HTET परीक्षा - Level 3 PGT - हिंदी
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 3 PGT की तैयारी
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 601
‘चंद्र ते लजात जलजात जग जानत है।
आज जलजात ते लजात चंद देखौ मैं।।’
प्रस्तुत पंक्तियों में अलंकार है :
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उत्तर और व्याख्या
प्रस्तुत पंक्तियों में अलंकार 'विभावना' है। विभावना अलंकार का प्रयोग तब होता है जब किसी वस्तु या स्थिति को उसके विपरीत रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यहाँ पर चंद्रमा और जलजात (कमल) के बीच एक विपरीत स्थिति को दर्शाया गया है। सामान्यतः चंद्रमा की शीतलता और प्रकाश से जलजात (कमल) खिलता है, लेकिन यहाँ पर यह कहा गया है कि जलजात के सामने चंद्रमा लज्जित हो रहा है। यह एक असंभव स्थिति है, जो विभावना अलंकार का उदाहरण है।
अब अन्य विकल्पों की चर्चा करते हैं:
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दीपक अलंकार: यह तब होता है जब किसी वस्तु की विशेषता को दूसरी वस्तु पर आरोपित किया जाता है। यहाँ ऐसा कोई आरोपण नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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उत्प्रेक्षा अलंकार: यह तब होता है जब किसी वस्तु की तुलना किसी अन्य वस्तु से की जाती है और यह संभावना व्यक्त की जाती है कि दोनों वस्तुएं समान हो सकती हैं। यहाँ पर कोई तुलना या संभावना व्यक्त नहीं की गई है, इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
-
वक्रोक्ति अलंकार: यह तब होता है जब किसी बात को घुमा-फिराकर कहा जाता है। यहाँ पर ऐसा कोई घुमावदार कथन नहीं है, इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
इस प्रकार, प्रस्तुत पंक्तियों में विभावना अलंकार का प्रयोग किया गया है, जो विकल्प 2 को सही ठहराता है।
प्रश्न 602
जब प्रस्तुत (उपमेय) एवं अप्रस्तुत (उपमान) का एक धर्म कथन किया जाये, तो कौन-सा अलंकार होगा ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: जब प्रस्तुत (उपमेय) एवं अप्रस्तुत (उपमान) का एक धर्म कथन किया जाये, तो कौन-सा अलंकार होगा?
सही उत्तर: विकल्प 3 (दीपक)
विस्तृत व्याख्या:
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दीपक अलंकार: दीपक अलंकार वह अलंकार है जिसमें एक ही धर्म (गुण या विशेषता) को प्रस्तुत (उपमेय) और अप्रस्तुत (उपमान) दोनों के लिए कहा जाता है। इस अलंकार में एक गुण का वर्णन किया जाता है जो दोनों वस्तुओं में समान रूप से पाया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि कहा जाए कि "चंद्रमा और मुख दोनों ही शीतलता से भरे हैं", तो यहाँ शीतलता का गुण दोनों के लिए समान रूप से लागू होता है। इस प्रकार, जब प्रस्तुत और अप्रस्तुत का एक ही धर्म कथन किया जाता है, तो वह दीपक अलंकार कहलाता है।
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अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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रूपक: रूपक अलंकार में उपमेय और उपमान के बीच इतनी समानता होती है कि उपमेय को उपमान के रूप में ही प्रस्तुत किया जाता है। उदाहरण के लिए, "तुम चंद्रमा हो" में व्यक्ति को चंद्रमा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यहाँ एक धर्म का कथन नहीं होता, बल्कि उपमेय को उपमान के रूप में ही देखा जाता है।
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उपमा: उपमा अलंकार में उपमेय और उपमान के बीच तुलना की जाती है और 'जैसे', 'तैसे', 'समान' आदि शब्दों का प्रयोग होता है। उदाहरण के लिए, "तुम चंद्रमा के समान सुंदर हो"। यहाँ स्पष्ट तुलना होती है, न कि एक धर्म का कथन।
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दृष्टांत: दृष्टांत अलंकार में किसी बात को स्पष्ट करने के लिए उदाहरण दिया जाता है। यह उपमेय और उपमान के बीच समानता दिखाने के लिए होता है, लेकिन यह एक धर्म का कथन नहीं होता।
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इस प्रकार, जब प्रस्तुत और अप्रस्तुत का एक धर्म कथन किया जाता है, तो वह दीपक अलंकार होता है, और इसलिए विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 603
असंगत विकल्प चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
असंगत विकल्प चुनिए :
Options:
- उपमा अलंकार को राजशेखर अलंकारों का 'शिरोरत्न' कहते हैं।
- उपमेय के अन्तर्गत अप्रस्तुत वस्तु वर्णन किया जाता है।
- “जनम सिंधु पुनि बंधु विष दिन मलीन सकलंक।
सिय मुख समता पाव किमि चंद बापुरो रंक।।”
में व्यतिरेक अलंकार है। - “कोटि जतन कोउ करै, परै न प्रकृतिहिं बीच।
नलबलजल ऊँचो चढ़े, अंत नीच को नीच।।”
में अर्थान्तरन्यास अलंकार है।
Correct Answer: Option 2
Explanation:
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Option 1: "उपमा अलंकार को राजशेखर अलंकारों का 'शिरोरत्न' कहते हैं।" - यह कथन सही है क्योंकि उपमा अलंकार को साहित्य में विशेष महत्व दिया गया है और इसे अलंकारों का 'शिरोरत्न' कहा जाता है। यह उपमेय और उपमान के बीच समानता स्थापित करता है।
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Option 2: "उपमेय के अन्तर्गत अप्रस्तुत वस्तु वर्णन किया जाता है।" - यह कथन असंगत है क्योंकि उपमेय वह वस्तु होती है जिसकी तुलना की जाती है, जबकि अप्रस्तुत वस्तु वर्णन का संबंध अन्य अलंकारों से होता है, जैसे कि रूपक या अन्य। उपमेय में अप्रस्तुत वस्तु का वर्णन नहीं किया जाता है, बल्कि यह उपमान के साथ तुलना के लिए प्रयुक्त होता है।
-
Option 3: "“जनम सिंधु पुनि बंधु विष दिन मलीन सकलंक। सिय मुख समता पाव किमि चंद बापुरो रंक।।” में व्यतिरेक अलंकार है।" - यह कथन सही है क्योंकि इस पंक्ति में व्यतिरेक अलंकार का प्रयोग हुआ है, जहाँ चंद्रमा की तुलना सीता के मुख से की गई है और चंद्रमा को रंक कहा गया है।
-
Option 4: "“कोटि जतन कोउ करै, परै न प्रकृतिहिं बीच। नलबलजल ऊँचो चढ़े, अंत नीच को नीच।।” में अर्थान्तरन्यास अलंकार है।" - यह कथन सही है क्योंकि इस पंक्ति में अर्थान्तरन्यास अलंकार का प्रयोग हुआ है, जहाँ एक विचार को स्पष्ट करने के लिए दूसरा विचार प्रस्तुत किया गया है।
इस प्रकार, Option 2 असंगत है क्योंकि यह उपमेय की परिभाषा के विपरीत है।
प्रश्न 604
निम्न कथनों पर विचार करते हुए असंगत कथन छाँटिए :
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 3 को सही उत्तर के रूप में समर्थन करने के लिए निम्नलिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया गया है:
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विकल्प 1: "विभावना विरोधमूलक अलंकार है।"
- विभावना अलंकार का संबंध किसी वस्तु या व्यक्ति के गुणों को विशेष रूप से उभारने से होता है। यह विरोधमूलक नहीं होता, बल्कि यह किसी वस्तु के गुणों को विशेष रूप से दर्शाने के लिए प्रयुक्त होता है। अतः यह कथन सही है और असंगत नहीं है।
-
विकल्प 2: "‘राम नाम सुंदर करतारी, संशय बिहग उड़ावनहारी’ पंक्ति में परंपरित रूपक अलंकार है।"
- इस पंक्ति में 'राम नाम' को 'सुंदर करतारी' और 'संशय बिहग उड़ावनहारी' के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो रूपक अलंकार का एक उदाहरण है। रूपक अलंकार में उपमेय और उपमान के बीच सीधा संबंध होता है। अतः यह कथन सही है और असंगत नहीं है।
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विकल्प 3: "‘मनो कठिन आँगन चली, ताते राते पाँव।’ पंक्ति में वस्तूत्प्रेक्षा अलंकार है।"
- इस पंक्ति में वस्तूत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग नहीं है। वस्तूत्प्रेक्षा अलंकार में किसी वस्तु की कल्पना की जाती है जो वास्तव में संभव नहीं होती। यहाँ पर 'मनो कठिन आँगन चली' का अर्थ है कि मन कठिन आँगन में चल रहा है, जो एक प्रकार की अतिशयोक्ति है और वस्तूत्प्रेक्षा नहीं है। इसलिए यह कथन असंगत है।
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विकल्प 4: "उपमान की अपेक्षा उपमेय के गुणोत्कर्ष वर्णन को व्यतिरेक अलंकार कहा जाता है।"
- व्यतिरेक अलंकार में उपमेय के गुणों की तुलना उपमान से की जाती है और उपमेय को श्रेष्ठ दिखाया जाता है। यह कथन सही है और व्यतिरेक अलंकार की परिभाषा के अनुरूप है। अतः यह कथन असंगत नहीं है।
इस प्रकार, विकल्प 3 असंगत है क्योंकि इसमें वस्तूत्प्रेक्षा अलंकार का गलत संदर्भ दिया गया है।
प्रश्न 605
इनमें से कौन-सा समास-विग्रह सही है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न 606
ऊसर में बीज बोना' मुहावरे का सही अर्थ है
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न 607
तेरे दिमाग में तो लोहा भरा है! विद्या का ताप कहाँ लगेगा इसमें ।' त्रिलोक सिंह के इस कथन को लेखक ने क्या कहा है ?
