HTET परीक्षा - Level 3 PGT - हिंदी
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 3 PGT की तैयारी
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 61
‘वयोवृद्ध’ शब्द में संधि है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
‘वयोवृद्ध’ शब्द में संधि है : विसर्ग संधि
विसर्ग संधि का अर्थ है जब दो शब्दों के मिलने पर पहले शब्द के अंत में विसर्ग (ः) हो और दूसरे शब्द के आरंभ में स्वर हो, तब विसर्ग का परिवर्तन होता है। 'वयोवृद्ध' शब्द में 'वयः' और 'वृद्ध' का मेल है। यहाँ 'वयः' के अंत में विसर्ग (ः) है और 'वृद्ध' के आरंभ में स्वर 'व' है। इस प्रकार, विसर्ग संधि के नियम के अनुसार, 'वयः' का विसर्ग 'व' में परिवर्तित हो जाता है और शब्द बनता है 'वयोवृद्ध'। इसलिए, इस शब्द में विसर्ग संधि है।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
-
स्वर संधि: स्वर संधि तब होती है जब दो स्वरों के मिलने पर उनका परिवर्तन होता है। 'वयोवृद्ध' में ऐसा कोई स्वर परिवर्तन नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
-
वर्णागम संधि: वर्णागम संधि में किसी वर्ण का आगमन होता है, जो इस शब्द में नहीं होता। इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
-
व्यंजन संधि: व्यंजन संधि तब होती है जब व्यंजन के मिलने पर उनका परिवर्तन होता है। 'वयोवृद्ध' में ऐसा कोई व्यंजन परिवर्तन नहीं है, इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
इस प्रकार, 'वयोवृद्ध' शब्द में विसर्ग संधि है, जो विकल्प 3 को सही ठहराता है।
प्रश्न 62
प्रेषिति' शब्द का संधि विच्छेद है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: 'प्रेषिति' शब्द का संधि विच्छेद है :
सही उत्तर: विकल्प 2 (प्र + इषिति)
व्याख्या:
-
विकल्प 2 (प्र + इषिति) क्यों सही है:
- 'प्रेषिति' शब्द का संधि विच्छेद करते समय, हमें यह देखना होता है कि यह किन दो शब्दों के मेल से बना है। 'प्र' उपसर्ग है जो संस्कृत में 'आगे', 'सामने' या 'प्रेरित करना' जैसे अर्थों में प्रयोग होता है। 'इषिति' धातु से बना शब्द है जो 'इच्छा' या 'प्रेरणा' के अर्थ में आता है। जब 'प्र' और 'इषिति' को मिलाया जाता है, तो 'प्रेषिति' शब्द बनता है। इस प्रकार, 'प्र + इषिति' सही संधि विच्छेद है।
-
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
- विकल्प 1 (प्रे + इषिति): यहाँ 'प्रे' का कोई स्वतंत्र अर्थ नहीं बनता है और यह 'प्र' उपसर्ग का गलत रूप है। 'प्रे' और 'इषिति' का कोई व्याकरणिक या अर्थपूर्ण संबंध नहीं है।
- विकल्प 3 (प्रेष + इति): 'प्रेष' और 'इति' का संयोजन व्याकरणिक दृष्टि से सही नहीं है। 'प्रेष' कोई स्वतंत्र शब्द नहीं है जो 'इति' के साथ मिलकर 'प्रेषिति' बन सके।
- विकल्प 4 (प्र + षिति): 'षिति' कोई स्वतंत्र धातु या शब्द नहीं है जो 'प्र' के साथ मिलकर 'प्रेषिति' का निर्माण कर सके। यह व्याकरणिक रूप से गलत है।
इस प्रकार, 'प्र + इषिति' ही सही संधि विच्छेद है और यही कारण है कि विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 63
सन्धि की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 1 is the असंगत विकल्प (inconsistent option) from the perspective of संधि (joining/combination) because "तोय + धार = तोयाधार" does not follow the standard rules of Hindi Sandhi. While the other options demonstrate valid Sandhi formations, this one does not.
Here's why the other options are incorrect:
-
Option 2: विश्व + मित्र = विश्वामित्र: This is a valid example of दीर्घ संधि (Dirgha Sandhi). The 'अ' at the end of 'विश्व' combines with the 'अ' at the beginning of 'मित्र' to form 'आ', resulting in 'विश्वामित्र'.
