HTET परीक्षा - Level 3 PGT - हिंदी
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 3 PGT की तैयारी
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 101
भाववाचक संज्ञा किस विकल्प में नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 3 सही है क्योंकि 'कुटिल' एक विशेषण है, भाववाचक संज्ञा नहीं। यह किसी व्यक्ति या वस्तु के स्वभाव या गुण को दर्शाता है, जैसे "वह कुटिल है" या "उसकी कुटिल मुस्कान"।
अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि:
- गांभीर्य: यह 'गंभीर' शब्द से बनी भाववाचक संज्ञा है, जो गंभीरता के भाव को दर्शाती है।
- शैशव: यह 'शिशु' शब्द से बनी भाववाचक संज्ञा है, जो बचपन की अवस्था को दर्शाती है।
- खुजलाहट: यह 'खुजलाना' क्रिया से बनी भाववाचक संज्ञा है, जो खुजली के भाव को दर्शाती है।
इसलिए, केवल 'कुटिल' ही भाववाचक संज्ञा नहीं है।
प्रश्न 102
संज्ञापद' का विकारक पद कौन-सा नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
संज्ञापद का विकारक पद 'काल' नहीं है, क्योंकि 'काल' क्रिया का विकारक है, संज्ञा का नहीं।
यहाँ अन्य विकल्पों की व्याख्या दी गई है:
-
लिंग: संज्ञा का विकारक है। संज्ञा शब्दों का लिंग (स्त्रीलिंग या पुल्लिंग) बदल सकता है, जिससे वाक्य का अर्थ प्रभावित होता है। उदाहरण के लिए, 'लड़का' और 'लड़की' दो अलग-अलग लिंगों के संज्ञा शब्द हैं।
-
वचन: संज्ञा का विकारक है। संज्ञा शब्दों का वचन (एकवचन या बहुवचन) बदल सकता है, जिससे वाक्य में संख्या का बोध होता है। उदाहरण के लिए, 'पुस्तक' एकवचन है और 'पुस्तकें' बहुवचन है।
-
कारक: संज्ञा का विकारक है। कारक संज्ञा शब्दों का वाक्य में क्रिया और अन्य शब्दों के साथ संबंध दर्शाता है। कारक चिह्नों (जैसे ने, को, से, के लिए) के प्रयोग से संज्ञा शब्दों के अर्थ में परिवर्तन होता है।
इसलिए, 'काल' क्रिया का विकारक होने के कारण संज्ञापद का विकारक पद नहीं है। 'काल' क्रिया के होने के समय को दर्शाता है, न कि संज्ञा में कोई परिवर्तन लाता है।
प्रश्न 103
शब्दार्थ की दृष्टि से बेमेल को छाँटिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 2 सही है क्योंकि 'कीर्तिमान - यशस्वी' और 'कीर्तिमान् - उपलब्धि/रिकॉर्ड' में वर्तनी (स्पेलिंग) का अंतर अर्थ में स्पष्ट और स्थापित अंतर को दर्शाता है। 'कीर्तिमान' का अर्थ 'यशस्वी' होता है, जबकि 'कीर्तिमान्' का अर्थ 'उपलब्धि' या 'रिकॉर्ड' होता है। यह अंतर शब्दार्थ की दृष्टि से महत्वपूर्ण है और दोनों शब्दों के अलग-अलग प्रयोग होते हैं।
अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि:
-
Option 1: 'अहम - ख़ास/विशेष' और 'अहम् - 'मैं' का पर्याय' में वर्तनी का अंतर अर्थ में स्पष्ट अंतर को दर्शाता है। 'अहम' का अर्थ 'ख़ास/विशेष' हो सकता है, और 'अहम्' 'मैं' का पर्याय है।
-
Option 3: 'जंग - युद्ध' और 'ज़ंग - लोहे पर लगने वाला मोरचा' में वर्तनी का अंतर अर्थ में स्पष्ट अंतर को दर्शाता है। 'जंग' का अर्थ 'युद्ध' होता है, जबकि 'ज़ंग' का अर्थ 'लोहे पर लगने वाला मोरचा' होता है।
-
Option 4: 'जिला - प्रभा/चमक' और 'ज़िला - जनपद' में वर्तनी का अंतर अर्थ में स्पष्ट अंतर को दर्शाता है। 'जिला' का अर्थ 'प्रभा/चमक' हो सकता है, और 'ज़िला' का अर्थ 'जनपद' होता है।
इसलिए, केवल Option 2 में दिए गए शब्दों के अर्थों में वर्तनी के अंतर के कारण स्पष्ट और स्थापित अंतर है, जो इसे बेमेल बनाता है।
प्रश्न 104
कालिदास को नाट्यजगत् का शेक्सपीयर माना जाता है