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उत्तर और व्याख्या
'जबान का चाबुक' त्रिलोक सिंह के कथन को लेखक द्वारा कहे जाने का सबसे उपयुक्त कारण यह है कि यह कथन कठोर और व्यंग्यात्मक है। "तेरे दिमाग में तो लोहा भरा है! विद्या का ताप कहाँ लगेगा इसमें" यह वाक्य सीधे तौर पर बच्चे की बुद्धि को कम आंक रहा है और उसे ताना मार रहा है। 'जबान का चाबुक' एक ऐसा मुहावरा है जो कठोर और चुभने वाली बातों को दर्शाता है, जो किसी को मानसिक रूप से आहत कर सकती हैं। त्रिलोक सिंह का कथन ठीक इसी प्रकार का है, इसलिए लेखक ने इसे 'जबान का चाबुक' कहा।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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सर्जन की चमक: 'सर्जन की चमक' का अर्थ है किसी कार्य को कुशलतापूर्वक और निपुणता से करना। त्रिलोक सिंह के कथन में ऐसी कोई कुशलता या निपुणता नहीं है; यह केवल एक कठोर टिप्पणी है। इसलिए यह विकल्प गलत है।
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जबान की धार: 'जबान की धार' का अर्थ है बोलने में तेज होना या वाक्पटु होना। त्रिलोक सिंह का कथन तेज तो है, लेकिन इसका उद्देश्य वाक्पटुता दिखाना नहीं, बल्कि बच्चे को नीचा दिखाना है। इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
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जबान की तलवार: 'जबान की तलवार' का अर्थ है ऐसी बातें जो बहुत तीखी और हानिकारक हों। जबकि त्रिलोक सिंह का कथन हानिकारक तो है, 'जबान का चाबुक' अधिक सटीक रूप से उस कठोरता और व्यंग्य को दर्शाता है जो इस कथन में निहित है। 'तलवार' की तुलना में 'चाबुक' अधिक व्यक्तिगत और सीधा प्रहार करता है, जो इस कथन के भाव को बेहतर ढंग से व्यक्त करता है। इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
अतः, 'जबान का चाबुक' ही त्रिलोक सिंह के कथन के लिए सबसे उपयुक्त वर्णन है।
प्रश्न 608
कहाँ चले तुम राम नाम का 'पीतांबर' तन पर डाले - वाक्य में रेखांकित पद में कौन-सा समास है ?