-
Option 3: मूसल + धार = मूसलाधार: This is also a valid example of दीर्घ संधि (Dirgha Sandhi). The 'अ' at the end of 'मूसल' combines with the 'आ' at the beginning of 'धार' to form 'आ', resulting in 'मूसलाधार'.
-
Option 4: सत्य + नाश = सत्यानाश: This is another valid example of दीर्घ संधि (Dirgha Sandhi). The 'अ' at the end of 'सत्य' combines with the 'आ' at the beginning of 'नाश' to form 'आ', resulting in 'सत्यानाश'.
Therefore, only Option 1, "तोय + धार = तोयाधार," is inconsistent with the rules of Sandhi, making it the correct answer.
प्रश्न 64
संधि की दृष्टि से असंगत चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
संधि की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनने के लिए हमें यह देखना होता है कि दिए गए शब्दों का संधि-विच्छेद सही तरीके से किया गया है या नहीं।
सही उत्तर विकल्प 2 है: वि + अभिचार = व्याभिचार
-
विकल्प 2: वि + अभिचार = व्याभिचार
यह विकल्प असंगत है क्योंकि इसमें संधि-विच्छेद गलत है। 'वि' और 'अभिचार' के बीच 'यण संधि' नहीं होती है। सही संधि-विच्छेद 'विभिचार' होना चाहिए, न कि 'व्याभिचार'। इसलिए यह विकल्प संधि की दृष्टि से असंगत है। -
विकल्प 1: खग + ईश = खगेश
यह विकल्प संगत है क्योंकि 'खग' और 'ईश' के बीच 'गुण संधि' होती है, जिससे 'खगेश' बनता है। यह संधि सही है। -
विकल्प 3: देवी + एकता = देव्येकता
यह विकल्प भी संगत है क्योंकि 'देवी' और 'एकता' के बीच 'यण संधि' होती है, जिससे 'देव्येकता' बनता है। यह संधि सही है। -
विकल्प 4: धातु + इक = धात्विक
यह विकल्प भी संगत है क्योंकि 'धातु' और 'इक' के बीच 'वृद्धि संधि' होती है, जिससे 'धात्विक' बनता है। यह संधि सही है।
इस प्रकार, विकल्प 2 'वि + अभिचार = व्याभिचार' संधि की दृष्टि से असंगत है और यही सही उत्तर है।
प्रश्न 65
‘अत्युक्ति’ शब्द का सही विच्छेद है -
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
‘अत्युक्ति’ शब्द का सही विच्छेद ‘अति + उक्ति’ है, जो विकल्प 3 है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
-
अति + उक्ति (विकल्प 3):
- ‘अति’ का अर्थ होता है ‘अधिक’ या ‘बहुत ज्यादा’।
- ‘उक्ति’ का अर्थ होता है ‘कथन’ या ‘बयान’।
- जब इन दोनों शब्दों को मिलाया जाता है, तो ‘अत्युक्ति’ का अर्थ होता है ‘अधिक कथन’ या ‘अतिशयोक्ति’, जो किसी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहने का भाव व्यक्त करता है। इसलिए, ‘अति + उक्ति’ का संयोजन सही है।
-
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
-
अत्यु + उक्ति (विकल्प 1):
- ‘अत्यु’ कोई स्वतंत्र शब्द नहीं है और इसका कोई अर्थ नहीं बनता। इसलिए यह विच्छेद गलत है।
-
अती + उक्ति (विकल्प 2):
- ‘अती’ का अर्थ होता है ‘अतीत’ या ‘बीता हुआ’, जो ‘अत्युक्ति’ के संदर्भ में सही नहीं बैठता। इसलिए यह विच्छेद गलत है।
-
अति + ऊक्ति (विकल्प 4):
- ‘ऊक्ति’ का अर्थ भी ‘कथन’ होता है, लेकिन यहां ‘अति’ के साथ ‘उक्ति’ का प्रयोग होता है, न कि ‘ऊक्ति’ का। इसलिए यह विच्छेद गलत है।
-
इस प्रकार, ‘अति + उक्ति’ (विकल्प 3) ही सही विच्छेद है, जो ‘अत्युक्ति’ शब्द के अर्थ और प्रयोग को सही रूप में प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 66
