HTET परीक्षा - Level 1 PRT - अर्थ विज्ञान
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 1 PRT की तैयारी
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20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 61
किस विकल्प में विलोमार्थी युग्म संगत नहीं है?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 1 "आज्ञा - अनुज्ञा" विलोमार्थी युग्म संगत नहीं है। इसका कारण यह है कि "आज्ञा" का अर्थ होता है आदेश या निर्देश, जबकि "अनुज्ञा" का अर्थ होता है अनुमति या स्वीकृति। ये दोनों शब्द एक-दूसरे के विलोम नहीं हैं, बल्कि ये एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी कार्य को करने के लिए पहले अनुमति (अनुज्ञा) ली जाती है और फिर आदेश (आज्ञा) दिया जाता है। इसलिए, ये शब्द विलोमार्थी नहीं हैं।
अब अन्य विकल्पों की चर्चा करते हैं:
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आचार - अनाचार: "आचार" का अर्थ होता है सदाचार या नैतिक आचरण, जबकि "अनाचार" का अर्थ होता है बुरा आचरण या अनैतिकता। ये दोनों शब्द एक-दूसरे के विलोम हैं क्योंकि एक सकारात्मक आचरण को दर्शाता है और दूसरा नकारात्मक।
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आच्छन्न - निराच्छन्न: "आच्छन्न" का अर्थ होता है ढका हुआ या आवृत, जबकि "निराच्छन्न" का अर्थ होता है खुला या अनावृत। ये दोनों शब्द एक-दूसरे के विलोम हैं क्योंकि एक आवरण को दर्शाता है और दूसरा उसके अभाव को।
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आलसी - उद्यमी: "आलसी" का अर्थ होता है कामचोर या निष्क्रिय, जबकि "उद्यमी" का अर्थ होता है परिश्रमी या सक्रिय। ये दोनों शब्द एक-दूसरे के विलोम हैं क्योंकि एक निष्क्रियता को दर्शाता है और दूसरा सक्रियता को।
इस प्रकार, विकल्प 1 "आज्ञा - अनुज्ञा" सही उत्तर है क्योंकि यह विलोमार्थी युग्म संगत नहीं है।
प्रश्न 62
विलोम शब्द के संबंध में कौन-सा युग्म असंगत है ?
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उत्तर और व्याख्या
The correct option is 2:
विकल्प 2, "चिरायु - दीर्घायु," विलोम शब्द के संबंध में असंगत युग्म है। विलोम शब्द वे होते हैं जो एक-दूसरे के विपरीत अर्थ देते हैं। 'चिरायु' का अर्थ होता है लंबी आयु वाला, और 'दीर्घायु' का अर्थ भी लंबी आयु वाला ही होता है। इस प्रकार, ये दोनों शब्द समानार्थी (Synonyms) हैं, न कि विलोम (Antonyms)। चूंकि प्रश्न में असंगत युग्म को पहचानने के लिए कहा गया है और यह जोड़ा विलोम न होकर समानार्थी है, इसलिए यह जोड़ा असंगत है। चिरायु का सही विलोम 'अल्पायु' होना चाहिए।
The incorrect option is 1:
विकल्प 1, "घमण्डी - विनीत," विलोम शब्दों का एक संगत और शुद्ध युग्म है। 'घमण्डी' का अर्थ होता है अभिमानी या अहंकारी व्यक्ति, जबकि 'विनीत' का अर्थ होता है विनम्र या नम्र। विनम्रता, अहंकार के विपरीत भाव है, इसलिए ये एक-दूसरे के विलोम हैं।
The incorrect option is 3:
विकल्प 3, "तारुण्य - वार्धक्य," विलोम शब्दों का एक शुद्ध युग्म है। 'तारुण्य' का अर्थ होता है युवावस्था या जवानी, जबकि 'वार्धक्य' का अर्थ होता है बुढ़ापा या वृद्धावस्था। जवानी और बुढ़ापा दोनों विपरीत अवस्थाएँ हैं, इसलिए ये विलोम शब्द हैं।
The incorrect option is 4:
विकल्प 4, "तेजस्वी - निस्तेज," भी विलोम शब्दों का एक सही युग्म है। 'तेजस्वी' का अर्थ होता है तेज या प्रभाव से युक्त, जबकि 'निस्तेज' का अर्थ होता है तेज रहित या प्रभावहीन। इस प्रकार, ये दोनों शब्द विपरीत अर्थों को व्यक्त करते हैं, और यह एक संगत विलोम युग्म है।
प्रश्न 63
निम्न में से कौन-सा शब्द 'धनुष' का पर्यायवाची नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
The correct option is 4:
'कासार' शब्द 'धनुष' का पर्यायवाची नहीं है। 'कासार' का अर्थ होता है तालाब, सरोवर या जलाशय। यह एक जल निकाय को संदर्भित करता है और इसका 'धनुष' (एक हथियार) से कोई संबंध नहीं है। इस प्रकार, चूंकि प्रश्न में 'धनुष' का पर्यायवाची न होने वाला शब्द पूछा गया है, इसलिए 'कासार' सही उत्तर है। पर्यायवाची शब्दों को याद रखने के लिए उनके मूल अर्थों को समझना महत्वपूर्ण है, जैसे 'कासार' का मूल अर्थ जल से संबंधित है।
