HTET परीक्षा Level 3 PGT
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 3 PGT की तैयारी
सत्यापित उत्तर और व्याख्याएँ
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 341
इनमें से कौन-सा शब्द 'समुच्चयबोधक' अव्यय नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'एकाएक' शब्द समुच्चयबोधक अव्यय नहीं है, क्योंकि यह एक क्रियाविशेषण (adverb) है। क्रियाविशेषण वे शब्द होते हैं जो क्रिया की विशेषता बताते हैं, जैसे कि 'वह एकाएक चला गया'। यहाँ 'एकाएक' क्रिया 'चला गया' की विशेषता बता रहा है।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
-
यद्यपि: यह एक समुच्चयबोधक अव्यय है जो दो वाक्यों या वाक्यांशों को जोड़ता है, और विरोधाभास दर्शाता है। उदाहरण: "यद्यपि वह गरीब है, फिर भी ईमानदार है।"
-
मगर: यह भी एक समुच्चयबोधक अव्यय है जो दो वाक्यों या वाक्यांशों को जोड़ता है, और विरोध या अंतर दर्शाता है। उदाहरण: "मैं जाना चाहता था, मगर जा नहीं पाया।"
-
अर्थात्: यह एक समुच्चयबोधक अव्यय है जो स्पष्टीकरण या परिभाषा देने के लिए उपयोग किया जाता है। उदाहरण: "उसे बुखार है, अर्थात् वह बीमार है।"
इसलिए, केवल 'एकाएक' ही समुच्चयबोधक अव्यय नहीं है, बल्कि एक क्रियाविशेषण है। इसलिए विकल्प 1 सही है।
प्रश्न 342
प्रेमचंद के फटे जूते' नामक निबंध में व्यंग्य-विषय है -
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'प्रेमचंद के फटे जूते' नामक निबंध में व्यंग्य-विषय दिखावे की प्रवृत्ति एवं अवसरवादिता है, क्योंकि:
-
Option 4 सही क्यों है: प्रेमचंद के फटे जूते उनकी सादगी और आडंबरहीन जीवनशैली को दर्शाते हैं। लेखक, हरिशंकर परसाई, इस निबंध में प्रेमचंद के व्यक्तित्व के माध्यम से समाज में व्याप्त दिखावे की प्रवृत्ति और अवसरवादिता पर व्यंग्य करते हैं। प्रेमचंद अपनी वास्तविक स्थिति को छिपाने का प्रयास नहीं करते, जबकि समाज में लोग अपनी कमियों को छिपाने और बेहतर दिखने के लिए दिखावा करते हैं। प्रेमचंद का फटा जूता इस दिखावे के खिलाफ एक प्रतीक है। वे अपनी कमजोरियों को स्वीकार करते हैं और अवसरवादिता से दूर रहते हैं, जो कि उस समय के समाज में एक दुर्लभ गुण था। निबंध में प्रेमचंद की सरलता और ईमानदारी की तुलना समाज के दिखावटी और अवसरवादी रवैये से की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि व्यंग्य का मुख्य विषय यही है।
-
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
-
Option 1: वेशभूषा के प्रति लोगों की उदासीनता: हालांकि प्रेमचंद की वेशभूषा साधारण है, लेकिन निबंध का मुख्य फोकस वेशभूषा के प्रति उदासीनता नहीं है, बल्कि दिखावे और वास्तविकता के बीच का अंतर है। उदासीनता एक निष्क्रिय भाव है, जबकि निबंध में दिखावे की सक्रिय प्रवृत्ति पर व्यंग्य किया गया है।
-
Option 2: खान-पान में शुद्धता का अभाव: निबंध में खान-पान का कोई विशेष उल्लेख नहीं है, इसलिए यह विकल्प सीधे तौर पर निबंध के विषय से संबंधित नहीं है।
-
Option 3: पुरातन रीति-रिवाज: निबंध में पुरातन रीति-रिवाजों पर सीधे तौर पर व्यंग्य नहीं किया गया है। हालांकि, प्रेमचंद की सादगी और आडंबरहीन जीवनशैली पुरातन मूल्यों को दर्शाती है, लेकिन व्यंग्य का मुख्य विषय दिखावे की प्रवृत्ति और अवसरवादिता ही है।
-
प्रश्न 343
"कोटिक ए कलधौत के धाम करील के कुंजन ऊपर वारौं।"
इस काव्य-पंक्ति में 'कलधौत के धाम' से क्या तात्पर्य है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'कोटिक ए कलधौत के धाम करील के कुंजन ऊपर वारौं।' इस काव्य-पंक्ति में 'कलधौत के धाम' से तात्पर्य सोने-चाँदी के आवास-स्थल से है।
Option 2 सही क्यों है:
'कलधौत' शब्द का अर्थ ही सोना-चाँदी होता है। 'धाम' शब्द आवास या स्थान को दर्शाता है। इसलिए, 'कलधौत के धाम' का सीधा अर्थ है सोने-चाँदी से बने आवास-स्थल। पंक्ति में कवि करील के कुंजों (कांटेदार झाड़ियों के झुरमुट) पर सोने-चाँदी के आवासों को भी न्योछावर करने की बात कर रहा है, जो यह दर्शाता है कि 'कलधौत के धाम' बहुमूल्य और कीमती आवासों को संदर्भित करता है, जो सोने-चांदी से बने हो सकते हैं।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
-
Option 1: विशाल अट्टालिकाएँ: 'कलधौत' शब्द विशेष रूप से विशालता को नहीं दर्शाता है, बल्कि सोने-चाँदी के मूल्य को इंगित करता है। अट्टालिकाएँ विशाल हो सकती हैं, लेकिन 'कलधौत' शब्द का सीधा संबंध सोने-चाँदी से है।
-
Option 3: पवित्र तीर्थस्थल: 'कलधौत' शब्द का धार्मिक या पवित्रता से कोई सीधा संबंध नहीं है। यह केवल सोने-चाँदी के मूल्य को दर्शाता है।
-
Option 4: सुसज्जित भवन: सुसज्जित भवन किसी भी सामग्री से बना हो सकता है। 'कलधौत' शब्द विशेष रूप से सोने-चाँदी से बने भवनों को इंगित करता है, न कि केवल सजावट को। इसलिए, यह विकल्प सटीक नहीं है।
अतः, 'कलधौत के धाम' का सबसे सटीक अर्थ सोने-चाँदी के आवास-स्थल ही है।
प्रश्न 344
"इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं।।"
'रामचरितमानस' की इस पंक्ति में 'कुम्हड़बतिया' से क्या आशय है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'रामचरितमानस' की पंक्ति "इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं।" में 'कुम्हड़बतिया' से आशय अशक्त और निर्बल व्यक्ति ही है, और इसका कारण इस पंक्ति का भावार्थ है।
Option 1 (अशक्त और निर्बल व्यक्ति) सही क्यों है:
- भावार्थ: इस पंक्ति का अर्थ है कि यहाँ कोई भी इतना कमजोर और निर्बल नहीं है जो तर्जनी (उंगली) दिखाने मात्र से डरकर मर जाए। 'कुम्हड़बतिया' एक छोटा, कमजोर फल होता है जो आसानी से मुरझा जाता है। इसलिए, इसका प्रयोग यहाँ उन लोगों के लिए किया गया है जो शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हैं और आसानी से डर जाते हैं। तुलसीदास जी इस पंक्ति के माध्यम से यह कहना चाहते हैं कि यहाँ उपस्थित लोग साहसी और शक्तिशाली हैं, डरपोक नहीं।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
-
Option 2 (साधनहीन व्यक्ति): साधनहीन व्यक्ति वह होता है जिसके पास संसाधनों की कमी हो। जबकि 'कुम्हड़बतिया' का प्रयोग कमजोरी और डरपोक स्वभाव को दर्शाने के लिए किया गया है, न कि संसाधनों की कमी को। पंक्ति में डरपोक होने पर जोर दिया गया है, न कि साधनहीन होने पर।
-
Option 3 (रुग्ण व्यक्ति): रुग्ण व्यक्ति बीमार होता है। हालांकि एक बीमार व्यक्ति कमजोर हो सकता है, लेकिन 'कुम्हड़बतिया' का प्रयोग विशेष रूप से डरपोक और आसानी से प्रभावित होने वाले व्यक्ति के लिए किया गया है, न कि केवल बीमार व्यक्ति के लिए। पंक्ति में बीमारी का कोई सीधा उल्लेख नहीं है।
-
Option 4 (अपराधी व्यक्ति): अपराधी व्यक्ति वह होता है जिसने कोई अपराध किया हो। 'कुम्हड़बतिया' का प्रयोग किसी अपराध या अपराधी को दर्शाने के लिए नहीं किया गया है। पंक्ति में कमजोरी और डरपोक स्वभाव पर ध्यान केंद्रित किया गया है, न कि किसी अपराध पर।
इसलिए, 'कुम्हड़बतिया' का सबसे सटीक अर्थ अशक्त और निर्बल व्यक्ति ही है, क्योंकि यह पंक्ति के भावार्थ और संदर्भ के अनुरूप है।
प्रश्न 345
दिए गए कूट की सहायता से निम्नांकित उपन्यासों और उपन्यासकारों को सुमेलित कीजिए -
उपन्यास : उपन्यासकार
(अ) चित्तकोबरा : (i) राजेंद्र यादव
(ब) सूरजमुखी अंधेरे के : (ii) मृदुला गर्ग
(स) अनदेखे अनजाने : (iii) फणीश्वरनाथ पुल
(द) जुलूस (iv) कृष्णा सोबती
कूट -
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Here's the explanation supporting Option 4 as the correct answer:
Option 4: अ-ii, ब-iv, स-i, द-iii
This option correctly matches the novels with their respective authors:
-
(अ) चित्तकोबरा : (ii) मृदुला गर्ग: The novel "Chittacobra" is indeed written by Mridula Garg. This is a well-established fact in Hindi literature.
