HTET परीक्षा - Level 3 PGT - हिंदी
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 3 PGT की तैयारी
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 201
एकवचन से बहुवचन बने विकल्पों में असंगत चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विकल्प 3 "तरबूजा-तरबुजाओं" असंगत है क्योंकि यह एकवचन से बहुवचन बनाने के नियमों का सही पालन नहीं करता है। हिंदी में, जब हम एकवचन से बहुवचन बनाते हैं, तो शब्द के अंत में उचित प्रत्यय जोड़ते हैं।
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डाकू-डाकुओं: यह सही है क्योंकि "डाकू" का बहुवचन "डाकुओं" होता है। यहाँ पर "ओं" प्रत्यय का प्रयोग किया गया है, जो सही है।
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वधू-वधुएँ: यह भी सही है क्योंकि "वधू" का बहुवचन "वधुएँ" होता है। यहाँ पर "एँ" प्रत्यय का प्रयोग किया गया है, जो सही है।
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तरबूजा-तरबुजाओं: यह असंगत है क्योंकि "तरबूजा" का सही बहुवचन "तरबूजों" होता है, न कि "तरबुजाओं"। यहाँ पर "ओं" प्रत्यय का प्रयोग होना चाहिए था, लेकिन गलत रूप में "आओं" का प्रयोग किया गया है।
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भालू-भालुओं: यह सही है क्योंकि "भालू" का बहुवचन "भालुओं" होता है। यहाँ पर "ओं" प्रत्यय का प्रयोग किया गया है, जो सही है।
इस प्रकार, विकल्प 3 "तरबूजा-तरबुजाओं" असंगत है क्योंकि यह बहुवचन बनाने के नियमों का सही पालन नहीं करता है।
प्रश्न 202
लिंग-विचार' की दृष्टि से असंगत कथन को छाँटिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 3 सही है, इसके समर्थन में स्पष्टीकरण:
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Option 3 सही क्यों है: "संज्ञा, सर्वनाम एवं विशेषणवाचक सभी शब्दों में लिंग की दृष्टि से विकार होता है।" यह कथन असंगत है क्योंकि सभी संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण शब्दों में लिंग के कारण विकार (परिवर्तन) नहीं होता है। कई शब्द ऐसे होते हैं जो लिंग के अनुसार नहीं बदलते। उदाहरण के लिए, कुछ संज्ञाएँ उभयलिंगी होती हैं (जैसे, 'प्रधानमंत्री', 'डॉक्टर' - ये पुल्लिंग और स्त्रीलिंग दोनों के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं)। सर्वनामों में भी, कुछ सर्वनाम लिंग के अनुसार नहीं बदलते (जैसे, 'कौन', 'क्या')। विशेषणों में भी, कुछ विशेषण ऐसे होते हैं जो लिंग के अनुसार नहीं बदलते (जैसे, 'अच्छा' - लेकिन 'अच्छी' स्त्रीलिंग के लिए बदलता है, इसलिए सभी विशेषणों में विकार नहीं होता)। इसलिए, यह कहना कि सभी में विकार होता है, गलत है।
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अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
- Option 1: फौज, भीड़, सरकार स्त्रीलिंग पद हैं। यह कथन सही है। ये शब्द हिंदी व्याकरण में स्त्रीलिंग माने जाते हैं।
- Option 2: लिंग' विकारक तत्त्वों की श्रेणी में आता है। यह कथन भी सही है। लिंग एक विकारक तत्व है जो शब्दों के रूप में परिवर्तन लाता है (जैसे, लड़का से लड़की)।
- Option 4: कोयल, मैना, चील आदि शब्द नित्य स्त्रीलिंग शब्दों के वाचक पद हैं। यह कथन भी सही है। ये शब्द हमेशा स्त्रीलिंग के रूप में ही प्रयोग होते हैं।
इसलिए, केवल Option 3 ही असंगत है क्योंकि यह एक गलत सामान्यीकरण करता है कि सभी संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण शब्दों में लिंग के कारण विकार होता है।
प्रश्न 203
किस विकल्प में नित्य बहुवचनान्त शब्द नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: किस विकल्प में नित्य बहुवचनान्त शब्द नहीं है?
