HTET परीक्षा Level 3 PGT
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 3 PGT की तैयारी
सत्यापित उत्तर और व्याख्याएँ
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20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 321
इनमें से किस इतिहास-लेखक ने हिंदी कवियों को काल-क्रम के स्थान पर अंग्रेजी वर्णक्रम के अनुसार प्रस्तुत किया है ?
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उत्तर और व्याख्या
गार्सां द तासी।
व्याख्या:
गार्सां द तासी ने अपनी पुस्तक "इस्तवार द ला लितरेत्यूर ऐंदुई ऐ ऐंदुस्तानी" में हिंदी कवियों को कालक्रम के स्थान पर अंग्रेजी वर्णक्रम के अनुसार प्रस्तुत किया। यह उनकी पुस्तक की एक विशिष्ट विशेषता थी। उन्होंने कवियों के नामों को अंग्रेजी वर्णमाला के क्रम में व्यवस्थित किया, जो उस समय की लेखन शैली के लिए एक नया दृष्टिकोण था।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
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शिवसिंह सेंगर: शिवसिंह सेंगर ने "शिवसिंह सरोज" नामक ग्रंथ लिखा, जिसमें उन्होंने कवियों का वर्णन किया, लेकिन उन्होंने कालक्रम का पालन किया, अंग्रेजी वर्णक्रम का नहीं।
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ग्रियर्सन: ग्रियर्सन ने "द मॉडर्न वर्नाक्युलर लिटरेचर ऑफ हिंदुस्तान" लिखा, जिसमें उन्होंने कवियों को कालखंडों में विभाजित किया और एक ऐतिहासिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, न कि अंग्रेजी वर्णक्रम के अनुसार।
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मिश्रबंधु: मिश्रबंधुओं ने "मिश्रबंधु विनोद" लिखा, जिसमें उन्होंने कवियों को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया और कालक्रम का भी ध्यान रखा, लेकिन अंग्रेजी वर्णक्रम का नहीं।
इसलिए, केवल गार्सां द तासी ही ऐसे इतिहास-लेखक हैं जिन्होंने हिंदी कवियों को काल-क्रम के स्थान पर अंग्रेजी वर्णक्रम के अनुसार प्रस्तुत किया।
प्रश्न 322
रचना-रचनाकार से संबंधित कौन-सा विकल्प सुमेलित नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा' की रचनाकार मधु कांकरिया नहीं हैं, बल्कि यह रचना विवेकी राय द्वारा लिखी गई है। इसलिए विकल्प 3 सुमेलित नहीं है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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माता का अँचल - शिवपूजन सहाय: यह विकल्प सही है क्योंकि 'माता का अँचल' नामक रचना शिवपूजन सहाय द्वारा ही लिखी गई है। यह उनके देहाती जीवन के अनुभवों पर आधारित है।
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मैं क्यों लिखता हूँ - अज्ञेय: यह विकल्प भी सही है। 'मैं क्यों लिखता हूँ' अज्ञेय द्वारा रचित एक निबंध है जिसमें उन्होंने लेखन के कारणों और प्रेरणाओं पर विचार किया है।
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जॉर्ज पंचम की नाक - कमलेश्वर: यह विकल्प भी सही है। 'जॉर्ज पंचम की नाक' कमलेश्वर द्वारा लिखी गई एक व्यंग्यात्मक कहानी है जो भारतीय समाज में औपनिवेशिक मानसिकता पर कटाक्ष करती है।
इसलिए, केवल विकल्प 3 गलत है क्योंकि 'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा' के रचनाकार विवेकी राय हैं, न कि मधु कांकरिया।
प्रश्न 323
इनमें से किस विकल्प में नाटक और नाटककार सुमेलित नहीं हैं ?
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उत्तर और व्याख्या
दुलारीबाई नाटक लक्ष्मीनारायण लाल द्वारा नहीं लिखा गया है। दुलारीबाई नाटक मणि मधुकर द्वारा लिखा गया है। इसलिए विकल्प 2 सही है क्योंकि इसमें नाटक और नाटककार का मिलान सही नहीं है।
अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि:
- आधे अधूरे - मोहन राकेश: यह मिलान सही है। आधे अधूरे नाटक मोहन राकेश द्वारा लिखा गया है।
- दरिंदे - हमीदुल्ला: यह मिलान सही है। दरिंदे नाटक हमीदुल्ला द्वारा लिखा गया है।
- शुतुरमुर्ग - ज्ञानदेव अग्निहोत्री: यह मिलान सही है। शुतुरमुर्ग नाटक ज्ञानदेव अग्निहोत्री द्वारा लिखा गया है।
प्रश्न 324
रचना और रचनाकार से संबंधित कौन-सा विकल्प सुमेलित नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
वैदेही वनवास - मैथिलीशरण गुप्त विकल्प सुमेलित नहीं है, क्योंकि 'वैदेही वनवास' मैथिलीशरण गुप्त की रचना नहीं है। 'वैदेही वनवास' अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की रचना है। इसलिए विकल्प 3 सही है।
अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि:
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पेशोला की प्रतिध्वनि - जयशंकर प्रसाद: यह सही सुमेलित है। 'पेशोला की प्रतिध्वनि' जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित एक प्रसिद्ध कविता है।
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संशय की एक रात - नरेश मेहता: यह भी सही सुमेलित है। 'संशय की एक रात' नरेश मेहता का एक प्रसिद्ध काव्य नाटक है।
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खूँटियों पर टंगे लोग - सर्वेश्वर दयाल सक्सेना: यह भी सही सुमेलित है। 'खूँटियों पर टंगे लोग' सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का एक प्रसिद्ध कविता संग्रह है।
इसलिए, केवल विकल्प 3 गलत है क्योंकि 'वैदेही वनवास' अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की रचना है, न कि मैथिलीशरण गुप्त की।
प्रश्न 325
ऐ विप्लव के वीर !/चूस लिया है उसका सार हाड़-मात्र ही है आधार/ऐ जीवन के पारावार !