- रेखांकित पद में संज्ञाभेद इंगित कीजिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
कालिदास को नाट्यजगत् का शेक्सपीयर माना जाता है - रेखांकित पद में संज्ञाभेद जातिवाचक संज्ञा है, क्योंकि:
-
जातिवाचक संज्ञा (Option 2) सही क्यों है: "शेक्सपीयर" शब्द यहाँ किसी विशेष व्यक्ति (विलियम शेक्सपियर) को नहीं, बल्कि एक प्रकार के नाटककार या उस स्तर की प्रतिभा वाले व्यक्ति को दर्शाता है। जब हम कहते हैं कि कालिदास नाट्यजगत् के शेक्सपियर हैं, तो हम कालिदास की तुलना शेक्सपियर की प्रतिभा, नाटक लेखन शैली और नाट्य जगत में उनके योगदान से कर रहे हैं। इस प्रकार, "शेक्सपीयर" शब्द एक जाति या वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है, न कि किसी विशेष व्यक्ति का। यह एक ऐसे व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है जो नाटक लेखन में बहुत कुशल और प्रसिद्ध है।
-
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
- व्यक्तिवाचक संज्ञा (Option 1): व्यक्तिवाचक संज्ञा किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु का नाम होती है। यदि हम विलियम शेक्सपियर की बात कर रहे होते, तो यह व्यक्तिवाचक संज्ञा होती। लेकिन यहाँ "शेक्सपीयर" शब्द का प्रयोग एक उपाधि या तुलना के रूप में हो रहा है, इसलिए यह व्यक्तिवाचक संज्ञा नहीं है।
- प्राणिवाचक संज्ञा (Option 3): प्राणिवाचक संज्ञा जीवित प्राणियों को दर्शाती है। हालांकि शेक्सपियर एक जीवित व्यक्ति थे, लेकिन यहाँ "शेक्सपीयर" शब्द का प्रयोग एक प्राणी के रूप में नहीं, बल्कि एक नाटककार के रूप में हो रहा है। इसलिए यह प्राणिवाचक संज्ञा नहीं है।
- समूहवाचक संज्ञा (Option 4): समूहवाचक संज्ञा किसी समूह या समुदाय को दर्शाती है। "शेक्सपीयर" शब्द किसी समूह को नहीं दर्शाता है, इसलिए यह समूहवाचक संज्ञा नहीं है।
इसलिए, "शेक्सपीयर" शब्द का प्रयोग यहाँ एक जातिवाचक संज्ञा के रूप में किया गया है, जो नाटककारों के एक वर्ग या प्रकार को दर्शाता है।
प्रश्न 105
असंगत विकल्प का चयन कीजिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
असंगत विकल्प है: 4. बाजी - दादी
व्याख्या:
-
बाजी - दादी असंगत है क्योंकि 'बाजी' शब्द का अर्थ 'दादी' नहीं होता। 'बाजी' शब्द का अर्थ होता है 'घोड़ा', 'दांव', 'खेल' या 'शर्त'। 'दादी' के लिए हिंदी में 'दादी' शब्द ही प्रयोग होता है। इसलिए यह युग्म अर्थ की दृष्टि से मेल नहीं खाता।
-
सतिया - स्वस्तिक चिह्न: यह सही है क्योंकि 'सतिया' शब्द का प्रयोग अक्सर स्वस्तिक चिह्न के लिए किया जाता है, खासकर धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भों में।
-
भुँजा - भुना हुआ अन्न: यह भी सही है क्योंकि 'भुँजा' शब्द भुने हुए अन्न, जैसे चने या धान, के लिए इस्तेमाल होता है।
-
दसतपा - तपते दस दिन: यह भी सही है क्योंकि 'दसतपा' शब्द ज्येष्ठ महीने के उन दस दिनों के लिए प्रयोग होता है जब बहुत गर्मी पड़ती है।
इसलिए, केवल बाजी - दादी युग्म ही असंगत है, क्योंकि 'बाजी' का अर्थ 'दादी' नहीं होता।
प्रश्न 106
बच्चों से शांत नहीं रहा जा सकता।'
उक्त वाक्य में किस 'वाच्य' का प्रयोग हुआ है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
भाववाच्य
व्याख्या:
'बच्चों से शांत नहीं रहा जा सकता' वाक्य में 'भाववाच्य' का प्रयोग हुआ है, क्योंकि:
-
भाव की प्रधानता: इस वाक्य में कर्ता (बच्चे) या कर्म (शांत रहना) की प्रधानता नहीं है, बल्कि 'शांत न रह पाने' के भाव की प्रधानता है। क्रिया का भाव ही मुख्य है।
