HTET परीक्षा - Level 3 PGT - हिंदी
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 3 PGT की तैयारी
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 121
निम्नलिखित में से तत्सम शब्द है
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सही विकल्प है 2:
'तत्सम' शब्द वे होते हैं जो संस्कृत भाषा से बिना किसी परिवर्तन के हिंदी में आए हैं और ज्यों के त्यों प्रयोग किए जाते हैं। इन शब्दों का मूल स्वरूप संस्कृत में ही है। विकल्प 2, 'कपाट', एक तत्सम शब्द है, जिसका अर्थ 'दरवाजा' होता है। इसका तद्भव रूप 'किवाड़' है। चूंकि 'कपाट' संस्कृत से सीधे हिंदी में लिया गया है और अपने मूल रूप को बरकरार रखता है, इसलिए यह इस प्रश्न का सही उत्तर है।
गलत विकल्प है 1:
विकल्प 1, 'कोयल', तत्सम शब्द नहीं है। यह एक तद्भव शब्द है, जिसका अर्थ एक विशेष प्रकार का पक्षी होता है। 'कोयल' का मूल संस्कृत तत्सम शब्द 'कोकिल' होता है। हिंदी में बोलते और लिखते समय 'कोकिल' से बदलकर यह 'कोयल' बन गया है, जो तत्सम की परिभाषा के विपरीत है।
गलत विकल्प है 3:
विकल्प 3, 'ऊँट', भी तत्सम शब्द नहीं है। यह भी तद्भव श्रेणी में आता है। 'ऊँट' का तत्सम रूप 'उष्ट्र' है। संस्कृत शब्द 'उष्ट्र' समय के साथ परिवर्तित होकर हिंदी में 'ऊँट' के रूप में प्रचलित हुआ, जिसमें अनुनासिक ('ँ') का प्रयोग हुआ है, जो आमतौर पर तद्भव शब्दों में पाया जाता है।
गलत विकल्प है 4:
विकल्प 4, 'काठ', भी तत्सम शब्द नहीं है। यह 'काष्ठ' तत्सम शब्द का तद्भव रूप है, जिसका अर्थ लकड़ी होता है। तत्सम शब्द 'काष्ठ' के उच्चारण में जटिलता होने के कारण, यह धीरे-धीरे सरल होकर हिंदी में 'काठ' बन गया। इस प्रकार, 'काठ' शब्द परिवर्तन से गुजरा है और इसलिए तत्सम की बजाय तद्भव है।
प्रश्न 122
निम्नलिखित में से तद्भव शब्द है
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
तद्भव शब्द वे शब्द होते हैं जो संस्कृत से विकसित होकर प्राकृत, अपभ्रंश आदि भाषाओं के माध्यम से हिंदी में आए हैं। इन शब्दों का मूल संस्कृत में होता है, लेकिन समय के साथ इनका रूप बदल जाता है।
-
पराया: यह शब्द संस्कृत के "पर" से आया है, लेकिन यह तद्भव शब्द नहीं है क्योंकि इसका रूप और अर्थ सीधे संस्कृत से लिया गया है।
-
अपना: यह शब्द भी संस्कृत के "अपन" से आया है, लेकिन यह तद्भव शब्द नहीं है क्योंकि इसका रूप और अर्थ सीधे संस्कृत से लिया गया है।
-
जागरण: यह शब्द संस्कृत के "जागरण" से ही लिया गया है और इसका रूप और अर्थ सीधे संस्कृत से लिया गया है, इसलिए यह तद्भव शब्द नहीं है।
-
सभ्य: यह शब्द संस्कृत के "सभ्य" से आया है, लेकिन इसका रूप और अर्थ समय के साथ बदल गया है। यह शब्द हिंदी में तद्भव रूप में प्रयोग होता है। इसलिए यह तद्भव शब्द है।
इस प्रकार, दिए गए विकल्पों में से "सभ्य" ही तद्भव शब्द है।
प्रश्न 123
निम्नलिखित में से विदेशी शब्द नहीं है
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सही विकल्प है 4:
'खिड़की' (Khidki) शब्द एक 'देशज' शब्द है। हिंदी व्याकरण में, देशज शब्द वे शब्द होते हैं जो स्थानीय या क्षेत्रीय भाषाओं या बोलियों से हिंदी में आए हैं और जिनकी उत्पत्ति का कोई निश्चित स्रोत संस्कृत या कोई विदेशी भाषा नहीं है। ये शब्द आवश्यकतानुसार स्वयं ही विकसित हो गए और हिंदी भाषा का अभिन्न अंग बन गए। 'खिड़की' शब्द भी इसी श्रेणी में आता है, जिसका अर्थ है घर या कमरे में हवा और प्रकाश के लिए बनी जगह। यह मूल रूप से भारत के भीतर की भाषाओं से विकसित हुआ है, इसलिए यह विदेशी शब्द नहीं है।