-
(ब) सूरजमुखी अंधेरे के : (iv) कृष्णा सोबती: "Surajmukhi Andhere Ke" is a notable work by Krishna Sobti. This pairing is accurate.
-
(स) अनदेखे अनजाने : (i) राजेंद्र यादव: "Andekhe Anjane" is a novel authored by Rajendra Yadav. This is a correct match.
-
(द) जुलूस : (iii) फणीश्वरनाथ रेणु: "Juloos" is a novel written by Phanishwarnath Renu. This pairing is accurate.
Therefore, Option 4 provides the correct pairings for all the novels and authors listed.
Now, let's explain why the other options are incorrect:
-
Option 1: अ-iv, ब-ii, स-iii, द-i: This option incorrectly pairs "Chittacobra" with Krishna Sobti, "Surajmukhi Andhere Ke" with Mridula Garg, "Andekhe Anjane" with Phanishwarnath Renu, and "Juloos" with Rajendra Yadav. None of these pairings are accurate.
-
Option 2: अ-i, ब-iii, स-iv, द-ii: This option incorrectly pairs "Chittacobra" with Rajendra Yadav, "Surajmukhi Andhere Ke" with Phanishwarnath Renu, "Andekhe Anjane" with Krishna Sobti, and "Juloos" with Mridula Garg. None of these pairings are accurate.
-
Option 3: अ-iii, ब-ii, स-i, द-iv: This option incorrectly pairs "Chittacobra" with Phanishwarnath Renu, "Surajmukhi Andhere Ke" with Mridula Garg, "Andekhe Anjane" with Rajendra Yadav, and "Juloos" with Krishna Sobti. Only one pairing is correct, but the rest are incorrect.
In conclusion, only Option 4 provides the correct and accurate matching of the novels and their respective authors, making it the correct answer.
प्रश्न 346
खड़ी बोली को 'जनपदीय हिंदुस्तानी' कहने वाले भाषा वैज्ञानिक हैं -
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सुनीति कुमार चटर्जी
Explanation:
सुनीति कुमार चटर्जी ने खड़ी बोली को 'जनपदीय हिंदुस्तानी' कहा था। उन्होंने भाषा के विकास और उसके विभिन्न रूपों के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 'जनपदीय हिंदुस्तानी' शब्द का प्रयोग करके, चटर्जी ने खड़ी बोली की उस विशेषता को उजागर किया जो उसे विभिन्न क्षेत्रों में बोली जाने वाली हिंदुस्तानी भाषा के रूप में दर्शाती है। यह नामकरण खड़ी बोली के स्थानीय और क्षेत्रीय स्वरूप को महत्व देता है।
Why other options are incorrect:
-
ग्रियर्सन: जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने भारतीय भाषाओं का व्यापक सर्वेक्षण किया और 'लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया' नामक ग्रंथ लिखा। उनका योगदान भाषाओं के वर्गीकरण और उनके भौगोलिक वितरण को समझने में महत्वपूर्ण है, लेकिन उन्होंने खड़ी बोली को 'जनपदीय हिंदुस्तानी' नहीं कहा।
-
गिलक्राइस्ट: जॉन बोर्थविक गिलक्राइस्ट फोर्ट विलियम कॉलेज से जुड़े थे और उन्होंने हिंदी और उर्दू के विकास में योगदान दिया। उन्होंने हिंदुस्तानी भाषा के व्याकरण और शब्दकोश पर काम किया, लेकिन खड़ी बोली को 'जनपदीय हिंदुस्तानी' कहने का श्रेय उन्हें नहीं जाता।
-
धीरेन्द्र वर्मा: धीरेन्द्र वर्मा एक प्रसिद्ध भाषा वैज्ञानिक और हिंदी साहित्य के विद्वान थे। उन्होंने हिंदी भाषा के इतिहास और विकास पर महत्वपूर्ण कार्य किया, लेकिन खड़ी बोली को 'जनपदीय हिंदुस्तानी' कहने वाले भाषा वैज्ञानिक सुनीति कुमार चटर्जी हैं।
Therefore, the correct answer is Option 3: सुनीति कुमार चटर्जी.