The incorrect option is 1:
'चाप' शब्द 'धनुष' का एक अत्यंत प्रचलित पर्यायवाची है। संस्कृत और हिंदी साहित्य में, चाप का प्रयोग अक्सर धनुष के लिए किया जाता है, जैसे 'राम का चाप'। इसलिए, यह विकल्प गलत है क्योंकि यह 'धनुष' का पर्यायवाची है।
The incorrect option is 2:
'कार्मुक' भी 'धनुष' का पर्यायवाची शब्द है। यह शब्द धनुष के लिए प्रयोग होता है और यह दर्शाता है कि यह एक प्रकार का हथियार है। चूंकि यह 'धनुष' का पर्याय है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
The incorrect option is 3:
'शरासन' शब्द भी 'धनुष' का पर्यायवाची है। 'शर' का अर्थ होता है बाण या तीर, और 'आसन' का अर्थ है स्थान; इस प्रकार, 'शरासन' का शाब्दिक अर्थ है 'बाणों का स्थान या जिस पर बाण रखे जाते हैं', जो धनुष के लिए प्रयुक्त होता है। इसलिए, यह विकल्प भी गलत है।
प्रश्न 64
किस विकल्प में विपरीतार्थक युग्म असंगत है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न 65
पर्यायवाची शब्दों के संबंध में कौन-सा विकल्प अनुचित है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न 66
विलोम युग्म की दृष्टि से अनुचित विकल्प चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
The correct option is 3:
दिए गए प्रश्न में हमें विलोम युग्म (Antonym Pair) की दृष्टि से अनुचित (गलत) विकल्प चुनना है। हिंदी व्याकरण में, 'ऋजु' का अर्थ होता है 'सीधा', 'सरल', या 'सत्यनिष्ठ'। इसी प्रकार, 'सरल' का अर्थ भी 'आसान', 'सीधा' या 'सहज' होता है। इस प्रकार, 'ऋजु' और 'सरल' दोनों समानार्थी (Synonyms) शब्द हैं, न कि विपरीतार्थक (Antonyms)। विलोम शब्दों का सही युग्म तब बनता है जब दोनों शब्दों का अर्थ एक दूसरे से ठीक विपरीत हो। चूँकि 'ऋजु - सरल' युग्म में दोनों शब्दों का अर्थ समान है, इसलिए यह एक विलोम युग्म के रूप में अनुचित है। 'ऋजु' का सही विलोम शब्द 'वक्र' (टेढ़ा) होता है।
The incorrect option is 1:
विकल्प 1 'अघ - अनघ' एक उचित विलोम युग्म है। 'अघ' शब्द का अर्थ 'पाप', 'दोष' या 'अपराध' होता है, जबकि 'अनघ' शब्द 'अ' (नहीं) उपसर्ग लगाकर बना है, जिसका अर्थ होता है 'निर्दोष', 'पापरहित', या 'पवित्र'। इसलिए, 'पाप' और 'निर्दोष' एक दूसरे के विपरीत अर्थ प्रकट करते हैं और यह एक सही विलोम युग्म है।
The incorrect option is 2:
विकल्प 2 'ऋत - अनृत' भी एक सही विलोम युग्म है। 'ऋत' का अर्थ 'सत्य', 'यथार्थ' या 'ठीक' होता है, जबकि 'अनृत' शब्द 'सत्य नहीं' या 'झूठ' के अर्थ में प्रयुक्त होता है। इस प्रकार, सत्य (ऋत) का सीधा विपरीत झूठ (अनृत) है, और यह युग्म पूर्णतः उचित है।
The incorrect option is 4:
विकल्प 4 'दुष्कर - सुकर' एक और उचित विलोम युग्म है। 'दुष्कर' का अर्थ 'कठिन' या 'मुश्किल से करने योग्य' होता है, जबकि 'सुकर' शब्द 'सु' (अच्छे से) उपसर्ग लगाकर बना है, जिसका अर्थ 'आसान' या 'सरलता से करने योग्य' होता है। चूंकि 'कठिन' का विपरीत 'सरल' होता है, इसलिए 'दुष्कर - सुकर' विलोम युग्म की दृष्टि से बिल्कुल सही है।
प्रश्न 67
पर्यायवाची शब्दों के संदर्भ में असंगत विकल्प चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
The correct option is 3:
'यमुना - अद्रिजा, देवापगा, देवाश्रिता' विकल्प असंगत (Inconsistent) है, क्योंकि इस समूह में दिए गए सभी शब्द यमुना के पर्यायवाची नहीं हैं। 'यमुना' के प्रसिद्ध पर्यायवाची शब्द हैं: कालिंदी, सूर्यसुता, अर्कजा, कृष्णा, आदि। यहाँ दिए गए शब्दों में 'देवापगा' और 'देवाश्रिता' मुख्य रूप से गंगा नदी के पर्यायवाची शब्द हैं, जिनका अर्थ है 'देवताओं की नदी' (भागीरथी)। इसके अतिरिक्त, 'अद्रिजा' शब्द पार्वती या सीता का पर्यायवाची है, जिसका अर्थ 'पर्वत से उत्पन्न' होता है। इस प्रकार, इस विकल्प में यमुना के पर्यायवाची शब्दों को गंगा और अन्य संज्ञाओं के पर्यायवाची शब्दों के साथ मिला दिया गया है, जो इसे सबसे असंगत समूह बनाता है।
The incorrect option is 1:
'विष्णु - पद्मनाभ, श्रीश, कमलेश' ये सभी शब्द भगवान विष्णु के सही पर्यायवाची हैं। 'पद्मनाभ' का अर्थ है जिनकी नाभि में कमल हो; 'श्रीश' का अर्थ है श्री (लक्ष्मी) के ईश्वर; और 'कमलेश' भी कमल के स्वामी (विष्णु) के लिए प्रयुक्त होता है। अतः यह समूह पूरी तरह संगत है।
The incorrect option is 2:
'सूर्य - तरणि, आदित्य, मित्र' यह विकल्प भी पूरी तरह संगत है। 'तरणि', 'आदित्य', और 'मित्र' तीनों ही सूर्य के पर्यायवाची शब्द हैं। 'आदित्य' सूर्य के बारह नामों में से एक है, और 'मित्र' शब्द का प्रयोग भी वेदों में सूर्य देव के लिए किया गया है। इसलिए यह विकल्प सही है।
The incorrect option is 4:
'बिल्ली - शालावृक, दीप्तलोचन, मार्जारी' इस विकल्प में 'मार्जारी' बिल्ली का तत्सम पर्यायवाची है और 'दीप्तलोचन' (तेज आँखों वाली) भी बिल्ली के लिए प्रयुक्त हो सकता है। हालांकि, 'शालावृक' मुख्य रूप से भेड़िया या जंगली कुत्ते का पर्यायवाची होता है। बावजूद इसके, चूंकि विकल्प 3 में सीधे तौर पर एक नदी के पर्यायवाची को दूसरी नदी के पर्यायवाची से मिलाया गया है, इसलिए तुलनात्मक रूप से विकल्प 3 अधिक असंगत है और प्रश्न का सही उत्तर है।
प्रश्न 68
किस विकल्प में विलोम-युग्म सही नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
The correct option is 2:
'अभिमानी - निरभिमानी' विलोम-युग्म सही नहीं है। जब हम 'अभिमानी' शब्द का विलोम बनाते हैं, तो हमें ऐसे शब्द की आवश्यकता होती है जो अहंकार या घमंड के विपरीत अर्थ को दर्शाता हो। 'अभिमानी' का अर्थ है 'घमंडी' या 'अहंकारी'। इसका सही विलोम 'निरभिमानी' नहीं, बल्कि 'विनम्र' या 'अनभिमानी' होना चाहिए। 'निरभिमानी' शब्द का प्रयोग व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध विलोम के रूप में नहीं किया जाता। हिन्दी व्याकरण के अनुसार, किसी विशेषण शब्द का विलोम भी उसी कोटि का होना चाहिए। इसलिए, 'अभिमानी' (जिसमें अभिमान हो) का विपरीत 'विनम्र' (जिसमें विनम्रता हो) या 'अनभिमानी' (जिसमें अभिमान न हो) होता है।
The incorrect option is 1:
'वैमनस्य - सौमनस्य' यह एक शुद्ध विलोम-युग्म है। 'वैमनस्य' का अर्थ होता है शत्रुता या मन में वैरभाव रखना, जबकि 'सौमनस्य' का अर्थ होता है मित्रता, सदभाव या अच्छा मन रखना। इस प्रकार, ये दोनों शब्द एक-दूसरे के विपरीत अर्थ को दर्शाते हैं।
The incorrect option is 3:
'अभ्यर्थी - प्रत्यर्थी' यह भी एक शुद्ध विलोम-युग्म है। 'अभ्यर्थी' उस व्यक्ति को कहते हैं जो किसी पद या अधिकार के लिए आवेदन करता है (Candidate), जबकि 'प्रत्यर्थी' उस व्यक्ति को कहते हैं जो आवेदन करने वाले के विरोध में हो या मुकदमे में प्रतिपक्षी हो (Opponent/Respondent)। इस संदर्भ में, ये एक-दूसरे के विलोम हैं।
The incorrect option is 4:
'स्वार्थी - निस्स्वार्थ' यह भी सही विलोम-युग्म है। 'स्वार्थी' का अर्थ है जो केवल अपना हित देखे, जबकि 'निस्स्वार्थ' (निः + स्वार्थ) का अर्थ है जिसमें कोई स्वार्थ न हो या जो दूसरों के हित के लिए कार्य करे। इस प्रकार, ये दोनों शब्द विपरीतार्थकता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
प्रश्न 69
पर्यायवाची' की दृष्टि से असुमेलित को चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
The correct option is (2):
विकल्प (2) ‘तरणि - नौका, द्रोणी, करवाल’ पर्यायवाची की दृष्टि से असुमेलित है। यहाँ मुख्य शब्द 'तरणि' (Tarani) है, जिसके पर्यायवाची 'नौका' और 'द्रोणी' (दोनों का अर्थ नाव होता है) तो सही हैं, लेकिन 'करवाल' असंगत है। 'करवाल' शब्द 'तलवार' या 'खड्ग' का पर्यायवाची होता है, जिसका अर्थ नाव या नौका से बिल्कुल भिन्न है। इस प्रकार, इस समूह में एक ऐसा शब्द शामिल है जो मुख्य शब्द का पर्याय नहीं है, जिससे यह युग्म असुमेलित हो जाता है। पर्यायवाची शब्दों के सही ज्ञान के बिना ऐसे प्रश्नों को हल करना कठिन होता है, इसलिए यह समझना आवश्यक है कि 'तरणि' (छोटी नाव) के पर्याय 'करवाल' (तलवार) नहीं हो सकता।
The incorrect option is (1):
विकल्प (1) ‘तरंग - ऊर्मि, वीचि, कल्लोल’ पूरी तरह से सुमेलित है। 'तरंग' का अर्थ लहर या हिलोर होता है, और 'ऊर्मि', 'वीचि', तथा 'कल्लोल' ये सभी शब्द लहर के ही पर्यायवाची हैं। ये सभी शब्द जल की गति से संबंधित हैं और इनका प्रयोग विभिन्न साहित्यिक संदर्भों में किया जाता है।