संधि-विच्छेद एवं शब्द-निर्माण की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 1 असंगत है क्योंकि "विश्व + एक्य = विश्वैक्य" संधि का सही रूप नहीं है। सही संधि "विश्व + एक्य = विश्वैक्य" (वृद्धि संधि) होनी चाहिए। 'ऐ' की मात्रा आनी चाहिए।
अन्य विकल्प इस प्रकार सही हैं:
-
अधम + ऋण = अधमर्ण: यह सही संधि है। (गुण संधि)
-
परि + कृत = परिष्कृत: यह व्यंजन संधि का सही उदाहरण है।
-
तत् + अनन्तर = तदनन्तर: यह भी व्यंजन संधि का सही उदाहरण है।
प्रश्न 67
अभ्युदय' शब्द में संधि का प्रकार बताइए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: 'अभ्युदय' शब्द में संधि का प्रकार बताइए :
सही उत्तर: विकल्प 4 (यण् संधि)
व्याख्या:
-
यण् संधि का स्पष्टीकरण:
- 'अभ्युदय' शब्द में 'अभि' और 'उदय' का संधि होता है। जब 'इ' या 'ई' के बाद 'उ' या 'ऊ' आता है, तो यण् संधि के नियम के अनुसार 'इ' या 'ई' का परिवर्तन 'य' में होता है। इस प्रकार 'अभि' + 'उदय' = 'अभ्युदय' बनता है। इसलिए, इस शब्द में यण् संधि का प्रयोग हुआ है, जो विकल्प 4 को सही उत्तर बनाता है।
-
अन्य विकल्पों का खंडन:
-
विकल्प 1: वृद्धि संधि:
- वृद्धि संधि में स्वर 'अ' या 'आ' के बाद 'ए', 'ऐ', 'ओ', 'औ' आने पर क्रमशः 'आ', 'आ', 'आ', 'आ' का रूप बनता है। 'अभ्युदय' में ऐसा कोई स्वर परिवर्तन नहीं होता है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
-
विकल्प 2: व्यंजन संधि:
- व्यंजन संधि में व्यंजनों के मेल से परिवर्तन होता है। 'अभ्युदय' में कोई व्यंजन परिवर्तन नहीं है, इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
-
विकल्प 3: गुण संधि:
- गुण संधि में 'अ', 'आ', 'इ', 'ई', 'उ', 'ऊ' के बाद 'इ', 'ई', 'उ', 'ऊ' आने पर क्रमशः 'ए', 'ओ' का रूप बनता है। 'अभ्युदय' में ऐसा कोई गुण परिवर्तन नहीं होता है, इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
-
इस प्रकार, 'अभ्युदय' शब्द में यण् संधि का प्रयोग हुआ है, जो विकल्प 4 को सही उत्तर बनाता है।
प्रश्न 68
संधि विच्छेद की दृष्टि से असंगत चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
संधि विच्छेद की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनने के लिए हमें यह देखना होता है कि दिए गए शब्दों का संधि विच्छेद सही तरीके से किया गया है या नहीं।
-
फणि + इन्द्र = फणीन्द्र: यह विकल्प असंगत है क्योंकि "फणीन्द्र" शब्द का सही संधि विच्छेद "फणि + इन्द्र" नहीं होता। इस शब्द में 'फणि' और 'इन्द्र' के बीच में 'ई' की मात्रा का प्रयोग नहीं होता है। इसलिए यह विकल्प सही उत्तर है।
-
सुधी + इन्द्र = सुधीन्द्र: यह विकल्प संगत है क्योंकि "सुधीन्द्र" का संधि विच्छेद "सुधी + इन्द्र" सही है। 'सुधी' और 'इन्द्र' के बीच में 'ई' की मात्रा का सही प्रयोग होता है।
-
अभि + इष्ट = अभीष्ट: यह विकल्प भी संगत है क्योंकि "अभीष्ट" का संधि विच्छेद "अभि + इष्ट" सही है। 'अभि' और 'इष्ट' के बीच में 'ई' की मात्रा का सही प्रयोग होता है।
-
रजनी + ईश = रजनीश: यह विकल्प भी संगत है क्योंकि "रजनीश" का संधि विच्छेद "रजनी + ईश" सही है। 'रजनी' और 'ईश' के बीच में 'ई' की मात्रा का सही प्रयोग होता है।