गलत विकल्प 1 है (चाकू):
'चाकू' (Chaku) शब्द विदेशी भाषा से लिया गया है। यह मूल रूप से फ़ारसी (Persian) या तुर्की (Turkish) भाषा का शब्द है, जो उर्दू के माध्यम से हिंदी में आया और प्रचलित हो गया। हिंदी में प्रवेश करने के बाद भी इसकी विदेशी उत्पत्ति बनी हुई है। चूंकि यह विदेशी स्रोत से आया है, इसलिए यह प्रश्न का सही उत्तर नहीं हो सकता, जो गैर-विदेशी शब्द पूछ रहा है।
गलत विकल्प 2 है (पपीता):
'पपीता' (Papita) शब्द भी विदेशी मूल का है। यह फल पुर्तगालियों के माध्यम से भारत में आया था, और इसके नाम की उत्पत्ति पुर्तगाली भाषा से हुई है। पुर्तगाली भाषा से लिए गए कई शब्द हिंदी शब्दावली में शामिल हैं, और 'पपीता' उन्हीं में से एक है। इसलिए, यह एक विदेशी शब्द है और प्रश्न के विपरीत है।
गलत विकल्प 3 है (गमला):
'गमला' (Gamla) शब्द की उत्पत्ति पुर्तगाली भाषा से हुई है। पुर्तगाली लोग जब भारत आए, तो वे अपने साथ कई नई वस्तुएं और उनके नाम लेकर आए। 'गमला' (Flowerpot) शब्द भी उन्हीं में से एक है। चूंकि इसकी उत्पत्ति पुर्तगाली है, इसलिए यह एक विदेशी शब्द है।
प्रश्न 124
लज्जा' शब्द है
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'लज्जा' शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है और इसका अर्थ है 'शर्म' या 'संकोच'। संस्कृत से सीधे लिए गए शब्दों को 'तत्सम' शब्द कहा जाता है। इसलिए, 'लज्जा' शब्द को तत्सम शब्द के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
अब हम अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
-
तद्भव: तद्भव शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से उत्पन्न होकर प्राकृत और अपभ्रंश के माध्यम से हिंदी में आए हैं। ये शब्द अपने मूल रूप से कुछ परिवर्तित होते हैं। 'लज्जा' शब्द में ऐसा कोई परिवर्तन नहीं हुआ है, इसलिए यह तद्भव नहीं है।
-
देशज: देशज शब्द वे होते हैं जो किसी विशेष क्षेत्र या भाषा में उत्पन्न होते हैं और जिनका मूल संस्कृत से नहीं होता। 'लज्जा' शब्द संस्कृत से लिया गया है, इसलिए यह देशज नहीं है।
-
अर्ध तत्सम: अर्ध तत्सम शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से लिए गए होते हैं लेकिन उनमें कुछ परिवर्तन होते हैं। 'लज्जा' शब्द में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है, इसलिए यह अर्ध तत्सम नहीं है।
इस प्रकार, 'लज्जा' शब्द को सही रूप से तत्सम शब्द के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
प्रश्न 125
निम्न में से तत्सम है
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
तत्सम शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से सीधे हिंदी में आए हैं और जिनका रूप लगभग अपरिवर्तित रहता है। अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
-
वधू: यह शब्द संस्कृत से सीधे हिंदी में आया है और इसका रूप भी लगभग अपरिवर्तित है। संस्कृत में भी 'वधू' का अर्थ होता है 'दुल्हन' या 'पत्नी'। इसलिए यह एक तत्सम शब्द है।
-
घी: यह शब्द हिंदी में प्रचलित है, लेकिन यह संस्कृत का तत्सम शब्द नहीं है। संस्कृत में इसके लिए 'घृत' शब्द का प्रयोग होता है। इसलिए 'घी' तत्सम नहीं है।
-
खजूर: यह शब्द भी हिंदी में प्रचलित है, लेकिन यह संस्कृत का तत्सम शब्द नहीं है। संस्कृत में इसके लिए 'खर्जूर' शब्द का प्रयोग होता है। इसलिए 'खजूर' तत्सम नहीं है।