The incorrect option is (3):
विकल्प (3) ‘तोता - रक्ततुंड, कीर, सुग्गा’ पूर्णतया सुमेलित है। 'तोता' एक पक्षी है और 'रक्ततुंड' (लाल चोंच वाला), 'कीर' और 'सुग्गा' ये सभी तोते के ही प्रचलित पर्यायवाची शब्द हैं। इस समूह में दिए गए सभी शब्द 'तोता' का सही प्रतिनिधित्व करते हैं।
The incorrect option is (4):
विकल्प (4) ‘योनि - अपत्यपथ, जन्मवत्र्म, रतिकुहर’ एक सुमेलित समूह है। 'योनि' शब्द का प्रयोग जन्ममार्ग या गर्भाशय के संदर्भ में होता है, और 'अपत्यपथ' (संतान का मार्ग), 'जन्मवत्र्म' (जन्म का रास्ता), और 'रतिकुहर' (मैथुन गुहा) ये सभी उसी अर्थ को दर्शाते हुए 'योनि' के पर्यायवाची हैं। इसलिए, यह समूह भी सही है।
प्रश्न 70
अकिंचन' का अर्थ है
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उत्तर और व्याख्या
The correct option is 1:
'अकिंचन' (Akinchan) शब्द का निर्माण दो भागों से हुआ है: 'अ' (जो अभाव या नहीं होने का बोध कराता है) और 'किंचन' (जिसका अर्थ होता है 'कुछ')। इस प्रकार, 'अकिंचन' का शाब्दिक अर्थ होता है 'जिसके पास कुछ भी न हो'। यह शब्द उस व्यक्ति या स्थिति का वर्णन करता है जो भौतिक साधनों या संपत्ति से पूरी तरह वंचित हो। हिंदी व्याकरण में, इसे अनेक शब्दों के लिए एक शब्द के रूप में भी प्रयोग किया जाता है, जिसका सर्वाधिक सटीक और व्यापक अर्थ होता है 'सर्वथा दरिद्र' या 'जिसके पास अपना कुछ न हो'। अतः, विकल्प 1—'जिसके पास कुछ न हो'— इस शब्द के मूल और सटीक अर्थ को पूरी तरह से व्यक्त करता है।
The incorrect option is 2:
विकल्प 2, 'जो निर्धन हो' (Jo nirdhan ho), 'अकिंचन' के अर्थ के निकट है, लेकिन यह उसका सबसे सटीक पर्याय नहीं है। 'निर्धन' (Poor/penniless) का अर्थ सामान्य रूप से धन की कमी वाले व्यक्ति से होता है, जबकि 'अकिंचन' अत्यधिक अभाव और संपूर्ण शून्यता को दर्शाता है—यानी, जिसके पास सचमुच कुछ भी न हो। यह शब्द निर्धनता की चरम सीमा को व्यक्त करता है, जबकि 'निर्धन' एक सामान्य अवस्था हो सकती है। 'अकिंचन' की तुलना में 'निर्धन' कम व्यापक और कम सटीक है।
The incorrect option is 3:
विकल्प 3, 'जो कुछ न करता हो' (Jo kuchha na karata ho), पूरी तरह से गलत है। 'अकिंचन' शब्द का संबंध किसी व्यक्ति के कार्य या निष्क्रियता से नहीं, बल्कि उसके भौतिक स्वामित्व से है। यह शब्द संपत्ति या साधनों के अभाव को दर्शाता है, न कि कर्म या क्रियाशीलता के अभाव को। 'जो कुछ न करता हो' के लिए सही शब्द 'अकर्मण्य' या 'आलसी' हो सकता है, लेकिन 'अकिंचन' का अर्थ बिल्कुल अलग है।
The incorrect option is 4:
विकल्प 4, 'उपर्युक्त सभी' (Uparyukt sabhi), इसलिए गलत है क्योंकि विकल्प 3—'जो कुछ न करता हो'—'अकिंचन' का सही अर्थ नहीं है। हालांकि 'जो निर्धन हो' अर्थ के करीब है, लेकिन सही और सटीक उत्तर केवल विकल्प 1 है। चूंकि दिए गए सभी विकल्पों में से केवल एक ही 'अकिंचन' के शाब्दिक और पारिभाषिक अर्थ को सही ढंग से प्रस्तुत करता है, इसलिए 'उपर्युक्त सभी' सही नहीं हो सकता।
प्रश्न 71
अनुकम्पा' का सही शाब्दिक अर्थ है
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उत्तर और व्याख्या
The correct option is 2:
'अनुकम्पा' शब्द दो शब्दों के योग से बना है— 'अनु' (जिसका अर्थ है पीछे या अनुरूप) और 'कम्पा' (जिसका अर्थ है कम्पन या दुःख)। इसलिए, 'अनुकम्पा' का शाब्दिक अर्थ है किसी के दुःख के अनुरूप या उसके दुःख को देखकर हृदय में होने वाला कम्पन, जिसे सामान्य भाषा में दया या करुणा कहते हैं। यह किसी पीड़ित या दुःखी व्यक्ति को देखकर उसके दुःख को दूर करने की इच्छा से की गई कृपा या सहायता होती है। अतः, "किसी के दुःख से दुःखी होकर उस पर कृपा करना" अनुकम्पा का सबसे सटीक और सही अर्थ है।
The incorrect option is 1: अपने से बड़ों पर प्रसन्न होकर उनकी भलाई करना