इस प्रकार, केवल विकल्प 1 "फणि + इन्द्र = फणीन्द्र" असंगत है क्योंकि इसका संधि विच्छेद सही नहीं है। यही कारण है कि विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 69
सुमेलित कीजिए :
(क) महौदार्य – (i) गुण संधि
(ख) प्रत्युपकार – (ii) दीर्घ संधि
(ग) समुद्रोर्मि – (iii) वृद्धि संधि
(घ) महीन्द्र – (iv) यण् संधि
कूट :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सही उत्तर विकल्प 2 है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
-
महौदार्य – वृद्धि संधि (iii):
'महौदार्य' शब्द में 'महा' और 'उदार्य' का संधि है। 'महा' में 'अ' और 'उदार्य' में 'उ' के मिलने से 'औ' की ध्वनि बनती है, जो वृद्धि संधि का उदाहरण है। -
प्रत्युपकार – यण् संधि (iv):
'प्रत्युपकार' शब्द में 'प्रति' और 'उपकार' का संधि है। 'प्रति' में 'इ' और 'उपकार' में 'उ' के मिलने से 'यण्' ध्वनि बनती है, जो यण् संधि का उदाहरण है। -
समुद्रोर्मि – गुण संधि (i):
'समुद्रोर्मि' शब्द में 'समुद्र' और 'उर्मि' का संधि है। 'समुद्र' में 'अ' और 'उर्मि' में 'उ' के मिलने से 'ओ' की ध्वनि बनती है, जो गुण संधि का उदाहरण है। -
महीन्द्र – दीर्घ संधि (ii):
'महीन्द्र' शब्द में 'मही' और 'इन्द्र' का संधि है। 'मही' में 'ई' और 'इन्द्र' में 'इ' के मिलने से 'ई' की ध्वनि बनती है, जो दीर्घ संधि का उदाहरण है।
अब देखते हैं कि अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
- विकल्प 1: इसमें 'महौदार्य' को यण् संधि से जोड़ा गया है, जो गलत है।
- विकल्प 3: इसमें 'समुद्रोर्मि' को दीर्घ संधि से जोड़ा गया है, जो गलत है।
- विकल्प 4: इसमें 'महौदार्य' को गुण संधि से जोड़ा गया है, जो गलत है।
इस प्रकार, विकल्प 2 सही है क्योंकि यह सभी संधियों को सही प्रकार से जोड़ता है।
प्रश्न 70
निम्न में से कौन-सा शब्द 'गुण स्वर संधि' का उदाहरण है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'गुण स्वर संधि' का उदाहरण वह होता है जब दो शब्दों के मिलने पर स्वर का परिवर्तन होता है और एक नया स्वर उत्पन्न होता है। इस संधि में 'अ', 'आ', 'इ', 'ई', 'उ', 'ऊ' आदि स्वर के बाद 'अ', 'आ' आने पर 'ए', 'ओ' आदि स्वर बनते हैं।
-
हिमोपल: यह 'हिम' + 'उपल' का संधि रूप है। यहाँ 'हिम' के अंत में 'अ' स्वर और 'उपल' के आरंभ में 'उ' स्वर मिलकर 'ओ' स्वर का निर्माण करते हैं। यह गुण स्वर संधि का सही उदाहरण है क्योंकि यहाँ स्वर परिवर्तन के द्वारा नया स्वर 'ओ' उत्पन्न हुआ है।
-
नभोमण्डल: यह 'नभ' + 'मण्डल' का संधि रूप है। यहाँ कोई गुण स्वर संधि नहीं है क्योंकि 'नभ' के अंत में 'अ' स्वर और 'मण्डल' के आरंभ में 'म' व्यंजन है, जिससे कोई नया स्वर उत्पन्न नहीं होता।
-
रजोदर्शन: यह 'रज' + 'दर्शन' का संधि रूप है। यहाँ भी कोई गुण स्वर संधि नहीं है क्योंकि 'रज' के अंत में 'अ' स्वर और 'दर्शन' के आरंभ में 'द' व्यंजन है, जिससे कोई नया स्वर उत्पन्न नहीं होता।
-
यशोवर्मन: यह 'यश' + 'वर्मन' का संधि रूप है। यहाँ भी कोई गुण स्वर संधि नहीं है क्योंकि 'यश' के अंत में 'अ' स्वर और 'वर्मन' के आरंभ में 'व' व्यंजन है, जिससे कोई नया स्वर उत्पन्न नहीं होता।
