HTET परीक्षा - Level 3 PGT - हिंदी
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 3 PGT की तैयारी
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 621
सामासिक पदों की दृष्टि से कौन-सा विकल्प सुमेलित नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
The correct option is 2:
मंदाग्नि का विग्रह मंद है जो अग्नि होता है। इस शब्द में मंद विशेषण है जो अग्नि की विशेषता बता रहा है। व्याकरण के नियमों के अनुसार जहाँ पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य होता है वहाँ कर्मधारय समास होता है। चूँकि विकल्प में इसे तत्पुरुष समास के साथ जोड़ा गया है जो कि मुख्य रूप से कारक चिन्हों के लोप पर आधारित होता है इसलिए यह युग्म गलत है और प्रश्न के अनुसार सही उत्तर है।
The incorrect option is 1:
हृषीकेश शब्द का निर्माण हृषीक और ईश के मेल से हुआ है जिसका शाब्दिक अर्थ इंद्रियों का स्वामी होता है। यहाँ दोनों पद मिलकर किसी तीसरे विशेष अर्थ अर्थात भगवान विष्णु की ओर संकेत कर रहे हैं। बहुव्रीहि समास की यही पहचान है कि इसमें कोई भी पद प्रधान नहीं होता बल्कि पूरा पद किसी अन्य संज्ञा का विशेषण बन जाता है। यहाँ हृषीकेश भगवान विष्णु का रूढ़ नाम है इसलिए यह बहुव्रीहि समास का सटीक उदाहरण है। यह विकल्प व्याकरणिक दृष्टि से सुमेलित है अतः यह उत्तर नहीं हो सकता।
The incorrect option is 3:
उचितानुचित शब्द उचित और अनुचित दो विपरीतार्थक शब्दों के मेल से बना है। जब इसका विग्रह किया जाता है तो उचित या अनुचित शब्द प्राप्त होता है जो वैकल्पिक द्वन्द्व समास की श्रेणी में आता है। द्वन्द्व समास में पूर्व और उत्तर दोनों ही पद प्रधान होते हैं और प्रायः एक-दूसरे के विलोम होते हैं। यहाँ दोनों शब्दों का अपना स्वतंत्र अस्तित्व और महत्व है जो इसे द्वन्द्व समास का उत्तम उदाहरण बनाता है। यह सही सुमेलित विकल्प है इसलिए इसे प्रश्न का उत्तर नहीं माना जाएगा।
The incorrect option is 4:
अनुरूप शब्द में अनु एक अव्यय या उपसर्ग है जो रूप शब्द के साथ जुड़ा हुआ है। अव्ययीभाव समास की प्रमुख विशेषता यह है कि इसका पहला पद अव्यय होता है और वही प्रधान होता है। अनुरूप का समास विग्रह रूप के योग्य होता है जहाँ अनु शब्द क्रिया विशेषण की भाँति कार्य करता है। यह शब्द रूप की योग्यता के भाव को प्रकट करता है जो अव्ययीभाव की परिभाषा पर पूर्णतः खरा उतरता है। व्याकरण के अनुसार यह जोड़ा सही है इसलिए प्रश्न की माँग के अनुसार यह उत्तर नहीं है।
प्रश्न 622
किस विकल्प में मुहावरे का अर्थ सही नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
दिए गए प्रश्न के अनुसार, सही विकल्प का चयन करना है जिसमें मुहावरे का अर्थ सही नहीं दिया गया है।
सही उत्तर: विकल्प 3
विकल्प 3 की विस्तृत व्याख्या (यह सही क्यों है):
मुहावरा है "डेढ़ चावल की खिचड़ी पकाना"।
इस मुहावरे का सही अर्थ होता है: "अपनी अलग राय रखना", "बहुमत से अलग होकर काम करना", या "अपनी मनमानी करना"। यह किसी के नियंत्रण में न होकर स्वतंत्र रूप से कार्य करने या सोचने का भाव व्यक्त करता है।
विकल्प में दिया गया अर्थ है: "किसी के वश में होना"।
यह अर्थ मुहावरे के वास्तविक अर्थ के बिल्कुल विपरीत है। "किसी के वश में होना" का अर्थ है किसी के नियंत्रण में रहना, जबकि "डेढ़ चावल की खिचड़ी पकाना" का अर्थ है स्वतंत्र रूप से कार्य करना या अपनी अलग राय रखना।
चूँकि दिया गया अर्थ मुहावरे के वास्तविक अर्थ से मेल नहीं खाता, इसलिए यह विकल्प सही है क्योंकि इसमें मुहावरे का अर्थ गलत दिया गया है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या (ये गलत क्यों हैं):
-
विकल्प 1: कान खड़े होना – सतर्क होना
- "कान खड़े होना" मुहावरे का अर्थ वास्तव में "सतर्क होना" या "सावधान होना" ही होता है। जब कोई व्यक्ति किसी खतरे या असामान्य स्थिति को भांप लेता है, तो उसके कान खड़े हो जाते हैं।
- चूँकि यहाँ मुहावरे का अर्थ सही दिया गया है, इसलिए यह विकल्प प्रश्न के अनुसार गलत है (क्योंकि प्रश्न गलत अर्थ वाले विकल्प को पूछ रहा है)।
-
विकल्प 2: अंधे के हाथ बटेर लगना – बिना प्रयास के कोई चीज पा लेना
- "अंधे के हाथ बटेर लगना" मुहावरे का अर्थ होता है "अचानक या भाग्यवश कोई मूल्यवान वस्तु मिल जाना", या "बिना किसी योग्यता या प्रयास के कोई बड़ी सफलता मिल जाना"।
