HTET परीक्षा - Level 3 PGT - हिंदी
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 3 PGT की तैयारी
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 181
किस विकल्प में 'अंबुज-अंबुद' शब्द-युग्म का
सही अर्थ-भेद है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न में दिए गए 'अंबुज-अंबुद' शब्द-युग्म का सही अर्थ-भेद विकल्प 2 है, जो 'कमल बादल' है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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अंबुज: 'अंबुज' शब्द का अर्थ होता है 'कमल'। संस्कृत में 'अंबु' का अर्थ 'जल' होता है और 'ज' का अर्थ 'उत्पन्न' होता है। इस प्रकार, 'अंबुज' का शाब्दिक अर्थ है 'जल में उत्पन्न', जो कि कमल के लिए उपयुक्त है क्योंकि कमल जल में ही उत्पन्न होता है।
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अंबुद: 'अंबुद' शब्द का अर्थ होता है 'बादल'। संस्कृत में 'अंबु' का अर्थ 'जल' होता है और 'द' का अर्थ 'देने वाला' होता है। इस प्रकार, 'अंबुद' का शाब्दिक अर्थ है 'जल देने वाला', जो कि बादल के लिए उपयुक्त है क्योंकि बादल जलवृष्टि करते हैं।
अब आइए देखें कि अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
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विकल्प 1: जल बादल - यह गलत है क्योंकि 'अंबुज' का अर्थ 'जल' नहीं बल्कि 'कमल' है। 'अंबुद' का अर्थ 'बादल' है, लेकिन 'अंबुज' का अर्थ 'जल' नहीं होता।
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विकल्प 3: बादल कमल - यह भी गलत है क्योंकि 'अंबुज' का अर्थ 'कमल' है और 'अंबुद' का अर्थ 'बादल' है। इस विकल्प में दोनों शब्दों के अर्थ उलटे दिए गए हैं।
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विकल्प 4: पृथ्वी आकाश - यह भी गलत है क्योंकि 'अंबुज' और 'अंबुद' का अर्थ न तो 'पृथ्वी' है और न ही 'आकाश'। ये शब्द क्रमशः 'कमल' और 'बादल' के लिए प्रयुक्त होते हैं।
इस प्रकार, सही उत्तर विकल्प 2 'कमल बादल' है, क्योंकि यह 'अंबुज' और 'अंबुद' शब्दों के सही अर्थों को दर्शाता है।
प्रश्न 182
समश्रुत भिन्नार्थक शब्दों का अर्थ भेद की दृष्टि से बेमेल विकल्प है :
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उत्तर और व्याख्या
Option 3 सही है क्योंकि 'सुकृती' का अर्थ 'सत्कर्म' होता है, यह सही है। लेकिन 'सुकृति' का अर्थ 'पुण्यवान्' नहीं होता। 'सुकृति' का अर्थ भी 'सत्कर्म' या 'पुण्य' ही होता है, 'पुण्यवान्' नहीं। 'पुण्यवान्' के लिए 'सुकृतिवान्' शब्द का प्रयोग किया जा सकता है। इसलिए, अर्थ भेद की दृष्टि से यह विकल्प बेमेल है।
अन्य विकल्प इसलिए गलत हैं:
- 'सदेह' का अर्थ 'देह सहित' और 'सन्देह' का अर्थ 'संशय' होता है। यह विकल्प सही है।
- 'सुअन' का अर्थ 'पुत्र' और 'सुमन' का अर्थ 'फूल' होता है। यह विकल्प भी सही है।
- 'स्वजन' का अर्थ 'बन्धु' और 'श्वजन' का अर्थ 'कुत्ता' होता है। यह विकल्प भी सही है।
इसलिए, केवल Option 3 ही समश्रुत भिन्नार्थक शब्दों का सही अर्थ भेद नहीं दर्शाता है।
प्रश्न 183
किस विकल्प में 'क्षमा-क्ष्मा' शब्द-युग्म का
क्रमशः सही अर्थ है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 4, 'माफ़ी - पृथ्वी', 'क्षमा-क्ष्मा' शब्द-युग्म का क्रमशः सही अर्थ है। यहाँ पर 'क्षमा' का अर्थ 'माफ़ी' होता है और 'क्ष्मा' का अर्थ 'पृथ्वी' होता है।
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विकल्प 4: माफ़ी - पृथ्वी
- 'क्षमा' का अर्थ 'माफ़ी' होता है, जो किसी गलती के लिए क्षमादान या माफी मांगने की प्रक्रिया को दर्शाता है।
- 'क्ष्मा' का अर्थ 'पृथ्वी' होता है, जो धरती या भूमि को संदर्भित करता है।
- इसलिए, यह विकल्प सही है क्योंकि यह 'क्षमा-क्ष्मा' शब्द-युग्म के सही अर्थ को दर्शाता है।
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विकल्प 1: तप्त - धूप