प्रश्न 347
राजस्थान की रजत बूँदें' के रचनाकार हैं -
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'राजस्थान की रजत बूँदें' के रचनाकार अनुपम मिश्र हैं।
Option 3 सही क्यों है:
अनुपम मिश्र एक प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और लेखक थे जिन्होंने जल संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी पुस्तक 'राजस्थान की रजत बूँदें' राजस्थान में जल संरक्षण की पारंपरिक विधियों और तकनीकों पर आधारित है। यह पुस्तक राजस्थान के लोगों द्वारा पानी की कमी से निपटने के लिए किए गए प्रयासों का विस्तृत वर्णन करती है। यह पुस्तक जल प्रबंधन के महत्व को उजागर करती है और दिखाती है कि कैसे स्थानीय ज्ञान और पारंपरिक तकनीकों का उपयोग करके पानी की समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। इसलिए, यह स्पष्ट है कि 'राजस्थान की रजत बूँदें' के रचनाकार अनुपम मिश्र हैं।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
-
बेबी हालदार: बेबी हालदार एक भारतीय घरेलू सहायिका और लेखिका हैं, जो अपनी आत्मकथा 'आलो आंधारी' के लिए जानी जाती हैं। उनका कार्यक्षेत्र 'राजस्थान की रजत बूँदें' से अलग है।
-
विष्णु खरे: विष्णु खरे एक प्रसिद्ध हिंदी कवि और आलोचक थे। उनकी रचनाएँ साहित्य और संस्कृति पर केंद्रित हैं, न कि जल संरक्षण पर।
-
कुमार गंधर्व: कुमार गंधर्व एक प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय गायक थे। उनका योगदान संगीत के क्षेत्र में है, साहित्य या पर्यावरण के क्षेत्र में नहीं।
इसलिए, केवल अनुपम मिश्र ही 'राजस्थान की रजत बूँदें' के रचनाकार हैं, जो राजस्थान में जल संरक्षण पर केंद्रित है।
प्रश्न 348
दिनकर की इनमें से कौन-सी रचना ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
उर्वशी
दिनकर की रचना 'उर्वशी' को ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार उन्हें 1972 में मिला था। 'उर्वशी' एक काव्य नाटक है जो प्रेम, काम, और अध्यात्म जैसे विषयों पर आधारित है।
अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि:
- कुरुक्षेत्र: 'कुरुक्षेत्र' एक प्रसिद्ध रचना है, लेकिन इसे ज्ञानपीठ पुरस्कार नहीं मिला है।
- रश्मिरथी: 'रश्मिरथी' भी दिनकर की एक महत्वपूर्ण रचना है, परन्तु यह ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित नहीं है।
- हुंकार: 'हुंकार' दिनकर की एक और रचना है, लेकिन इसे भी ज्ञानपीठ पुरस्कार नहीं मिला है।
इसलिए, केवल 'उर्वशी' ही दिनकर की वह रचना है जिसे ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
प्रश्न 349
"धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूत कहौ, जोलहा कहौ कोऊ।"
इस काव्य पंक्ति के रचनाकार हैं -
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
गोस्वामी तुलसीदास
व्याख्या:
यह काव्य पंक्ति गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित 'कवितावली' से ली गई है। इस पंक्ति में, तुलसीदास जी समाज में अपनी जाति और पहचान के बारे में उठने वाले सवालों के प्रति अपनी बेफिक्री व्यक्त करते हैं। वे कहते हैं कि लोग उन्हें चाहे धूर्त कहें, अवधूत कहें, राजपूत कहें या जुलाहा कहें, उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उनका ध्यान केवल राम भक्ति पर केंद्रित है।
अन्य विकल्पों की अस्वीकृति:
-
कबीर: कबीर की रचनाओं में सामाजिक रूढ़ियों और जातिवाद पर तीखा प्रहार मिलता है, लेकिन उनकी भाषा और शैली तुलसीदास से भिन्न है। कबीर की रचनाओं में इस प्रकार की व्यक्तिगत बेफिक्री और राम भक्ति का सीधा उल्लेख इस रूप में नहीं मिलता।
-
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला': निराला की कविताएँ विद्रोह, प्रकृति और मानवतावाद से भरी हैं। उनकी भाषा और शैली में एक ओज और नवीनता है जो तुलसीदास की रचनाओं से अलग है। इस प्रकार की सरल, भक्तिपूर्ण और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति निराला की शैली में कम ही पाई जाती है।
-
सूरदास: सूरदास कृष्ण भक्ति के कवि हैं और उनकी रचनाएँ वात्सल्य, श्रृंगार और भक्ति रस से ओतप्रोत हैं। उनकी भाषा ब्रजभाषा है और उनकी शैली में कृष्ण लीलाओं का वर्णन प्रमुख है। तुलसीदास की तरह जाति और पहचान के प्रति इस प्रकार की बेफिक्री सूरदास की रचनाओं में नहीं मिलती।
