HTET परीक्षा - Level 3 PGT - हिंदी
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 3 PGT की तैयारी
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 641
किस विकल्प में 'अपादान तत्पुरुष' का प्रयोग नहीं हुआ है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 4 सही उत्तर है क्योंकि 'पदाक्रांत' में 'अपादान तत्पुरुष' का प्रयोग नहीं हुआ है। 'पदाक्रांत' का समास विग्रह होता है 'पद से आक्रांत' अर्थात पैर से कुचला हुआ। इसमें 'से' करण कारक के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है, जो कि 'करण तत्पुरुष' का उदाहरण है। अपादान तत्पुरुष में अलग होने का भाव होता है, जो कि 'पदाक्रांत' में नहीं है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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जन्मरोगी: 'जन्मरोगी' का समास विग्रह होता है 'जन्म से रोगी'। यहाँ 'से' अलग होने के अर्थ में प्रयुक्त है (जन्म से ही रोगग्रस्त), इसलिए यह 'अपादान तत्पुरुष' का उदाहरण है।
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जलजात: 'जलजात' का समास विग्रह होता है 'जल से जात' (जल से उत्पन्न)। यहाँ भी 'से' अलग होने के अर्थ में प्रयुक्त है (जल से उत्पन्न), इसलिए यह 'अपादान तत्पुरुष' का उदाहरण है।
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राजद्रोह: 'राजद्रोह' का समास विग्रह होता है 'राजा से द्रोह'। यहाँ 'से' अलग होने के अर्थ में प्रयुक्त है (राजा से विश्वासघात), इसलिए यह 'अपादान तत्पुरुष' का उदाहरण है।
इसलिए, केवल 'पदाक्रांत' में 'अपादान तत्पुरुष' का प्रयोग नहीं हुआ है, बल्कि इसमें 'करण तत्पुरुष' का प्रयोग हुआ है।
प्रश्न 642
‘स्नान-वनान’ पद में कौन-सा समास है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
‘स्नान-वनान’ पद में द्वन्द्व समास है। द्वन्द्व समास वह समास होता है जिसमें दो या अधिक पदों का समाहार होता है और दोनों पद समान महत्व रखते हैं। इस समास में दोनों पदों का अर्थ समान रूप से महत्वपूर्ण होता है और वे एक-दूसरे के साथ जुड़कर एक नया अर्थ देते हैं।
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द्वन्द्व समास (Option 2):
- ‘स्नान-वनान’ में ‘स्नान’ और ‘वनान’ दोनों ही शब्द समान महत्व रखते हैं और मिलकर एक संयुक्त अर्थ प्रदान करते हैं। यहाँ पर दोनों शब्दों का अर्थ अलग-अलग होते हुए भी एक साथ प्रयुक्त होते हैं, जैसे स्नान करना और वन जाना। इस प्रकार, यह द्वन्द्व समास का उदाहरण है।
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अन्य विकल्पों की गलतियाँ:
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अव्ययीभाव समास (Option 1):
- अव्ययीभाव समास में पहला पद अव्यय होता है और पूरा समास अव्यय के रूप में कार्य करता है। उदाहरण के लिए, 'यथाशक्ति'। ‘स्नान-वनान’ में ऐसा कोई अव्यय पद नहीं है, इसलिए यह अव्ययीभाव समास नहीं है।
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तत्पुरुष समास (Option 3):
- तत्पुरुष समास में एक पद प्रधान होता है और दूसरा पद उसके अर्थ को विशेष रूप से स्पष्ट करता है। उदाहरण के लिए, 'राजपुत्र'। ‘स्नान-वनान’ में कोई पद प्रधान नहीं है, इसलिए यह तत्पुरुष समास नहीं है।
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कर्मधारय समास (Option 4):
- कर्मधारय समास में विशेषण और विशेष्य का संबंध होता है, जैसे 'नीलकंठ'। ‘स्नान-वनान’ में ऐसा कोई विशेषण-विशेष्य संबंध नहीं है, इसलिए यह कर्मधारय समास नहीं है।
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इस प्रकार, ‘स्नान-वनान’ में द्वन्द्व समास का प्रयोग हुआ है, जो विकल्प 2 को सही ठहराता है।
प्रश्न 643
समास विग्रह की दृष्टि से अनुचित विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
समास विग्रह की दृष्टि से अनुचित विकल्प चुनने के लिए हमें यह समझना होगा कि प्रत्येक विकल्प में दिए गए शब्दों का सही विग्रह क्या है।
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मातृभक्ति = माता के लिए भक्ति: यह समास सही है क्योंकि 'मातृभक्ति' का अर्थ है 'माता के प्रति भक्ति'। यहाँ 'माता' और 'भक्ति' के बीच का संबंध स्पष्ट है।