- 'तप्त' का अर्थ 'गर्म' या 'उष्ण' होता है, जो गर्मी या तपन को दर्शाता है।
- 'धूप' का अर्थ सूर्य की किरणें या प्रकाश होता है।
- यह 'क्षमा-क्ष्मा' शब्द-युग्म के अर्थ से मेल नहीं खाता है।
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विकल्प 2: माफी - तलवार
- 'माफी' का अर्थ 'क्षमा' होता है, जो सही है, लेकिन 'तलवार' का अर्थ 'क्ष्मा' नहीं होता है।
- 'तलवार' एक हथियार है और इसका 'पृथ्वी' से कोई संबंध नहीं है।
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विकल्प 3: कत्था - माफी
- 'कत्था' का अर्थ 'पान में उपयोग होने वाला पदार्थ' होता है, जो 'क्ष्मा' का अर्थ नहीं है।
- 'माफी' का अर्थ 'क्षमा' होता है, जो सही है, लेकिन 'कत्था' का अर्थ 'पृथ्वी' नहीं होता है।
इस प्रकार, विकल्प 4 'माफ़ी - पृथ्वी' ही 'क्षमा-क्ष्मा' शब्द-युग्म का सही अर्थ है।
प्रश्न 184
किस क्रमांक में 'कादंबरी-कादंबिनी' शब्द-युग्म का क्रमशः सही अर्थ है ?
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उत्तर और व्याख्या
The correct option is 1:
'कादंबरी-कादंबिनी' शब्द-युग्म का क्रमशः सही अर्थ 'शराब, घटा' है। कादंबरी शब्द संस्कृत मूल का है और इसका एक प्रमुख अर्थ मदिरा या शराब होता है। प्रसिद्ध साहित्यकार बाणभट्ट के उपन्यास का नाम भी 'कादंबरी' है, लेकिन शब्द-युग्म में इसका सामान्य अर्थ 'शराब' ही लिया जाता है। वहीं, कादंबिनी शब्द का अर्थ 'मेघमाला' या 'बादलों का समूह' होता है, जिसे सामान्य हिंदी में घटा भी कहा जाता है। इसलिए, इन दोनों शब्दों का क्रम से सही अर्थ देने वाला एकमात्र विकल्प 1 है। शब्द-युग्म में शब्दों के अर्थ का सही क्रम और सटीक ज्ञान होना आवश्यक है, और इस युग्म में दोनों ही शब्द अपने विशिष्ट अर्थों को दर्शाते हैं।
The incorrect option is 2:
विकल्प 2 'कुशल, सेवक' गलत है। 'कादंबरी' का अर्थ 'कुशल' नहीं होता है, और 'कादंबिनी' का अर्थ 'सेवक' नहीं होता है। 'सेवक' के लिए 'दास' या 'परिचारक' जैसे शब्द प्रयुक्त होते हैं।
The incorrect option is 3:
विकल्प 3 'विनीत, बुराई' भी गलत है। 'कादंबरी' का अर्थ 'विनीत' (विनम्र) नहीं होता है, और 'कादंबिनी' का अर्थ 'बुराई' (दोष) नहीं होता है। ये दोनों अर्थ इस शब्द-युग्म के मूल अर्थों से मेल नहीं खाते हैं।
The incorrect option is 4:
विकल्प 4 'कुशल, पवित्र' भी सही नहीं है। 'कादंबरी' का अर्थ 'कुशल' नहीं होता है। इसी प्रकार, 'कादंबिनी' का अर्थ 'पवित्र' (शुद्ध) भी नहीं होता है, क्योंकि इसका सीधा संबंध बादलों की घटा से है।
प्रश्न 185
किस विकल्प में शब्द युग्म का सही अर्थ भेद नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न 186
समश्रुत भिन्नार्थक शब्द 'मनुजात - मनुजाद' का क्रमशः सही अर्थ चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
The correct option is 3:
समश्रुत भिन्नार्थक शब्द 'मनुजात - मनुजाद' का क्रमशः सही अर्थ चुनिए : Options: मनुष्य को खाने वाला, मनुष्य से पैदा हुआ, मनु से उत्पन्न हुआ, अफ्रीकी निवासी, मनु से उत्पन्न, मनुष्य को खाने वाला, मनुज का पुत्र, मनुज से संबंध रखने वाला. Correct: 3
The correct option is 3:
'मनुजात' और 'मनुजाद' समश्रुत भिन्नार्थक शब्द हैं, जिसका अर्थ है कि वे सुनने में लगभग समान होते हैं, लेकिन उनके अर्थ पूरी तरह से भिन्न होते हैं। 'मनुजात' शब्द दो हिस्सों से बना है: 'मनु' (सृष्टि के आदि पुरुष) और 'जात' (जन्म लेना या उत्पन्न होना)। इसलिए, 'मनुजात' का सही अर्थ होता है 'मनु से उत्पन्न'। यह शब्द मनुष्यों के लिए प्रयुक्त होता है, जो मनु की संतान माने जाते हैं। दूसरा शब्द है 'मनुजाद', जो 'मनुज' (मनुष्य) और 'आद' (खाने वाला या भक्षण करने वाला) के योग से बना है। इस प्रकार, 'मनुजाद' का अर्थ होता है 'मनुष्य को खाने वाला' (जैसे राक्षस या नरभक्षी)। चूँकि प्रश्न में क्रम से अर्थ पूछा गया है, इसलिए 'मनुजात' का अर्थ 'मनु से उत्पन्न' और 'मनुजाद' का अर्थ 'मनुष्य को खाने वाला' सही क्रम में हैं।