- विकल्प में दिया गया अर्थ "बिना प्रयास के कोई चीज पा लेना" इस मुहावरे के अर्थ के बिल्कुल अनुरूप है।
- चूँकि यहाँ मुहावरे का अर्थ सही दिया गया है, इसलिए यह विकल्प प्रश्न के अनुसार गलत है।
-
विकल्प 4: आठवीं अनुसूची में नवीन भाषाओं को शामिल करने से
- यह कोई मुहावरा नहीं है, बल्कि भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची से संबंधित एक तथ्यात्मक वाक्यांश है। इसका मुहावरे और उसके अर्थ से कोई संबंध नहीं है।
- इसलिए, यह विकल्प प्रश्न के संदर्भ में अप्रासंगिक है।
अतः, दिए गए विकल्पों में से केवल विकल्प 3 में मुहावरे का अर्थ सही नहीं दिया गया है।
प्रश्न 623
समास की दृष्टि से संगत कथन नहीं है, उसे छाँटिए
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न 624
‘वनवासी’ शब्द में समास है
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उत्तर और व्याख्या
The correct option is 3:
'वनवासी' शब्द का समास विग्रह करने पर इसका अर्थ होता है 'वन में वास करने वाला', जिसका शाब्दिक अर्थ है 'जंगल में रहने वाला'। व्याकरणिक रूप से, यदि हम इस विग्रह को 'वन में वास' (अधिकरण तत्पुरुष) के रूप में लेते हैं, तो 'तत्पुरुष' समास होना चाहिए।
हालांकि, 'वनवासी' शब्द का प्रयोग अक्सर किसी विशेष व्यक्ति जैसे तपस्वी, साधु, या राम (वन में वास करने वाले) के लिए एक रूढ़ अर्थ (conventional meaning) में किया जाता है, जो इसका तीसरा अर्थ है। जब किसी सामासिक पद में आए हुए दोनों पद प्रधान न होकर कोई तीसरा पद प्रधान होता है और वह समस्त पद किसी तीसरे अर्थ की ओर संकेत करता है, तब वहाँ बहुव्रीहि समास होता है। 'वनवासी' शब्द इस विशिष्ट अर्थ की ओर संकेत करता है, इसलिए परीक्षा के संदर्भ में, यह बहुव्रीहि समास का उदाहरण माना जाता है।
The incorrect option is 1 (द्विग):
द्विगु समास में पहला पद संख्यावाचक होता है और वह किसी समूह या समाहार का बोध कराता है। उदाहरण के लिए 'चौराहा' (चार राहों का समूह)। 'वनवासी' में पहला पद 'वन' है, जो संख्यावाचक नहीं है, बल्कि एक स्थान को दर्शाता है। इसलिए यह द्विगु समास नहीं है।
The incorrect option is 2 (तत्पुरुष):
तत्पुरुष समास में उत्तर पद (दूसरा पद) प्रधान होता है, और इसमें कारक चिह्नों (जैसे को, से, के लिए, में, पर) का लोप होता है। यदि हम केवल 'वन में वास' (वनवास) के अर्थ पर विचार करें, तो अधिकरण तत्पुरुष समास हो सकता है। किंतु, जब कोई शब्द किसी रूढ़ अर्थ (तीसरे अर्थ) के लिए प्रसिद्ध हो जाता है, तो तत्पुरुष से अधिक प्राथमिकता बहुव्रीहि समास को दी जाती है। 'वनवासी' का प्रचलित अर्थ 'वन में रहने वाला व्यक्ति' किसी तीसरे अर्थ की ओर संकेत करता है, इसलिए बहुव्रीहि अधिक सटीक उत्तर है।
The incorrect option is 4 (कर्मधारय):
कर्मधारय समास में पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य होता है, या एक उपमान और दूसरा उपमेय होता है। यह विशेषण-विशेष्य संबंध को दर्शाता है। उदाहरण के लिए 'नीलकमल' (नीला है जो कमल)। 'वनवासी' में विशेषण-विशेष्य का संबंध नहीं है; यह 'वन' और 'वासी' के संबंध को दर्शाता है। इसलिए यह कर्मधारय समास नहीं है।
प्रश्न 625
‘गुरुमुखी’ पद में समास होगा
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उत्तर और व्याख्या
सही विकल्प है 2:
बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Samas)
'गुरुमुखी' पद में बहुव्रीहि समास है। बहुव्रीहि समास वह होता है जिसमें समस्त पद के दोनों खंड (पद) गौण होते हैं और वे मिलकर किसी तीसरे पद या विशेष अर्थ की ओर संकेत करते हैं। यहाँ 'गुरुमुखी' का शाब्दिक विग्रह 'गुरु के मुख से' होता है, लेकिन इसका प्रचलित अर्थ एक विशेष लिपि, यानी 'पंजाबी भाषा की लिपि' है। चूँकि यह पद अपने सामान्य अर्थों को छोड़कर किसी तीसरे विशिष्ट अर्थ (गुरुमुखी लिपि) को दर्शाता है, इसलिए यह बहुव्रीहि समास का उदाहरण है। यह विशेष अर्थ ही इस समास की पहचान है, जहाँ न तो 'गुरु' की प्रधानता है न 'मुखी' की, बल्कि दोनों मिलकर एक विशेष संज्ञा की ओर इशारा करते हैं।
गलत विकल्प है 1: तत्पुरुष समास
