HTET परीक्षा - Level 3 PGT - हिंदी
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 3 PGT की तैयारी
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 561
असंगत कथन छाँटिए :
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उत्तर और व्याख्या
असंगत कथन छाँटने के लिए हमें दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करना होगा और यह देखना होगा कि कौन सा कथन अन्य विकल्पों के साथ मेल नहीं खाता है।
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नापाक इरादे से की जाने वाली मंत्रणा – दित्सा: यह कथन असंगत है क्योंकि 'दित्सा' का अर्थ नापाक इरादे से की जाने वाली मंत्रणा नहीं होता है। 'दित्सा' का अर्थ होता है 'दान' या 'उपहार'। इसलिए, यह कथन अन्य विकल्पों के साथ मेल नहीं खाता है और असंगत है।
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दोपहर से पहले का समय – पूर्वाह्न: यह कथन संगत है क्योंकि 'पूर्वाह्न' का अर्थ होता है 'दोपहर से पहले का समय'। यह सही और सटीक परिभाषा है।
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जिसे देखकर रोंगटे खड़े हो जाएँ – लोमहर्षक: यह कथन भी संगत है क्योंकि 'लोमहर्षक' का अर्थ होता है 'जिसे देखकर रोंगटे खड़े हो जाएँ'। यह सही और सटीक परिभाषा है।
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बालुका युक्त तट/भूमि – सिकता: यह कथन भी संगत है क्योंकि 'सिकता' का अर्थ होता है 'बालुका युक्त तट या भूमि'। यह सही और सटीक परिभाषा है।
इस प्रकार, विकल्प 1 'नापाक इरादे से की जाने वाली मंत्रणा – दित्सा' असंगत है क्योंकि इसका अर्थ गलत दिया गया है। अन्य सभी विकल्प सही और संगत हैं। इसलिए, विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 562
हस्बमामूल' शब्द का अर्थ है :
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उत्तर और व्याख्या
'हस्बमामूल' शब्द का अर्थ है 'यथावत', जो विकल्प 2 है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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विकल्प 2: यथावत - 'हस्बमामूल' एक फारसी शब्द है जिसका अर्थ होता है 'जैसा है वैसा ही' या 'यथावत'। यह शब्द किसी स्थिति या वस्तु के अपरिवर्तित रहने का संकेत देता है। इसलिए, विकल्प 2 सही है क्योंकि यह शब्द के सही अर्थ को दर्शाता है।
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विकल्प 1: विद्यालय - 'विद्यालय' का अर्थ होता है स्कूल या शिक्षा का स्थान। यह 'हस्बमामूल' के अर्थ से मेल नहीं खाता है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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विकल्प 3: अचानक - 'अचानक' का अर्थ होता है बिना किसी पूर्व सूचना के या अप्रत्याशित रूप से। यह 'हस्बमामूल' के अर्थ से बिल्कुल अलग है, इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
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विकल्प 4: अभिप्राय - 'अभिप्राय' का अर्थ होता है किसी बात का उद्देश्य या मतलब। यह भी 'हस्बमामूल' के अर्थ से संबंधित नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
इस प्रकार, 'हस्बमामूल' का सही अर्थ 'यथावत' है, जो विकल्प 2 को सही ठहराता है।
प्रश्न 563
जो मापा न जा सके' उसे कहेंगे :
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: 'जो मापा न जा सके' उसे कहेंगे :
सही उत्तर: विकल्प 2 - अपरिमेय
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 2: अपरिमेय
'अपरिमेय' का अर्थ होता है 'जो मापा न जा सके' या 'जिसे सीमाओं में नहीं बांधा जा सके'। यह शब्द उन चीजों के लिए प्रयोग होता है जो असीमित या अनंत होती हैं, जैसे कि ब्रह्मांड की विशालता या किसी की असीमित क्षमता। इस प्रकार, 'जो मापा न जा सके' के लिए 'अपरिमेय' शब्द का प्रयोग सही है। -
विकल्प 1: अप्रमेय
'अप्रमेय' का अर्थ होता है 'जिसे समझा न जा सके' या 'जिसे मापा न जा सके', लेकिन यह शब्द आमतौर पर 'अपरिमेय' के समानार्थी के रूप में नहीं प्रयोग होता। यह शब्द अधिकतर बौद्धिक या दार्शनिक संदर्भों में प्रयोग होता है, जबकि 'अपरिमेय' भौतिक या गणितीय संदर्भों में अधिक उपयुक्त है। -
विकल्प 3: अग्रगण्य
'अग्रगण्य' का अर्थ होता है 'प्रमुख' या 'अग्रणी'। यह शब्द उन व्यक्तियों या वस्तुओं के लिए प्रयोग होता है जो किसी क्षेत्र में सबसे आगे या प्रमुख स्थान पर होते हैं। यह शब्द 'जो मापा न जा सके' के संदर्भ में उपयुक्त नहीं है। -
विकल्प 4: अनवगत
'अनवगत' का अर्थ होता है 'जो अवगत न हो' या 'जिसे जानकारी न हो'। यह शब्द जानकारी या ज्ञान की कमी को दर्शाता है और 'जो मापा न जा सके' के संदर्भ में सही नहीं है।
इस प्रकार, 'जो मापा न जा सके' के लिए सही शब्द 'अपरिमेय' है, जो विकल्प 2 में दिया गया है।
प्रश्न 564
दश' शब्द किस शब्द-समूह के लिए सटीक नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: 'दश' शब्द किस शब्द-समूह के लिए सटीक नहीं है?
