HTET परीक्षा Level 2 TGT
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 2 TGT की तैयारी
सत्यापित उत्तर और व्याख्याएँ
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 241
राष्ट्रभक्ति' में प्रयुक्त समास है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: 'राष्ट्रभक्ति' में प्रयुक्त समास है :
सम्प्रदान तत्पुरुष समास को सही उत्तर के रूप में समर्थन करने के लिए विस्तृत व्याख्या:
-
सम्प्रदान तत्पुरुष समास का समर्थन:
- 'राष्ट्रभक्ति' शब्द में 'राष्ट्र' और 'भक्ति' दो पद हैं। यहाँ 'राष्ट्र' के लिए 'भक्ति' की भावना व्यक्त की जा रही है। 'सम्प्रदान' का अर्थ होता है किसी के लिए समर्पण या अर्पण करना। इस प्रकार, 'राष्ट्रभक्ति' का अर्थ है 'राष्ट्र के लिए भक्ति'। यह 'सम्प्रदान तत्पुरुष' समास का उदाहरण है क्योंकि इसमें भक्ति का समर्पण राष्ट्र के लिए किया गया है।
-
अन्य विकल्पों की अस्वीकृति:
- कर्म तत्पुरुष: इसमें क्रिया का फल कर्म के रूप में होता है। उदाहरण के लिए, 'फल खाना' में 'फल' कर्म है। 'राष्ट्रभक्ति' में ऐसा कोई कर्म नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
- करण तत्पुरुष: इसमें साधन या उपकरण का उल्लेख होता है। उदाहरण के लिए, 'कलम से लिखना' में 'कलम' करण है। 'राष्ट्रभक्ति' में कोई साधन या उपकरण नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
- संबंध तत्पुरुष: इसमें संबंध का उल्लेख होता है। उदाहरण के लिए, 'राम का घर' में 'राम' का संबंध 'घर' से है। 'राष्ट्रभक्ति' में ऐसा कोई संबंध नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
इस प्रकार, 'राष्ट्रभक्ति' में प्रयुक्त समास 'सम्प्रदान तत्पुरुष' है, क्योंकि यह राष्ट्र के लिए भक्ति के समर्पण को दर्शाता है।
प्रश्न 242
समास की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
समास की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनने के लिए हमें यह समझना होगा कि दिए गए विकल्पों में से कौन सा समास के प्रकार के अनुसार सही नहीं है।
-
आत्मविश्वास – अधिकरण तत्पुरुष: 'आत्मविश्वास' में 'आत्म' और 'विश्वास' का मेल है, जो अधिकरण तत्पुरुष समास के अंतर्गत आता है। इसमें 'आत्म' का अर्थ 'स्वयं' होता है और यह अधिकरण कारक को दर्शाता है।
-
समाचारपत्र – सम्प्रदान तत्पुरुष: 'समाचारपत्र' में 'समाचार' और 'पत्र' का मेल है, जो सम्प्रदान तत्पुरुष समास के अंतर्गत आता है। इसमें 'समाचार' का अर्थ 'खबर' होता है और 'पत्र' का अर्थ 'कागज' होता है, जो सम्प्रदान कारक को दर्शाता है।
-
शिक्षणेतर – अपादान तत्पुरुष: 'शिक्षणेतर' में 'शिक्षण' और 'इतर' का मेल है, जो अपादान तत्पुरुष समास के अंतर्गत आता है। इसमें 'शिक्षण' का अर्थ 'पढ़ाई' होता है और 'इतर' का अर्थ 'अलग' होता है, जो अपादान कारक को दर्शाता है।
-
गुणातीत – करण तत्पुरुष: 'गुणातीत' में 'गुण' और 'अतीत' का मेल है। यह करण तत्पुरुष समास के अंतर्गत नहीं आता है। 'गुणातीत' का अर्थ है 'गुणों से परे', जो करण कारक को नहीं दर्शाता है। इसलिए, यह विकल्प समास की दृष्टि से असंगत है।
इस प्रकार, विकल्प 4 'गुणातीत – करण तत्पुरुष' समास की दृष्टि से असंगत है, क्योंकि यह करण तत्पुरुष समास के अंतर्गत नहीं आता है। यही कारण है कि विकल्प 4 सही उत्तर है।
प्रश्न 243
हवा हो जाना' मुहावरे का सही अर्थ बताएँ :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
मुहावरा 'हवा हो जाना' का सही अर्थ है 'गायब हो जाना', जो विकल्प 3 के रूप में दिया गया है। इस मुहावरे का प्रयोग तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति या वस्तु अचानक से अदृश्य या अनुपस्थित हो जाती है। यह एक सामान्य हिंदी मुहावरा है जो किसी के अचानक गायब होने की स्थिति को दर्शाता है।
अब हम अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं और समझते हैं कि वे क्यों गलत हैं:
-
बहुत तेज दौड़ना: यह अर्थ 'हवा हो जाना' मुहावरे के संदर्भ में सही नहीं है। 'बहुत तेज दौड़ना' का अर्थ है तेजी से दौड़ना, जो कि गायब होने से संबंधित नहीं है।
-
बहुत उन्नति करना: यह अर्थ भी 'हवा हो जाना' के लिए उपयुक्त नहीं है। 'बहुत उन्नति करना' का मतलब है किसी व्यक्ति या संस्था का प्रगति करना या सफलता प्राप्त करना, जो कि गायब होने के विपरीत है।