यह विकल्प 'अनुकम्पा' के मूल अर्थ को स्पष्ट नहीं करता है। अनुकम्पा का भाव दया या करुणा से जुड़ा है, जो सामान्यतः किसी पीड़ित या कमजोर व्यक्ति के प्रति प्रकट होता है। इसके विपरीत, 'अपने से बड़ों पर प्रसन्न होकर उनकी भलाई करना' एक प्रकार का सम्मान, सेवा या सहयोग हो सकता है, लेकिन इसमें दुःख या पीड़ा का वह केंद्रीय भाव शामिल नहीं है जो अनुकम्पा शब्द के लिए आवश्यक है। यह क्रिया प्रसन्नता से प्रेरित होती है, न कि दुःख या पीड़ा को देखकर होने वाली करुणा से।
The incorrect option is 3: किसी को विशेष सहयोग देना
यह विकल्प बहुत सामान्य है और केवल बाहरी क्रिया पर ज़ोर देता है। 'अनुकम्पा' में 'विशेष सहयोग देना' शामिल हो सकता है, लेकिन यह उसका पूर्ण शाब्दिक अर्थ नहीं है। सहयोग देने के कई कारण हो सकते हैं— जैसे व्यावसायिक, सामाजिक, या व्यक्तिगत हित। 'अनुकम्पा' के लिए यह आवश्यक है कि सहयोग का आधार दूसरे के दुःख के प्रति महसूस की गई सहानुभूति और करुणा हो, जिसका उल्लेख इस विकल्प में नहीं है। इसलिए, यह अर्थ अपूर्ण है।
The incorrect option is 4: उपर्युक्त सभी
चूंकि विकल्प 1 और 3 'अनुकम्पा' के मूल शाब्दिक और भावार्थ को स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं करते हैं, इसलिए 'उपर्युक्त सभी' विकल्प भी गलत हो जाता है। अनुकम्पा का अर्थ केवल दया और करुणा से संबंधित है, जो केवल विकल्प 2 में सटीक रूप से निहित है, जबकि अन्य विकल्प इस भाव की गहराई को छूते नहीं हैं।
प्रश्न 72
‘जीतने की इच्छा’ के लिए शब्द है
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उत्तर और व्याख्या
The correct option is 4: जिगीषा
"जीतने की इच्छा" (Desire to win) वाक्यांश के लिए हिंदी व्याकरण में एक शब्द 'जिगीषा' है। यह अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (One word substitution) के अंतर्गत आता है। 'जिगीषा' शब्द संस्कृत धातु 'जि' (जिसका अर्थ है जीतना) से बना है, जिसमें 'इच्छा' का बोध कराने वाला प्रत्यय जुड़ा है। इस प्रकार, 'जिगीषा' का सीधा और सटीक अर्थ विजय प्राप्त करने की प्रबल इच्छा या अभिलाषा होता है। हिंदी भाषा में, जब किसी व्यक्ति के मन में किसी प्रतियोगिता, युद्ध या किसी अन्य क्षेत्र में सफल होने की तीव्र भावना होती है, तो उसे व्यक्त करने के लिए 'जिगीषा' शब्द का प्रयोग किया जाता है।
The incorrect option is 1: जिजीविषा
'जिजीविषा' शब्द का अर्थ "जीने की इच्छा" (Desire to live) होता है। यह शब्द 'जीवित रहने' की गहरी अभिलाषा को दर्शाता है। इसका प्रयोग जीवन के प्रति लगाव या मृत्यु से बचने की कामना के संदर्भ में किया जाता है, जो कि 'जीतने की इच्छा' से पूरी तरह भिन्न है। इसलिए, यह विकल्प गलत है क्योंकि इसका अर्थ प्रश्न के मूल वाक्यांश से मेल नहीं खाता है।
The incorrect option is 2: जिघृक्षा
'जिघृक्षा' शब्द का अर्थ होता है "पकड़ने या ग्रहण करने की इच्छा" (Desire to catch or seize)। यह किसी वस्तु को प्राप्त करने या उसे अपनी पकड़ में लाने की लालसा को व्यक्त करता है। चूँकि यह जीतने या विजय प्राप्त करने के भाव से अलग है, इसलिए यह विकल्प सही उत्तर नहीं हो सकता।
The incorrect option is 3: जिघत्सा
'जिघत्सा' शब्द का सही अर्थ "मारने की इच्छा" (Desire to kill) होता है। यह तीव्र हिंसात्मक भावना या वध करने की इच्छा को इंगित करता है। यह शब्द मूलतः हिंसक कार्य की अभिलाषा से जुड़ा है, जबकि प्रश्न में 'जीतने की इच्छा' पूछी गई है, जो एक अलग भाव है। इस स्पष्ट शाब्दिक भिन्नता के कारण, 'जिघत्सा' भी सही उत्तर नहीं है।
प्रश्न 73
जिसे बुलाया न गया हो', उसे कहते हैं
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: 'जिसे बुलाया न गया हो', उसे कहते हैं
सही उत्तर: विकल्प 2 (अनाहूत)
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 2: अनाहूत - 'अनाहूत' शब्द का अर्थ होता है 'जिसे बुलाया न गया हो'। यह शब्द संस्कृत से लिया गया है, जहाँ 'अन' का अर्थ होता है 'नहीं' और 'आहूत' का अर्थ होता है 'बुलाया गया'। इसलिए, 'अनाहूत' का सही अर्थ है 'जिसे बुलाया न गया हो'। इस प्रकार, यह विकल्प प्रश्न के अनुसार सही उत्तर है।
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विकल्प 1: अतिथि - 'अतिथि' का अर्थ होता है 'मेहमान' या 'वह व्यक्ति जो बिना पूर्व सूचना के आता है'। हालांकि, यह शब्द 'बुलाया न गया हो' के संदर्भ में सही नहीं है क्योंकि अतिथि को आमतौर पर स्वागत किया जाता है, भले ही वह बिना सूचना के आए।