तत्पुरुष समास में उत्तर पद (बाद वाला पद) प्रधान होता है, और समास विग्रह करने पर कारक चिह्नों (जैसे का, के, की, में, पर) का लोप हो जाता है। यदि 'गुरुमुखी' को तत्पुरुष मानते, तो इसका अर्थ 'गुरु का मुख' या 'गुरु के लिए मुख' होता, लेकिन यह अर्थ यहाँ अपेक्षित नहीं है। यह शब्द किसी व्यक्ति या वस्तु से संबंध बताने के बजाय एक विशिष्ट लिपि का नाम है, इसलिए यहाँ तत्पुरुष समास लागू नहीं होता।
गलत विकल्प है 3: द्वन्द्व समास
द्वन्द्व समास में दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं और विग्रह करने पर उनके बीच 'और', 'या', 'अथवा' जैसे योजक शब्दों का प्रयोग होता है। उदाहरण के लिए, 'माता-पिता' (माता और पिता)। 'गुरुमुखी' में दोनों पद प्रधान नहीं हैं और न ही ये योजक शब्द से जुड़े हैं, इसलिए यह द्वन्द्व समास नहीं हो सकता।
गलत विकल्प है 4: द्विगु समास
द्विगु समास वह होता है जिसका पहला पद संख्यावाचक विशेषण हो और वह पूरे समूह या समाहार का बोध कराए। जैसे 'त्रिलोक' (तीन लोकों का समूह)। 'गुरुमुखी' का पहला पद 'गुरु' कोई संख्या नहीं है। इसलिए, संख्यावाचक विशेषण की अनुपस्थिति के कारण यह द्विगु समास का उदाहरण नहीं है।
प्रश्न 626
आजानुबाहु' शब्द में समास है
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उत्तर और व्याख्या
'आजानुबाहु' शब्द में समास 'तत्पुरुष' है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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तत्पुरुष समास (Option 3):
- 'तत्पुरुष' समास में पूर्वपद और उत्तरपद के बीच में संबंध होता है। इसमें एक पद प्रधान होता है और दूसरा पद उसके अर्थ को स्पष्ट करता है। 'आजानुबाहु' शब्द में 'आ' का अर्थ 'तक' और 'जानु' का अर्थ 'घुटना' है, जबकि 'बाहु' का अर्थ 'भुजा' है। इस प्रकार, 'आजानुबाहु' का अर्थ होता है 'जिसकी भुजाएँ घुटनों तक पहुँचती हैं'। यहाँ 'आ' और 'जानु' मिलकर 'बाहु' की विशेषता बता रहे हैं, जो कि तत्पुरुष समास का लक्षण है।
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द्वन्द्व समास (Option 1):
- द्वन्द्व समास में दोनों पद समान महत्व के होते हैं और उनमें 'और' का संबंध होता है। उदाहरण के लिए, 'राम-लक्ष्मण'। 'आजानुबाहु' में ऐसा कोई संबंध नहीं है, इसलिए यह द्वन्द्व समास नहीं है।
-
कर्मधारय समास (Option 2):
- कर्मधारय समास में विशेषण और विशेष्य का संबंध होता है, जहाँ विशेषण विशेष्य की विशेषता बताता है। उदाहरण के लिए, 'नीलकंठ' (नीला + कंठ)। 'आजानुबाहु' में ऐसा संबंध नहीं है, क्योंकि यहाँ 'आ' और 'जानु' मिलकर 'बाहु' की विशेषता बता रहे हैं, जो तत्पुरुष का लक्षण है।
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अव्ययीभाव समास (Option 4):
- अव्ययीभाव समास में पहला पद अव्यय होता है और पूरा समास अव्यय के रूप में कार्य करता है। उदाहरण के लिए, 'यथाशक्ति'। 'आजानुबाहु' में ऐसा कोई अव्यय पद नहीं है, इसलिए यह अव्ययीभाव समास नहीं है।
इस प्रकार, 'आजानुबाहु' शब्द में तत्पुरुष समास है, और यही कारण है कि Option 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 627
सामासिक पदों में निहित समास के विषय में अनुपयुक्त विकल्प है :
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उत्तर और व्याख्या
सामासिक पदों में निहित समास के विषय में अनुपयुक्त विकल्प को समझने के लिए हमें प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण करना होगा।
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यश प्राप्त कर्म तत्पुरुष: इस विकल्प में 'यश प्राप्त' एक कर्म तत्पुरुष समास है। इसमें 'यश' प्राप्त करने की क्रिया को दर्शाया गया है, जो कि कर्म तत्पुरुष समास का सही उदाहरण है।
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मदमाता - अपादान तत्पुरुष: यह विकल्प अनुपयुक्त है क्योंकि 'मदमाता' में 'मद' से 'मुक्त' होने का भाव है, जो कि अपादान तत्पुरुष नहीं है। अपादान तत्पुरुष में 'से' या 'द्वारा' का भाव होता है, जबकि 'मदमाता' में ऐसा कोई भाव नहीं है। इसलिए यह विकल्प सही नहीं है।
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आनंदमग्न - अधिकरण तत्पुरुष: 'आनंदमग्न' में 'आनंद में मग्न' होने का भाव है, जो अधिकरण तत्पुरुष का सही उदाहरण है। इसमें 'में' का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
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सत्याग्रह संप्रदान तत्पुरुष: 'सत्याग्रह' में 'सत्य के लिए आग्रह' का भाव है, जो संप्रदान तत्पुरुष का सही उदाहरण है। इसमें 'के लिए' का भाव स्पष्ट है।