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वाग्वीर = वाक् (वाणी) में वीर: यह समास भी सही है। 'वाग्वीर' का अर्थ है 'वाणी में वीर'। यहाँ 'वाक्' और 'वीर' के बीच का संबंध सही तरीके से व्यक्त किया गया है।
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इन्द्रियजय = इन्द्रियों के लिए जय: यह समास विग्रह अनुचित है। 'इन्द्रियजय' का सही अर्थ है 'इन्द्रियों पर विजय'। यहाँ 'इन्द्रियों के लिए जय' कहना गलत है क्योंकि यह अर्थ नहीं बनता कि इन्द्रियों के लिए किसी प्रकार की विजय हो।
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जीवदया = जीवों पर दया: यह समास सही है। 'जीवदया' का अर्थ है 'जीवों पर दया करना'। यहाँ 'जीव' और 'दया' के बीच का संबंध सही तरीके से व्यक्त किया गया है।
इस प्रकार, विकल्प 3 'इन्द्रियजय = इन्द्रियों के लिए जय' का विग्रह अनुचित है क्योंकि इसका सही अर्थ 'इन्द्रियों पर विजय' होना चाहिए। यही कारण है कि विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 644
गलत समास विग्रह चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
समास विग्रह के संदर्भ में, हमें यह समझना आवश्यक है कि समास का अर्थ है दो या अधिक शब्दों का संक्षिप्त रूप में मिलकर एक नया शब्द बनाना। अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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दूर के लिए दर्शन = दूरदर्शन: यह विकल्प गलत है क्योंकि "दूरदर्शन" का सही समास विग्रह "दूर से दर्शन" होता है। "दूरदर्शन" का अर्थ है दूर से देखना, जो कि टेलीविजन के संदर्भ में प्रयुक्त होता है। इसलिए, यह विकल्प गलत है।
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दूर से आगत = दूरागत: यह विकल्प सही है। "दूरागत" का समास विग्रह "दूर से आगत" होता है, जिसका अर्थ है दूर से आया हुआ।
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पाठ के लिए शाला = पाठशाला: यह विकल्प सही है। "पाठशाला" का समास विग्रह "पाठ के लिए शाला" होता है, जिसका अर्थ है वह स्थान जहां पाठ या शिक्षा दी जाती है।
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सभा के लिए मण्डप = सभामण्डप: यह विकल्प सही है। "सभामण्डप" का समास विग्रह "सभा के लिए मण्डप" होता है, जिसका अर्थ है वह स्थान जहां सभा आयोजित की जाती है।
इस प्रकार, दिए गए विकल्पों में से केवल विकल्प 1 का समास विग्रह गलत है, इसलिए यह सही उत्तर है।
प्रश्न 645
सामासिक पदों के घटकों को अलग करने की रीति को कहते हैं :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सामासिक पदों के घटकों को अलग करने की रीति को "विग्रह" कहते हैं। यह प्रक्रिया उन शब्दों को उनके मूल घटकों में विभाजित करती है जो समास के रूप में जुड़े होते हैं। उदाहरण के लिए, "राजपुत्र" का विग्रह "राजा का पुत्र" होता है।
अब आइए देखते हैं कि अन्य विकल्प क्यों सही नहीं हैं:
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समास: समास वह प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक शब्द मिलकर एक नया शब्द बनाते हैं। यह विपरीत प्रक्रिया है, जहां घटकों को जोड़कर एक नया शब्द बनाया जाता है, जबकि विग्रह में उन घटकों को अलग किया जाता है।
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निग्रह: निग्रह का अर्थ होता है नियंत्रण या रोक। यह शब्द व्याकरणिक प्रक्रिया के संदर्भ में नहीं आता है और सामासिक पदों के घटकों को अलग करने से संबंधित नहीं है।
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विच्छेद: विच्छेद का अर्थ होता है अलग करना या तोड़ना, लेकिन यह शब्द विशेष रूप से सामासिक पदों के घटकों को अलग करने के लिए प्रयुक्त नहीं होता है। यह एक सामान्य शब्द है जो किसी भी प्रकार की विभाजन प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस प्रकार, "विग्रह" ही वह सही प्रक्रिया है जो सामासिक पदों के घटकों को अलग करने के लिए प्रयुक्त होती है, और इसलिए विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 646