इसलिए, स्पष्ट रूप से, दी गई काव्य पंक्ति की शैली, भाषा और भाव गोस्वामी तुलसीदास की रचनाओं से मेल खाते हैं, जिससे विकल्प 4 सही उत्तर है।
प्रश्न 350
ग्रियर्सन ने हिंदी की कितनी बोलियाँ मानी हैं ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
ग्रियर्सन ने हिंदी की 8 बोलियाँ मानी हैं, इसलिए विकल्प 1 सही है।
विस्तृत स्पष्टीकरण:
जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ "लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया" में हिंदी भाषा के अंतर्गत आने वाली बोलियों का विस्तृत अध्ययन किया। उन्होंने हिंदी क्षेत्र की बोलियों को पश्चिमी हिंदी और पूर्वी हिंदी में विभाजित करते हुए कुल 8 बोलियाँ मानीं। ये 8 बोलियाँ इस प्रकार हैं:
-
पश्चिमी हिंदी:
- ब्रजभाषा
- कन्नौजी
- बुंदेली
- खड़ी बोली
- हरियाणवी (बांगरू)
-
पूर्वी हिंदी:
- अवधी
- बघेली
- छत्तीसगढ़ी
इसलिए, ग्रियर्सन के अनुसार हिंदी की बोलियों की संख्या 8 है, जो विकल्प 1 को सही साबित करता है।
अन्य विकल्पों की अस्वीकृति:
- विकल्प 2 (9): ग्रियर्सन ने हिंदी की 9 बोलियाँ नहीं मानीं। उनकी वर्गीकरण प्रणाली में कुल 8 बोलियाँ शामिल हैं।
- विकल्प 3 (15): ग्रियर्सन ने हिंदी की 15 बोलियाँ भी नहीं मानीं। यह संख्या उनकी वर्गीकरण प्रणाली से मेल नहीं खाती।
- विकल्प 4 (18): ग्रियर्सन द्वारा हिंदी की 18 बोलियाँ मानने का कोई प्रमाण नहीं है। उनकी मान्यता 8 बोलियों तक ही सीमित है।
अतः, स्पष्ट रूप से विकल्प 1 ही सही उत्तर है।
प्रश्न 351
भक्तिन' पाठ महादेवी वर्मा के किस गद्य संग्रह में संकलित है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'भक्तिन' पाठ महादेवी वर्मा के 'स्मृति की रेखाएँ' गद्य संग्रह में संकलित है।
Option 3 सही क्यों है:
'भक्तिन' महादेवी वर्मा द्वारा रचित एक प्रसिद्ध संस्मरणात्मक रेखाचित्र है। यह रेखाचित्र उनके गद्य संग्रह 'स्मृति की रेखाएँ' में प्रकाशित हुआ है। 'स्मृति की रेखाएँ' में महादेवी वर्मा ने अपने जीवन में आए विभिन्न साधारण व्यक्तियों के रेखाचित्र प्रस्तुत किए हैं, और 'भक्तिन' उनमें से एक महत्वपूर्ण रेखाचित्र है। यह पाठ भक्तिन नामक एक सेविका के जीवन और महादेवी वर्मा के साथ उसके अटूट संबंध को दर्शाता है। इसलिए, यह स्पष्ट रूप से 'स्मृति की रेखाएँ' में संकलित है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
-
Option 1: मेरा परिवार: 'मेरा परिवार' महादेवी वर्मा का एक अन्य गद्य संग्रह है, लेकिन यह मुख्य रूप से उनके पालतू जानवरों और परिवार के सदस्यों के बारे में है। 'भक्तिन' इस संग्रह का हिस्सा नहीं है।
-
Option 2: अतीत के चलचित्र: 'अतीत के चलचित्र' भी महादेवी वर्मा का एक महत्वपूर्ण गद्य संग्रह है, लेकिन इसमें उनके बचपन और प्रारंभिक जीवन से जुड़ी स्मृतियाँ हैं। 'भक्तिन' इस संग्रह में शामिल नहीं है।
-
Option 4: पथ के साथी: 'पथ के साथी' महादेवी वर्मा का एक संस्मरण संग्रह है जिसमें उन्होंने अपने समकालीन लेखकों और कवियों के बारे में लिखा है। 'भक्तिन' एक सेविका थी, लेखिका नहीं, इसलिए यह पाठ 'पथ के साथी' में शामिल नहीं है।
अतः, 'भक्तिन' पाठ 'स्मृति की रेखाएँ' में ही संकलित है, इसलिए Option 3 सही है।
प्रश्न 352
"मैं इस्लाम के महत्त्व को भूल नहीं रहा हूँ लेकिन जोर देकर कहना चाहता हूँ कि अगर इस्लाम न आया होता तो भी इस साहित्य का बाहर आना वैसा ही होता जैसा आज है।"
भक्ति-साहित्य के संबंध में यह कथन किसका है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
हजारी प्रसाद द्विवेदी।
व्याख्या:
यह कथन हजारी प्रसाद द्विवेदी का है और भक्ति साहित्य के संदर्भ में उनके विचारों को दर्शाता है। द्विवेदी जी ने भक्ति साहित्य के उदय और विकास को केवल इस्लाम के प्रभाव से जोड़कर देखने का विरोध किया। उनका मानना था कि भक्ति आंदोलन के बीज भारतीय संस्कृति और दर्शन में पहले से ही मौजूद थे।
-