सही उत्तर: विकल्प 1 (नक्षत्र)
व्याख्या:
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विकल्प 1: नक्षत्र
'दश' शब्द का अर्थ होता है 'दस', जो संख्या को दर्शाता है। नक्षत्रों की संख्या 27 होती है, जो 'दश' से मेल नहीं खाती। इसलिए, 'दश' शब्द नक्षत्रों के समूह के लिए सटीक नहीं है। इस कारण से, विकल्प 1 सही उत्तर है। -
विकल्प 2: दिशा
'दश' शब्द का उपयोग दिशाओं के संदर्भ में किया जा सकता है, जैसे कि दस दिशाएँ (आठ मुख्य दिशाएँ और दो उपदिशाएँ)। इसलिए, 'दश' शब्द दिशाओं के समूह के लिए उपयुक्त है। -
विकल्प 3: अवतार
'दश' शब्द का उपयोग 'दशावतार' के संदर्भ में किया जाता है, जो भगवान विष्णु के दस अवतारों को दर्शाता है। इसलिए, 'दश' शब्द अवतारों के समूह के लिए उपयुक्त है। -
विकल्प 4: दिक्पाल
'दश' शब्द का उपयोग दिक्पालों के संदर्भ में भी किया जा सकता है, जो दस दिशाओं के रक्षक होते हैं। इसलिए, 'दश' शब्द दिक्पालों के समूह के लिए उपयुक्त है।
इस प्रकार, 'दश' शब्द नक्षत्रों के समूह के लिए सटीक नहीं है, जबकि अन्य विकल्पों के लिए यह उपयुक्त है। यही कारण है कि विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 565
मीरां ने कृष्ण को ‘गउवन के रखवारे' कहा है। इसके लिए एक शब्द है :
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उत्तर और व्याख्या
मीरां ने कृष्ण को 'गउवन के रखवारे' कहा है, और इसके लिए सही शब्द 'गोपाला' है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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गोपाला (Option 4): 'गोपाला' शब्द का अर्थ है 'गायों का रक्षक'। 'गो' का अर्थ गाय होता है और 'पाल' का अर्थ पालन करने वाला या रक्षक होता है। भगवान कृष्ण को अक्सर 'गोपाला' कहा जाता है क्योंकि वे ग्वालों के साथ गायों की देखभाल करते थे और उन्हें चराने ले जाते थे। इस प्रकार, 'गउवन के रखवारे' के लिए 'गोपाला' सबसे उपयुक्त शब्द है।
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वंशीधर (Option 1): 'वंशीधर' का अर्थ है 'बांसुरी धारण करने वाला'। यह नाम कृष्ण के लिए उपयुक्त है क्योंकि वे बांसुरी बजाने के लिए प्रसिद्ध थे, लेकिन यह विशेष रूप से 'गउवन के रखवारे' के संदर्भ में नहीं आता है।
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श्याम (Option 2): 'श्याम' कृष्ण का एक और नाम है, जो उनके सांवले रंग को दर्शाता है। हालांकि यह नाम कृष्ण के व्यक्तित्व का एक पहलू है, यह 'गउवन के रखवारे' के विशेष अर्थ को नहीं दर्शाता।
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नंदलाल (Option 3): 'नंदलाल' का अर्थ है 'नंद के पुत्र'। यह नाम कृष्ण के पारिवारिक संबंध को दर्शाता है, क्योंकि वे नंद बाबा के पुत्र थे। हालांकि, यह नाम 'गउवन के रखवारे' के अर्थ को स्पष्ट रूप से नहीं दर्शाता।
इस प्रकार, 'गउवन के रखवारे' के लिए 'गोपाला' (Option 4) सबसे उपयुक्त और सही शब्द है।
प्रश्न 566
अशुद्ध विकल्प चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न में अशुद्ध विकल्प चुनने के लिए कहा गया है, और सही उत्तर विकल्प 2 है: "जो प्रमाण से सिद्ध न हो – प्रमाण्य"। आइए इस विकल्प को सही ठहराने के लिए विस्तृत व्याख्या करें और अन्य विकल्पों की भी जांच करें:
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विकल्प 1: जो कम बोलने वाला हो – अल्पभाषी
"अल्पभाषी" का अर्थ होता है वह व्यक्ति जो कम बोलता है। यह शब्द सही रूप से उस व्यक्ति का वर्णन करता है जो कम बोलने वाला हो। इसलिए, यह विकल्प सही है और अशुद्ध नहीं है। -
विकल्प 2: जो प्रमाण से सिद्ध न हो – प्रमाण्य