-
पलंग: यह शब्द भी हिंदी में प्रचलित है, लेकिन यह संस्कृत का तत्सम शब्द नहीं है। संस्कृत में इसके लिए 'शय्या' शब्द का प्रयोग होता है। इसलिए 'पलंग' तत्सम नहीं है।
इस प्रकार, 'वधू' ही एकमात्र ऐसा शब्द है जो संस्कृत से सीधे हिंदी में आया है और जिसका रूप अपरिवर्तित है, इसलिए यह तत्सम शब्द है। यही कारण है कि विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 126
निम्न में देशज शब्द है
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
देशज शब्द वे शब्द होते हैं जो किसी विशेष भाषा या क्षेत्र में उत्पन्न होते हैं और जिनका मूल उस भाषा या क्षेत्र में होता है। ये शब्द आमतौर पर विदेशी भाषाओं से नहीं लिए गए होते हैं।
-
कपास: यह एक देशज शब्द है। कपास का उपयोग भारत में प्राचीन काल से होता आ रहा है और यह शब्द हिंदी भाषा में उत्पन्न हुआ है। कपास एक प्राकृतिक रेशा है जो कपड़े बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग भारतीय कृषि और वस्त्र उद्योग में बहुत महत्वपूर्ण है।
-
इरादा: यह शब्द अरबी भाषा से लिया गया है। हिंदी में कई शब्द अरबी और फारसी भाषाओं से आए हैं, और इरादा उनमें से एक है। इसलिए, यह देशज शब्द नहीं है।
-
हास्य: यह शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है। संस्कृत से हिंदी में कई शब्द आए हैं, लेकिन ये देशज शब्द नहीं माने जाते क्योंकि इनका मूल संस्कृत में है।
-
सास: यह शब्द भी देशज नहीं है। यह संस्कृत शब्द "श्वश्रू" से व्युत्पन्न है, जो हिंदी में सास के रूप में प्रचलित है।
इस प्रकार, दिए गए विकल्पों में से "कपास" ही एकमात्र देशज शब्द है।
प्रश्न 127
निम्न में से कौन-सा शब्द 'योगरूढ़' है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'योगरूढ़' शब्द का अर्थ होता है वह शब्द जो दो या अधिक शब्दों के योग से बना हो और जिसका अर्थ उसके घटक शब्दों के अर्थ से भिन्न हो।
अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
-
अहिंसा: यह शब्द 'अ' (नहीं) और 'हिंसा' (किसी को चोट पहुँचाना) से मिलकर बना है। इसका अर्थ है 'हिंसा का अभाव'। यह शब्द अपने घटक शब्दों के अर्थ के अनुरूप ही है, इसलिए यह योगरूढ़ नहीं है।
-
पाशविक: यह शब्द 'पशु' से बना है और इसका अर्थ है 'पशुओं जैसा'। यह शब्द भी अपने घटक शब्द के अर्थ के अनुरूप है, इसलिए यह योगरूढ़ नहीं है।
-
मुख्यमंत्री: यह शब्द 'मुख्य' (प्रमुख) और 'मंत्री' (सरकारी अधिकारी) से मिलकर बना है। इसका अर्थ है 'प्रमुख मंत्री'। यह शब्द भी अपने घटक शब्दों के अर्थ के अनुरूप है, इसलिए यह योगरूढ़ नहीं है।
-
चक्षु:श्रवा: यह शब्द 'चक्षु' (आँख) और 'श्रवा' (सुनना) से मिलकर बना है। हालांकि, इसका अर्थ 'वह जो आँखों से सुनता है' नहीं है, बल्कि यह एक विशेष नाम है जो अपने घटक शब्दों के अर्थ से भिन्न है। इस प्रकार, यह शब्द योगरूढ़ है।
इस प्रकार, 'चक्षु:श्रवा' शब्द योगरूढ़ है क्योंकि इसका अर्थ उसके घटक शब्दों के अर्थ से भिन्न है। यही कारण है कि विकल्प 4 सही उत्तर है।
प्रश्न 128
तत्सम तद्भव की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
तत्सम और तद्भव शब्दों की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनने के लिए हमें यह समझना होगा कि तत्सम शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से सीधे लिए गए होते हैं और तद्भव शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से विकसित होकर प्राकृत, अपभ्रंश आदि के माध्यम से हिंदी में आए हैं।