-
अकर्मक क्रिया: 'रहा जा सकता' क्रिया अकर्मक है, और भाववाच्य में प्रायः अकर्मक क्रिया का प्रयोग होता है।
-
असमर्थता का बोध: वाक्य में बच्चों की शांत रहने में असमर्थता का भाव व्यक्त हो रहा है, जो भाववाच्य का एक विशिष्ट लक्षण है।
अन्य विकल्पों का खंडन:
-
कर्तृवाच्य: कर्तृवाच्य में कर्ता की प्रधानता होती है और क्रिया कर्ता के लिंग और वचन के अनुसार बदलती है। इस वाक्य में ऐसा नहीं है।
-
कर्मवाच्य: कर्मवाच्य में कर्म की प्रधानता होती है और क्रिया कर्म के लिंग और वचन के अनुसार बदलती है। इस वाक्य में कर्म स्पष्ट रूप से मौजूद नहीं है और क्रिया का रूप कर्म के अनुसार नहीं है।
-
मिश्रवाच्य: मिश्रवाच्य वाक्य संरचना का एक प्रकार है, वाच्य का नहीं। यह दो या दो से अधिक उपवाक्यों से मिलकर बनता है। दिया गया वाक्य सरल वाक्य है, मिश्र वाक्य नहीं।
इसलिए, स्पष्ट रूप से, 'बच्चों से शांत नहीं रहा जा सकता' वाक्य में 'भाववाच्य' का प्रयोग हुआ है।
प्रश्न 107
तूरिया : तूरीया के लिए सटीक शब्द-युग्म है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
तूरिया : तूरीया के लिए सटीक शब्द-युग्म है : एक औज़ार : ब्रह्मलीन होने की स्थिति
व्याख्या:
तूरिया, अद्वैत वेदांत में, चेतना की चौथी अवस्था को संदर्भित करता है, जो जागृति (वैश्वानर), स्वप्न (तैजस), और गहरी नींद (प्रज्ञा) से परे है। यह वह अवस्था है जहाँ व्यक्ति ब्रह्म के साथ एकरूपता का अनुभव करता है, जिसे "ब्रह्मलीन होने की स्थिति" कहा जाता है।
-
एक औज़ार: यहाँ "औज़ार" एक प्रतीकात्मक अर्थ में है। तूरिया एक ऐसा "औज़ार" है जिसके माध्यम से व्यक्ति अपनी चेतना को जागृति, स्वप्न और गहरी नींद की अवस्थाओं से परे ले जाकर ब्रह्म के साथ एकरूपता का अनुभव करता है। यह एक ऐसा माध्यम है जिससे व्यक्ति आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करता है।
-
ब्रह्मलीन होने की स्थिति: यह तूरिया का सटीक वर्णन है। यह वह अवस्था है जहाँ व्यक्तिगत चेतना सार्वभौमिक चेतना में विलीन हो जाती है। यह मुक्ति और परम आनंद की अवस्था है।
अन्य विकल्पों की अस्वीकृति:
-
एक छंद : बाँसुरी: "छंद" और "बाँसुरी" दोनों ही संगीत से संबंधित हैं, लेकिन इनका तूरिया से कोई संबंध नहीं है। तूरिया चेतना की एक अवस्था है, न कि कोई संगीत वाद्य यंत्र या साहित्यिक रूप।
-
शीघ्र : तरकश: "शीघ्र" का अर्थ है जल्दी, और "तरकश" तीर रखने का पात्र होता है। इन दोनों शब्दों का तूरिया से कोई संबंध नहीं है।
-
तुरही : सूरज: "तुरही" एक वाद्य यंत्र है, और "सूरज" एक खगोलीय पिंड है। इनका तूरिया से कोई संबंध नहीं है।
इसलिए, केवल विकल्प 4, "एक औज़ार : ब्रह्मलीन होने की स्थिति," तूरिया के अर्थ को सटीक रूप से दर्शाता है। यह विकल्प तूरिया को एक ऐसे माध्यम के रूप में प्रस्तुत करता है जिसके द्वारा व्यक्ति ब्रह्म के साथ एकरूपता प्राप्त करता है।
प्रश्न 108
इनमें से किस आचार्य ने शब्द-शक्ति के स्थान पर 'शब्द-व्यापार' पद का प्रयोग किया है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
मम्मट ने शब्द-शक्ति के स्थान पर 'शब्द-व्यापार' पद का प्रयोग किया है, इसलिए विकल्प 2 सही है।
विस्तृत स्पष्टीकरण:
मम्मट, 11वीं शताब्दी के एक प्रमुख भारतीय काव्यशास्त्री थे। उन्होंने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ 'काव्यप्रकाश' में शब्द की शक्तियों (अभिधा, लक्षणा, व्यंजना) का विस्तृत विवेचन किया है। हालांकि, उन्होंने इन शक्तियों को 'शब्द-व्यापार' के रूप में भी संबोधित किया। 'शब्द-व्यापार' पद का प्रयोग करके मम्मट ने शब्द की क्रियाशीलता और अर्थ बोध कराने की प्रक्रिया पर जोर दिया। उनका मानना था कि शब्द केवल स्थिर शक्तियां नहीं हैं, बल्कि वे सक्रिय रूप से अर्थ उत्पन्न करने में संलग्न होते हैं। 'शब्द-व्यापार' पद शब्द की अर्थ-उत्पादन प्रक्रिया की गतिशीलता को दर्शाता है।
अन्य विकल्पों की अस्वीकृति:
-
वामन: वामन रीति संप्रदाय के प्रवर्तक थे और उन्होंने काव्य में रीति (शैली) को महत्वपूर्ण माना। उन्होंने शब्द-शक्ति के स्थान पर 'शब्द-व्यापार' पद का प्रयोग नहीं किया।
-
दण्डी: दण्डी अलंकार संप्रदाय के आचार्य थे और उन्होंने 'काव्यादर्श' नामक ग्रंथ लिखा। उन्होंने अलंकारों के महत्व पर जोर दिया, लेकिन शब्द-शक्ति के स्थान पर 'शब्द-व्यापार' पद का प्रयोग नहीं किया।
-
विश्वनाथ: विश्वनाथ 14वीं शताब्दी के आचार्य थे और उन्होंने 'साहित्य दर्पण' नामक ग्रंथ लिखा। उन्होंने रस सिद्धांत का विस्तृत विवेचन किया, लेकिन शब्द-शक्ति के स्थान पर 'शब्द-व्यापार' पद का प्रयोग करने के लिए वे प्रसिद्ध नहीं हैं।
इसलिए, मम्मट ही वह आचार्य हैं जिन्होंने शब्द-शक्ति के स्थान पर 'शब्द-व्यापार' पद का प्रयोग किया, जिससे विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 109
विशेषण से बनी भाववाचक संज्ञा है -
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विशेषण से बनी भाववाचक संज्ञा 'लाघव' है, क्योंकि 'लाघव' शब्द 'लघु' विशेषण से बना है। 'लघु' का अर्थ होता है छोटा या कम, और 'लाघव' का अर्थ होता है लघुता, कमी या संक्षिप्तता - जो कि एक भाव है।
अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि:
-
लड़कपन: यह शब्द 'लड़का' जातिवाचक संज्ञा से बना है, विशेषण से नहीं। 'लड़का' एक व्यक्ति को दर्शाता है, जबकि 'लड़कपन' उस अवस्था या भाव को दर्शाता है जो लड़के होने से जुड़ा है।
-
अपनत्व: यह शब्द 'अपना' सर्वनाम से बना है, विशेषण से नहीं। 'अपना' स्वामित्व या संबंध दर्शाता है, जबकि 'अपनत्व' अपनेपन की भावना को दर्शाता है।
-
चुनाव: यह शब्द 'चुनना' क्रिया से बना है, विशेषण से नहीं। 'चुनना' एक क्रिया है जिसका अर्थ है किसी चीज का चयन करना, जबकि 'चुनाव' उस चयन की प्रक्रिया या परिणाम को दर्शाता है।
इसलिए, केवल 'लाघव' ही विशेषण ('लघु') से बनी भाववाचक संज्ञा है।
प्रश्न 110
किन समश्रुत भिन्नार्थक शब्दों का अर्थ-भेद सुमेलित नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
उपेक्षा - अपेक्षा = आशा - ध्यान न देना, यह समश्रुत भिन्नार्थक शब्दों का अर्थ-भेद सुमेलित नहीं है, क्योंकि 'उपेक्षा' का अर्थ 'ध्यान न देना' सही है, लेकिन 'अपेक्षा' का अर्थ 'आशा' नहीं, बल्कि 'आवश्यकता' या 'तुलना' होता है। इसलिए विकल्प 4 सही है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
-
कंथा - कथा = गुदड़ी - कहानी: यह सुमेलित है। 'कंथा' का अर्थ गुदड़ी होता है और 'कथा' का अर्थ कहानी होता है।
-
इतर - इत्र = दूसरा - सुगंधित द्रव: यह भी सुमेलित है। 'इतर' का अर्थ दूसरा या अन्य होता है और 'इत्र' का अर्थ सुगंधित द्रव होता है।
-
तान - ताना = आलाप - आक्षेप वाक्य: यह सुमेलित है। 'तान' का अर्थ आलाप (संगीत में) होता है और 'ताना' का अर्थ आक्षेप वाक्य (व्यंग्य) हो सकता है।
इसलिए, केवल विकल्प 4 गलत है क्योंकि 'अपेक्षा' का सही अर्थ 'आशा' नहीं है।
प्रश्न 111
जातिवाचक संज्ञा' से रहित वाक्य है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