इस प्रकार, 'मदमाता - अपादान तत्पुरुष' विकल्प अनुपयुक्त है क्योंकि यह समास के प्रकार को सही ढंग से नहीं दर्शाता है। अन्य सभी विकल्प अपने-अपने समास के प्रकार को सही ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
प्रश्न 628
सामासिक पद व विग्रह वाक्य की दृष्टि से असंगत विकल्प को चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
सामासिक पद और विग्रह वाक्य की दृष्टि से दिए गए विकल्पों में से असंगत विकल्प को चुनने के लिए हमें यह देखना होगा कि कौन सा विकल्प सही तरीके से सामासिक पद का विग्रह नहीं करता है।
सही उत्तर विकल्प 2 है: "हिमालय - हिम के लिए आलय"।
अब हम प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण करते हैं:
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कुशासन - कुश से निर्मित है जो आसन:
- यह विकल्प सही है क्योंकि "कुशासन" का विग्रह "कुश से निर्मित आसन" होता है। यहाँ "कुश" और "आसन" का सही सामासिक संबंध है।
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हिमालय - हिम के लिए आलय:
- यह विकल्प असंगत है। "हिमालय" का सही विग्रह "हिम का आलय" होता है, जिसका अर्थ है "हिम का निवास"। यहाँ "हिम के लिए आलय" कहना गलत है क्योंकि यह अर्थ नहीं बनता कि हिम के लिए कोई निवास है, बल्कि यह हिम का निवास है।
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विद्यालय - विद्या के लिए आलय:
- यह विकल्प सही है क्योंकि "विद्यालय" का विग्रह "विद्या के लिए आलय" होता है, जिसका अर्थ है "विद्या का स्थान" या "विद्या का निवास"।
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बलिपशु - बलि के लिए पशु:
- यह विकल्प सही है क्योंकि "बलिपशु" का विग्रह "बलि के लिए पशु" होता है, जिसका अर्थ है "बलि के लिए उपयोग किया जाने वाला पशु"।
इस प्रकार, विकल्प 2 "हिमालय - हिम के लिए आलय" असंगत है क्योंकि इसका विग्रह सही नहीं है। सही विग्रह "हिम का आलय" होना चाहिए। यही कारण है कि विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 629
निम्न में से किस विकल्प में कर्मधारय का उदाहरण है ?
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उत्तर और व्याख्या
कर्मधारय समास एक प्रकार का समास होता है जिसमें विशेषण और विशेष्य का संबंध होता है। इसमें विशेषण और विशेष्य दोनों शब्द मिलकर एक नया शब्द बनाते हैं, जिसमें विशेषण विशेष्य की विशेषता बताता है।
अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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सूरकृत: यह तत्पुरुष समास का उदाहरण है, जहां 'सूर' और 'कृत' दो शब्द मिलकर एक नया अर्थ देते हैं। यह कर्मधारय समास नहीं है क्योंकि इसमें विशेषण-विशेष्य का संबंध नहीं है।
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नीलगगन: यह कर्मधारय समास का सही उदाहरण है। 'नील' (विशेषण) और 'गगन' (विशेष्य) मिलकर 'नीला गगन' का अर्थ देते हैं, जहां 'नील' गगन की विशेषता बताता है। इसलिए यह सही उत्तर है।
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आजीवन: यह अव्ययीभाव समास का उदाहरण है, जहां 'आ' और 'जीवन' मिलकर 'जीवन भर' का अर्थ देते हैं। यह कर्मधारय समास नहीं है क्योंकि इसमें विशेषण-विशेष्य का संबंध नहीं है।
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रामोपासक: यह तत्पुरुष समास का उदाहरण है, जहां 'राम' और 'उपासक' मिलकर 'राम का उपासक' का अर्थ देते हैं। यह कर्मधारय समास नहीं है क्योंकि इसमें विशेषण-विशेष्य का संबंध नहीं है।
इस प्रकार, 'नीलगगन' (विकल्प 2) कर्मधारय समास का सही उदाहरण है, क्योंकि इसमें विशेषण 'नील' विशेष्य 'गगन' की विशेषता बताता है।
प्रश्न 630
यावज्जीवन' पद में समास है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'यावज्जीवन' पद में 'अव्ययीभाव' समास है। इसका कारण यह है कि 'अव्ययीभाव' समास में पहला पद अव्यय होता है और वह दूसरे पद के साथ मिलकर एक विशेष अर्थ प्रदान करता है। 'यावज्जीवन' में 'यावत्' अव्यय है, जिसका अर्थ है 'जब तक' या 'संपूर्ण', और 'जीवन' का अर्थ है 'जीवन'। इस प्रकार, 'यावज्जीवन' का अर्थ होता है 'संपूर्ण जीवन तक' या 'जीवन भर'। यह अव्ययीभाव समास का एक स्पष्ट उदाहरण है, जहाँ पहला पद अव्यय होते हुए पूरे पद का विशेष अर्थ निर्धारित करता है।