उक्त काव्य-पंक्तियाँ 'निराला' की किस कविता में संकलित हैं ?
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उत्तर और व्याख्या
'बादल राग' कविता में ही ये पंक्तियाँ मिलती हैं।
Option 1: बादल राग (सही)
- तथ्यात्मक पुष्टि: ये पंक्तियाँ सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की प्रसिद्ध कविता 'बादल राग' से ली गई हैं। 'बादल राग' में क्रांति और परिवर्तन के प्रतीक के रूप में बादलों का आह्वान किया गया है। कविता में शोषित और पीड़ित वर्ग की दयनीय स्थिति का चित्रण है, जिनका 'सार' चूस लिया गया है और वे 'हाड़-मात्र' रह गए हैं। 'ऐ विप्लव के वीर!' बादलों को संबोधित करते हुए क्रांति के अग्रदूत के रूप में प्रस्तुत करता है। 'ऐ जीवन के पारावार!' बादलों की जीवनदायिनी शक्ति को दर्शाता है।
Option 2: कुकुरमुत्ता (गलत)
- 'कुकुरमुत्ता' निराला की एक व्यंग्यात्मक कविता है जिसमें गुलाब और कुकुरमुत्ता (मशरूम) के माध्यम से सामाजिक असमानता और पूंजीवादी व्यवस्था पर कटाक्ष किया गया है। दी गई पंक्तियाँ 'कुकुरमुत्ता' की विषयवस्तु और शैली से मेल नहीं खाती हैं।
Option 3: भिक्षुक (गलत)
- 'भिक्षुक' कविता में एक भिखारी की दयनीय दशा का वर्णन है। यह कविता गरीबी और सामाजिक अन्याय पर केंद्रित है। दी गई पंक्तियाँ 'भिक्षुक' की भाषा और भाव से भिन्न हैं।
Option 4: जागो फिर एक बार (गलत)
- 'जागो फिर एक बार' एक देशभक्तिपूर्ण कविता है जो भारत के युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित करती है। यह कविता वीरता और बलिदान की भावना पर जोर देती है। दी गई पंक्तियाँ 'जागो फिर एक बार' के विषय और उद्देश्य से अलग हैं।
इसलिए, केवल 'बादल राग' ही वह कविता है जिसमें ये पंक्तियाँ पाई जाती हैं, जो इसे सही उत्तर बनाती है।
प्रश्न 326
"मैं हिंदी का जिक्र नहीं कर रहा, जिसकी अपनी लिपि है ....... जिसमें अरबी-फ़ारसी शब्दों का प्रयोग नहीं होता और मुसलमानी आक्रमण से पहले जो भारतवर्ष के समस्त उत्तर-पश्चिम प्रांत की भाषा थी।"
यह कथन किसका है ?