निम्नलिखित में से सही युग्म का चयन कीजिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सही उत्तर विकल्प 1 है: "रसभरा – रस से भरा"। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
- रसभरा – रस से भरा: यह युग्म सही है क्योंकि 'रसभरा' का अर्थ होता है 'रस से भरा हुआ'। यह शब्द उन वस्तुओं या स्थितियों के लिए प्रयोग किया जाता है जो रस से परिपूर्ण होती हैं, जैसे कि एक रसभरा फल। इस प्रकार, यह युग्म सही और सटीक है।
अब अन्य विकल्पों की गलतियों को समझते हैं:
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पतितपावन – पतितों में पावन: 'पतितपावन' का अर्थ होता है 'जो पतितों को पवित्र करता है'। यह शब्द भगवान या किसी पवित्र शक्ति के लिए प्रयोग किया जाता है जो पतितों को पवित्रता प्रदान करती है। इसलिए, 'पतितों में पावन' कहना गलत होगा।
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रसोईघर – रसोई का घर: 'रसोईघर' का अर्थ होता है 'वह स्थान जहाँ खाना पकाया जाता है', न कि 'रसोई का घर'। यह एक विशेष स्थान को दर्शाता है, न कि किसी घर का हिस्सा।
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धनहीन – धन में हीन: 'धनहीन' का अर्थ होता है 'जिसके पास धन नहीं है'। यह किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को दर्शाता है, न कि 'धन में हीन'। 'धन में हीन' कहना सही नहीं होगा क्योंकि यह वाक्यांश सही अर्थ नहीं देता।
इस प्रकार, विकल्प 1 "रसभरा – रस से भरा" सही युग्म है और अन्य विकल्प गलत हैं।
प्रश्न 647
समास की दृष्टि से असंगत विकल्प छाँटिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
भयभीत – करण तत्पुरुष, समास की दृष्टि से असंगत विकल्प है, क्योंकि 'भयभीत' का समास विग्रह 'भय से भीत' होगा, और इसमें 'से' करण कारक का नहीं, बल्कि अपादान कारक का बोध कराता है (भय से अलग होने का भाव)। इसलिए यह अपादान तत्पुरुष होना चाहिए, न कि करण तत्पुरुष।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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सेठ-साहूकार – समाहार द्वन्द्व: यह विकल्प सही है क्योंकि 'सेठ-साहूकार' दोनों पद मिलकर एक समूह या समाहार का बोध कराते हैं। यह द्वन्द्व समास का एक प्रकार है।
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विद्याहीन – अपादान तत्पुरुष: यह विकल्प सही है क्योंकि 'विद्याहीन' का समास विग्रह 'विद्या से हीन' होगा, और इसमें 'से' अपादान कारक का बोध कराता है (विद्या से अलग होने का भाव)।
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स्वर्गगत – कर्म तत्पुरुष: यह विकल्प सही है क्योंकि 'स्वर्गगत' का समास विग्रह 'स्वर्ग को गत' होगा, और इसमें 'को' कर्म कारक का बोध कराता है।
प्रश्न 648
किस विकल्प में अव्ययीभाव समास है ?
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उत्तर और व्याख्या
Option 3, "अवसरवंचित," में अव्ययीभाव समास है, क्योंकि इसका विग्रह होता है "अवसर से वंचित।" यहाँ 'अवसर' एक संज्ञा है और 'वंचित' एक विशेषण है। इस पूरे पद का अर्थ 'अवसर के अभाव में' या 'अवसर से रहित' होता है, जो एक अव्यय की तरह कार्य करता है। अव्ययीभाव समास में पहला पद (पूर्व पद) अव्यय होता है और वह पूरे पद को अव्यय बना देता है। "अवसरवंचित" में भी 'अवसर' के अभाव की स्थिति को दर्शाया गया है, जो अव्ययीभाव समास का लक्षण है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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विरोधजनक: यह शब्द विरोध उत्पन्न करने वाला या विरोध पैदा करने वाला अर्थ देता है। इसमें 'विरोध' और 'जनक' दो शब्द हैं और यह तत्पुरुष या कर्मधारय समास का उदाहरण हो सकता है, अव्ययीभाव का नहीं।
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कृपापूर्वक: यह शब्द 'कृपा के साथ' या 'कृपा करते हुए' अर्थ देता है। इसमें 'कृपा' और 'पूर्वक' दो शब्द हैं। 'पूर्वक' एक अव्यय है, लेकिन यह शब्द अव्ययीभाव समास का सटीक उदाहरण नहीं है क्योंकि 'कृपा' संज्ञा है और 'पूर्वक' उसके साथ मिलकर एक क्रियाविशेषण की तरह कार्य कर रहा है। यह अव्ययीभाव समास की तुलना में कर्मधारय या तत्पुरुष समास के अधिक निकट है।