-
वार्ताक – बैंगन: 'वार्ताक' संस्कृत का शब्द है और 'बैंगन' इसका तद्भव रूप है। यह जोड़ी तत्सम-तद्भव की दृष्टि से संगत है।
-
लोहमशा – लोमड़ी: 'लोहमशा' संस्कृत का शब्द है, लेकिन 'लोमड़ी' का इससे कोई तद्भव संबंध नहीं है। 'लोमड़ी' का मूल संस्कृत शब्द 'लोपामुद्रा' से माना जाता है, जो कि 'लोहमशा' से भिन्न है। इसलिए यह जोड़ी असंगत है।
-
मस्तक – माथा: 'मस्तक' संस्कृत का शब्द है और 'माथा' इसका तद्भव रूप है। यह जोड़ी तत्सम-तद्भव की दृष्टि से संगत है।
-
शण्ठिका – सोंठ: 'शण्ठिका' संस्कृत का शब्द है और 'सोंठ' इसका तद्भव रूप है। यह जोड़ी भी तत्सम-तद्भव की दृष्टि से संगत है।
इस प्रकार, विकल्प 2 'लोहमशा – लोमड़ी' असंगत है क्योंकि यह तत्सम-तद्भव की जोड़ी नहीं बनाता है।
प्रश्न 129
पटाखा' किस भाषा का शब्द है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
पटाखा' शब्द का सही उत्तर विकल्प 2 है, जो इसे पश्तो भाषा का शब्द बताता है। यहाँ पर हम इस उत्तर को सही ठहराने के लिए कुछ तथ्य और तर्क प्रस्तुत करेंगे:
-
पश्तो भाषा का प्रभाव: पश्तो भाषा अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में बोली जाती है। यह एक प्राचीन भाषा है और इसमें कई शब्द ऐसे हैं जो भारतीय उपमहाद्वीप की भाषाओं में भी समाहित हो गए हैं। 'पटाखा' शब्द का उपयोग विशेष रूप से ध्वनि और विस्फोटक वस्तुओं के संदर्भ में किया जाता है, जो पश्तो भाषा की विशेषताओं से मेल खाता है।
-
अन्य विकल्पों की असंगति:
- विकल्प 1: तुर्की शब्द: तुर्की भाषा में 'पटाखा' जैसा कोई शब्द नहीं है जो ध्वनि या विस्फोटक वस्तुओं के लिए प्रयुक्त होता हो। तुर्की भाषा की संरचना और शब्दावली पश्तो से भिन्न है।
- विकल्प 3: यूनानी शब्द: यूनानी भाषा की उत्पत्ति और शब्दावली भी 'पटाखा' शब्द से मेल नहीं खाती। यूनानी भाषा का प्रभाव मुख्य रूप से यूरोपीय भाषाओं पर देखा जाता है, न कि भारतीय उपमहाद्वीप की भाषाओं पर।
- विकल्प 4: लैटिन शब्द: लैटिन भाषा प्राचीन रोम की भाषा है और इसका प्रभाव मुख्य रूप से रोमांस भाषाओं पर है। 'पटाखा' शब्द लैटिन भाषा की शब्दावली में नहीं पाया जाता।
इस प्रकार, 'पटाखा' शब्द का पश्तो भाषा से संबंध स्थापित करना तर्कसंगत है और यही कारण है कि विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 130
पत्र' को कन्नड़ में क्या कहा जाता है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
कन्नड़ भाषा में 'पत्र' को 'कागद' कहा जाता है। यह सही उत्तर विकल्प 2 है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
-
विकल्प 2: कागद
कन्नड़ भाषा में 'कागद' का अर्थ 'पत्र' होता है। यह शब्द कन्नड़ में पत्र या चिट्ठी के लिए सामान्य रूप से उपयोग किया जाता है। इसलिए, यह सही उत्तर है। -
विकल्प 1: खत
'खत' हिंदी और उर्दू में पत्र के लिए उपयोग किया जाता है, लेकिन कन्नड़ में नहीं। इसलिए यह विकल्प गलत है। -
विकल्प 3: जावू
'जावू' का कन्नड़ भाषा में पत्र से कोई संबंध नहीं है। यह शब्द पत्र के अर्थ में उपयोग नहीं होता है, इसलिए यह विकल्प गलत है। -
विकल्प 4: चिट्ठी
'चिट्ठी' भी हिंदी में पत्र के लिए उपयोग किया जाता है, लेकिन कन्नड़ में नहीं। इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
इस प्रकार, 'पत्र' का कन्नड़ में सही अनुवाद 'कागद' है, जो विकल्प 2 है।