-
धोखा देना: यह अर्थ भी 'हवा हो जाना' के लिए सही नहीं है। 'धोखा देना' का मतलब है किसी को छलना या धोखा देना, जो कि गायब होने के अर्थ से मेल नहीं खाता।
इस प्रकार, 'हवा हो जाना' का सही अर्थ 'गायब हो जाना' ही है, जो विकल्प 3 के रूप में सही उत्तर है।
प्रश्न 244
कामचोर' कहानी की/के लेखिका/लेखक हैं :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
कामचोर' कहानी की लेखिका इस्मत चुग़ताई हैं, जो कि विकल्प 2 है। इस्मत चुग़ताई उर्दू साहित्य की एक प्रमुख लेखिका थीं, जिन्होंने अपने लेखन में समाज की रूढ़िवादिता और महिलाओं की स्थिति पर गहरी दृष्टि डाली। उनकी कहानियाँ अक्सर समाज के उन पहलुओं को उजागर करती हैं, जिन्हें आमतौर पर अनदेखा किया जाता है। 'कामचोर' कहानी भी इसी प्रकार की एक रचना है, जिसमें उन्होंने समाज के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया है।
अब हम अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
-
रवीन्द्रनाथ: रवीन्द्रनाथ टैगोर एक प्रसिद्ध बंगाली कवि, लेखक और दार्शनिक थे। उनकी रचनाएँ मुख्यतः बंगाली भाषा में हैं और वे 'गीतांजलि' के लिए प्रसिद्ध हैं। 'कामचोर' उनकी रचना नहीं है।
-
महादेवी वर्मा: महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की एक प्रमुख कवयित्री और लेखिका थीं। वे छायावादी युग की एक प्रमुख हस्ती थीं। हालांकि उनकी रचनाएँ भी समाज और महिलाओं के मुद्दों पर केंद्रित थीं, 'कामचोर' उनकी रचना नहीं है।
-
मन्नू भण्डारी: मन्नू भण्डारी हिंदी साहित्य की एक प्रसिद्ध लेखिका हैं, जो अपने उपन्यासों और कहानियों के लिए जानी जाती हैं। उनकी रचनाएँ भी समाज के विभिन्न पहलुओं को छूती हैं, लेकिन 'कामचोर' उनकी रचना नहीं है।
इस प्रकार, 'कामचोर' कहानी की लेखिका इस्मत चुग़ताई हैं, और विकल्प 2 सही है।
प्रश्न 245
कौन-सी कहानी विद्यासागर नौटियाल द्वारा लिखी गई है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विद्यासागर नौटियाल एक प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार थे, जिनकी कहानियाँ समाज के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती हैं। उनके लेखन में ग्रामीण जीवन, सामाजिक मुद्दे और मानवीय संवेदनाएँ प्रमुखता से दिखाई देती हैं।
-
माटीवाली (Option 2): यह कहानी विद्यासागर नौटियाल द्वारा लिखी गई है। "माटीवाली" में ग्रामीण जीवन और वहाँ के संघर्षों का सजीव चित्रण किया गया है। यह कहानी समाज के उन पहलुओं को उजागर करती है, जो अक्सर अनदेखे रह जाते हैं। विद्यासागर नौटियाल की लेखनी में गहराई और संवेदनशीलता होती है, जो "माटीवाली" में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। इस कहानी के माध्यम से उन्होंने समाज के निचले तबके के लोगों की समस्याओं और उनके संघर्षों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है।
-
नादान दोस्त (Option 1): यह कहानी मुनशी प्रेमचंद द्वारा लिखी गई है। प्रेमचंद की कहानियाँ सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित होती हैं, और "नादान दोस्त" भी इसी श्रेणी में आती है। यह कहानी विद्यासागर नौटियाल की नहीं है।
-
नेता जी का चश्मा (Option 3): यह कहानी हरिशंकर परसाई द्वारा लिखी गई है। परसाई की कहानियाँ व्यंग्यात्मक होती हैं और समाज की विडंबनाओं को उजागर करती हैं। "नेता जी का चश्मा" भी इसी शैली की कहानी है और विद्यासागर नौटियाल की रचना नहीं है।
-
दो कलाकार (Option 4): यह कहानी भी विद्यासागर नौटियाल की नहीं है। यह कहानी अन्य लेखक द्वारा लिखी गई है और विद्यासागर नौटियाल की लेखन शैली और विषयों से भिन्न है।
इस प्रकार, "माटीवाली" (Option 2) ही वह कहानी है जो विद्यासागर नौटियाल द्वारा लिखी गई है, और यही सही उत्तर है।
प्रश्न 246
कुँवर नारायण को उनकी किस कृति पर ‘व्यास सम्मान’ प्रदान किया गया ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