"प्रमाण्य" का अर्थ होता है जो प्रमाणित या सिद्ध हो। जबकि प्रश्न में दिया गया है "जो प्रमाण से सिद्ध न हो", इसका सही शब्द "अप्रमाण्य" होना चाहिए। इसलिए, यह विकल्प अशुद्ध है क्योंकि यह सही अर्थ को व्यक्त नहीं करता है। -
विकल्प 3: जो किसी पर अभियोग लगाए – अभियोगी
"अभियोगी" का अर्थ होता है वह व्यक्ति जो किसी पर अभियोग लगाता है। यह शब्द सही रूप से उस व्यक्ति का वर्णन करता है जो अभियोग लगाता है। इसलिए, यह विकल्प सही है और अशुद्ध नहीं है। -
विकल्प 4: वर्षा का बिलकुल न होना - अनावृष्टि
"अनावृष्टि" का अर्थ होता है वर्षा का बिलकुल न होना। यह शब्द सही रूप से उस स्थिति का वर्णन करता है जब वर्षा नहीं होती। इसलिए, यह विकल्प सही है और अशुद्ध नहीं है।
इस प्रकार, विकल्प 2 "जो प्रमाण से सिद्ध न हो – प्रमाण्य" अशुद्ध है क्योंकि यह सही अर्थ को व्यक्त नहीं करता है। सही शब्द "अप्रमाण्य" होना चाहिए। यही कारण है कि विकल्प 2 को अशुद्ध विकल्प के रूप में चुना गया है।
प्रश्न 567
किसी के दुःख से दुःखी होकर उस पर दया करने का भाव कहलाता है -
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उत्तर और व्याख्या
Option 4, "अनुकम्पा," को सही उत्तर के रूप में चुना गया है। आइए समझते हैं कि यह विकल्प क्यों सही है और अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
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अनुकम्पा (Option 4):
- "अनुकम्पा" का अर्थ है किसी के दुःख या कष्ट को देखकर उस पर दया करना और उसकी सहायता करने की भावना रखना। यह शब्द विशेष रूप से उस स्थिति को दर्शाता है जब हम किसी के दुःख से प्रभावित होकर उसकी मदद करने की इच्छा रखते हैं। इस प्रकार, यह शब्द प्रश्न में दिए गए भाव को सही रूप से व्यक्त करता है।
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दया (Option 1):
- "दया" का अर्थ है किसी के प्रति करुणा या ममता का भाव रखना। हालांकि यह शब्द भी किसी के दुःख से प्रभावित होने का संकेत देता है, लेकिन यह अनुकम्पा की तरह सक्रिय सहायता की भावना को नहीं दर्शाता। दया एक सामान्य करुणा का भाव है, जबकि अनुकम्पा में सहायता करने की प्रवृत्ति होती है।
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समानुभूति (Option 2):
- "समानुभूति" का अर्थ है किसी के भावनात्मक अनुभव को समझना और महसूस करना। यह शब्द अधिकतर मानसिक और भावनात्मक स्तर पर जुड़ाव को दर्शाता है, लेकिन इसमें दया या सहायता करने की भावना का अभाव होता है। इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
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सहानुभूति (Option 3):
- "सहानुभूति" का अर्थ है किसी के दुःख या कष्ट को समझना और उसके प्रति संवेदनशील होना। यह शब्द भी करुणा का भाव दर्शाता है, लेकिन यह अनुकम्पा की तरह सक्रिय सहायता की भावना को नहीं दर्शाता। सहानुभूति में समझ और संवेदनशीलता होती है, लेकिन अनुकम्पा में सहायता करने की प्रवृत्ति होती है।
इस प्रकार, "अनुकम्पा" (Option 4) सही उत्तर है क्योंकि यह शब्द न केवल किसी के दुःख से प्रभावित होने का भाव दर्शाता है, बल्कि उस पर दया करके सहायता करने की भावना को भी व्यक्त करता है।
प्रश्न 568
निस्पृह' शब्द का सही अर्थ है :
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उत्तर और व्याख्या
'निस्पृह' शब्द का सही अर्थ है 'कामना रहित'।
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विस्तृत व्याख्या:
'निस्पृह' शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है 'कामना रहित'। यह शब्द उस अवस्था या व्यक्ति का वर्णन करता है जो किसी प्रकार की इच्छा, लालसा या आकांक्षा से मुक्त होता है। यह एक मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति बाहरी वस्तुओं या सुखों के प्रति निर्लिप्त रहता है और आत्मिक शांति की ओर अग्रसर होता है। -
अन्य विकल्पों का खंडन:
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भय रहित (Option 2): 'भय रहित' का अर्थ है 'डर से मुक्त'। यह शब्द 'निस्पृह' के अर्थ से मेल नहीं खाता क्योंकि 'निस्पृह' का संबंध इच्छाओं से है, न कि भय से।
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घर रहित (Option 3): 'घर रहित' का अर्थ है 'जिसका कोई घर नहीं है'। यह शब्द भौतिक स्थिति का वर्णन करता है, जबकि 'निस्पृह' मानसिक स्थिति का वर्णन करता है। इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
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आश्रय रहित (Option 4): 'आश्रय रहित' का अर्थ है 'जिसके पास कोई आश्रय नहीं है'। यह भी भौतिक स्थिति को दर्शाता है और 'निस्पृह' के अर्थ से संबंधित नहीं है, जो इच्छाओं की अनुपस्थिति को दर्शाता है।
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इस प्रकार, 'निस्पृह' का सही अर्थ 'कामना रहित' है, और यही कारण है कि विकल्प 1 सही है।
प्रश्न 569
जो समझने योग्य न हो' वाक्यांश के लिए एक शब्द है :
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उत्तर और व्याख्या
वाक्यांश 'जो समझने योग्य न हो' के लिए सही शब्द 'अबूझ' है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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अबूझ: यह शब्द उन चीजों के लिए प्रयोग किया जाता है जिन्हें समझना या जानना कठिन होता है। 'अबूझ' का अर्थ होता है 'जिसे समझा न जा सके' या 'जो रहस्यमय हो'। इसलिए, 'जो समझने योग्य न हो' के लिए 'अबूझ' एकदम सही शब्द है।
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उद्दाम: इस शब्द का अर्थ होता है 'अत्यधिक उत्साही' या 'उत्तेजित'। यह शब्द किसी व्यक्ति या स्थिति की अत्यधिक ऊर्जा या उत्साह को दर्शाता है, न कि किसी चीज़ के समझ में न आने को। इसलिए, यह विकल्प गलत है।
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हेय: इसका अर्थ होता है 'निंदनीय' या 'अवमाननीय'। यह शब्द उन चीजों के लिए प्रयोग किया जाता है जिन्हें तुच्छ या निम्न समझा जाता है। यह 'जो समझने योग्य न हो' के अर्थ में फिट नहीं बैठता, इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
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लोच: इस शब्द का अर्थ होता है 'लचीलापन' या 'समायोजन की क्षमता'। यह किसी वस्तु या व्यक्ति की लचीलेपन की क्षमता को दर्शाता है। यह भी 'जो समझने योग्य न हो' के अर्थ में सही नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
इस प्रकार, 'जो समझने योग्य न हो' के लिए सही शब्द 'अबूझ' है, और यही कारण है कि विकल्प 2 सही है।
प्रश्न 570
वाक्यांश के लिए एक शब्द की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
वाक्यांश के लिए एक शब्द की दृष्टि से असंगत विकल्प विकल्प 3 है, क्योंकि:
विकल्प 3 सही क्यों है:
- "बिना किसी प्रयास के" के लिए सही शब्द "अनायास" होता है, न कि "आयास"। "आयास" का अर्थ होता है "प्रयास" या "कोशिश"। इसलिए, "बिना किसी प्रयास के" के लिए "आयास" का प्रयोग गलत है, और यह विकल्प असंगत है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