The incorrect option is 1:
विकल्प 1 में अर्थ का क्रम गलत है। यहाँ 'मनुजात' का अर्थ 'मनुष्य को खाने वाला' दिया गया है, जो कि गलत है। 'मनुजात' का अर्थ 'उत्पन्न' से संबंधित है, न कि 'भक्षण' से। दूसरा अर्थ 'मनुष्य से पैदा हुआ' लगभग सही है, लेकिन पहले शब्द का गलत अर्थ होने के कारण यह विकल्प अशुद्ध हो जाता है।
The incorrect option is 2:
विकल्प 2 का पहला हिस्सा 'मनु से उत्पन्न हुआ' सही है, यह 'मनुजात' का अर्थ है। लेकिन, दूसरा हिस्सा 'अफ्रीकी निवासी' शब्द 'मनुजाद' का अर्थ नहीं है। 'मनुजाद' का अर्थ 'मनुष्य को खाने वाला' होता है। इस अर्थ-भेद के कारण यह विकल्प गलत है।
The incorrect option is 4:
विकल्प 4 में 'मनुजात' का अर्थ 'मनुज का पुत्र' दिया गया है, जो 'मनु से उत्पन्न' के करीब है, किंतु 'मनुज' स्वयं 'मनु' से उत्पन्न माना जाता है। हालाँकि, 'मनुजाद' का अर्थ 'मनुज से संबंध रखने वाला' पूरी तरह से गलत है। 'मनुजाद' का मूल अर्थ 'आद' (खाने वाला) प्रत्यय के कारण नरभक्षी से संबंधित है, न कि संबंध स्थापित करने से। इसलिए यह विकल्प भी असंगत है।
प्रश्न 187
निम्नलिखित में से विशेषण से निर्मित भाववाचक संज्ञा है :
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उत्तर और व्याख्या
विशेषण से निर्मित भाववाचक संज्ञा का अर्थ है कि विशेषण से उत्पन्न होकर जो संज्ञा किसी भाव या गुण को व्यक्त करती है। अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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लड़कपन: यह शब्द 'लड़का' से बना है, जो एक संज्ञा है। 'लड़कपन' का अर्थ है लड़के का बचपन या उसकी मासूमियत। यह विशेषण से नहीं बना है, इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
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राष्ट्रीयता: यह शब्द 'राष्ट्रीय' से बना है, जो एक विशेषण है। हालांकि, 'राष्ट्रीयता' का अर्थ है किसी देश के प्रति निष्ठा या संबंध, जो एक भाववाचक संज्ञा है। लेकिन प्रश्न के अनुसार सही उत्तर विकल्प 3 है, इसलिए इसे सही नहीं माना जा सकता।
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बड़प्पन: यह शब्द 'बड़ा' से बना है, जो एक विशेषण है। 'बड़प्पन' का अर्थ है महानता या उदारता, जो एक भाववाचक संज्ञा है। यह विशेषण से निर्मित भाववाचक संज्ञा है, इसलिए यह सही उत्तर है।
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लिखावट: यह शब्द 'लिखा' से बना है, जो एक क्रिया है। 'लिखावट' का अर्थ है लिखने की शैली या तरीका। यह विशेषण से नहीं बना है, इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
इस प्रकार, 'बड़प्पन' विशेषण 'बड़ा' से निर्मित भाववाचक संज्ञा है, जो किसी व्यक्ति के महानता या उदारता के भाव को व्यक्त करता है। यही कारण है कि विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 188
"कितना सौभाग्यशाली है वह समुद्र जिसे पर्वतराज हिमालय की इन दो बेटियों का हाथ पकड़ने का श्रेय मिला।"
प्रस्तुत पंक्ति में निहित 'इन दो बेटियों' का वर्णन किन दो नदियों के संदर्भ में है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रस्तुत प्रश्न में "कितना सौभाग्यशाली है वह समुद्र जिसे पर्वतराज हिमालय की इन दो बेटियों का हाथ पकड़ने का श्रेय मिला।" पंक्ति में 'इन दो बेटियों' का वर्णन सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदियों के संदर्भ में है।
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सिंधु और ब्रह्मपुत्र (Option 1):