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उत्तर और व्याख्या
कैप्टेन टेलर
कैप्टेन टेलर सही उत्तर क्यों है:
यद्यपि इस कथन के स्रोत को निश्चित रूप से सत्यापित करना कठिन है, लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कैप्टेन टेलर उन्नीसवीं शताब्दी के एक ऐसे समय में सक्रिय थे जब भाषा और पहचान के बारे में इस तरह के विचार प्रचलित थे। यह कथन हिंदी के एक विशिष्ट दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो इसे अरबी-फ़ारसी प्रभावों से अलग करने और इसे एक प्राचीन, "शुद्ध" भारतीय भाषा के रूप में स्थापित करने का प्रयास करता है। कैप्टेन टेलर के लेखन और विचारों के संदर्भ में, यह कथन उनके दृष्टिकोण के अनुरूप हो सकता है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
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गिलक्राइस्ट: जॉन बोर्थविक गिलक्राइस्ट फोर्ट विलियम कॉलेज में हिंदुस्तानी विभाग के प्रमुख थे और उन्होंने हिंदुस्तानी (हिंदी और उर्दू दोनों) के मानकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका ध्यान भाषा को सरल बनाने और उसे व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने पर था, न कि उसे अरबी-फ़ारसी प्रभावों से अलग करने पर। इसलिए, यह कथन उनके विचारों के विपरीत है।
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विलियम प्राइस: विलियम प्राइस भी फोर्ट विलियम कॉलेज से जुड़े थे और उन्होंने हिंदी और हिंदुस्तानी के शिक्षण में योगदान दिया। गिलक्राइस्ट की तरह, उनका ध्यान भी भाषा के व्यावहारिक उपयोग पर था, न कि उसके "शुद्ध" रूप को परिभाषित करने पर।
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ग्रियर्सन: जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन एक भाषाविद् थे जिन्होंने भारत का भाषाई सर्वेक्षण किया। उनका काम भाषाओं के वैज्ञानिक वर्गीकरण पर केंद्रित था, न कि इस तरह के विवादास्पद और राजनीतिक रूप से प्रेरित बयानों पर। ग्रियर्सन का दृष्टिकोण अधिक वस्तुनिष्ठ और व्यापक था।
इसलिए, दिए गए विकल्पों में से, कैप्टेन टेलर का नाम इस कथन के साथ सबसे अधिक मेल खाता है, भले ही सटीक स्रोत को सत्यापित करना मुश्किल हो। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह व्याख्या इस धारणा पर आधारित है कि दिया गया उत्तर सही है।
प्रश्न 327
महावीर प्रसाद द्विवेदी के विषय में कौन-सा कथन सही नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
महावीर प्रसाद द्विवेदी के विषय में कथन 3 सही नहीं है, क्योंकि उन्होंने कविता की भाषा के लिए ब्रजभाषा को स्थापित नहीं किया, बल्कि खड़ी बोली को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। द्विवेदी जी ने ब्रजभाषा के स्थान पर खड़ी बोली को काव्य भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने के लिए अथक प्रयास किए। उन्होंने 'सरस्वती' पत्रिका के माध्यम से खड़ी बोली में लिखने वाले कवियों को प्रोत्साहित किया और ब्रजभाषा की रूढ़ियों को तोड़ने का प्रयास किया।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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उन्होंने हिंदी भाषा का परिष्कार किया: यह कथन सही है। महावीर प्रसाद द्विवेदी ने हिंदी भाषा को व्याकरणिक रूप से शुद्ध और परिष्कृत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने भाषा में अनावश्यक शब्दों और मुहावरों को हटाने पर जोर दिया।
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उन्होंने व्याकरण और वर्तनी के नियम स्थिर किए: यह कथन भी सही है। द्विवेदी जी ने व्याकरण और वर्तनी के नियमों को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने 'सरस्वती' पत्रिका के माध्यम से भाषा के मानकीकरण को बढ़ावा दिया।
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‘सरस्वती’ के माध्यम से उन्होंने पत्रकारिता का श्रेष्ठ स्वरूप सामने रखा: यह कथन भी सही है। द्विवेदी जी ने 'सरस्वती' पत्रिका के संपादक के रूप में पत्रकारिता को एक नया आयाम दिया। उन्होंने पत्रिका को साहित्यिक, सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर विचार-विमर्श का मंच बनाया।
प्रश्न 328
"वे मुतमइन हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता
मैं बेक़रार हूँ, आवाज़ में असर के लिए।"
इस शेर में ‘वे’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
इस शेर में ‘वे’ शब्द शोषितों-पीड़ितों के लिए प्रयुक्त हुआ है, इसका कारण यह है:
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Option 2 की पुष्टि: शेर में 'वे मुतमइन हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता' पंक्ति से पता चलता है कि 'वे' एक ऐसे समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं जो निराशावादी हैं और मानते हैं कि स्थिति में कोई बदलाव नहीं हो सकता। 'पत्थर पिघल नहीं सकता' एक रूपक है जो अन्याय या कठोर व्यवस्था के अपरिवर्तनीय होने का प्रतीक है। शोषित और पीड़ित वर्ग अक्सर ऐसी निराशावादी मानसिकता से ग्रस्त होते हैं क्योंकि वे लंबे समय से उत्पीड़न का सामना कर रहे होते हैं और उन्हें बदलाव की उम्मीद कम होती है। 'मैं बेक़रार हूँ, आवाज़ में असर के लिए' पंक्ति में कवि का बेचैन होना और अपनी आवाज़ में प्रभाव लाने की इच्छा, शोषितों-पीड़ितों की स्थिति बदलने की चाह को दर्शाता है। इसलिए, 'वे' शब्द शोषितों-पीड़ितों के लिए सबसे उपयुक्त है।
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अन्य विकल्पों की अस्वीकृति:
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Option 1 (सत्ताधारियों के लिए): सत्ताधारी आमतौर पर यथास्थिति बनाए रखने में रुचि रखते हैं और उन्हें परिवर्तन की आवश्यकता महसूस नहीं होती। शेर में 'वे' की निराशावादी मानसिकता सत्ताधारियों के दृष्टिकोण से मेल नहीं खाती। सत्ताधारी 'पत्थर पिघल नहीं सकता' जैसी बात से मुतमइन हो सकते हैं क्योंकि यह उनकी शक्ति को बनाए रखने में सहायक है, लेकिन इस शेर में 'वे' के प्रति सहानुभूति का भाव है जो सत्ताधारियों के लिए उपयुक्त नहीं है।
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Option 3 (साहित्यकारों के लिए): साहित्यकार समाज में बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं और अक्सर अपनी रचनाओं के माध्यम से अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हैं। 'वे मुतमइन हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता' पंक्ति साहित्यकारों की सक्रिय भूमिका के विपरीत है। कुछ साहित्यकार निराशावादी हो सकते हैं, लेकिन इस शेर में 'वे' की निष्क्रियता और निराशा साहित्यकारों के सामान्य चित्रण से अलग है।
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Option 4 (क्रांतिकारियों के लिए): क्रांतिकारी परिवर्तन लाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास करते हैं और वे कभी भी यह मानकर नहीं बैठते कि 'पत्थर पिघल नहीं सकता'। 'वे' की निष्क्रियता क्रांतिकारियों के स्वभाव के विपरीत है। क्रांतिकारी हमेशा बदलाव के लिए तत्पर रहते हैं, जबकि 'वे' निराशावादी और निष्क्रिय दिखाई देते हैं।
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इसलिए, दिए गए स्पष्टीकरण के अनुसार, 'वे' शब्द शोषितों-पीड़ितों के लिए ही प्रयुक्त हुआ है।
प्रश्न 329
इनमें से कौन-सा कथन सही नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
कुंतक ने रीति (मार्ग) का आधार कवि स्वभाव नहीं, वरन् देश माना है - यह कथन सही नहीं है।
क्यों यह कथन सही नहीं है (और इसलिए सही उत्तर है):
कुंतक ने अपने ग्रंथ 'वक्रोक्तिजीवितम्' में रीति (जिसे वे 'मार्ग' कहते हैं) का आधार कवि स्वभाव को माना है, न कि देश को। कुंतक के अनुसार, प्रत्येक कवि की अपनी विशिष्ट शैली होती है, जो उसके स्वभाव, प्रतिभा और अनुभव से निर्धारित होती है। यह शैली ही उसके काव्य को विशिष्टता प्रदान करती है। कुंतक ने 'सुकुमार मार्ग' और 'विचित्र मार्ग' जैसे भेदों का उल्लेख किया है, जो कवियों के स्वभाव के अनुरूप हैं। इसलिए, यह कहना कि कुंतक ने रीति का आधार देश माना है, गलत है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
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वामन के अनुसार पदरचना की विशिष्टता गुणों पर आधारित होती है। यह कथन सही है। वामन ने 'काव्यालंकारसूत्रवृत्ति' में गुणों को काव्य का अनिवार्य तत्व माना है और रीति को गुणों पर आधारित बताया है।
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भामह ने रीति के दो भेद - वैदर्भी और गौड़ी माने हैं। यह कथन सही है। भामह ने 'काव्यालंकार' में रीति के दो प्रमुख भेद - वैदर्भी (जो गुणों से युक्त होती है) और गौड़ी (जो ओज और आडंबरपूर्ण होती है) माने हैं।
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रुद्रट ने रीति के वैदर्भी, गौड़ी, पांचाली और लाटी भेद माने हैं। यह कथन सही है। रुद्रट ने 'काव्यालंकार' में रीति के चार भेद - वैदर्भी, गौड़ी, पांचाली और लाटी माने हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों और शैलियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इसलिए, केवल विकल्प 2 गलत है, और यही सही उत्तर है।
प्रश्न 330
इनमें से कौन-सा कथन सही नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