जातिवाचक संज्ञा' से रहित वाक्य है : पर्वतीय छटा दर्शनीय होती है।
Option 2 सही क्यों है:
'पर्वतीय छटा दर्शनीय होती है' वाक्य में 'पर्वतीय' शब्द एक विशेषण है जो 'छटा' (दृश्य) की विशेषता बता रहा है। 'छटा' शब्द भाववाचक संज्ञा हो सकता है, जो किसी दृश्य की सुंदरता या शोभा को दर्शाता है। इस वाक्य में कोई भी शब्द सीधे तौर पर किसी जाति या वर्ग को नहीं दर्शाता है। इसलिए, यह वाक्य जातिवाचक संज्ञा से रहित है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
-
Option 1: हमें बुराइयों से बचना चाहिए। इस वाक्य में 'बुराइयों' शब्द जातिवाचक संज्ञा है। यह बुराई के प्रकारों या बुराई करने वाले लोगों के समूह को दर्शाता है।
-
Option 3: वह कलियुग का दुर्योधन है। इस वाक्य में 'दुर्योधन' शब्द जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयुक्त हो रहा है। यह दुर्योधन जैसे बुरे आचरण वाले लोगों के वर्ग को दर्शाता है।
-
Option 4: यशोदा हमारे घर की सरस्वती है। इस वाक्य में 'सरस्वती' शब्द जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयुक्त हो रहा है। यह सरस्वती जैसी गुणों वाली महिलाओं के वर्ग को दर्शाता है।
इसलिए, केवल Option 2 ही ऐसा वाक्य है जिसमें जातिवाचक संज्ञा का प्रयोग नहीं हुआ है।
प्रश्न 112
किस वाक्य में 'कर्मवाच्य' नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'लड़के से रोया भी नहीं गया' वाक्य में 'कर्मवाच्य' नहीं है, क्योंकि यह 'भाववाच्य' का उदाहरण है।
Option 1 सही क्यों है:
- 'भाववाच्य' में क्रिया का भाव प्रधान होता है, न कि कर्म। इस वाक्य में 'रोया नहीं गया' क्रिया का भाव लड़के की असमर्थता को दर्शा रहा है। क्रिया का सीधा संबंध कर्म से नहीं है, बल्कि भाव से है। 'लड़के से' कर्ता के रूप में प्रतीत हो रहा है, लेकिन वास्तव में यह असमर्थता का अनुभव करने वाला है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
- Option 2: बच्चों द्वारा पुस्तक पढ़ी जा रही है। इस वाक्य में 'पुस्तक' कर्म है और 'बच्चों द्वारा' कर्ता है। क्रिया 'पढ़ी जा रही है' कर्म के अनुसार बदल रही है, इसलिए यह 'कर्मवाच्य' है।
- Option 3: महिलाओं द्वारा गीत गाए जा रहे थे। इस वाक्य में 'गीत' कर्म है और 'महिलाओं द्वारा' कर्ता है। क्रिया 'गाए जा रहे थे' कर्म के अनुसार बदल रही है, इसलिए यह 'कर्मवाच्य' है।
- Option 4: आनंदा के द्वारा हॉकी खेला गया। इस वाक्य में 'हॉकी' कर्म है और 'आनंदा के द्वारा' कर्ता है। क्रिया 'खेला गया' कर्म के अनुसार बदल रही है, इसलिए यह 'कर्मवाच्य' है।
इसलिए, केवल Option 1 ही 'कर्मवाच्य' नहीं है, बल्कि 'भाववाच्य' है।
प्रश्न 113
कौन-सा विकल्प सुमेलित नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
छंदों का बंधन - नई कविता की मुख्य विशेषता है। यह विकल्प सुमेलित नहीं है क्योंकि नई कविता छंदों के बंधन से मुक्ति और नए भावबोध को व्यक्त करने पर अधिक बल देती है। नई कविता में परंपरागत छंदों के नियमों का पालन अनिवार्य नहीं माना गया, बल्कि मुक्त छंद और लय के नए प्रयोगों को प्रोत्साहित किया गया। इसलिए, छंदों का बंधन नई कविता की मुख्य विशेषता नहीं है, बल्कि इससे मुक्ति पाना इसकी एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
-
कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास - नागार्जुन रचित काव्य पंक्तियाँ हैं। यह विकल्प सही है। ये पंक्तियाँ नागार्जुन की प्रसिद्ध कविता 'अकाल और उसके बाद' से ली गई हैं, जो अकाल की भयावहता और गरीबी का चित्रण करती हैं।