इस प्रकार, 'हिमोपल' गुण स्वर संधि का सही उदाहरण है क्योंकि इसमें स्वर परिवर्तन के द्वारा नया स्वर उत्पन्न होता है।
प्रश्न 71
निम्नलिखित में से किस शब्द का संधि-विच्छेद सही नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सही उत्तर विकल्प 1 है: "मार्तण्ड - मातृ + अण्ड" का संधि-विच्छेद सही नहीं है।
-
मार्तण्ड - मातृ + अण्ड:
- "मार्तण्ड" का सही संधि-विच्छेद "मर्त + अण्ड" होता है। "मार्तण्ड" का अर्थ सूर्य होता है और यह शब्द "मर्त" (मृत्यु) और "अण्ड" (अण्डा) से मिलकर बना है। इसलिए विकल्प 1 का संधि-विच्छेद गलत है।
-
जगन्नाथ - जगत् + नाथ:
- "जगन्नाथ" का संधि-विच्छेद "जगत् + नाथ" सही है। "जगन्नाथ" का अर्थ होता है "जगत का स्वामी" और यह शब्द "जगत्" (दुनिया) और "नाथ" (स्वामी) से मिलकर बना है।
-
निरुद्यम - निर् + उद्यम:
- "निरुद्यम" का संधि-विच्छेद "निर् + उद्यम" सही है। "निरुद्यम" का अर्थ होता है "बिना प्रयास के" और यह शब्द "निर्" (बिना) और "उद्यम" (प्रयास) से मिलकर बना है।
-
सन्मार्ग - सत् + मार्ग:
- "सन्मार्ग" का संधि-विच्छेद "सत् + मार्ग" सही है। "सन्मार्ग" का अर्थ होता है "सही रास्ता" और यह शब्द "सत्" (सत्य) और "मार्ग" (रास्ता) से मिलकर बना है।
इस प्रकार, विकल्प 1 का संधि-विच्छेद गलत है और यही कारण है कि यह सही उत्तर है।
प्रश्न 72
निम्नलिखित में से सही संधि-विच्छेद है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सही उत्तर विकल्प 4 है: "एकैक - एक + एक"। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
-
विकल्प 4: एकैक - एक + एक
- "एकैक" शब्द का संधि-विच्छेद "एक + एक" होता है। यहाँ पर "एक" शब्द का दोहराव है, जो संधि के माध्यम से "एकैक" बनता है। यह एक सही संधि-विच्छेद है क्योंकि इसमें दोनों शब्दों का सही रूप से संयोजन किया गया है।
-
विकल्प 1: न्यून - नि + उन
- "न्यून" शब्द का संधि-विच्छेद "नि + उन" नहीं होता है। "न्यून" का अर्थ होता है कम या घटा हुआ, और इसका सही संधि-विच्छेद इस प्रकार नहीं होता।
-
विकल्प 2: मतैक्य - मत + एक्य
- "मतैक्य" का संधि-विच्छेद "मत + एक्य" नहीं होता है। "मतैक्य" का अर्थ होता है विचारों की एकता, और इसका सही संधि-विच्छेद इस प्रकार नहीं होता।
-
विकल्प 3: महौदार्य - महा + ओदार्य
- "महौदार्य" का संधि-विच्छेद "महा + ओदार्य" नहीं होता है। "महौदार्य" का अर्थ होता है महान उदारता, और इसका सही संधि-विच्छेद इस प्रकार नहीं होता।
इस प्रकार, विकल्प 4 "एकैक - एक + एक" सही संधि-विच्छेद है और यही कारण है कि यह सही उत्तर है। अन्य विकल्पों में संधि-विच्छेद गलत है, इसलिए वे सही नहीं हैं।
प्रश्न 73
निम्न में से सही संधि युक्त शब्द कौन-सा है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 1, युधि + स्थिर = युधिष्ठिर, सही संधि युक्त शब्द है क्योंकि यह व्यंजन संधि के नियमों का पालन करता है। 'युधि' शब्द के अंत में 'ध्' व्यंजन है और 'स्थिर' शब्द के शुरू में 'स्' व्यंजन है। व्यंजन संधि के नियमानुसार, 'ध्' और 'स्' मिलकर 'ष्ठ' में परिवर्तित हो जाते हैं, जिससे 'युधिष्ठिर' शब्द बनता है। यह संधि का एक मान्य और स्वीकृत रूप है।
अब अन्य विकल्पों की गलत व्याख्या:
-