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स्वाधीन: यह शब्द 'स्वयं के अधीन' या 'अपने वश में' अर्थ देता है। यह तत्पुरुष समास का उदाहरण है, जहाँ 'स्व' (अपना) और 'अधीन' (वश में) मिलकर एक नया शब्द बनाते हैं। यह अव्ययीभाव समास नहीं है।
इसलिए, केवल अवसरवंचित ही अव्ययीभाव समास का उदाहरण है, क्योंकि यह 'अवसर के अभाव में' अर्थ देता है और एक अव्यय की तरह कार्य करता है।
प्रश्न 649
किस समस्त पद का विग्रह अनुचित है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
समस्त पद का विग्रह एक ऐसा प्रक्रिया है जिसमें किसी समस्त शब्द को उसके मूल रूप में विभाजित किया जाता है। दिए गए प्रश्न में हमें यह देखना है कि किस समस्त पद का विग्रह अनुचित है।
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निरामिष - आमिष से रहित:
- "निरामिष" का अर्थ होता है "आमिष से रहित"। यहाँ "निर" का अर्थ है "रहित" और "आमिष" का अर्थ है "मांसाहार"। इस प्रकार, यह विग्रह सही है।
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अतीन्द्रिय - इन्द्रियों के अनुभव से परे:
- "अतीन्द्रिय" का अर्थ होता है "इन्द्रियों के अनुभव से परे"। यहाँ "अति" का अर्थ है "परे" और "इन्द्रिय" का अर्थ है "इन्द्रियाँ"। यह विग्रह भी सही है।
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अत्यावश्यक - आवश्यकता से परे:
- "अत्यावश्यक" का अर्थ होता है "बहुत आवश्यक"। यहाँ "अति" का अर्थ है "बहुत" और "आवश्यक" का अर्थ है "जरूरी"। लेकिन दिए गए विग्रह में "आवश्यकता से परे" कहा गया है, जो कि गलत है। इसलिए, यह विग्रह अनुचित है।
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प्रत्याशा - आशा के बदले की गई आशा:
- "प्रत्याशा" का अर्थ होता है "प्रतीक्षा" या "उम्मीद"। यहाँ "प्रति" का अर्थ है "बदले में" और "आशा" का अर्थ है "उम्मीद"। यह विग्रह सही है।
इस प्रकार, विकल्प 3 "अत्यावश्यक - आवश्यकता से परे" का विग्रह अनुचित है क्योंकि इसका सही अर्थ "बहुत आवश्यक" होता है, न कि "आवश्यकता से परे"। यही कारण है कि विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 650
समास-विग्रह की दृष्टि से कौन-सा विकल्प उचित है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
समास-विग्रह की दृष्टि से विकल्प 1 "हथकरघा – हाथों से चलने वाला करघा" सही है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
- हथकरघा – हाथों से चलने वाला करघा:
- "हथकरघा" शब्द का समास-विग्रह "हाथों से चलने वाला करघा" है। यह तत्पुरुष समास का उदाहरण है, जहाँ "हथ" का अर्थ "हाथ" और "करघा" का अर्थ "करघा" है। इस प्रकार, यह शब्द उन करघों को संदर्भित करता है जो हाथों से चलाए जाते हैं। इसलिए, यह विकल्प सही है।
अब अन्य विकल्पों की गलतियों को समझते हैं:
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भुजग - भूमि में जन्म लेने वाला:
- "भुजग" का अर्थ "साँप" होता है, और इसका समास-विग्रह "भुजं गच्छति इति भुजगः" है, जिसका अर्थ है "जो भूमि पर चलता है"। यहाँ "भूमि में जन्म लेने वाला" गलत व्याख्या है।
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देशभक्ति - देश के द्वारा भक्ति:
- "देशभक्ति" का सही समास-विग्रह "देश के प्रति भक्ति" है। "देश के द्वारा भक्ति" गलत है क्योंकि यह भाववाचक तत्पुरुष समास है, जहाँ भक्ति देश के प्रति होती है, न कि देश के द्वारा।
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पशुबलि - पशु के लिए बलि:
- "पशुबलि" का सही समास-विग्रह "पशु की बलि" है। "पशु के लिए बलि" गलत है क्योंकि यहाँ बलि पशु की दी जाती है, न कि पशु के लिए।
इस प्रकार, समास-विग्रह की दृष्टि से विकल्प 1 सही है और अन्य विकल्प गलत हैं।
प्रश्न 651
निम्नलिखित में से किस विकल्प के सभी शब्द 'अव्ययी भाव समास' के उदाहरण हैं ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
अव्ययी भाव समास एक प्रकार का समास होता है जिसमें पहला पद अव्यय होता है और दूसरा पद संज्ञा या विशेषण होता है। इस प्रकार के समास में पहला पद प्रधान होता है और दूसरा पद गौण होता है। अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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बेशक, मृत्युपर्यंत:
- 'बेशक' और 'मृत्युपर्यंत' दोनों ही अव्ययी भाव समास के उदाहरण हैं। 'बेशक' में 'बे' अव्यय है और 'शक' संज्ञा है। इसी प्रकार, 'मृत्युपर्यंत' में 'मृत्यु' संज्ञा है और 'पर्यंत' अव्यय है। इसलिए, यह विकल्प सही है।
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भलामानस, भरसक:
- 'भलामानस' में 'भला' विशेषण है और 'मानस' संज्ञा है, जो अव्ययी भाव समास नहीं बनाता। 'भरसक' में 'भर' अव्यय है और 'सक' क्रिया है, जो अव्ययी भाव समास का उदाहरण नहीं है।
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देशांतर, हररोज़:
- 'देशांतर' में 'देश' संज्ञा है और 'अंतर' संज्ञा है, जो अव्ययी भाव समास नहीं है। 'हररोज़' में 'हर' विशेषण है और 'रोज़' संज्ञा है, जो अव्ययी भाव समास का उदाहरण नहीं है।
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आपबीती, प्रत्यागमन:
- 'आपबीती' में 'आप' सर्वनाम है और 'बीती' क्रिया है, जो अव्ययी भाव समास नहीं है। 'प्रत्यागमन' में 'प्रति' उपसर्ग है और 'आगमन' संज्ञा है, जो अव्ययी भाव समास का उदाहरण नहीं है।
इस प्रकार, केवल विकल्प 1 के सभी शब्द 'अव्ययी भाव समास' के उदाहरण हैं। इसलिए, विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 652
वज्राहत' शब्द में कौन-सा समास है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वज्राहत' शब्द में 'तत्पुरुष समास' है। तत्पुरुष समास में दो पद होते हैं, जिनमें एक पद प्रधान होता है और दूसरा पद उसके अर्थ को स्पष्ट करता है। 'वज्राहत' शब्द में 'वज्र' और 'आहत' दो पद हैं। यहाँ 'वज्र' प्रधान पद है और 'आहत' उसका अर्थ स्पष्ट कर रहा है। इस प्रकार, यह तत्पुरुष समास का उदाहरण है।
अब अन्य विकल्पों को गलत साबित करते हैं:
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कर्मधारय समास: इस समास में दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं और विशेषण-विशेष्य भाव होता है। 'वज्राहत' में ऐसा कोई संबंध नहीं है, इसलिए यह कर्मधारय समास नहीं है।
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अव्ययीभाव समास: इस समास में पहला पद अव्यय होता है और दूसरा पद उसके अर्थ को स्पष्ट करता है। 'वज्राहत' में 'वज्र' अव्यय नहीं है, इसलिए यह अव्ययीभाव समास नहीं है।
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बहुव्रीहि समास: इस समास में समस्त पदों का अर्थ किसी तीसरे पद पर लागू होता है। 'वज्राहत' में ऐसा कोई बाहरी अर्थ नहीं है, इसलिए यह बहुव्रीहि समास नहीं है।
इस प्रकार, 'वज्राहत' शब्द में तत्पुरुष समास है, जो विकल्प 4 को सही साबित करता है।
प्रश्न 653
समास-विग्रह की दृष्टि से कौन-सा विकल्प असंगत है ?
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उत्तर और व्याख्या
समास-विग्रह की दृष्टि से विकल्प 3, "नवयुवक – नौ युवकों का समूह" असंगत है, क्योंकि:
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क्यों विकल्प 3 सही है: "नवयुवक" का सही समास-विग्रह "नया है जो युवक" (कर्मधारय समास) होता है, न कि "नौ युवकों का समूह"। "नौ युवकों का समूह" कहने से यह संख्यावाचक प्रतीत होता है, जो कि द्विगु समास की ओर इशारा करता है, लेकिन "नवयुवक" शब्द में "नव" का अर्थ "नया" है, "नौ" नहीं। इसलिए, दिया गया समास-विग्रह गलत है।
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अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
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विकल्प 1: शुभंकर – शुभ को करने वाला: यह समास-विग्रह सही है। "शुभंकर" का अर्थ है "शुभ करने वाला" और यह कर्म तत्पुरुष समास का उदाहरण है।
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विकल्प 2: रसमलाई – रस में डूबी हुई मलाई: यह समास-विग्रह भी सही है। "रसमलाई" का अर्थ है "रस में डूबी हुई मलाई" और यह तत्पुरुष समास का उदाहरण है।
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विकल्प 4: शाखामृग – शाखाओं पर रहने/दौड़ने वाला मृग: यह समास-विग्रह भी सही है। "शाखामृग" का अर्थ है "शाखाओं पर रहने वाला मृग" (बंदर) और यह बहुव्रीहि समास का उदाहरण है।