प्रश्न 131
सुमेलित कीजिए :
तत्सम – तद्भव
(क) पौष – (i) सींग
(ख) शृंग – (ii) बयार
(ग) वायु – (iii) फरसा
(घ) परशु – (iv) पूस
कूट :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
सुमेलित प्रश्न में तत्सम और तद्भव शब्दों का मिलान करना है। तत्सम शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से सीधे लिए गए हैं और तद्भव शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से विकसित होकर हिंदी में आए हैं।
अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
-
(क) पौष – (iv) पूस: 'पौष' एक संस्कृत शब्द है और इसका तद्भव रूप 'पूस' है। अतः यह मिलान सही है।
-
(ख) शृंग – (i) सींग: 'शृंग' संस्कृत का शब्द है और इसका तद्भव रूप 'सींग' है। यह मिलान भी सही है।
-
(ग) वायु – (ii) बयार: 'वायु' संस्कृत का शब्द है और इसका तद्भव रूप 'बयार' है। यह मिलान सही है।
-
(घ) परशु – (iii) फरसा: 'परशु' संस्कृत का शब्द है और इसका तद्भव रूप 'फरसा' है। यह मिलान भी सही है।
इस प्रकार, विकल्प 4 सही है क्योंकि यह सभी तत्सम-तद्भव शब्दों का सही मिलान प्रस्तुत करता है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
-
विकल्प 1: इसमें (ग) वायु – (iv) पूस और (घ) परशु – (ii) बयार का मिलान गलत है।
-
विकल्प 2: इसमें (क) पौष – (i) सींग और (ख) शृंग – (iv) पूस का मिलान गलत है।
-
विकल्प 3: इसमें (ग) वायु – (iii) फरसा और (घ) परशु – (ii) बयार का मिलान गलत है।
इसलिए, विकल्प 4 ही सही उत्तर है क्योंकि यह सभी तत्सम-तद्भव शब्दों का सही मिलान प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 132
किस विकल्प में तद्भव शब्द प्रयुक्त हुआ है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
तद्भव शब्द वे शब्द होते हैं जो संस्कृत से विकसित होकर प्राकृत और अपभ्रंश के माध्यम से हिंदी में आए हैं। ये शब्द समय के साथ अपने मूल रूप से थोड़ा बदल जाते हैं।
अब दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
-
ताम्र: यह शब्द संस्कृत से सीधे लिया गया है और इसका अर्थ है 'तांबा'। यह तत्सम शब्द है, क्योंकि यह अपने मूल रूप में ही हिंदी में प्रयुक्त होता है।
-
भौंरा: यह शब्द तद्भव है। इसका मूल संस्कृत शब्द 'भ्रमर' है, जो प्राकृत और अपभ्रंश के माध्यम से बदलकर 'भौंरा' बन गया है। यह शब्द हिंदी में अपने परिवर्तित रूप में प्रयुक्त होता है, इसलिए यह तद्भव शब्द है।
-
ज्येष्ठ: यह भी संस्कृत से लिया गया तत्सम शब्द है। इसका अर्थ है 'सबसे बड़ा' या 'वरिष्ठ'। यह अपने मूल रूप में ही हिंदी में प्रयुक्त होता है।
-
श्रावण: यह शब्द भी संस्कृत से सीधे लिया गया है और यह तत्सम शब्द है। यह हिंदी में अपने मूल रूप में ही प्रयुक्त होता है और इसका अर्थ है 'सावन का महीना'।
इस प्रकार, विकल्प 2 'भौंरा' सही उत्तर है क्योंकि यह तद्भव शब्द है, जो संस्कृत के 'भ्रमर' से विकसित होकर हिंदी में आया है। अन्य विकल्प तत्सम शब्द हैं और अपने मूल रूप में ही हिंदी में प्रयुक्त होते हैं।
प्रश्न 133
किस विकल्प के सभी शब्द विदेशज हैं ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विकल्प 4: किस्सा, स्कूल, हमला
विकल्प 4 सही उत्तर है क्योंकि इसमें दिए गए सभी शब्द 'विदेशज' शब्द हैं। विदेशज शब्द वे होते हैं जो हिंदी में अन्य भाषाओं से आए होते हैं और जिनका मूल हिंदी में नहीं होता। आइए इन शब्दों का विश्लेषण करें:
-