Option 2, गुरु + उपदेश = गुरोपदेश: यह गलत है क्योंकि सही संधि 'गुरु + उपदेश = गुरुपदेश' होती है। यहाँ दीर्घ संधि का नियम लागू होता है, जहाँ 'उ' + 'उ' मिलकर 'ऊ' नहीं बनाते, बल्कि 'उ' ही रहते हैं। 'गुरोपदेश' शब्द व्याकरणिक रूप से अशुद्ध है।
-
Option 3, अभि + इप्सा = अभिप्सा: यह गलत है क्योंकि सही संधि 'अभि + इप्सा = अभीप्सा' होती है। यहाँ दीर्घ संधि का नियम लागू होता है, जहाँ 'इ' + 'इ' मिलकर 'ई' बनाते हैं। 'अभिप्सा' शब्द व्याकरणिक रूप से अशुद्ध है।
-
Option 4, गति + अवरोध = गत्यावरोध: यह गलत है क्योंकि सही संधि 'गति + अवरोध = गत्यवरोध' होती है। यहाँ यण संधि का नियम लागू होता है, जहाँ 'इ' + 'अ' मिलकर 'य' बनाते हैं। 'गत्यावरोध' शब्द व्याकरणिक रूप से अशुद्ध है।
इसलिए, केवल Option 1 ही सही संधि युक्त शब्द है।
प्रश्न 74
साध्वाचरण' शब्द का सही संधि-विच्छेद है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
साध्वाचरण' शब्द का सही संधि-विच्छेद 'साधु + आचरण' है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
-
साधु + आचरण:
- 'साधु' और 'आचरण' दो अलग-अलग शब्द हैं। जब इन दोनों शब्दों को संधि के नियमों के अनुसार जोड़ा जाता है, तो 'साधु' का अंतिम 'उ' स्वर और 'आचरण' का प्रारंभिक 'आ' स्वर मिलकर 'आ' स्वर में परिवर्तित हो जाते हैं। इस प्रकार, 'साधु + आचरण' मिलकर 'साध्वाचरण' बनता है। इसलिए, विकल्प 4 सही है।
-
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- साध्व + आचरण: यह विकल्प गलत है क्योंकि 'साध्व' कोई स्वतंत्र शब्द नहीं है। 'साधु' का संधि रूप 'साध्व' बनता है, लेकिन यह 'साधु' के साथ ही सही संधि-विच्छेद में आता है।
- साध + आचरण: 'साध' और 'आचरण' का कोई संधि-विच्छेद नहीं बनता है क्योंकि 'साध' का अर्थ और प्रयोग 'साधु' के संदर्भ में नहीं होता।
- साधू + आचरण: 'साधू' शब्द का कोई अर्थ नहीं होता है और यह 'साधु' का गलत रूप है। इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
इस प्रकार, 'साध्वाचरण' का सही संधि-विच्छेद 'साधु + आचरण' ही है, जो विकल्प 4 में दिया गया है।
प्रश्न 75
गिरीश' शब्द में कौन-सी संधि है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
गिरीश' शब्द में दीर्घ स्वर संधि है। दीर्घ स्वर संधि तब होती है जब दो समान स्वर मिलकर एक दीर्घ स्वर का निर्माण करते हैं। उदाहरण के लिए, 'गिरि' और 'ईश' के मिलने से 'गिरीश' बनता है। यहाँ 'इ' और 'ई' के मिलने से 'ई' का निर्माण होता है, जो दीर्घ स्वर संधि का उदाहरण है।
अब अन्य विकल्पों को देखते हैं:
-
गुण स्वर संधि: गुण स्वर संधि तब होती है जब 'इ', 'ई', 'उ', 'ऊ' के बाद 'अ' स्वर आता है और वे मिलकर 'ए', 'ओ' का निर्माण करते हैं। उदाहरण के लिए, 'देव' + 'अलय' = 'देवालय'। 'गिरीश' में ऐसा नहीं है, इसलिए यह गुण स्वर संधि नहीं है।
-
यण् स्वर संधि: यण् स्वर संधि तब होती है जब 'इ', 'ई', 'उ', 'ऊ' के बाद 'अ' स्वर आता है और वे मिलकर 'य', 'व' का निर्माण करते हैं। उदाहरण के लिए, 'विद्या' + 'आलय' = 'विद्यालय'। 'गिरीश' में ऐसा नहीं है, इसलिए यह यण् स्वर संधि नहीं है।
-
व्यंजन संधि: व्यंजन संधि तब होती है जब दो व्यंजन मिलकर एक नया व्यंजन ध्वनि का निर्माण करते हैं। उदाहरण के लिए, 'तत्' + 'पुरुष' = 'तत्पुरुष'। 'गिरीश' में कोई व्यंजन संधि नहीं है, इसलिए यह व्यंजन संधि नहीं है।