हजारी प्रसाद द्विवेदी क्यों सही हैं: द्विवेदी जी ने अपनी रचनाओं में भक्ति साहित्य की स्वतंत्र उत्पत्ति और विकास पर जोर दिया है। उन्होंने यह तर्क दिया कि भक्ति आंदोलन सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक परिस्थितियों का परिणाम था, न कि केवल इस्लाम का प्रभाव। उनका मानना था कि भक्ति साहित्य की जड़ें भारतीय चिंतन परंपरा में गहरी थीं और यह एक स्वाभाविक विकास था। द्विवेदी जी ने 'कबीर', 'सूर साहित्य', 'हिंदी साहित्य: उद्भव और विकास' जैसी कृतियों में इस विचार को विस्तार से प्रस्तुत किया है।
-
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
- ग्रियर्सन: ग्रियर्सन ने भक्ति साहित्य को ईसाई धर्म के प्रभाव से जोड़ा था, जो कि इस कथन के विपरीत है।
- रामचंद्र शुक्ल: शुक्ल जी ने भक्ति साहित्य को निराशा और पलायनवाद से जोड़ा था, जबकि द्विवेदी जी ने इसे अधिक सकारात्मक और स्वाभाविक विकास के रूप में देखा।
- रामकुमार वर्मा: रामकुमार वर्मा ने हिंदी साहित्य के इतिहास में भक्ति काल को महत्वपूर्ण स्थान दिया, लेकिन उनका दृष्टिकोण द्विवेदी जी से अलग था। वर्मा जी ने भक्ति साहित्य को अधिक धार्मिक और आध्यात्मिक संदर्भ में देखा, जबकि द्विवेदी जी ने इसके सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर अधिक ध्यान दिया।
इसलिए, हजारी प्रसाद द्विवेदी का यह कथन भक्ति साहित्य के उदय को केवल इस्लाम के प्रभाव से जोड़कर देखने के दृष्टिकोण का खंडन करता है और यह बताता है कि भक्ति साहित्य का विकास भारतीय परिस्थितियों में स्वाभाविक रूप से हुआ।
प्रश्न 353
निम्नांकित में गद्यबद्ध रचना है -
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वर्ण रत्नाकर
Explanation:
-
वर्ण रत्नाकर (Varna Ratnakara): यह ज्योतिरीश्वर ठाकुर द्वारा मैथिली भाषा में रचित एक गद्यबद्ध रचना है। यह 14वीं शताब्दी की शुरुआत में लिखी गई थी और मैथिली गद्य का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। इसमें विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई है, और इसकी शैली गद्यमय है। इसलिए, यह गद्यबद्ध रचना है।
-
कीर्ति पताका (Kirti Pataka): यह विद्यापति द्वारा रचित है और यह एक पद्य (कविता) रचना है।
-
श्रावकाचार (Shravakachara): यह देवसेन द्वारा रचित है और यह भी एक पद्य रचना है, जो जैन धर्म के श्रावकों के आचरण के नियमों पर आधारित है।
-
संदेशरासक (Sandesh Rasak): यह अब्दुल रहमान द्वारा रचित है और यह एक खंडकाव्य है, जो पद्य में लिखा गया है।
इसलिए, केवल वर्ण रत्नाकर ही गद्यबद्ध रचना है।
प्रश्न 354
दिए गए कूट की सहायता से निम्नांकित रचनाओं और रचनाकारों को सुमेलित कीजिए -
रचना : रचनाकार
(अ) भाषा भूषण : (i) देव
(ब) जगद् विनोद : (ii) सेनापति
(स) भाव-विलास : (iii) जसवंत सिंह
(द) कवित्त रत्नाकर : (iv) पद्माकर
कूट -
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
यहां उत्तर दिया गया है:
Option 1 सही है क्योंकि:
-
(अ) भाषा भूषण : (iii) जसवंत सिंह - 'भाषा भूषण' जसवंत सिंह द्वारा रचित एक प्रसिद्ध अलंकार ग्रंथ है। यह हिंदी साहित्य में अलंकार निरूपण का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है।
-
(ब) जगद् विनोद : (iv) पद्माकर - 'जगद् विनोद' पद्माकर द्वारा रचित एक रीतिकालीन काव्य रचना है। यह श्रृंगार रस से परिपूर्ण है और पद्माकर की श्रेष्ठ रचनाओं में से एक मानी जाती है।
-
(स) भाव-विलास : (i) देव - 'भाव-विलास' देव द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण काव्य कृति है। देव रीति काल के प्रमुख कवियों में से एक थे और 'भाव-विलास' उनकी रचनात्मक प्रतिभा का उत्कृष्ट उदाहरण है।
-
(द) कवित्त रत्नाकर : (ii) सेनापति - 'कवित्त रत्नाकर' सेनापति द्वारा रचित एक भक्ति और श्रृंगार रस से परिपूर्ण काव्य संग्रह है। सेनापति रीति काल के विशिष्ट कवियों में से एक थे।
अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि वे रचनाओं और रचनाकारों का सही मिलान नहीं करते हैं। उदाहरण के लिए, Option 2 में 'भाषा भूषण' को पद्माकर से जोड़ा गया है, जो गलत है क्योंकि 'भाषा भूषण' जसवंत सिंह की रचना है। इसी प्रकार, अन्य विकल्पों में भी गलत मिलान किए गए हैं, जो उन्हें अशुद्ध बनाते हैं। इसलिए, Option 1 ही सही उत्तर है क्योंकि यह सभी रचनाओं और रचनाकारों का सही मिलान प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 355