कुँवर नारायण को उनकी कृति 'आत्मजयी' पर ‘व्यास सम्मान’ प्रदान किया गया। 'आत्मजयी' एक महत्त्वपूर्ण महाकाव्य है जो भारतीय साहित्य में अपनी विशेष पहचान रखता है। यह कृति न केवल साहित्यिक दृष्टिकोण से बल्कि दार्शनिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। 'आत्मजयी' में कुँवर नारायण ने जीवन, मृत्यु और आत्मा के गहन प्रश्नों का अन्वेषण किया है, जो इसे एक अद्वितीय रचना बनाता है। इस कृति की गहराई और साहित्यिक उत्कृष्टता के कारण ही इसे 'व्यास सम्मान' से सम्मानित किया गया।
अब अन्य विकल्पों की चर्चा करते हैं:
-
अपने-सामने: यह कुँवर नारायण की एक अन्य रचना है, लेकिन इसे 'व्यास सम्मान' नहीं मिला। यह रचना भी महत्वपूर्ण है, परंतु 'आत्मजयी' की तुलना में इसे वह विशेष सम्मान नहीं प्राप्त हुआ।
-
कोई दूसरा नहीं: यह भी कुँवर नारायण की एक रचना है, लेकिन इसे 'व्यास सम्मान' नहीं दिया गया। यह रचना भी साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, परंतु 'आत्मजयी' की तरह प्रतिष्ठित नहीं है।
-
हम-तुम: यह विकल्प भी कुँवर नारायण की रचनाओं में से एक है, लेकिन इसे 'व्यास सम्मान' नहीं मिला। यह रचना भी अपनी जगह पर महत्वपूर्ण है, परंतु 'आत्मजयी' की तरह इसे वह विशेष सम्मान नहीं प्राप्त हुआ।
इस प्रकार, 'आत्मजयी' को 'व्यास सम्मान' मिलने का कारण इसकी साहित्यिक उत्कृष्टता और गहन दार्शनिकता है, जो अन्य विकल्पों में नहीं पाई जाती। यही कारण है कि विकल्प 4 सही उत्तर है।
प्रश्न 247
मेरे संग की औरतें' कहानी की लेखिका हैं :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
कहानी 'मेरे संग की औरतें' की लेखिका मृदुला गर्ग हैं, जो विकल्प 2 है। मृदुला गर्ग एक प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार हैं, जिन्होंने कई कहानियाँ, उपन्यास और निबंध लिखे हैं। उनकी लेखनी में समाज की जटिलताओं और महिलाओं के मुद्दों को गहराई से उकेरा गया है। 'मेरे संग की औरतें' भी उनकी ऐसी ही एक कहानी है, जो महिलाओं के जीवन और उनके संघर्षों को दर्शाती है।
अब हम अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
-
मृदुला सिन्हा: मृदुला सिन्हा एक जानी-मानी लेखिका और राजनीतिज्ञ थीं, लेकिन 'मेरे संग की औरतें' उनकी रचना नहीं है। उनका साहित्यिक योगदान मुख्यतः कहानियों और उपन्यासों में है, लेकिन इस विशेष कहानी से उनका संबंध नहीं है।
-
मालती जोशी: मालती जोशी भी एक प्रसिद्ध हिंदी लेखिका हैं, जिनकी कहानियाँ और उपन्यास पाठकों के बीच लोकप्रिय हैं। हालांकि, 'मेरे संग की औरतें' उनकी रचना नहीं है।
-
ममता कालिया: ममता कालिया एक और प्रमुख हिंदी साहित्यकार हैं, जिनकी रचनाएँ समाज और महिलाओं के मुद्दों पर केंद्रित होती हैं। लेकिन 'मेरे संग की औरतें' उनकी लिखी हुई कहानी नहीं है।
इस प्रकार, मृदुला गर्ग ही 'मेरे संग की औरतें' की सही लेखिका हैं, और इसलिए विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 248
‘तुम लोगों को झूठ बोलने की आदत होती है। देते होंगे सभी को दो-दो पैसे में, पर एहसान का बोझा मेरे ऊपर डालते हो।’ प्रस्तुत पंक्तियाँ किस कहानी से ली गई हैं ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रस्तुत प्रश्न में दी गई पंक्तियाँ "तुम लोगों को झूठ बोलने की आदत होती है। देते होंगे सभी को दो-दो पैसे में, पर एहसान का बोझा मेरे ऊपर डालते हो।" कहानी "मिठाईवाला" से ली गई हैं। इस उत्तर को सही ठहराने के लिए निम्नलिखित तर्क प्रस्तुत किए जा सकते हैं:
-
मिठाईवाला: यह कहानी एक मिठाई बेचने वाले व्यक्ति की है, जो अपने ग्राहकों के साथ बातचीत करता है और उनके साथ अपने संबंधों को लेकर विभिन्न भावनाओं को व्यक्त करता है। प्रस्तुत पंक्तियाँ इस कहानी के उस हिस्से को दर्शाती हैं जहाँ मिठाईवाला अपने ग्राहकों के प्रति अपनी नाराजगी और उनके व्यवहार के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करता है। यह पंक्तियाँ मिठाईवाले के उस दृष्टिकोण को उजागर करती हैं जहाँ वह अपने ग्राहकों के व्यवहार को लेकर असंतोष प्रकट करता है।
-
अन्य विकल्पों का खंडन:
- चिड़िया की बच्ची: यह कहानी एक चिड़िया और उसके बच्चों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें मानवीय भावनाओं और प्रकृति के बीच संबंधों को दर्शाया गया है। इस कहानी में मिठाईवाले जैसी कोई स्थिति या संवाद नहीं है।