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विकल्प 1: "किसी कथा के अन्तर्गत आने वाली कोई दूसरी कथा – अन्तर्कथा" - यह बिल्कुल सही है। "अन्तर्कथा" का अर्थ ही होता है एक कथा के भीतर दूसरी कथा।
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विकल्प 2: "सर्वाधिकार सम्पन्न शासक या अधिकारी – अधिनायक" - यह भी सही है। "अधिनायक" शब्द का प्रयोग ऐसे शासक या अधिकारी के लिए होता है जिसके पास सारे अधिकार हों।
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विकल्प 4: "जिसे शाप दिया गया है – अभिशप्त" - यह भी सही है। "अभिशप्त" का अर्थ होता है जिसे शाप दिया गया हो या जो शापित हो।
इसलिए, केवल विकल्प 3 ही गलत है, क्योंकि "बिना किसी प्रयास के" के लिए सही शब्द "अनायास" है, न कि "आयास"।
प्रश्न 571
‘अनुष्ठान करने वाला’ वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द है :
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उत्तर और व्याख्या
‘अनुष्ठान करने वाला’ वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द है 'अनुष्ठाता'। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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अनुष्ठाता (Option 3): 'अनुष्ठाता' शब्द का अर्थ होता है वह व्यक्ति जो अनुष्ठान करता है या अनुष्ठान का संचालन करता है। यह शब्द 'अनुष्ठान' से बना है और इसमें 'कर्ता' का भाव निहित है। इसलिए, 'अनुष्ठान करने वाला' के लिए 'अनुष्ठाता' सबसे उपयुक्त शब्द है।
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अनुष्ठित (Option 1): 'अनुष्ठित' का अर्थ होता है जो अनुष्ठान किया गया हो। यह एक क्रिया विशेषण है जो कार्य के पूर्ण होने को दर्शाता है, न कि कार्य करने वाले व्यक्ति को। इसलिए, यह विकल्प सही नहीं है।
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अनुसंधायक (Option 2): 'अनुसंधायक' का अर्थ होता है शोधकर्ता या वह व्यक्ति जो अनुसंधान करता है। यह शब्द 'अनुसंधान' से संबंधित है, न कि 'अनुष्ठान' से। इसलिए, यह विकल्प भी सही नहीं है।
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अनुसंधित्सु (Option 4): 'अनुसंधित्सु' का अर्थ होता है जो अनुसंधान करने की इच्छा रखता हो। यह शब्द भी 'अनुसंधान' से संबंधित है और 'अनुष्ठान' से कोई संबंध नहीं रखता। इसलिए, यह विकल्प भी सही नहीं है।
इस प्रकार, 'अनुष्ठान करने वाला' के लिए सही और सार्थक शब्द 'अनुष्ठाता' ही है, जो कि Option 3 है।
प्रश्न 572
जंगल (वन) की अग्नि' के लिए सही शब्द चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: जंगल (वन) की अग्नि' के लिए सही शब्द चुनिए :
सही उत्तर: विकल्प 1 - दावाग्नि
विस्तृत व्याख्या:
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दावाग्नि: 'दावाग्नि' शब्द का अर्थ होता है जंगल की आग या वनाग्नि। यह शब्द विशेष रूप से उन आगों के लिए प्रयोग किया जाता है जो जंगलों में प्राकृतिक या मानव निर्मित कारणों से लगती हैं। जंगल की आग एक प्राकृतिक आपदा हो सकती है जो पेड़ों, वनस्पतियों और जीवों को प्रभावित करती है। इसलिए, 'दावाग्नि' शब्द जंगल की आग के लिए सबसे उपयुक्त और सही विकल्प है।
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बड़वाग्नि: 'बड़वाग्नि' का अर्थ होता है समुद्र की आग। यह एक पौराणिक और अलंकारिक शब्द है जो समुद्र के भीतर की अग्नि को दर्शाता है। यह जंगल की आग के संदर्भ में सही नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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कामाग्नि: 'कामाग्नि' का अर्थ होता है काम की अग्नि या वासना की आग। यह एक मानसिक और भावनात्मक स्थिति को दर्शाता है और इसका जंगल की आग से कोई संबंध नहीं है। इसलिए, यह विकल्प भी गलत है।