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विकल्प 3: अनागत - 'अनागत' का अर्थ होता है 'जो अभी तक नहीं आया है' या 'भविष्य में आने वाला'। यह शब्द समय के संदर्भ में प्रयोग होता है और 'बुलाया न गया हो' के अर्थ में फिट नहीं बैठता।
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विकल्प 4: अयाचित - 'अयाचित' का अर्थ होता है 'जो मांगा न गया हो'। यह शब्द 'बुलाया न गया हो' के अर्थ में सही नहीं है क्योंकि यह अनुरोध या मांग के संदर्भ में प्रयोग होता है।
इस प्रकार, 'अनाहूत' शब्द ही सही विकल्प है जो प्रश्न के अर्थ को पूरी तरह से स्पष्ट करता है।
प्रश्न 74
असंगत कथन छाँटिए :
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उत्तर और व्याख्या
असंगत कथन छाँटने के लिए हमें दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करना होगा और यह देखना होगा कि कौन सा कथन अन्य विकल्पों के साथ मेल नहीं खाता है।
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नापाक इरादे से की जाने वाली मंत्रणा – दित्सा: यह कथन असंगत है क्योंकि 'दित्सा' का अर्थ नापाक इरादे से की जाने वाली मंत्रणा नहीं होता है। 'दित्सा' का अर्थ होता है 'दान' या 'उपहार'। इसलिए, यह कथन अन्य विकल्पों के साथ मेल नहीं खाता है और असंगत है।
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दोपहर से पहले का समय – पूर्वाह्न: यह कथन संगत है क्योंकि 'पूर्वाह्न' का अर्थ होता है 'दोपहर से पहले का समय'। यह सही और सटीक परिभाषा है।
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जिसे देखकर रोंगटे खड़े हो जाएँ – लोमहर्षक: यह कथन भी संगत है क्योंकि 'लोमहर्षक' का अर्थ होता है 'जिसे देखकर रोंगटे खड़े हो जाएँ'। यह सही और सटीक परिभाषा है।
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बालुका युक्त तट/भूमि – सिकता: यह कथन भी संगत है क्योंकि 'सिकता' का अर्थ होता है 'बालुका युक्त तट या भूमि'। यह सही और सटीक परिभाषा है।
इस प्रकार, विकल्प 1 'नापाक इरादे से की जाने वाली मंत्रणा – दित्सा' असंगत है क्योंकि इसका अर्थ गलत दिया गया है। अन्य सभी विकल्प सही और संगत हैं। इसलिए, विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 75
हस्बमामूल' शब्द का अर्थ है :
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उत्तर और व्याख्या
'हस्बमामूल' शब्द का अर्थ है 'यथावत', जो विकल्प 2 है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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विकल्प 2: यथावत - 'हस्बमामूल' एक फारसी शब्द है जिसका अर्थ होता है 'जैसा है वैसा ही' या 'यथावत'। यह शब्द किसी स्थिति या वस्तु के अपरिवर्तित रहने का संकेत देता है। इसलिए, विकल्प 2 सही है क्योंकि यह शब्द के सही अर्थ को दर्शाता है।
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विकल्प 1: विद्यालय - 'विद्यालय' का अर्थ होता है स्कूल या शिक्षा का स्थान। यह 'हस्बमामूल' के अर्थ से मेल नहीं खाता है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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विकल्प 3: अचानक - 'अचानक' का अर्थ होता है बिना किसी पूर्व सूचना के या अप्रत्याशित रूप से। यह 'हस्बमामूल' के अर्थ से बिल्कुल अलग है, इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
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विकल्प 4: अभिप्राय - 'अभिप्राय' का अर्थ होता है किसी बात का उद्देश्य या मतलब। यह भी 'हस्बमामूल' के अर्थ से संबंधित नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
इस प्रकार, 'हस्बमामूल' का सही अर्थ 'यथावत' है, जो विकल्प 2 को सही ठहराता है।
प्रश्न 76
जो मापा न जा सके' उसे कहेंगे :
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: 'जो मापा न जा सके' उसे कहेंगे :
सही उत्तर: विकल्प 2 - अपरिमेय
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 2: अपरिमेय