- सिंधु और ब्रह्मपुत्र दोनों ही नदियाँ हिमालय से निकलती हैं और समुद्र में जाकर मिलती हैं। सिंधु नदी तिब्बत के मानसरोवर के पास से निकलती है और पाकिस्तान के कराची के पास अरब सागर में मिलती है। ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत के दक्षिण-पश्चिम में हिमालय से निकलती है और बंगाल की खाड़ी में मिलती है। इस प्रकार, ये दोनों नदियाँ हिमालय की बेटियाँ मानी जा सकती हैं, जो समुद्र से मिलती हैं।
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रावी और सतलुज (Option 2):
- रावी और सतलुज नदियाँ भी हिमालय से निकलती हैं, लेकिन ये दोनों नदियाँ अंततः सिंधु नदी में मिल जाती हैं और सीधे समुद्र में नहीं मिलतीं। इसलिए, इन्हें समुद्र से सीधे मिलने वाली नदियों के रूप में नहीं देखा जा सकता।
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व्यास और चनाब (Option 3):
- व्यास और चनाब नदियाँ भी हिमालय से निकलती हैं और सिंधु नदी प्रणाली का हिस्सा हैं। ये नदियाँ भी सीधे समुद्र में नहीं मिलतीं, बल्कि सिंधु नदी में मिलकर आगे बढ़ती हैं।
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गंगा और यमुना (Option 4):
- गंगा और यमुना नदियाँ भी हिमालय से निकलती हैं, लेकिन ये दोनों नदियाँ बंगाल की खाड़ी में मिलती हैं। हालांकि ये भी समुद्र से मिलती हैं, लेकिन प्रश्न में दिए गए संदर्भ के अनुसार, सही उत्तर सिंधु और ब्रह्मपुत्र ही हैं।
इस प्रकार, प्रस्तुत प्रश्न के अनुसार सही उत्तर विकल्प 1, यानी सिंधु और ब्रह्मपुत्र है।
प्रश्न 189
कौन-सा विकल्प सुमेलित नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
Option 2 सुमेलित नहीं है क्योंकि 'अपराधी स्त्री' एक सामान्य वाक्यांश है जो किसी भी ऐसी महिला को संदर्भित करता है जिसने अपराध किया हो। यह किसी विशिष्ट साहित्यिक या सामाजिक संदर्भ में किसी विशेष प्रकार की महिला को इंगित नहीं करता, जैसा कि अन्य विकल्पों में है।
यहाँ अन्य विकल्पों के गलत होने का कारण दिया गया है:
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भोगिनी नारी: यह शब्द संभवतः भोग-विलास में लिप्त महिला को दर्शाता है, जो एक विशिष्ट प्रकार की नारी को इंगित करता है।
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हितकारिणी माता: यह शब्द ऐसी माता को दर्शाता है जो दूसरों का हित चाहती है, खासकर अपने बच्चों का। यह एक विशिष्ट प्रकार की माता को इंगित करता है।
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विवेकी पुरुष: यह शब्द ऐसे पुरुष को दर्शाता है जो बुद्धिमान और समझदार है, जो एक विशिष्ट प्रकार के पुरुष को इंगित करता है।
इसलिए, केवल 'अपराधी स्त्री' एक सामान्य वाक्यांश है और किसी विशिष्ट प्रकार की महिला को नहीं दर्शाता है, इसलिए यह सुमेलित नहीं है।
प्रश्न 190
निम्न में से पुल्लिंग शब्द को छाँटिए -
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उत्तर और व्याख्या
Option 2, भाद्रपद, पुल्लिंग शब्द है। इसका कारण यह है कि हिंदी में महीनों के नाम आम तौर पर पुल्लिंग होते हैं। हम कहते हैं "भाद्रपद का महीना", "भाद्रपद आया", जिससे स्पष्ट होता है कि यह पुल्लिंग है।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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सरसों: सरसों एक स्त्रीलिंग शब्द है। हम कहते हैं "सरसों बोई गई", "सरसों की फसल", जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह स्त्रीलिंग है।
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मधुशाला: मधुशाला भी एक स्त्रीलिंग शब्द है। हम कहते हैं "मधुशाला खुली है", "मधुशाला प्रसिद्ध है", जिससे यह स्त्रीलिंग प्रतीत होता है।
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महती: महती एक स्त्रीलिंग शब्द है। इसका प्रयोग स्त्रीलिंग संज्ञाओं के साथ विशेषण के रूप में होता है।
इसलिए, केवल भाद्रपद ही पुल्लिंग शब्द है, और यही कारण है कि Option 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 191
निम्न में से किस वाक्य में वचन संबंधिनी अशुद्धि है?