सही उत्तर: विकल्प 2 (व्याख्याता)
व्याख्या:
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विकल्प 2: व्याख्याता
"व्याख्याता" एक ऐसा शब्द है जो एकवचन और बहुवचन दोनों रूपों में समान रहता है। यह शब्द किसी व्यक्ति को संदर्भित करता है जो व्याख्यान देता है। हिंदी में, कुछ शब्द ऐसे होते हैं जो एकवचन और बहुवचन दोनों में समान रहते हैं, और "व्याख्याता" उनमें से एक है। इसलिए, यह नित्य बहुवचनान्त शब्द नहीं है। -
विकल्प 1: आँसू
"आँसू" एक बहुवचन शब्द है। इसका एकवचन रूप "आँसू" ही होता है, लेकिन जब इसे बहुवचन में प्रयोग किया जाता है, तो यह भी "आँसू" ही रहता है। यह शब्द नित्य बहुवचनान्त शब्द के रूप में प्रयोग होता है। -
विकल्प 3: अक्षत
"अक्षत" भी एक बहुवचन शब्द है। इसका एकवचन रूप "अक्षत" होता है, लेकिन जब इसे बहुवचन में प्रयोग किया जाता है, तो यह भी "अक्षत" ही रहता है। यह शब्द भी नित्य बहुवचनान्त शब्द के रूप में प्रयोग होता है। -
विकल्प 4: दर्शन
"दर्शन" भी एक बहुवचन शब्द है। इसका एकवचन रूप "दर्शन" होता है, लेकिन जब इसे बहुवचन में प्रयोग किया जाता है, तो यह भी "दर्शन" ही रहता है। यह शब्द भी नित्य बहुवचनान्त शब्द के रूप में प्रयोग होता है।
इस प्रकार, "व्याख्याता" एक ऐसा शब्द है जो नित्य बहुवचनान्त नहीं है, जबकि अन्य विकल्प नित्य बहुवचनान्त शब्द हैं। इसलिए, सही उत्तर विकल्प 2 है।
प्रश्न 204
किस विकल्प में नित्य पुंल्लिंग संज्ञा है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 1, "खरगोश," नित्य पुंल्लिंग संज्ञा है। इसका अर्थ है कि यह संज्ञा हमेशा पुंल्लिंग में ही प्रयुक्त होती है और इसका लिंग परिवर्तन नहीं होता।
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खरगोश (Option 1):
- "खरगोश" एक ऐसा शब्द है जो हमेशा पुंल्लिंग में ही प्रयोग किया जाता है। यह एक जानवर का नाम है और इसका लिंग परिवर्तन नहीं होता। इसलिए, यह नित्य पुंल्लिंग संज्ञा का सही उदाहरण है।
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गिलहरी (Option 2):
- "गिलहरी" स्त्रीलिंग संज्ञा है। यह शब्द आमतौर पर स्त्रीलिंग में ही प्रयोग होता है और इसका लिंग परिवर्तन हो सकता है। इसलिए, यह नित्य पुंल्लिंग संज्ञा नहीं है।
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बटेर (Option 3):
- "बटेर" एक पक्षी का नाम है और यह शब्द सामान्यतः उभयलिंगी संज्ञा के रूप में प्रयोग होता है। इसका लिंग परिवर्तन हो सकता है, इसलिए यह नित्य पुंल्लिंग संज्ञा नहीं है।
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कोयल (Option 4):
- "कोयल" भी एक पक्षी का नाम है और यह शब्द स्त्रीलिंग में प्रयोग होता है। इसका लिंग परिवर्तन हो सकता है, इसलिए यह नित्य पुंल्लिंग संज्ञा नहीं है।
इस प्रकार, "खरगोश" ही एकमात्र ऐसा विकल्प है जो नित्य पुंल्लिंग संज्ञा के रूप में सही है।
प्रश्न 205
निम्न में से कौन-सा शब्द पुंल्लिंग है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: निम्न में से कौन-सा शब्द पुंल्लिंग है?
सही उत्तर: विकल्प 2 (व्यवहार)
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 2: व्यवहार
"व्यवहार" शब्द हिंदी भाषा में पुंल्लिंग शब्द के रूप में प्रयोग किया जाता है। यह शब्द किसी व्यक्ति के आचरण, क्रियाकलाप या कार्यशैली को दर्शाता है। हिंदी व्याकरण में, "व्यवहार" को पुंल्लिंग माना जाता है क्योंकि यह किसी विशेष लिंग के साथ नहीं जुड़ा होता है और सामान्यतः इसे पुरुषवाचक संज्ञा के रूप में देखा जाता है। -
विकल्प 1: आशा
"आशा" शब्द स्त्रीलिंग है। यह शब्द किसी व्यक्ति की उम्मीद या आकांक्षा को दर्शाता है। हिंदी में "आशा" का प्रयोग स्त्रीलिंग संज्ञा के रूप में होता है, इसलिए यह पुंल्लिंग नहीं है। -
विकल्प 3: सुन्दरता
"सुन्दरता" भी स्त्रीलिंग शब्द है। यह किसी वस्तु, व्यक्ति या दृश्य की खूबसूरती या आकर्षण को दर्शाता है। हिंदी में "सुन्दरता" का प्रयोग स्त्रीलिंग संज्ञा के रूप में होता है, इसलिए यह भी पुंल्लिंग नहीं है। -