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उत्तर और व्याख्या
'पीतांबर' शब्द में कर्मधारय समास है, क्योंकि:
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कर्मधारय समास की परिभाषा: कर्मधारय समास में एक पद विशेषण होता है और दूसरा पद विशेष्य। विशेषण विशेष्य की विशेषता बताता है।
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'पीतांबर' शब्द का विग्रह: 'पीतांबर' का विग्रह है 'पीत है जो अंबर' अर्थात 'पीला वस्त्र'। यहाँ 'पीत' (पीला) विशेषण है और 'अंबर' (वस्त्र) विशेष्य है। 'पीत' शब्द 'अंबर' की विशेषता बता रहा है कि अंबर कैसा है - पीला है। इसलिए यह कर्मधारय समास का उदाहरण है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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बहुव्रीहि समास: बहुव्रीहि समास में कोई भी पद प्रधान नहीं होता, बल्कि पूरा पद मिलकर किसी तीसरे पद की ओर संकेत करता है। 'पीतांबर' शब्द किसी तीसरे पद की ओर संकेत नहीं कर रहा है, बल्कि पीले वस्त्र का सामान्य अर्थ दे रहा है। इसलिए यह बहुव्रीहि समास नहीं है।
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द्वन्द्व समास: द्वन्द्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं और 'और' या 'तथा' जैसे शब्दों से जुड़े होते हैं। 'पीतांबर' में ऐसा कुछ नहीं है। इसलिए यह द्वन्द्व समास नहीं है।
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तत्पुरुष समास: तत्पुरुष समास में उत्तर पद प्रधान होता है और पूर्व पद किसी कारक चिह्न से जुड़ा होता है। 'पीतांबर' में ऐसा कोई कारक चिह्न नहीं है और न ही उत्तर पद प्रधान है। इसलिए यह तत्पुरुष समास नहीं है।
अतः, 'पीतांबर' शब्द में कर्मधारय समास ही सही उत्तर है क्योंकि यह विशेषण-विशेष्य संबंध को दर्शाता है।
प्रश्न 609
निम्नलिखित लेखक मण्डल में किसकी भाषा चुटीली और मुहावरेदार है ?
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उत्तर और व्याख्या
इंशाअल्ला खाँ की भाषा चुटीली और मुहावरेदार है, इसका कारण यह है कि उन्होंने अपनी रचनाओं में बोलचाल की भाषा का भरपूर प्रयोग किया। उनकी प्रसिद्ध रचना "रानी केतकी की कहानी" में हास्य और व्यंग्य का पुट है, जो उनकी भाषा को विशेष रूप से चुटीला बनाता है। उन्होंने मुहावरों और लोकोक्तियों का प्रयोग करके भाषा को जीवंत और आकर्षक बनाया। उनकी भाषा में एक खास तरह की चुलबुलाहट और मस्ती है, जो पाठकों को बांधे रखती है।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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सदासुखलाल: सदासुखलाल की भाषा में गंभीरता और पंडिताऊपन अधिक है। उनकी भाषा में तत्सम शब्दों का प्रयोग अधिक होता है, जिसके कारण वह इंशाअल्ला खाँ की तुलना में कम चुटीली और मुहावरेदार है।
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लल्लूलाल: लल्लूलाल की भाषा सरल और सुबोध है, लेकिन उसमें इंशाअल्ला खाँ जैसी चुटीलापन और मुहावरेदारी का अभाव है। उन्होंने "प्रेम सागर" जैसी रचनाओं में सरल भाषा का प्रयोग किया, लेकिन उनकी भाषा में वह व्यंग्य और हास्य नहीं है जो इंशाअल्ला खाँ की भाषा में मिलता है।
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सदल मिश्र: सदल मिश्र की भाषा में पूर्वी बोली का प्रभाव है। उनकी भाषा में सरलता और स्पष्टता है, लेकिन उसमें इंशाअल्ला खाँ जैसी चुटीलापन और मुहावरेदारी नहीं है। उनकी भाषा में स्थानीय शब्दों का प्रयोग अधिक होता है, लेकिन वह इंशाअल्ला खाँ की तरह मुहावरों और लोकोक्तियों का प्रयोग करके भाषा को विशेष रूप से आकर्षक नहीं बनाते।
इसलिए, इंशाअल्ला खाँ ही वह लेखक हैं जिनकी भाषा चुटीली और मुहावरेदार है।
प्रश्न 610
समास-विग्रह की दृष्टि से असंगत विकल्प को चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
समास-विग्रह की दृष्टि से असंगत विकल्प मरणोपरांत - मरने तक है, क्योंकि:
- मरणोपरांत का सही समास-विग्रह मरण के उपरांत (मृत्यु के बाद) होता है। "मरने तक" इसका सही विग्रह नहीं है। "मरने तक" का भाव "आमरण" या "जीवनपर्यंत" जैसे शब्दों में आता है। इसलिए, यह विकल्प असंगत है।
अन्य विकल्प क्यों असंगत नहीं हैं:
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दरहक़ीक़त - हक़ीक़त में: यह समास-विग्रह सही है। "दरहक़ीक़त" का अर्थ "वास्तव में" या "हक़ीक़त में" होता है।