अब अन्य विकल्पों को गलत साबित करते हैं:
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तत्पुरुष: तत्पुरुष समास में पहला पद दूसरे पद का विशेषण होता है और दोनों पदों के बीच संबंध होता है। उदाहरण के लिए, 'राजपुत्र' (राजा का पुत्र)। 'यावज्जीवन' में ऐसा कोई संबंध नहीं है, इसलिए यह तत्पुरुष समास नहीं है।
-
कर्मधारय: कर्मधारय समास में दोनों पद समान होते हैं और एक दूसरे का विशेषण होते हैं। उदाहरण के लिए, 'नीलकंठ' (नीला कंठ)। 'यावज्जीवन' में ऐसा कोई समानता या विशेषण संबंध नहीं है, इसलिए यह कर्मधारय समास नहीं है।
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बहुव्रीहि: बहुव्रीहि समास में समस्त पद किसी अन्य वस्तु या व्यक्ति का बोध कराते हैं, जैसे 'चतुर्भुज' (जिसके चार भुजाएँ हैं)। 'यावज्जीवन' में ऐसा कोई बाहरी बोध नहीं है, इसलिए यह बहुव्रीहि समास नहीं है।
इस प्रकार, 'यावज्जीवन' में अव्ययीभाव समास ही सही उत्तर है।
प्रश्न 631
योगी शिवेन्द्र 'कुशासन' पर विराजमान हैं।
रेखांकित पद में समास है :
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उत्तर और व्याख्या
रेखांकित पद 'कुशासन' में समास का प्रकार 'मध्यम पद लोपी तत्पुरुष' है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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मध्यम पद लोपी तत्पुरुष समास:
- 'कुशासन' शब्द में 'कु' और 'आसन' दो पद हैं। यहाँ 'कु' का अर्थ है 'बुरा' और 'आसन' का अर्थ है 'बैठक'।
- जब इन दोनों शब्दों का समास होता है, तो 'कु' का अर्थ 'बुरा' और 'आसन' का अर्थ 'बैठक' मिलकर 'बुरी बैठक' का भाव प्रकट करते हैं।
- इस प्रकार, 'कुशासन' का अर्थ है 'बुरी बैठक' या 'बुरा शासन'।
- यहाँ 'मध्यम पद' यानी 'आसन' का अर्थ स्पष्ट है, लेकिन 'कु' का अर्थ लुप्त हो जाता है, जिससे यह 'मध्यम पद लोपी तत्पुरुष' समास बनता है।
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अन्य विकल्पों का खंडन:
- कर्मधारय: इसमें विशेषण और विशेष्य का संबंध होता है, जैसे 'नीलकंठ' (नीला + कंठ)। 'कुशासन' में ऐसा संबंध नहीं है।
- बहुव्रीहि: इसमें समस्त पद का अर्थ किसी अन्य वस्तु या व्यक्ति पर लागू होता है, जैसे 'चतुर्भुज' (जिसके चार भुजाएँ हैं)। 'कुशासन' में ऐसा कोई बाहरी संदर्भ नहीं है।
- द्वन्द्व: इसमें दोनों पद समान महत्व के होते हैं, जैसे 'राम-लक्ष्मण'। 'कुशासन' में ऐसा कोई द्वन्द्व नहीं है।
इस प्रकार, 'कुशासन' में 'मध्यम पद लोपी तत्पुरुष' समास है, और यही कारण है कि विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 632
किस विकल्प में तत्पुरुष समास नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 4 "मीनकेतु" तत्पुरुष समास नहीं है। इसे समझने के लिए, पहले हमें तत्पुरुष समास की परिभाषा को समझना होगा। तत्पुरुष समास में दो या अधिक शब्द मिलकर एक नया शब्द बनाते हैं, जिसमें पहला शब्द विशेषण या विशेष्य होता है और दूसरा शब्द प्रधान होता है।
अब हम प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण करते हैं:
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वाक्चातुर्य: यह एक तत्पुरुष समास है। इसमें "वाक्" (वाणी) और "चातुर्य" (चतुराई) मिलकर एक नया शब्द बनाते हैं, जिसका अर्थ है वाणी की चतुराई।
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तीर्थाटन: यह भी एक तत्पुरुष समास है। इसमें "तीर्थ" (धार्मिक स्थल) और "आटन" (यात्रा) मिलकर एक नया शब्द बनाते हैं, जिसका अर्थ है तीर्थ यात्रा।
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अरण्यरोदन: यह भी एक तत्पुरुष समास है। इसमें "अरण्य" (जंगल) और "रोदन" (रोना) मिलकर एक नया शब्द बनाते हैं, जिसका अर्थ है जंगल में रोना।
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मीनकेतु: यह तत्पुरुष समास नहीं है। "मीन" का अर्थ मछली और "केतु" का अर्थ ध्वज होता है। यह एक विशेष प्रकार का नाम है और इसमें तत्पुरुष समास की संरचना नहीं है।
इस प्रकार, विकल्प 4 "मीनकेतु" तत्पुरुष समास नहीं है, और यही कारण है कि यह सही उत्तर है।
प्रश्न 633
निम्न में 'संकर शब्द' किस विकल्प में नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: निम्न में 'संकर शब्द' किस विकल्प में नहीं है ?