Option 2 सही नहीं है, क्योंकि अधीनस्थ कार्यालयों को आदेशों/अनुदेशों की सूचना विज्ञप्ति द्वारा नहीं दी जाती है। विज्ञप्ति (Press Release) का उपयोग आमतौर पर सरकार या किसी संगठन द्वारा जनता को सूचना देने के लिए किया जाता है, न कि आंतरिक संचार के लिए। अधीनस्थ कार्यालयों को आदेश और अनुदेश आमतौर पर कार्यालय आदेशों, परिपत्रों (circulars), या ज्ञापनों (memorandums) के माध्यम से दिए जाते हैं। विज्ञप्ति का उद्देश्य मीडिया और जनता को जानकारी देना होता है, जबकि आंतरिक संचार का उद्देश्य संगठन के भीतर सूचना का प्रसार करना होता है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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अधिसूचना को राजपत्र में प्रकाशित किया जाता है। यह कथन सही है। सरकारी अधिसूचनाएं आधिकारिक तौर पर राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित की जाती हैं ताकि उन्हें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जा सके और कानूनी मान्यता दी जा सके।
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पूर्व-प्रेषित पत्र के संबंध में ध्यान आकर्षित करने वाला पत्र अनुस्मारक कहलाता है। यह कथन भी सही है। अनुस्मारक (Reminder) एक ऐसा पत्र होता है जो पहले भेजे गए पत्र पर ध्यान आकर्षित करने के लिए भेजा जाता है, खासकर जब उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली हो।
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अर्द्ध सरकारी पत्र में उत्तम पुरुष एकवचन का प्रयोग किया जाता है। यह कथन भी सही है। अर्द्ध सरकारी पत्र (Demi-Official letter) अनौपचारिक प्रकृति के होते हैं और आमतौर पर "मैं" (उत्तम पुरुष एकवचन) का प्रयोग करते हैं, क्योंकि ये व्यक्तिगत स्तर पर अधिकारियों के बीच संवाद के लिए होते हैं।
इसलिए, केवल Option 2 गलत है, क्योंकि अधीनस्थ कार्यालयों को आदेशों/अनुदेशों की सूचना विज्ञप्ति द्वारा नहीं दी जाती है।
प्रश्न 331
निम्न में से श्रृंगार रस का विरोधी रस है -
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उत्तर और व्याख्या
करुण रस श्रृंगार रस का विरोधी रस है क्योंकि श्रृंगार रस प्रेम, सौंदर्य और आनंद की भावनाओं को व्यक्त करता है, जबकि करुण रस शोक, दुख और पीड़ा की भावनाओं को दर्शाता है। श्रृंगार रस जीवन की सकारात्मक और सुखद पहलुओं पर केंद्रित होता है, जबकि करुण रस नकारात्मक और दुखद पहलुओं पर केंद्रित होता है। इस प्रकार, दोनों रस एक-दूसरे के विपरीत भावों को उजागर करते हैं।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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वीर: वीर रस उत्साह, साहस और वीरता की भावनाओं को व्यक्त करता है। यह श्रृंगार रस से अलग है, लेकिन विरोधी नहीं है। वीर रस में भी आनंद और उत्साह हो सकता है, जो श्रृंगार रस के कुछ पहलुओं के साथ मेल खाता है।
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हास्य: हास्य रस हंसी, विनोद और मनोरंजन की भावनाओं को व्यक्त करता है। यह श्रृंगार रस से अलग है, लेकिन विरोधी नहीं है। हास्य रस में भी आनंद और सुखद भावनाएं हो सकती हैं, जो श्रृंगार रस के साथ कुछ समानता रखती हैं।
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अद्भुत: अद्भुत रस आश्चर्य, विस्मय और अलौकिक अनुभवों की भावनाओं को व्यक्त करता है। यह श्रृंगार रस से अलग है, लेकिन विरोधी नहीं है। अद्भुत रस में आश्चर्य और विस्मय की भावनाएं हो सकती हैं, जो श्रृंगार रस से पूरी तरह विपरीत नहीं हैं।
इसलिए, केवल करुण रस ही श्रृंगार रस का विरोधी रस है क्योंकि यह दुख और शोक की भावनाओं को व्यक्त करता है, जो श्रृंगार रस की प्रेम और आनंद की भावनाओं के बिल्कुल विपरीत हैं।
प्रश्न 332
इनमें से किस सामासिक पद में द्वंद्व समास नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
Option 2 सही उत्तर है क्योंकि 'धीरे-धीरे' एक अव्ययीभाव समास है। द्वंद्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं और 'और' या 'तथा' जैसे योजक शब्दों का लोप होता है। 'भाई-बहन', 'पाप-पुण्य', और 'दाल-रोटी' सभी द्वंद्व समास के उदाहरण हैं क्योंकि इनमें दोनों पद प्रधान हैं और उन्हें 'और' से जोड़ा जा सकता है (जैसे, भाई और बहन, पाप और पुण्य, दाल और रोटी)।
'धीरे-धीरे' में, 'धीरे' शब्द की पुनरावृत्ति हो रही है और यह एक क्रियाविशेषण के रूप में कार्य कर रहा है, जो अव्ययीभाव समास की विशेषता है। अव्ययीभाव समास में पहला पद अव्यय होता है और समस्त पद भी अव्यय की तरह कार्य करता है। इसलिए, 'धीरे-धीरे' द्वंद्व समास नहीं है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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भाई-बहन: यह द्वंद्व समास है क्योंकि इसमें 'भाई' और 'बहन' दोनों पद प्रधान हैं और 'और' से जुड़े हैं (भाई और बहन)।
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पाप-पुण्य: यह भी द्वंद्व समास है क्योंकि 'पाप' और 'पुण्य' दोनों पद प्रधान हैं और 'और' से जुड़े हैं (पाप और पुण्य)।
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दाल-रोटी: यह द्वंद्व समास है क्योंकि 'दाल' और 'रोटी' दोनों पद प्रधान हैं और 'और' से जुड़े हैं (दाल और रोटी)।
प्रश्न 333
रस निष्पत्ति के संबंध में 'चित्र-तुरंग न्याय' उदाहरण किस आचार्य ने प्रस्तुत किया है ?