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सानुज - अनुज के साथ: यह समास-विग्रह भी सही है। "सानुज" का अर्थ "अनुज (छोटे भाई) के साथ" होता है।
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अनुरूप - जैसा रूप है वैसा: यह समास-विग्रह भी सही है। "अनुरूप" का अर्थ "रूप के अनुसार" या "जैसा रूप है वैसा" होता है।
इसलिए, केवल मरणोपरांत - मरने तक ही गलत समास-विग्रह है, जो इसे असंगत विकल्प बनाता है।
प्रश्न 611
समास की दृष्टि से असंगत को चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
रणविमुख - करण तत्पुरुष, समास की दृष्टि से असंगत है क्योंकि 'रणविमुख' का समास विग्रह 'रण से विमुख' होता है। 'से' अपादान कारक का विभक्ति चिह्न है, जो अलग होने या दूर होने का भाव दर्शाता है। इसलिए, यह अपादान तत्पुरुष समास का उदाहरण है, न कि करण तत्पुरुष का। करण तत्पुरुष में 'से' या 'के द्वारा' विभक्ति चिह्न का प्रयोग साधन या माध्यम के अर्थ में होता है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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जातिगत - कर्म तत्पुरुष: 'जातिगत' का समास विग्रह 'जाति को गत' हो सकता है, जहाँ 'को' कर्म कारक का विभक्ति चिह्न है। इसलिए यह कर्म तत्पुरुष समास है।
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वनमानुष - लुप्तपद तत्पुरुष: 'वनमानुष' का समास विग्रह 'वन में रहने वाला मानुष' हो सकता है, जहाँ बीच का पद लुप्त है। इसलिए यह लुप्तपद तत्पुरुष समास है।
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ख़ुशनसीब - कर्मधारय: 'ख़ुशनसीब' का समास विग्रह 'खुश है जो नसीब' हो सकता है, जहाँ विशेषण-विशेष्य संबंध है। इसलिए यह कर्मधारय समास है।
अतः, केवल 'रणविमुख' का समास विग्रह और तत्पुरुष भेद गलत दिया गया है, इसलिए यही असंगत है।
प्रश्न 612
तथागति' शब्द में समास है :
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उत्तर और व्याख्या
'तथागति' शब्द में अव्ययीभाव समास है, क्योंकि:
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अव्ययीभाव समास की परिभाषा: अव्ययीभाव समास में पहला पद अव्यय होता है और वह प्रधान होता है। समस्त पद भी अव्यय की तरह काम करता है।
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'तथागति' का विश्लेषण: 'तथागति' शब्द 'तथा' (अव्यय) और 'गति' के मेल से बना है। यहाँ 'तथा' अव्यय है और इसका अर्थ 'उस प्रकार' या 'वैसी' है। 'तथा' अव्यय 'गति' शब्द के साथ मिलकर पूरे पद को अव्यय बना रहा है, जिसका अर्थ है 'वैसी गति' या 'उसी प्रकार की गति'।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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तत्पुरुष समास: तत्पुरुष समास में दूसरा पद प्रधान होता है और कारक चिह्नों का लोप होता है। 'तथागति' में ऐसा कुछ नहीं है। कारक चिह्नों का लोप नहीं हो रहा है और न ही दूसरा पद प्रधान है।
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द्विगु समास: द्विगु समास में पहला पद संख्यावाची होता है और समूह का बोध कराता है। 'तथागति' में कोई संख्यावाची शब्द नहीं है।
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बहुव्रीहि समास: बहुव्रीहि समास में कोई भी पद प्रधान नहीं होता, बल्कि समस्त पद किसी तीसरे अर्थ की ओर संकेत करता है। 'तथागति' किसी तीसरे अर्थ की ओर संकेत नहीं करता, बल्कि एक विशेष प्रकार की गति को दर्शाता है।
इसलिए, 'तथागति' शब्द में अव्ययीभाव समास ही सही उत्तर है, क्योंकि यह अव्ययीभाव समास की परिभाषा और विशेषताओं को पूरी तरह से संतुष्ट करता है।
प्रश्न 613
इनमें से किस लोकोक्ति/मुहावरे का अर्थ उपयुक्त नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 1 सही है क्योंकि लोकोक्ति ‘एक हाथ से ताली नहीं बजती’ का अर्थ ‘असंभव कार्य कर देना’ नहीं होता। इसका सही अर्थ है कि झगड़ा या विवाद कभी भी एक तरफ से नहीं होता, बल्कि दोनों पक्षों की गलती होती है। असंभव कार्य कर देना के लिए उपयुक्त मुहावरा "आसमान से तारे तोड़ना" हो सकता है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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Option 2: ‘नेकी कर दरिया में डाल’ - भला करके भूल जाना चाहिए: यह बिल्कुल सही अर्थ है। इसका मतलब है कि किसी की मदद करने के बाद उसके बारे में सोचना नहीं चाहिए, फल की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए।