सही उत्तर: विकल्प 1
विस्तृत व्याख्या:
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विज्ञापनदाता (Option 1): 'विज्ञापनदाता' शब्द में 'विज्ञापन' और 'दाता' दो अलग-अलग शब्द हैं, जो संस्कृत और हिंदी से लिए गए हैं। यह शब्द पूरी तरह से हिंदी में निर्मित है और इसमें किसी विदेशी भाषा का मिश्रण नहीं है। इसलिए, यह 'संकर शब्द' नहीं है।
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डबलरोटी (Option 2): 'डबलरोटी' एक संकर शब्द है। यह अंग्रेजी के 'डबल' और हिंदी के 'रोटी' शब्दों का मिश्रण है। इसलिए, यह विकल्प 'संकर शब्द' की श्रेणी में आता है।
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आमचुनाव (Option 3): 'आमचुनाव' भी एक संकर शब्द है। इसमें 'आम' शब्द हिंदी से है और 'चुनाव' शब्द भी हिंदी में ही है, लेकिन यह शब्द अंग्रेजी के 'इलेक्शन' के अर्थ में प्रयोग होता है। हालांकि यह पूरी तरह से हिंदी शब्द है, लेकिन इसका प्रयोग अंग्रेजी के प्रभाव में होता है।
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हिन्दीकरण (Option 4): 'हिन्दीकरण' शब्द में 'हिन्दी' और 'करण' दो अलग-अलग शब्द हैं। 'करण' संस्कृत से लिया गया है, लेकिन यह शब्द अंग्रेजी के 'इंडियनाइजेशन' के प्रभाव में बना है। इसलिए, यह भी एक संकर शब्द है।
इस प्रकार, 'विज्ञापनदाता' एकमात्र ऐसा विकल्प है जो पूरी तरह से हिंदी में निर्मित है और इसमें किसी विदेशी भाषा का मिश्रण नहीं है, इसलिए यह 'संकर शब्द' नहीं है। यही कारण है कि विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 634
कौन-सा विकल्प सुमेलित नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 3, "मोहपाश – करणतत्पुरुष समास," सही उत्तर है क्योंकि यह सुमेलित नहीं है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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मोहपाश – करणतत्पुरुष समास: "मोहपाश" का अर्थ है "मोह का पाश" या "मोह द्वारा बंधन।" यह करणतत्पुरुष समास नहीं है, बल्कि यह तत्पुरुष समास का उदाहरण है, जिसमें "मोह" और "पाश" के बीच संबंध है। करणतत्पुरुष समास में साधन या कारण का बोध होता है, जो यहाँ नहीं है।
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कुसुमकोमल – कर्मधारय समास: "कुसुमकोमल" का अर्थ है "फूल के समान कोमल।" यह कर्मधारय समास का उदाहरण है, जहाँ विशेषण और विशेष्य के बीच संबंध होता है। यहाँ "कुसुम" विशेषण है और "कोमल" विशेष्य है, जो सही मेल है।
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भक्ष्याभक्ष्य – वैकल्पिक द्वन्द्व: "भक्ष्याभक्ष्य" का अर्थ है "जो खाया जा सकता है और जो नहीं खाया जा सकता।" यह वैकल्पिक द्वन्द्व समास का उदाहरण है, जहाँ दो विकल्पों के बीच संबंध होता है। यह सही मेल है।
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क्रोधाग्नि – कर्मधारय समास: "क्रोधाग्नि" का अर्थ है "क्रोध के समान अग्नि।" यह भी कर्मधारय समास का उदाहरण है, जहाँ विशेषण और विशेष्य के बीच संबंध होता है। यहाँ "क्रोध" विशेषण है और "अग्नि" विशेष्य है, जो सही मेल है।
इस प्रकार, विकल्प 3 "मोहपाश – करणतत्पुरुष समास" सुमेलित नहीं है, क्योंकि यह करणतत्पुरुष समास का उदाहरण नहीं है।
प्रश्न 635
किस विकल्प में तत्पुरुष समास का प्रयोग नहीं हुआ है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
तत्पुरुष समास एक प्रकार का समास होता है जिसमें दो या अधिक शब्द मिलकर एक नया शब्द बनाते हैं, और उनमें से एक शब्द प्रधान होता है। अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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ख्यातिप्राप्त: यह एक तत्पुरुष समास है। इसमें 'ख्याति' और 'प्राप्त' शब्द मिलकर 'ख्यातिप्राप्त' बनाते हैं, जिसका अर्थ है 'प्रसिद्धि प्राप्त करने वाला'।
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शपथपत्र: यह भी एक तत्पुरुष समास है। इसमें 'शपथ' और 'पत्र' शब्द मिलकर 'शपथपत्र' बनाते हैं, जिसका अर्थ है 'शपथ का पत्र'।
