निर्देश : अधोलिखितान् श्लोकान् पठित्वा तदाधारितप्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चिनुत । शान्तितुल्यं तपो नास्ति न सन्तोषात्परं सुखम् । न तृष्णायाः परो व्याधिर्न च धर्मो दयापरः ॥ 1 ॥ दृष्टिपूतं न्यसेत्पादं वस्त्रपूतं जलं पिबेत् । शास्त्रपूतं वदेद् वाक्यं मनःपूतं समाचरेत् ॥ 2 ॥ तावद् भयाद्धि भेतव्यं यावद् भयमनागतम् । आगतं तु भयं दृष्ट्वा नरः कुर्याद् यथोचितम् ॥ 3 ॥ माता शत्रुः पिता वैरी येन बालो न पाठितः । न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये बको यथा ॥ 4 ॥ रूपयौवनसम्पन्ना विशालकुलसम्भवाः । विद्याहीना न शोभन्ते निर्गन्धा इव किंशुकाः ॥ 5 ॥ 'शान्तितुल्यम्' इत्यस्मिन् प्रयोगे कः अलङ्कारः ?
श्लोक में 'शान्तितुल्यम्' शब्द का प्रयोग किया गया है। यहाँ पर 'उपमा' अलंकार का प्रयोग है। उपमा अलंकार तब होता है जब किसी वस्तु की तुलना दूसरी वस्तु से की जाती है, और इसमें उपमेय (जिसकी तुलना की जा रही है) और उपमान (जिससे तुलना की जा रही है) के बीच समानता स्थापित की जाती है। इस श्लोक में 'शान्ति' की तुलना 'तप' से की गई है, जो उपमा अलंकार…Read More
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