'अपरिमेय' का अर्थ होता है 'जो मापा न जा सके' या 'जिसे सीमाओं में नहीं बांधा जा सके'। यह शब्द उन चीजों के लिए प्रयोग होता है जो असीमित या अनंत होती हैं, जैसे कि ब्रह्मांड की विशालता या किसी की असीमित क्षमता। इस प्रकार, 'जो मापा न जा सके' के लिए 'अपरिमेय' शब्द का प्रयोग सही है। -
विकल्प 1: अप्रमेय
'अप्रमेय' का अर्थ होता है 'जिसे समझा न जा सके' या 'जिसे मापा न जा सके', लेकिन यह शब्द आमतौर पर 'अपरिमेय' के समानार्थी के रूप में नहीं प्रयोग होता। यह शब्द अधिकतर बौद्धिक या दार्शनिक संदर्भों में प्रयोग होता है, जबकि 'अपरिमेय' भौतिक या गणितीय संदर्भों में अधिक उपयुक्त है। -
विकल्प 3: अग्रगण्य
'अग्रगण्य' का अर्थ होता है 'प्रमुख' या 'अग्रणी'। यह शब्द उन व्यक्तियों या वस्तुओं के लिए प्रयोग होता है जो किसी क्षेत्र में सबसे आगे या प्रमुख स्थान पर होते हैं। यह शब्द 'जो मापा न जा सके' के संदर्भ में उपयुक्त नहीं है। -
विकल्प 4: अनवगत
'अनवगत' का अर्थ होता है 'जो अवगत न हो' या 'जिसे जानकारी न हो'। यह शब्द जानकारी या ज्ञान की कमी को दर्शाता है और 'जो मापा न जा सके' के संदर्भ में सही नहीं है।
इस प्रकार, 'जो मापा न जा सके' के लिए सही शब्द 'अपरिमेय' है, जो विकल्प 2 में दिया गया है।
प्रश्न 77
दश' शब्द किस शब्द-समूह के लिए सटीक नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: 'दश' शब्द किस शब्द-समूह के लिए सटीक नहीं है?
सही उत्तर: विकल्प 1 (नक्षत्र)
व्याख्या:
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विकल्प 1: नक्षत्र
'दश' शब्द का अर्थ होता है 'दस', जो संख्या को दर्शाता है। नक्षत्रों की संख्या 27 होती है, जो 'दश' से मेल नहीं खाती। इसलिए, 'दश' शब्द नक्षत्रों के समूह के लिए सटीक नहीं है। इस कारण से, विकल्प 1 सही उत्तर है। -
विकल्प 2: दिशा
'दश' शब्द का उपयोग दिशाओं के संदर्भ में किया जा सकता है, जैसे कि दस दिशाएँ (आठ मुख्य दिशाएँ और दो उपदिशाएँ)। इसलिए, 'दश' शब्द दिशाओं के समूह के लिए उपयुक्त है। -
विकल्प 3: अवतार
'दश' शब्द का उपयोग 'दशावतार' के संदर्भ में किया जाता है, जो भगवान विष्णु के दस अवतारों को दर्शाता है। इसलिए, 'दश' शब्द अवतारों के समूह के लिए उपयुक्त है। -
विकल्प 4: दिक्पाल
'दश' शब्द का उपयोग दिक्पालों के संदर्भ में भी किया जा सकता है, जो दस दिशाओं के रक्षक होते हैं। इसलिए, 'दश' शब्द दिक्पालों के समूह के लिए उपयुक्त है।
इस प्रकार, 'दश' शब्द नक्षत्रों के समूह के लिए सटीक नहीं है, जबकि अन्य विकल्पों के लिए यह उपयुक्त है। यही कारण है कि विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 78
मीरां ने कृष्ण को ‘गउवन के रखवारे' कहा है। इसके लिए एक शब्द है :
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उत्तर और व्याख्या
मीरां ने कृष्ण को 'गउवन के रखवारे' कहा है, और इसके लिए सही शब्द 'गोपाला' है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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गोपाला (Option 4): 'गोपाला' शब्द का अर्थ है 'गायों का रक्षक'। 'गो' का अर्थ गाय होता है और 'पाल' का अर्थ पालन करने वाला या रक्षक होता है। भगवान कृष्ण को अक्सर 'गोपाला' कहा जाता है क्योंकि वे ग्वालों के साथ गायों की देखभाल करते थे और उन्हें चराने ले जाते थे। इस प्रकार, 'गउवन के रखवारे' के लिए 'गोपाला' सबसे उपयुक्त शब्द है।
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वंशीधर (Option 1): 'वंशीधर' का अर्थ है 'बांसुरी धारण करने वाला'। यह नाम कृष्ण के लिए उपयुक्त है क्योंकि वे बांसुरी बजाने के लिए प्रसिद्ध थे, लेकिन यह विशेष रूप से 'गउवन के रखवारे' के संदर्भ में नहीं आता है।
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श्याम (Option 2): 'श्याम' कृष्ण का एक और नाम है, जो उनके सांवले रंग को दर्शाता है। हालांकि यह नाम कृष्ण के व्यक्तित्व का एक पहलू है, यह 'गउवन के रखवारे' के विशेष अर्थ को नहीं दर्शाता।
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नंदलाल (Option 3): 'नंदलाल' का अर्थ है 'नंद के पुत्र'। यह नाम कृष्ण के पारिवारिक संबंध को दर्शाता है, क्योंकि वे नंद बाबा के पुत्र थे। हालांकि, यह नाम 'गउवन के रखवारे' के अर्थ को स्पष्ट रूप से नहीं दर्शाता।