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इसलिए, केवल विकल्प 3 में दिया गया समास-विग्रह गलत है, जो इसे असंगत बनाता है।
प्रश्न 654
वज्रदेह' शब्द में कौन-सा समास है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वज्रदेह' शब्द में 'कर्मधारय' समास है। इसे समझने के लिए हमें 'कर्मधारय' समास की विशेषताओं को जानना होगा।
- कर्मधारय समास: इस समास में पूर्वपद और उत्तरपद में विशेषण-विशेष्य का संबंध होता है। 'वज्रदेह' में 'वज्र' विशेषण है और 'देह' विशेष्य है। इसका अर्थ है 'वज्र के समान देह'। यहाँ 'वज्र' शब्द 'देह' की विशेषता बता रहा है, इसलिए यह कर्मधारय समास है।
अब अन्य विकल्पों को देखते हैं:
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अव्ययीभाव समास: इस समास में पहला पद अव्यय होता है और पूरा पद अव्यय के रूप में कार्य करता है। 'वज्रदेह' में ऐसा कोई अव्यय पद नहीं है, इसलिए यह अव्ययीभाव समास नहीं हो सकता।
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तत्पुरुष समास: इस समास में पहला पद संज्ञा या विशेषण होता है और दूसरा पद उसके कारक के रूप में होता है। 'वज्रदेह' में ऐसा कोई कारक संबंध नहीं है, इसलिए यह तत्पुरुष समास नहीं है।
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द्वन्द्व समास: इस समास में दोनों पद समान महत्व के होते हैं और 'और' का भाव होता है। 'वज्रदेह' में ऐसा कोई 'और' का भाव नहीं है, इसलिए यह द्वन्द्व समास नहीं है।
इस प्रकार, 'वज्रदेह' में 'कर्मधारय' समास है, जो विकल्प 3 को सही ठहराता है।
प्रश्न 655
सरसिज शब्द में कौन-सा समास है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सरसिज शब्द में "अलुक् तत्पुरुष समास" है, जो विकल्प 4 है। इसे समझने के लिए हमें "अलुक् तत्पुरुष समास" और अन्य समासों के बीच के अंतर को समझना होगा।
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अलुक् तत्पुरुष समास (विकल्प 4):
- "अलुक् तत्पुरुष समास" में समास के बाद भी पहले पद का रूप अपरिवर्तित रहता है। "सरसिज" शब्द "सरस" (जल) और "ज" (जन्मा) से बना है। यहाँ "सरस" का रूप अपरिवर्तित रहता है, इसलिए यह अलुक् तत्पुरुष समास का उदाहरण है।
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कर्मधारय समास (विकल्प 1):
- कर्मधारय समास में विशेषण और विशेष्य का संबंध होता है, जैसे "नीलकंठ" (नीला + कंठ)। "सरसिज" में ऐसा कोई विशेषण-विशेष्य संबंध नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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द्वन्द्व समास (विकल्प 2):
- द्वन्द्व समास में दो या अधिक शब्दों का समान महत्व होता है, जैसे "राम-लक्ष्मण"। "सरसिज" में केवल एक ही मुख्य अर्थ है, इसलिए यह द्वन्द्व समास नहीं हो सकता।
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अव्ययीभाव समास (विकल्प 3):
- अव्ययीभाव समास में पहला पद अव्यय होता है, जैसे "यथाशक्ति"। "सरसिज" में पहला पद अव्यय नहीं है, इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
इस प्रकार, "सरसिज" में "अलुक् तत्पुरुष समास" है, जो विकल्प 4 को सही ठहराता है।
प्रश्न 656
राष्ट्रभक्ति' में प्रयुक्त समास है :
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: 'राष्ट्रभक्ति' में प्रयुक्त समास है :
सम्प्रदान तत्पुरुष समास को सही उत्तर के रूप में समर्थन करने के लिए विस्तृत व्याख्या:
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सम्प्रदान तत्पुरुष समास का समर्थन:
- 'राष्ट्रभक्ति' शब्द में 'राष्ट्र' और 'भक्ति' दो पद हैं। यहाँ 'राष्ट्र' के लिए 'भक्ति' की भावना व्यक्त की जा रही है। 'सम्प्रदान' का अर्थ होता है किसी के लिए समर्पण या अर्पण करना। इस प्रकार, 'राष्ट्रभक्ति' का अर्थ है 'राष्ट्र के लिए भक्ति'। यह 'सम्प्रदान तत्पुरुष' समास का उदाहरण है क्योंकि इसमें भक्ति का समर्पण राष्ट्र के लिए किया गया है।
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अन्य विकल्पों की अस्वीकृति:
- कर्म तत्पुरुष: इसमें क्रिया का फल कर्म के रूप में होता है। उदाहरण के लिए, 'फल खाना' में 'फल' कर्म है। 'राष्ट्रभक्ति' में ऐसा कोई कर्म नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
