकि लक्ष्यार्थ में शब्दों का एक विशेष अर्थ होता है जो संदर्भ के आधार पर समझा जाता है।
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अभिधेयार्थ: अभिधेयार्थ का अर्थ है शब्द का सामान्य या प्रत्यक्ष अर्थ। यह ध्वनि सिद्धान्त के 'प्रतीयमानार्थ' से बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि ध्वनि सिद्धान्त अप्रत्यक्ष और गूढ़ अर्थ पर जोर देता है।
इस प्रकार, 'प्रतीयमानार्थ' ही वह सही विकल्प है जो ध्वनि सिद्धान्त के अंतर्गत 'ध्वनि' शब्द के प्रयोग को सही रूप में प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 239
हे खग मृग, हे मधुकर श्रेनी, तुम देखी सीता मृग नैनी' यह पंक्ति किस रस का उदाहरण है ?
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उत्तर और व्याख्या
पंक्ति "हे खग मृग, हे मधुकर श्रेनी, तुम देखी सीता मृग नैनी" वियोग श्रृंगार रस का उदाहरण है। वियोग श्रृंगार वह रस है जिसमें प्रेमी या प्रेमिका के बीच वियोग या जुदाई की भावना प्रकट होती है। इस पंक्ति में भगवान राम सीता के वियोग में हैं और उनसे जुड़ी वस्तुओं से पूछ रहे हैं कि क्या उन्होंने सीता को देखा है। यह उनके मन में सीता के प्रति गहरी प्रेम और वियोग की भावना को दर्शाता है।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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संयोग श्रृंगार: यह रस प्रेमी और प्रेमिका के मिलन की भावना को दर्शाता है। इस पंक्ति में मिलन की नहीं, बल्कि वियोग की भावना है, इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
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हास्य: हास्य रस में हास्य और मनोरंजन की भावना होती है। इस पंक्ति में कोई हास्य तत्व नहीं है, बल्कि गहरी उदासी और वियोग की भावना है, इसलिए यह विकल्प भी सही नहीं है।
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करुण: करुण रस में दुख और करुणा की भावना होती है। हालांकि इस पंक्ति में दुख की भावना है, लेकिन यह विशेष रूप से प्रेमी के वियोग की भावना को दर्शाता है, जो वियोग श्रृंगार के अंतर्गत आता है, न कि करुण रस के।
इस प्रकार, पंक्ति में वियोग की भावना स्पष्ट रूप से प्रकट होती है, जो वियोग श्रृंगार रस का उदाहरण है। इसलिए, विकल्प 2 सही है।
प्रश्न 240
सरसिज शब्द में कौन-सा समास है ?
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उत्तर और व्याख्या
सरसिज शब्द में "अलुक् तत्पुरुष समास" है, जो विकल्प 4 है। इसे समझने के लिए हमें "अलुक् तत्पुरुष समास" और अन्य समासों के बीच के अंतर को समझना होगा।
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अलुक् तत्पुरुष समास (विकल्प 4):
- "अलुक् तत्पुरुष समास" में समास के बाद भी पहले पद का रूप अपरिवर्तित रहता है। "सरसिज" शब्द "सरस" (जल) और "ज" (जन्मा) से बना है। यहाँ "सरस" का रूप अपरिवर्तित रहता है, इसलिए यह अलुक् तत्पुरुष समास का उदाहरण है।
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कर्मधारय समास (विकल्प 1):
- कर्मधारय समास में विशेषण और विशेष्य का संबंध होता है, जैसे "नीलकंठ" (नीला + कंठ)। "सरसिज" में ऐसा कोई विशेषण-विशेष्य संबंध नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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द्वन्द्व समास (विकल्प 2):
- द्वन्द्व समास में दो या अधिक शब्दों का समान महत्व होता है, जैसे "राम-लक्ष्मण"। "सरसिज" में केवल एक ही मुख्य अर्थ है, इसलिए यह द्वन्द्व समास नहीं हो सकता।
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अव्ययीभाव समास (विकल्प 3):
- अव्ययीभाव समास में पहला पद अव्यय होता है, जैसे "यथाशक्ति"। "सरसिज" में पहला पद अव्यय नहीं है, इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
इस प्रकार, "सरसिज" में "अलुक् तत्पुरुष समास" है, जो विकल्प 4 को सही ठहराता है।