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Option 3: ‘उड़ती चिड़िया पहचानना’ - इशारे से ही गूढ़ बात जान लेना: यह भी सही अर्थ है। इसका मतलब है कि बहुत चतुर और अनुभवी होना, जो छिपी हुई बातों को भी आसानी से समझ ले।
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Option 4: ‘पांव में शनिचर होना’ - एक स्थान पर स्थिर न रहना: यह भी सही अर्थ है। इसका मतलब है कि व्यक्ति का स्वभाव घुमक्कड़ है और वह एक जगह पर टिक कर नहीं रह सकता।
इसलिए, केवल Option 1 में दिया गया अर्थ गलत है, जो इसे सही उत्तर बनाता है।
प्रश्न 614
इनमें से किस सामासिक पद में द्वंद्व समास नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 2 सही उत्तर है क्योंकि 'धीरे-धीरे' एक अव्ययीभाव समास है। द्वंद्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं और 'और' या 'तथा' जैसे योजक शब्दों का लोप होता है। 'भाई-बहन', 'पाप-पुण्य', और 'दाल-रोटी' सभी द्वंद्व समास के उदाहरण हैं क्योंकि इनमें दोनों पद प्रधान हैं और उन्हें 'और' से जोड़ा जा सकता है (जैसे, भाई और बहन, पाप और पुण्य, दाल और रोटी)।
'धीरे-धीरे' में, 'धीरे' शब्द की पुनरावृत्ति हो रही है और यह एक क्रियाविशेषण के रूप में कार्य कर रहा है, जो अव्ययीभाव समास की विशेषता है। अव्ययीभाव समास में पहला पद अव्यय होता है और समस्त पद भी अव्यय की तरह कार्य करता है। इसलिए, 'धीरे-धीरे' द्वंद्व समास नहीं है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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भाई-बहन: यह द्वंद्व समास है क्योंकि इसमें 'भाई' और 'बहन' दोनों पद प्रधान हैं और 'और' से जुड़े हैं (भाई और बहन)।
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पाप-पुण्य: यह भी द्वंद्व समास है क्योंकि 'पाप' और 'पुण्य' दोनों पद प्रधान हैं और 'और' से जुड़े हैं (पाप और पुण्य)।
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दाल-रोटी: यह द्वंद्व समास है क्योंकि 'दाल' और 'रोटी' दोनों पद प्रधान हैं और 'और' से जुड़े हैं (दाल और रोटी)।
प्रश्न 615
किस सामासिक पद का विग्रह सही नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
शोकाकुल = शोक में आकुल - यह विग्रह सही नहीं है क्योंकि 'शोकाकुल' का सही विग्रह 'शोक से आकुल' होना चाहिए। 'में' विभक्ति अधिकरण कारक को दर्शाती है, जो स्थान या समय का बोध कराती है। जबकि 'से' विभक्ति करण कारक को दर्शाती है, जो साधन या माध्यम का बोध कराती है। शोकाकुल होने में शोक एक साधन है, इसलिए 'से' विभक्ति का प्रयोग उचित है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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यथामति = मति के अनुसार - यह विग्रह सही है। 'यथामति' अव्ययीभाव समास का उदाहरण है, जिसका अर्थ है 'मति के अनुसार'।
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देहलता = देह रूपी लता - यह विग्रह सही है। 'देहलता' कर्मधारय समास का उदाहरण है, जिसमें देह को लता के समान बताया गया है।
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प्रयोगशाला = प्रयोग के लिए शाला - यह विग्रह सही है। 'प्रयोगशाला' तत्पुरुष समास का उदाहरण है, जिसमें 'प्रयोग के लिए शाला' का अर्थ है 'प्रयोग करने के लिए स्थान'।
प्रश्न 616
मियाँ की जूती मियाँ के सिर' – लोकोक्ति का उपयुक्त भावार्थ होगा :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'मियाँ की जूती मियाँ के सिर' लोकोक्ति का उपयुक्त भावार्थ "किसी को उसी की चाल से हराना" है, क्योंकि:
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Option 1 सही क्यों है: यह लोकोक्ति उस स्थिति को दर्शाती है जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ उसी रणनीति या तरीके का उपयोग करता है जो दूसरा व्यक्ति पहले इस्तेमाल कर रहा था, और परिणामस्वरूप उसे हरा देता है। "मियाँ की जूती मियाँ के सिर" का शाब्दिक अर्थ है कि मियाँ की जूती (जो मियाँ की ही है) मियाँ के सिर पर मारना, यानी मियाँ को उसी के सामान से चोट पहुँचाना। यह सीधे तौर पर "किसी को उसी की चाल से हराना" के भाव को व्यक्त करता है।
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अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