-
हिन्दी गज़ल विधा के प्रवर्तक - दुष्यंत कुमार को माना जाता है। यह विकल्प भी सही है। दुष्यंत कुमार को हिंदी गज़ल को लोकप्रिय बनाने और उसे एक नई पहचान दिलाने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने गज़ल को आम आदमी के मुद्दों और भावनाओं से जोड़ा।
-
‘जी हाँ हुजूर, मैं गीत बेचता हूँ’ - पंक्तियों के रचयिता भवानी प्रसाद मिश्र हैं। यह विकल्प भी सही है। यह पंक्ति भवानी प्रसाद मिश्र की प्रसिद्ध कविता 'गीत फरोश' से है, जो एक गीत बेचने वाले की मनोदशा और समाज की विडंबनाओं को दर्शाती है।
इसलिए, केवल पहला विकल्प गलत है क्योंकि नई कविता छंदों के बंधन से मुक्ति पर जोर देती है, न कि उस बंधन को अपनी विशेषता मानती है।
प्रश्न 114
किस विकल्प में शब्द-युग्म 'प्रदीप-प्रतीप' का सही अर्थ भेद प्रयुक्त हुआ है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 2 सही है क्योंकि 'प्रदीप' का अर्थ 'दीपक' होता है और 'प्रतीप' का अर्थ 'उलटा' या 'विपरीत' होता है। इसलिए, 'प्रदीप-प्रतीप' शब्द-युग्म का सही अर्थ भेद 'दीपक, उलटा' है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
-
Option 1: तख्ता, प्रतिज्ञा: 'प्रदीप' और 'प्रतीप' दोनों ही शब्दों का अर्थ 'तख्ता' या 'प्रतिज्ञा' नहीं होता है। इसलिए यह विकल्प गलत है।
-
Option 3: दीपक, समूह: 'प्रदीप' का अर्थ 'दीपक' तो होता है, लेकिन 'प्रतीप' का अर्थ 'समूह' नहीं होता। 'प्रतीप' का अर्थ 'उलटा' या 'विपरीत' होता है। इसलिए यह विकल्प गलत है।
-
Option 4: मूँगा, सबसे बड़ा: 'प्रदीप' और 'प्रतीप' दोनों ही शब्दों का अर्थ 'मूँगा' या 'सबसे बड़ा' नहीं होता है। इसलिए यह विकल्प गलत है।
अतः, केवल Option 2 ही 'प्रदीप' और 'प्रतीप' शब्दों के सही अर्थों को दर्शाता है।
प्रश्न 115
आज के ज़माने में कोई हरिश्चन्द्र नहीं है।'
उक्त वाक्य में प्रयुक्त 'हरिश्चन्द्र' शब्द में कौन-सी संज्ञा है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
जातिवाचक संज्ञा।
व्याख्या:
इस वाक्य में, "हरिश्चन्द्र" शब्द किसी विशेष व्यक्ति (राजा हरिश्चन्द्र) को संदर्भित नहीं कर रहा है, बल्कि यह एक ऐसे व्यक्ति के प्रकार या जाति को दर्शा रहा है जो सत्यवादी और ईमानदार हो। यह एक ऐसे व्यक्ति के गुण को दर्शाता है जो हरिश्चन्द्र के समान सत्यनिष्ठ हो। इसलिए, यह जातिवाचक संज्ञा है।
अन्य विकल्पों का खंडन:
-
व्यक्तिवाचक संज्ञा: व्यक्तिवाचक संज्ञा किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु का नाम होती है। यदि वाक्य में "हरिश्चन्द्र" शब्द राजा हरिश्चन्द्र को सीधे संदर्भित करता, तो यह व्यक्तिवाचक संज्ञा होती। लेकिन यहाँ यह एक प्रकार के व्यक्ति को दर्शा रहा है, इसलिए यह व्यक्तिवाचक संज्ञा नहीं है।
-
द्रव्यवाचक संज्ञा: द्रव्यवाचक संज्ञा उन वस्तुओं को दर्शाती है जिन्हें मापा या तोला जा सकता है, जैसे कि पानी, सोना, या अनाज। "हरिश्चन्द्र" कोई द्रव्य नहीं है, इसलिए यह द्रव्यवाचक संज्ञा नहीं है।
-
भाववाचक संज्ञा: भाववाचक संज्ञा किसी भाव, गुण, या अवस्था को दर्शाती है, जैसे कि ईमानदारी, खुशी, या दुख। जबकि हरिश्चन्द्र के गुण (सत्यवादिता) भाववाचक संज्ञा हो सकते हैं, स्वयं "हरिश्चन्द्र" शब्द यहाँ एक प्रकार के व्यक्ति को दर्शा रहा है, न कि किसी भाव को। इसलिए, यह भाववाचक संज्ञा नहीं है।
अतः, सही उत्तर विकल्प 1, जातिवाचक संज्ञा है।
प्रश्न 116