विकल्प 4: मनोहारिणी
"मनोहारिणी" शब्द भी स्त्रीलिंग है। यह शब्द किसी ऐसी वस्तु या व्यक्ति को दर्शाता है जो मन को मोह ले। इसका प्रयोग स्त्रीलिंग विशेषण के रूप में होता है, इसलिए यह पुंल्लिंग नहीं है।
इस प्रकार, दिए गए विकल्पों में से केवल "व्यवहार" ही ऐसा शब्द है जो पुंल्लिंग है, और इसलिए विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 206
कवि' शब्द का स्त्रीलिंग रूप होगा :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: 'कवि' शब्द का स्त्रीलिंग रूप होगा :
सही उत्तर: विकल्प 2 - कवयित्री
व्याख्या:
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विकल्प 2: कवयित्री
'कवि' शब्द का स्त्रीलिंग रूप 'कवयित्री' होता है। हिंदी भाषा में जब किसी पुरुषवाचक शब्द का स्त्रीलिंग रूप बनाना होता है, तो उसमें उपयुक्त प्रत्यय जोड़ा जाता है। 'कवि' के स्त्रीलिंग रूप के लिए 'यित्री' प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है, जिससे यह 'कवयित्री' बनता है। यह शब्द साहित्यिक और व्याकरणिक दृष्टि से सही है और प्रचलन में भी यही रूप मान्य है। -
विकल्प 1: कवियित्री
यह विकल्प गलत है क्योंकि 'कवियित्री' शब्द में 'य' का अतिरिक्त प्रयोग किया गया है, जो व्याकरणिक दृष्टि से गलत है। हिंदी में 'कवि' का सही स्त्रीलिंग रूप 'कवयित्री' होता है, न कि 'कवियित्री'। -
विकल्प 3: कवियीत्रि
यह विकल्प भी गलत है। इसमें 'य' और 'त्रि' का गलत संयोजन किया गया है। यह शब्द न तो व्याकरणिक रूप से सही है और न ही प्रचलन में है। सही रूप 'कवयित्री' है। -
विकल्प 4: कवित्री
यह विकल्प भी गलत है। 'कवित्री' शब्द में 'य' का अभाव है, जो कि 'कवि' के स्त्रीलिंग रूप में आवश्यक है। सही शब्द 'कवयित्री' है, जिसमें 'य' का समावेश होता है।
इस प्रकार, 'कवि' शब्द का सही स्त्रीलिंग रूप 'कवयित्री' है, जो विकल्प 2 में दिया गया है। अन्य विकल्प व्याकरणिक और प्रचलन के अनुसार गलत हैं।
प्रश्न 207
वचन की दृष्टि से कौन-सा युग्म सही है ?
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उत्तर और व्याख्या
वचन की दृष्टि से सही युग्म का चयन करना आवश्यक है। दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प 3 है: "नारी - नारियों"। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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नारी - नारियों (Option 3):
- "नारी" शब्द का अर्थ है स्त्री या महिला। यह एक एकवचन शब्द है। इसका बहुवचन रूप "नारियों" होता है। हिंदी व्याकरण के अनुसार, जब एकवचन शब्द का बहुवचन रूप बनाना होता है, तो अक्सर अंत में 'यों' जोड़ा जाता है, जैसे "नारी" से "नारियों"। इसलिए, यह युग्म वचन की दृष्टि से सही है।
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दर्शन - दर्शनों (Option 1):
- "दर्शन" शब्द का अर्थ है देखना या किसी विचारधारा का सिद्धांत। यह शब्द पहले से ही बहुवचन रूप में प्रयुक्त होता है, जैसे "दर्शन" के रूप में ही इसका प्रयोग होता है। "दर्शनों" का प्रयोग व्याकरणिक रूप से सही नहीं है।
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प्राण - प्राणों (Option 2):
- "प्राण" शब्द का अर्थ है जीवन या जीवनी शक्ति। यह शब्द भी पहले से ही बहुवचन रूप में प्रयुक्त होता है। "प्राणों" का प्रयोग व्याकरणिक रूप से सही नहीं है क्योंकि "प्राण" का कोई एकवचन रूप नहीं होता।
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हस्ताक्षर - हस्ताक्षरों (Option 4):
- "हस्ताक्षर" शब्द का अर्थ है किसी व्यक्ति का हस्तलिखित नाम या चिन्ह। यह शब्द भी पहले से ही बहुवचन रूप में प्रयुक्त होता है। "हस्ताक्षरों" का प्रयोग व्याकरणिक रूप से सही नहीं है।
इस प्रकार, वचन की दृष्टि से सही युग्म "नारी - नारियों" है, और यही कारण है कि विकल्प 3 सही है। अन्य विकल्प व्याकरणिक दृष्टि से सही नहीं हैं।
प्रश्न 208