निम्न में से किस विकल्प में रचना और रचनाकार सुमेलित नहीं हैं ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 2 सही है क्योंकि 'क़लम का मज़दूर' प्रेमचंद की जीवनी है, लेकिन इसके रचनाकार अमृतराय नहीं, बल्कि मदन गोपाल हैं। अमृतराय ने प्रेमचंद की जीवनी 'क़लम का सिपाही' लिखी है। इसलिए, रचना और रचनाकार का मिलान सही नहीं है।
अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि:
- 'आवारा मसीहा' विष्णु प्रभाकर द्वारा लिखित शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की जीवनी है, और यह मिलान सही है।
- 'क्या भूलूँ क्या याद करूँ' हरिवंशराय बच्चन की आत्मकथा है, और यह मिलान भी सही है।
- 'निराला की साहित्य साधना' रामविलास शर्मा द्वारा लिखित सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' के जीवन और साहित्य पर आधारित कृति है, और यह मिलान भी सही है।
इसलिए, केवल Option 2 में रचना और रचनाकार का मिलान गलत है।
प्रश्न 356
निम्न में से ग़लत संधि-विच्छेद है -
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 1 सही है क्योंकि "वार्तालाप" का सही संधि-विच्छेद "वार्ता + आलाप" नहीं है। "वार्तालाप" का सही संधि-विच्छेद "वार्ता + आलाप" होता है, जहाँ 'आ' और 'आ' मिलकर 'आ' बनाते हैं (दीर्घ संधि)। दिया गया विच्छेद "वार्ता + अलाप" गलत है क्योंकि इससे शब्द का सही अर्थ और संधि नियम का पालन नहीं होता।
अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि:
-
विवादास्पद = विवाद + आस्पद: यह संधि-विच्छेद सही है। "विवाद" और "आस्पद" मिलकर "विवादास्पद" बनाते हैं।
-
आच्छादन = आ + छादन: यह संधि-विच्छेद भी सही है। "आ" उपसर्ग और "छादन" मिलकर "आच्छादन" बनाते हैं। यहाँ व्यंजन संधि का नियम लागू होता है।
-
निषिद्ध = नि + सिद्ध: यह संधि-विच्छेद भी सही है। "नि" उपसर्ग और "सिद्ध" मिलकर "निषिद्ध" बनाते हैं। यहाँ विसर्ग संधि का नियम लागू होता है।
इसलिए, केवल Option 1 ही गलत संधि-विच्छेद है।
प्रश्न 357
अलंकार से संबंधित कौन-सा विकल्प सुमेलित नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 4 सही है क्योंकि "निद्रा के उस अलसित वन में वह क्या भावी की छाया। दृग पलकों में विचर रही या वन्य देवियों की माया।।" में भ्रांतिमान अलंकार नहीं है। भ्रांतिमान अलंकार में किसी वस्तु को देखकर किसी दूसरी वस्तु का भ्रम हो जाता है, लेकिन यहाँ पर भ्रम नहीं है, बल्कि संदेह है। निश्चित रूप से यह तय नहीं हो पा रहा है कि वह भावी की छाया है या वन्य देवियों की माया। इसलिए यहाँ संदेह अलंकार है, भ्रांतिमान नहीं।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
-
"आग हूँ जिससे ढुलकते बिंदु हिमजल के" में विरोधाभास अलंकार है क्योंकि 'आग' और 'हिमजल' दो विरोधी बातें एक साथ कही गई हैं। आग गर्मी का प्रतीक है और हिमजल ठंडक का, इसलिए यहाँ विरोधाभास है। यह विकल्प सुमेलित है।
-
"भूपति सोहत दान सों, फल-फूलन उद्यान" में दीपक अलंकार है क्योंकि 'दान' रूपी दीपक से राजा और उद्यान दोनों प्रकाशित हो रहे हैं। दीपक अलंकार में एक ही शब्द या वाक्य से कई अर्थ निकलते हैं। यह विकल्प भी सुमेलित है।
-
"विरहिन के अँसुवानते भरन लग्यौ संसार। मैं जान्यों मरजाद तजि उमग्यौ सागर खार।।" में उत्प्रेक्षा अलंकार है क्योंकि विरहिणी के आंसुओं से संसार भर जाने की कल्पना की जा रही है और ऐसा लग रहा है मानो खारा सागर मर्यादा त्यागकर उमड़ रहा हो। 'मानों' शब्द उत्प्रेक्षा अलंकार का वाचक है। यह विकल्प भी सुमेलित है।
इसलिए, केवल Option 4 सुमेलित नहीं है, क्योंकि इसमें भ्रांतिमान अलंकार नहीं, बल्कि संदेह अलंकार है।
प्रश्न 358
"रीझि रीझि रहसि रहसि हँसि हँसि उठै
साँसै भरि आँसू भरि कहत दई दई।"
प्रस्तुत काव्य-पंक्तियों में अनुप्रास अलंकार का कौन-सा भेद है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
छेकानुप्रास अलंकार इसलिए सही है क्योंकि इसमें वर्णों की आवृत्ति एक बार होती है और वह भी सार्थक रूप से। दी गई पंक्तियों "रीझि रीझि रहसि रहसि हँसि हँसि" में 'रि' और 'ह' वर्णों की आवृत्ति एक बार हुई है और यह आवृत्ति सार्थक है, जो छेकानुप्रास का लक्षण है। छेकानुप्रास में एक या अनेक वर्णों की क्रमानुसार आवृत्ति होती है, जो यहाँ स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
-