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Option 2 (सीधेपन से काम नहीं चलता): यह लोकोक्ति सीधेपन या चालाकी के बारे में नहीं है, बल्कि यह उस स्थिति के बारे में है जहाँ किसी की अपनी रणनीति उसके खिलाफ इस्तेमाल की जाती है।
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Option 3 (उचित न्याय करना): यह लोकोक्ति न्याय या निष्पक्षता के बारे में नहीं है। यह किसी को हराने या मात देने के बारे में है।
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Option 4 (आश्रयदाता पर ही रोब जमाना): यह लोकोक्ति आश्रयदाता पर रोब जमाने के बारे में नहीं है, बल्कि यह किसी को उसी के तरीके से हराने के बारे में है। आश्रयदाता और आश्रित का संबंध यहाँ प्रासंगिक नहीं है।
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प्रश्न 617
निम्न में से कौन-सा सामासिक-युग्म सुमेलित नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 2 सही है क्योंकि "सहस्राब्दी" शब्द का समास विग्रह "एक हजार वर्षों का समूह" होता है। यह एक संख्यावाची शब्द है और समूह का बोध कराता है, इसलिए यह द्विगु समास का उदाहरण है, न कि कर्मधारय समास का। कर्मधारय समास में विशेषण-विशेष्य या उपमेय-उपमान का संबंध होता है, जो कि "सहस्राब्दी" में नहीं है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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हृषीकेश - बहुव्रीहि समास: "हृषीकेश" का अर्थ है "इंद्रियों के स्वामी" (विष्णु)। यह एक ऐसा शब्द है जो एक विशेष अर्थ रखता है और किसी तीसरे व्यक्ति (विष्णु) की ओर संकेत करता है। बहुव्रीहि समास में, समस्त पद अपने घटकों के अर्थ से भिन्न एक विशेष अर्थ देता है। इसलिए यह विकल्प सही है।
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भाषाधिकार - तत्पुरुष समास: "भाषाधिकार" का समास विग्रह "भाषा का अधिकार" होता है। इसमें 'का' संबंध कारक का लोप हुआ है, जो कि तत्पुरुष समास की विशेषता है। इसलिए यह विकल्प सही है।
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अनुगुण - अव्ययीभाव समास: "अनुगुण" का अर्थ है "गुणों के अनुसार"। इसमें 'अनु' उपसर्ग लगा है, जो कि अव्ययीभाव समास की पहचान है। अव्ययीभाव समास में पहला पद अव्यय होता है और समस्त पद भी अव्यय की तरह कार्य करता है। इसलिए यह विकल्प सही है।
इसलिए, केवल Option 2, "सहस्राब्दी - कर्मधारय समास" गलत है, क्योंकि "सहस्राब्दी" द्विगु समास का उदाहरण है।
प्रश्न 618
मन चंगा तो कठौती में गंगा' उक्त लोकोक्ति का उचित भावार्थ चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'मन चंगा तो कठौती में गंगा' उक्त लोकोक्ति का उचित भावार्थ मन की शांति एवं पवित्रता ही सर्वानन्द है है, क्योंकि:
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Option 2 सही क्यों है: यह लोकोक्ति इस बात पर जोर देती है कि यदि आपका मन शुद्ध और पवित्र है, तो आपको तीर्थ यात्रा करने या गंगा नदी में स्नान करने की आवश्यकता नहीं है। आपकी आंतरिक शांति और पवित्रता ही सबसे महत्वपूर्ण है और वही आपको आनंद प्रदान करती है। 'कठौती' एक छोटा सा बर्तन होता है, और इस लोकोक्ति में इसका उपयोग यह दर्शाने के लिए किया गया है कि यदि आपका मन शुद्ध है, तो आपको गंगा जैसी पवित्र नदी का अनुभव एक छोटे से बर्तन में भी हो सकता है। यह बाहरी कर्मकांडों की तुलना में आंतरिक शुद्धता के महत्व को दर्शाता है।
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अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
- Option 1 (सामर्थ्य से अधिक बात करना): यह लोकोक्ति किसी की क्षमता से बढ़कर बोलने के बारे में नहीं है। यह आंतरिक शुद्धता और शांति के महत्व पर केंद्रित है।
- Option 3 (मन निरन्तर अस्थिर रहना): यह लोकोक्ति मन की अस्थिरता के बारे में नहीं है, बल्कि मन की स्थिरता और पवित्रता के बारे में है।
- Option 4 (मजबूर होकर काम करना): यह लोकोक्ति किसी काम को मजबूरी में करने के बारे में नहीं है। यह आंतरिक शांति और पवित्रता के महत्व पर केंद्रित है।
इसलिए, 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' लोकोक्ति का सबसे उपयुक्त भावार्थ मन की शांति एवं पवित्रता ही सर्वानन्द है है।
प्रश्न 619
डेढ़ चावल की खिचड़ी पकाना' उक्त मुहावरा किस अर्थ को प्रकट करता है ?