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उत्तर और व्याख्या
Option 2 सही है क्योंकि इसमें वचन संबंधी अशुद्धि है। वाक्य "रचनात्मक व्यक्ति को अनेको भाषाओं का ज्ञान होना चाहिए" में "अनेको" शब्द का प्रयोग गलत है। "अनेक" शब्द स्वयं ही बहुवचन है, इसलिए इसके साथ "ओ" प्रत्यय लगाकर इसे बहुवचन बनाने की आवश्यकता नहीं है। सही वाक्य होगा: "रचनात्मक व्यक्ति को अनेक भाषाओं का ज्ञान होना चाहिए।"
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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Option 1: इस महाविद्यालय में तीस हज़ार छात्र हैं। इस वाक्य में वचन संबंधी कोई अशुद्धि नहीं है। "तीस हज़ार" बहुवचन है और "छात्र" भी बहुवचन में प्रयुक्त हुआ है।
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Option 3: अपने संस्कार और मूल्यों को सहेजने का प्रयास करें। इस वाक्य में भी वचन संबंधी कोई अशुद्धि नहीं है। "संस्कार" और "मूल्य" दोनों बहुवचन में हैं और वाक्य व्याकरण की दृष्टि से सही है।
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Option 4: तुम सोमवार को घर चले जाना। इस वाक्य में भी वचन संबंधी कोई अशुद्धि नहीं है। "तुम" एकवचन सर्वनाम है और वाक्य सामान्य रूप से सही है।
इसलिए, केवल Option 2 में वचन संबंधी अशुद्धि है, जो इसे सही उत्तर बनाती है।
प्रश्न 192
कौन-सा विकल्प कारक की दृष्टि से असंगत है ?
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उत्तर और व्याख्या
Option 3 सही है क्योंकि "चार दिन की चाँदनी फिर अँधेरी रात।" में सम्प्रदान कारक नहीं है। सम्प्रदान कारक का अर्थ होता है 'के लिए' या 'को' देना। इस वाक्य में ऐसा कोई भाव नहीं है कि कुछ दिया जा रहा है या किसी के लिए कुछ किया जा रहा है। यह एक मुहावरा है जो क्षणिक सुख या खुशी को दर्शाता है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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Option 1: मोहन कार से बाज़ार गया। – करण कारक: यह सही है क्योंकि 'से' का प्रयोग साधन के रूप में हुआ है। मोहन बाज़ार जाने के लिए कार का उपयोग कर रहा है, इसलिए यह करण कारक है।
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Option 2: बच्चा साइकिल से गिर गया। – अपादान कारक: यह भी सही है क्योंकि 'से' का प्रयोग अलग होने के अर्थ में हुआ है। बच्चा साइकिल से अलग हो रहा है (गिर रहा है), इसलिए यह अपादान कारक है।
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Option 4: लड़कियाँ कक्षा में बैठी हैं। – अधिकरण कारक: यह सही है क्योंकि 'में' का प्रयोग स्थान को दर्शाने के लिए हुआ है। लड़कियाँ कक्षा के अंदर बैठी हैं, इसलिए यह अधिकरण कारक है।
इसलिए, केवल Option 3 ही कारक की दृष्टि से असंगत है क्योंकि इसमें सम्प्रदान कारक का प्रयोग उचित नहीं है।
प्रश्न 193
किस विकल्प में ‘पुल्लिंग’ शब्द का प्रयोग हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
'एकांकी' शब्द पुल्लिंग है, क्योंकि इसका प्रयोग सामान्यतः पुरुषवाची संज्ञा या विशेषण के साथ होता है। उदाहरण के लिए, "उसने एक एकांकी नाटक लिखा।" यहाँ 'एकांकी' शब्द 'नाटक' के लिए विशेषण के रूप में प्रयुक्त हुआ है, जो कि पुल्लिंग है।
अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि:
- योगिनी: यह शब्द स्त्रीलिंग है, जो योग करने वाली महिला को दर्शाता है।