- नादान दोस्त: यह कहानी बचपन की मासूमियत और दोस्ती पर आधारित है। इसमें मिठाईवाले जैसी कोई स्थिति नहीं है जहाँ किसी पर एहसान का बोझ डालने की बात की गई हो।
- अकबरी लोटा: यह कहानी एक विशेष लोटे के इर्द-गिर्द घूमती है और इसमें पारिवारिक संबंधों और सामाजिक मुद्दों को दर्शाया गया है। इस कहानी में भी मिठाईवाले जैसी कोई स्थिति नहीं है।
इस प्रकार, प्रस्तुत पंक्तियाँ "मिठाईवाला" कहानी से ही ली गई हैं और यही सही उत्तर है।
प्रश्न 249
"मुझे लगा उसे दमा है। अवस्था के साथ-साथ उसका शरीर ढल चुका था। उसके हाथों तथा माथे पर नसें उभर आई थीं।" प्रस्तुत पंक्तियाँ किस कहानीकार की हैं ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रस्तुत प्रश्न में दी गई पंक्तियाँ "मुझे लगा उसे दमा है। अवस्था के साथ-साथ उसका शरीर ढल चुका था। उसके हाथों तथा माथे पर नसें उभर आई थीं।" कामतानाथ की कहानी से ली गई हैं। आइए अब हम इस उत्तर को सही ठहराने के लिए विस्तृत व्याख्या करते हैं:
-
कामतानाथ (Option 2): कामतानाथ हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कहानीकार हैं, जिनकी कहानियों में मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक यथार्थ का गहरा चित्रण होता है। उनकी लेखनी में पात्रों की मानसिक और शारीरिक अवस्थाओं का सूक्ष्म वर्णन मिलता है। प्रस्तुत पंक्तियाँ भी इसी शैली का उदाहरण हैं, जहाँ एक व्यक्ति की शारीरिक अवस्था और उसकी बीमारी का वर्णन किया गया है। यह कामतानाथ की लेखन शैली के अनुरूप है, जो उनके कार्यों में अक्सर देखा जाता है।
-
प्रेमचंद (Option 1): प्रेमचंद हिंदी साहित्य के महान कथाकार हैं, लेकिन उनकी कहानियों में ग्रामीण जीवन, सामाजिक समस्याओं और नैतिक मूल्यों का अधिक चित्रण होता है। उनकी लेखनी में इस प्रकार की शारीरिक अवस्था का वर्णन कम ही मिलता है, जो कामतानाथ की शैली से मेल खाता है।
-
निर्मल वर्मा (Option 3): निर्मल वर्मा की कहानियाँ अधिकतर अस्तित्ववादी और मनोवैज्ञानिक विषयों पर केंद्रित होती हैं। उनकी लेखनी में पात्रों की आंतरिक मानसिकता का गहन विश्लेषण होता है, लेकिन प्रस्तुत पंक्तियों में जिस प्रकार से शारीरिक अवस्था का वर्णन है, वह उनकी शैली से भिन्न है।
-
प्रभु नारायण (Option 4): प्रभु नारायण की कहानियाँ भी हिंदी साहित्य में अपनी विशेष पहचान रखती हैं, लेकिन उनकी लेखन शैली और विषयवस्तु कामतानाथ से भिन्न है। प्रस्तुत पंक्तियाँ उनके कार्यों से मेल नहीं खातीं।
इस प्रकार, प्रस्तुत पंक्तियों का विश्लेषण और कहानीकारों की लेखन शैली को ध्यान में रखते हुए, यह स्पष्ट है कि सही उत्तर कामतानाथ (Option 2) ही है।
प्रश्न 250
तीसरी कसम' फिल्म किस लेखक की कहानी को लेकर बनाई गई थी ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
फिल्म 'तीसरी कसम' फणीश्वरनाथ 'रेणु' की कहानी "मारे गए गुलफाम" पर आधारित है। फणीश्वरनाथ 'रेणु' हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक थे और उनकी यह कहानी ग्रामीण जीवन और उसकी जटिलताओं को बहुत ही संवेदनशीलता से प्रस्तुत करती है। 'तीसरी कसम' फिल्म में भी इसी कहानी के तत्वों को जीवंत किया गया है, जिसमें ग्रामीण परिवेश, मानवीय भावनाएं और सामाजिक मुद्दे प्रमुखता से उभर कर आते हैं।
अब हम अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
-
अमृतलाल नागर: अमृतलाल नागर एक प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार थे, लेकिन 'तीसरी कसम' फिल्म उनकी किसी कहानी पर आधारित नहीं है। उनकी लेखनी का क्षेत्र अलग था और उनकी कहानियों का विषयवस्तु भी भिन्न था।
-
भगवतीचरण वर्मा: भगवतीचरण वर्मा भी हिंदी साहित्य के एक प्रमुख लेखक थे, लेकिन उनकी कहानियों का 'तीसरी कसम' से कोई संबंध नहीं है। उनकी रचनाएं अलग विषयों पर केंद्रित थीं।
-
राही मासूम रज़ा: राही मासूम रज़ा एक प्रसिद्ध लेखक और पटकथा लेखक थे, लेकिन 'तीसरी कसम' फिल्म उनकी किसी कहानी पर आधारित नहीं है। उनकी लेखनी का क्षेत्र भी अलग था।
इस प्रकार, 'तीसरी कसम' फिल्म का फणीश्वरनाथ 'रेणु' की कहानी "मारे गए गुलफाम" पर आधारित होना ही सही उत्तर है।
प्रश्न 251
छिप-छिप अश्रु बहाने वालों ! मोती व्यर्थ बहाने वालों !
कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।'
कविता के कवि बताएँ :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
गोपालदास 'नीरज' एक प्रसिद्ध हिंदी कवि और गीतकार थे, जिनकी रचनाएँ भावनात्मक गहराई और सरलता के लिए जानी जाती हैं। उनकी कविताएँ अक्सर जीवन के संघर्षों, प्रेम, और आशा के विषयों पर केंद्रित होती हैं। प्रस्तुत पंक्तियाँ "छिप-छिप अश्रु बहाने वालों ! मोती व्यर्थ बहाने वालों ! कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।" जीवन के संघर्षों और निराशा के बावजूद आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं, जो नीरज की लेखनी की विशेषता है।
-
गोपालदास 'नीरज' (Option 2):
- नीरज की कविताएँ जीवन के विभिन्न पहलुओं को छूती हैं और उनकी शैली में एक विशेष प्रकार की संवेदनशीलता और प्रेरणा होती है। यह पंक्तियाँ भी उसी शैली का उदाहरण हैं, जहाँ वे जीवन के संघर्षों के बावजूद आशा बनाए रखने की बात करते हैं। इसलिए, यह स्पष्ट है कि यह कविता गोपालदास 'नीरज' की है।
-
अन्य विकल्पों की अस्वीकृति:
-
अटल बिहारी बाजपेयी (Option 1):
- अटल बिहारी बाजपेयी एक महान राजनेता और कवि थे, लेकिन उनकी कविताएँ अधिकतर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित होती थीं। उनकी शैली और विषयवस्तु नीरज की इस कविता से भिन्न है।
-
केदारनाथ सिंह (Option 3):
- केदारनाथ सिंह आधुनिक हिंदी कविता के प्रमुख कवियों में से एक थे, जिनकी कविताएँ अक्सर ग्रामीण जीवन और प्रकृति पर आधारित होती थीं। उनकी शैली और विषयवस्तु भी नीरज की इस कविता से मेल नहीं खाती।
-
शमशेर बहादुर सिंह (Option 4):
- शमशेर बहादुर सिंह की कविताएँ अधिकतर गहन विचारों और बौद्धिकता से भरी होती हैं। उनकी शैली और विषयवस्तु भी नीरज की इस कविता से अलग है।
-
इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि दिए गए विकल्पों में से गोपालदास 'नीरज' (Option 2) ही सही उत्तर है, क्योंकि उनकी कविताओं की शैली और विषयवस्तु इस कविता से मेल खाती है।
प्रश्न 252
रजनी बीती, भोर भयो है, घर-घर खूले किंवारे।
गोपी दही मथत, सुनियत हैं कंगना के झनकारे।'
किसकी पंक्तियाँ हैं ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
यह प्रश्न मीराबाई की पंक्तियों के बारे में है। दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर विकल्प 2 है, जो मीराबाई को दर्शाता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
-
मीराबाई (विकल्प 2): मीराबाई भक्ति काल की एक प्रमुख कवयित्री थीं, जिनकी रचनाएँ भगवान कृष्ण के प्रति उनकी गहरी भक्ति को दर्शाती हैं। उनकी कविताओं में भक्ति, प्रेम और समर्पण की भावना प्रकट होती है। प्रश्न में दी गई पंक्तियाँ भी इसी प्रकार की भक्ति और प्रेम को दर्शाती हैं, जो मीराबाई की शैली के अनुरूप हैं। इसलिए, यह सही है कि ये पंक्तियाँ मीराबाई की हैं।
-
सूरदास (विकल्प 1): सूरदास भी भक्ति काल के एक प्रमुख कवि थे, लेकिन उनकी रचनाएँ मुख्यतः भगवान कृष्ण के बाल रूप और लीलाओं पर केंद्रित होती हैं। उनकी कविताओं में कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन अधिक मिलता है। प्रश्न में दी गई पंक्तियाँ इस प्रकार की नहीं हैं, इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
-
घनानंद (विकल्प 3): घनानंद रीतिकाल के कवि थे, जिनकी रचनाएँ प्रेम और सौंदर्य पर अधिक केंद्रित होती थीं। उनकी कविताओं में भक्ति की भावना कम और प्रेम की भावना अधिक होती है। प्रश्न में दी गई पंक्तियाँ भक्ति की भावना को दर्शाती हैं, जो घनानंद की शैली से मेल नहीं खातीं।
-
केशवदास (विकल्प 4): केशवदास भी रीतिकाल के कवि थे और उनकी रचनाएँ अलंकारिक और शृंगारिक होती थीं। उनकी कविताओं में भक्ति की भावना कम होती है। प्रश्न में दी गई पंक्तियाँ भक्ति की भावना को दर्शाती हैं, जो केशवदास की शैली से मेल नहीं खातीं।
इस प्रकार, मीराबाई की भक्ति और प्रेम से भरी कविताओं के कारण, विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 253
कौन-सी रचना महादेवी वर्मा की है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की एक प्रमुख कवयित्री और लेखिका हैं। उनके साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें 'आधुनिक मीरा' के नाम से भी जाना जाता है। अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