- करण तत्पुरुष: इसमें साधन या उपकरण का उल्लेख होता है। उदाहरण के लिए, 'कलम से लिखना' में 'कलम' करण है। 'राष्ट्रभक्ति' में कोई साधन या उपकरण नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
- संबंध तत्पुरुष: इसमें संबंध का उल्लेख होता है। उदाहरण के लिए, 'राम का घर' में 'राम' का संबंध 'घर' से है। 'राष्ट्रभक्ति' में ऐसा कोई संबंध नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
इस प्रकार, 'राष्ट्रभक्ति' में प्रयुक्त समास 'सम्प्रदान तत्पुरुष' है, क्योंकि यह राष्ट्र के लिए भक्ति के समर्पण को दर्शाता है।
प्रश्न 657
समास की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
समास की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनने के लिए हमें यह समझना होगा कि दिए गए विकल्पों में से कौन सा समास के प्रकार के अनुसार सही नहीं है।
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आत्मविश्वास – अधिकरण तत्पुरुष: 'आत्मविश्वास' में 'आत्म' और 'विश्वास' का मेल है, जो अधिकरण तत्पुरुष समास के अंतर्गत आता है। इसमें 'आत्म' का अर्थ 'स्वयं' होता है और यह अधिकरण कारक को दर्शाता है।
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समाचारपत्र – सम्प्रदान तत्पुरुष: 'समाचारपत्र' में 'समाचार' और 'पत्र' का मेल है, जो सम्प्रदान तत्पुरुष समास के अंतर्गत आता है। इसमें 'समाचार' का अर्थ 'खबर' होता है और 'पत्र' का अर्थ 'कागज' होता है, जो सम्प्रदान कारक को दर्शाता है।
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शिक्षणेतर – अपादान तत्पुरुष: 'शिक्षणेतर' में 'शिक्षण' और 'इतर' का मेल है, जो अपादान तत्पुरुष समास के अंतर्गत आता है। इसमें 'शिक्षण' का अर्थ 'पढ़ाई' होता है और 'इतर' का अर्थ 'अलग' होता है, जो अपादान कारक को दर्शाता है।
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गुणातीत – करण तत्पुरुष: 'गुणातीत' में 'गुण' और 'अतीत' का मेल है। यह करण तत्पुरुष समास के अंतर्गत नहीं आता है। 'गुणातीत' का अर्थ है 'गुणों से परे', जो करण कारक को नहीं दर्शाता है। इसलिए, यह विकल्प समास की दृष्टि से असंगत है।
इस प्रकार, विकल्प 4 'गुणातीत – करण तत्पुरुष' समास की दृष्टि से असंगत है, क्योंकि यह करण तत्पुरुष समास के अंतर्गत नहीं आता है। यही कारण है कि विकल्प 4 सही उत्तर है।
प्रश्न 658
समास की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
समास की दृष्टि से असंगत विकल्प आकंठ – बहुव्रीहि है, क्योंकि:
- आकंठ का समास विग्रह होता है 'कंठ तक' या 'कंठ पर्यंत'। इसमें 'अ' उपसर्ग लगा है जो 'तक' या 'पर्यंत' का अर्थ देता है। यह अव्ययीभाव समास का उदाहरण है, जहाँ पहला पद अव्यय होता है और प्रधान होता है। बहुव्रीहि समास में दोनों पद अप्रधान होते हैं और किसी तीसरे पद की ओर संकेत करते हैं, जो कि 'आकंठ' में नहीं है। इसलिए, 'आकंठ' का बहुव्रीहि समास होना असंगत है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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कनकलता – कर्मधारय: 'कनकलता' का समास विग्रह होता है 'कनक के समान लता'। यहाँ 'कनक' (सोना) विशेषण है और 'लता' विशेष्य। कर्मधारय समास में विशेषण-विशेष्य या उपमेय-उपमान का संबंध होता है, जो यहाँ मौजूद है। इसलिए यह विकल्प संगत है।
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सचिवालय – तत्पुरुष: 'सचिवालय' का समास विग्रह होता है 'सचिव का आलय' (सचिव का घर)। यहाँ 'का' संबंध कारक है, और तत्पुरुष समास में कारक चिन्हों का लोप होता है। इसलिए यह विकल्प भी संगत है।
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चौराहा – द्विगु: 'चौराहा' का समास विग्रह होता है 'चार राहों का समूह'। द्विगु समास में पहला पद संख्यावाचक होता है और समूह का बोध कराता है, जो यहाँ स्पष्ट है। इसलिए यह विकल्प भी संगत है।
अतः, स्पष्ट है कि आकंठ – बहुव्रीहि ही असंगत विकल्प है, क्योंकि 'आकंठ' अव्ययीभाव समास का उदाहरण है, न कि बहुव्रीहि समास का।
प्रश्न 659
तत्पुरुष समास का कौन-सा युग्म असंगत
है ?