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जठराग्नि: 'जठराग्नि' का अर्थ होता है पेट की अग्नि या पाचन अग्नि। यह शब्द मानव शरीर में भोजन के पाचन के लिए प्रयोग किया जाता है और इसका जंगल की आग से कोई संबंध नहीं है। इसलिए, यह विकल्प भी गलत है।
इस प्रकार, 'जंगल (वन) की अग्नि' के लिए सही शब्द 'दावाग्नि' है, जो विकल्प 1 है। अन्य विकल्प इस संदर्भ में सही नहीं हैं।
प्रश्न 573
‘युद्ध करने की इच्छा रखने वाले’ को कहा जाता है :
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उत्तर और व्याख्या
‘युद्ध करने की इच्छा रखने वाले’ को ‘युयुत्सु’ कहा जाता है। यह शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है, जिसमें 'यु' का अर्थ होता है 'युद्ध' और 'उत्सु' का अर्थ होता है 'इच्छा रखने वाला'। इसलिए, 'युयुत्सु' का अर्थ होता है 'युद्ध करने की इच्छा रखने वाला'।
अब हम अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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विजीगिषु: यह शब्द 'विजय' से संबंधित है, जिसका अर्थ होता है 'विजय प्राप्त करने की इच्छा रखने वाला'। यह युद्ध करने की इच्छा से अलग है क्योंकि यह विशेष रूप से विजय प्राप्त करने की इच्छा को दर्शाता है।
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युयुत्सा: यह शब्द 'युयुत्सु' का एक रूपांतर हो सकता है, लेकिन यह सही शब्द नहीं है। सही शब्द 'युयुत्सु' है, जो विशेष रूप से युद्ध करने की इच्छा को दर्शाता है।
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मुमूर्षु: यह शब्द 'मृत्यु' से संबंधित है, जिसका अर्थ होता है 'मृत्यु की इच्छा रखने वाला'। यह युद्ध से संबंधित नहीं है और इसलिए इस संदर्भ में गलत है।
इस प्रकार, 'युयुत्सु' (विकल्प 3) सही उत्तर है क्योंकि यह विशेष रूप से युद्ध करने की इच्छा को दर्शाता है।
प्रश्न 574
दूसरे के काम में दखल करना' वाक्यांश के लिए उचित एकल शब्द चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
वाक्यांश 'दूसरे के काम में दखल करना' के लिए उचित एकल शब्द 'हस्तक्षेप' है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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हस्तक्षेप (Option 3): 'हस्तक्षेप' का अर्थ होता है किसी के कार्य या मामले में दखल देना या बीच में आना। जब कोई व्यक्ति या संस्था किसी अन्य व्यक्ति के कार्यों में बिना उनकी अनुमति के शामिल होती है, तो इसे हस्तक्षेप कहा जाता है। इस प्रकार, 'दूसरे के काम में दखल करना' के लिए 'हस्तक्षेप' सबसे उपयुक्त शब्द है।
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उन्मूलन (Option 1): उन्मूलन का अर्थ होता है किसी चीज़ को जड़ से समाप्त करना या नष्ट करना। यह शब्द 'दूसरे के काम में दखल करना' के संदर्भ में उपयुक्त नहीं है क्योंकि यह हस्तक्षेप के अर्थ को व्यक्त नहीं करता।
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षोडशी (Option 2): षोडशी का अर्थ होता है सोलह वर्ष की आयु की लड़की। यह शब्द किसी भी प्रकार से 'दूसरे के काम में दखल करना' के अर्थ से मेल नहीं खाता।
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अध्यूढा (Option 4): अध्यूढा का अर्थ होता है विवाहित स्त्री। यह शब्द भी 'दूसरे के काम में दखल करना' के अर्थ से संबंधित नहीं है।
इस प्रकार, 'दूसरे के काम में दखल करना' के लिए 'हस्तक्षेप' (Option 3) ही सही विकल्प है।
प्रश्न 575
वाक्यांश के लिए एकल शब्द के संबंध में कौन-सा युग्म असंगत है ?