किस्सा: यह शब्द अरबी भाषा से आया है। अरबी में 'किस्सा' का अर्थ होता है कहानी या घटना। इसलिए, यह एक विदेशज शब्द है।
-
स्कूल: यह शब्द अंग्रेजी भाषा से लिया गया है। अंग्रेजी में 'स्कूल' का अर्थ होता है विद्यालय या पाठशाला। यह भी एक विदेशज शब्द है।
-
हमला: यह शब्द भी अरबी भाषा से आया है। अरबी में 'हमला' का अर्थ होता है आक्रमण या आघात। इसलिए, यह भी एक विदेशज शब्द है।
अब देखते हैं कि अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
विकल्प 1: लाजवाब, मशीन, पवन
- 'लाजवाब' और 'मशीन' विदेशज शब्द हो सकते हैं, लेकिन 'पवन' एक संस्कृत मूल का शब्द है और यह हिंदी का देशज शब्द है।
विकल्प 2: कारीगर, अतिशयोक्ति, कहानी
- इनमें से 'कारीगर' और 'कहानी' देशज शब्द हैं। 'अतिशयोक्ति' संस्कृत से लिया गया शब्द है, जो हिंदी में प्रचलित है।
विकल्प 3: मुमकिन, अमूमन, पक्षवार
- 'मुमकिन' और 'अमूमन' अरबी-फारसी मूल के शब्द हो सकते हैं, लेकिन 'पक्षवार' एक संस्कृत मूल का शब्द है।
इस प्रकार, विकल्प 4 में दिए गए सभी शब्द विदेशज हैं, जो इसे सही उत्तर बनाता है।
प्रश्न 134
निम्नलिखित में से किस विकल्प में सभी शब्द 'तद्भव' हैं ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विकल्प 2 सही उत्तर है क्योंकि इसमें दिए गए सभी शब्द 'तद्भव' शब्द हैं। तद्भव शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से उत्पन्न होकर प्राकृत और अपभ्रंश के माध्यम से हिंदी में आए हैं और जिनका रूप बदल गया है। आइए अब प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण करते हैं:
-
विकल्प 1: स्वप्न, लक्ष, पहर
- 'स्वप्न' और 'लक्ष' संस्कृत शब्द हैं और सीधे रूप में हिंदी में प्रयुक्त होते हैं। 'पहर' तद्भव शब्द है, लेकिन सभी शब्द तद्भव नहीं हैं।
-
विकल्प 2: कपूर, ग्वाल, हल्दी
- 'कपूर' संस्कृत के 'कर्पूर' से, 'ग्वाल' संस्कृत के 'गोपाल' से, और 'हल्दी' संस्कृत के 'हरिद्रा' से तद्भव रूप में हिंदी में आए हैं। इसलिए, ये सभी शब्द तद्भव हैं।
-
विकल्प 3: मुकुट, शीर्ष, पृष्ठ
- ये सभी शब्द संस्कृत के तत्सम शब्द हैं और सीधे रूप में हिंदी में प्रयुक्त होते हैं। इनमें कोई भी तद्भव शब्द नहीं है।
-
विकल्प 4: संध्या, सींग, सौभाग्य
- 'संध्या' और 'सौभाग्य' संस्कृत के तत्सम शब्द हैं। 'सींग' तद्भव शब्द है, लेकिन सभी शब्द तद्भव नहीं हैं।
इस प्रकार, विकल्प 2 में दिए गए सभी शब्द तद्भव हैं, जो इसे सही उत्तर बनाता है।
प्रश्न 135
निम्नलिखित में से किस विकल्प के सभी शब्द 'तत्सम' हैं ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विकल्प 1: क्षेत्र, मुक्ता, पर्ण
विकल्प 1 सही उत्तर है क्योंकि इसमें दिए गए सभी शब्द 'तत्सम' शब्द हैं। 'तत्सम' शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से सीधे रूप में हिंदी में आए हैं और जिनका रूप लगभग अपरिवर्तित रहता है।
- क्षेत्र: यह शब्द संस्कृत से लिया गया है और इसका अर्थ होता है भूमि या स्थान। यह शब्द हिंदी में भी उसी रूप में प्रयुक्त होता है।
- मुक्ता: यह भी संस्कृत का शब्द है, जिसका अर्थ होता है मोती। हिंदी में भी यह शब्द उसी अर्थ में प्रयुक्त होता है।
- पर्ण: यह संस्कृत का शब्द है जिसका अर्थ होता है पत्ता। हिंदी में भी यह शब्द उसी रूप में प्रयुक्त होता है।
अब अन्य विकल्पों की गलतियों को समझते हैं:
विकल्प 2: पूस, मौलश्री, नैन
- पूस: यह शब्द 'तद्भव' है, जो संस्कृत के 'पौष' से आया है।