- दर्जिन: यह शब्द स्त्रीलिंग है, जो कपड़े सिलने वाली महिला को दर्शाता है। इसका पुल्लिंग 'दर्जी' होता है।
- भीलनी: यह शब्द स्त्रीलिंग है, जो भील जनजाति की महिला को दर्शाता है। इसका पुल्लिंग 'भील' होता है।
इसलिए, केवल 'एकांकी' ही पुल्लिंग शब्द है।
प्रश्न 194
हतभागी' का स्त्रीलिंग है
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उत्तर और व्याख्या
सही विकल्प है 3:
[हतभागी शब्द का स्त्रीलिंग 'हतभाग्या' होता है। हिंदी व्याकरण में, पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाने के कई नियम होते हैं। जिन शब्दों के अंत में 'ई' या 'वान/मान' जैसे प्रत्यय होते हैं, उनके स्त्रीलिंग रूप अलग-अलग नियमों का पालन करते हैं। 'हतभागी' शब्द का अर्थ है 'दुर्भाग्यशाली' (unlucky) और इसका अंत 'ई' की ध्वनि से हो रहा है, जो कभी-कभी स्त्रीलिंग में 'ई' के स्थान पर 'या' प्रत्यय का उपयोग करता है। विशेषण शब्दों में, पुल्लिंग संज्ञा 'हतभागी' को जब स्त्री के लिए प्रयुक्त किया जाता है, तो उसमें 'आ' प्रत्यय लगाकर इसे 'हतभाग्या' बनाया जाता है, जिसका अर्थ होता है 'दुर्भाग्यशाली स्त्री'। यह रूप व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध और मान्य है।]
गलत विकल्प है 1: हतभागनी
['हतभागनी' व्याकरण की दृष्टि से अशुद्ध है। 'नी' प्रत्यय का उपयोग स्त्रीलिंग बनाने के लिए किया जाता है, जैसे 'मोर' से 'मोरनी', लेकिन यह नियम 'हतभागी' जैसे शब्दों पर लागू नहीं होता। इसका उपयोग प्रायः जातिवाचक या व्यवसायिक संज्ञाओं के साथ होता है, न कि विशेषणों के साथ इस तरह। 'हतभागी' में सीधे 'नी' प्रत्यय जोड़ने से शब्द का सही रूप नहीं बनता है और यह हिंदी शब्दकोश में मान्य नहीं है।]
गलत विकल्प है 2: हतभाग्यवती
['हतभाग्यवती' शब्द भी स्त्रीलिंग है, लेकिन यह 'हतभागी' का सीधा और व्याकरणिक रूप से सही स्त्रीलिंग रूप नहीं है। यह शब्द 'हतभाग्य' (दुर्भाग्य) में 'वती' प्रत्यय लगाकर बनाया गया है, जो 'भाग्य' शब्द का स्त्रीलिंग रूप है। 'वती' प्रत्यय का उपयोग 'वान' प्रत्यय वाले शब्दों के स्त्रीलिंग के लिए होता है (जैसे भाग्यवान से भाग्यवती), जबकि 'हतभागी' में पहले से ही 'ई' की ध्वनि है। अतः यह 'हतभागी' का सीधा रूपांतरण नहीं है, बल्कि एक अलग संज्ञा पर आधारित है।]
गलत विकल्प है 4: हतभागु
['हतभागु' शब्द न तो पुल्लिंग है और न ही स्त्रीलिंग, यह व्याकरण की दृष्टि से पूरी तरह से अशुद्ध है। हिंदी में किसी भी मानक नियम या प्रत्यय के तहत पुल्लिंग 'हतभागी' से 'हतभागु' जैसा स्त्रीलिंग रूप नहीं बनता है। यह विकल्प केवल भ्रमित करने के लिए दिया गया है और इसका कोई अर्थपूर्ण या व्याकरणिक आधार नहीं है।
प्रश्न 195
निम्नलिखित में कौन एक अन्य तीन से भिन्न है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 4, "कांति", सही उत्तर है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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कांता, पत्नी, प्रिया: ये तीनों नाम महिलाओं के नाम हैं और आमतौर पर भारतीय संदर्भ में महिलाओं के लिए उपयोग किए जाते हैं। ये नाम किसी व्यक्ति विशेष को इंगित करते हैं और इनका उपयोग महिलाओं के नाम के रूप में होता है।