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सेवानिवृत्त: यह भी एक तत्पुरुष समास है। इसमें 'सेवा' और 'निवृत्त' शब्द मिलकर 'सेवानिवृत्त' बनाते हैं, जिसका अर्थ है 'सेवा से निवृत्त होने वाला'।
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अंधविश्वास: यह तत्पुरुष समास नहीं है। यह एक अव्ययीभाव समास है, जिसमें 'अंध' और 'विश्वास' शब्द मिलकर 'अंधविश्वास' बनाते हैं, जिसका अर्थ है 'बिना तर्क के विश्वास'।
इस प्रकार, विकल्प 4 'अंधविश्वास' में तत्पुरुष समास का प्रयोग नहीं हुआ है, इसलिए यह सही उत्तर है। अन्य सभी विकल्पों में तत्पुरुष समास का प्रयोग हुआ है।
प्रश्न 636
समास की दृष्टि से कौन-सा विकल्प असंगत है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
समास की दृष्टि से विकल्प 2, "पवन से चलने वाली चक्की = पनचक्की" असंगत है, क्योंकि इसमें तत्पुरुष समास का सही रूप नहीं है।
Option 2 सही क्यों है:
"पवन से चलने वाली चक्की" का सही सामासिक पद "पवनचक्की" होना चाहिए। "पनचक्की" शब्द में 'पन' शब्द 'पवन' का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता है। 'पवन' का अर्थ हवा होता है, और 'पवनचक्की' का अर्थ है हवा से चलने वाली चक्की। इसलिए, समास की दृष्टि से यह विकल्प असंगत है क्योंकि सामासिक पद सही नहीं बना है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
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पंत द्वारा प्रणीत = पंत प्रणीत: यह सही है। "पंत प्रणीत" का अर्थ है "पंत द्वारा रचित" और यह करण तत्पुरुष समास का उदाहरण है।
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वह जो चक्षु से श्रवण करे = चक्षुश्रवा: यह भी सही है। "चक्षुश्रवा" का अर्थ है "वह जो आँखों से सुनता है" (सांप) और यह बहुव्रीहि समास का उदाहरण है।
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समाचार के लिए पत्र = समाचारपत्र: यह भी सही है। "समाचारपत्र" का अर्थ है "समाचारों के लिए पत्र" और यह सम्प्रदान तत्पुरुष समास का उदाहरण है।
इसलिए, केवल विकल्प 2 ही समास की दृष्टि से असंगत है क्योंकि इसका सामासिक पद सही नहीं है।
प्रश्न 637
किस विकल्प में 'अलुक् तत्पुरुष' समास का प्रयोग हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
'मनसिज' विकल्प में 'अलुक् तत्पुरुष' समास का प्रयोग हुआ है, इसका विस्तृत स्पष्टीकरण इस प्रकार है:
- मनसिज (मनसि + ज): 'मनसिज' का अर्थ है 'मन में जन्म लेने वाला'। यह शब्द कामदेव के लिए प्रयुक्त होता है। यहाँ 'मनसि' शब्द में सप्तमी विभक्ति का 'सि' प्रत्यय लगा हुआ है, जिसका लोप नहीं हुआ है। अलुक् तत्पुरुष समास में विभक्ति चिह्न का लोप नहीं होता है, इसलिए 'मनसिज' अलुक् तत्पुरुष समास का उदाहरण है।
अन्य विकल्पों का स्पष्टीकरण:
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दिग्विजय (दिक् + विजय): 'दिग्विजय' का अर्थ है 'दिशाओं पर विजय'। यह कर्म तत्पुरुष समास का उदाहरण है, जहाँ 'दिक्' (दिशाओं) को जीतने की बात हो रही है और विभक्ति चिह्न का लोप हो गया है।
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सर्वव्याप्त (सर्व + व्याप्त): 'सर्वव्याप्त' का अर्थ है 'सब जगह व्याप्त'। यह भी कर्म तत्पुरुष समास का उदाहरण है, जहाँ 'सर्व' (सब) को व्याप्त करने की बात हो रही है और विभक्ति चिह्न का लोप हो गया है।
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कूपमंडूक (कूप + मंडूक): 'कूपमंडूक' का अर्थ है 'कुएँ का मेंढक'। यह षष्ठी तत्पुरुष समास का उदाहरण है, जहाँ 'कूप' (कुएँ) का मेंढक बताया गया है और विभक्ति चिह्न का लोप हो गया है।
अतः, 'मनसिज' ही एकमात्र ऐसा विकल्प है जिसमें विभक्ति चिह्न का लोप नहीं हुआ है, इसलिए यह 'अलुक् तत्पुरुष' समास का उदाहरण है।
प्रश्न 638
अव्ययीभाव समास' का उदाहरण नहीं है :
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उत्तर और व्याख्या
अव्ययीभाव समास का उदाहरण नहीं है :
सही उत्तर: विकल्प 2 (आजकल)
व्याख्या:
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विकल्प 2: आजकल
"आजकल" शब्द का अर्थ है वर्तमान समय में या इन दिनों। यह शब्द एक विशेष प्रकार के समास का उदाहरण नहीं है, बल्कि यह एक सामान्य शब्द है जो समय को दर्शाता है। इसमें कोई विशेष अव्ययीभाव नहीं है, जो कि अव्ययीभाव समास की विशेषता होती है। इसलिए, यह अव्ययीभाव समास का उदाहरण नहीं है। -