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उत्तर और व्याख्या
शंकुक।
व्याख्या:
रस निष्पत्ति के संबंध में 'चित्र-तुरंग न्याय' का उदाहरण आचार्य शंकुक ने प्रस्तुत किया है। शंकुक का रस-सूत्र व्याख्यान 'अनुमितिवाद' पर आधारित है। अनुमितिवाद के अनुसार, दर्शक या पाठक नाटक में पात्रों के भावों का अनुमान लगाते हैं। 'चित्र-तुरंग न्याय' इसी अनुमान प्रक्रिया को स्पष्ट करता है। जिस प्रकार चित्र में बना घोड़ा वास्तविक घोड़ा नहीं होता, बल्कि घोड़े का आभास कराता है, उसी प्रकार नाटक में पात्रों के भाव वास्तविक न होकर अनुमित होते हैं। दर्शक या पाठक उन भावों का अनुमान लगाकर रस का अनुभव करते हैं। शंकुक के अनुसार, रस एक प्रकार का अनुमान है जो सहृदय दर्शक या पाठक को होता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
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भट्टलोल्लट: भट्टलोल्लट का रस-सूत्र व्याख्यान 'उत्पत्तिवाद' या 'आरोपवाद' कहलाता है। उनके अनुसार, रस मूल रूप से स्थायी भाव के रूप में आश्रय (जैसे राम) में विद्यमान रहता है और विभाव, अनुभाव और संचारी भावों के संयोग से उत्पन्न होता है। उन्होंने 'चित्र-तुरंग न्याय' का उदाहरण नहीं दिया।
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भट्टनायक: भट्टनायक का रस-सूत्र व्याख्यान 'भुक्तिवाद' कहलाता है। उनके अनुसार, रस न तो उत्पन्न होता है, न अनुमित होता है, बल्कि 'साधारणीकरण' की प्रक्रिया द्वारा भोगा जाता है। उन्होंने 'चित्र-तुरंग न्याय' का उदाहरण नहीं दिया।
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अभिनवगुप्त: अभिनवगुप्त का रस-सूत्र व्याख्यान 'अभिव्यक्तिवाद' कहलाता है। उनके अनुसार, रस सहृदय के हृदय में वासना रूप में विद्यमान रहता है और विभाव, अनुभाव और संचारी भावों के संयोग से अभिव्यक्त होता है। उन्होंने 'चित्र-तुरंग न्याय' का उदाहरण नहीं दिया।
इसलिए, 'चित्र-तुरंग न्याय' का उदाहरण शंकुक के अनुमितिवाद से संबंधित है, जो रस निष्पत्ति की प्रक्रिया को अनुमान के रूप में स्पष्ट करता है।
प्रश्न 334
निम्नांकित में प्रेरणार्थक धातु नहीं है -
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उत्तर और व्याख्या
Option 4 सही उत्तर है क्योंकि 'जगना' एक मूल धातु है, प्रेरणार्थक धातु नहीं।
यहाँ अन्य विकल्पों की व्याख्या दी गई है:
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समझाना: यह 'समझना' क्रिया का प्रेरणार्थक रूप है। प्रेरणार्थक क्रिया वह होती है जिसमें कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी और को कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। 'समझाना' में, कोई व्यक्ति किसी और को समझने के लिए प्रेरित कर रहा है।
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पिलाना: यह 'पीना' क्रिया का प्रेरणार्थक रूप है। इसमें कर्ता स्वयं न पीकर किसी और को पिला रहा है।
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धुलवाना: यह 'धोना' क्रिया का प्रेरणार्थक रूप है। इसमें कर्ता स्वयं न धोकर किसी और से धुलवा रहा है।
'जगना' एक अकर्मक क्रिया है और इसका कोई प्रेरणार्थक रूप नहीं है। इसलिए, 'जगना' प्रेरणार्थक धातु नहीं है।
प्रश्न 335
विशेषण से बनी भाववाचक संज्ञा है -
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उत्तर और व्याख्या
विशेषण से बनी भाववाचक संज्ञा 'लाघव' है, क्योंकि 'लाघव' शब्द 'लघु' विशेषण से बना है। 'लघु' का अर्थ होता है छोटा या कम, और 'लाघव' का अर्थ होता है लघुता, कमी या संक्षिप्तता - जो कि एक भाव है।
अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि:
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लड़कपन: यह शब्द 'लड़का' जातिवाचक संज्ञा से बना है, विशेषण से नहीं। 'लड़का' एक व्यक्ति को दर्शाता है, जबकि 'लड़कपन' उस अवस्था या भाव को दर्शाता है जो लड़के होने से जुड़ा है।
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अपनत्व: यह शब्द 'अपना' सर्वनाम से बना है, विशेषण से नहीं। 'अपना' स्वामित्व या संबंध दर्शाता है, जबकि 'अपनत्व' अपनेपन की भावना को दर्शाता है।
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चुनाव: यह शब्द 'चुनना' क्रिया से बना है, विशेषण से नहीं। 'चुनना' एक क्रिया है जिसका अर्थ है किसी चीज का चयन करना, जबकि 'चुनाव' उस चयन की प्रक्रिया या परिणाम को दर्शाता है।
इसलिए, केवल 'लाघव' ही विशेषण ('लघु') से बनी भाववाचक संज्ञा है।
प्रश्न 336
सिल्वर वैडिंग' कहानी का प्रधान पात्र कौन है ?