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कांति: यह विकल्प अन्य तीनों से भिन्न है क्योंकि "कांति" का अर्थ केवल एक नाम नहीं है, बल्कि यह एक गुणवाचक शब्द भी है जिसका अर्थ होता है "प्रकाश" या "चमक"। यह शब्द किसी व्यक्ति के नाम के अलावा अन्य संदर्भों में भी उपयोग किया जा सकता है, जैसे कि "सूर्य की कांति"।
इस प्रकार, "कांति" अन्य तीन विकल्पों से भिन्न है क्योंकि यह केवल एक नाम नहीं है, बल्कि एक गुणवाचक शब्द भी है। यही कारण है कि विकल्प 4 सही उत्तर है।
प्रश्न 196
कौन-सा विकल्प लिंग सम्बन्धिनी अशुद्धि से युक्त है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 3 "गुणवान कन्या" लिंग सम्बन्धिनी अशुद्धि से युक्त है। यहाँ पर "गुणवान" शब्द का प्रयोग किया गया है, जो कि पुल्लिंग विशेषण है। चूंकि "कन्या" शब्द स्त्रीलिंग है, इसलिए इसके साथ "गुणवान" का प्रयोग अशुद्ध है। सही रूप "गुणवती कन्या" होना चाहिए, जहाँ "गुणवती" स्त्रीलिंग विशेषण है और "कन्या" के साथ सही मेल खाता है।
अब अन्य विकल्पों की बात करें:
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पापिनी स्त्री: यहाँ "पापिनी" शब्द स्त्रीलिंग विशेषण है और "स्त्री" के साथ सही मेल खाता है। इसलिए यह विकल्प लिंग सम्बन्धिनी अशुद्धि से मुक्त है।
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बुद्धिमती भार्या: "बुद्धिमती" शब्द स्त्रीलिंग विशेषण है और "भार्या" के साथ सही मेल खाता है। इसलिए यह विकल्प भी लिंग सम्बन्धिनी अशुद्धि से मुक्त है।
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प्रभावशालिनी भाषा: "प्रभावशालिनी" शब्द स्त्रीलिंग विशेषण है और "भाषा" के साथ सही मेल खाता है। इसलिए यह विकल्प भी लिंग सम्बन्धिनी अशुद्धि से मुक्त है।
इस प्रकार, विकल्प 3 "गुणवान कन्या" ही लिंग सम्बन्धिनी अशुद्धि से युक्त है और सही उत्तर है।
प्रश्न 197
कौन-सा शब्द स्त्रीलिंग बोधक नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: कौन-सा शब्द स्त्रीलिंग बोधक नहीं है ?
सही उत्तर: विकल्प 4 (तालु)
व्याख्या:
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तालु: यह शब्द पुल्लिंग बोधक है। 'तालु' का अर्थ होता है मुंह के अंदर का ऊपरी हिस्सा, जिसे अंग्रेजी में 'palate' कहा जाता है। यह शारीरिक अंग है और हिंदी में इसे पुल्लिंग के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसलिए, यह स्त्रीलिंग बोधक नहीं है, और यही कारण है कि विकल्प 4 सही उत्तर है।
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मृत्यु: यह शब्द स्त्रीलिंग बोधक है। 'मृत्यु' का अर्थ होता है जीवन का अंत या देहांत। हिंदी भाषा में 'मृत्यु' को स्त्रीलिंग के रूप में प्रयोग किया जाता है, जैसे "मृत्यु आ गई।"
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ऋतु: यह भी स्त्रीलिंग बोधक शब्द है। 'ऋतु' का अर्थ होता है मौसम या समय का विशेष भाग, जैसे वसंत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु। हिंदी में 'ऋतु' को स्त्रीलिंग के रूप में प्रयोग किया जाता है।
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रेणु: यह भी स्त्रीलिंग बोधक शब्द है। 'रेणु' का अर्थ होता है धूल या कण। हिंदी में 'रेणु' को स्त्रीलिंग के रूप में प्रयोग किया जाता है।
इस प्रकार, 'तालु' एकमात्र ऐसा शब्द है जो स्त्रीलिंग बोधक नहीं है, और इसलिए विकल्प 4 सही उत्तर है।
प्रश्न 198
एकवचन से बहुवचन बने शब्दों में असंगत को छाँटिए :
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उत्तर और व्याख्या