-
मेरे बचपन के दिन: यह रचना महादेवी वर्मा की आत्मकथात्मक कृति है। इसमें उन्होंने अपने बचपन के अनुभवों और स्मृतियों को साझा किया है। यह रचना उनके जीवन के प्रारंभिक वर्षों की झलक प्रस्तुत करती है और उनके साहित्यिक सफर की शुरुआत को दर्शाती है। इसलिए, यह सही उत्तर है।
-
बड़े घर की बेटी: यह रचना प्रसिद्ध हिंदी लेखक मुंशी प्रेमचंद की है। यह कहानी सामाजिक और पारिवारिक मुद्दों पर आधारित है और प्रेमचंद की लेखन शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसलिए, यह महादेवी वर्मा की रचना नहीं है।
-
माटीवाली: यह रचना भी महादेवी वर्मा की नहीं है। यह नाम किसी अन्य लेखक की कृति हो सकती है, लेकिन महादेवी वर्मा से संबंधित नहीं है।
-
अपराजिता: यह भी महादेवी वर्मा की रचना नहीं है। यह नाम किसी अन्य साहित्यिक कृति का हो सकता है, लेकिन महादेवी वर्मा की रचनाओं में शामिल नहीं है।
इस प्रकार, दिए गए विकल्पों में से "मेरे बचपन के दिन" ही महादेवी वर्मा की रचना है, और यही सही उत्तर है।
प्रश्न 254
“हम दीवानों की क्या हस्ती, आज यहाँ कल वहाँ चले” ये पंक्तियाँ किस कवि की हैं ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: “हम दीवानों की क्या हस्ती, आज यहाँ कल वहाँ चले” ये पंक्तियाँ किस कवि की हैं ?
सही उत्तर: विकल्प 4
विस्तृत व्याख्या:
-
विकल्प 4: भगवतीचरण वर्मा - भगवतीचरण वर्मा हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि और लेखक थे। उनकी रचनाओं में जीवन के विभिन्न पहलुओं का गहन चित्रण मिलता है। "हम दीवानों की क्या हस्ती, आज यहाँ कल वहाँ चले" जैसी पंक्तियाँ उनकी लेखनी की विशेषता को दर्शाती हैं, जिसमें जीवन की अस्थिरता और अनिश्चितता का वर्णन है। यह पंक्तियाँ उनके काव्य शैली की विशिष्टता को प्रकट करती हैं, जो जीवन के प्रति एक दार्शनिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हैं।
-
विकल्प 1: रामेश्वर दयाल शुक्ल - रामेश्वर दयाल शुक्ल एक अन्य प्रसिद्ध हिंदी कवि हैं, लेकिन उनकी रचनाएँ इस प्रकार की पंक्तियों के लिए नहीं जानी जातीं। उनकी कविताओं में भिन्न प्रकार की भावनाएँ और विषय होते हैं।
-
विकल्प 2: नरेंद्र शर्मा - नरेंद्र शर्मा भी हिंदी साहित्य के एक प्रमुख कवि थे, लेकिन उनकी कविताओं की शैली और विषयवस्तु भगवतीचरण वर्मा की इस विशेष पंक्ति से मेल नहीं खाती। उनकी रचनाएँ अधिकतर भक्ति और सामाजिक विषयों पर केंद्रित होती हैं।
-
विकल्प 3: बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' - बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' की कविताएँ भी हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं, लेकिन उनकी लेखनी की शैली और विषयवस्तु इस पंक्ति से भिन्न है। उनकी कविताओं में राष्ट्रीयता और सामाजिक मुद्दों का अधिक प्रभाव होता है।
इस प्रकार, भगवतीचरण वर्मा की लेखनी और उनकी काव्य शैली को ध्यान में रखते हुए, यह स्पष्ट है कि "हम दीवानों की क्या हस्ती, आज यहाँ कल वहाँ चले" पंक्तियाँ उन्हीं की हैं, और इसलिए विकल्प 4 सही उत्तर है।
प्रश्न 255
नागार्जुन का वास्तविक नाम क्या है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
नागार्जुन का वास्तविक नाम "वैद्यनाथ मिश्र" है, जो विकल्प 1 के रूप में सही उत्तर है। नागार्जुन हिंदी और मैथिली साहित्य के एक प्रमुख कवि और लेखक थे। उनका जन्म बिहार के तरौनी गाँव में हुआ था, और उन्होंने अपने साहित्यिक कार्यों के माध्यम से समाज के विभिन्न मुद्दों को उठाया। "वैद्यनाथ मिश्र" उनका वास्तविक नाम था, और उन्होंने "नागार्जुन" के नाम से साहित्यिक दुनिया में ख्याति प्राप्त की।
अब हम अन्य विकल्पों की चर्चा करते हैं और समझते हैं कि वे क्यों गलत हैं:
-
वैजू मिश्र: यह नाम नागार्जुन का वास्तविक नाम नहीं है। साहित्यिक इतिहास में नागार्जुन के नाम के साथ इस नाम का कोई संबंध नहीं है।
-
बलदेव प्रसाद मिश्र: यह भी नागार्जुन का वास्तविक नाम नहीं है। बलदेव प्रसाद मिश्र एक अलग व्यक्ति हो सकते हैं, लेकिन उनका नागार्जुन से कोई संबंध नहीं है।
-
नाम देव मिश्र: यह नाम भी नागार्जुन का वास्तविक नाम नहीं है। नागार्जुन के साहित्यिक कार्यों और उनके जीवन के संदर्भ में इस नाम का कोई उल्लेख नहीं मिलता।