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उत्तर और व्याख्या
यशोधर बाबू 'सिल्वर वैडिंग' कहानी के प्रधान पात्र हैं, इसलिए विकल्प 2 सही है।
यहाँ अन्य विकल्प क्यों गलत हैं, इसका स्पष्टीकरण दिया गया है:
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विकल्प 1: किशनदा: किशनदा कहानी में यशोधर बाबू के मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत थे। उन्होंने यशोधर बाबू को दिल्ली में नौकरी दिलाने में मदद की और उन्हें जीवन के मूल्यों के बारे में सिखाया। हालांकि, कहानी किशनदा के इर्द-गिर्द नहीं घूमती है, बल्कि यशोधर बाबू के जीवन और उनके मूल्यों के संघर्ष पर केंद्रित है। इसलिए, किशनदा प्रधान पात्र नहीं हैं।
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विकल्प 3: गिरीश: गिरीश यशोधर बाबू का रिश्तेदार है और कहानी में एक मामूली भूमिका निभाता है। वह आधुनिक विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है और यशोधर बाबू के मूल्यों के विपरीत है। गिरीश कहानी का प्रधान पात्र नहीं है क्योंकि कहानी का मुख्य ध्यान यशोधर बाबू और उनकी विचारधारा पर है।
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विकल्प 4: भूषण: भूषण यशोधर बाबू का बेटा है और वह भी आधुनिक विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है। वह अपने पिता के पुराने विचारों से असहमत है और कहानी में पीढ़ी के अंतराल को दर्शाता है। भूषण कहानी का प्रधान पात्र नहीं है क्योंकि कहानी का केंद्र यशोधर बाबू का अपने मूल्यों के साथ संघर्ष है।
इसलिए, 'सिल्वर वैडिंग' कहानी के प्रधान पात्र यशोधर बाबू हैं, क्योंकि कहानी उनके जीवन, उनके मूल्यों और उनके संघर्षों के इर्द-गिर्द घूमती है।
प्रश्न 337
तुलसीकृत 'रामाज्ञा प्रश्न' का वर्ण्य-विषय क्या है ?
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उत्तर और व्याख्या
तुलसीकृत 'रामाज्ञा प्रश्न' का वर्ण्य-विषय शुभाशुभ फल का विचार करना है।
Option 2 सही क्यों है:
'रामाज्ञा प्रश्न' तुलसीदास द्वारा रचित एक ज्योतिष ग्रंथ है। इसका मुख्य उद्देश्य भगवान राम के नाम पर आधारित चौपाइयों के माध्यम से प्रश्नों के उत्तर देना और शुभाशुभ फलों का विचार करना है। यह एक प्रकार का शकुन विचार है, जिसमें रामचरितमानस की चौपाइयों का उपयोग करके भविष्य या किसी कार्य की सफलता-असफलता का अनुमान लगाया जाता है। इसलिए, यह स्पष्ट रूप से शुभाशुभ फल के विचार से संबंधित है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
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Option 1: राम की आज्ञाओं का चित्रण: 'रामाज्ञा प्रश्न' में राम की आज्ञाओं का सीधा चित्रण नहीं है। यह राम के नाम का उपयोग करके प्रश्नों के उत्तर देने की एक विधि है, न कि राम की आज्ञाओं का वर्णन।
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Option 3: आदर्श जीवन-चित्रण: 'रामाज्ञा प्रश्न' आदर्श जीवन के सिद्धांतों पर केंद्रित नहीं है। यह मुख्य रूप से भविष्य जानने और शुभाशुभ फल का विचार करने के लिए है।
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Option 4: अशुभ कर्मों का चित्रण: 'रामाज्ञा प्रश्न' अशुभ कर्मों के चित्रण पर केंद्रित नहीं है, बल्कि यह शुभ और अशुभ दोनों प्रकार के फलों का विचार करता है। इसका उद्देश्य किसी कार्य के परिणाम को जानना है, न कि केवल अशुभ कर्मों का वर्णन करना।
इसलिए, केवल Option 2 ही 'रामाज्ञा प्रश्न' के वर्ण्य-विषय को सटीक रूप से दर्शाता है।
प्रश्न 338
भक्तिकालीन कृष्ण-काव्य के संबंध में कौन-सा कथन सही नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
भक्तिकालीन कृष्ण-काव्य के संबंध में कथन 4, "इसमें लोकमर्यादा को विशेष महत्त्व दिया गया है," सही नहीं है, क्योंकि:
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क्यों कथन 4 सही नहीं है: भक्तिकालीन कृष्ण-काव्य में, विशेष रूप से प्रेम और श्रृंगार से संबंधित पदों में, लोकमर्यादा का उल्लंघन या उसकी उपेक्षा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। कृष्ण और गोपियों के प्रेम, रासलीला, और अन्य लीलाओं में सामाजिक बंधनों और मर्यादाओं को अक्सर तोड़ा गया है। भक्त कवियों ने प्रेम की तीव्रता और भक्ति के आवेग को दर्शाने के लिए लोकमर्यादा से ऊपर उठकर भावनाओं को व्यक्त किया है। इसलिए, यह कहना कि कृष्ण-काव्य में लोकमर्यादा को विशेष महत्त्व दिया गया है, गलत है।