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उत्तर और व्याख्या
The correct option is 1:
विकल्प 1 ("जिसे वहन करना कठिन हो - दुर्विभाव्य") असंगत युग्म है। "दुर्विभाव्य" शब्द का अर्थ होता है जिसे समझना या जानना कठिन हो, न कि जिसे वहन करना (उठाना या सहना) कठिन हो। "वहन करना कठिन हो" के लिए सही एकल शब्द "दुर्वह" या "दुष्कर" होता है। यह वाक्यांश 'वहन' (भार उठाना) और 'दुर्विभाव्य' (जिसे समझना कठिन हो) के बीच अर्थ का मेल न होने के कारण असंगत है।
The incorrect option is 2:
विकल्प 2 ("जिसे किसी ने न सूँघा हो - अनाघ्रात") संगत युग्म है। "अनाघ्रात" शब्द 'अन्' (नहीं) और 'आघ्रात' (सूँघा हुआ) के योग से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है जिसे सूँघा न गया हो।
The incorrect option is 3:
विकल्प 3 ("कोई काम करने की इच्छा - चिकीर्षा") संगत युग्म है। "चिकीर्षा" का अर्थ ही होता है 'कुछ करने की इच्छा' (क्रिया की इच्छा)। यह इच्छावाचक शब्द संस्कृत की 'सन्' प्रत्यय लगने से बनता है और वाक्यांश के लिए बिल्कुल सही एकल शब्द है।
The incorrect option is 4:
विकल्प 4 ("विजय प्राप्ति की तीव्र इच्छा - विजीगिषा") संगत युग्म है। "विजीगिषा" शब्द का प्रयोग 'जीतने की इच्छा' या 'विजय प्राप्त करने की तीव्र अभिलाषा' के लिए किया जाता है। यह वाक्यांश के अर्थ को पूर्णतः व्यक्त करता है।
प्रश्न 576
वाक्यांश के लिए एकल शब्द के संबंध में अनुचित युग्म है :
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न 577
असंगत विकल्प चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
The correct option is (1):
"समुद्र में लगने वाली आग - दावानल" यह विकल्प असंगत है क्योंकि वाक्यांश और उसके लिए दिए गए एक शब्द का मेल सही नहीं है। 'दावानल' (या दावाग्नि) का अर्थ होता है 'जंगल में लगने वाली आग' (wildfire)। इसके विपरीत, समुद्र में लगने वाली आग के लिए सही शब्द 'बड़वानल' या 'बड़वाग्नि' होता है। हिंदी भाषा में वाक्यांशों के लिए एक शब्द का प्रयोग करते समय यह निश्चित किया जाता है कि वह शब्द उस वाक्यांश के अर्थ को पूरी तरह से व्यक्त करे, और चूँकि 'दावानल' का अर्थ जंगल की आग है, यह 'समुद्र में लगने वाली आग' के संदर्भ में गलत है, इसलिए यह असंगत विकल्प है।
The incorrect option is (2):
"लोक-प्रचलित बात, जिसके वक्ता का पता न हो - किंवदन्ती" यह एक संगत युग्म है। 'किंवदन्ती' शब्द का प्रयोग उन कहानियों या बातों के लिए किया जाता है जो लंबे समय से लोगों के बीच प्रचलित हैं, लेकिन उनके मूल स्रोत या वक्ता का कोई निश्चित प्रमाण नहीं होता है।
The incorrect option is (3):
"पशुओं द्वारा जुगाली करने की प्रक्रिया - पागुर" यह युग्म भी पूरी तरह से संगत है। 'पागुर' या 'जुगाली' वह प्रक्रिया है जिसमें गाय या भैंस जैसे पशु भोजन को आंशिक रूप से पचाने के बाद वापस मुँह में लाकर चबाते हैं। यह दोनों शब्द एक ही क्रिया को दर्शाते हैं।
The incorrect option is (4):
"जिसके पति ने दूसरा विवाह कर लिया हो - अध्यूढा" यह युग्म भी संगत है और सही परिभाषा प्रस्तुत करता है। 'अध्यूढा' उस स्त्री को कहते हैं जिसके पति ने उस पर दूसरी पत्नी को विवाह करके लाया हो।
प्रश्न 578
इनमें से अर्थालंकार नहीं है
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न 579
हरिनी के नैंनानु तें हरिनी के ये नैन'
- उक्त काव्य पंक्ति में किन अलंकारों का प्रयोग हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
'हरिनी के नैंनानु तें हरिनी के ये नैन' पंक्ति में यमक और प्रतीप अलंकार हैं। इसलिए विकल्प 4 सही है।