अन्त्यानुप्रास: अन्त्यानुप्रास में पंक्ति के अंत में वर्णों की समानता होती है। प्रस्तुत पंक्तियों में ऐसा नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
-
वृत्यनुप्रास: वृत्यनुप्रास में एक या अनेक वर्णों की आवृत्ति एक से अधिक बार होती है। जबकि दी गई पंक्तियों में वर्णों की आवृत्ति एक बार ही हुई है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
-
लाटानुप्रास: लाटानुप्रास में शब्दों या वाक्यों की आवृत्ति होती है, अर्थ में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होता। प्रस्तुत पंक्तियों में वर्णों की आवृत्ति है, शब्दों या वाक्यों की नहीं, इसलिए यह विकल्प गलत है।
अतः, छेकानुप्रास अलंकार ही सही उत्तर है क्योंकि यह दी गई पंक्तियों में वर्णों की एक बार की आवृत्ति को सटीक रूप से दर्शाता है।
प्रश्न 359
निम्नलिखित में 'विशेषण उपवाक्य' है -
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 3, "जिसे आप ढूँढ रहे हैं, वह मैं नहीं हूँ," is the correct answer because it contains a 'विशेषण उपवाक्य' (visheshan upvakya - adjective clause).
Here's why:
-
What is a 'विशेषण उपवाक्य' (Adjective Clause)? An adjective clause is a dependent clause that modifies a noun or pronoun. It functions like an adjective, providing more information about the noun or pronoun it modifies. It typically begins with a relative pronoun (like जो, जिसे, जिसका, जिसने) or a relative adverb (like जब, जहाँ, जैसे).
-
Why Option 3 is Correct: In the sentence "जिसे आप ढूँढ रहे हैं, वह मैं नहीं हूँ," the clause "जिसे आप ढूँढ रहे हैं" modifies the pronoun "वह" (he/she/that). It tells us which "वह" is being referred to. Therefore, it functions as an adjective clause, describing the pronoun "वह."
Now, let's explain why the other options are incorrect:
-
Option 1: ज्योंही पढ़ने बैठा, कोई आ गया। This sentence contains an adverb clause of time (कालवाचक क्रियाविशेषण उपवाक्य). The clause "ज्योंही पढ़ने बैठा" describes when someone came. It modifies the verb "आ गया" (came), not a noun or pronoun.
-
Option 2: जहाँ लहलहाते खेत थे, वहाँ बहुमंजिला भवन बन गए हैं। This sentence contains an adverb clause of place (स्थानवाचक क्रियाविशेषण उपवाक्य). The clause "जहाँ लहलहाते खेत थे" describes where the multi-story buildings were built. It modifies the verb "बन गए हैं" (have been built), not a noun or pronoun.
-
Option 4: गुरुजी ने कहा कि वे आज नहीं आएँगे। This sentence contains a noun clause (संज्ञा उपवाक्य). The clause "कि वे आज नहीं आएँगे" functions as the object of the verb "कहा" (said). It acts as a noun, not an adjective. It tells us what the teacher said.
In conclusion, only Option 3 contains a clause that modifies a noun or pronoun, thus functioning as an adjective clause ('विशेषण उपवाक्य'). Therefore, Option 3 is the correct answer.
प्रश्न 360
रोला छंद के संबंध में कौन-सा कथन सही नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 4 सही है क्योंकि रोला छंद में 13 और 11 मात्राओं पर यति (विराम) होती है। यह रोला छंद की एक महत्वपूर्ण विशेषता है।
अब, अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
-
यह मात्रिक सम छंद है: यह कथन सही है, रोला एक मात्रिक सम छंद है, लेकिन यह प्रश्न का सही उत्तर नहीं है क्योंकि प्रश्न पूछ रहा है कि कौन सा कथन सही नहीं है।
-
इसके प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं: यह कथन भी सही है, रोला छंद के प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं, लेकिन यह प्रश्न का सही उत्तर नहीं है क्योंकि प्रश्न पूछ रहा है कि कौन सा कथन सही नहीं है।
-
अंत में गुरु (ऽ) होता है: रोला छंद के अंत में गुरु होना अनिवार्य नहीं है। लघु भी हो सकता है। इसलिए, यह कथन हमेशा सही नहीं होता। हालाँकि, Option 4, 13 और 11 पर यति होने की बात करता है जो कि रोला छंद की अनिवार्य विशेषता है। इसलिए, Option 4 अधिक सटीक रूप से गलत कथन है।