निम्नांकित में पुंल्लिंग है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: निम्नांकित में पुंल्लिंग है :
सही उत्तर: विकल्प 2 (सविता)
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 2: सविता - इस प्रश्न के अनुसार, "सविता" को पुंल्लिंग के रूप में सही उत्तर माना गया है। हालांकि, सामान्यतः "सविता" एक स्त्रीलिंग नाम है, लेकिन इस विशेष प्रश्न में इसे पुंल्लिंग के रूप में सही उत्तर के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह संभवतः प्रश्न के विशेष संदर्भ या किसी विशेष नियम के आधार पर हो सकता है, जिसे प्रश्न के लेखक ने ध्यान में रखा हो।
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विकल्प 1: सरिता - "सरिता" एक स्त्रीलिंग शब्द है, जिसका अर्थ नदी होता है। यह स्पष्ट रूप से स्त्रीलिंग है और इसलिए पुंल्लिंग के रूप में सही उत्तर नहीं हो सकता।
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विकल्प 3: वनिता - "वनिता" भी एक स्त्रीलिंग शब्द है, जिसका अर्थ महिला होता है। यह भी स्पष्ट रूप से स्त्रीलिंग है और इसलिए पुंल्लिंग के रूप में सही उत्तर नहीं हो सकता।
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विकल्प 4: दुहिता - "दुहिता" का अर्थ बेटी होता है, जो कि एक स्त्रीलिंग शब्द है। यह भी स्पष्ट रूप से स्त्रीलिंग है और इसलिए पुंल्लिंग के रूप में सही उत्तर नहीं हो सकता।
इस प्रकार, दिए गए निर्देशों के अनुसार, विकल्प 2 "सविता" को पुंल्लिंग के रूप में सही उत्तर के रूप में समर्थन किया गया है।
प्रश्न 209
किस विकल्प में एकवचन से बहुवचन बना युग्म असंगत है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
The correct option is 2:
हिन्दी व्याकरण में वचन परिवर्तन के नियमों के अनुसार, जब 'उ' या 'ऊ' से समाप्त होने वाले पुल्लिंग शब्दों का प्रयोग बहुवचन बनाने के लिए किया जाता है, तो उनके मूल रूप में कोई परिवर्तन नहीं होता, यदि वे कर्ता कारक (Nominative Case) में हों। हालांकि, जब इन शब्दों का प्रयोग किसी कारक चिह्न (Postposition), जैसे 'को', 'से', 'में', 'पर', 'का', 'के', 'की' आदि के साथ किया जाता है, यानी जब वे तिर्यक रूप (Oblique Form) में आते हैं, तो बहुवचन बनाते समय उनमें 'ओ' प्रत्यय जोड़ा जाता है और 'ऊ' की मात्रा 'उ' में बदल जाती है। 'साधु' एकवचन शब्द है, जो 'उ' से समाप्त होता है। इसका सही तिर्यक बहुवचन रूप 'साधुओं' होता है (न कि 'साधूओं')। चूँकि दिए गए विकल्प 'साधु - साधूओं' में 'साधूओं' में 'ऊ' की मात्रा को बनाए रखा गया है, जो व्याकरण की दृष्टि से अशुद्ध है, इसलिए यह युग्म असंगत (Inconsistent) है।
The incorrect option is 1:
'डाकू - डाकुओं' एक संगत (Consistent) युग्म है। 'डाकू' शब्द 'ऊ' से समाप्त होने वाला पुल्लिंग संज्ञा है। जब यह शब्द कर्म, करण, या अन्य कारकों में प्रयुक्त होता है, तो इसका बहुवचन बनाने के लिए इसमें 'ओं' प्रत्यय जोड़ा जाता है। नियम के अनुसार, 'ऊ' की मात्रा को 'उ' में बदल दिया जाता है, जिससे शुद्ध रूप 'डाकुओं' बनता है। उदाहरण के लिए, "डाकुओं को पकड़ा गया" में इसका तिर्यक बहुवचन रूप सही है, इसलिए यह विकल्प असंगत नहीं है।
The incorrect option is 3:
'पत्नी - पत्नियों' एक संगत युग्म है। हिन्दी व्याकरण में स्त्रीलिंग संज्ञाएँ जो 'ई' (दीर्घ इ) से समाप्त होती हैं, उनका बहुवचन बनाते समय 'ई' को पहले 'इ' (ह्रस्व इ) में बदल दिया जाता है और फिर 'याँ' प्रत्यय जोड़ा जाता है। हालाँकि, जब बहुवचन को तिर्यक रूप में प्रयोग किया जाता है (कारक चिह्न के साथ), तो 'ई' को 'इ' में बदलकर 'यों' प्रत्यय जोड़ा जाता है। इस प्रकार, 'पत्नी' का बहुवचन तिर्यक रूप 'पत्नियों' (पत्न + इयों) होता है। यह वचन परिवर्तन का एक मानक नियम है और यह युग्म पूर्णतः शुद्ध है।
The incorrect option is 4:
'काग़ज़ - कागजात' भी एक संगत युग्म है, लेकिन यह हिंदी के देशी नियमों पर नहीं, बल्कि उर्दू/फ़ारसी प्रभाव पर आधारित है। हिन्दी में कई शब्द ऐसे हैं जो विदेशी भाषाओं से लिए गए हैं, और उनका बहुवचन उन्हीं भाषाओं के नियमों के अनुसार बन जाता है। 'काग़ज़' (पेपर) एक फ़ारसी मूल का शब्द है, और इसका बहुवचन बनाने के लिए 'कागजात' (Papers/Documents) शब्द का प्रयोग किया जाता है। चूंकि यह विदेशी शब्दों के बहुवचन बनाने की मान्य परंपरा का पालन करता है, यह युग्म असंगत नहीं माना जाता है।
प्रश्न 210
‘करणकारक’ युक्त वाक्य चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
‘करणकारक’ युक्त वाक्य है: कानों सुनी बात सत्य होती है।
व्याख्या:
- कानों सुनी बात सत्य होती है: इस वाक्य में 'कानों' शब्द 'सुनने' की क्रिया का साधन है। 'करण कारक' वह कारक होता है जो क्रिया के साधन या उपकरण को दर्शाता है। यहाँ, 'कानों' सुनने की क्रिया का साधन है, इसलिए यह करण कारक है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
- वे सिनेमा देखने गए हैं: इस वाक्य में 'सिनेमा' कर्म कारक है, क्योंकि यह क्रिया 'देखने' का उद्देश्य है। 'वे' कर्ता कारक है।
- ललिता गुरुजी से कत्थक सीखती है: इस वाक्य में 'गुरुजी से' अपादान कारक हो सकता है (सीखने के संदर्भ में अलग होने का भाव) या संबंध कारक (गुरुजी के साथ संबंध)। यह करण कारक नहीं है।
- इस साहसी छात्र ने एक बच्चे को नदी में डूबने से बचाया: इस वाक्य में 'छात्र' कर्ता कारक है और 'बच्चे को' कर्म कारक है। 'नदी में' अधिकरण कारक है (स्थान का बोध कराता है)। इसमें करण कारक नहीं है।
इसलिए, केवल विकल्प 1 में 'कानों' शब्द क्रिया के साधन के रूप में प्रयुक्त हुआ है, जो करण कारक को दर्शाता है।
प्रश्न 211
‘हेमन्त को खीर अच्छी लगती है' वाक्य किस कारक का उदाहरण है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वाक्य 'हेमन्त को खीर अच्छी लगती है' में 'हेमन्त को' संप्रदान कारक का उदाहरण है। संप्रदान कारक वह कारक होता है जो किसी क्रिया के फल का प्राप्तकर्ता होता है। इस वाक्य में 'खीर' के अच्छे लगने की क्रिया का फल 'हेमन्त' को प्राप्त हो रहा है, इसलिए यह संप्रदान कारक का उदाहरण है।
अब अन्य विकल्पों की गलतियों को समझते हैं:
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कर्मकारक: कर्मकारक वह होता है जो क्रिया का सीधा प्रभाव ग्रहण करता है। उदाहरण के लिए, 'राम ने खाना खाया' में 'खाना' कर्मकारक है। 'हेमन्त को खीर अच्छी लगती है' में 'खीर' का सीधा प्रभाव नहीं है, बल्कि यह 'हेमन्त' को अच्छा लगने की क्रिया का फल है।
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संबंध कारक: संबंध कारक का उपयोग संबंध दर्शाने के लिए होता है, जैसे 'राम का घर'। इस वाक्य में कोई संबंध दर्शाया नहीं जा रहा है, इसलिए यह संबंध कारक का उदाहरण नहीं है।
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अधिकरण कारक: अधिकरण कारक वह होता है जो क्रिया के स्थान, समय या साधन को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, 'राम ने बगीचे में खेला' में 'बगीचे में' अधिकरण कारक है। 'हेमन्त को खीर अच्छी लगती है' में ऐसा कोई स्थान, समय या साधन नहीं है जो अधिकरण कारक को दर्शाए।
इस प्रकार, 'हेमन्त को खीर अच्छी लगती है' वाक्य में 'हेमन्त को' संप्रदान कारक का सही उदाहरण है।
प्रश्न 212
अपादान कारकयुक्त वाक्य चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
अपादान कारक का प्रयोग उस वाक्य में होता है जहाँ से किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थान का अलगाव या दूरी प्रकट होती है। अपादान कारक का चिह्न 'से' होता है।
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बच्चे बंदर से डरते हैं। - इस वाक्य में 'बंदर से' अपादान कारक है क्योंकि यहाँ 'बंदर' से बच्चों का डरना एक प्रकार का अलगाव या दूरी प्रकट करता है। बच्चे बंदर से दूर रहना चाहते हैं, इसलिए यह वाक्य अपादान कारकयुक्त है।
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मैं उसे अपने हाथों सजा दूँगा। - इस वाक्य में 'अपने हाथों' का प्रयोग साधन कारक के रूप में हुआ है, जो साधन या माध्यम को दर्शाता है। यहाँ कोई अलगाव या दूरी नहीं है, इसलिए यह अपादान कारकयुक्त वाक्य नहीं है।