इस प्रकार, 'गउवन के रखवारे' के लिए 'गोपाला' (Option 4) सबसे उपयुक्त और सही शब्द है।
प्रश्न 79
अशुद्ध विकल्प चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न में अशुद्ध विकल्प चुनने के लिए कहा गया है, और सही उत्तर विकल्प 2 है: "जो प्रमाण से सिद्ध न हो – प्रमाण्य"। आइए इस विकल्प को सही ठहराने के लिए विस्तृत व्याख्या करें और अन्य विकल्पों की भी जांच करें:
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विकल्प 1: जो कम बोलने वाला हो – अल्पभाषी
"अल्पभाषी" का अर्थ होता है वह व्यक्ति जो कम बोलता है। यह शब्द सही रूप से उस व्यक्ति का वर्णन करता है जो कम बोलने वाला हो। इसलिए, यह विकल्प सही है और अशुद्ध नहीं है। -
विकल्प 2: जो प्रमाण से सिद्ध न हो – प्रमाण्य
"प्रमाण्य" का अर्थ होता है जो प्रमाणित या सिद्ध हो। जबकि प्रश्न में दिया गया है "जो प्रमाण से सिद्ध न हो", इसका सही शब्द "अप्रमाण्य" होना चाहिए। इसलिए, यह विकल्प अशुद्ध है क्योंकि यह सही अर्थ को व्यक्त नहीं करता है। -
विकल्प 3: जो किसी पर अभियोग लगाए – अभियोगी
"अभियोगी" का अर्थ होता है वह व्यक्ति जो किसी पर अभियोग लगाता है। यह शब्द सही रूप से उस व्यक्ति का वर्णन करता है जो अभियोग लगाता है। इसलिए, यह विकल्प सही है और अशुद्ध नहीं है। -
विकल्प 4: वर्षा का बिलकुल न होना - अनावृष्टि
"अनावृष्टि" का अर्थ होता है वर्षा का बिलकुल न होना। यह शब्द सही रूप से उस स्थिति का वर्णन करता है जब वर्षा नहीं होती। इसलिए, यह विकल्प सही है और अशुद्ध नहीं है।
इस प्रकार, विकल्प 2 "जो प्रमाण से सिद्ध न हो – प्रमाण्य" अशुद्ध है क्योंकि यह सही अर्थ को व्यक्त नहीं करता है। सही शब्द "अप्रमाण्य" होना चाहिए। यही कारण है कि विकल्प 2 को अशुद्ध विकल्प के रूप में चुना गया है।
प्रश्न 80
किसी के दुःख से दुःखी होकर उस पर दया करने का भाव कहलाता है -
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उत्तर और व्याख्या
Option 4, "अनुकम्पा," को सही उत्तर के रूप में चुना गया है। आइए समझते हैं कि यह विकल्प क्यों सही है और अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
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अनुकम्पा (Option 4):
- "अनुकम्पा" का अर्थ है किसी के दुःख या कष्ट को देखकर उस पर दया करना और उसकी सहायता करने की भावना रखना। यह शब्द विशेष रूप से उस स्थिति को दर्शाता है जब हम किसी के दुःख से प्रभावित होकर उसकी मदद करने की इच्छा रखते हैं। इस प्रकार, यह शब्द प्रश्न में दिए गए भाव को सही रूप से व्यक्त करता है।
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दया (Option 1):
- "दया" का अर्थ है किसी के प्रति करुणा या ममता का भाव रखना। हालांकि यह शब्द भी किसी के दुःख से प्रभावित होने का संकेत देता है, लेकिन यह अनुकम्पा की तरह सक्रिय सहायता की भावना को नहीं दर्शाता। दया एक सामान्य करुणा का भाव है, जबकि अनुकम्पा में सहायता करने की प्रवृत्ति होती है।
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समानुभूति (Option 2):
- "समानुभूति" का अर्थ है किसी के भावनात्मक अनुभव को समझना और महसूस करना। यह शब्द अधिकतर मानसिक और भावनात्मक स्तर पर जुड़ाव को दर्शाता है, लेकिन इसमें दया या सहायता करने की भावना का अभाव होता है। इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
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सहानुभूति (Option 3):
- "सहानुभूति" का अर्थ है किसी के दुःख या कष्ट को समझना और उसके प्रति संवेदनशील होना। यह शब्द भी करुणा का भाव दर्शाता है, लेकिन यह अनुकम्पा की तरह सक्रिय सहायता की भावना को नहीं दर्शाता। सहानुभूति में समझ और संवेदनशीलता होती है, लेकिन अनुकम्पा में सहायता करने की प्रवृत्ति होती है।
इस प्रकार, "अनुकम्पा" (Option 4) सही उत्तर है क्योंकि यह शब्द न केवल किसी के दुःख से प्रभावित होने का भाव दर्शाता है, बल्कि उस पर दया करके सहायता करने की भावना को भी व्यक्त करता है।