निम्न में से किस विकल्प में तत्सम शब्द प्रयुक्त नहीं हुए हैं ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 4 सही उत्तर है क्योंकि इसमें दिए गए दोनों शब्द, 'मिमियाना' और 'खिचड़ी', तत्सम शब्द नहीं हैं। 'मिमियाना' एक देशज शब्द है, जो स्थानीय बोलियों से आया है और 'खिचड़ी' एक देशज या अर्ध-तत्सम शब्द माना जा सकता है, लेकिन निश्चित रूप से तत्सम नहीं है। तत्सम शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से बिना किसी बदलाव के हिंदी में प्रयोग किए जाते हैं।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
-
Option 1: चक्र, कार्य: इस विकल्प में दोनों शब्द, 'चक्र' और 'कार्य', तत्सम शब्द हैं। ये दोनों शब्द संस्कृत से सीधे हिंदी में आए हैं।
-
Option 2: उज्ज्वल, कर्पास: इस विकल्प में भी दोनों शब्द, 'उज्ज्वल' और 'कर्पास', तत्सम शब्द हैं। 'उज्ज्वल' का अर्थ है चमकदार और 'कर्पास' का अर्थ है कपास।
-
Option 3: चित्रक, अवगुंठन: इस विकल्प में भी दोनों शब्द, 'चित्रक' और 'अवगुंठन', तत्सम शब्द हैं। 'चित्रक' एक प्रकार का पौधा या चित्रकार हो सकता है और 'अवगुंठन' का अर्थ है घूंघट।
इसलिए, केवल Option 4 में तत्सम शब्दों का प्रयोग नहीं हुआ है, इसलिए यही सही उत्तर है।
प्रश्न 117
शब्द प्रकृति की दृष्टि से कौन-सा युग्म असंगत है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
The correct option is 2:
उलूक – तद्भव शब्द वाला युग्म असंगत है क्योंकि व्याकरणिक दृष्टि से उलूक एक तत्सम शब्द है। तत्सम शब्द वे होते हैं जो संस्कृत भाषा से बिना किसी परिवर्तन के हिंदी में ज्यों के त्यों ग्रहण किए गए हैं। उलूक मूल संस्कृत का शब्द है, जिसका तद्भव रूप उल्लू होता है। तद्भव शब्द वे हैं जो संस्कृत से उत्पन्न होकर प्राकृत या अपभ्रंश के माध्यम से बदलते हुए हिंदी में आए हैं। चूँकि विकल्प में उलूक को तद्भव बताया गया है, जो कि इसकी वास्तविक प्रकृति के विपरीत है, इसलिए यह जोड़ा गलत या असंगत सिद्ध होता है। परीक्षा की दृष्टि से यह समझना आवश्यक है कि मूल संस्कृत ध्वनियाँ तत्सम की श्रेणी में आती हैं।
The incorrect option is 1:
छाया - तत्सम शब्द एक सही सुमेलित युग्म है। छाया शब्द संस्कृत मूल का है और हिंदी साहित्य में इसका प्रयोग उसी शुद्ध रूप में किया जाता है, इसलिए इसे तत्सम माना जाता है। यह शब्द अपनी वर्तनी और अर्थ में संस्कृत के समान बना हुआ है। इसमें कोई ध्वनि परिवर्तन नहीं हुआ है जो इसे तद्भव की श्रेणी में ले जाए। अतः यह युग्म प्रश्न की माँग के अनुसार असंगत नहीं है।
The incorrect option is 3:
हमेशा - विदेशज शब्द भी एक सही मेल है। हमेशा शब्द फारसी भाषा से हिंदी में आया है, जिसका अर्थ निरंतर या सदा होता है। हिंदी में प्रचलित ऐसे शब्द जो अरबी, फारसी या अंग्रेजी जैसी विदेशी भाषाओं से अपनाए गए हैं, उन्हें विदेशज शब्द कहा जाता है। यह शब्द हमारी बोलचाल की भाषा का अभिन्न अंग बन चुका है। अपनी व्युत्पत्ति के कारण यह शब्द विदेशी स्रोत को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
The incorrect option is 4:
बीहड़ – देशज शब्द का युग्म भी पूर्णतः सही है। देशज शब्द वे होते हैं जिनकी उत्पत्ति किसी स्थानीय बोली या क्षेत्रीय प्रभाव के कारण हुई है और उनका कोई संस्कृत मूल नहीं मिलता। बीहड़ शब्द मुख्य रूप से अनुपजाऊ या ऊबड़-खाबड़ भूमि के लिए ग्रामीण अंचलों में प्रयुक्त होता है। यह शब्द भारतीय परिवेश और जनभाषा की अपनी उपज है। इसलिए, यह युग्म व्याकरण के नियमों के अनुसार संगत है।
प्रश्न 118
निम्न में से कौन-सा विकल्प अनुचित है ?