- मौलश्री: यह भी 'तद्भव' शब्द है।
- नैन: यह 'तद्भव' शब्द है, जो संस्कृत के 'नयन' से आया है।
विकल्प 3: नीम, नारियल, धतूरा
- नीम: यह 'तद्भव' शब्द है।
- नारियल: यह भी 'तद्भव' शब्द है।
- धतूरा: यह 'तद्भव' शब्द है।
विकल्प 4: गेह, जेठ, छाँह
- गेह: यह 'तद्भव' शब्द है, जो संस्कृत के 'गृह' से आया है।
- जेठ: यह 'तद्भव' शब्द है।
- छाँह: यह 'तद्भव' शब्द है।
इस प्रकार, विकल्प 1 में दिए गए सभी शब्द 'तत्सम' हैं, जबकि अन्य विकल्पों में 'तद्भव' शब्द शामिल हैं। यही कारण है कि विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 136
शब्द-प्रकृति की दृष्टि से असंगत युग्म चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
मुकद्दमा – देशज शब्द युग्म शब्द-प्रकृति की दृष्टि से असंगत है क्योंकि 'मुकद्दमा' शब्द देशज नहीं, बल्कि अरबी भाषा से लिया गया है। देशज शब्द वे होते हैं जो स्थानीय बोलियों से हिंदी में आए हैं, जबकि 'मुकद्दमा' विदेशी मूल का शब्द है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
-
गोस्वामी – तत्सम शब्द: 'गोस्वामी' शब्द संस्कृत से ज्यों का त्यों हिंदी में प्रयुक्त होता है, इसलिए यह तत्सम शब्द है। यह युग्म संगत है।
-
पंख – तद्भव शब्द: 'पंख' शब्द 'पक्ष' (संस्कृत) से विकसित होकर बना है, इसलिए यह तद्भव शब्द है। यह युग्म भी संगत है।
-
तहसीलदार – संकर शब्द: 'तहसीलदार' शब्द दो अलग-अलग भाषाओं के शब्दों से मिलकर बना है - 'तहसील' (अरबी) और 'दार' (फारसी)। इसलिए यह संकर शब्द है। यह युग्म भी संगत है।
अतः, केवल 'मुकद्दमा – देशज शब्द' युग्म ही असंगत है क्योंकि 'मुकद्दमा' देशज नहीं, बल्कि अरबी भाषा का शब्द है।
प्रश्न 137
निम्न में से कौन-सा शब्द तद्भव नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: निम्न में से कौन-सा शब्द तद्भव नहीं है ?
सही उत्तर: विकल्प 3 (पुत्र)
व्याख्या:
-
पुत्र: यह शब्द संस्कृत भाषा से सीधे लिया गया है और इसका मूल रूप भी "पुत्र" ही है। संस्कृत में "पुत्र" का अर्थ होता है बेटा। चूंकि यह शब्द सीधे संस्कृत से लिया गया है और इसमें कोई ध्वनि परिवर्तन नहीं हुआ है, इसलिए यह तद्भव शब्द नहीं है। तद्भव शब्द वे होते हैं जो प्राचीन संस्कृत से विकसित होकर आधुनिक भाषाओं में ध्वनि परिवर्तन के साथ आते हैं। इस प्रकार, "पुत्र" तद्भव नहीं है, बल्कि तत्सम शब्द है।
-
सूरज: यह शब्द संस्कृत के "सूर्य" से विकसित होकर हिंदी में "सूरज" बना है। यह ध्वनि परिवर्तन के साथ आया है, इसलिए यह तद्भव शब्द है।
-
आग: यह शब्द संस्कृत के "अग्नि" से विकसित होकर हिंदी में "आग" बना है। ध्वनि परिवर्तन के कारण यह तद्भव शब्द है।
-
चितेरा: यह शब्द संस्कृत के "चित्रकार" से विकसित होकर हिंदी में "चितेरा" बना है। यह भी ध्वनि परिवर्तन के साथ आया है, इसलिए यह तद्भव शब्द है।
इस प्रकार, "पुत्र" को छोड़कर अन्य सभी विकल्प तद्भव शब्द हैं। इसलिए, सही उत्तर विकल्प 3 (पुत्र) है।
प्रश्न 138
असलियत' शब्द स्रोत की दृष्टि से है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'असलियत' शब्द स्रोत की दृष्टि से 'विदेशज' शब्द है। इसका कारण यह है कि 'असलियत' शब्द अरबी भाषा से हिंदी में आया है। 'विदेशज' शब्द वे होते हैं जो किसी विदेशी भाषा से सीधे हिंदी में आए होते हैं। चूंकि 'असलियत' का मूल स्रोत अरबी भाषा है, इसलिए यह शब्द 'विदेशज' श्रेणी में आता है।
अब अन्य विकल्पों की गलतियों को समझते हैं:
-
तत्सम: तत्सम शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से बिना किसी परिवर्तन के सीधे हिंदी में आए होते हैं। 'असलियत' संस्कृत से नहीं आया है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
-
देशज: देशज शब्द वे होते हैं जो हिंदी या किसी अन्य भारतीय भाषा में उत्पन्न हुए होते हैं और जिनका स्रोत विदेशी नहीं होता। 'असलियत' का स्रोत अरबी है, इसलिए यह देशज नहीं हो सकता।
-
तद्भव: तद्भव शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से हिंदी में आकर परिवर्तित हो गए होते हैं। 'असलियत' का संस्कृत से कोई संबंध नहीं है, इसलिए यह तद्भव नहीं हो सकता।
इस प्रकार, 'असलियत' शब्द का सही स्रोत 'विदेशज' है, जो विकल्प 3 को सही ठहराता है।
प्रश्न 139
महावीर' शब्द निम्न में से क्या है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
महावीर' शब्द के लिए सही विकल्प 'योगरूढ़' है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
-
योगरूढ़: योगरूढ़ शब्द वे होते हैं जो दो या अधिक शब्दों के योग से बनते हैं और उनका अर्थ उनके मूल शब्दों के अर्थ से भिन्न होता है। 'महावीर' शब्द 'महा' (अर्थात् महान) और 'वीर' (अर्थात् साहसी या वीर पुरुष) के योग से बना है। हालांकि, इसका प्रयोग विशेष रूप से भगवान महावीर के लिए होता है, जो जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर हैं। इस प्रकार, यह शब्द अपने मूल अर्थ से भिन्न एक विशेष अर्थ को धारण करता है, जो इसे योगरूढ़ बनाता है।
-
तद्भव: तद्भव शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से प्राकृत या अन्य भाषाओं में रूपांतरित होकर आए हैं। 'महावीर' शब्द संस्कृत का ही है और इसका रूपांतरण नहीं हुआ है, इसलिए यह तद्भव नहीं है।
-
रूढ़: रूढ़ शब्द वे होते हैं जो अपने मूल अर्थ से हटकर एक विशेष अर्थ में प्रचलित हो जाते हैं। हालांकि 'महावीर' का प्रयोग विशेष रूप से भगवान महावीर के लिए होता है, लेकिन यह शब्द योग से बना है और इसलिए इसे योगरूढ़ के अंतर्गत रखा जाता है, न कि रूढ़ के।
-
देशज: देशज शब्द वे होते हैं जो किसी विशेष क्षेत्र या भाषा में उत्पन्न होते हैं और जिनका मूल संस्कृत या अन्य प्राचीन भाषाओं में नहीं होता। 'महावीर' शब्द संस्कृत से लिया गया है, इसलिए यह देशज नहीं है।
इस प्रकार, 'महावीर' शब्द के लिए सही विकल्प 'योगरूढ़' है, क्योंकि यह दो शब्दों के योग से बना है और इसका विशेष अर्थ है।
प्रश्न 140
तत्सम–तद्भव' की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 3 सही क्यों है:
'तत्सम-तद्भव' की दृष्टि से 'पाषाण – पत्थर' असंगत विकल्प है क्योंकि 'पाषाण' तत्सम शब्द है जिसका तद्भव 'पाहन' होता है, 'पत्थर' नहीं। 'पत्थर' शब्द का तत्सम रूप 'प्रस्तर' होता है। इसलिए, 'पाषाण' का तद्भव 'पत्थर' बताना गलत है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
-
लोमशा – लोमड़ी: 'लोमशा' तत्सम शब्द है और 'लोमड़ी' उसका सही तद्भव रूप है। इसलिए यह विकल्प संगत है।
-
रज्जु – रस्सी: 'रज्जु' तत्सम शब्द है और 'रस्सी' उसका सही तद्भव रूप है। इसलिए यह विकल्प संगत है।
-
मस्तक – माथा: 'मस्तक' तत्सम शब्द है और 'माथा' उसका सही तद्भव रूप है। इसलिए यह विकल्प संगत है।
अतः, केवल Option 3 ही असंगत है क्योंकि इसमें तत्सम शब्द 'पाषाण' का गलत तद्भव रूप 'पत्थर' दिया गया है। 'पाषाण' का सही तद्भव 'पाहन' है और 'पत्थर' का तत्सम 'प्रस्तर' है।