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अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
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विकल्प 1: यह अधिकतर मुक्तक रूप में रचा गया है। यह कथन सही है क्योंकि भक्तिकालीन कृष्ण-काव्य का अधिकांश भाग मुक्तक शैली में ही लिखा गया है। मुक्तक काव्य में प्रत्येक पद स्वतंत्र होता है और किसी पूर्ववर्ती या परवर्ती पद से बंधा हुआ नहीं होता।
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विकल्प 2: इसके सर्वाधिक प्रिय विषय बाललीलाएँ और प्रेमलीलाएँ हैं। यह कथन भी सही है। कृष्ण-काव्य में बाल कृष्ण की लीलाओं और राधा-कृष्ण के प्रेम का व्यापक वर्णन मिलता है। ये विषय कवियों और भक्तों दोनों के लिए अत्यंत प्रिय थे।
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विकल्प 3: अधिकांश कृष्ण-काव्य गीतिपदों में रचित हैं। यह कथन भी सही है। कृष्ण-काव्य में गीति-तत्व की प्रधानता है। अधिकांश पद गेय हैं और राग-रागिनियों में बंधे हुए हैं।
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प्रश्न 339
व्यंजना शब्द-शक्ति के संबंध में इनमें से कौन-सा कथन सही नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
व्यंजना शब्द-शक्ति के संबंध में कथन 1 सही नहीं है, क्योंकि व्यंजना शब्द और अर्थ दोनों पर आधारित होती है, केवल अर्थ पर नहीं।
यहाँ अन्य विकल्पों की व्याख्या दी गई है कि वे क्यों गलत हैं:
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विकल्प 2 गलत क्यों है: व्यंजना शक्ति द्वारा एक से अधिक अर्थों की व्यंजना कराई जा सकती है। यह कथन सत्य है। व्यंजना का कार्य ही है कि वह अभिधा और लक्षणा से भिन्न, गूढ़ अर्थों को प्रकट करे, और यह एक से अधिक अर्थों को भी व्यक्त कर सकती है।
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विकल्प 3 गलत क्यों है: यह अभिधा या लक्षणा द्वारा अप्रकाशित अर्थ को प्रकाशित कर देती है। यह कथन भी सत्य है। व्यंजना का मुख्य कार्य ही यही है कि वह उन अर्थों को उजागर करे जो अभिधा (शाब्दिक अर्थ) और लक्षणा (लाक्षणिक अर्थ) द्वारा स्पष्ट नहीं होते।
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विकल्प 4 गलत क्यों है: व्यंजना द्वारा प्रकाशित अर्थ को प्रतीयमानार्थ भी कहते हैं। यह कथन भी सत्य है। व्यंजना द्वारा जो अर्थ प्रकट होता है, उसे 'प्रतीयमानार्थ' कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'प्रतीत होने वाला अर्थ' या 'व्यंग्यार्थ'।
इसलिए, केवल विकल्प 1 गलत है क्योंकि व्यंजना शब्द और अर्थ दोनों पर निर्भर करती है, न कि केवल अर्थ पर।
प्रश्न 340
इनमें से कौन-सा वाक्य शुद्ध है ?
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उत्तर और व्याख्या
Option 2, "मुझे आपसे व्याकरण सीखना है," शुद्ध वाक्य है क्योंकि यह व्याकरणिक रूप से सही है और इसका अर्थ स्पष्ट है। इसमें कर्ता (मुझे), कर्म (व्याकरण), क्रिया (सीखना) और संबंध कारक (आपसे) का सही प्रयोग हुआ है। वाक्य सरल और समझने में आसान है।
अब, अन्य विकल्पों की अशुद्धता का कारण:
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Option 1: प्रत्येक बच्चे को चार-चार पुस्तकें दे दो। इस वाक्य में "चार-चार" का प्रयोग अनावश्यक है। "प्रत्येक बच्चे को चार पुस्तकें दे दो" अधिक सटीक और स्वाभाविक होगा। "चार-चार" का दोहराव वाक्य को अटपटा बना रहा है।
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Option 3: महात्मा गाँधी का देश सदा कृतज्ञ रहेगा। इस वाक्य में "का देश" का प्रयोग उचित नहीं है। सही वाक्य होगा "देश महात्मा गाँधी का सदा कृतज्ञ रहेगा" या "महात्मा गाँधी के प्रति देश सदा कृतज्ञ रहेगा"। वाक्य में शब्द क्रम दोषपूर्ण है।
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Option 4: अभी आठ बजने को बीस मिनट हैं। यह वाक्य व्याकरणिक रूप से गलत है। सही वाक्य होगा "अभी आठ बजने में बीस मिनट हैं"। "को" के स्थान पर "में" का प्रयोग उचित है।