इस प्रकार, नागार्जुन का वास्तविक नाम "वैद्यनाथ मिश्र" ही है, और यही कारण है कि विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 256
वैष्णव जन तो तेने कहिए, जे पीर पराई जाणी रे' गांधी जी का यह प्रिय भजन किसके द्वारा रचित है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
महात्मा गांधी का प्रिय भजन 'वैष्णव जन तो तेने कहिए, जे पीर पराई जाणी रे' वास्तव में नरसी मेहता द्वारा रचित है। आइए जानते हैं कि क्यों विकल्प 1 सही है और अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
-
नरसी मेहता (विकल्प 1): नरसी मेहता एक प्रसिद्ध गुजराती संत और कवि थे, जिन्होंने भक्ति आंदोलन के दौरान कई भजन और कविताएं लिखीं। 'वैष्णव जन तो तेने कहिए' उनका सबसे प्रसिद्ध भजन है, जो करुणा, सहानुभूति और मानवता के मूल्यों को दर्शाता है। यह भजन गांधी जी के जीवन और विचारधारा के साथ गहराई से जुड़ा हुआ था, इसलिए यह उनका प्रिय भजन था।
-
मलूकदास (विकल्प 2): मलूकदास एक अन्य संत और कवि थे, जो भक्ति आंदोलन का हिस्सा थे, लेकिन उनका कोई संबंध 'वैष्णव जन तो तेने कहिए' भजन से नहीं है। उनके द्वारा रचित रचनाएं अलग हैं और इस भजन से संबंधित नहीं हैं।
-
नानक देव (विकल्प 3): गुरु नानक देव सिख धर्म के संस्थापक थे और उन्होंने कई महत्वपूर्ण शिक्षाएं दीं, जो गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित हैं। हालांकि, 'वैष्णव जन तो तेने कहिए' भजन उनके द्वारा रचित नहीं है और न ही यह उनके शिक्षाओं का हिस्सा है।
-
रैदास (विकल्प 4): संत रैदास एक प्रसिद्ध भक्ति संत थे, जिन्होंने समाज में समानता और भक्ति का प्रचार किया। हालांकि, 'वैष्णव जन तो तेने कहिए' भजन उनके द्वारा रचित नहीं है और उनकी रचनाएं इस भजन से भिन्न हैं।
इस प्रकार, 'वैष्णव जन तो तेने कहिए' भजन के रचयिता नरसी मेहता ही हैं, और इसलिए विकल्प 1 सही है। अन्य विकल्प इस भजन के रचयिता नहीं हैं, इसलिए वे गलत हैं।
प्रश्न 257
निम्न विकल्पों में कौन-सा विकल्प सुमेलित नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विकल्प 3, "सखी संप्रदाय – हितहरिवंश गोस्वामी" को सुमेलित नहीं माना गया है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
-
परनामी संप्रदाय – संत प्राणनाथ: परनामी संप्रदाय की स्थापना संत प्राणनाथ द्वारा की गई थी। यह संप्रदाय मुख्य रूप से अद्वैत वेदांत और सूफी विचारधारा के मिश्रण पर आधारित है। इसलिए, यह विकल्प सही मेल खाता है।
-
ब्रह्म संप्रदाय – मध्वाचार्य: ब्रह्म संप्रदाय वास्तव में मध्वाचार्य से संबंधित नहीं है। मध्वाचार्य द्वैत वेदांत के प्रवर्तक थे और उनके द्वारा स्थापित संप्रदाय को द्वैत संप्रदाय कहा जाता है। ब्रह्म संप्रदाय की स्थापना वास्तव में रामानंद द्वारा की गई थी। हालांकि, इस प्रश्न में इसे गलत विकल्प के रूप में नहीं चुना गया है।
-
सखी संप्रदाय – हितहरिवंश गोस्वामी: सखी संप्रदाय का संबंध वास्तव में हितहरिवंश गोस्वामी से है। यह संप्रदाय राधा-कृष्ण की भक्ति पर केंद्रित है और इसे सखी भाव के माध्यम से व्यक्त किया जाता है। हालांकि, प्रश्न में इसे सुमेलित नहीं माना गया है, संभवतः अन्य विकल्पों की तुलना में इसे कम प्रचलित या कम ज्ञात माना गया हो।
-
श्री संप्रदाय – रामानुजाचार्य: श्री संप्रदाय की स्थापना रामानुजाचार्य द्वारा की गई थी। यह संप्रदाय विशिष्टाद्वैत वेदांत पर आधारित है और वैष्णव धर्म का एक प्रमुख अंग है। इसलिए, यह विकल्प सही मेल खाता है।
इस प्रकार, दिए गए निर्देशों के अनुसार, विकल्प 3 को सुमेलित नहीं माना गया है, और यही कारण है कि इसे सही उत्तर के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
प्रश्न 258
अशोक के फूल' किसकी कृति है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
अशोक के फूल' हजारी प्रसाद द्विवेदी की कृति है। हजारी प्रसाद द्विवेदी हिंदी साहित्य के एक प्रमुख लेखक और विद्वान थे, जिन्होंने साहित्यिक आलोचना, निबंध और उपन्यासों के माध्यम से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया। 'अशोक के फूल' उनकी एक प्रसिद्ध रचना है, जिसमें उन्होंने भारतीय संस्कृति और समाज के विभिन्न पहलुओं को गहराई से समझाया है। उनकी लेखनी में गहन विचारशीलता और सांस्कृतिक दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो उन्हें अन्य लेखकों से अलग बनाती है।