इस प्रकार, 'गिरीश' शब्द में दीर्घ स्वर संधि है, और यही कारण है कि विकल्प 1 सही है।
प्रश्न 76
संधि-विच्छेद की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
संधि-विच्छेद की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनने के लिए हमें यह देखना होगा कि दिए गए शब्दों का संधि-विच्छेद सही है या नहीं।
-
भूष्मा = भू + ऊष्मा: यह संधि सही है। 'भू' और 'ऊष्मा' के बीच दीर्घ संधि होती है, जिससे 'भूष्मा' बनता है।
-
कृपाचार्य = कृप + आचार्य: यह संधि भी सही है। 'कृप' और 'आचार्य' के बीच दीर्घ संधि होती है, जिससे 'कृपाचार्य' बनता है।
-
वाण्यौचित्य = वाणि + औचित्य: यह संधि गलत है। 'वाणि' और 'औचित्य' के बीच कोई संधि नहीं बनती जिससे 'वाण्यौचित्य' शब्द बने। सही संधि-विच्छेद 'वाण्यौचित्य' का नहीं हो सकता क्योंकि यह शब्द 'वाणी' और 'औचित्य' से नहीं बनता।
-
गुर्वौदार्य = गुरु + औदार्य: यह संधि सही है। 'गुरु' और 'औदार्य' के बीच गुण संधि होती है, जिससे 'गुर्वौदार्य' बनता है।
इस प्रकार, विकल्प 3 'वाण्यौचित्य = वाणि + औचित्य' संधि-विच्छेद की दृष्टि से असंगत है, क्योंकि यह सही संधि-विच्छेद नहीं है। यही कारण है कि विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 77
कौन-सा शब्द यण संधि का उदाहरण नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
यण संधि के अंतर्गत, जब 'इ', 'ई', 'उ', 'ऊ' के बाद कोई स्वर आता है, तो 'इ', 'ई' का 'य्' और 'उ', 'ऊ' का 'व्' हो जाता है। अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
-
अत्यधिक: यहाँ 'अति' + 'अधिक' के संयोग से 'अत्यधिक' बनता है। 'अति' का 'अत्य' हो गया है, जो यण संधि का उदाहरण है।
-
व्यूह: यह 'वि' + 'उह' के संयोग से बना है। 'वि' का 'व्य' हो गया है, जो यण संधि का उदाहरण है।
-
सदैव: यह 'सदा' + 'एव' के संयोग से बना है। यहाँ कोई यण संधि नहीं है, क्योंकि 'सदा' का 'सदै' नहीं हुआ है। इसलिए यह यण संधि का उदाहरण नहीं है।
-
प्रत्येक: यह 'प्रति' + 'एक' के संयोग से बना है। 'प्रति' का 'प्रत्य' हो गया है, जो यण संधि का उदाहरण है।
इस प्रकार, विकल्प 3 'सदैव' यण संधि का उदाहरण नहीं है, और यही कारण है कि यह सही उत्तर है। अन्य सभी विकल्प यण संधि के उदाहरण हैं।
प्रश्न 78
निम्न में से कौन-सा संधि शब्द अपने युग्म से सुमेलित नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
The correct option is 4:
तेजोपुंज - गुण स्वर संधि, यह युग्म सुमेलित नहीं है, इसलिए यही सही उत्तर है। जब हम 'तेजोपुंज' शब्द का संधि विच्छेद करते हैं, तो यह 'तेजः + पुंज' होता है। यहाँ पहले शब्द के अंत में विसर्ग (ः) है और दूसरे शब्द के आरंभ में व्यंजन 'प' है। विसर्ग संधि के नियम के अनुसार, यदि विसर्ग के बाद कोई व्यंजन आता है और विसर्ग से पहले 'अ' हो, तो विसर्ग 'ओ' में परिवर्तित हो जाता है। अतः 'तेजः + पुंज' विसर्ग संधि का उदाहरण है, न कि गुण स्वर संधि का। गुण स्वर संधि में, 'अ' या 'आ' के बाद 'इ/ई' आने पर 'ए' बनता है, और 'उ/ऊ' आने पर 'ओ' बनता है, जो इस शब्द में नहीं हुआ है।
The incorrect option is 1:
अजंत - व्यंजन संधि, यह युग्म सुमेलित है। 'अजंत' का संधि विच्छेद 'अच् + अंत' होता है। यहाँ 'अच्' का 'च्' एक व्यंजन है जिसका मेल स्वर 'अ' से हो रहा है, और व्यंजन संधि के नियम के अनुसार 'च्' का परिवर्तन 'ज्' में होता है। इसलिए, यह सही सुमेलित है।
The incorrect option is 2:
वयोवृद्ध – विसर्ग संधि, यह युग्म भी सुमेलित है। 'वयोवृद्ध' का संधि विच्छेद 'वयः + वृद्ध' होता है। यहाँ पहले शब्द के अंत में विसर्ग (ः) है और यह विसर्ग संधि के नियम से 'ओ' में परिवर्तित होकर 'वयोवृद्ध' बनता है। यह सही सुमेल है।
The incorrect option is 3:
महौदार्य – वृद्धि स्वर संधि, यह युग्म सुमेलित है। 'महौदार्य' का संधि विच्छेद 'महा + औदार्य' होता है। वृद्धि स्वर संधि के नियम के अनुसार, जब 'आ' का मेल 'औ' से होता है, तो वह 'औ' बन जाता है। इस प्रकार 'महा + औदार्य' का संधि 'महौदार्य' बनता है, और यह वृद्धि स्वर संधि का एक उपयुक्त उदाहरण है।
प्रश्न 79
निम्नलिखित में से किस विकल्प का शब्द संधि-विच्छेद की दृष्टि से संगत है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न 80
संधि की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
The correct option is 4:
गवीश, नदीश - दीर्घ स्वर संधि
यह विकल्प असंगत है क्योंकि इसमें दिए गए दोनों शब्दों का संधि प्रकार एकसमान नहीं है। 'नदीश' का सही संधि-विच्छेद 'नदी + ईश' होता है, जहाँ 'ई' + 'ई' मिलकर 'ई' (दीर्घ स्वर) बनता है, जो दीर्घ स्वर संधि का पूर्ण रूप से सही उदाहरण है। किंतु, 'गवीश' शब्द दीर्घ स्वर संधि का उदाहरण नहीं है। 'गवीश' का सही संधि-विच्छेद 'गो + ईश' होता है, और यह अयादि संधि (Ayadi Sandhi) का उदाहरण है, जहाँ 'ओ' के बाद भिन्न स्वर 'ई' आने पर 'ओ' का परिवर्तन 'अव्' में होता है, जिससे यह 'गव् + ईश' = 'गवीश' बनता है। चूंकि एक शब्द (नदीश) दीर्घ संधि का है और दूसरा (गवीश) अयादि संधि का, इसलिए यह जोड़ा संधि की दृष्टि से असंगत है।
The incorrect option is 1:
स्वाध्याय, विक्रमाब्द - दीर्घ स्वर संधि
यह विकल्प संगत है। 'स्वाध्याय' (स्व + अध्याय: अ + अ = आ) और 'विक्रमाब्द' (विक्रम + अब्द: अ + अ = आ) दोनों ही दीर्घ स्वर संधि के उदाहरण हैं। दीर्घ स्वर संधि में, दो समान ह्रस्व या दीर्घ स्वर मिलकर दीर्घ स्वर बनाते हैं। इसलिए, यह विकल्प संधि की दृष्टि से पूरी तरह सही है।
The incorrect option is 2:
हतोत्साह, नेति - गुण स्वर संधि
यह विकल्प भी संगत है। 'हतोत्साह' का विच्छेद 'हत + उत्साह' (अ + उ = ओ) होता है, और 'नेति' का विच्छेद 'न + इति' (अ + इ = ए) होता है। गुण स्वर संधि का नियम कहता है कि 'अ/आ' के बाद 'इ/ई' आए तो 'ए', और 'उ/ऊ' आए तो 'ओ' हो जाता है। दोनों शब्द इन नियमों का पालन करते हैं, इसलिए इन्हें गुण स्वर संधि के अंतर्गत रखना सही है।
The incorrect option is 3:
स्त्र्युपयोगी, तन्वंगी - यण् स्वर संधि
यह विकल्प संगत है। यण् स्वर संधि में, 'इ/ई', 'उ/ऊ', या 'ऋ' के बाद कोई भिन्न स्वर आने पर क्रमशः 'य', 'व', और 'र' में परिवर्तन होता है। 'स्त्र्युपयोगी' का विच्छेद 'स्त्री + उपयोगी' है (ई + उ = यु) और 'तन्वंगी' का विच्छेद 'तनु + अंगी' है (उ + अ = व)। दोनों ही उदाहरण यण् संधि के नियमों का पालन करते हैं, जहाँ संधि के फलस्वरूप य् या व् ध्वनि बनती है।