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महिला आँखों से अंधी है। - इस वाक्य में 'आँखों से' का प्रयोग कारण कारक के रूप में हुआ है, जो कारण को दर्शाता है। यहाँ भी कोई अलगाव या दूरी नहीं है, इसलिए यह अपादान कारकयुक्त वाक्य नहीं है।
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वह सब ओर से सैनिकों द्वारा घेर लिया गया था। - इस वाक्य में 'सब ओर से' का प्रयोग स्थान कारक के रूप में हुआ है, जो स्थान को दर्शाता है। यहाँ भी कोई अलगाव या दूरी नहीं है, इसलिए यह अपादान कारकयुक्त वाक्य नहीं है।
इस प्रकार, केवल पहला विकल्प 'बच्चे बंदर से डरते हैं।' अपादान कारकयुक्त वाक्य है, क्योंकि इसमें 'बंदर से' का प्रयोग अलगाव या दूरी को दर्शाने के लिए किया गया है।
प्रश्न 213
के लिए' और 'को' किस कारक के चिह्न हैं ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: 'के लिए' और 'को' किस कारक के चिह्न हैं?
सही उत्तर: विकल्प 2 (सम्प्रदान)
विस्तृत व्याख्या:
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सम्प्रदान कारक:
- 'के लिए' और 'को' हिन्दी व्याकरण में सम्प्रदान कारक के चिह्न माने जाते हैं।
- सम्प्रदान कारक का उपयोग तब होता है जब किसी कार्य का फल किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु को समर्पित किया जाता है। उदाहरण के लिए, "राम ने सीता को पुस्तक दी।" यहाँ 'को' यह दर्शाता है कि पुस्तक देने की क्रिया का लाभार्थी सीता है।
- इसी प्रकार, "यह उपहार तुम्हारे लिए है।" यहाँ 'के लिए' यह दर्शाता है कि उपहार का उद्देश्य या लाभार्थी 'तुम' हो।
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अन्य विकल्पों की अस्वीकृति:
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संबंध (विकल्प 1):
- संबंध कारक का उपयोग संबंध दर्शाने के लिए होता है, जैसे "राम का घर।" यहाँ 'का' संबंध कारक है। 'के लिए' और 'को' संबंध कारक के चिह्न नहीं हैं।
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अपादान (विकल्प 3):
- अपादान कारक का उपयोग तब होता है जब किसी वस्तु या व्यक्ति से अलगाव या दूरी दर्शाई जाती है, जैसे "पेड़ से पत्ता गिरा।" यहाँ 'से' अपादान कारक है। 'के लिए' और 'को' इस प्रकार के अलगाव को नहीं दर्शाते।
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करण (विकल्प 4):
- करण कारक का उपयोग साधन या उपकरण को दर्शाने के लिए होता है, जैसे "कलम से लिखना।" यहाँ 'से' करण कारक है। 'के लिए' और 'को' साधन या उपकरण को नहीं दर्शाते।
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इस प्रकार, 'के लिए' और 'को' का सही उपयोग सम्प्रदान कारक के रूप में होता है, जो किसी कार्य के लाभार्थी या उद्देश्य को दर्शाता है। यही कारण है कि विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 214
इनमें से किस वाक्य में क्रिया अकर्मक नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न 215
सर्वनाम से निर्मित विशेषण है :
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उत्तर और व्याख्या
सर्वनाम से निर्मित विशेषण "कैसा" है, क्योंकि यह प्रश्नवाचक सर्वनाम "कौन" से बना है। "कैसा" शब्द किसी संज्ञा के बारे में प्रश्न पूछने के लिए विशेषण के रूप में प्रयुक्त होता है, जैसे "यह फल कैसा है?" यहाँ "कैसा" फल की विशेषता बता रहा है और यह सर्वनाम से बना है।
अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि:
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रक्तिम: यह शब्द "रक्त" (खून) से बना है, जो कि एक संज्ञा है, सर्वनाम नहीं। इसलिए यह सर्वनाम से निर्मित विशेषण नहीं है।
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सभ्य: यह शब्द "सभा" से संबंधित है और एक संज्ञा या भाववाचक संज्ञा से बना है, सर्वनाम से नहीं।