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उत्तर और व्याख्या
तत्पुरुष समास के संदर्भ में, विकल्प 2 "तुलसीकृत - संबंध तत्पुरुष" असंगत है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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तुलसीकृत - संबंध तत्पुरुष: यह युग्म असंगत है क्योंकि "तुलसीकृत" में "तुलसी" और "कृत" शब्दों का मेल है, जो कि संबंध तत्पुरुष समास नहीं बनाता। संबंध तत्पुरुष समास में संबंध का भाव होता है, जैसे "राजपुत्र" (राजा का पुत्र)। "तुलसीकृत" में ऐसा कोई संबंध नहीं है, बल्कि यह कर्म तत्पुरुष समास है, जिसमें "तुलसी द्वारा किया गया" का भाव है।
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आशातीत - कर्म तत्पुरुष: यह युग्म संगत है क्योंकि "आशातीत" में "आशा" और "अतीत" का मेल है, जो कि कर्म तत्पुरुष समास बनाता है। इसमें "आशा से परे" का भाव है, जो कि कर्म का संकेत देता है।
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रसोईघर - संप्रदान तत्पुरुष: यह युग्म भी संगत है। "रसोईघर" में "रसोई" और "घर" का मेल है, जो कि संप्रदान तत्पुरुष समास बनाता है। इसमें "रसोई के लिए घर" का भाव है, जो कि संप्रदान का संकेत देता है।
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गृहस्थ - अधिकरण वित्पुरुष: यह युग्म भी संगत है। "गृहस्थ" में "गृह" और "स्थ" का मेल है, जो कि अधिकरण वित्पुरुष समास बनाता है। इसमें "गृह में स्थित" का भाव है, जो कि अधिकरण का संकेत देता है।
इस प्रकार, विकल्प 2 "तुलसीकृत - संबंध तत्पुरुष" असंगत है क्योंकि यह संबंध तत्पुरुष समास नहीं बनाता, जबकि अन्य विकल्प अपने-अपने समास के प्रकार के अनुसार संगत हैं।
प्रश्न 660
तत्पुरुष समास का कौन-सा समस्तपद अपने युग्म से सही सुमेलित नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
The correct option is 1:
तत्पुरुष समास में समस्तपद का विग्रह करने पर कारक चिह्न (postposition) के अनुसार उसके भेद का निर्धारण होता है। 'गुरुदक्षिणा' का समास विग्रह होता है 'गुरु के लिए दक्षिणा' (दक्षिणा for the Guru)। यहाँ 'के लिए' कारक चिह्न का प्रयोग हुआ है, जो सम्प्रदान तत्पुरुष (Dative Tatpurush) का चिह्न है। सम्प्रदान तत्पुरुष में दान, भेंट या किसी के लिए किए गए कार्य का भाव होता है। लेकिन, विकल्प में इसे 'संबंध तत्पुरुष' (Relational Tatpurush, जिसका चिह्न 'का, के, की' होता है) के रूप में सुमेलित किया गया है। चूंकि 'गुरुदक्षिणा' वास्तव में 'सम्प्रदान तत्पुरुष' का उदाहरण है और इसे 'संबंध तत्पुरुष' के साथ सुमेलित किया गया है, इसलिए यह युग्म सही सुमेलित नहीं है। यही कारण है कि यह विकल्प प्रश्न का सही उत्तर है।
The incorrect option is 2:
'देशाटन' का समास विग्रह होता है 'देश में अटन' (देश में घूमना या भ्रमण)। यहाँ 'में' कारक चिह्न का प्रयोग हुआ है, जो अधिकरण तत्पुरुष (Locative Tatpurush) का चिह्न है। अधिकरण तत्पुरुष क्रिया के आधार (स्थान या समय) को दर्शाता है। इसलिए, 'देशाटन – अधिकरण तत्पुरुष' युग्म सही सुमेलित है।
The incorrect option is 3:
'रेखांकित' का समास विग्रह होता है 'रेखा से अंकित' (रेखा द्वारा चिन्हित)। यहाँ 'से' कारक चिह्न का प्रयोग हुआ है, जिसका अर्थ 'के द्वारा' है, और यह करण तत्पुरुष (Instrumental Tatpurush) का चिह्न है। करण तत्पुरुष वह होता है जहाँ कोई साधन या माध्यम प्रयुक्त होता है। अतः, 'रेखांकित – करण तत्पुरुष' युग्म सही सुमेलित है।
The incorrect option is 4:
'देशनिर्वासित' का समास विग्रह होता है 'देश से निर्वासित' (देश से अलग किया गया)। यहाँ 'से' कारक चिह्न का प्रयोग हुआ है, जो अलगाव (separation) के भाव को दर्शाता है, और यह अपादान तत्पुरुष (Ablative Tatpurush) का चिह्न है। अपादान तत्पुरुष में किसी वस्तु के अलग होने का भाव होता है। इसलिए, 'देशनिर्वासित – अपादान तत्पुरुष' युग्म भी सही सुमेलित है।