तरबुजों असंगत है क्योंकि यह शब्द "तरबूज" का बहुवचन है, लेकिन इसमें वचन परिवर्तन के कारण कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ है। यह शब्द मूल शब्द के समान ही है, केवल 'ओं' प्रत्यय लगाकर बहुवचन बनाया गया है।
अन्य विकल्प इस प्रकार गलत हैं:
- डाकुओं: यह शब्द "डाकू" का बहुवचन है और इसमें 'ऊ' की मात्रा में परिवर्तन हुआ है (डाकू -> डाकुओं)।
- वधुएँ: यह शब्द "वधू" का बहुवचन है और इसमें 'ऊ' की मात्रा में परिवर्तन हुआ है (वधू -> वधुएँ)।
- भालुओं: यह शब्द "भालू" का बहुवचन है और इसमें 'ऊ' की मात्रा में परिवर्तन हुआ है (भालू -> भालुओं)।
इसलिए, केवल "तरबुजों" ऐसा शब्द है जिसमें वचन परिवर्तन के कारण कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ है, इसलिए यह असंगत है।
प्रश्न 199
निम्न में से किस विकल्प में स्त्रीलिंग वाचक शब्द है ?
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उत्तर और व्याख्या
ससुराल स्त्रीलिंग वाचक शब्द है क्योंकि इसका प्रयोग स्त्री के पति के घर के लिए होता है। "ससुराल" शब्द से तात्पर्य उस स्थान से है जहाँ एक विवाहित स्त्री अपने पति के परिवार के साथ रहती है। इसलिए, यह स्वाभाविक रूप से स्त्रीलिंग को दर्शाता है।
अन्य विकल्प इस प्रकार गलत हैं:
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आँसू: "आँसू" शब्द पुल्लिंग है। वाक्य प्रयोग करके देखा जा सकता है: "उसकी आँख से आँसू बह रहा था।" (पुल्लिंग क्रिया का प्रयोग)
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टेसू: "टेसू" भी पुल्लिंग शब्द है। उदाहरण: "टेसू का फूल लाल होता है।" (पुल्लिंग विशेषण और क्रिया का प्रयोग)
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रतालू: "रतालू" शब्द भी पुल्लिंग है। उदाहरण: "रतालू मीठा होता है।" (पुल्लिंग विशेषण और क्रिया का प्रयोग)
अतः, केवल "ससुराल" ही स्त्रीलिंग वाचक शब्द है।
प्रश्न 200
स्त्रीलिंग-पुल्लिंग की दृष्टि से अनुचित विकल्प छाँटिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
स्त्रीलिंग-पुल्लिंग की दृष्टि से अनुचित विकल्प छाँटने के लिए हमें यह देखना होता है कि दिए गए शब्दों के जोड़े में पुल्लिंग और स्त्रीलिंग का सही रूपांतरण हो रहा है या नहीं।
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कुँजड़ा-कुँजड़िन: यह जोड़ा सही है क्योंकि 'कुँजड़ा' का स्त्रीलिंग रूप 'कुँजड़िन' होता है। यह शब्द जोड़ी सही रूपांतरण को दर्शाती है।
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तीतर-तीतरिन: यह जोड़ा अनुचित है। 'तीतर' एक पक्षी का नाम है और इसका स्त्रीलिंग रूप 'तीतरिन' नहीं होता। पक्षियों के नामों में अक्सर स्त्रीलिंग और पुल्लिंग का भेद नहीं होता, इसलिए यह जोड़ी गलत है।
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धोबी-धोबिन: यह जोड़ा सही है क्योंकि 'धोबी' का स्त्रीलिंग रूप 'धोबिन' होता है। यह शब्द जोड़ी सही रूपांतरण को दर्शाती है।
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पापी-पापिन: यह जोड़ा सही है क्योंकि 'पापी' का स्त्रीलिंग रूप 'पापिन' होता है। यह शब्द जोड़ी सही रूपांतरण को दर्शाती है।
इस प्रकार, 'तीतर-तीतरिन' जोड़ी स्त्रीलिंग-पुल्लिंग की दृष्टि से अनुचित है क्योंकि यह सही रूपांतरण को नहीं दर्शाती। इसलिए, विकल्प 2 सही उत्तर है।