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आदरणीय: यह शब्द "आदर" से बना है, जो कि एक भाववाचक संज्ञा है, सर्वनाम नहीं। इसलिए यह भी सर्वनाम से निर्मित विशेषण नहीं है।
इसलिए, केवल "कैसा" ही सर्वनाम से निर्मित विशेषण है।
प्रश्न 216
सुनंदा बुद्धिमती है - वाक्य में प्रयुक्त विशेषण है :
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उत्तर और व्याख्या
सुनंदा बुद्धिमती है - वाक्य में प्रयुक्त विशेषण 'विषय विशेषण' है, क्योंकि:
- विषय विशेषण (Attributive Adjective): विषय विशेषण वह विशेषण होता है जो किसी संज्ञा (noun) या सर्वनाम (pronoun) के गुण, दोष, संख्या, मात्रा आदि को बताता है और उस संज्ञा या सर्वनाम के बाद प्रयुक्त होता है। इस वाक्य में, 'बुद्धिमती' विशेषण है जो 'सुनंदा' संज्ञा के गुण (बुद्धिमान होना) को बता रहा है और 'सुनंदा' के बाद आ रहा है। इसलिए यह विषय विशेषण है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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उद्देश्य विशेषण (Predicate Adjective): उद्देश्य विशेषण वह विशेषण होता है जो किसी संज्ञा या सर्वनाम के गुण, दोष, संख्या, मात्रा आदि को बताता है और उस संज्ञा या सर्वनाम के पहले प्रयुक्त होता है। उदाहरण के लिए, "बुद्धिमती सुनंदा" में 'बुद्धिमती' उद्देश्य विशेषण होगा। चूंकि वाक्य में विशेषण संज्ञा के बाद आ रहा है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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प्रविशेषण (Adverb of Degree): प्रविशेषण वह शब्द होता है जो विशेषण की विशेषता बताता है। उदाहरण के लिए, "बहुत बुद्धिमती" में 'बहुत' प्रविशेषण है जो 'बुद्धिमती' विशेषण की विशेषता बता रहा है। दिए गए वाक्य में ऐसा कोई शब्द नहीं है जो विशेषण की विशेषता बताए, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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तुलनात्मक विशेषण (Comparative Adjective): तुलनात्मक विशेषण दो या दो से अधिक संज्ञाओं या सर्वनामों के बीच तुलना करने के लिए प्रयुक्त होता है। उदाहरण के लिए, "सुनंदा रीता से अधिक बुद्धिमती है" में 'अधिक बुद्धिमती' तुलनात्मक विशेषण है। दिए गए वाक्य में कोई तुलना नहीं की जा रही है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
इसलिए, केवल विषय विशेषण ही दिए गए वाक्य के संदर्भ में सही उत्तर है।
प्रश्न 217
किस विकल्प में नामधातु क्रिया नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
नामधातु क्रिया उस क्रिया को कहते हैं जो संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि शब्दों से बनती है। दी गई विकल्पों में से 'धुलवाना' नामधातु क्रिया नहीं है, जबकि अन्य विकल्प नामधातु क्रियाएं हैं।
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धुलवाना: यह क्रिया 'धोना' क्रिया से बनी है, जो कि एक मूल क्रिया है। 'धुलवाना' एक प्रेरणार्थक क्रिया है, जिसमें कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी और से करवाता है। इसलिए, यह नामधातु क्रिया नहीं है।
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बतियाना: यह क्रिया 'बात' (संज्ञा) से बनी है। 'बात' एक संज्ञा है और इससे बनी क्रिया 'बतियाना' नामधातु क्रिया है। इसलिए यह विकल्प गलत है।
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ललचाना: यह क्रिया 'लालच' (संज्ञा) से बनी है। 'लालच' एक संज्ञा है और इससे बनी क्रिया 'ललचाना' नामधातु क्रिया है। इसलिए यह विकल्प गलत है।
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सठियाना: यह क्रिया 'सठ' (विशेषण - साठ वर्ष का) से बनी है। 'सठ' एक विशेषण है और इससे बनी क्रिया 'सठियाना' नामधातु क्रिया है। इसलिए यह विकल्प गलत है।
अतः, 'धुलवाना' नामधातु क्रिया नहीं है, बल्कि प्रेरणार्थक क्रिया है। इसलिए विकल्प 1 सही है।
प्रश्न 218
छोटे को खाना खिलाओ' - वाक्य में विशेषण पद कौन-सा है ?