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यमक: यहाँ 'हरिनी' शब्द दो बार आया है। पहले 'हरिनी' का अर्थ हिरण है, जबकि दूसरे 'हरिनी' का अर्थ हिरणी के समान सुंदर नेत्रों वाली नायिका है। जब एक शब्द दो या दो से अधिक बार आए और हर बार उसका अर्थ भिन्न हो, तो यमक अलंकार होता है।
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प्रतीप: प्रतीप अलंकार में उपमान को उपमेय बना दिया जाता है। यहाँ हिरणी के नेत्रों को नायिका के नेत्रों के समान न बताकर, नायिका के नेत्रों को हिरणी के नेत्रों के समान बताया जा रहा है। अर्थात उपमान (हिरणी के नेत्र) को उपमेय (नायिका के नेत्र) के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसलिए यहाँ प्रतीप अलंकार है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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विकल्प 1 (यमक - श्लेष): यमक तो है, लेकिन श्लेष नहीं है। श्लेष अलंकार में एक शब्द के कई अर्थ होते हैं, जो यहाँ नहीं है।
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विकल्प 2 (यमक - उपमा): यमक तो है, लेकिन उपमा नहीं है। उपमा अलंकार में दो वस्तुओं की समानता बताई जाती है, जबकि यहाँ उपमान को उपमेय बना दिया गया है, जो प्रतीप अलंकार का लक्षण है।
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विकल्प 3 (यमक - वक्रोक्ति): यमक तो है, लेकिन वक्रोक्ति नहीं है। वक्रोक्ति अलंकार में कहने वाला कुछ और अर्थ समझता है और सुनने वाला कुछ और, जो यहाँ नहीं है।
अतः, 'हरिनी के नैंनानु तें हरिनी के ये नैन' पंक्ति में यमक और प्रतीप अलंकार हैं, इसलिए विकल्प 4 (यमक - प्रतीप) सही उत्तर है।
प्रश्न 580
जहाँ कार्य और कारण के बीच संगति का अभाव हो, वहाँ कौन-सा अलंकार माना जाएगा ?
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उत्तर और व्याख्या
जहाँ कार्य और कारण के बीच संगति का अभाव हो, वहाँ असंगति अलंकार माना जाएगा।
असंगति अलंकार क्यों सही है:
असंगति अलंकार की परिभाषा ही यह है कि जहाँ कारण कहीं और हो और कार्य कहीं और हो, यानी कारण और कार्य में संगति या मेल न हो। प्रश्न में भी यही कहा गया है कि कार्य और कारण के बीच संगति का अभाव हो। इसलिए, असंगति अलंकार बिल्कुल सटीक बैठता है। उदाहरण के लिए, "हृदय घाव मेरे, पीर रघुवीरै" - घाव हृदय में है, लेकिन पीड़ा रघुवीर को हो रही है। यहाँ कारण (घाव) और कार्य (पीड़ा) अलग-अलग स्थानों पर हैं, इसलिए असंगति अलंकार है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
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विरोधाभास: विरोधाभास अलंकार में वास्तव में विरोध नहीं होता, बल्कि विरोध का आभास होता है। दो विरोधी बातें एक साथ कही जाती हैं, लेकिन उनका अर्थ गहरा होता है। प्रश्न में कार्य और कारण के बीच केवल संगति के अभाव की बात है, विरोध की नहीं।
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दीपक: दीपक अलंकार में एक ही शब्द या वाक्यांश का प्रयोग कई वाक्यों में किया जाता है, जिससे सभी वाक्य प्रकाशित हो जाते हैं। इसका कार्य और कारण के संगति या असंगति से कोई संबंध नहीं है।
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विभावना: विभावना अलंकार में कारण के अभाव में भी कार्य का होना दिखाया जाता है। जैसे, "बिनु पग चलै सुनै बिनु काना"। यहाँ बिना पैर के चलने और बिना कान के सुनने की बात है। प्रश्न में कारण का अभाव नहीं, बल्कि कारण और कार्य के बीच संगति का अभाव है।
इसलिए, स्पष्ट रूप से असंगति अलंकार ही सही उत्तर है क्योंकि यह कार्य और कारण के बीच संगति के अभाव को दर्शाता है, जैसा कि प्रश्न में पूछा गया है।