विकल्प 1: द्वार-द्वार
"द्वार-द्वार" अव्ययीभाव समास का उदाहरण है। इसमें 'द्वार' शब्द को दो बार दोहराया गया है, जो कि एक विशेष प्रकार की क्रिया या स्थिति को दर्शाता है, जैसे कि हर द्वार पर। यह अव्ययीभाव समास की विशेषता है, जहाँ अव्यय शब्द का प्रयोग होता है। -
विकल्प 3: कुशलतापूर्वक
"कुशलतापूर्वक" भी अव्ययीभाव समास का उदाहरण है। इसमें 'कुशलता' और 'पूर्वक' शब्द मिलकर एक अव्ययीभाव बनाते हैं, जो क्रिया की विशेषता को दर्शाता है, जैसे कि कुशलता से किया गया कार्य। यह अव्ययीभाव समास की विशेषता को दर्शाता है। -
विकल्प 4: हाथोंहाथ
"हाथोंहाथ" भी अव्ययीभाव समास का उदाहरण है। यह शब्द किसी कार्य को तुरंत करने की स्थिति को दर्शाता है, जैसे कि तुरंत या बिना देरी के। यह अव्ययीभाव समास की विशेषता को दर्शाता है।
इस प्रकार, "आजकल" शब्द अव्ययीभाव समास का उदाहरण नहीं है, जबकि अन्य विकल्प अव्ययीभाव समास के उदाहरण हैं। इसलिए, सही उत्तर विकल्प 2 है।
प्रश्न 639
किस विकल्प में द्वन्द्व समास का उदाहरण नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
द्वन्द्व समास वह समास होता है जिसमें दो या अधिक शब्दों का योग होता है और दोनों ही शब्द प्रधान होते हैं। अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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भक्ष्याभक्ष्य: यह द्वन्द्व समास का उदाहरण है क्योंकि इसमें 'भक्ष्य' और 'अभक्ष्य' दो शब्दों का योग है, जो एक-दूसरे के विपरीत अर्थ रखते हैं और दोनों ही प्रधान हैं।
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कृष्णार्जुन: यह भी द्वन्द्व समास का उदाहरण है। इसमें 'कृष्ण' और 'अर्जुन' दो व्यक्तियों के नाम हैं, और दोनों ही समान रूप से प्रधान हैं।
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रुद्रप्रिया: यह द्वन्द्व समास का उदाहरण नहीं है। यह तत्पुरुष समास का उदाहरण है, जिसमें 'रुद्र' और 'प्रिया' का योग है, जहां 'प्रिया' 'रुद्र' के लिए प्रिय है। इसमें 'प्रिया' प्रधान है और 'रुद्र' का विशेषण है।
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उचितानुचित: यह भी द्वन्द्व समास का उदाहरण है क्योंकि इसमें 'उचित' और 'अनुचित' दो विपरीत अर्थ वाले शब्दों का योग है और दोनों ही प्रधान हैं।
इस प्रकार, विकल्प 3 'रुद्रप्रिया' द्वन्द्व समास का उदाहरण नहीं है, क्योंकि यह तत्पुरुष समास का उदाहरण है। यही कारण है कि विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 640
अधिकारप्राप्त' में कौन-सा समास है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: 'अधिकारप्राप्त' में कौन-सा समास है?
सही उत्तर: विकल्प 2 (कर्म तत्पुरुष)
व्याख्या:
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कर्म तत्पुरुष समास: 'अधिकारप्राप्त' शब्द में 'अधिकार' और 'प्राप्त' दो पद हैं। यहाँ 'प्राप्त' क्रिया है और 'अधिकार' उसका कर्म है। जब किसी क्रिया के साथ उसका कर्म जुड़ता है, तो उसे कर्म तत्पुरुष समास कहते हैं। इस प्रकार, 'अधिकारप्राप्त' में 'अधिकार' का 'प्राप्त' के साथ संबंध कर्म का है, इसलिए यह कर्म तत्पुरुष समास है।
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अन्य विकल्पों की अस्वीकृति:
- करण तत्पुरुष: करण तत्पुरुष समास में साधन या उपकरण का संबंध होता है, जैसे 'कलम से लिखा'। 'अधिकारप्राप्त' में ऐसा कोई साधन या उपकरण का संबंध नहीं है, इसलिए यह करण तत्पुरुष नहीं है।
- संप्रदान तत्पुरुष: संप्रदान तत्पुरुष में दान या समर्पण का भाव होता है, जैसे 'गुरु को पुस्तक दी'। 'अधिकारप्राप्त' में ऐसा कोई दान या समर्पण का भाव नहीं है, इसलिए यह संप्रदान तत्पुरुष नहीं है।
- अधिकरण तत्पुरुष: अधिकरण तत्पुरुष में स्थान या स्थिति का संबंध होता है, जैसे 'घर में बैठा'। 'अधिकारप्राप्त' में ऐसा कोई स्थान या स्थिति का संबंध नहीं है, इसलिए यह अधिकरण तत्पुरुष नहीं है।
इस प्रकार, 'अधिकारप्राप्त' में कर्म तत्पुरुष समास है, और यही कारण है कि विकल्प 2 सही उत्तर है।