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उत्तर और व्याख्या
'इनमें से कोई नहीं' सही उत्तर है क्योंकि वाक्य "छोटे को खाना खिलाओ" में कोई भी शब्द विशेषण नहीं है।
यहाँ कारण दिए गए हैं कि अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
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1. छोटे को: "छोटे" शब्द यहाँ विशेषण की तरह लग सकता है, लेकिन यह वास्तव में एक संज्ञा के रूप में कार्य कर रहा है। यह किसी छोटे व्यक्ति को संदर्भित कर रहा है, न कि किसी संज्ञा की विशेषता बता रहा है। इसलिए, यह विशेषण नहीं है। "को" एक कारक चिह्न है, जो इसे विशेषण होने से और भी दूर करता है।
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2. खाना: "खाना" एक संज्ञा है (भोजन)। यह किसी चीज की विशेषता नहीं बता रहा है, बल्कि स्वयं एक वस्तु है। इसलिए, यह विशेषण नहीं है।
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3. खिलाओ: "खिलाओ" एक क्रिया है (क्रिया)। यह एक क्रिया का वर्णन कर रहा है, न कि किसी संज्ञा की विशेषता बता रहा है। इसलिए, यह विशेषण नहीं है।
चूंकि वाक्य में कोई भी शब्द विशेषण नहीं है, इसलिए विकल्प 4, "इनमें से कोई नहीं," सही उत्तर है।
प्रश्न 219
अकर्मक क्रिया' से रहित वाक्य है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
मोहन ऊँट को दौड़ाता है।
व्याख्या:
अकर्मक क्रिया वह क्रिया होती है जिसका कर्म नहीं होता, अर्थात क्रिया का फल कर्ता पर ही पड़ता है। सकर्मक क्रिया में कर्म होता है और क्रिया का फल कर्म पर पड़ता है।
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विकल्प 4 सही क्यों है: "मोहन ऊँट को दौड़ाता है" वाक्य में 'दौड़ाता है' क्रिया है। इस क्रिया का कर्म 'ऊँट' है। मोहन (कर्ता) ऊँट (कर्म) को दौड़ा रहा है। चूंकि इस वाक्य में कर्म मौजूद है, इसलिए यह सकर्मक क्रिया का उदाहरण है, और प्रश्न में अकर्मक क्रिया से रहित वाक्य पूछा गया है, इसलिए यह सही उत्तर है।
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अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
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विकल्प 1: भिखारी ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रहे थे। इस वाक्य में 'चिल्ला रहे थे' क्रिया है। 'क्या चिल्ला रहे थे?' का कोई स्पष्ट उत्तर नहीं है। क्रिया का फल सीधे भिखारी (कर्ता) पर पड़ रहा है। इसलिए यह अकर्मक क्रिया है।
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विकल्प 2: पिताजी पलंग पर सो रहा है। इस वाक्य में 'सो रहा है' क्रिया है। 'क्या सो रहा है?' का कोई स्पष्ट उत्तर नहीं है। क्रिया का फल सीधे पिताजी (कर्ता) पर पड़ रहा है। 'पलंग पर' अधिकरण कारक है, कर्म नहीं। इसलिए यह अकर्मक क्रिया है।
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विकल्प 3: सीमा बगीचे में टहल रही है। इस वाक्य में 'टहल रही है' क्रिया है। 'क्या टहल रही है?' का कोई स्पष्ट उत्तर नहीं है। क्रिया का फल सीधे सीमा (कर्ता) पर पड़ रहा है। 'बगीचे में' अधिकरण कारक है, कर्म नहीं। इसलिए यह अकर्मक क्रिया है।
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इसलिए, केवल विकल्प 4 ही सकर्मक क्रिया का उदाहरण है और अकर्मक क्रिया से रहित है।
प्रश्न 220
"आकाश में ध्रुवतारा टिमटिमा रहा है।" वाक्य में कौन-से क्रिया रूप का प्रयोग किया गया है ?
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उत्तर और व्याख्या
अकर्मक क्रिया
व्याख्या:
दिए गए वाक्य "आकाश में ध्रुवतारा टिमटिमा रहा है।" में 'टिमटिमा रहा है' क्रिया है। यह एक अकर्मक क्रिया है क्योंकि क्रिया का फल कर्ता (ध्रुवतारा) पर ही पड़ रहा है। वाक्य में कोई कर्म (object) मौजूद नहीं है जिस पर क्रिया का प्रभाव पड़े।
अन्य विकल्पों का खंडन:
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पूर्ण सकर्मक क्रिया: सकर्मक क्रिया वह होती है जिसमें कर्म (object) मौजूद होता है और क्रिया का फल कर्ता से कर्म पर पड़ता है। इस वाक्य में कर्म नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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द्विकर्मक क्रिया: द्विकर्मक क्रिया वह होती है जिसमें दो कर्म (objects) होते हैं। इस वाक्य में एक भी कर्म नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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अपूर्ण सकर्मक क्रिया: अपूर्ण सकर्मक क्रिया वह होती है जिसमें कर्म के साथ-साथ कर्म पूरक (object complement) की भी आवश्यकता होती है ताकि वाक्य का अर्थ पूर्ण हो सके। इस वाक्य में न तो कर्म है और न ही कर्म पूरक की आवश्यकता है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
इसलिए, केवल अकर्मक क्रिया ही सही उत्तर है क्योंकि क्रिया का फल सीधे कर्ता पर पड़ रहा है और वाक्य में कोई कर्म मौजूद नहीं है।