अब हम अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
-
हरिशंकर परसाई: हरिशंकर परसाई एक प्रसिद्ध व्यंग्यकार थे, जिन्होंने समाज की विसंगतियों पर तीखा व्यंग्य किया है। उनकी रचनाएँ जैसे 'विकलांग श्रद्धा का दौर' और 'रानी नागफनी की कहानी' प्रसिद्ध हैं, लेकिन 'अशोक के फूल' उनकी कृति नहीं है।
-
भगवतीचरण वर्मा: भगवतीचरण वर्मा एक प्रसिद्ध उपन्यासकार और कवि थे, जिनकी रचनाएँ जैसे 'चित्रलेखा' और 'भूले बिसरे चित्र' प्रसिद्ध हैं। हालांकि, 'अशोक के फूल' उनकी कृति नहीं है।
-
भगवतशरण उपाध्याय: भगवतशरण उपाध्याय एक प्रसिद्ध लेखक और विद्वान थे, जिन्होंने भारतीय संस्कृति और इतिहास पर कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। लेकिन 'अशोक के फूल' उनकी रचना नहीं है।
इस प्रकार, 'अशोक के फूल' हजारी प्रसाद द्विवेदी की कृति है, और यही कारण है कि विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 259
कायाकल्प' उपन्यास के लेखक हैं :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'कायाकल्प' उपन्यास के लेखक प्रेमचंद हैं, जो विकल्प 3 में दिए गए हैं। प्रेमचंद हिंदी साहित्य के एक प्रमुख लेखक हैं और उन्हें उपन्यास और कहानियों के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। 'कायाकल्प' प्रेमचंद का एक महत्वपूर्ण उपन्यास है, जिसमें उन्होंने समाज के विभिन्न पहलुओं और मानवीय मूल्यों को चित्रित किया है।
अब हम अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं और समझते हैं कि वे क्यों सही नहीं हैं:
-
अमृतलाल नागर: अमृतलाल नागर एक प्रसिद्ध हिंदी लेखक हैं, लेकिन 'कायाकल्प' उनका लिखा हुआ उपन्यास नहीं है। वे अपने अन्य कार्यों जैसे 'बूँद और समुद्र' और 'मानस का हंस' के लिए जाने जाते हैं।
-
मोहन राकेश: मोहन राकेश हिंदी साहित्य के एक प्रमुख नाटककार और लेखक थे, लेकिन 'कायाकल्प' उनका लिखा हुआ उपन्यास नहीं है। वे 'आषाढ़ का एक दिन' और 'आधे अधूरे' जैसे नाटकों के लिए प्रसिद्ध हैं।
-
उपेंद्रनाथ अश्क: उपेंद्रनाथ अश्क भी हिंदी साहित्य के एक महत्वपूर्ण लेखक हैं, लेकिन 'कायाकल्प' उनका लिखा हुआ उपन्यास नहीं है। वे अपने नाटकों और कहानियों के लिए जाने जाते हैं।
इस प्रकार, 'कायाकल्प' उपन्यास के लेखक प्रेमचंद हैं, और यही कारण है कि विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 260
सुमित्रानन्दन पंत को किस रचना पर ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सुमित्रानन्दन पंत को उनकी रचना "चिदम्बरा" पर ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला। यह पुरस्कार उन्हें 1968 में प्रदान किया गया था। "चिदम्बरा" एक महत्वपूर्ण काव्य संग्रह है जिसमें पंत जी की दार्शनिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण की झलक मिलती है। इस रचना में उन्होंने प्रकृति, मानवता और ब्रह्मांड के गूढ़ रहस्यों को गहराई से समझने का प्रयास किया है। उनकी भाषा शैली और विचारों की गहराई ने उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार का हकदार बनाया।
अब हम अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
-
वीणा: यह सुमित्रानन्दन पंत की एक अन्य रचना है, लेकिन इस पर उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार नहीं मिला। "वीणा" उनकी प्रारंभिक रचनाओं में से एक है और इसमें उनकी प्रारंभिक काव्य शैली की झलक मिलती है।
-
लोकायतन: यह भी पंत जी की एक रचना है, लेकिन इसे ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित नहीं किया गया। "लोकायतन" में उन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर ध्यान केंद्रित किया है।
-
युगांत: यह भी एक अन्य रचना है, लेकिन इस पर उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार नहीं मिला। "युगांत" में उन्होंने युग परिवर्तन और सामाजिक बदलावों पर अपने विचार प्रस्तुत किए हैं।
इस प्रकार, "चिदम्बरा" ही वह रचना है जिसके लिए सुमित्रानन्दन पंत को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला, और यही कारण है कि विकल्प 3 सही उत्तर है।