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उत्तर और व्याख्या
'डेढ़ चावल की खिचड़ी पकाना' मुहावरे का अर्थ 'बहुमत से अलग रहना' है, क्योंकि:
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Option 1 सही क्यों है: यह मुहावरा उस व्यक्ति या समूह को दर्शाता है जो अपने विचारों, कार्यों या तौर-तरीकों में दूसरों से अलग चलता है। 'डेढ़ चावल की खिचड़ी' का तात्पर्य है कि वह व्यक्ति या समूह एक अलग और संभवतः अपूर्ण या असामान्य तरीके से काम कर रहा है, जो सामान्य बहुमत से भिन्न है। यह अलगाव और असहमति को दर्शाता है।
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अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
- Option 2 (किसी का शासन होना): यह मुहावरा किसी के शासन या प्रभुत्व को नहीं दर्शाता है। इसका संबंध व्यक्तिगत या सामूहिक भिन्नता से है, न कि शासन व्यवस्था से।
- Option 3 (आय के अनुसार व्यय): यह मुहावरा वित्तीय प्रबंधन या मितव्ययिता से संबंधित नहीं है। इसका संबंध विचारों और कार्यों में अलगाव से है।
- Option 4 (किसी के वश में होना): यह मुहावरा किसी के नियंत्रण या अधीनता को नहीं दर्शाता है। यह स्वतंत्रता और अलगाव को दर्शाता है, भले ही वह अलगाव असामान्य हो।
इसलिए, 'डेढ़ चावल की खिचड़ी पकाना' मुहावरे का सबसे सटीक अर्थ 'बहुमत से अलग रहना' ही है।
प्रश्न 620
समास-विग्रह की दृष्टि से असंगत विकल्प का चयन कीजिए :
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उत्तर और व्याख्या
समास-विग्रह की दृष्टि से असंगत विकल्प जितेन्द्रिय - जीत को प्राप्त करना है, क्योंकि:
- जितेन्द्रिय का सही समास-विग्रह होगा - इन्द्रियों को जीतने वाला। यहाँ 'जीत को प्राप्त करना' गलत है क्योंकि यह समास के अर्थ को सही ढंग से व्यक्त नहीं करता। जितेन्द्रिय का अर्थ है जिसने अपनी इन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर ली हो, न कि जिसने किसी 'जीत' को प्राप्त किया हो। इसलिए, यह विकल्प असंगत है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
- ध्यानातीत - ध्यान को अतीत करके: यह समास-विग्रह सही है। 'ध्यानातीत' का अर्थ है ध्यान से परे या ध्यान से ऊपर। 'ध्यान को अतीत करके' इस अर्थ को दर्शाता है।
- गृहागत - गृह को आगत: यह समास-विग्रह भी सही है। 'गृहागत' का अर्थ है घर को आया हुआ। 'गृह को आगत' इस अर्थ को दर्शाता है।
- जेबकतरा - जेब को कतरने/काटने वाला: यह समास-विग्रह भी सही है। 'जेबकतरा' का अर्थ है जेब को काटने वाला। 'जेब को कतरने/काटने वाला' इस अर्थ को दर्शाता है।
इसलिए, केवल जितेन्द्रिय - जीत को प्राप्त करना ही गलत समास-विग्रह है, जो इसे असंगत विकल्प बनाता है।