- 'सामीप्य', 'कौशल' एवं 'माहात्म्य' शब्द
भाववाचक संज्ञा के उदाहरण हैं। - सर्वनाम विकारी पद है। 'वचन' तथा
'कारक' इसके विकारक हैं। - वाक्य-प्रयोग के आधार पर विशेषण के
दो भेद हैं – उद्देश्य विशेषण तथा विधेय
विशेषण। - द्विकर्मक क्रिया में
अप्राणिवाचक तथा द्वितीयकर्म प्राणिवाचक
होता है।
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
यह प्रश्न पूछ रहा है कि दिए गए विकल्पों में से कौन-सा कथन अनुचित (गलत) है। हमें उस विकल्प की पहचान करनी है जो व्याकरणिक रूप से सही नहीं है।
आइए प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण करें:
विकल्प 1: 'सामीप्य', 'कौशल' एवं 'माहात्म्य' शब्द भाववाचक संज्ञा के उदाहरण हैं।
- सामीप्य: 'समीप' (विशेषण) से बना भाववाचक संज्ञा है, जिसका अर्थ है निकटता।
- कौशल: 'कुशल' (विशेषण) से बना भाववाचक संज्ञा है, जिसका अर्थ है निपुणता या दक्षता।
- माहात्म्य: 'महात्मा' (संज्ञा/विशेषण) से बना भाववाचक संज्ञा है, जिसका अर्थ है महिमा या बड़प्पन।
ये सभी शब्द किसी भाव, गुण, दशा या अवस्था का बोध कराते हैं, अतः ये भाववाचक संज्ञा के उदाहरण हैं। यह कथन सही है।
विकल्प 2: सर्वनाम विकारी पद है। 'वचन' तथा 'कारक' इसके विकारक हैं।
- सर्वनाम विकारी पद है: सर्वनाम (जैसे मैं, तुम, वह) लिंग, वचन और कारक के अनुसार अपना रूप बदलते हैं, इसलिए ये विकारी पद कहलाते हैं।
- 'वचन' तथा 'कारक' इसके विकारक हैं:
- वचन के अनुसार परिवर्तन: 'मैं' (एकवचन) से 'हम' (बहुवचन)।
- कारक के अनुसार परिवर्तन: 'मैं' (कर्ता कारक) से 'मुझे' (कर्म कारक), 'मेरा' (संबंध कारक)।
यह कथन सही है।
विकल्प 3: वाक्य-प्रयोग के आधार पर विशेषण के दो भेद हैं – उद्देश्य विशेषण तथा विधेय विशेषण।
- उद्देश्य विशेषण: जो विशेषण विशेष्य (संज्ञा या सर्वनाम) से पहले आकर उसकी विशेषता बताता है, उसे उद्देश्य विशेषण कहते हैं। जैसे: "काला घोड़ा" में 'काला'।
- विधेय विशेषण: जो विशेषण विशेष्य के बाद और क्रिया से पहले आता है, उसे विधेय विशेषण कहते हैं। यह अक्सर क्रिया के पूरक के रूप में आता है। जैसे: "घोड़ा काला है" में 'काला'।
वाक्य में प्रयोग के स्थान के आधार पर विशेषण के ये दो भेद माने जाते हैं। यह कथन सही है।
विकल्प 4: द्विकर्मक क्रिया में प्रथम कर्म अप्राणिवाचक तथा द्वितीयकर्म प्राणिवाचक होता है।
- द्विकर्मक क्रिया वह होती है जिसमें दो कर्म होते हैं। हिंदी में सामान्यतः द्विकर्मक क्रियाओं में एक कर्म प्राणिवाचक (जीवित) और दूसरा अप्राणिवाचक (निर्जीव) होता है।
- नियम के अनुसार, द्विकर्मक क्रिया में प्राणिवाचक कर्म (मुख्य कर्म) पहले आता है और अप्राणिवाचक कर्म (गौण कर्म) बाद में आता है।
- उदाहरण: "शिक्षक ने छात्र को (प्राणिवाचक, प्रथम कर्म) पुस्तक (अप्राणिवाचक, द्वितीय कर्म) दी।"
- उदाहरण: "माँ ने बच्चे को (प्राणिवाचक, प्रथम कर्म) दूध (अप्राणिवाचक, द्वितीय कर्म) पिलाया।"
- यह विकल्प कहता है कि "प्रथम कर्म अप्राणिवाचक तथा द्वितीयकर्म प्राणिवाचक होता है", जो कि सामान्य नियम के विपरीत है। सामान्यतः प्रथम कर्म प्राणिवाचक और द्वितीय कर्म अप्राणिवाचक होता है।
अतः, यह कथन अनुचित (गलत) है।
दिए गए विकल्पों में से, विकल्प 4 में दिया गया कथन व्याकरणिक दृष्टि से गलत है। इसलिए, प्रश्न के अनुसार अनुचित विकल्प विकल्प 4 है।
अंतिम उत्तर: विकल्प 4
प्रश्न 119
चन्द्रमा-शिव' का सांकेतिक शब्द-युग्म है -
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न 120
संज्ञा की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए -
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।